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Rahila
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Neelam Upadhyaya commented on Rahila's blog post खूंटे (लघुकथा) राहिला
"आदरणीय राहिला जी, महिलाओं की प्रगति को परिभाषित करती बहुत बढ़िया लघु कथा कि प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Mar 13
Harash Mahajan commented on Rahila's blog post खूंटे (लघुकथा) राहिला
"वाह आदरणीय राहिला जी एक बहुत ही उम्दा और खूब संदेश देती आपकी ये लघु कथा दिल को खुश कर गयी । सच कहा उसने खूंटे उखड ही गये आजकल । बहुत सी दाद हाज़िर है । वसूल पाइयेगा । सादर!!"
Mar 12
Mohammed Arif commented on Rahila's blog post खूंटे (लघुकथा) राहिला
"आदरणीया राहिला जी आदाब,                            मुझे जो वर्तनीगत अशुद्धियाँ नज़र आई जैसे:-खूंटे/खूँटे , आंगनवाड़ी/आँगनवाड़ी , अंदाज/अंदाज़ । सादर ।"
Mar 12
Rahila commented on Rahila's blog post खूंटे (लघुकथा) राहिला
" आदरणीय आरिफ साहब बहुत शुक्रिया  रचना पर टिप्पणी करने के लिए। आपसे एक निवेदन है कि वे सारी वर्तिनी की अशुद्धियाँ  कहाँ-कहाँ हुईं बताने का कष्ट करें , ताकि आगे से ख्याल रख सकूँ। दूसरी बात , आपकी शिकायत पर अब क्या सफाई दूँ??? हाँ मैं…"
Mar 12
Rahila commented on Rahila's blog post खूंटे (लघुकथा) राहिला
"बहुत शुक्रिया आदरणीया नीता दीदी ! सादर आभार टिप्पणी के लिए।"
Mar 12
Rahila commented on Rahila's blog post खूंटे (लघुकथा) राहिला
"बहुत शुक्रिया आदरणीय उस्मानी जी ! सादर आभार टिप्पणी के लिए।"
Mar 12
Rahila commented on Rahila's blog post खूंटे (लघुकथा) राहिला
"बहुत शुक्रिया आदरणीय कबीर साहब ! सादर आभार टिप्पणी के लिए।"
Mar 12
Rahila commented on Rahila's blog post खूंटे (लघुकथा) राहिला
"बहुत शुक्रिया आदरणीय सलीम साहब ! सादर आभार टिप्पणी के लिए।"
Mar 12
Rahila commented on Rahila's blog post खूंटे (लघुकथा) राहिला
"बहुत शुक्रिया आदरणीय सोमेश जी! सादर आभार टिप्पणी के लिए।"
Mar 12
Rahila commented on Rahila's blog post खूंटे (लघुकथा) राहिला
"बहुत शुक्रिया आदरणीय सुरेन्द्र जी! सादर आभार टिप्पणी के लिए।"
Mar 12
Nita Kasar commented on Rahila's blog post खूंटे (लघुकथा) राहिला
"खूँटे उखड़ गये ।ज़रूरी भी था ।घर से ही महिलाओं के आगे बढ़ने की शुरूआत सार्थक संदेश देती कथा के लिये बधाई आ० राहिला जी ।"
Mar 10
Mohammed Arif commented on Rahila's blog post खूंटे (लघुकथा) राहिला
"आदरणीया राहिला जी आदाब,              एक अच्छी लघुकथा श्रेणी की रचना कही आपने । कुछ वर्तनीगत अशुद्धियाँ हैं । हार्दिक बधाई स्वीकार करें । ओबीओ सीखने-सिखाने का साहित्यिक परिवार का सशक्त मंच है । आपकी मेरी तथा अन्य…"
Mar 10
Sheikh Shahzad Usmani commented on Rahila's blog post खूंटे (लघुकथा) राहिला
"आदाब। बहुत बढ़िया उम्दा प्रस्तुति के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरमा राहिला साहिबा।"
Mar 9
Samar kabeer commented on Rahila's blog post खूंटे (लघुकथा) राहिला
"मोहतरमा राहिला जी आदाब, अच्छी लघुकथा है, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Mar 8
SALIM RAZA REWA commented on Rahila's blog post खूंटे (लघुकथा) राहिला
"बहन राहीला जी, बहुत ही खूबसूरत ढंग से दृश को लघुकथा में उभारा है बहुत खूब... अरे सुनती हो! चमनवा आया है ,जरा बढ़िया सी चाय तो बना लाओ दुई कप।" वाह वाह ज़ुबान का इंतख़ाब.. क्या कहने.. मुबारक़बाद"
Mar 8
Samar kabeer commented on Rahila's blog post ***टेसू***(लघुकथा)राहिला
"जब भी, जितना भी समय मिले कोशिश ज़रूर करें ।"
Mar 8

Profile Information

Gender
Female
City State
MP
Native Place
Shivpuri
Profession
Teacher

Rahila's Blog

खूंटे (लघुकथा) राहिला

"अरे चमनलाल...! आओ-आओ भैया!कितने वर्षों बाद , गांव का रास्ता कैसे भूल गए ? " खुशी से झूमते हुए उसने , उसको कसकर गले लगा लिया।

"बस भैया चले ही आ रहे हैं , अरे...! घर में सन्नाटा सा पसरा है, कोई है नहीं का?" उसने बाखर का सरसरी तौर पर मुआयना करते हुए कहा।

"है ना..., तुम्हारी भाभी हैं भीतर,

अरे सुनती हो! चमनवा आया है ,जरा बढ़िया सी चाय तो बना लाओ दुई कप।"

"और बहुएँ कहाँ हैं ?"

" बड़ी , आंगनबाड़ी में सुपरवाइजर हो गयी है , छोटी तो मास्टरनी थी ही। आती होंगीं समय तो हो…

Continue

Posted on March 8, 2018 at 12:30pm — 17 Comments

***टेसू***(लघुकथा)राहिला

"जानते हो ? इस पतझड़ के मौसम में वनों का ये उजड़ापन फागुन पर कहीं कलंक ना बन जाये, इसलिये ये टेसू के फूल मांग के सिंदूर की तरह वनों का सौंदर्य बचा लेते है।" वह मंत्रमुग्ध सी उन मखमली जंगली फूलों को निहारती हुई खोई-खोई आवाज़ में बोली। "तुम भी कहाँ हर बात को इतनी गहराई से देखती हो, हद है।" नकुल , फूलों पर उचटती सी नजर डालते हुए मुस्कुरा कर बोला। आज उसकी गाड़ी ससुराल का रास्ता नाप रही थी। "मेरा तो बचपन ही इन्हें फलते-फूलते देखकर गुजरा है। मालूम , छुटपन में इन फूलों को देख कर मैं समझ जाती थी कि होली…

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Posted on March 3, 2018 at 9:25pm — 7 Comments

*** खाद ***(लघुकथा)राहिला

"तेरी ननद, तेरे लिए भी कभी कुछ लाई या बस खाली हाथ हिलाती हुई आ जाती है सब समेटने के लिए ...? "



ससुरालियों की बातें पूछते-पूछते , जब पीहर आयी बिटिया की ननद का जिक्र आया तो अनायास शकुंतला देवी का लहजा थोड़ा तल्ख़ सा हो गया।



"अरे राम भजो अम्माँ ! कैसी बातें करती हो? वह तो छोटी हैं । लाती क्या , उल्टा भारी विदाई देनी पड़ती है। अम्माँजी की बड़ी लाड़ली बिटिया हैं।"

उसने निष्छल सी हंसी हँसते हुए बताया ।



" आय -हाय तुझे इसमें हँसी आ रही है। ठीक है..., जब तक माँ है, तब तक… Continue

Posted on February 26, 2018 at 10:58pm — 8 Comments

***माँ का वेलेंटाइन***(लघुकथा)राहिला



"हुआ क्या है ? पागल! कुछ तो बता।" सुमि की बार -बार भरती - पुछती आँखे देख कर तृषा ने जोर देकर पूछा।

"मुझे लगता है माँ का किसी के साथ...!" कह कर वह अपनी सबसे नजदीकी सखी के गले लगकर रो पड़ी।"

"क्याsss किसी के साथ....? तेरा दिमाग़ तो ठिकाने पर है ? ये शक़ कैसे पनपा तेरे मन में? उसने अविश्वास जताया।

आज वेलेंटाइन डे है ,जब तक पापा रहे , वह उनके लिए फूल खरीदतीं थीं । लेकिन आज जब वह नहीं हैं तो फिर किसके लिए खरीद रहीं थीं ?"

"मतलब तूने उन्हें फूल खरीदते देखा?"

"सिर्फ…

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Posted on February 13, 2018 at 10:54am — 10 Comments

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At 10:07pm on April 19, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीया राहिला जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी लघुकथा "कहर" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:33pm on March 29, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीया Rahila  जी,

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 7:33pm on November 11, 2015, Abid ali mansoori said…

आदरणीया राहिला जी हारदिक आभार आपका!

At 2:25am on October 2, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है।
At 4:02am on October 1, 2015, Sheikh Shahzad Usmani said…
मोस्ट वेलकम। कब ज्वाईन किया ? गोष्ठी 6 में कथा भी भेजी थी क्या ? प्रोफाइल में कैसे जाने , ये तो अधूरी जानकारी है अभी वहां, कैसे कन्फर्म करें, फोन पर कन्फर्म करने के बाद स्वीकार करेंगे रिक्वेस्ट, ओके
 
 
 

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Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (कीजियेगा हुस्न वालों से मुहब्बत देख कर )
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