For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Ajay Tiwari
Share

Ajay Tiwari's Friends

  • Prakash P
  • Mahendra Kumar
  • Ravi Shukla
  • Naveen Mani Tripathi
  • Samar kabeer
  • दिनेश कुमार
  • Nilesh Shevgaonkar
  • लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
  • नादिर ख़ान
  • राज़ नवादवी
  • rajesh kumari
  • Ram Awadh VIshwakarma
 

Ajay Tiwari's Page

Latest Activity

Ajay Tiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आदरणीय विवेक जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई "
Nov 24
Ajay Tiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आदरणीय अजय जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई. "
Nov 24
Ajay Tiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आदरणीय मुनव्वर अली साहब, ख़ूबसूरत ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई. "
Nov 24
Ajay Tiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"मेरे ख्याल से आपका संकेत इस आलेख की तरफ़ है : http://www.openbooksonline.com/group/gazal_ki_bateyn/forum/topics/5170231:Topic:205456 इसे पढ़ने से भी यही पता चलता है कि फ़ारूक़ी साहब राय बिलकुल ठीक है. "
Nov 24
Ajay Tiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आदरणीय श्लेष जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई."
Nov 24
Ajay Tiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आदरणीय सुरेन्द्र जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई."
Nov 24
Ajay Tiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आदरणीय अशफ़ाक साहब, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई."
Nov 24
Ajay Tiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आदरणीय जितेन्द्र जी, इस सदप्रयास के लिए हार्दिक बधाई. "
Nov 24
Ajay Tiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आदरणीय मोहन जी, बहुत अच्छी कोशिश है. हार्दिक बधाई."
Nov 24
Ajay Tiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आदरणीया अंजलि जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई. "
Nov 24
Ajay Tiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"ऊपर मैंने हसरत के तनाफ़ुर के ख्याल के बारे में शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी साहब की राय लिखी है वो बहुत हद तक सही है. सिर्फ़ 'क़' और 'क' का ही मामला नहीं है. तनाफ़ुर का पूरा ख़याल ही एक गड़बड़झाला है.  "
Nov 24
Ajay Tiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आदरणीय लक्ष्मण जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई "
Nov 24
Ajay Tiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"तानाफ़ुर के नज़रिए से हसरत मोहानी ने 'क़' और 'क' को एक ही तरह की ध्वनियाँ माना है. इस लिहाज़ से 'इश्क़ को' में स्पष्ट रूप से तनाफ़ुर है. ये स्पष्ट कर दूं कि ये हसरत मोहानी का नज़रिया है मेरा अपना नहीं. "
Nov 24
Ajay Tiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आदरणीय पंकज जी, ख़ूबसूरत ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई."
Nov 24
Ajay Tiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आदरणीय रवि जी, ख़ूबसूरत ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई."
Nov 24
Ajay Tiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आदरणीय गजेन्द्र जी, उम्दा ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई."
Nov 24

Profile Information

Gender
Male
City State
U P
Native Place
Ballia
Profession
IT

Ajay Tiwari's Blog

ग़ज़ल - दुनिया का सबसे बड़ा झूठा, खुद को सच्चा कहता है

नादान से बच्चे भी हँसते हैं, जब वो ऐसा कहता है

दुनिया का सबसे बड़ा झूठा, खुद को सच्चा कहता है

 

मुँह उसका है अपने मुंह से, जो कहता है कहने दो

कहने को तो अब वो खुद को, सबसे अच्छा कहता है

 

चिकने पत्थर, फैली वादी, उजला झरना, सहमे पेड़

लहू से भीगा हर इक पत्ता, अपना किस्सा कहता है

 

सूखे आंसू, पत्थर आँखें, लब हिलते हैं बेआवाज

लेकिन उन पे जो गुजरी है, हर इक चेहरा कहता…

Continue

Posted on October 27, 2018 at 7:00am — 30 Comments

ग़ज़ल - सब में आग थी, लोहा भी था, नेक बहुत थे सारे हम - अजय तिवारी

फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ा

 22      22      22       22     22      22      22      2

सब में आग थी, लोहा भी था, नेक बहुत थे सारे हम

लेकिन  तन्हा-तन्हा लड़ कर,  तन्हा-तन्हा  हारे हम

 

ज़र्रा-ज़र्रा  बिखरे  है  हम,  चारो ओर खलाओं में

लेकिन जिस दिन होंगे इकठ्ठा, बन जायेंगे सितारे हम

 

कितने दिन वो मूँग दलेंगे, कमजोरों की छाती पर

कितने दिन और चुप  बैठेंगे, बनके यूं बेचारे हम 

 

कबतक और ये…

Continue

Posted on March 26, 2018 at 11:49am — 22 Comments

केदारनाथ सिंह के लिए - अजय तिवारी

केदारनाथ सिंह के लिए

वैसे तो आजकल किसी को क्या फर्क पड़ता है -

एक कवि के न होने से !  

लेकिन जैसे ख़त्म हो गया है धरती का सारा नमक 

और अलोने हो गए हैं  

सारे शब्द...

मौलिक/अप्रकाशित

Posted on March 21, 2018 at 4:40pm — 16 Comments

ग़ज़ल - जरा-सा छुआ था हवाओं ने,  कि नदी की देह सिहर गयी - अजय तिवारी

मुतफाइलुन   मुतफाइलुन    मुतफाइलुन   मुतफाइलुन

11212         11212          11212         11212

जरा-सा छुआ था हवाओं ने,  कि नदी की देह सिहर गयी

तभी धूप सुब्ह की गुनगुनी,   उन्हीं सिहरनों पे उतर गयी

 

खिली सरसों फिर से कछार में, भरे रंग फिर से बहार में

घुली खुश्बू फिर से बयार में, कोई टीस फिर से उभर गयी   

 

उसी एक पल में ही जी लिए, उसी एक पल में ही मर गए

वही एक पल मेरी सांस में,  तेरी सांस जब थी ठहर गयी

 

जमी…

Continue

Posted on March 20, 2018 at 12:28pm — 9 Comments

Comment Wall (4 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 8:35am on November 21, 2018, Ahmed Maris said…

Good Day,
How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day
Thanks God bless.
Stella.

At 8:33am on November 21, 2018, Ahmed Maris said…

Good Day,
How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day
Thanks God bless.
Stella.

At 12:21pm on September 5, 2018, Ravi Shukla said…

namaskar 

is computer me hindi font nahi hai is liye kshama 

aapka hardik abhaar mitro me shamil karne ke liye 

9024323219 nambar ha kripya is par bhi sampark karne ka shram karen 

dhanywad 

ravi 

At 11:16pm on November 1, 2017, Prakash P said…
आदरणीय श्री अजय तिवारी जी सदर प्रणाम..माफ़ कीजियेगा ये मेरा
प्रथम प्रयास था अतः बहुत कमियां हैं मेरे लेखन में ..आपका सुझाव हृदय से स्वीकार करता हूँ .ग़ज़ल की कक्षा अावश्य मार्गदर्शक सिद्ध होगी मेरे लिए, धनयवाद !नहीं उपस्थित होने का कारण बैंक का थकाऊ कार्य है ..उसके लिए क्षमा प्रार्थी हूँ.
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दो क्षणिकाएं :
"आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार।"
3 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दो क्षणिकाएं :
"आदरणीय  PHOOL SINGH जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार।"
3 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दो क्षणिकाएं :
"आदरणीय  narendrasinh chauhan जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार।"
3 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दो क्षणिकाएं :
"आदरणीय  Samar kabeerजी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार।"
3 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दो क्षणिकाएं :
"आदरणीय  राज़ नवादवीजी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार।"
3 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post कुछ क्षणिकाएं जीवन पर :
"आदरणीय फूल सिंह जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार।"
3 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post पागल मन ..... (400 वीं कृति )
"आदरणीय  PHOOL SINGHजी सृजन पर आपकी मधुर प्रशंसा का आभारी है।"
3 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post रंगहीन ख़ुतूत ...
"आदरणीय समर कबीर साहिब आदाब , प्रस्तुति को आत्मीय मान देने एवं सुधारात्मक सुझाव देने का दिल से…"
3 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post रंगहीन ख़ुतूत ...
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार।"
3 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post रंगहीन ख़ुतूत ...
"आदरणीय  narendrasinh chauhanजी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार।"
3 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post रंगहीन ख़ुतूत ...
"आदरणीय फूल सिंह जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार।"
3 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post देर तक ....
"आदरणीय narendrasinh chauhanजी सृजन पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से आभार।"
3 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service