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Discussion Forum

एडमिन के लिए 5 Replies

O.B.O एक अच्छा मंच  है अपनी रचनाओं को प्रदर्शित करने के लिए किन्तु किसी भी रचना में कोई keyword  ना होने से रचनायें केवल इसी मंच तक सीमित हैं। और मंच से तो कहने को तीन हजार  से अधिक सदस्य हैं किंतु लगभग कुछ ही  लोग नियमित हैं बाकी तो दिखने की भीड़ हैंContinue

Started by रोहित डोबरियाल "मल्हार". Last reply by Samar kabeer Apr 5.

Response to Discussions 4 Replies

Dear friends:As many of us have noticed, usually there is not much response to the discussions at various Groups. This is true with English poems, as well, and one feels like a loner walking at night in the darkness in a big city with no street…Continue

Started by vijay nikore. Last reply by KALPANA BHATT ('रौनक़') Oct 13, 2017.

ग़ज़ल प्रकाशित नही होने के सम्बन्ध में 1 Reply

महोदय मैंने अभी अपनी एक ग़ज़ल को तीन बार पोस्ट किया परंतु प्रकाशित नही की गयीं है 3 दिन बीत गए । यदि कोई समस्या हो तो बताने का कष्ट करें ।

Started by Naveen Mani Tripathi. Last reply by योगराज प्रभाकर Oct 17, 2016.

ओबीओ का रंग 1 Reply

आदरणीय प्रधान  सम्पादक  जी ,                            नमस्कारमेरा  मानना है  कि हमारा  ओबीओ मंच साहित्य के  विविध  रंगों से  सरोबार  है। इसको  इतना फीका , उदास -सा  रंग यानी  रंगहीन-सा  बिलकुल नहीं  होना  चाहिए। मेंबर  होने  के  नाते ये  सिर्फ…Continue

Started by kanta roy. Last reply by Er. Ganesh Jee "Bagi" Jun 8, 2016.

कोई प्रदीप नील को बताएगा क्या ? 1 Reply

आदरणीय OBO टीम के वरिष्ठ सदस्य्गण ,मैं समझता हूँ कि यह उचित मंच है जहाँ मानकों के  आधार पर किसी चुटकुले को  लघुकथा , या लघुकथा को  चुटकुला घोषित किया जाता है।  अभी लघुकथा महा उत्सव ख़त्म हुआ है ,  थके होंगे तथा वहां शामिल रचनाओं के संकलन में व्यस्त…Continue

Started by प्रदीप नील वसिष्ठ. Last reply by योगराज प्रभाकर Dec 2, 2015.

थोड़ी हैरान हूं । 2 Replies

आदरणीय वरिष्ठ जन,सादर नमस्कार, मुझे शिकायत नहीं हैरानी है कि रचनाओं को जितने पाठक मिल रहे है उसकी तुलना में आधी मात्रा में भी प्रतिक्रिया नहीं मिलती।जबकि इस ग्रुप में काफ़ी सदस्य है । तो थोड़ी हताशा होती है । यूं लगता है जैसे लिखना व्यर्थ गया । सादर…Continue

Started by Rahila. Last reply by Sheikh Shahzad Usmani Nov 10, 2015.

छंद विधान के साथ संबंधित छंद का मानक/आदर्श वाचन का आडियो भी दिया जाये 1 Reply

एक निवेदनभरतीय छंद विधा में विभिन्न छंदों के मात्रिकता आंतरिक संरचना पर जानकारी उपलब्ध है । जिसके आधार पर मैं रचनाकर्म का अभ्यास करता हूॅ किंतु मुझे बार बार गेयता पर ध्यान देने का सुझाव दिया जाता है जो स्वागतेय  है इस परिप्रेक्ष्य में एक आग्रह है…Continue

Started by रमेश कुमार चौहान. Last reply by Prakash Chandra Baranwal Oct 6, 2015.

List of latest postings in various GroupsI 1 Reply

Just like OBO posts a list of the latest blogs on the right side of the screen, I suggest that OBO also post a list of latest additions to the various groups. This will serve the same significance as is presently offered to the 'blog posts'.…Continue

Started by vijay nikore. Last reply by Saurabh Pandey Jul 23, 2015.

क्या यह मेरा भ्रम है ? 17 Replies

व्यक्तिगत जीवन की व्यस्तताओं व विवशताओं के कारण पूर्व की भाँति न तो लिख पा रहा हूँ और न ही प्रतिक्रिया ही प्रकट कर पा रहा हूँ किन्तु ओबीओ पर पोस्ट रचनायें प्रतिदिन नियमित तौर पर पढ़ रहा हूँ. हाँ ! मासिक आयोजनों में सक्रिय रहने की यथा शक्ति कोशिश…Continue

Tags: है, ?, भ्रम, मेरा, यह

Started by अरुण कुमार निगम. Last reply by मिथिलेश वामनकर Jul 2, 2015.

समूह या फोरम में इतिहास को शामिल करने की आवश्यकता 6 Replies

 आदरणीय एडमिनआप सभी सुधी विद्वान है I आपको साहित्य और  इतिहास का संबंध ज्ञात है  I ऐतिहासिक कहानियों , उपन्यासों और काव्यों  से इतर इतिहास के लेख भी रोचक होते है और हमें अच्छी जानकारियां  भी देते है I   इस मंच पर  राजनीति और फिल्म संबंधी लेख के लिए…Continue

Started by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव. Last reply by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव Nov 26, 2014.

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Comment by Nand Kumar Sanmukhani on Monday
शुक्रगुज़ार हूं आपका आदरणीय योगराज प्रभाकर जी...

प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on Monday

भूल सुधार कर लिया गया है आ० नन्द कुमार सनमुखानी जी.  

Comment by Nand Kumar Sanmukhani on Monday
जी, मान्यवर..
किंतु कृपया मेरा नाम 'मनसुखानी' न लिखकर "सनमुखानी" लिखने का कष्ट करें, क्योंकि 'मनसुखानी' कहकर/लिखकर जब कोई संबोधित करता है तो मुझे लगता है कि वह संबोधन मेरे लिए नहीं है। उम्मीद है आप इसे अन्यथा नहीं लेंगे।

प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on Monday

आ० नन्द कुमार मनसुखानी  सनमुखानी जी, आपने फरमाया है कि:

//उदाहरण के लिए स्वयं मेरे द्वारा प्रेषित रचनाओं की स्थिति देखने की जब मैने कोशिश की तो यह पता लगाने में असफल रहा कि आख़िर वो हैं कहां ?//

आपने दो रचनाएँ  की थीं, जिनके नीचे नियमानुसार "मौलिक और अप्रकाशित" नही लिखा था. मैंने आपको वे रचनाएँ लौटाते हुए निवेदन किया था कि आप इनमे वांछित सुधार कर पुन: पोस्ट करें. किन्तु आपने उन्हें पोस्ट की बजाय मेसेज बॉक्स में ही प्रेषित कर दिया. इसीलिए आपकी रचनाएँ पटल पर नहीं आ पाई हैं, आप कृपया वे रचनाएँ कायदे से ब्लोग्स के अंतर्गत पोस्ट करें. 

Comment by Nand Kumar Sanmukhani on Saturday
महोदय,
मेरा आशय बिल्कुल स्पष्ट है कि इस साईट पर आने वालों के लिए अपनी तथा अन्य रचनाकारों की कृतियों/कार्यो /लेखन तक पहुंचना इतना आसान नहीं है। उदाहरण के लिए स्वयं मेरे द्वारा प्रेषित रचनाओं की स्थिति देखने की जब मैने कोशिश की तो यह पता लगाने में असफल रहा कि आख़िर वो हैं कहां ?
इसमें मेरी अल्पज्ञता की भी कुछ भूमिका हो सकती है।लेकिन सब तो इतने होशियार नहीं होते ना, जितने होशियार हमारे कुछ सम्माननीय साथी होंगे। इस लिए अनुरोध किया कि यदि यह सब कुछ हद तक आसान किया जा सके तो ऐसे सदस्यों की प्रतिभागिता के अवसर बढ़ जाएंगे, जो अन्यथा इस प्रकार की व्यवहारिक कठिनाईयों के चलते किनारा कर लेते होंगे।
संभवतः अब मेरे अनुरोध का आशय कुछ स्पष्ट हो गया होगा।
Regards...
Comment by Nand Kumar Sanmukhani on Saturday
महोदय,
मेरा आशय बिल्कुल स्पष्ट है कि इस साईट पर आने वालों के लिए अपनी तथा अन्य रचनाकारों की कृतियों/कार्यो /लेखन तक पहुंचना इतना आसान नहीं है। उदाहरण के लिए स्वयं मेरे द्वारा प्रेषित रचनाओं की स्थिति देखने की जब मैने कोशिश की तो यह पता लगाने में असफल रहा कि आख़िर वो हैं कहां ?
इसमें मेरी अल्पज्ञता की भी कौछ भूमिका हो सकती है।लेकिन सब तो इतने होशियार नहीं होते ना, जितने होशियार हमारे कुछ सम्माननीय साथी होंगे। इस लिए अनुरोध किया कि यदि यह सब कुछ हद तक आसान किया जा सके तो ऐसे सदस्यों की प्रतिभागिता के अवसर बढ़ जाएंगे, जो अन्यथा इस प्रकार की व्यवहारिक कठिनाईयों के चलते किनारा कर लेते होंगे।
संभवतः अब मेरे अनुरोध का आशय कुछ स्पष्ट हो गया होगा।
Regards...

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on Saturday

आदरणीय नन्द कुमार सन्मुखानी जी, आपके कहे का अर्थ स्पष्ट नहीं हुआ। आप अपने निवेदन को और स्पष्ट ढंग से प्रस्तुत करें। 

Comment by Nand Kumar Sanmukhani on Saturday
मेरा विनम्र सुझाव है कि O.B.O. के मंच पर अपनी रचनाएं/अन्य रचनाकारों द्वारा प्रेषित सृजन कार्यों पर कमेंट्स आदि कार्यों का सरलीकरण किया जाना चाहिए, ताकि सदस्यों की प्रतिभागिता को बढ़ाया जा सके।
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on March 13, 2018 at 10:03pm

आदाब। जानना चाहता हूं कि देहरादून , पटना और कानपुर आदि.. ओबीओ साहित्य/लघुकथा महाउत्सव की स्मारिकायें  (2017/2018) क्या कहीं से क्रय  की जा सकती हैं?

Comment by अजीत शर्मा 'आकाश' on March 12, 2018 at 4:54pm

मेरा विनम्र सुझाव है कि तरही मुशायरे का आयोजन शुक्रवार-शनिवार के स्थान पर शनिवार-रविवार को किया जाए। अधिकतर कार्यालयों में शनिवार कार्य-दिवस होने के कारण समय नहीं मिल पाता। इस परिवर्तन से हमें रविवार का पूरा समय मिल जाएगा !!!

 
 
 

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