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santosh khirwadkar
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santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post क्या सबब था...संतोष
"शुक्रिया आ. गुमनाम जी "
Jun 8
gumnaam pithoragarhi commented on santosh khirwadkar's blog post क्या सबब था...संतोष
"खूबसूरत ग़ज़ल के लिए बहुत बहुत बधाई........."
Jun 8
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post क्या सबब था...संतोष
"आभार आ.लक्ष्मण जी "
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"शुक्रिया आ.महेंद्र जी "
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"धन्यवाद रोहित जी "
Jun 7
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on santosh khirwadkar's blog post क्या सबब था...संतोष
"आ. भाई संतोष जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Jun 7
Mahendra Kumar commented on santosh khirwadkar's blog post क्या सबब था...संतोष
"आदरणीय संतोष जी, बढ़िया ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. 1. दूसरा शेर और बेहतर हो सकता है. 2. सादगी की मैंने ये क़ीमत चुकाई उम्र भर    जुर्म कोई और करता क़र्ज़ मैं भरता रहा सादर."
Jun 6
Rohit Dubey "योद्धा " commented on santosh khirwadkar's blog post क्या सबब था...संतोष
"kya baat hai ! Lajavab kavita !"
Jun 5
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post क्या सबब था...संतोष
"धन्यवाद आ.चौहान जी "
Jun 5
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post क्या सबब था...संतोष
"शुक्रिया आ.आरिफ़ साहब"
Jun 5
narendrasinh chauhan commented on santosh khirwadkar's blog post क्या सबब था...संतोष
"खुब सुन्दर रचना"
Jun 4
Mohammed Arif commented on santosh khirwadkar's blog post क्या सबब था...संतोष
"आदरणीय संतोष जी आदाब,                        बहुत ही अच्छी ग़ज़ल । शे'र दर शे'र दाद के साथ दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें ।"
Jun 4
santosh khirwadkar posted a blog post

क्या सबब था...संतोष

अरकान फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुनक्या सबब था,किसलिये दुनिया से मैं डरता रहासर झुका कर जिसने जो भी कह दिया करता रहासी दिया था मेरे होटों को ज़माने ने मगरज़िक्र सुब्ह-ओ-शाम तेरा फिर भी मैं करता रहाज़िन्दगी के रास्ते में ज़ख़्म जो मुझको मिलेचुपके चुपके प्यार के मरहम से वो भरता रहाजाते जाते वो मुझे कह कर गये थे इसलियेलम्हा लम्हा ज़िन्दगी जीता रहा मरता रहासादगी की मैंने ये क़ीमत चुकाई उम्र भरजुर्म कोई और करता दण्ड में भरता रहा~संतोष_खिरवड़कर(मौलिक एवं अप्रकाशित)See More
Jun 3
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post यारों ख़ुदा ये देख के हैरान हो गया....संतोष!!
"धन्यवाद आ.विजय जी !!!"
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vijay nikore commented on santosh khirwadkar's blog post यारों ख़ुदा ये देख के हैरान हो गया....संतोष!!
"गज़ल अच्छी लगी। बधाई।"
May 15
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post यारों ख़ुदा ये देख के हैरान हो गया....संतोष!!
"प्रणाम आ. समर साहब ...शुक्रिया!! अभी दुरुस्त कर लेता हूँ"
May 13

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Male
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Bhopal
Native Place
Indore
Profession
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About me
National table-tennis player/coach

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क्या सबब था...संतोष

अरकान फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन

क्या सबब था,किसलिये दुनिया से मैं डरता रहा

सर झुका कर जिसने जो भी कह दिया करता रहा



सी दिया था मेरे होटों को ज़माने ने मगर

ज़िक्र सुब्ह-ओ-शाम तेरा फिर भी मैं करता रहा



ज़िन्दगी के रास्ते में ज़ख़्म जो मुझको मिले

चुपके चुपके प्यार के मरहम से वो भरता रहा



जाते जाते वो मुझे कह कर गये थे इसलिये

लम्हा लम्हा ज़िन्दगी जीता रहा मरता रहा



सादगी की मैंने ये क़ीमत चुकाई उम्र…

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Posted on June 3, 2018 at 4:34pm — 12 Comments

यारों ख़ुदा ये देख के हैरान हो गया....संतोष!!

अरकान:-

मफ़ऊल फ़ाईलात मफ़ाईल फ़ाइलुन



यारों ख़ुदा ये देख के हैरान हो गया,

इंसा जिसे बनाया था हैवान हो गया।।



भेजा था इसको अम्न की ख़ातिर जहान में,

कैसे ख़िलाफ़ अम्न के इंसान हो गया।।



शैतान का भी शर्म से देखो झुका है सर,

इंसान ख़ुद ही आज तो शैतान हो गया।।



चिंता में बेटियों की हर इक बाप है यहाँ,

अब क्या बताऊँ मैं तो परेशान हो गया।।



ढाये यहाँ पे गंदी सियासत ने वो सितम,

लगता है जैसे मौत का सामान हो गया।।…

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Posted on May 11, 2018 at 8:30pm — 6 Comments

गुज़रे वक़्तों की वो तहरीर.....संतोष

अरकान:-

फ़ाइलातुन फ़इलातुन फ़इलातुन फ़ेलुन

गुज़रे वक़्तों की वो तहरीर सँभाले हुए हैं,

दिल को बहलाने की तदबीर सँभाले हुए हैं।।

बाँध रक्खा है हमें जिसने अभी तक जानाँ,

हम महब्बत की वो ज़ंजीर सँभाले हुए हैं।।

देखते रहते हैं अजदाद के चहरे जिसमें,

हम वफ़ाओं की वो तस्वीर सँभाले हुए हैं।।

जिन लकीरों में नजूमी ने कहा था,तू है,

दोनों हाथों में वो तक़दीर सँभाले हुए हैं।।

वस्ल की शब…

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Posted on April 17, 2018 at 11:21am — 16 Comments

खुली आँखें हैं और सोया हुआ हूँ ...संतोष

अरकान:-

मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन फ़ऊलुन

खुली आँखें हैं,पर सोया हुआ हूँ

तुम्हारी याद में डूबा हुआ हूँ।।



बदन इक दिन छुआ था तुमने मेरा

उसी दिन से बहुत महका हुआ हूँ।।



मुझे पागल समझती है ये दुनिया

तसव्वुर में तेरे खोया हुआ हूँ।।



जहाँ तुम छोड़कर मुझको गये थे

उसी रस्ते पे मैं बैठा हुआ हूँ।।



ख़ुदा का है करम 'संतोष' मुझ पर

हर इक महफ़िल पे मैं छाया हुआ हूँ।।

#संतोष_खिरवड़कर

(मौलिक एवं…

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Posted on March 29, 2018 at 4:30pm — 12 Comments

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