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Ajay Tiwari
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Ajay Tiwari commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post मुसीबत जुटाती है ग़लतफ़हमी---ग़ज़ल, पंकज मिश्र
"आदरणीय पंकज जी, अरूज़ में सिर्फ़ एक बह्र 'तवील' है जिस में 122 1222 की आवृत्ति होती है. ये अरबी में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली बह्र थी लेकिन वहाँ भी ये मुसम्मन (122 1222 x 2) ही इस्तेमाल होती थी. उर्दू में इसका इस्तेमाल ना के बराबर है.…"
Jul 8
Ajay Tiwari commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय नवीन जी, ये अरकान किसी जायज़ बह्र में मुमकिन नहीं हैं. आपके अरकान(122 122 121 22 = 122 122 12 122) के सब से क़रीब की बह्र 122 122 122 122 है. एक नए प्रयास के लिए बधाई."
Jul 8
Ajay Tiwari commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post संकट
"आदरणीय गोपाल जी, महादेवी जी का गीत फ़ाइलातुन (2122) की आवृत्ति पर आधारित है (फ़ाइलातुन x 4). इस छंद (बह्रे रमल) का इस्तेमाल उन्होंने अपने एक और मशहूर गीत 'जाग तुझको दूर जाना' में भी किया है. आपकी कविता भी बहुत हद तक 'फ़ाइलातुन' की…"
Jul 8
Ajay Tiwari commented on Dr.Prachi Singh's blog post ..ऐसा हो तो फिर क्या होगा (गीत) ~ डॉ. प्राची
"आदरणीया प्राची जी, फूल तितलियाँ जुगनू चाँद सितारे फीके जिनके आगे > जिनके आगे फीके जुगनू फूल-तितलियाँ चाँद-सितारे  जिनकी मुस्काँ पर जीता हूँ जिनकी मुस्काँ पर मरता हूँ > जिन मुस्कानोंं पर जीता हूँ जिन मुस्कानों पर…"
Jul 6
Ajay Tiwari commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post संकट
"आदरणीय गोपाल जी, आपकी इस कविता के छंद ने 'पंथ होने दो अपरिचित प्राण रहने दो अकेला' की याद दिलाई . 'किन्तु संकट है विकट ढूंढें नही मिलता मुझे  इस ठौर पानी एक चुल्लू साफ़ सिर्फ मरने के लिए' आखिरी पंक्ति छंद से बाहर है. वैसे…"
Jul 6
Ajay Tiwari commented on vijay nikore's blog post आज फिर ...
"आदरणीय विजय जी, एक और अच्छी कविता के लिए हार्दिक बधाई."
Jul 6
Ajay Tiwari commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post ज़ीस्त
"आदरणीय प्रदीप जी, सम्भाँल ही लूँगा मरासिम सारे > सही शब्द 'सँभाल'(121) है. मिसरा फिर से देखिएगा.    हवा है गुम मगर उम्मीद तो रख > बह्र में नहीं है.  'है हवा गुम मगर उमीद तो रख' किया जा सकता है. अच्छे शेर…"
Jul 6
Ajay Tiwari commented on Sushil Sarna's blog post वज़ह.....
"आदरणीय सुशील जी, इस सहज सुन्दर कविता के लिए हार्दिक बधाई. 'शय' को 'शै' लिखना मेरे ख़याल से बेहतर होगा. सादर"
Jul 6
Ajay Tiwari commented on Dr.Prachi Singh's blog post ..ऐसा हो तो फिर क्या होगा (गीत) ~ डॉ. प्राची
"आदरणीया प्राची जी, फूल तितलियाँ जुगनू चाँद सितारे फीके जिनके आगे > जिनके आगे फीके जुगनू फूल-तितलियाँ चाँद-सितारे  जिनकी मुस्काँ पर जीता हूँ जिनकी मुस्काँ पर मरता हूँ > जिन मुस्कानोंं जीता हूँ जिन मुस्कानों पर…"
Jul 6
Ajay Tiwari commented on Dayaram Methani's blog post गज़ल सीख लो
"आदरणीय दयाराम जी, अच्छे शेर हुए हैं. हार्दिक बधाई. लेकिन कुछ शेरों को अभी और वक्त देने की ज़रुरत है. मसलन ये शेर :    आंख से आंसू बहाना छोड़िये > शुतुर गुर्बा है. 'छोड़िये' की जगह 'छोड़ कर' रखा जा सकता है. …"
Jul 6
Ajay Tiwari commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- लगती हैं बेरंग सारी तितलियाँ तेरे बिना
"आदरणीय निलेश जी, शेर सारे बहुत खूब हैं. आख़िरी शेर ख़ास तौर पर अच्छा लगा. हार्दिक बधाई."
Jul 6
Ajay Tiwari commented on Samar kabeer's blog post एक मुश्किल बह्र,"बह्र-ए-वाफ़िर मुरब्बा सालिम" में एक ग़ज़ल
"आदरणीय समर साहब, वाफ़िर अरबी में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने  वाली बह्रों में से एक है लेकिन उर्दू के मिज़ाज के अनुरूप न होने की वजह से उर्दू के क्लासिकल दौर के किसी शायर ने इसका इस्तेमाल नहीं किया.इस अड़ियल घोड़े जैसी बह्र को अच्छी तरह साधने के लिए…"
Jul 6
Ajay Tiwari commented on Samar kabeer's blog post एक मुश्किल बह्र,"बह्र-ए-वाफ़िर मुरब्बा सालिम" में एक ग़ज़ल
"आदरणीय समर साहब , वाफ़िर अरबी में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने  वाली बह्रों में से एक है लेकिन उर्दू के मिज़ाज के अनुरूप न होने की वजह से उर्दू के क्लासिकल दौर के किसी शायर ने इसका इस्तेमाल नहीं किया.इस अड़ियल घोड़े जैसी बह्र को अच्छी तरह साधने के लिए…"
Jul 6
Ajay Tiwari commented on Samar kabeer's blog post एक मुश्किल बह्र,"बह्र-ए-वाफ़िर मुरब्बा सालिम" में एक ग़ज़ल
"आदरणीय समर साहब , वाफ़िर अरबी में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने बह्रों में से एक है लेकिन उर्दू के मिज़ाज के अनुरूप न होने की वजह से उर्दू के क्लासिकल दौर के किसी शायर ने इसका इस्तेमाल नहीं किया. इस अड़ियल घोड़े जैसी बह्र(वाफ़िर)को अच्छी तरह साधने के लिए…"
Jul 5
Ajay Tiwari commented on rajesh kumari's blog post एक रदीफ़ पर दो ग़ज़लें "छत पर " (गज़ल राज )
"आदरणीय राजेश जी, दोनों ग़ज़लें अच्छी हैं. हार्दिक बधाई."
Jan 24
Ajay Tiwari commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास
"आदरणीय मनोज जी, अच्छे शेर हुए हैं. हार्दिक बधाई."
Jan 24

Profile Information

Gender
Male
City State
U P
Native Place
Ballia
Profession
IT

Ajay Tiwari's Blog

ग़ज़ल - दुनिया का सबसे बड़ा झूठा, खुद को सच्चा कहता है

नादान से बच्चे भी हँसते हैं, जब वो ऐसा कहता है

दुनिया का सबसे बड़ा झूठा, खुद को सच्चा कहता है

 

मुँह उसका है अपने मुंह से, जो कहता है कहने दो

कहने को तो अब वो खुद को, सबसे अच्छा कहता है

 

चिकने पत्थर, फैली वादी, उजला झरना, सहमे पेड़

लहू से भीगा हर इक पत्ता, अपना किस्सा कहता है

 

सूखे आंसू, पत्थर आँखें, लब हिलते हैं बेआवाज

लेकिन उन पे जो गुजरी है, हर इक चेहरा कहता…

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Posted on October 27, 2018 at 7:00am — 30 Comments

ग़ज़ल - सब में आग थी, लोहा भी था, नेक बहुत थे सारे हम - अजय तिवारी

फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ा

 22      22      22       22     22      22      22      2

सब में आग थी, लोहा भी था, नेक बहुत थे सारे हम

लेकिन  तन्हा-तन्हा लड़ कर,  तन्हा-तन्हा  हारे हम

 

ज़र्रा-ज़र्रा  बिखरे  है  हम,  चारो ओर खलाओं में

लेकिन जिस दिन होंगे इकठ्ठा, बन जायेंगे सितारे हम

 

कितने दिन वो मूँग दलेंगे, कमजोरों की छाती पर

कितने दिन और चुप  बैठेंगे, बनके यूं बेचारे हम 

 

कबतक और ये…

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Posted on March 26, 2018 at 11:49am — 22 Comments

केदारनाथ सिंह के लिए - अजय तिवारी

केदारनाथ सिंह के लिए

वैसे तो आजकल किसी को क्या फर्क पड़ता है -

एक कवि के न होने से !  

लेकिन जैसे ख़त्म हो गया है धरती का सारा नमक 

और अलोने हो गए हैं  

सारे शब्द...

मौलिक/अप्रकाशित

Posted on March 21, 2018 at 4:40pm — 16 Comments

ग़ज़ल - जरा-सा छुआ था हवाओं ने,  कि नदी की देह सिहर गयी - अजय तिवारी

मुतफाइलुन   मुतफाइलुन    मुतफाइलुन   मुतफाइलुन

11212         11212          11212         11212

जरा-सा छुआ था हवाओं ने,  कि नदी की देह सिहर गयी

तभी धूप सुब्ह की गुनगुनी,   उन्हीं सिहरनों पे उतर गयी

 

खिली सरसों फिर से कछार में, भरे रंग फिर से बहार में

घुली खुश्बू फिर से बयार में, कोई टीस फिर से उभर गयी   

 

उसी एक पल में ही जी लिए, उसी एक पल में ही मर गए

वही एक पल मेरी सांस में,  तेरी सांस जब थी ठहर गयी

 

जमी…

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Posted on March 20, 2018 at 12:28pm — 9 Comments

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At 8:35am on November 21, 2018, Ahmed Maris said…

Good Day,
How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day
Thanks God bless.
Stella.

At 8:33am on November 21, 2018, Ahmed Maris said…

Good Day,
How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day
Thanks God bless.
Stella.

At 12:21pm on September 5, 2018, Ravi Shukla said…

namaskar 

is computer me hindi font nahi hai is liye kshama 

aapka hardik abhaar mitro me shamil karne ke liye 

9024323219 nambar ha kripya is par bhi sampark karne ka shram karen 

dhanywad 

ravi 

At 11:16pm on November 1, 2017, Prakash P said…
आदरणीय श्री अजय तिवारी जी सदर प्रणाम..माफ़ कीजियेगा ये मेरा
प्रथम प्रयास था अतः बहुत कमियां हैं मेरे लेखन में ..आपका सुझाव हृदय से स्वीकार करता हूँ .ग़ज़ल की कक्षा अावश्य मार्गदर्शक सिद्ध होगी मेरे लिए, धनयवाद !नहीं उपस्थित होने का कारण बैंक का थकाऊ कार्य है ..उसके लिए क्षमा प्रार्थी हूँ.
 
 
 

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