For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

KALPANA BHATT ('रौनक़')
Share

KALPANA BHATT ('रौनक़')'s Friends

  • santosh khirwadkar
  • Mohammed Arif
  • अलका 'कृष्णांशी'
  • Kalipad Prasad Mandal
  • Arpana Sharma
  • Rahila
  • सतविन्द्र कुमार राणा
  • Ravi Shukla
  • pratibha pande
  • Samar kabeer
  • VIRENDER VEER MEHTA
  • Sulabh Agnihotri
  • शिज्जु "शकूर"
  • annapurna bajpai
  • vijay nikore
 

KALPANA BHATT ('रौनक़')'s Page

Latest Activity

KALPANA BHATT ('रौनक़') posted a blog post

लहरें ( कविता)

आज लहरों ने की बातें मुझसे बोलीं तुम सोचती हो तुम हो बहादुर समय से तुम लडती हो मूर्ख हो तुम जो यह सोचकर दम भरती हो| और वह इठला कर चली गयी दूर वहीं जहाँ से वह आयीं थी किनारे तक और वहाँ पड़े चट्टानों से टकरा-टकरा कर रही थी बातें उनसे, कह रहे थे चट्टान उनसे रुक जाओ करीब आप मेरे ऊपर से न यूँ बह जाओ रुको कुछ घड़ी की हम तपते हैं और देखो हम बन गये है ठोस और जड़ लहरें कुछ देर करती रहीं अटखेलियाँ चट्टान पर से गोल-गोल घूमकर फिर समां गयीं उसी धारा में जहाँ से वह आई थीं अब वह और धारा एक हो चुकी थीं कुछ देर…See More
Nov 4
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on TEJ VEER SINGH's blog post काल चक्र - लघुकथा -
"जीवन के अंतिम सफ़र में सामान ईतना कम हो उतना ही अच्छा है| कितना दर्द होता है जब अपने बच्चे ही ऐसा बर्ताव करें| बहुत अच्छी लघुकथा हुई है आदरणीय तेज वीर सिंह जी| क्या उम्र के इस मोड़ पर निराशा ही हाथ लगती है! हार्दिक बधाई |"
Nov 3
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post लहरें ( कविता)
"धन्यवाद आदरणीय विजय निकोरे जी| "
Nov 3
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post लहरें ( कविता)
"धन्यवाद आदरणीय समर भाई | "
Nov 3
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post लहरें ( कविता)
"धन्यवाद् आदरणीय तेज वीर सिंह जी| "
Nov 3
Sheikh Shahzad Usmani commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post दो धारी तलवार(लघुकथा)
"क्षेत्रीय बोली के पात्रों और संवादों में बेहतरीन रचना। हार्दिक बधाई आदरणीया  साहिबा। कल्पना भट्ट साहिबा।"
Oct 30
Sheikh Shahzad Usmani commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post लहरें ( कविता)
"बेहतरीन बिम्बात्मक अभिव्यक्ति। हार्दिक बधाई आदरणीया कल्पना भट्ट  साहिबा। कुछ-एक टंकण-त्रुटियां रह गईं हैं, कृपया देख लीजिएगा।"
Oct 30
डॉ छोटेलाल सिंह commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post लहरें ( कविता)
"आदरणीया कल्पना जी बहुत बेहतरीन रचना सुंदर औऱ सार्थक रचना के लिए बहुत बहुत बधाई, आंशिक तंकड़ त्रुटि देख लीजिएगा "
Oct 28
vijay nikore commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post लहरें ( कविता)
"इस अच्छी रचना के लिए हार्दिक बधाई, आदरणीया कल्पना जी।"
Oct 28
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post लहरें ( कविता)
"अच्छी कविता हुई है आदरणीया.. सादर"
Oct 27
Samar kabeer commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post लहरें ( कविता)
"बहना कल्पना भट्ट जी आदाब,अच्छी कविता हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Oct 27
TEJ VEER SINGH commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post लहरें ( कविता)
"हार्दिक बधाई आदरणीय कल्पना भट्ट रौनक जी। बेहतरीन कविता।"
Oct 26
KALPANA BHATT ('रौनक़') posted a blog post

लहरें ( कविता)

आज लहरों ने की बातें मुझसे बोलीं तुम सोचती हो तुम हो बहादुर समय से तुम लडती हो मूर्ख हो तुम जो यह सोचकर दम भरती हो| और वह इठला कर चली गयी दूर वहीं जहाँ से वह आयीं थी किनारे तक और वहाँ पड़े चट्टानों से टकरा-टकरा कर रही थी बातें उनसे, कह रहे थे चट्टान उनसे रुक जाओ करीब आप मेरे ऊपर से न यूँ बह जाओ रुको कुछ घड़ी की हम तपते हैं और देखो हम बन गये है ठोस और जड़ लहरें कुछ देर करती रहीं अटखेलियाँ चट्टान पर से गोल-गोल घूमकर फिर समां गयीं उसी धारा में जहाँ से वह आई थीं अब वह और धारा एक हो चुकी थीं कुछ देर…See More
Oct 26
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on Arpana Sharma's blog post *शरद-पूर्णिमा*- कविता/ अर्पणा शर्मा, भोपाल
"सुंदर प्रस्तुति आदरणीया अर्पणा जी | हार्दिक बधाई |"
Oct 26
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on विनय कुमार's blog post धरती का बोझ- लघुकथा
"अवसरवादी नेताओ पर करारा वार| अच्छी लघुकथा हुई है आदरणीय,जिसके लिए हार्दिक बधाई|"
Oct 26
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on TEJ VEER SINGH's blog post परख - लघुकथा -
"अच्छी लघुकथा हुई है आदरणीय तेज वीर सिंह जी| हार्दिक बधाई|"
Oct 25

Profile Information

Gender
Female
City State
BHOPAL
Native Place
MUMBAI
Profession
house wife
About me
was a teacher for about 20 Years. Recently resigned. I am M.A in English,B.Ed ,LLB.. . interested in literature

KALPANA BHATT ('रौनक़')'s Blog

लहरें ( कविता)

आज लहरों ने की बातें मुझसे 

बोलीं 

तुम सोचती हो तुम हो बहादुर 

समय से तुम लडती हो 

मूर्ख हो तुम 

जो यह सोचकर दम भरती हो| 

और वह इठला कर चली गयी 

दूर 

वहीं जहाँ से वह आयीं थी 

किनारे तक 

और वहाँ पड़े चट्टानों से 

टकरा-टकरा कर रही थी 

बातें उनसे, 

कह रहे थे चट्टान उनसे 

रुक जाओ 

करीब आप मेरे ऊपर से 

न यूँ बह जाओ 

रुको कुछ घड़ी 

की हम तपते हैं 

और…

Continue

Posted on October 26, 2018 at 12:00am — 9 Comments

दो धारी तलवार(लघुकथा)

"अरे सुखिया! सुन तो मन्ने एक बात सूझी हैं, तू कहे तो बताऊँ।"

"का बात सूझी है दद्दा! बताय ही द्यो। मैं तो परेसान हो गया हूँ, एक तो उ बैंक का मनजेर बाबू आज सुबह ही कह रहे थे कि जो करजवा हम लिये रही उ का ब्याज भरने को पड़ी...।"

"ह्म्म्म हम सुन लिए थे उ वा की बात, तभी तो हम आये हैं, तू एक काम कर, तू कल सरपंच से कछु उधार मांग ले, वो इंकार न करेगा, और उ पैसा से अपन का ब्याज की किश्त चुकाई दिए।"

"होउ , इ हे बात तो हमरी ख़ोपड़िया में आयी ही नही। हम कल ही सरपंच जी से बात करेंगे। पर…

Continue

Posted on September 12, 2018 at 10:30am — 7 Comments

सुष्ठु दुनिया(लघुकथा)

 "ऑफ़ ओह! शीला मैं तो तंग आ गया हूँ, तुम्हारे हाथ में चौबीसों घण्टे मोबाइल को देखकर।" शीला अपनी धुन में थी, नित्यक्रम से निबट कर टी.वी. के आगे अपना मनपसन्द सीरियल देख रही थी और साथ में उसकी उँगलियॉ मोबाइल पर लगातार चल रही थी। शीला की सास, और ससुर जी भी वहीं बैठे हुए थे। वे तपाक से बोले," शेखर की माँ! मुझे तुम्हारी जवानी याद आ रही है...।" शीला के कान चौकन्ने हो गये, वह उनकी तरफ देख रही थी। ससुर जी उसके देखने का आशय समझ गये; उन्होंने कहा,"अरे उस ज़माने में यह मुआ मोबाइल -शोबाइल नहीं था, तुम्हारी…

Continue

Posted on August 5, 2018 at 9:25pm — 11 Comments

बारूद का असर( लघुकथा)

कलम को चुप-चाप और उदास बैठे देख बारूद ने पूछा," क्या बात है बहन?"

"कुछ नहीँ! तुम फिर आ गए? चले क्यों नहीं जाते... कह तो दिया तुमसे अब मैं तुम्हे स्वीकार नहीं करूंगी।" गुस्से से कलम बड़बड़ाई।

" मेरे बिना तुम्हारा कोई अस्तित्व ही नहीं हैं, समझीं ! तुम्हें मेरा स्वीकार करना ही होगा।" अट्टहास लेते हुए बारूद ने अपनी अहमियत जतायी।

" नहीं कभी नहीँ ! तुम बदल गए हो अब वो बात नहीं रही, याद करो एक समय वो था जब बिस्मिल की कलम से तुमने यह लिखवाया था : सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है…

Continue

Posted on June 18, 2018 at 1:30pm — 5 Comments

Comment Wall (5 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 10:51pm on August 8, 2017, श्याम किशोर सिंह 'करीब' said…

संदेशात्मक लघुकथा। सहज चित्रण के लिए बधाई।

KALPANA BHATT

At 1:55pm on May 17, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीया कल्पना जी महीने की सक्रिय सदस्य चुने जाने पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 1:26pm on May 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीया 

श्रीमती कल्पना भट्ट जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:34am on May 15, 2016, Rahila said…
बहुत शुक्रिया आदरणीया दी! आपने मुझे दोस्ती के काबिल समझा ।
At 2:10pm on May 1, 2016, pratibha pande said…

आपकी मित्रता मेरे लिए अमूल्य है , धन्यवाद आदरणीया कल्पना जी 

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

राज़ नवादवी commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ६९
"जनाब नरेन्द्र सिंह चौहान साहब, आदाब. ग़ज़ल में शिरकत और सुखन नवाज़ी का तहे दिल से शुक्रिया. सादर. "
6 hours ago
राज़ नवादवी commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ७०
"जी जनाब, आपने जैसा फ़रमाया था, वैसी तरमीम मैंने कर दी है. सादर "
6 hours ago
क़मर जौनपुरी commented on क़मर जौनपुरी's blog post ग़ज़ल-4 (सब परिंदे लड़ रहे हैं...)
"बहुत बहुत शुक्रिया जनाब अजय तिवारी साहब हौसला आफ़ज़ाई के लिए। ऐसे ही इस्लाह का सिलसिला बनाये रखिये।"
6 hours ago
क़मर जौनपुरी commented on क़मर जौनपुरी's blog post ग़ज़ल - 2 ( क़मर जौनपुरी )
"बहुत बहुत शुक्रिया जनाब अजय तिवारी साहब हौसला आफ़ज़ाई के लिए।"
6 hours ago
क़मर जौनपुरी commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल -5 ( दोपहर की धूप में बादल सरीखे छा गए)
"बहुत बहुत शुक्रिया जनाब समर कबीर साहब। आपकी इस्लाह से ग़ज़ल मुकम्मल हुई।"
6 hours ago
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 91 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी आपके उत्साह वर्धन से हम आह्लादित हैं ,हमारी लेखनी सफल हुई ,आपका दिल से आभार"
6 hours ago
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 91 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी उत्साह वर्धन के लिए दिल से आभार"
6 hours ago
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 91 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी उत्साह वर्धन के लिए दिल से आभार"
7 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 91 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सौरभ  भाईजी मेरा प्रयास सार्थक हुआ। हरिगीतिका छंद की प्रशंसा के लिए आपका हृदय से…"
7 hours ago
Samar kabeer commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ७०
"// तीर चलता नहीं ब दस्ते कमाँ होने तक" में क्या ब को बा करने से बात बनेगी// नहीं…"
7 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 91 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीयल लक्ष्मण भाईजी हरिगीतिका छंद की प्रशंसा के लिए आपका हृदय से धन्यवाद, आभार।"
8 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 91 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय आरिफ भाई हरिगीतिका छंद की प्रशंसा के लिए आपका हृदय से धन्यवाद, आभार।"
8 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service