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दिगंबर नासवा
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दिगंबर नासवा posted a blog post

गज़ल - दिगंबर नासवा -3

१२२२ १२२२ १२२२ १२२ तेरी हर शै मुझे भाए, तो क्या वो इश्क़ होगामुझे तू देख शरमाए, तो क्या वो इश्क़ होगा कभी हो इश्क़ तो रुन-झुन कहीं महसूस होगीइशारे कर के समझाए तो क्या वो इश्क़ होगा  पिए ना जो कभी झूठा, मगर मिलने पे अकसरगटक जाए मेरी चाए, तो क्या वो इश्क़ होगा सभी से हँस के बोले, पीठ पीछे मुंह चिढ़ाएमेरे नज़दीक इतराए, तो क्या वो इश्क़ होगा हज़ारों बार हाए, बाय, उनको बोलने पर   पलट के बोल दे हाए, तो क्या वो इश्क़ होगा सभी रिश्ते, बहू, बेटी, बहन, माँ, के निभा करमेरे पहलू में इठलाए, तो क्या वो इश्क़ होगा तुझे…See More
6 hours ago
दिगंबर नासवा commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post क्यूँ हर्फ़ अता करते हो, ख़ैरात की तरह-----ग़ज़ल
"बहुत ही खूबसूरत शेर हैं सभी ... दिली दाद मेरी ..."
Tuesday
दिगंबर नासवा commented on दिगंबर नासवा's blog post गज़ल - दिगंबर नासवा -२
"बहुत शुक्रिया शिज्जु जी ..."
Tuesday

सदस्य कार्यकारिणी
शिज्जु "शकूर" commented on दिगंबर नासवा's blog post गज़ल - दिगंबर नासवा -२
"आ. दिगंबर नासवा जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है, सादर बधाई आपको"
Tuesday
Balram Dhakar commented on दिगंबर नासवा's blog post गज़ल - दिगंबर नासवा
"आदरणीय दिगम्बर जी, बहुत ख़ूबसूरत अशआर हुए हैं। शेर दर शेर दाद के साथ मुबारक़बाद क़ुबूल फ़रमाएं। सादर।"
Monday
दिगंबर नासवा commented on दिगंबर नासवा's blog post गज़ल - दिगंबर नासवा -२
"शुक्रिया सुरखाब साहब ..."
Feb 11
Surkhab Bashar commented on दिगंबर नासवा's blog post गज़ल - दिगंबर नासवा -२
"आ़ दिगंबर नासवा साहब उम्दा ग़ज़ल हुई है मुबारक बाद"
Feb 9
दिगंबर नासवा commented on दिगंबर नासवा's blog post गज़ल - दिगंबर नासवा -२
"बहुत आभार लक्ष्मण जी ...  अच्छा है सुझाव आपका ... दरअसल मैं चाँद के चौदह और पंद्रह दिन का चक्र पूरा करना चाहता था इसलिए स्पष्ट कर के लिखा ... बहुत बहुत आभार सराहना के लिए ..."
Feb 9
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on दिगंबर नासवा's blog post गज़ल - दिगंबर नासवा -२
"आ. भाई दिगम्बर जी, सादर अभिवादन । सुंदर गजल हुयी है । हार्दिक बधाई । दो हफ्ते को - पखवाड़े' करने से भी दोष निकल जायेगा । सादर..."
Feb 9
दिगंबर नासवा posted blog posts
Feb 8
दिगंबर नासवा commented on दिगंबर नासवा's blog post गज़ल - दिगंबर नासवा -२
"बहुत शुक्रिया आदरणीय समर कबीर जी ...  ये दोष हर बार मेरी नज़र में नहीं आ पाता  ... आपके सुझाव बहुत उत्तम हैं ... आपका आभार है ग़ज़ल है को सुगम बनाने के लिए ..."
Feb 8
Samar kabeer commented on दिगंबर नासवा's blog post गज़ल - दिगंबर नासवा -२
"जनाब दिगंबर नासवा जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है,मुबारकबाद पेश करता हूँ । 'चाँद दो हफ्ते निरंतर, हाज़री देता रहा' इस मिसरे में ऐब-ए-तनाफ़ुर देखें,"चाँद" की जगह "माह" कर सकते हैं,और नहीं करें तो भी कोई बात नहीं,एक सुझाव मात्र…"
Feb 8
दिगंबर नासवा commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल-किनारा हूँ तेरा तू इक नदी है
"खूबसूरत सादा ग़ज़ल ... दिल को छूते हुए अलफ़ाज़ ... मेरी दाद कबूल कें ..."
Feb 8
दिगंबर नासवा commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post पुरखे हमारे  एक  हैं  मजहब  से तोल मत - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' ( गजल )
"लाजवाब सोच को शब्दों में बाँधने का प्रयास है आपकी गज़ल लक्षमण जी ...  मौलिक सोच ... शिल्प पे आदरणीय समर कबीर जी की बातें सभी मिल के सीख रहे हैं ... "
Feb 8
दिगंबर नासवा commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post रोशनी के सामने ये तीरगी क्या चीज़ है ( २३ )
"बहुत खूब ... अच्छे खनकदार शेर हैं कुछ तो ... वाह वाह निकल ही जाती है ...  बहुत बधाई ...."
Feb 8
दिगंबर नासवा's blog post was featured

गज़ल - दिगंबर नासवा

मखमली से फूल नाज़ुक पत्तियों को रख दियाशाम होते ही दरीचे पर दियों को रख दिया लौट के आया तो टूटी चूड़ियों को रख दियावक़्त ने कुछ अनकही मजबूरियों को रख दिया आंसुओं से तर-बतर तकिये रहे चुप देर तक  सलवटों ने चीखती खामोशियों को रख दिया छोड़ना था गाँव जब रोज़ी कमाने के लिएमाँ ने बचपन में सुनाई लोरियों को रख दिया  भीड़ में लोगों की दिन भर हँस के बतियाती रही रास्ते पर कब न जाने सिसकियों को रख दिया इश्क के पैगाम के बदले तो कुछ भेजा नहींपर मेरी खिड़की पे उसने तितलियों को रख दिया नाम जब आया मेरा तो फेर लीं नज़रें…See More
Feb 6

Profile Information

Gender
Male
City State
Dubai
Native Place
Faridabad
Profession
CA

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गज़ल - दिगंबर नासवा -3

१२२२ १२२२ १२२२ १२२ 

तेरी हर शै मुझे भाए, तो क्या वो इश्क़ होगा

मुझे तू देख शरमाए, तो क्या वो इश्क़ होगा

 

कभी हो इश्क़ तो रुन-झुन कहीं महसूस होगी

इशारे कर के समझाए तो क्या वो इश्क़ होगा 

 

पिए ना जो कभी झूठा, मगर मिलने पे अकसर

गटक जाए मेरी चाए, तो क्या वो इश्क़ होगा

 

सभी से हँस के बोले, पीठ पीछे मुंह चिढ़ाए

मेरे नज़दीक इतराए, तो क्या वो इश्क़ होगा

 

हज़ारों बार हाए, बाय, उनको बोलने पर   

पलट के बोल दे…

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Posted on February 17, 2019 at 2:28pm

गज़ल - दिगंबर नासवा -२

इस नज़र से उस नज़र की बात लम्बी हो गई

मेज़ पे रक्खी हुई ये चाय ठंडी हो गई

 

आसमानी शाल ने जब उड़ के सूरज को ढका

गर्मियों की दो-पहर भी कुछ उनींदी हो गई

 

कुछ अधूरे लफ्ज़ टूटे और भटके राह में     

अधलिखे ख़त की कहानी और गहरी हो गई

 

रात के तूफ़ान से हम डर गए थे इस कदर

दिन सलीके से उगा दिल को तसल्ली हो गई

 

माह दो हफ्ते निरंतर, हाज़री देता रहा

पन्द्रहवें दिन आसमाँ से यूँ ही कुट्टी हो…

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Posted on February 8, 2019 at 1:30pm — 8 Comments

गज़ल - दिगंबर नासवा

मखमली से फूल नाज़ुक पत्तियों को रख दिया

शाम होते ही दरीचे पर दियों को रख दिया

 

लौट के आया तो टूटी चूड़ियों को रख दिया

वक़्त ने कुछ अनकही मजबूरियों को रख दिया

 

आंसुओं से तर-बतर तकिये रहे चुप देर तक  

सलवटों ने चीखती खामोशियों को रख दिया

 

छोड़ना था गाँव जब रोज़ी कमाने के लिए

माँ ने बचपन में सुनाई लोरियों को रख दिया 

 

भीड़ में लोगों की दिन भर हँस के बतियाती रही 

रास्ते पर कब न जाने सिसकियों को रख…

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Posted on January 23, 2019 at 9:30am — 12 Comments

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At 9:49am on January 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय दिगंबर नासवा साहब
बहुत बहुत शुक्रिया
At 9:21am on April 20, 2011, nemichandpuniyachandan said…
Happy Birthday to you.
At 10:03pm on November 29, 2010,
सदस्य टीम प्रबंधन
Rana Pratap Singh
said…

At 5:57pm on November 25, 2010,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 2:23pm on November 24, 2010, Ratnesh Raman Pathak said…

At 8:44pm on November 23, 2010,
सदस्य टीम प्रबंधन
Rana Pratap Singh
said…

At 5:53pm on November 23, 2010, Admin said…

At 5:08pm on November 23, 2010, PREETAM TIWARY(PREET) said…

 
 
 

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