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santosh khirwadkar
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santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post पहले था अश्क़बार...संतोष....
"धन्यवाद आदरणीय सुरेन्द्र जी ...."
Jan 29
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post तेरे नज़दीक ही हर वक़्त ....”संतोष”
"धन्यवाद आदरणीय “मुसाफ़िर” जी "
Jan 24
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on santosh khirwadkar's blog post तेरे नज़दीक ही हर वक़्त ....”संतोष”
"आ. भाई संतोष जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई । दछसरे शेर में पर तथा मगर का प्रयोग एक ही अर्थ के लिए प्रयोग होने सज अटपटा लग रहा है । गौर कीजिएगा ।"
Jan 24
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post तेरे नज़दीक ही हर वक़्त ....”संतोष”
"धन्यवाद एवं आभार आदरणीय विश्वकर्मा साहब!!"
Jan 22
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post तेरे नज़दीक ही हर वक़्त ....”संतोष”
"शुक्रिया आदरणीय तस्दीक़ साहब !!!"
Jan 22
Ram Awadh VIshwakarma commented on santosh khirwadkar's blog post तेरे नज़दीक ही हर वक़्त ....”संतोष”
"आदरणीय संतोष खिरवड़कर साहब खूबसूरत ग़ज़ल कहने के लिये बधाई।"
Jan 22
Tasdiq Ahmed Khan commented on santosh khirwadkar's blog post तेरे नज़दीक ही हर वक़्त ....”संतोष”
"जनाब संतोष साहिब , सुन्दर ग़ज़ल हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं । शेर4 में मिसरों में रब्त क़ायम नहीं हो सका , उला मिसरा यूँ करसकते हैं  यह बता मुझको सनम दिल दिया तूने जब से ।"
Jan 22
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post तेरे नज़दीक ही हर वक़्त ....”संतोष”
"आदरणीय आरिफ़ साहब तहेदिल से शुक्रिया!!!"
Jan 21
Mohammed Arif commented on santosh khirwadkar's blog post तेरे नज़दीक ही हर वक़्त ....”संतोष”
"आदरणीय संतोष जी आदाब,                         बहुत ही बढ़िया अश'आर । हर शे'र ज़ोरदार । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए ।"
Jan 21
santosh khirwadkar posted a blog post

तेरे नज़दीक ही हर वक़्त ....”संतोष”

 फ़ाइलातुन फ़ईलातुन फ़ईलातुन फ़ेलुनतेरे नज़दीक ही हर वक़्त भटकता क्यों हूँतू बता फूल के जैसा मैं महकता क्यों हूँमैं न रातों का हूँ जुगनू न कोई तारा परउसकी आँखों में मगर फिर भी चमकता क्यों हूँइस पहेली का कोई हल तो बताओ यारोहिज्र की रातों में आतिश सा दहकता क्यों हूँघर बनाया है तेरे दिल में उसी दिन से सनमसारी दुनिया की निगाहों में खटकता क्यों हूँहासिदों को बड़ी तश्वीश है इसकी जानमबनके धड़कन मैं तेरे दिल में धड़कता क्यों हूँजब तुझे मुझ से महब्बत नहीं ये बतला देक़तरा क़तरा तेरी आँखों से टपकता क्यों…See More
Jan 20
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on santosh khirwadkar's blog post पहले था अश्क़बार...संतोष....
"आद0 सन्तोष खैरवाड़कर जी सादर अभिवादन।  लाख दुनियां ने तोड़ना चाहा दिल से दिल का क़रार आज भी है वाह, बढ़िया गजल  कही आपने। बाधाइयाँ "
Dec 26, 2017
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post पहले था अश्क़बार...संतोष....
"धन्यवाद आदरणीय अजय जी ...."
Dec 26, 2017
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post पहले था अश्क़बार...संतोष....
"शुक्रिया ,आदरणीय अफ़रोज़ साहब !!!"
Dec 26, 2017
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post पहले था अश्क़बार...संतोष....
"आदरणीय समर साहब प्रणाम सहित धन्यवाद....."
Dec 26, 2017
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post पहले था अश्क़बार...संतोष....
"आदरणीय आरिफ़ साहब धन्यवाद....."
Dec 26, 2017
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post पहले था अश्क़बार...संतोष....
"आदरणीय बृजेश जी शुक्रिया...."
Dec 26, 2017

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Indore
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National table-tennis player/coach

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तेरे नज़दीक ही हर वक़्त ....”संतोष”

 

फ़ाइलातुन फ़ईलातुन फ़ईलातुन फ़ेलुन

तेरे नज़दीक ही हर वक़्त भटकता क्यों हूँ

तू बता फूल के जैसा मैं महकता क्यों हूँ

मैं न रातों का हूँ जुगनू न कोई तारा पर

उसकी आँखों में मगर फिर भी चमकता क्यों हूँ

इस पहेली का कोई हल तो बताओ यारो

हिज्र की रातों में आतिश सा दहकता क्यों हूँ

घर बनाया है तेरे दिल में उसी दिन से सनम

सारी दुनिया की निगाहों में खटकता क्यों हूँ

हासिदों को बड़ी तश्वीश है इसकी…

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Posted on January 20, 2018 at 11:21am — 8 Comments

पहले था अश्क़बार...संतोष....

फ़ाइलातून मफ़ाईलुन फेलुन

पहले था अश्क़बार आज भी है
दिल मेरा सोगवार आज भी है

मैं नहीं हूँ किसी भी लायक़ पर
आपको एतिबार आज भी है

जो था पहले वही है रिश्ता-ए-दिल
प्यार वो बे-शुमार आज भी है

इश्क़ आँखें बिछाए बैठा है
आपका इन्तिज़ार आज भी है

लाख दुनियां ने तोड़ना चाहा
दिल से दिल का क़रार आज भी है

#संतोष

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Posted on December 23, 2017 at 6:04am — 12 Comments

धोखे ने मुझको इश्क़ में ......संतोष

ग़ज़ल

मफ़्ऊल फ़ाइलात मफ़ाईल फाइलुन

धोखे ने मुझको इश्क़ में क्या क्या सिखा दिया

गिरना सिखा दिया है,सँभलना सिखा दिया

रोती थीं ज़ार ज़ार ये,वादे ने आपके

आँखों को इन्तिज़ार भी करना सिखा दिया

सूरज की तेज़ धूप बड़ा काम कर गई

ख़्वाबों के दायरे से निकलना सिखा दिया

अपनों की ठोकरों ने गिराया था बारहा

ग़ैरों ने सीधी राह पे चलना सिखा दिया

"संतोष"दुश्मनों का करूँ शुक्र किस तरह

मुझको भी दोस्ती का सलीक़ा सिखा…

Continue

Posted on December 14, 2017 at 8:30pm — 12 Comments

भुलाने के लिए राज़ी...संतोष

ग़ज़ल

मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन

भुलाने के लिए राज़ी तुझे ये दिल नहीं होता

तभी तो याद से तेरी कभी ग़ाफ़िल नहीं होता

महब्बत को अभी तक मैंने अपनी राज़ रक्खा है

तुम्हारा ज़िक्र यूँ मुझसे सरे महफ़िल नहीं होता

तुझे ही ढूँढता रहता मैं अपने आप में हर दम

सनम तू मेरे जीवन में अगर शामिल नहीं होता

दग़ा देना ही आदत बन गई हो जिसकी ऐ यारो

भरोसे के कभी वो आदमी क़ाबिल नहीं होता

हमेशा बीज बोता है जो…

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Posted on December 8, 2017 at 9:30am — 11 Comments

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