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It's Mahendra Kumar's birthday today!

Mahendra Kumar
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Mahendra Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल - वफ़ाओं के बदले वफ़ा चाहता हूँ
"आ. रामबली जी, आपको यह ग़ज़ल कई बार पढ़नी पड़ी इसके लिए मैं क्षमाप्रार्थी हूँ. बाकी आपकी बात से सहमत हूँ. आपका बहुत-बहुत आभार. सादर."
1 hour ago
Mahendra Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल - वफ़ाओं के बदले वफ़ा चाहता हूँ
"आ. सुरेन्द्र जी, आपका बहुत-बहुत आभार. सादर धन्यवाद."
1 hour ago
Mahendra Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल - वफ़ाओं के बदले वफ़ा चाहता हूँ
"आ. समर सर, सादर आदाब. यह सच है कि मैंने अपनी पूर्व टिप्पणी में उन सभी शेरों का अर्थ स्पष्ट करने की कोशिश की थी जिसका आपने ज़िक्र किया था लेकिन इसे बचाव कहना अनुचित होगा. मैंने यह सिर्फ इसलिए किया कि एक तो आपने कुछ शेरों का अर्थ पूछा था दूसरा, मुझे…"
1 hour ago
KALPANA BHATT commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल - वफ़ाओं के बदले वफ़ा चाहता हूँ
"कुछ अशआर बेहद खुबसूरत लगे | हार्दिक बधाई आपको | इतनी बड़ी ग़ज़ल लिखी जा सकती है क्या ? आदरणीय समर साहब ने बहुत अच्छे से बाते समझाई हैं जिसके लिए उनको साधुवाद | आपको बहुत बहुत बधाई इस ग़ज़ल के लिए |"
Sep 13
Niraj Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल - वफ़ाओं के बदले वफ़ा चाहता हूँ
"आदरणीय महेंद्र जी, इस ग़ज़ल की जो सबसे अच्छी बात है वो है नयेपन की कोशिश. कुछ शेर जो  खास तौर पर पसंद आये : ख़ुदा ही सही पर हटो सामने सेमैं थोड़ी सी ताज़ा हवा चाहता हूँ ज़माने से ये दिल तुझे ढूँढता थातुझी से मैं अब फ़ासला चाहता हूँ जो चाहूँ तो यूँ…"
Sep 13
SALIM RAZA REWA commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल - वफ़ाओं के बदले वफ़ा चाहता हूँ
"भाई महेंद्र जी ग़ज़ल अभी मेहनत मांग रही हैं,बांकी प्रयास अच्छा है."
Sep 13
Gurpreet Singh commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल - वफ़ाओं के बदले वफ़ा चाहता हूँ
"आदरणीय महेंद्र कुमार जी,, नमस्कार,,ग़ज़ल के क्षेत्र में भी  बहुत बढ़िया प्रयास कर रहे हैं आप,, कुछ अशआर बहुत ही अच्छे लगे इस ग़ज़ल में,, इसे लिए आपको दिल से बधाई "
Sep 13
Mohit mishra (mukt) commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल - वफ़ाओं के बदले वफ़ा चाहता हूँ
"आदरणीय महेंद्र कुमार जी अच्छा प्रयास है आपका। कुछ त्रुटियां आदरणीय समर जी ने इंगित की है गौर कीजियेगा। तीसरे शेर में "ताजा हवा " होगी या "ताजी हवा " देख लीजियेगा। सादर"
Sep 12
Samar kabeer commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल - वफ़ाओं के बदले वफ़ा चाहता हूँ
"जनाब महेन्द्र कुमार जी आदाब,अल्लामा'इक़बाल'की ज़मीन में ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बहुत पहले ओबीओ के तरही मुशायरे में ये मिसरा दिया गया था,'चराग़-ए-सहर हूँ बुझा चाहता हूँ',इस ग़ज़ल के लिये दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ…"
Sep 12
Afroz 'sahr' commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल - वफ़ाओं के बदले वफ़ा चाहता हूँ
"आदरणीय महेंद्र कुमार जी अच्छी ग़ज़ल है बहुत बहुत बधाई आपको !"
Sep 12
Mahendra Kumar posted a blog post

ग़ज़ल - वफ़ाओं के बदले वफ़ा चाहता हूँ

बह्र : 122 122 122 122वफ़ाओं के बदले वफ़ा चाहता हूँसभी की तरह मैं ये क्या चाहता हूँदिवानों का मुझ पर असर हो गया हैख़ता तो नहीं की सज़ा चाहता हूँख़ुदा ही सही पर हटो सामने सेमैं थोड़ी सी ताज़ा हवा चाहता हूँवही बस वही बस वही चाहिए बसनहीं कुछ भी उसके सिवा चाहता हूँयहाँ है, वहाँ है, कहाँ है मुहब्बतबताओ मैं उसका पता चाहता हूँवो कैसा था ये जानने के लिए हीवो कैसा है ये जानना चाहता हूँज़माने से ये दिल तुझे ढूँढता थातुझी से मैं अब फ़ासला चाहता हूँसमन्दर से कह दो कि दे दे इज़ाज़तनदी में यहीं डूबना चाहता हूँभला चाहता…See More
Sep 12
Mahendra Kumar commented on Ranveer Pratap Singh's blog post मुझे हिन्दू, उसे मुसलमान रहने दो!
"बहुत बढ़िया कविता है आ. रणवीर प्रताप सिंह जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Sep 11
Mahendra Kumar commented on Sweet Panday's blog post कविता कपुतली
"आ. Sweet Panday जी, स्त्रियों की हीन दशा को उजागर करती अच्छी कविता है. भारत की एक बहुप्रचलित प्राचीन पुस्तक में भी कुछ ऐसा ही उल्लेख है. मेरी तरफ़ से हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. वैसे मुझे लगता है कि यदि आप इस पंक्ति //औरत की जिन्दगी बन गई एक…"
Sep 11
Mahendra Kumar commented on Rahila's blog post *अनुवांशिक गुण*(लघुकथा)राहिला
"आ. राहिला जी, लघुकथा अच्छी है किन्तु सम्पादन की गुंजाइश मौजूद है. मेरी तरफ़ से हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. इस मंच पर आ रही टाइपिंग सम्बन्धी समस्या के लिए मुझे लगता है कि आपको कार्यकारणी सदस्यों या आ. प्रधान सम्पादक जी से संपर्क करना चाहिए. आ. समर सर…"
Sep 11
Mahendra Kumar commented on ARUNESH KUMAR 'Arun''s blog post कविता - भावी गान
"आ. अरुण जी, अच्छी प्रस्तुति है. पर यदि आप इसमें कुछ ऐसा ख़याल व्यक्त करते कि मैंने लिख तो दिया है पर अगर तू गा देगा तो मेरा गीत अमर हो जाएगा, तो यह और भी अच्छी प्रस्तुति हो जाती. मेरी तरफ़ से हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Sep 11
Mahendra Kumar commented on BS Gauniya's blog post वो तुम थी....
"अच्छी भावाभिव्यक्ति है आ. बीएस गौनिया जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए और आ. समर सर की बातों का संज्ञान लीजिए. सादर."
Sep 11

Profile Information

Gender
Male
City State
Allahabad
Native Place
Fatehpur

Mahendra Kumar's Blog

ग़ज़ल - वफ़ाओं के बदले वफ़ा चाहता हूँ

बह्र : 122 122 122 122



वफ़ाओं के बदले वफ़ा चाहता हूँ

सभी की तरह मैं ये क्या चाहता हूँ



दिवानों का मुझ पर असर हो गया है

ख़ता तो नहीं की सज़ा चाहता हूँ



ख़ुदा ही सही पर हटो सामने से

मैं थोड़ी सी ताज़ा हवा चाहता हूँ



वही बस वही बस वही चाहिए बस

नहीं कुछ भी उसके सिवा चाहता हूँ



यहाँ है, वहाँ है, कहाँ है मुहब्बत

बताओ मैं उसका पता चाहता हूँ



वो कैसा था ये जानने के लिए ही

वो कैसा है ये जानना चाहता हूँ



ज़माने… Continue

Posted on September 12, 2017 at 6:34pm — 28 Comments

ग़ज़ल - ढोते फिरेंगे आप मुहब्बत कहाँ कहाँ

बह्र : 221/2121/1221/212



इस दोस्ती के बीच तिजारत कहाँ कहाँ

तुमने लगायी है मेरी कीमत कहाँ कहाँ



तुम मुझ से कह रहे हो कि मैं होश में रहूँ

नासेह दे रहे हो नसीहत कहाँ कहाँ



सब कुछ हमें ख़बर है नुमाइश के दौर में

करता है कौन कितनी सियासत कहाँ कहाँ



हैं आप जो ख़ुदा तो मुझे पूछना है ये

पहुँची है मुफ़लिसों की इबादत कहाँ कहाँ



गंगा में ले के जाइए और फेंक आइए

ढोते फिरेंगे आप मुहब्बत कहाँ कहाँ



तुम पूछ तो रहे हो मगर क्या… Continue

Posted on September 3, 2017 at 12:39pm — 6 Comments

दायरा

"तेरे पिता उस संगठन से जुड़े हैं जो इन्हें देखना तक नहीं चाहता और तू कहता है कि इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता?" कार्तिक आज भी उसी रेस्टोरेंट में बैठा था जहाँ सुमित ने कभी उससे ये बातें कही थीं। उसके हाथ में परवीन शाकिर की किताब थी तो ज़ेहन में ये ग़ज़ल, तुझसे कोई गिला नहीं है, क़िस्मत में मेरी सिला नहीं है।

"क्या ख़ूब ग़ज़ल सुनाई तुमने। किसकी है?" न्यू ईयर की पार्टी में लोगों ने ज़ोया से पूछा जिसने अभी हाल ही में ऑफिस ज्वाइन किया था।

"परवीन शाकिर की।" यह पहली बार था…

Continue

Posted on June 8, 2017 at 10:30am

एक महान जासूसी लेखक

करार के अनुसार उसने उस महान जासूसी लेखक की चाकू से गोद कर हत्या की और तेजी से घर के बाहर निकल गया।



आज से कुछ दिन पहले हत्यारे के घर में। "तुम अपनी ही हत्या क्यों करवाना चाहते हो? तुम पागल तो नहीं हो?" हत्यारे ने चौंकते हुए कहा।



"नहीं। मैं एक महान जासूसी लेखक हूँ।" उस आदमी ने अपना परिचय दिया।



"पर अपनी हत्या क्यों?" उसने उत्सुकता ज़ाहिर की।



"क्योंकि मैं चाहता हूँ कि लोग मेरी कहानियों की क़द्र करें। मैंने उन्हें रहस्य से भरी हुई अद्भुत और शानदार कहानियाँ… Continue

Posted on April 9, 2017 at 10:05am — 6 Comments

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