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KALPANA BHATT
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Ravi Prabhakar commented on KALPANA BHATT's blog post पक्का घड़ा ( लघुकथा )
"बहुत बढ़ीया लघुकथा आदरणीय कल्‍पना जी । कथानक व ट्रीटमेंट दोनों जर्बदस्‍त । विशेषकर अंतिम पंक्‍ितयां / बाबा मैंने भट्टी पे काम करते हुए आपको देखा है आप न घबराये, घड़े सही से ही पकाऊंगा  / बहुत ही गहन संदेश प्रेषित कर रही हैं । सुखिया…"
14 hours ago
KALPANA BHATT commented on KALPANA BHATT's blog post सोमेश्वर मंदिर ( संस्मरण)
"आदाब समर भाई जी , अभी कुछ दिनों पहले आपने मेरी एक कविता पर कहा था , पहली नदी है बाद में झरना क्यों ? असल में वो इसी जगह की यादे थी | इस जगह पर अनगिनित यादें है बेहद सुंदर जगह है , घंटो बिताया है समय मैंने | हसेंगे आप गर यह कहूँ की कई बार मैं किताबे…"
yesterday
Tasdiq Ahmed Khan commented on KALPANA BHATT's blog post पक्का घड़ा ( लघुकथा )
"मुहतर्मा कल्पना साहिबा ,संदेश देती सुन्दर लघुकथा हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमायें"
yesterday
Samar kabeer commented on KALPANA BHATT's blog post पक्का घड़ा ( लघुकथा )
"बहना कल्पना भट्ट जी आदाब,अच्छी लगी आपकी लघुकथा,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें और गुणीजनों की बातों का संज्ञान लें ।"
yesterday
Samar kabeer commented on KALPANA BHATT's blog post सोमेश्वर मंदिर ( संस्मरण)
"बहना कल्पना भट्ट जी आदाब,यादों पर मबनी आपकी याददाश्त के पन्नों से उभरे इस सृजन पर बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
Mohammed Arif commented on KALPANA BHATT's blog post पक्का घड़ा ( लघुकथा )
"आदरणीया कल्पना भट्ट जी आदाब, आतंकवाद की पृष्ठभूमि पर लिखी गई औसत दर्ज़े की लघुकथा । कथानक में और कसावट की आवश्यकता है । कथानक और उभरने का अवसर मिलना था जो नहीं मिला । वर्तनीगत अशुद्धियाँ भी आसानी से देखी जा सकती है ।।बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani commented on KALPANA BHATT's blog post पक्का घड़ा ( लघुकथा )
"बेहतरीन कथानक पर बढ़िया प्रस्तुति के लिए सादर हार्दिक बधाई आपको आदरणीय कल्पना भट्ट जी। अंतिम पांच-सात पंक्तियों के स्थान पर कुछ बेहतरीन विचारोत्तेजक समापन भी हो सकता है आपकी सधी हुई लेखनी से। सादर।"
yesterday
KALPANA BHATT commented on KALPANA BHATT's blog post सोमेश्वर मंदिर ( संस्मरण)
"dhanyawad Adarniya Mohit ji"
yesterday
Mohit mishra (mukt) commented on KALPANA BHATT's blog post सोमेश्वर मंदिर ( संस्मरण)
"सरल शब्दों और साधारण वाक्यों में असाधारण अभिव्यक्ति | सुन्दर संस्मरण "
yesterday
KALPANA BHATT posted blog posts
yesterday
Omprakash Kshatriya commented on KALPANA BHATT's blog post सावन ( हाइकू)
"आदरणीय कल्पना भट्ट जी बहुत सुंदर हाइकू लिखे हैं आप ने . बधाई "
Saturday
KALPANA BHATT commented on KALPANA BHATT's blog post सावन ( हाइकू)
"धन्यवाद् आदरणीय विजय निकोरे जी |"
Saturday
KALPANA BHATT commented on KALPANA BHATT's blog post सावन ( हाइकू)
"धन्यवाद आदरणीय गिरिराज सर जी |"
Saturday
KALPANA BHATT commented on KALPANA BHATT's blog post सावन ( हाइकू)
"धन्यवाद् आदरणीय नरेन्द्रसिंह जी |"
Saturday
KALPANA BHATT commented on KALPANA BHATT's blog post सावन ( हाइकू)
"धन्यवाद् आदरणीय रवि शुक्ल जी |"
Saturday
KALPANA BHATT commented on Manisha Saxena's blog post शुरूआत (लघुकथा)
"अच्छी कथा हुई है आदरणीया मनीषा सक्सेना जी | बधाई आपको | "
Saturday

Profile Information

Gender
Female
City State
BHOPAL
Native Place
MUMBAI
Profession
house wife
About me
was a teacher for about 20 Years. Recently resigned. I am M.A in English,B.Ed ,LLB.. . interested in literature

KALPANA BHATT's Blog

सोमेश्वर मंदिर ( संस्मरण)

सन १९८२ , बी वाय के कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स, शरणपुर रोड, नाशिक , यह उनदिनों की बात है जब मैं इस कॉलेज में पढ़ती थी |

हमारी कॉलेज के पैरेलल दो सड़के जाती थी, एक त्रम्बकेश्वर रोड, और दूसरी गंगापुर रोड , और इन दोनों के बीच पड़ता है हमारा कॉलेज रोड|

हमारे कॉलेज से एक रास्ता कट जाता है जो गंगापुर रोड की तरफ जाता है , कॉलेज से करीब ४.८ किलोमीटर की दुरी पर है यह सोमेश्वर मंदिर | महादेव जी का यह एक प्राचीन मंदिर है , गोदावरी नदी के तट पर बसा यह मंदिर अपनी सुंदरता लिए हुए है | उनदिनों…

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Posted on July 22, 2017 at 7:17pm — 4 Comments

पक्का घड़ा ( लघुकथा )

गाँव वालों के बीच इन दिनों एक ही चर्चा चल रही थी और वो थी सुखिया के  बेटे का आतंकवादी बन जाना  | सुखिया एक सीधा सादा कुम्हार था पर उसके हाथ के बने घड़े सुन्दर और पक्के होते थे | आस पास के गाँव वाले भी उसके पास घड़े खरीदने आते थे |

लोगों को जब उनके बेटे के बारे में पता चला तो वे सब सकते में आ गए ।



किसीने कहा , " घोर कलजुग है भैया , किसीका भरोसा नहीं । "



कोई बोला ," इसमें तो मुझे उस सुखिया कुम्हार की ही गलती दिखे है , माटी के घड़े तो बना दिए पर खुद…

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Posted on July 22, 2017 at 5:47pm — 5 Comments

सावन ( हाइकू)

आया सावन 

बोले मयूरा सुनो 

उसकी बोली |

२ 

गरज गए

बादल सावन के 

नाचो औ  गाओ |

३ 

गीत कोई तो 

सुना दो सावन के 

मनवा डोले  |

४ 

मधुर गीत 

गाती जब  सखियाँ

पिया पुकारें |

५ 

हरित धरा 

कहती कुछ कुछ 

सुनो तो सही |

चमके जब 

बिजली डर लागे 

ढूँढे पिया को…

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Posted on July 18, 2017 at 10:30pm — 13 Comments

लो आ गया सावन ( कविता)

लो आ गया फिर से सावन 

संग लाया यादें मन भावन 

नदी का किनारा अमरुद का पेड़,

पत्थर उठाकर तुम्हारा करना खेल 

पानी उछालना , फिर हंस देना 

अमरुद तोड़ खुद ही खा लेना 

थी अठखेलियाँ वो जो तुम्हारी 

बस गयी तब से साँसों में हमारी

उछलते छीटों  से खुद को भी भिगौना 

गीले होकर रूठ कर बैठ जाना 

कीचड़ लगाकर फिर भाग जाना 

पेड़ की आड़ से फिर मुस्कुराना 

शैतान सी हंसी , मस्ती की…

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Posted on July 16, 2017 at 7:00pm — 11 Comments

Comment Wall (4 comments)

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At 1:55pm on May 17, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीया कल्पना जी महीने की सक्रिय सदस्य चुने जाने पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 1:26pm on May 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीया 

श्रीमती कल्पना भट्ट जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:34am on May 15, 2016, Rahila said…
बहुत शुक्रिया आदरणीया दी! आपने मुझे दोस्ती के काबिल समझा ।
At 2:10pm on May 1, 2016, pratibha pande said…

आपकी मित्रता मेरे लिए अमूल्य है , धन्यवाद आदरणीया कल्पना जी 

 
 
 

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