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santosh khirwadkar
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santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post भुलाने के लिए राज़ी...संतोष
"धन्यवाद आदरणीय सुरेन्द्र जी!!!"
11 hours ago
Afroz 'sahr' commented on santosh khirwadkar's blog post भुलाने के लिए राज़ी...संतोष
"आदरणीय संतोष जी अच्छी ग़ज़ल हुई है मेंरी और से बहुत बधाई आपको,,"
21 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on santosh khirwadkar's blog post भुलाने के लिए राज़ी...संतोष
"आद0 सन्तोष जी सादर अभिवादन। बेहतरीन ग़ज़ल पर शैर दर शैर मुबारकबाद कुबूल फरमायें।"
yesterday
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post भुलाने के लिए राज़ी...संतोष
"शुक्रिया आदरणीय अजय साहब...!!!"
yesterday
Ajay Tiwari commented on santosh khirwadkar's blog post भुलाने के लिए राज़ी...संतोष
"आदरणीय संतोष जी, आपने मक्ते में आपने नाम का इस्तेमाल जिस तरह किया है वो बेहतरीन है. अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाईयाँ. सादर "
yesterday
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post भुलाने के लिए राज़ी...संतोष
"आदरणीय आरिफ़ साहब ...शुक्रिया!!!"
Sunday
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post भुलाने के लिए राज़ी...संतोष
"आदरणीय विश्वकर्मा जी ,शुक्रिया!!!"
Sunday
Mohammed Arif commented on santosh khirwadkar's blog post भुलाने के लिए राज़ी...संतोष
"आदरणीय संतोष खिरवड़कर जी आदाब,                                          बेहतरीन ग़ज़ल । हर शे'र बढ़िया । दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें ।"
Saturday
Ram Awadh VIshwakarma commented on santosh khirwadkar's blog post भुलाने के लिए राज़ी...संतोष
"आदरणीय संतोष जी खूबसूरत ग़जल के लिये बधाई।"
Saturday
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post भुलाने के लिए राज़ी...संतोष
"आदरणीय समर साहब ,प्रणाम के साथ तहेदिल से शुक्रिया!!!"
Friday
Samar kabeer commented on santosh khirwadkar's blog post भुलाने के लिए राज़ी...संतोष
"जनाब संतोष जी आदाब,बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
Friday
santosh khirwadkar posted blog posts
Friday
santosh khirwadkar commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल - कोई आँचल उड़ान चाहता है
"कोई आँचल उड़ाना चाहता है.....आदरणीय ख़ूबसूरत ग़ज़ल हुई!!"
Nov 24
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post कुछ मिठास पाने को .....संतोष
"शुक्रिया आदरणीय अफ़रोज़ साहब !!"
Nov 24
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post कुछ मिठास पाने को .....संतोष
"धन्यवाद आदरणीय विजय जी !!!!"
Nov 24
Afroz 'sahr' commented on santosh khirwadkar's blog post कुछ मिठास पाने को .....संतोष
"आदरणीय संतोष जी इस रचना पर बहुत बहुत बधाई आपको, "तैर कर तो दरया को पार कर नहीं सकते" ये मिसरा " मोहमिल" है। देखिएगा, सादर,,"
Nov 23

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhopal
Native Place
Indore
Profession
Govt service
About me
National table-tennis player/coach

Santosh khirwadkar's Blog

भुलाने के लिए राज़ी...संतोष

ग़ज़ल

मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन

भुलाने के लिए राज़ी तुझे ये दिल नहीं होता

तभी तो याद से तेरी कभी ग़ाफ़िल नहीं होता

महब्बत को अभी तक मैंने अपनी राज़ रक्खा है

तुम्हारा ज़िक्र यूँ मुझसे सरे महफ़िल नहीं होता

तुझे ही ढूँढता रहता मैं अपने आप में हर दम

सनम तू मेरे जीवन में अगर शामिल नहीं होता

दग़ा देना ही आदत बन गई हो जिसकी ऐ यारो

भरोसे के कभी वो आदमी क़ाबिल नहीं होता

हमेशा बीज बोता है जो…

Continue

Posted on December 8, 2017 at 9:30am — 11 Comments

कुछ मिठास पाने को .....संतोष

फ़ाइलुन मफ़ाईलुन फाइलुन मफ़ाईलुन



कुछ मिठास पाने को तल्खियाँ ज़रूरी हैं

क़ुर्ब के लिए जैसे दूरियाँ ज़रूरी हैं



सिर्फ़ रोने धोने से दिल न उनका पिघलेगा

साथ अश्क बारी के सिसकियाँ ज़रूरी हैं



तैर कर तो दरया को पार कर नहीं सकते

इसके वास्ते यारो किश्तियाँ ज़रूरी हैं



देख सूखी धरती में फ़स्ल उग नहीं सकती

बारिशों के मौसम में बदलियाँ ज़रूरी हैं



जब मकां बनाओ तो ध्यान ये भी रख लेना

धूप के लिए कुछ तो खिड़कियाँ ज़रूरी… Continue

Posted on November 18, 2017 at 11:30am — 13 Comments

खेल दिल का अजीब होता है.....संतोष

फ़ाइलातून मफ़ाइलुन फेलुन

खेल दिल का अजीब होता है
कौन किसके क़रीब होता है

प्यार मिलता,किसी को रुसवाई
अपना अपना नसीब होता है

काम आए बुरे समय में जो
वो ही सच्चा हबीब होता है

प्यार है जिसके पास वो इंसां
इस जहाँ में ग़रीब होता है

राज़ जिसको बता दिया दिल का
वो ही मेरा रक़ीब होता है
#संतोष
(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Posted on October 26, 2017 at 4:59pm — 12 Comments

हुस्न को ......संतोष

अरकान:-फाइलुन मफ़ाईलुन

हुस्न को छुपा कर रख
तू इसे बचा कर रख

अक्स है मेरा इनमें
आँखों को झुका कर रख

इश्क़ है अगर तुझको
आरज़ू दबा कर रख

ज़िन्दगी का मारा हूँ
सीने से लगा कर रख

रौशनी मिले सबको
इक दिया जला कर रख
~संतोष
(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Posted on October 16, 2017 at 10:52pm — 5 Comments

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