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santosh khirwadkar
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SALIM RAZA REWA commented on santosh khirwadkar's blog post हुस्न को ......संतोष
"आ. ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए बधाई."
yesterday
santosh khirwadkar commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (आ गये सिमट के ) --------------------------------
"आदरणीय तस्दीक़ साहब, बहुत शानदार ग़ज़ल कही...... बधाई स्वीकारें !!!"
Tuesday
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post हुस्न को ......संतोष
"ह्रदय से आभर आदरणीय आरिफ साहब , मैं अवश्य ही आप के इस आदेश का पालन करूँगा !! "
Tuesday
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post हुस्न को ......संतोष
"प्रणाम आदरणीय समर साहब , तहेदिल से शुक्रिया !!"
Tuesday
Samar kabeer commented on santosh khirwadkar's blog post हुस्न को ......संतोष
"जनाब संतोष जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें ।"
Tuesday
Mohammed Arif commented on santosh khirwadkar's blog post हुस्न को ......संतोष
"रौशनी मिले सबको इक दिया जला कर रख । बहुत ही उम्दा शे'र । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद आदरणीय संतोष खिरवड़कर जी । नोट:-कितना अच्छा हो यदि आप जैसे ग़ज़गो साहित्य की अन्य विधाओं में अपनी सृजनशीलता का परिचय देने वालों को भी अपनी…"
Tuesday
santosh khirwadkar posted a blog post

हुस्न को ......संतोष

अरकान:-फाइलुन मफ़ाईलुनहुस्न को छुपा कर रखतू इसे बचा कर रखअक्स है मेरा इनमेंआँखों को झुका कर रखइश्क़ है अगर तुझकोआरज़ू दबा कर रखज़िन्दगी का मारा हूँसीने से लगा कर रखरौशनी मिले सबकोइक दिया जला कर रख~संतोष(मौलिक एवं अप्रकाशित)See More
Tuesday
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post है कौन....”संतोष”
"हृदय से धन्यवाद आदरणीय सौरभ जी ...."
Sunday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on santosh khirwadkar's blog post है कौन....”संतोष”
"इस पटल पर आपकी कोई प्रस्तुति पहली बार देख रहा हूँ. आश्वस्तिकारी इस प्रस्तुति के लिएहार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाएँ  ग़ज़ल पर आपका अभ्यास सतत बना रहे.  शुभ-शुभ"
Sunday
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post है कौन....”संतोष”
"शुक्रिया आदरणीय अजय जी ..."
Sunday
Ajay Tiwari commented on santosh khirwadkar's blog post है कौन....”संतोष”
"आदरणीय संतोष जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है. शुभकामनाएं. सादर"
Sunday

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर and santosh khirwadkar are now friends
Oct 12
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post है कौन....”संतोष”
"प्रणाम आदरणीय समर साहब, तहेदिल से शुक्रिया!!’"
Oct 12
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post है कौन....”संतोष”
"आदरणीय निलेश जी , शुक्रिया!!! आप के इस बारीक निखार पर अवश्य ही सुधार का प्रयत्न करूँगा!!"
Oct 12
Samar kabeer commented on santosh khirwadkar's blog post है कौन....”संतोष”
"जनाब संतोष जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
Oct 12
Nilesh Shevgaonkar commented on santosh khirwadkar's blog post है कौन....”संतोष”
"आ. संतोष जी अच्छी ग़ज़ल हुई है ..मेरा हमदर्द अकेला वो नज़र आता है में वो के साथ तकरार हो रही है .घेर लेते हैं मुझे जब भी अँधेरे ग़म केसाथ हमदर्द अकेला वो नज़र आता है... अब देखिये सादर "
Oct 12

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhopal
Native Place
Indore
Profession
Govt service
About me
National table-tennis player/coach

Santosh khirwadkar's Blog

हुस्न को ......संतोष

अरकान:-फाइलुन मफ़ाईलुन

हुस्न को छुपा कर रख
तू इसे बचा कर रख

अक्स है मेरा इनमें
आँखों को झुका कर रख

इश्क़ है अगर तुझको
आरज़ू दबा कर रख

ज़िन्दगी का मारा हूँ
सीने से लगा कर रख

रौशनी मिले सबको
इक दिया जला कर रख
~संतोष
(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Posted on October 16, 2017 at 10:52pm — 5 Comments

है कौन....”संतोष”

अरकान:-फ़ाइलातुन फ़इलातुन फ़्इलातुन फेलुन



है कहाँ, कौन है,कैसा वो नज़र आता है

ख़ुद में कम मुझ में ज़ियादा वो नज़र आता है



क्या तअल्लुक़ है मेरा उससे बताऊँ कैसे

हर दुआ में मुझे चहरा वो नज़र आता है



तिश्नगी जब मुझे दीदार की तड़पाये तो

ऐसे हालात में दरया वो नज़र आता है



घेर लेते हैं मुझे जब भी अँधेरे ग़म के

मेरा हमदर्द अकेला वो नज़र आता है



तुमने पूछा कभी'संतोष'से जाकर यारो

किसलिये भीड़ में तन्हा वो नज़र आता है

#संतोष

(मौलिक… Continue

Posted on October 11, 2017 at 8:53pm — 8 Comments

देख रिश्तों की ......संतोष

अरकान:-फाइलुन फाइलुन फाइलुन फाइलुन

देख रिश्तों की ऐसी बनावट न कर
दोस्त है दुश्मनी की मिलावट न कर

झूट कहने में हर शख़्स माहिर हुआ
सच यहाँ बोलने की दिखावट न कर

ज़ख़्म दिल के हैं दिल में उन्हें दफ़्न रख
अपने चहरे पे उनकी सजावट न कर

टूट जायेंगे रिश्ते ज़रा देर में
कच्चे धागों से इनकी बुनावट न कर

भूक से थे ये बेताब सोए अभी
देख ये जाग जायेंगे आहट न कर
#संतोष
(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Posted on October 7, 2017 at 6:17pm — 8 Comments

अपने ग़म को मैं........संतोष

अरकान-फ़ाइलातून मफ़ाइलुन फेलुन

अपने ग़म को मैं छुपा लेता हूँ
सबकी ख़ुशियों का मज़ा लेता हूँ

दिल में जब याद का उठे तूफ़ां
तेरी तस्वीर बना लेता हूँ

सामने जब वो मेरे आता है
अपने सर को मैं झुका लेता हूँ

जब भी होता है वो ख़फ़ा मुझसे
प्यार से उसको मना लेता हूँ

दिल में जब टीस मेरे उठती है
अश्क मैं छुप के बहा लेता हूँ
#संतोष
(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Posted on September 27, 2017 at 8:00pm — 16 Comments

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