For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Ajay Tiwari
Share

Ajay Tiwari's Friends

  • Rajesh Jaiswara 'राज जौनपुरी'
  • Prakash P
  • सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'
  • Mahendra Kumar
  • Ravi Shukla
  • Naveen Mani Tripathi
  • Samar kabeer
  • दिनेश कुमार
  • Nilesh Shevgaonkar
  • लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
  • नादिर ख़ान
  • राज़ नवादवी
  • rajesh kumari
  • Ram Awadh VIshwakarma
 

Ajay Tiwari's Page

Latest Activity

सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' and Ajay Tiwari are now friends
Dec 4, 2019
Ajay Tiwari commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (मिट चुके हैं प्यार में कितने ही सूरत देख कर)
"'इश्क़ में भी अब तिजा रत हो रही तस्दीक हैतुम किसी भी महजबीं से करना उलफत देख कर' इस शेर की एक सूरत ये भी हो सकती है : इश्क़ में भी याँ तिजारत है मियाँ तस्दीक तुम अब किसी भी महजबीं से करना उलफत देख कर सादर "
Jul 20, 2019
Ajay Tiwari commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (मिट चुके हैं प्यार में कितने ही सूरत देख कर)
"आदरणीय तस्दीक साहब, खूबसूरत अशआर हुए हैं. हार्दिक बधाई. इश्क़ में भी अब तिजारत हो रही तस्दीक है > इश्क़ में भी अब तिजारत है मियाँ तस्दीक याँ"
Jul 20, 2019
Ajay Tiwari commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : मैं अपने आप को दफ़ना रहा हूँ
"'मुहब्बत रात दिन करनी थी तुमसे तुम्हीं से रात दिन लड़ता रहा हूँ' बहुत खूब! आदरणीय महेंद्र जी, ख़ूबसूरत अशआर हुए हैं. हार्दिक बधाई."
Jul 20, 2019
Ajay Tiwari commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल-किनारा हूँ तेरा तू इक नदी है
"आदरणीय सुरेन्द्र जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई."
Jul 20, 2019
Ajay Tiwari commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल- बलराम धाकड़ (मुहब्बत के सफ़र में सैकड़ों आज़ार आने हैं)
"आदरणीय बलराम जी, आपके शेरों में हमेशा एक अतिरिक्त ऊर्जस्विता होती है, वो इन शेरों में भी नुमायाँ है.  ख़ास तौर से ये शेर बहुत अच्छा लगा : 'बहार आने को है, बारूद की ख़ुश्बू फ़ज़ा में है, यही बाकी है शाख़ों पे भी अब अँगार आने…"
Jul 20, 2019
Ajay Tiwari commented on दिगंबर नासवा's blog post गज़ल - दिगंबर नासवा
"आदरणीय दिगंबर जी, बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई."
Jul 20, 2019
Ajay Tiwari commented on Samar kabeer's blog post एक ग़ज़ल रुबाइ की बह्र में
"आदरणीय समर साहब, खूबसूरत ग़ज़ल हुई है. इस बह्र में मीर की सिर्फ एक ग़ज़ल है और मीर के बाद पुराने लोगों में सिर्फ़ फ़ानी ने इसमें हाथ आजमाए हैं. हार्दिक बधाई."
Jul 20, 2019
Ajay Tiwari commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post बह्र-ए-वाफ़िर मुरब्बा सालिम (ग़ज़ल)
"आदरणीय बासुदेव जी,  'हुई क्यों ख़फ़ा, पता न चला,'  'क्यों' और 'क्या' कभी गिराए नहीं जाते. एक अच्छी कोशिश के लिए हार्दिक बधाई. "
Jul 20, 2019
Ajay Tiwari commented on Gurpreet Singh jammu's blog post दो ग़ज़लें (2122-1212-22)
"आदरणीय गुरप्रीत जी, ख़ूबसूरत अशाआर हुए हैं. हार्दिक बधाई. "
Jul 20, 2019
Ajay Tiwari and Rajesh Jaiswara 'राज जौनपुरी' are now friends
Jul 20, 2019
Ajay Tiwari commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post मुसीबत जुटाती है ग़लतफ़हमी---ग़ज़ल, पंकज मिश्र
"आदरणीय पंकज जी, अरूज़ में सिर्फ़ एक बह्र 'तवील' है जिस में 122 1222 की आवृत्ति होती है. ये अरबी में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली बह्र थी लेकिन वहाँ भी ये मुसम्मन (122 1222 x 2) ही इस्तेमाल होती थी. उर्दू में इसका इस्तेमाल ना के बराबर है.…"
Jul 8, 2019
Ajay Tiwari commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय नवीन जी, ये अरकान किसी जायज़ बह्र में मुमकिन नहीं हैं. आपके अरकान(122 122 121 22 = 122 122 12 122) के सब से क़रीब की बह्र 122 122 122 122 है. एक नए प्रयास के लिए बधाई."
Jul 8, 2019
Ajay Tiwari commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post संकट
"आदरणीय गोपाल जी, महादेवी जी का गीत फ़ाइलातुन (2122) की आवृत्ति पर आधारित है (फ़ाइलातुन x 4). इस छंद (बह्रे रमल) का इस्तेमाल उन्होंने अपने एक और मशहूर गीत 'जाग तुझको दूर जाना' में भी किया है. आपकी कविता भी बहुत हद तक 'फ़ाइलातुन' की…"
Jul 8, 2019
Ajay Tiwari commented on Dr.Prachi Singh's blog post ..ऐसा हो तो फिर क्या होगा (गीत) ~ डॉ. प्राची
"आदरणीया प्राची जी, फूल तितलियाँ जुगनू चाँद सितारे फीके जिनके आगे > जिनके आगे फीके जुगनू फूल-तितलियाँ चाँद-सितारे  जिनकी मुस्काँ पर जीता हूँ जिनकी मुस्काँ पर मरता हूँ > जिन मुस्कानोंं पर जीता हूँ जिन मुस्कानों पर…"
Jul 6, 2019
Ajay Tiwari commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post संकट
"आदरणीय गोपाल जी, आपकी इस कविता के छंद ने 'पंथ होने दो अपरिचित प्राण रहने दो अकेला' की याद दिलाई . 'किन्तु संकट है विकट ढूंढें नही मिलता मुझे  इस ठौर पानी एक चुल्लू साफ़ सिर्फ मरने के लिए' आखिरी पंक्ति छंद से बाहर है. वैसे…"
Jul 6, 2019

Profile Information

Gender
Male
City State
U P
Native Place
Ballia
Profession
IT

Ajay Tiwari's Blog

ग़ज़ल - दुनिया का सबसे बड़ा झूठा, खुद को सच्चा कहता है

नादान से बच्चे भी हँसते हैं, जब वो ऐसा कहता है

दुनिया का सबसे बड़ा झूठा, खुद को सच्चा कहता है

 

मुँह उसका है अपने मुंह से, जो कहता है कहने दो

कहने को तो अब वो खुद को, सबसे अच्छा कहता है

 

चिकने पत्थर, फैली वादी, उजला झरना, सहमे पेड़

लहू से भीगा हर इक पत्ता, अपना किस्सा कहता है

 

सूखे आंसू, पत्थर आँखें, लब हिलते हैं बेआवाज

लेकिन उन पे जो गुजरी है, हर इक चेहरा कहता…

Continue

Posted on October 27, 2018 at 7:00am — 30 Comments

ग़ज़ल - सब में आग थी, लोहा भी था, नेक बहुत थे सारे हम - अजय तिवारी

फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ा

 22      22      22       22     22      22      22      2

सब में आग थी, लोहा भी था, नेक बहुत थे सारे हम

लेकिन  तन्हा-तन्हा लड़ कर,  तन्हा-तन्हा  हारे हम

 

ज़र्रा-ज़र्रा  बिखरे  है  हम,  चारो ओर खलाओं में

लेकिन जिस दिन होंगे इकठ्ठा, बन जायेंगे सितारे हम

 

कितने दिन वो मूँग दलेंगे, कमजोरों की छाती पर

कितने दिन और चुप  बैठेंगे, बनके यूं बेचारे हम 

 

कबतक और ये…

Continue

Posted on March 26, 2018 at 11:49am — 22 Comments

केदारनाथ सिंह के लिए - अजय तिवारी

केदारनाथ सिंह के लिए

वैसे तो आजकल किसी को क्या फर्क पड़ता है -

एक कवि के न होने से !  

लेकिन जैसे ख़त्म हो गया है धरती का सारा नमक 

और अलोने हो गए हैं  

सारे शब्द...

मौलिक/अप्रकाशित

Posted on March 21, 2018 at 4:40pm — 16 Comments

ग़ज़ल - जरा-सा छुआ था हवाओं ने,  कि नदी की देह सिहर गयी - अजय तिवारी

मुतफाइलुन   मुतफाइलुन    मुतफाइलुन   मुतफाइलुन

11212         11212          11212         11212

जरा-सा छुआ था हवाओं ने,  कि नदी की देह सिहर गयी

तभी धूप सुब्ह की गुनगुनी,   उन्हीं सिहरनों पे उतर गयी

 

खिली सरसों फिर से कछार में, भरे रंग फिर से बहार में

घुली खुश्बू फिर से बयार में, कोई टीस फिर से उभर गयी   

 

उसी एक पल में ही जी लिए, उसी एक पल में ही मर गए

वही एक पल मेरी सांस में,  तेरी सांस जब थी ठहर गयी

 

जमी…

Continue

Posted on March 20, 2018 at 12:28pm — 9 Comments

Comment Wall (4 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 8:35am on November 21, 2018, Ahmed Maris said…

Good Day,
How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day
Thanks God bless.
Stella.

At 8:33am on November 21, 2018, Ahmed Maris said…

Good Day,
How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day
Thanks God bless.
Stella.

At 12:21pm on September 5, 2018, Ravi Shukla said…

namaskar 

is computer me hindi font nahi hai is liye kshama 

aapka hardik abhaar mitro me shamil karne ke liye 

9024323219 nambar ha kripya is par bhi sampark karne ka shram karen 

dhanywad 

ravi 

At 11:16pm on November 1, 2017, Prakash P said…
आदरणीय श्री अजय तिवारी जी सदर प्रणाम..माफ़ कीजियेगा ये मेरा
प्रथम प्रयास था अतः बहुत कमियां हैं मेरे लेखन में ..आपका सुझाव हृदय से स्वीकार करता हूँ .ग़ज़ल की कक्षा अावश्य मार्गदर्शक सिद्ध होगी मेरे लिए, धनयवाद !नहीं उपस्थित होने का कारण बैंक का थकाऊ कार्य है ..उसके लिए क्षमा प्रार्थी हूँ.
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अमीरुद्दीन खा़न "अमीर " posted blog posts
32 minutes ago
Jitendraa Jeet updated their profile
1 hour ago
अमीरुद्दीन खा़न "अमीर " commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post तड़प उनकी भी चाहत की इधर जैसी उधर भी क्या ?(७७ )
"जनाब 'तुरन्त ' बीकानेरी साहब आदाब। बहुत ही ख़ूबसूरत मज़्मून और तख़य्युलात बहुत ख़ूबसूरती…"
3 hours ago
Bhupender singh ranawat left a comment for Samar kabeer
"shri maan aapki hosla afjayI k liye aabhar"
3 hours ago
vijay nikore posted a blog post

स्नेह-धारा

स्नेह-धाराकल्पना-मात्र नहीं है यह स्नेह का बंधन ...उस स्वप्निल प्रथम मिलन में, प्रियकुछ इस तरह लिख…See More
5 hours ago
मोहन बेगोवाल posted blog posts
5 hours ago
Bhupender singh ranawat posted a blog post

मेरा सपना

कल नींद में हमने एक सपना देखा।देखा कि ,मेरा देश बदल गया है।।जाति ,धर्म का नहीं है रगड़ाऊंच-नीच का…See More
6 hours ago
अमीरुद्दीन खा़न "अमीर " updated their profile
8 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted blog posts
9 hours ago
Vinita Shukla updated their profile
15 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post बोल उठी सच हैं लकीरें तेरी पेशानी की(७६ )
"आदरणीय Samar kabeer  साहेब , सच में आपकी नज़र बहुत तेज़ है , मैं लाख सर मारता तो भी मेरे…"
16 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
""ओबीओ लाइव तरही मुशाइर:" अंक-117 को सफ़ल बनाने के लिए सभी ग़ज़लकारों का हार्दिक आभार व…"
17 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service