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KALPANA BHATT
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Afroz 'sahr' commented on KALPANA BHATT's blog post अधकटा पेड़(लघुकथा)
"आदरणीया कल्पना जी अति सुंदर लघू कथा कही आपने आपकी लघू कथा अपने उद्देश्य में सफल है !ह्रदय तल से बधाई स्वीकर करें !सादर"
yesterday
अलका 'कृष्णांशी' commented on KALPANA BHATT's blog post अधकटा पेड़(लघुकथा)
" आ0. कल्पना जी,खूबसूरत लघु कथा के लिए बधाई,"
yesterday
KALPANA BHATT commented on Sunil Verma's blog post जड़ें (लघुकथा) -सुनील वर्मा
"बढ़िया लघुकथा कही है आपने आदरणीय सुनील भैया | विषय भी नया है बहुत बहुत बधाई |"
yesterday
KALPANA BHATT shared मिथिलेश वामनकर's discussion on Facebook
Sunday
KALPANA BHATT replied to मिथिलेश वामनकर's discussion मासिक साहित्यिक संगोष्ठी ओबीओ चेप्टर भोपाल : सितम्बर 2017 :: एक रपट
"बहुत सुंदर रिपोर्ट आदरणीय मिथिलेश सर | विलम्ब से पहुंची थी सो सब को नहीं सुन पायी , यहाँ रचनाओ को पढ़कर आनंद आया | सादर धन्यवाद् आदरणीय |"
Sunday
KALPANA BHATT commented on योगराज प्रभाकर's blog post ग़ज़ल नo-२ (योगराज प्रभाकर)
"जेहन-ओ-ख्याल में बसा था और ही कोई,हाँ, ले रहा वो सातवाँ फेरा ज़रूर था !आंसू छुपा रहा था जो चश्मे कि आड़ में,बिछुड़ा हुआ साथी कोई, मेरा ज़रूर था !मीलों तलक तवील था उस घर में फासलावो घर नहीं था, रैन बसेरा ज़रूर था ! बहुत खूब |"
Sunday
KALPANA BHATT commented on योगराज प्रभाकर's blog post ग़ज़ल नo- ३ (योगराज प्रभाकर)
"एक और बेहतरीन कलाम आपका आदरणीय सर | हर शेर पर वाह वाह और वाह |"
Sunday
KALPANA BHATT commented on योगराज प्रभाकर's blog post दिहाड़ीदार (लघुकथा)
"वाह !  एक और गज़ब गज़ब और गज़ब | "
Sunday
KALPANA BHATT commented on योगराज प्रभाकर's blog post कन्या पक्ष (लघुकथा)
"एक तरफ कन्याओं को मान सम्मान दिया जाता है कन्या भोज करवाकर और दूसरी और कन्या का जन्म नहीं होना चाहिए , यह मानसिकता जाने कब बदलेगी ? यह कैसी विडम्बना है , कैसा प्रोग्रेस हुआ है अपने देश में आज तक समझ नहीं आया है | बहुत बहुत बधाई आपको इस कथा के लिए भी…"
Sunday
KALPANA BHATT commented on योगराज प्रभाकर's blog post विषैला सत्य (लघुकथा)
"कितना कटु है यह विषैला सत्य  बहुत कुछ कह गयी यह कथा भी आपकी आदरणीय सर | हार्दिक बधाई |"
Sunday
KALPANA BHATT commented on योगराज प्रभाकर's blog post श्रेय (लघुकथा)
"कम शब्दों में बहुत कुछ कह दिया है सर आपने इस कथा के माध्यम से | रिटायरमेंट के बाद बुजुर्गों की आदतें जब उनको बदलनी पडती है दर्द होता है उनको ,बहुत ही मार्मिक पल को आपने कहा है इस कथा के माध्यम से | आदरणीय रवि सर के कमेंट के कमेंट से भी सीखना मिला है…"
Sunday
KALPANA BHATT commented on योगराज प्रभाकर's blog post मुख्यधारा (लघुकथा)
"ek निर्दोष के अंतर्मन की व्यथा | सर ऐसा समय जिसने भी झेला होगा सच में कितना कष्टदायक  रहा होगा ! आज भी सोचते है तो आह निकल जाती है | पर कहीं न कहीं आज भी ऐसे निर्दोष होंगे जो पीड़ित होंगे | "
Sunday
KALPANA BHATT commented on योगराज प्रभाकर's blog post केक्टस (लघुकथा)
"वाह वाह | आज के आधुनिक जीवन शैली पर एक करार व्यंग्य | गज़ब गज़ब और गज़ब |"
Sunday
KALPANA BHATT commented on योगराज प्रभाकर's blog post नियति (लघुकथा)
"गजब अंदाज़ में आपने बहुत ही सटीक बात कही है आदरणीय सर | बहुत बहुत बधाई |"
Sunday
KALPANA BHATT commented on योगराज प्रभाकर's blog post बलिदानी - (लघुकथा)
"बाबा रे !  "कुछ ख़ास नहीं कर पाया बेटा, बस पैंसठ और इकहत्तर की जंग में दो बेटों को कुर्बान किया है देश के लिए." कितना दर्द है इस वाक्य में | सादर वंदन सर आपकी सोच पर \."
Sunday
KALPANA BHATT commented on योगराज प्रभाकर's blog post कामवाली (लघुकथा)
"बहुत सुंदर लघुकथा हुई है यह भी , सच है आज भी अनेको घरों में बहुओं से ऐसी ही उम्मीद की जाती है | नमन सर |"
Sunday

Profile Information

Gender
Female
City State
BHOPAL
Native Place
MUMBAI
Profession
house wife
About me
was a teacher for about 20 Years. Recently resigned. I am M.A in English,B.Ed ,LLB.. . interested in literature

KALPANA BHATT's Blog

अधकटा पेड़(लघुकथा)

सुंदर से बाग़ के एक कोने में एक अधकटा पेड़ लोगों को आकर्षित तो कर रहा था पर उसकी बदसूरती पर लोग तरह तरह की बातें कर रहे थे |

और क्यों न हो चर्चा उसकी , एक बड़ा सा पेड़ जिसकी छाँव में कभी लोग बैठा करते थे आज उसकी ऐसी हालत ! एक तरफ से लग रहा थे मानो किसीने उसकी टहनियों को तोड़ कर उसकी खूबसूरती को उससे छीन लिया था |" पर ऐसा कोई क्यों करेगा ?" एक राहगीर ने दूसरे से पूछा |

" मुझे लगता है यह काम माली का ही होगा | बड़ा पागल होगा यह माली , पेड़ की कटाई करनी हो तो ढंग से तो करता |" मुँह बिचकाते…

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Posted on September 14, 2017 at 4:30pm — 11 Comments

बदल रहा है इतिहास (लघुकथा)

" यार ,वहां जो चर्चा चल रही है , उसके बारे में कोई जानता है क्या ?" कैंटीन में बैठे हुए करण ने अपने साथियों से पूछा |"

" , क्या वही चर्चा जिसमें इतिहास की बातें चल रही हैं ? सुना है वहां भारत में पहले कौन आया इस विषय पर चर्चा हो रही है |" साथी मित्र ने उत्तर दिया |

दूसरा बोला , ", मुझे तो बचपन से लगता रहा है कि, उफ्फ् कितनी सारी तारीखें , कितने देश और उनके साथ जुड़ा उनका इतिहास | "

" जो भी हो पर यह है तो बड़ा दिलचस्प , समय बदला तारीखें बदली , राजा महाराजा बदले , राज करने…

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Posted on August 29, 2017 at 3:00pm — 7 Comments

ग़ज़ल (प्रथम प्रयास)

१२२ १२२ १२२ १२२

नहीं है यहाँ पर मुझे जो बता दे
सही रास्ता जो मुझे भी दिखा दे

ये कैसी हवा जो चली है यहाँ पर
परिंदा नहीं जो पता ही बता दे

चले थे कभी साथ साथी हमारे
पुरानी लकीरों से यादें मिटा दें

कभी तो मिलेगी ज़िन्दगी पुरानी
वफ़ा की ज्वाला यहाँ भी जला दे

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Posted on August 24, 2017 at 9:00pm — 24 Comments

बरखा ( सार छंद- १६,१२)



छन्न पकैया छन्न पकैया , आयी बरखा रानी

बोली बच्चों अंदर बैठो  , मेरी बूढ़ी नानी |

छन्न पकैया छन्न पकैया , भूख लगी है नानी

गरमा गरम पकौड़े खाएं , बोली गुड़ियाँ रानी |

छन्न पकैया छन्न पकैया , सबर रखो तुम मुनिया

मंडी से लाना होगा अब , प्याज , मिर्च औ धनियाँ|

छन्न पकैया छन्न पकैया , मिलकर खाओ भैया

आओ फिर हम नाचे गायें, करके ता ता थैया |

छन्न पकैया छन्न पकैया , जब जब भरता पानी

छप छप करते हैं पानी…

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Posted on August 19, 2017 at 11:30pm — 14 Comments

Comment Wall (5 comments)

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At 10:51pm on August 8, 2017, श्याम किशोर सिंह 'करीब' said…

संदेशात्मक लघुकथा। सहज चित्रण के लिए बधाई।

KALPANA BHATT

At 1:55pm on May 17, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीया कल्पना जी महीने की सक्रिय सदस्य चुने जाने पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 1:26pm on May 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीया 

श्रीमती कल्पना भट्ट जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:34am on May 15, 2016, Rahila said…
बहुत शुक्रिया आदरणीया दी! आपने मुझे दोस्ती के काबिल समझा ।
At 2:10pm on May 1, 2016, pratibha pande said…

आपकी मित्रता मेरे लिए अमूल्य है , धन्यवाद आदरणीया कल्पना जी 

 
 
 

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