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Ajay Tiwari
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नादिर ख़ान and Ajay Tiwari are now friends
Feb 4
Ajay Tiwari commented on Mahendra Kumar's blog post विद्वता के पैमाने /लघुकथा
"आदरणीय महेंद्र जी, सुकरात के प्रख्यात कथन को आधार बना ज्ञान के खोखले आधुनिक मानकों पर अच्छी टिप्पणी की है. हार्दिक बधाई. इसे पढ़ते हुए मीर का एक शेर याद आया : यही जाना कि कुछ न जाना हाए सो भी इक उम्र में हुआ मालूम सादर "
Jan 16
Ajay Tiwari commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post लिप्सा के परित्याग से खिलता आत्म प्रसून
"आदरणीय पंकज जी, अच्छा प्रयोग है. हार्दिक बधाई. मतले के मिसरों में रब्त कुछ कम है. आम तौर पर खुदी(अहं) के ख़त्म होने को चैन और सुकून का कारण माना जाता है चैन और सुकून के उजड़ने का कारण नहीं. सादर "
Jan 16
Ajay Tiwari commented on surender insan's blog post ग़ज़ल "ऐसे भी माहौल बनाया जाता है"
"आदरणीय कालीपद जी, फइलुन(112) का प्रयोग मुतकारिब को छोड़ कर अन्य ज्यादातर बहरों में होता है लेकिन इसका सबसे ज्यादा प्रयोग मुतदारिक में होता है मिसाल के लिए…"
Jan 16
Ajay Tiwari commented on SALIM RAZA REWA's blog post तू अगर बा - वफ़ा नहीं होता - सलीम रज़ा रीवा
"आदरणीय सलीम साहब, आपकी बात ठीक है लेकिन कोशिश यही होनी चाहिए की मिस्ररा भी ठीक हो और शेरियत भी बनी रहे. सादर   "
Jan 16
Ajay Tiwari commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की--ये अजब क़िस्सा रहा है ज़िन्दगी में
"आदरणीय निलेश जी, उम्दा ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई. ' काश दो लब मेरे होंठों को चूमें'  इस मिसरे में 'वो' छूट गया लगता है. . यूं तो सारे शेर खूबसूरत हैं लेकिन एक शेर अलग से चमक रहा है : सोचने के वक़्त तुम को सोचता…"
Jan 16
Ajay Tiwari commented on SALIM RAZA REWA's blog post तू अगर बा - वफ़ा नहीं होता - सलीम रज़ा रीवा
"आदरणीय सलीम साहब, तीसरे शेर को निकाल देने से ग़ज़ल बेहतर हो गयी है. दूसरे शेर में 'तो' कम होने से मेरी मुराद ये थी कि दोनों मिसरों को जोड़ने वाला संयोजक इनमे नहीं है. दोनों मिसरों को अगर सरल वाक्य के रूप में लिखें तो यह बात स्पष्ट हो जायेगी…"
Jan 15
Ajay Tiwari commented on डॉ संगीता गांधी's blog post लघुकथा -गठबंधन की गाँठें
"आदरणीया संगीता जी, कथा के मध्यम से एक सार्थक राजनैतिक व्यंग के लिए हार्दिक बधाई. सादर.  "
Jan 14
Ajay Tiwari commented on SALIM RAZA REWA's blog post तू अगर बा - वफ़ा नहीं होता - सलीम रज़ा रीवा
"आदरणीय सलीम साहब, अच्छे अशआर हुए हैं. हार्दिक बधाई. दूसरे शेर में एक 'तो' कम है. तीसरा शेर कुछ अपूर्ण सा है. मक्ता बहुत अच्छा है. सादर "
Jan 14
Ajay Tiwari commented on Rahila's blog post ***नामर्द*** राहिला (लघुकथा)
"आदरणीया राहिला जी, कथा के लिए एक नया परिदृश्य तलाश कर उसे एक सामजिक व्यंग के सक्षम औजार में बदल देना बहुत अच्छा  लगा. (खूबसूरती ये है कि व्यंग में आक्रोश और करुणा दोनों अन्तर्निहित है )  कथा अगर लम्बी कहानी के फार्म में होती शायद परिवेश की…"
Jan 14
Ajay Tiwari commented on Mahendra Kumar's blog post बे-आवाज़ सिक्के /लघुकथा
"आदरणीय महेंद्र जी, यह कथा बहुत अच्छी तरह से स्वक्षता अभियान के विखंडन का विमर्श प्रस्तुत करती है. हार्दिक बधाई. जमाल जैसे पात्र के मुंह से 'शौच' जैसे शब्द का प्रयोग थोड़ा असंगत लगता है.   सादर "
Jan 14
Ajay Tiwari commented on Manan Kumar singh's blog post विमोचन(लघु कथा)
"आदरणीय मनन जी, कथा के माध्यम से आज के साहित्यिक परिदृश्य पर अच्छी टिप्पणी की है. हार्दिक बधाई "
Jan 14
Ajay Tiwari commented on surender insan's blog post ग़ज़ल "ऐसे भी माहौल बनाया जाता है"
"आदरणीय सुरेन्द्र जी, सादर नमन, फेलुन(22) को 211 और 112 दोनों वजनों पर एक साथ किसी बह्र में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. फेलुन(22) का  211 के वजन पर सिर्फ मुतकारिब में ही इस्तेमाल होता है.(211 वस्तुत: सिर्फ एक गणितीय प्रारूप है वास्तविक तक्ती…"
Jan 14
Ajay Tiwari commented on somesh kumar's blog post कंधों का तनाव(कहानी )
"आदरणीय सोमेश जी, बहुत अच्छी कहानी है.   'इसी बीच पिताजी ऊपर से बड़ी भतीजी को आवाज़ लगाते हैं' जैसा भाषा प्रयोग थोड़ा पुराने तरह का लगता है जिससे बचा जा सकता है. सादर   "
Jan 13
Ajay Tiwari commented on विनय कुमार's blog post मुआफ़ी- लघुकथा
"आदरणीय विनय जी, असाधारण सादगी के साथ आपके गद्य में असाधारण अभिव्यंजना की क्षमता भी है. कथा बहुत स्पर्शी है.हार्दिक बधाई. "
Jan 13
Ajay Tiwari commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल- मिला कुछ नहीं जाँच पड़ताल में।
"आदरणीय राम अवध जी, अच्छे अशआर हुए हैं, हार्दिक बधाई. 'तमाचा पड़ा वक्त का गाल में'    मुहावरे के अनुसार तमाचा गाल 'पर' पड़ता है. सादर    "
Jan 13

Profile Information

Gender
Male
City State
U P
Native Place
Ballia
Profession
IT

Ajay Tiwari's Blog

ग़ज़ल - अक्सर खुद से खुद ही लड़ कर, खुद से खुद ही हारे हम - अजय तिवारी

फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ा

 22      22      22       22     22      22      22      2  

अक्सर खुद से खुद ही लड़ कर, खुद से खुद ही हारे हम

और किसी  से  शिकवा कैसा, अपने हाथ  के मारे हम

 

हम अपनी पर आ जाते तो, दुनिया बदल भी सकते थे

लेकिन थी कोई बात कि जिससे, बन के रहे बेचारे हम

तन्हाई ने कर डाला है,  जिस्म को अब  मिट्टी का ढेर 

साथ तेरे  चाहा था  मिल कर,  छूते  चाँद-सितारे …

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Posted on December 27, 2017 at 2:12pm — 26 Comments

ग़ज़ल - सोचो कुछ उनके बारे में, जिनका दिया जला नहीं

मुफ्तइलुन मुफाइलुन  //  मुफ्तइलुन मुफाइलुन

2112       1212      //   2112      1212

क्या करें और क्यों करें, करके भी फायदा नहीं

दिल में जो दर्द है तो है, लब पे कोई गिला नहीं 

 

उसके कहे से हो गये, लाखों के घर तबाह पर 

उसने कहा कि उसने तो, कुछ भी कभी कहा नहीं

 

सच तो हमेशा राज था, सच था हमेशा सामने

सच तो सभी के पास था, ढूंढे से पर मिला नहीं 

 

दोनों के दोनों चुप थे पर, गहरे में कोई शोर था

दोनों ने ही…

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Posted on October 20, 2017 at 7:47am — 23 Comments

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At 11:16pm on November 1, 2017, Prakash P said…
आदरणीय श्री अजय तिवारी जी सदर प्रणाम..माफ़ कीजियेगा ये मेरा
प्रथम प्रयास था अतः बहुत कमियां हैं मेरे लेखन में ..आपका सुझाव हृदय से स्वीकार करता हूँ .ग़ज़ल की कक्षा अावश्य मार्गदर्शक सिद्ध होगी मेरे लिए, धनयवाद !नहीं उपस्थित होने का कारण बैंक का थकाऊ कार्य है ..उसके लिए क्षमा प्रार्थी हूँ.
 
 
 

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