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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post धरती पुत्र (लघुकथा)
"बेहतरीन विषय और कथा.."
10 hours ago
Nita Kasar commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post धरती पुत्र (लघुकथा)
"भटके युवाओं को राह दिखाती प्रेरक कथा बधाई आद० कल्पना बहना ।"
18 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post परिवर्तित चलन( लघुकथा)
"वाह वाह खूब कही आदरणीया.."
yesterday
Rakshita Singh commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post परिवर्तित चलन( लघुकथा)
"आदरणीया रौऩक जी , बहुत सुन्दर लघुकथा। हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
yesterday
Mohammed Arif commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post धरती पुत्र (लघुकथा)
"आदरणीया कल्पना भट्ट जी आदाब,                                    बेहद सामयिक लघुकथा । आतंकवाद आज की वैश्विक समस्या है । विश्व के अधिकांश देश आतंकवाद से ग्रसित…"
Friday
KALPANA BHATT ('रौनक़') posted a blog post

धरती पुत्र (लघुकथा)

सुखविंदर जी को सोचमग्न अवस्था में देख उनकी पत्नी ने उनसे पूछा," क्या सोच रहे हो जी?""ख़ास कुछ नही...... बस कल अपने खेत पर जो सिपाही आया था उसी के बारे में सोच रहा हूँ.......।""सिपाही..... और अपने खेत में.........! कब और क्यों....?""कह रहा था कि अपना खेत उसको बेच दूँ.... ।""हैं.........! ये क्यों भला......?""वह सिपाही न था पर ......सिपाही के खाल में भेड़िया था........ उसका चेहरा ढका हुआ था... पर उसकी आवाज़ कुछ जानी... इतना ही कह पाये कि बाहर से चिल्लाने की आवाज़ आयी। 'अरे बाहर आओ सब ...... एक सिपाही…See More
Friday
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on Manan Kumar singh's blog post वेलेंटाइन गिफ्ट(लघु कथा)
"आपकी बात अपनी जगह सही है। सब कुछ लिखकर हम पाठक को दें या एक ड्राफट ऐसा बनायें जिससे कथा खुद अपनी बात कहे। सर जहाँ तक लघुकथा की बात है अनआवश्यक विस्तार कथा को बोझिल ही करता है। वैसे हर रचनाकार की अपनी मौलिक सोच होती है। पर इस कथा में कसावट करेंगे तो…"
Thursday
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on Manan Kumar singh's blog post वेलेंटाइन गिफ्ट(लघु कथा)
"आदरणीय जहाँ तक मैं समझ पायी हूँ वहां लघुकथा में लेखक का प्रवेश वो होता है जो एक लेखक अपनी बातों को लिखता है| आपने यहाँ जो बातें कही है यह एक जगह का वर्णन है जैसे स्कूल की पढाई का वर्णन ---- यहाँ ऐसा नहीं लग रहा है कि यह कथा का हिस्सा है बल्कि यहाँ…"
Thursday
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on Manan Kumar singh's blog post वेलेंटाइन गिफ्ट(लघु कथा)
"आदरणीय मनन जी  उजड्ड लोग,अनपढ़ औरतें,गिल्ली-डंडा, कबड्डी और तिलंगी में अझुराये लड़के-बच्चे।बकरी चराती, मवेशियों को सानी देती लड़कियाँ, बस।गाँव के स्कूल की पढ़ाई का आलम है कि तीन-तीन बार मैट्रिक में फेल हुए तीन मास्टर दिहाड़ी जितनी रकम पर उसे संभाले…"
Thursday
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post परिवर्तित चलन( लघुकथा)
"धन्यवाद् जनाब तस्दीक साहब |"
Thursday
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post परिवर्तित चलन( लघुकथा)
"धन्यवाद आ नीरज मिश्र जी , पर ये लघुकथा है लेख नहीं | सादर\"
Thursday
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post परिवर्तित चलन( लघुकथा)
"सादर धन्यवाद आ विजय निकोरे सर| "
Thursday
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post परिवर्तित चलन( लघुकथा)
"धन्यवाद आदरणीय शहजाद उस्मानी जी|"
Thursday
Tasdiq Ahmed Khan commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post परिवर्तित चलन( लघुकथा)
"मुहतर्मा कल्पना साहिबा , आज की पीढ़ी को संदेश देती सुंदर लघुकथाहुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ |"
Wednesday
Neeraj Mishra "प्रेम" commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post परिवर्तित चलन( लघुकथा)
"बहुत अच्छा लेख है पर क्या किया जा सकता है कुछ न कुछ कमियां हमेशा ही रहती हैं दुनिया में , एक ठीक करो तो दूसरी निर्मित हो जाती है "
Wednesday
vijay nikore commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post परिवर्तित चलन( लघुकथा)
"इस अच्छी रचना के लिए दिल से बधाई, आ० कल्पना जी। "
Wednesday

Profile Information

Gender
Female
City State
BHOPAL
Native Place
MUMBAI
Profession
house wife
About me
was a teacher for about 20 Years. Recently resigned. I am M.A in English,B.Ed ,LLB.. . interested in literature

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धरती पुत्र (लघुकथा)



सुखविंदर जी को सोचमग्न अवस्था में देख उनकी पत्नी ने उनसे पूछा," क्या सोच रहे हो जी?"

"ख़ास कुछ नही...... बस कल अपने खेत पर जो सिपाही आया था उसी के बारे में सोच रहा हूँ.......।"

"सिपाही..... और अपने खेत में.........! कब और क्यों....?"

"कह रहा था कि अपना खेत उसको बेच दूँ.... ।"

"हैं.........! ये क्यों भला......?"

"वह सिपाही न था पर ......सिपाही के खाल में भेड़िया था........ उसका चेहरा ढका हुआ था... पर उसकी आवाज़ कुछ जानी... इतना ही कह पाये कि बाहर से चिल्लाने की आवाज़ आयी।…

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Posted on February 16, 2018 at 5:52pm — 3 Comments

परिवर्तित चलन( लघुकथा)

वैलेंटाइन बाबा ने अपने शागिर्द से कहा," मेरा मन कर रहा है भारत भूमि का भ्रमण करूँ, सुना है वहां वैलेंटाइन डे बहुत लोग मनाते हैं|"

" सर! यह विचार आपके मन में कैसे आया? वैलेंटाइन डे तो पश्चिमी देशों का त्यौहार है और आप  तो पूरब में जाने का कह रहे हो!"

"हाँ! सुना है वहाँ  बच्चे एक दूसरे को लाल गुलाब देते है और अब तो वहाँ  भी लिविंग -रिलेशनशिप को मान्यता मिल गयी है तो लोग इसीको प्यार का नाम.....  यह कहते हुए वे चुप हो गए है|

"क्या हुआ सर? आप चुप क्यों हो गये? आपकी इच्छा है तो…

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Posted on February 13, 2018 at 9:00pm — 10 Comments

आम की गुठली (लघुकथा)

"चलो चलो!जल्दी तैयार हो जाओ सब लोग यहाँ पंक्ति में खड़े हो जाओ।" सफ़ेद कुर्ते वाला चिल्ला रहा था। गाँव के चौपाल पर महिलाओं को इक्कठा किया जा रहा था। महिलाएं सजी -धजी पंक्ति में खड़ी होती जा रही थी। चौपाल पर कुछ नव-युवक और कुछ बुज़ुर्ग वर्ग बैठे हुए थे। बुज़ुर्गों के लिए तो जैसे यह आम बात थी। चौपाल पर भारतीय प्रजातंत्र की बातें हो रही थी। नव-युवक बुज़ुर्गों की बातें ध्यान से सुन रहे थे। किसी ने पूछा,"ये महिलाएं कहाँ जा रही हैं? इनको यह कुर्ते वाला क्यों लेने आया है? यह कौन है?" तरह- तरह की बातें हो…

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Posted on January 24, 2018 at 8:12am — 8 Comments

मकड़जाल (लघुकथा)

प्रिय शेखर,

दोस्त! तुम मेरे सब से अच्छे दोस्त रहे हो, अब तुमसे क्या छुपाऊं? मैं इन दिनों बहुत परेशान हूँ, तुम्हें तो पता है मैं क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करता आया हूँ| मेरी और तुम्हारी जॉब एक साथ ही लगी थी, कितने खुश थे न हम दोनों! अच्छा पैकेज पाकर ,मैं हवा में उड़ने लगा,तुमने कई बार मुझे टोका भी; पर मैं अपनी ही उड़ान भरता रहा, मैं यह भूल गया था कि प्राइवेट सेक्टर में जॉब; बरक़रार रहे जरुरी नहीं ,और ऐसा ही हुआ।सात महीनों से जॉब के लिए दर-दर भटक रहा हूँ, और दूसरी तरफ़ बैंक के क़र्ज़ तले दबता जा…

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Posted on January 18, 2018 at 9:58pm — 8 Comments

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At 10:51pm on August 8, 2017, श्याम किशोर सिंह 'करीब' said…

संदेशात्मक लघुकथा। सहज चित्रण के लिए बधाई।

KALPANA BHATT

At 1:55pm on May 17, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीया कल्पना जी महीने की सक्रिय सदस्य चुने जाने पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 1:26pm on May 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीया 

श्रीमती कल्पना भट्ट जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:34am on May 15, 2016, Rahila said…
बहुत शुक्रिया आदरणीया दी! आपने मुझे दोस्ती के काबिल समझा ।
At 2:10pm on May 1, 2016, pratibha pande said…

आपकी मित्रता मेरे लिए अमूल्य है , धन्यवाद आदरणीया कल्पना जी 

 
 
 

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