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KALPANA BHATT ('रौनक़')
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post माँ (कविता)
"वाह आदरणीया सुन्दर रचना..."
Wednesday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post माँ (कविता)
"आद0 कल्पना भट्ट जी सादर अभिवादन। मातृ शक्ति को बताती बढिया सृजन पर मेरी बधाई स्वीकार कीजिये। सादर"
Mar 17
vijay nikore commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post माँ (कविता)
"कविता अच्छी लगी। बधाई, आ० कल्पना जी"
Mar 16
Neelam Upadhyaya commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post माँ (कविता)
"विषयगत अच्छी प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें आदरणीया कल्पना भट्ट 'रौनक ' जी।"
Mar 14
Samar kabeer commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post माँ (कविता)
"बहना कल्पना भट्ट रौनक़ जी आदाब,अच्छी कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Mar 12
KALPANA BHATT ('रौनक़') posted a blog post

माँ (कविता)

माँ! तुम हो शक्ति स्वरूपान पाया तुमसा कोई दूजासमय से भी तुमने की लड़ाईहर बार समय को आँख दिखाईनन्हीं नन्हीं क्यारियों में तुमनेप्यार-मुहब्बत के बीज जो बोयेअपने प्यार से सींचा है तुमनेघर-आँगन महकाया है तुमनेमाँ तुमसा और न कोई देखाहर दुःख को तुमने हँसते हुए फेंकाहर बार जब भी मैं घबरायीसामने तुम ही तुम नज़र आईकैसा डर! यह पूछा जब तुमनेनारी शक्ति से परिचय करवाया तुमनेआज जो भी कुछ है मैंने पायासंग मेरे रहा तुम्हारा ही साया।तुम बिन जीवन सूना हो जायेतुमबिन न मुझको और कोई भाये।रखना अपना हाँथ मेरे सिर…See More
Mar 12
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-101
"Dhanyawad aadarniya Pratibha di"
Mar 9
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-101
"अच्छा प्रयास हुआ है आदरणीय लक्षमण जी।"
Mar 9
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-101
"आपके श्रम को नमन आदरणीय समर भाई।"
Mar 9
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-101
"इस ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय आसिफ़ ज़ैदी जी।"
Mar 9
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-101
"भारत या इंडिया भारत! क्या वही भारत जो सोने की चिड़िया थी दूर देश से करती थी आकर्षित राजा-महाराजों की नगरी थी। हाँ वही भारत! भारत! क्या वही भारत जो लड़ता रहा आपस में जातिवाद का बोल-बाला रहा शौर्यवान थे लोग यहाँ पर राज घराने क़ैद थे। हाँ वही…"
Mar 9
Neelam Upadhyaya commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post फ्रोज़न माइंड ( लघुकथा)
"आदरणीया कल्पना भट्ट जी, नमस्कार। बहुत ही अच्छी भावपूर्ण लघुकथा। प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
Mar 6
KALPANA BHATT ('रौनक़') added a discussion to the group English Literature
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Abandoned Freedom (poem)

A life in prison Or a dungeon built by you?At your wish and willA woman in your house You put intoA home made construction Of thoughts and suspicion Dancing and giggling In within you For you so liked To be treated as a master A person with a crownMade by you, for yourself The customs barriers The culture so shrewd Crooked vision of yoursFor self-esteemed ego Your strikes and Cicks Abusive words and deedsYou wish to be a masterOver a woman with you The reason you know The cause you not seeFor…See More
Mar 6
Nita Kasar commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post फ्रोज़न माइंड ( लघुकथा)
"बेहद कठिन फैसला परंतु बेटी ने पिता की पीड़ा को समझा ।संवेदनशील कथा के लिये बधाई आद० कल्पना भट्ट जी ।"
Mar 5
Hariom Shrivastava commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post फ्रोज़न माइंड ( लघुकथा)
"वाह,वाहहह,बहुत सुंदर व मार्मिक लघुकथा"
Mar 4
सतविन्द्र कुमार राणा commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post ज़हरीली हवा (कविता)
"आदरणीया कल्पना दीदी सादर नमन! उत्तमाभिव्यक्ति!"
Mar 4

Profile Information

Gender
Female
City State
BHOPAL
Native Place
MUMBAI
Profession
house wife
About me
was a teacher for about 20 Years. Recently resigned. I am M.A in English,B.Ed ,LLB.. . interested in literature

KALPANA BHATT ('रौनक़')'s Blog

माँ (कविता)

माँ! तुम हो शक्ति स्वरूपा

न पाया तुमसा कोई दूजा

समय से भी तुमने की लड़ाई

हर बार समय को आँख दिखाई

नन्हीं नन्हीं क्यारियों में तुमने

प्यार-मुहब्बत के बीज जो बोये

अपने प्यार से सींचा है तुमने

घर-आँगन महकाया है तुमने

माँ तुमसा और न कोई देखा

हर दुःख को तुमने हँसते हुए फेंका

हर बार जब भी मैं घबरायी

सामने तुम ही तुम नज़र आई

कैसा डर! यह पूछा जब तुमने

नारी शक्ति से परिचय करवाया तुमने

आज जो भी कुछ है मैंने पाया

संग मेरे रहा तुम्हारा… Continue

Posted on March 12, 2019 at 9:52am — 5 Comments

फ्रोज़न माइंड ( लघुकथा)

अस्पताल में एक रूम में बैठी हुई थी। तभी एक नर्स दौड़ती हुई आई और कहने लगी, " मिस्टर सुदर्शन के साथ कौन है?"

काव्या के कान चौकन्ने हो गए, उसने उस नर्स से कहा," जी मैं हूँ। क्या बात है सिस्टर?"

"आई.सी.यू. में आपको तुरंत बुलाया है...।

नर्स की बात पूरी भी नही हुई और काव्या चीते की गति से उस ओर दौड़ पड़ी।

आई.सी. यू. का दरवाजा खोलते ही उसने कमरे में चारों तरफ नज़र घुमाई, उसके पिताजी पिछले एक माह से कोमा में थे, डॉक्टरों ने फिर भी उम्मीद नही छोड़ी थी। उसने डॉक्टर की तरफ देखते हुए पूछा,"… Continue

Posted on March 1, 2019 at 8:14pm — 6 Comments

ज़हरीली हवा (कविता)

 यह कैसी हवा ज़हरीली,

नफ़रत से भरी

विषकन्या क्या पुनः जीवित हो उठी है

आतंकी गलियारों में

वो वहाँ ख़ूनी होली खेली किसीने

संतुष्ट हुआ होगा  क्या वह

अपने कर्तव्य को पूर्ण कर

घर जाकर क्या सुकूँ से सोया होगा!

ये कैसे धर्म ?

कैसा आचरण ?

कैसी शिक्षा ?कैसा प्रण?

मृत्यु अटल सत्य है

क़त्ल-ए-आम!

यह कैसा कृत्य है?

क्या औलाद ऐसी होती है?

जो माँ की छाती छलनी करती है

और वे माताएँ जिनकी

ऐसी…

Continue

Posted on February 26, 2019 at 10:49pm — 4 Comments

अनकहा रिश्ता (लघुकथा)

9 फ़रवरी 2019

प्रिय डायरी

आज साईट पर कनक अम्मा की हालत देखकर मन भारी हो गया। तुम तो जानती ही हो, कनक अम्मा बाऊजी के समय से अपनी कम्पनी से जुड़ी है। बाऊजी को यह अन्ना दादा कहती थी। बाऊजी को तो तुमने भी देखा है, नहीँ तुम न थी उस वक़्त मेरे साथ तुम्हारी बड़ी बहन थी, मैं उससे अपनी बातें साझा किया करता था, जैसे मैं आज तुमसे करता हूँ। यह क्या मैं भटक गया... हाँ तो मैं कहाँ था। हाँ, कनक अम्मा की बात बता रहा था न मैं। आज वह रोज़ की तरह सीमेंट की तगाड़ी लेकर सीढ़ियों पर चढ़ रही थी कि वह फिसल…

Continue

Posted on February 16, 2019 at 9:48am — 4 Comments

Comment Wall (5 comments)

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At 10:51pm on August 8, 2017, श्याम किशोर सिंह 'करीब' said…

संदेशात्मक लघुकथा। सहज चित्रण के लिए बधाई।

KALPANA BHATT

At 1:55pm on May 17, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीया कल्पना जी महीने की सक्रिय सदस्य चुने जाने पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 1:26pm on May 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीया 

श्रीमती कल्पना भट्ट जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:34am on May 15, 2016, Rahila said…
बहुत शुक्रिया आदरणीया दी! आपने मुझे दोस्ती के काबिल समझा ।
At 2:10pm on May 1, 2016, pratibha pande said…

आपकी मित्रता मेरे लिए अमूल्य है , धन्यवाद आदरणीया कल्पना जी 

 
 
 

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