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बसंत कुमार शर्मा
  • Male
  • जबलपुर, मध्यप्रदेश
  • India
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बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

लट जाते हैं पेड़- एक गीत

राह किसी की कहाँ रोकते,हट जाते हैं पेड़इसकी, उसकी, सबकी खातिर,कट जाते हैं पेड़ तपन धूप की खुद सह लेतेदेते सबको शीतल छाया.पत्ते, छाल, तना, जड़, सब कुछ,लुटा रहे हैं पूरी काया. पत्थर भी सह, फल देने को,पट जाते हैं पेड़.   किसने रोपा किसने पाला,कोई भी हिसाब कब रखते.पात झरे, शाखाएँ टूटी,सहा सभी कुछ हँसते हँसते. उठें सहन में दीवारें, सँग,सट जाते हैं पेड़.होते फूल और फल कम जब,सबके मन को कहाँ सुहाते.साथ उम्र के बढती मुश्किल,साँस नहीं खुल कर ले पाते.   कंकरीट में कैदी होकर,लट जाते हैं पेड़"मौलिक एवं अप्रकाशित"See More
1 hour ago
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post सूर्य उगाने जैसा हो- गीत
"आदरणीया  Neelam Upadhyaya जी हृदय तल से आभार आपका "
2 hours ago
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post सूर्य उगाने जैसा हो- गीत
"आदरणीय  Tasdiq Ahmed Khan   जी हृदय तल से आभार आपका "
2 hours ago
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post सूर्य उगाने जैसा हो- गीत
"आदरणीय  vijay nikore  जी हृदय तल से आभार आपका "
2 hours ago
Neelam Upadhyaya commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post सूर्य उगाने जैसा हो- गीत
"" हो सबकी हर भोर सुनहरी, संध्या मधुर सुहानी. देखें मीठे सपने, जिनमें, सब कुछ पाने जैसा हो."आदरणीय बसंत कुमार जी, नमस्कार। सुन्दर  गीत की प्रस्तुति।  हार्दिक बधाई। "
3 hours ago
बसंत कुमार शर्मा commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (हो गई उनकी महरबानी है)
"बहुत खूबसूरत अशआर हुए हैं , आनंद आ गया आदरणीय "
8 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post सूर्य उगाने जैसा हो- गीत
"जनाब बसंत कुमार साहिब , सुन्दर गीत लिखा है आपने, मुबारकबाद क़ुबुल फरमाएं |"
23 hours ago
vijay nikore commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post सूर्य उगाने जैसा हो- गीत
"इस सुन्दर गीत के लिए हार्दिक बधाई।"
yesterday
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post सूर्य उगाने जैसा हो- गीत
"आदरणीया Rakshita Singh जी सादर नमस्कार एवं दिल से शुक्रिया आपका "
yesterday
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post सूर्य उगाने जैसा हो- गीत
"आदरणीय  gumnaam pithoragarhi जी दिल से शुक्रिया आपका "
yesterday
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post सूर्य उगाने जैसा हो- गीत
"आदरणीया KALPANA BHATT ('रौनक़')  जी दिल से शुक्रिया आपका "
yesterday
बसंत कुमार शर्मा commented on ram shiromani pathak's blog post ग़ज़ल(212)
"वाह बहुत खूब "
yesterday
बसंत कुमार शर्मा commented on Rakshita Singh's blog post बेबसी...
"वाह खूबसूरत अल्फाज पिरोये हैं आपने दर्द में डुबोकर "
yesterday
बसंत कुमार शर्मा commented on Naveen Mani Tripathi's blog post दे गया दर्द कोई साथ निभाने वाला
"वाह बहुत खूबसूरत गजल हुई है आदरणीय "
yesterday
Rakshita Singh commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post सूर्य उगाने जैसा हो- गीत
"आदरणीय बसंत जी नमस्कार!  हिन्दी के सुन्दर शब्दों से रची बहुत ही अनुपम रचना... हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।।"
yesterday
gumnaam pithoragarhi commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post सूर्य उगाने जैसा हो- गीत
"शानदार गीत के लिए बधाई........."
yesterday

Profile Information

Gender
Male
City State
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
Native Place
धौलपुर
Profession
भारतीय रेल यातायात सेवा
About me
बोन्साई एवं कविता लेखन में रूचि

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लट जाते हैं पेड़- एक गीत

राह किसी की कहाँ रोकते,

हट जाते हैं पेड़

इसकी, उसकी, सबकी खातिर,

कट जाते हैं पेड़

 

तपन धूप की खुद सह लेते

देते सबको शीतल छाया.

पत्ते, छाल, तना, जड़, सब कुछ,…

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Posted on June 20, 2018 at 4:00pm

सूर्य उगाने जैसा हो- गीत

जीवन की सूनी राहों में,

मधु बरसाने जैसा हो.

अबकी बार तुम्हारा आना

सचमुच आने जैसा हो.

 

धूप कुनकुनी खिले माघ में,

भीगा-भीगा हो सावन.

बादल गरजें जिसकी छत पर,…

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Posted on June 18, 2018 at 10:00am — 18 Comments

गजल- फिर कोई मीठी शरारत हो गई है

मापनी - 2122 2122 2122

 

आपसे इतनी मुहब्बत हो गई है

लोग कहते हैं कि आफत हो गई है

 

नींद मेरी हो न पायी थी मुकम्मल

फिर कोई मीठी शरारत हो गई है

 

ढूँढता है रोज मिलने का बहाना…

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Posted on June 12, 2018 at 5:00pm — 18 Comments

लिखा बेहतर नहीं जाता- गजल

1222  1222 1222 1222

 

शिकायत है बहुत खुद से कि मैं क्यों कर नहीं जाता  

मुझे जिससे मुहब्बत है, उसी के घर नहीं जाता

 

अगर मिलना है’ उससे तो, तुम्हें जाना पड़ेगा खुद

चला करता है दरिया ही, कहीं सागर नहीं जाता

 

मधुर…

Continue

Posted on June 11, 2018 at 3:30pm — 11 Comments

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At 2:23pm on September 28, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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"आदरणीय रक्षिता जी, नमस्कार।  बहुत ही हृदयस्पर्शी रचना है । प्रस्तुति के लिए बधाई ।  "
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