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Ajay Tiwari
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Ajay Tiwari commented on rajesh kumari's blog post एक रदीफ़ पर दो ग़ज़लें "छत पर " (गज़ल राज )
"आदरणीय राजेश जी, दोनों ग़ज़लें अच्छी हैं. हार्दिक बधाई."
Jan 24
Ajay Tiwari commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास
"आदरणीय मनोज जी, अच्छे शेर हुए हैं. हार्दिक बधाई."
Jan 24
Ajay Tiwari commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल
"आदरणीय कमर साहब, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई."
Jan 24
Ajay Tiwari commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post मेरे घर अब उजाला बन के मुझमे कौन रहता है
"आदरणीय आमोद जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई."
Jan 24
Ajay Tiwari commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post खुशी बाँटो कि बँटकर  भी  - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई. "
Jan 23
Ajay Tiwari commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : अशआर मेरे जिनको सुनाने के लिए हैं
"आदरणीय महेंद्र जी, जाँ निसार अख़्तर की ज़मीन में ख़ूबसूरत अशआर हुए हैं. हार्दिक बधाई. "
Jan 17
Ajay Tiwari commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल-बलराम धाकड़ (किसने सूरज यहाँ खंगाले हैं)
"आदरणीय बलराम जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई."
Jan 17
Ajay Tiwari commented on Samar kabeer's blog post 'वतन को आग लगाने की चाल किसकी है'
"आदरणीय समर साहब, आपकी इस ग़ज़ल से दो चीजें सीखी जा सकती हैं : 1. बिना 132 शेर कहे भी किस तरह बेहतरीन ग़ज़ल कही जा सकती है. 2. उम्दा ग़ज़ल कहने के लिए ये ज़रूरी नहीं कि मिसरे में हर शब्द ऐसा हो कि पाठक को dictionary की शरण में जाना पड़े. तू बेवफ़ा हमें कहता…"
Jan 17
Ajay Tiwari replied to Ajay Tiwari's discussion उर्दू शायरी में इस्तेमाल की गईं बह्रें और उनके उदहारण - I in the group ग़ज़ल की कक्षा
"आदरणीय समर साहब, आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया से मेरा श्रम-सार्थक हुआ. हार्दिक आभार.  "
Jan 15
Ajay Tiwari commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : कैसे बनता है कोई शख़्स तमाशा देखो
"आदरणीय महेंद्र जी, अच्छी ग़ज़ल हुई  है. मतला खास तौर से अच्छा लगा. हार्दिक बधाई."
Jan 15
Ajay Tiwari commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ९१
"आदरणीय राज़ साहब, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई."
Jan 15
Ajay Tiwari commented on Gajendra shrotriya's blog post मेरी दस्तार ख़ानदानी है- ग़ज़ल
"आदरणीय गजेन्द्र जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई."
Jan 15
Ajay Tiwari commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ग़ज़ल: न हसरतों से ज़ियादा रखें लगाव कभी ...(१२ )
"आदरणीय गिरधारी जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है.हार्दिक बधाई."
Jan 15
Ajay Tiwari replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आदरणीय समर साहब, हार्दिक आभार. "
Jan 15
Samar kabeer replied to Ajay Tiwari's discussion उर्दू शायरी में इस्तेमाल की गईं बह्रें और उनके उदहारण - I in the group ग़ज़ल की कक्षा
"जनाब अजय तिवारी साहिब आदाब,बहुत उम्दा और शानदार आलेख,यक़ीनन नए सीखने वालों के लिए इसमें तमाम बहूर की जानकारी के साथ साथ उम्दा अशआर का इंतिख़ाब सोने पर सुहागा का काम कर रहा है,आपके क़लम से निकलने वाले आलेख नई नस्ल के लिए बहतरीन तुहफ़ा हैं,मेरी तरफ़ से…"
Jan 2
Ajay Tiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आदरणीय विवेक जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई "
Nov 24, 2018

Profile Information

Gender
Male
City State
U P
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Ballia
Profession
IT

Ajay Tiwari's Blog

ग़ज़ल - दुनिया का सबसे बड़ा झूठा, खुद को सच्चा कहता है

नादान से बच्चे भी हँसते हैं, जब वो ऐसा कहता है

दुनिया का सबसे बड़ा झूठा, खुद को सच्चा कहता है

 

मुँह उसका है अपने मुंह से, जो कहता है कहने दो

कहने को तो अब वो खुद को, सबसे अच्छा कहता है

 

चिकने पत्थर, फैली वादी, उजला झरना, सहमे पेड़

लहू से भीगा हर इक पत्ता, अपना किस्सा कहता है

 

सूखे आंसू, पत्थर आँखें, लब हिलते हैं बेआवाज

लेकिन उन पे जो गुजरी है, हर इक चेहरा कहता…

Continue

Posted on October 27, 2018 at 7:00am — 30 Comments

ग़ज़ल - सब में आग थी, लोहा भी था, नेक बहुत थे सारे हम - अजय तिवारी

फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ा

 22      22      22       22     22      22      22      2

सब में आग थी, लोहा भी था, नेक बहुत थे सारे हम

लेकिन  तन्हा-तन्हा लड़ कर,  तन्हा-तन्हा  हारे हम

 

ज़र्रा-ज़र्रा  बिखरे  है  हम,  चारो ओर खलाओं में

लेकिन जिस दिन होंगे इकठ्ठा, बन जायेंगे सितारे हम

 

कितने दिन वो मूँग दलेंगे, कमजोरों की छाती पर

कितने दिन और चुप  बैठेंगे, बनके यूं बेचारे हम 

 

कबतक और ये…

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Posted on March 26, 2018 at 11:49am — 22 Comments

केदारनाथ सिंह के लिए - अजय तिवारी

केदारनाथ सिंह के लिए

वैसे तो आजकल किसी को क्या फर्क पड़ता है -

एक कवि के न होने से !  

लेकिन जैसे ख़त्म हो गया है धरती का सारा नमक 

और अलोने हो गए हैं  

सारे शब्द...

मौलिक/अप्रकाशित

Posted on March 21, 2018 at 4:40pm — 16 Comments

ग़ज़ल - जरा-सा छुआ था हवाओं ने,  कि नदी की देह सिहर गयी - अजय तिवारी

मुतफाइलुन   मुतफाइलुन    मुतफाइलुन   मुतफाइलुन

11212         11212          11212         11212

जरा-सा छुआ था हवाओं ने,  कि नदी की देह सिहर गयी

तभी धूप सुब्ह की गुनगुनी,   उन्हीं सिहरनों पे उतर गयी

 

खिली सरसों फिर से कछार में, भरे रंग फिर से बहार में

घुली खुश्बू फिर से बयार में, कोई टीस फिर से उभर गयी   

 

उसी एक पल में ही जी लिए, उसी एक पल में ही मर गए

वही एक पल मेरी सांस में,  तेरी सांस जब थी ठहर गयी

 

जमी…

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Posted on March 20, 2018 at 12:28pm — 9 Comments

Comment Wall (4 comments)

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At 8:35am on November 21, 2018, Ahmed Maris said…

Good Day,
How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day
Thanks God bless.
Stella.

At 8:33am on November 21, 2018, Ahmed Maris said…

Good Day,
How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day
Thanks God bless.
Stella.

At 12:21pm on September 5, 2018, Ravi Shukla said…

namaskar 

is computer me hindi font nahi hai is liye kshama 

aapka hardik abhaar mitro me shamil karne ke liye 

9024323219 nambar ha kripya is par bhi sampark karne ka shram karen 

dhanywad 

ravi 

At 11:16pm on November 1, 2017, Prakash P said…
आदरणीय श्री अजय तिवारी जी सदर प्रणाम..माफ़ कीजियेगा ये मेरा
प्रथम प्रयास था अतः बहुत कमियां हैं मेरे लेखन में ..आपका सुझाव हृदय से स्वीकार करता हूँ .ग़ज़ल की कक्षा अावश्य मार्गदर्शक सिद्ध होगी मेरे लिए, धनयवाद !नहीं उपस्थित होने का कारण बैंक का थकाऊ कार्य है ..उसके लिए क्षमा प्रार्थी हूँ.
 
 
 

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"बहुत खूब आद० नवीन मणि जी अच्छी ग़ज़ल कही है बहुत बहुत मुबारकबाद कुबूलें "
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rajesh kumari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"अच्छी ग़ज़ल कही है मुनीश तनहा जी दिल से दाद प्रेषित है "
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rajesh kumari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"मोहतरम तस्दीक साहब आपका बहुत बहुत शुक्रिया नवाज़िश "
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rajesh kumari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"जनाब अनीस शेख़ जी बहुत बहुत शुक्रिया नवाज़िश "
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rajesh kumari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"आद० मुनीश तनहा जी आपका बहुत बहुत शुक्रिया नवाज़िश "
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