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Mahendra Kumar
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Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-47
"प्रदत्त विषय पर अच्छी समसामयिक लघुकथा है आदरणीय शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी. थोड़ा सम्पादित कर अनावश्यक विस्तार को हटा देंगे तो रचना और बेहतर हो जाएगी. मेरी तरफ़ से भी हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Feb 28
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-47
"आयोजन में सहभागिता के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए आ. नीलम जी. बाकी गुणीजनों ने कह ही दिया है. सादर."
Feb 28
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-47
"अच्छी लघुकथा हुई है आदरणीय बबिता जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Feb 28
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-47
"बेहद सूक्ष्म और शानदार लघुकथा है सर. निश्चित तौर पर अकेलेपन को दूर करने के लिए किताबों से बढ़कर कोई दूसरा साथी नहीं है. आपकी लघुकथा पढ़कर जौन एलिया साहब का पंक्ति याद आ गया : मेरे कमरे में किताबों के सिवा कुछ भी नहीं. इस उम्दा लघुकथा के लिए दिल से ढेर…"
Feb 28
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-47
"भ्रष्ट राजनीति पर उम्दा लघुकथा कही है आपने आदरणीय डॉ. टी आर सुकुल जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Feb 28
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-47
"विषय को सार्थकता प्रदान करती बेहद संयमित और उम्दा लघुकथा के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए आदरणीय विनय कुमार जी. सादर."
Feb 28
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-47
"मिलते-जुलते कई नामों के कारण रचना में भटकाव है आदरणीय आसिफ़ ज़ैदी जी. यदि आप इस कथ्य को राजनीति से जोड़कर कहते तो कथा प्रभावशाली हो जाती. मेरी तरफ़ से इस प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए आदरणीय आसिफ ज़ैदी जी. सादर."
Feb 28
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-47
"आपकी लघुकथा के सन्दर्भ में आदरणीय योगराज सर की टिप्पणी से मैं भी सहमत हूँ आदरणीय तस्दीक़ अहमद खान जी. जितना "क्या कहना है" महत्त्वपूर्ण होता है उतना ही "कैसे कहना है" भी होता है. बहरहाल इस प्रस्तुति पर मेरी तरफ़ से हार्दिक बधाई…"
Feb 28
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-47
"प्रदत्त विषय पर उम्दा लघुकथा हुई है आदरणीय मनन कुमार सिंह जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Feb 28
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-47
"अच्छी लघुकथा है आदरणीया कनक हरलालका जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. वैसे डॉट के अनावश्यक प्रयोग से बचा जाना चाहिए था. सादर."
Feb 28
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-47
"प्रदत्त विषय पर अच्छी लघुकथा हुई है आदरणीया कल्पना जी. शीर्षक विशेष तौर से पसन्द आया. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Feb 28
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-47
"बेहद उम्दा लघुकथा है आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी. बहुत-बहुत बधाई इस शानदार प्रस्तुति से गोष्ठी का आग़ाज़ करने हेतु. सादर."
Feb 28
दिगंबर नासवा commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : मैं अपने आप को दफ़ना रहा हूँ
"उम्दा ग़ज़ल और लाजवाब शेर ... बहुत बधाई "
Feb 20
Balram Dhakar commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : मैं अपने आप को दफ़ना रहा हूँ
"आदरणीय महेंद्र जी, ख़ूबसूरत ग़ज़ल हुई है। बहुत बहुत बधाई, इस शानदार ग़ज़ल के लिए। सादर।"
Feb 11
Mahendra Kumar's blog post was featured

ग़ज़ल : मैं अपने आप को दफ़ना रहा हूँ

बह्र : 1222 1222 122तुम्हारे शहर से मैं जा रहा हूँबिछड़ने से बहुत घबरा रहा हूँ वहाँ दुनिया को तू अपना रही हैयहाँ दुनिया को मैं ठुकरा रहा हूँ उठा कर हाथ से ये लाश अपनीमैं अपने आप को दफ़ना रहा हूँ तुम्हारे इश्क़ में बन कर मैं काँटासभी की आँख में चुभता रहा हूँ नहीं मालूम जाना है कहाँ परन जाने मैं कहाँ से आ रहा हूँ मुहब्बत रात दिन करनी थी तुमसेतुम्हीं से रात दिन लड़ता रहा हूँ पढ़ा इक लफ़्ज़ भी उसने ने मेराग़ज़ल जिसके लिए लिखता रहा हूँ मुहब्बत करने वाले मर गए हैंमैं दिल को कब से ये समझा रहा हूँ नहीं आया मुझे…See More
Feb 6
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : मैं अपने आप को दफ़ना रहा हूँ
"आद0 महेंद्र जी सादर अभिवादन। बढ़िया ग़ज़ल कही आपने। आद0 समर कबीर साहब की इस्लाह भी उत्तम। बहुत बहुत बधाई आपको इस सृजन पर"
Feb 2

Profile Information

Gender
Male
City State
Allahabad
Native Place
Fatehpur

Mahendra Kumar's Blog

ग़ज़ल : मैं अपने आप को दफ़ना रहा हूँ

बह्र : 1222 1222 122

तुम्हारे शहर से मैं जा रहा हूँ

बिछड़ने से बहुत घबरा रहा हूँ

 

वहाँ दुनिया को तू अपना रही है

यहाँ दुनिया को मैं ठुकरा रहा हूँ

 

उठा कर हाथ से ये लाश अपनी

मैं अपने आप को दफ़ना रहा हूँ

 

तुम्हारे इश्क़ में बन कर मैं काँटा

सभी की आँख में चुभता रहा हूँ

 

नहीं मालूम जाना है कहाँ पर

न जाने मैं कहाँ से आ रहा हूँ

 

मुहब्बत रात दिन करनी थी तुमसे

तुम्हीं से…

Continue

Posted on January 31, 2019 at 7:51pm — 6 Comments

ग़ज़ल : मुझसे मत बोलिए मंज़ूर-ए-ख़ुदा होता है

बह्र : 2122 1122 1122 22/112

मैंने देखा है कि दुनिया में क्या क्या होता है

मुझसे मत बोलिए मंज़ूर-ए-ख़ुदा होता है

 

इश्क़ ही सबसे बड़ा ज़ुर्म है इस दुनिया में

ये ख़ता कर लो तो हर शख़्स ख़फ़ा होता है

 

जो गलत करते हैं, वो लोग सही होते हैं

और जो अच्छा करे तो वो बुरा होता है

 

मैं भी इस ज़ख़्म को नासूर बना डालूँगा

दर्द बतलाओ मुझे कैसे दवा होता है

 

कभी दिखता था ख़ुदा मुझको भी मेरे अन्दर

और अब इस पे भी…

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Posted on January 27, 2019 at 11:30am — 10 Comments

ग़ज़ल : अशआर मेरे जिनको सुनाने के लिए हैं

बह्र : 221 1221 1221 122

अशआर मेरे जिनको सुनाने के लिए हैं

वो लोग किसी और ज़माने के लिए हैं

कुछ लोग हैं जो आग बुझाते हैं अभी तक

बाकी तो यहाँ आग लगाने के लिए हैं

यूँ आस भरी नज़रों से देखो न हमें तुम

हम लोग फ़क़त शोर मचाने के लिए हैं

हर शख़्स यहाँ रखता है अपनों से ही मतलब

जो ग़ैर हैं वो रस्म निभाने के लिए हैं

अब क्या किसी से दिल को लगाएँगे भला हम

जब आप मेरे दिल को दुखाने के लिए…

Continue

Posted on January 16, 2019 at 4:00pm — 14 Comments

ग़ज़ल : कैसे बनता है कोई शख़्स तमाशा देखो

बह्र : 2122 1122 1122 22

कैसे बनता है कोई शख़्स तमाशा देखो

आओ बैठो यहाँ पे हश्र हमारा देखो

कैसे हिन्दू को किया दफ़्न वहाँ लोगों ने

एक मुस्लिम को यहाँ कैसे जलाया देखो

जिस तरह लूटा था दिल्ली को कभी नादिर ने

उसने लूटा है मेरे दिल का ख़ज़ाना देखो

आदमी वो नहीं होता जो दिखा करता है

जो नहीं दिखता हो जैसा उसे वैसा देखो

नूर से जल के, फ़लक से कोई साज़िश करके

चाँद को कैसे सितारों…

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Posted on January 13, 2019 at 7:30pm — 18 Comments

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At 9:45am on January 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय महेंद्र जी
बहुत शुक्रिया
 
 
 

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