For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Rahila
  • Female
  • shivpuri m. p.
  • India
Share

Rahila's Friends

  • सुरेश कुमार 'कल्याण'
  • KALPANA BHATT ('रौनक़')
  • sahila
  • Parvez khan
  • Sheikh Shahzad Usmani
  • Ashish Painuly
  • Omprakash Kshatriya
  • Madan Mohan saxena
  • vijay nikore
  • Abid ali mansoori
  • Dr.Prachi Singh
  • विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी
  • मिथिलेश वामनकर
 

Rahila's Page

Latest Activity


सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on Rahila's blog post **प्रतिबिंब** (लघुकथा)राहिला
"एक बोल्ड विषय पर बढ़िया लघु कथा हुई प्रिय राहिला जी बहुत बहुत बधाई "
May 10, 2018
Neelam Upadhyaya commented on Rahila's blog post **प्रतिबिंब** (लघुकथा)राहिला
"आदरणीया राहिला जी, नमस्कार । अच्छी लघुकथा हुई है । बधाई स्वीकार करें ।"
May 10, 2018
Tasdiq Ahmed Khan commented on Rahila's blog post **प्रतिबिंब** (लघुकथा)राहिला
"मुहतरमा राहिला साहिबा ,उम्दा लघुकथा हुई है ,मुबारक बाद क़ुबूल फरमायें।"
May 9, 2018
Rahila commented on Manan Kumar singh's blog post लालटेन(लघुकथा)
"वाह... बहुत सटीक रचना । आजकल की व्यवस्था पर खूब तंज करती हुई। बधाई स्वीकार करें"
May 9, 2018
Rahila commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post आलू सरीखे (लघुकथा)
"बहुत सटीक रचना, वर्तमान में देश कब हालात जिस तरह के हैं उसपर बहुत बढ़िया कटाक्ष। खूब बधाई "
May 9, 2018
Samar kabeer commented on Rahila's blog post **प्रतिबिंब** (लघुकथा)राहिला
"मोहतरमा राहिला जी आदाब,अच्छी प्रस्तुति,बधाई स्वीकार करें ।"
May 9, 2018
Rahila posted a blog post

**प्रतिबिंब** (लघुकथा)राहिला

" पापा कह रहे थे कि आपने अपना व्यवसाय जमाने के चक्कर में अब तक शादी नहीं की , यही कारण रहा था या और कुछ ?" उस एकांत मुलाकात में मोना ने रवि से पूछा। " आपके मन में ये सवाल आया , मतलब आपको लगता है कि कोई और भी कारण हो सकता है ?" "जी... , बस ऐसे ही शंका हुई ।" उसके प्रतिप्रश्न पर वह तनिक सकपका गयी। "हम्म..., मुझे भी माँ ने ऐसा ही कुछ आपके बारे में बताया था।" "क्या...?" "यही कि आपने भी अपने कैरियर को सँवारने के लिए काफी अच्छे- अच्छे रिश्ते ठुकराये हैं? कारण यही था, या कुछ और? " प्रतिध्वनि के समान…See More
May 9, 2018
Rahila commented on Kumar Gourav's blog post कमाई (लघुकथा)
"वाह... जिंदगी भर की पूंजी डूब गई , वहाँ महीने का हिसाब क्या करना । " पूरी रचना का सार समेट लिया । बहुत सुंदर।"
May 9, 2018
Rahila replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-37 (विषय: भारत)
"आजकल के माहौल पर तीखा व्यंग्य है ये रचना। बहुत बधाई उम्दा रचना के लिए।सादर"
Apr 29, 2018
Rahila replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-37 (विषय: भारत)
"देश के प्रति सकारात्मक सोच की अच्छी रचना हुई आदरणीय अहमद साहब!बहुत बधाई रचना पर।"
Apr 29, 2018
Samar kabeer commented on Rahila's blog post **एन पासांत**(लघुकथा)राहिला
"मोहतरमा राहिला जी आदाब, बहुत उम्दा लघुकथा लिखी आपने, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Apr 21, 2018
Neelam Upadhyaya commented on Rahila's blog post **एन पासांत**(लघुकथा)राहिला
"आदरणीया राहिला जी, बहुत ही बढ़िया लघुकथा। बधाई स्वीकार करें।"
Apr 20, 2018
Nilesh Shevgaonkar commented on Rahila's blog post **एन पासांत**(लघुकथा)राहिला
"क्या ख़ूब.. बहुत शानदार लघुकथा हुई है ..ढेरों बधाइयाँ.."
Apr 20, 2018
Dr Ashutosh Mishra commented on Rahila's blog post **एन पासांत**(लघुकथा)राहिला
"आदरणीया राहिला जी इस रचना पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर "
Apr 20, 2018
Rahila posted a blog post

**एन पासांत**(लघुकथा)राहिला

"सर ! बलात्कार का केस और ये नार्कोटेस्ट ..ये सीबीआई जाँच की खुद माँग करना !!!ये तो ख़ुदकुशी करना हुआ ।"शतरंज की बिसात पर अकेले बैठे खेल रहे मंत्री जी से मुँह लगे सेक्रेटरी ने चिंतित होकर कहा।" सुरेश बाबू ! इतनी चिंता क्यों करते हो ? इससे तो आपका बीपी बढ़ जाएगा । शान्ति पकड़ो जरा । देखे नहीं का..., जनता की सवालिया चितावन को ? लेकिन हम जरा दम भरे नहीं , कि गेट के बाहर भीड़ छटी नही। ""लेकिन...!!!"अच्छा यह सब छोड़ो..., जरा यहाँ आओ और बताओ तो सरी इस पारी को कौन जीतेगा?""जी...!!! ""जी-जी क्या ?? बोलो…See More
Apr 20, 2018
Rahila commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post भेड़िया आया था (लघुकथा)
"समसामयिक रचना,बेहद प्रभावी और वर्तमान हालातों पर सटीक चोट करती हुई। बहुत बधाई आपको"
Apr 20, 2018

Profile Information

Gender
Female
City State
MP
Native Place
Shivpuri
Profession
Teacher

Rahila's Blog

**प्रतिबिंब** (लघुकथा)राहिला

" पापा कह रहे थे कि आपने अपना व्यवसाय जमाने के चक्कर में अब तक शादी नहीं की , यही कारण रहा था या और कुछ ?" उस एकांत मुलाकात में मोना ने रवि से पूछा। " आपके मन में ये सवाल आया , मतलब आपको लगता है कि कोई और भी कारण हो सकता है ?" "जी... , बस ऐसे ही शंका हुई ।" उसके प्रतिप्रश्न पर वह तनिक सकपका गयी। "हम्म..., मुझे भी माँ ने ऐसा ही कुछ आपके बारे में बताया था।" "क्या...?" "यही कि आपने भी अपने कैरियर को सँवारने के लिए काफी अच्छे- अच्छे रिश्ते ठुकराये हैं? कारण यही था, या कुछ और? " प्रतिध्वनि के…

Continue

Posted on May 9, 2018 at 12:02am — 4 Comments

**एन पासांत**(लघुकथा)राहिला

"सर ! बलात्कार का केस और ये नार्कोटेस्ट ..ये सीबीआई जाँच की खुद माँग करना !!!

ये तो ख़ुदकुशी करना हुआ ।"

शतरंज की बिसात पर अकेले बैठे खेल रहे मंत्री जी से मुँह लगे सेक्रेटरी ने चिंतित होकर कहा।

" सुरेश बाबू ! इतनी चिंता क्यों करते हो ? इससे तो आपका बीपी बढ़ जाएगा । शान्ति पकड़ो जरा । देखे नहीं का..., जनता की सवालिया चितावन को ? लेकिन हम जरा दम भरे नहीं , कि गेट के बाहर भीड़ छटी नही। "

"लेकिन...!!!

"अच्छा यह सब छोड़ो..., जरा यहाँ आओ और बताओ तो सरी इस पारी को कौन…

Continue

Posted on April 20, 2018 at 7:15am — 4 Comments

खूंटे (लघुकथा) राहिला

"अरे चमनलाल...! आओ-आओ भैया!कितने वर्षों बाद , गांव का रास्ता कैसे भूल गए ? " खुशी से झूमते हुए उसने , उसको कसकर गले लगा लिया।

"बस भैया चले ही आ रहे हैं , अरे...! घर में सन्नाटा सा पसरा है, कोई है नहीं का?" उसने बाखर का सरसरी तौर पर मुआयना करते हुए कहा।

"है ना..., तुम्हारी भाभी हैं भीतर,

अरे सुनती हो! चमनवा आया है ,जरा बढ़िया सी चाय तो बना लाओ दुई कप।"

"और बहुएँ कहाँ हैं ?"

" बड़ी , आंगनबाड़ी में सुपरवाइजर हो गयी है , छोटी तो मास्टरनी थी ही। आती होंगीं समय तो हो…

Continue

Posted on March 8, 2018 at 12:30pm — 17 Comments

***टेसू***(लघुकथा)राहिला

"जानते हो ? इस पतझड़ के मौसम में वनों का ये उजड़ापन फागुन पर कहीं कलंक ना बन जाये, इसलिये ये टेसू के फूल मांग के सिंदूर की तरह वनों का सौंदर्य बचा लेते है।" वह मंत्रमुग्ध सी उन मखमली जंगली फूलों को निहारती हुई खोई-खोई आवाज़ में बोली। "तुम भी कहाँ हर बात को इतनी गहराई से देखती हो, हद है।" नकुल , फूलों पर उचटती सी नजर डालते हुए मुस्कुरा कर बोला। आज उसकी गाड़ी ससुराल का रास्ता नाप रही थी। "मेरा तो बचपन ही इन्हें फलते-फूलते देखकर गुजरा है। मालूम , छुटपन में इन फूलों को देख कर मैं समझ जाती थी कि होली…

Continue

Posted on March 3, 2018 at 9:25pm — 7 Comments

Comment Wall (5 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 10:07pm on April 19, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीया राहिला जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी लघुकथा "कहर" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:33pm on March 29, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीया Rahila  जी,

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 7:33pm on November 11, 2015, Abid ali mansoori said…

आदरणीया राहिला जी हारदिक आभार आपका!

At 2:25am on October 2, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है।
At 4:02am on October 1, 2015, Sheikh Shahzad Usmani said…
मोस्ट वेलकम। कब ज्वाईन किया ? गोष्ठी 6 में कथा भी भेजी थी क्या ? प्रोफाइल में कैसे जाने , ये तो अधूरी जानकारी है अभी वहां, कैसे कन्फर्म करें, फोन पर कन्फर्म करने के बाद स्वीकार करेंगे रिक्वेस्ट, ओके
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'गठरी, छतरियां और वह' (लघुकथा)
"आदाब। बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब इस हौसला अफ़ज़ाई हेतु।"
1 hour ago
Md. anis sheikh commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post झूठ फैलाते हैं अक़्सर जो तक़ारीर के साथ (१५)
"आप का ही नहीं गहलोत जी हमारा भी यही हाल है अपनी गलती दिखाई नहीं देती ,और बात सिर्फ गलती पकड़ने कि…"
2 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (दिल ने जिसे बना लिया गुलफाम दोस्तो)
"जनाब राज़ नवाद्वी साहिब, ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I "
3 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari posted a blog post

एक रदीफ़ पर दो ग़ज़लें "छत पर " (गज़ल राज )

१.हास्य उठाई है़ किसने ये दीवार छत पर  अब आएगा कैसे  मेरा यार छत पर  अगर उसके वालिद  का ये काम…See More
9 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on rajesh kumari's blog post लंगडा मज़े में है (हास्य व्यंग ग़ज़ल 'राज')
"आद० फूल सिंह जी हार्दिक आभार बहुत बहुत शुक्रिया "
9 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on rajesh kumari's blog post लंगडा मज़े में है (हास्य व्यंग ग़ज़ल 'राज')
"आद० नरेन्द्र सिंह जी आपका बहुत बहुत शुक्रिया "
9 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani added a discussion to the group बाल साहित्य
Thumbnail

'अब तुम्हारे हवाले ... बहिनों' ( संस्मरण)

उन दोनों की मैं बहुत शुक्रगुजार हूं। बताऊं क्यूं? क्योंकि इस बार के गणतंत्र दिवस में उन दोनों ने…See More
10 hours ago
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

लेखन में आत्ममुग्धता की बढ़ती प्रवृत्ति और उसके खतरे-एक परिचर्चा /// प्रस्तुति – डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव

 भारतीय संस्कृति में विनम्रता का महत्वपूर्ण स्थान रहा है I अपनी  तारीफ सुनकर आज भी विनम्र लोग शील…See More
12 hours ago
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल

1212     1122     1212     …See More
12 hours ago
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

एक ग़ज़ल मनोज अहसास

कहते हैं देख लेता है नजरों के पार तूमेरी तरफ भी देख जरा एक बार तूहर बार मान लेता हूं तेरी रजा को…See More
12 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
12 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted blog posts
12 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service