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बसंत कुमार शर्मा
  • Male
  • जबलपुर, मध्यप्रदेश
  • India
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रवि भसीन 'शाहिद' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post न इतने सवाल कर- ग़ज़ल
"आदरणीय बसंत कुमार शर्मा साहिब, जो बह्र आपने इस्तेमाल की है वो ये है:मुज़ारे मुसम्मन अख़रब मकफ़ूफ़ महज़ूफ़221 / 2121 / 1221 / 212 ये बहुत ही मशहूर बह्र है, और इसमें कई लाजवाब ग़ज़लें हैं, जैसे:अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़ के क़ाबिल नहीं रहाजिस दिल पे नाज़ था मुझे वो…"
7 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post न इतने सवाल कर- ग़ज़ल
"जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें। आपने जो बह्र लिखी है उस बह्र के मुताबिक़ आपकी ग़ज़ल का एक भी मिसरा बह्र में नहीं है। अलबत्ता आपने ग़ज़ल की शुरूआत जिस मिसरे से की है उस की तक़तीअ करने पर उस की बह्र…"
8 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post न इतने सवाल कर- ग़ज़ल
"आ. भाई बसंत जी, सादर अभिवादन । उत्तम गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
10 hours ago
Dayaram Methani commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post न इतने सवाल कर- ग़ज़ल
"  प्यारी सी ज़िंदगी से न इतने सवाल कर, जो भी मिला है प्यार से रख ले सँभाल कर. .......  आदरणीय बसंत कुमार शर्मा जी, अति सुंदर गज़ल के लिए बधाई स्वीकार करें।"
11 hours ago
बसंत कुमार शर्मा posted blog posts
13 hours ago
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post न इतने सवाल कर- ग़ज़ल
" आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद' जी सादर नमस्कार, आपकी हौसलाअफजाई और मार्गदर्शन का दिल से शुक्रिया  नुक्ते लगाना सही में छूट गया ध्यान नहीं गया, ठीक कर लेता हूँ और बह्र भी लिख देता हूँ "
16 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post न इतने सवाल कर- ग़ज़ल
"आदरणीय बसंत कुमार शर्मा साहिब, बहुत ख़ूब ग़ज़ल कही आपने, इस पर दाद और मुबारकबाद क़ुबूल करें। हुज़ूर, अगर आप बह्र भी लिख दें तो इस मंच पर सीखने वालों को आसानी होगी। कुछ अलफ़ाज़ में नुक़्ते छूट गए हैं, जैसे: बग़ैर, ख़ाक, ख़ुद, ख़याल, ख़ुश्बू, और यक़ीन।"
18 hours ago
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post पीपल वाला गाँव नहीं है-ग़ज़ल
"आदरणीय समर कबीर साहब सादर नमस्कार आपको, आपकी हौसलाअफजाई के लिए बेहद शुक्रगुजार हूँ, आप पारिवारिक कार्यों को पूरा कर लें, जी अवश्य फोन पर सम्पर्क करेंगे"
21 hours ago
Samar kabeer commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post पीपल वाला गाँव नहीं है-ग़ज़ल
"जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है,बधाई स्वीकार करें । 'दिखते हैं कुछ पेड़ मगर' ये मिसरा बह्र में नहीं देखिये । 'यदि जमीन पर पाँव नहीं है' इस मिसरे में 'ज़मीन' की जगह "धरती" शब्द उचित होगा…"
Saturday
बसंत कुमार शर्मा commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post पीड़ा के दोहे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
" आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सादर नमस्कार , लाजबाब दोहे आपके  उस पर करती  रात - दिन, मँहगाई पथराव।३। लाजबाब **"
Saturday
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post पीपल वाला गाँव नहीं है-ग़ज़ल
"आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सादर नमस्कार - आपकी हौसलाअफजाई को सादर नमन "
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post पीपल वाला गाँव नहीं है-ग़ज़ल
"आ. भाई बसंत जी, सादर अभिवादन । उत्तम गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Thursday
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

पीपल वाला गाँव नहीं है-ग़ज़ल

मापनी 22 22 22 22पंछी को अब ठाँव नहीं है,पीपल वाला गाँव नहीं है.   दिखते हैं कुछ पेड़ मगर,उनके नीचे छाँव नहीं है. लाती जो पिय का संदेशा, कागा की वह काँव नहीं है   मुश्किल है कैसे सँभलोगे, यदि जमीन पर पाँव नहीं है.   राह प्रेम की सीधी -सादी,  चलता उल्टा दॉंव नहीं है."मौलिक एवं अप्रकाशित"See More
Thursday
बसंत कुमार शर्मा commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post लोटा है साँप फिर से जो उसके कलेजे पर - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"आदरणीय सादर नमस्कार, बहुत खूब ग़ज़ल कही आपने बधाई स्वीकारें "
Thursday
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ले के खाली गिलास बैठे हैं- ग़ज़ल - बसंत
"आदरणीय Shyam Narain Verma जी सादर नमस्कार , आपकी हौसलाअफजाई  के लिए शुक्रिया "
May 11
TEJ VEER SINGH commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ले के खाली गिलास बैठे हैं- ग़ज़ल - बसंत
"हार्दिक बधाई आदरणीय  बसंत कुमार शर्मा जी ।बहुत बढ़िया गज़ल। दोस्त जो आसपास बैठे हैं, जाने क्यों सब उदास बैठे हैं    सोचते हैं कि कोई आएगा,  ले के खाली गिलास बैठे हैं. "
May 8

Profile Information

Gender
Male
City State
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
Native Place
धौलपुर
Profession
भारतीय रेल यातायात सेवा
About me
बोन्साई एवं कविता लेखन में रूचि

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न इतने सवाल कर- ग़ज़ल

मापनी 

२२१२ १२१२ ११२२ १२१२ 

 

प्यारी सी ज़िंदगी से न इतने सवाल कर,

जो भी मिला है प्यार से रख ले सँभाल कर. 

 

तदबीर के बग़ैर  तो मिलता कहीं न कुछ, 

सब ख़ाक हो गए यहाँ सिक्का उछाल कर.

 …

Continue

Posted on July 6, 2020 at 11:30am — 6 Comments

पीपल वाला गाँव नहीं है-ग़ज़ल

मापनी 22 22 22 22

पंछी को अब ठाँव नहीं है,

पीपल वाला गाँव नहीं है.  

 

दिखते हैं कुछ पेड़ मगर,

उनके नीचे छाँव नहीं है.

 

लाती जो पिय का संदेशा, 

कागा की वह काँव नहीं है  

 …

Continue

Posted on July 2, 2020 at 5:19pm — 4 Comments

ले के खाली गिलास बैठे हैं- ग़ज़ल - बसंत

मापनी 2122 1212 22/112

दोस्त जो आसपास बैठे हैं,

जाने क्यों सब उदास बैठे हैं 

 

सोचते हैं कि कोई आएगा, 

ले के खाली गिलास बैठे हैं. 

 

फिर से दरबार सज गया उनका, 

लोग सब ख़ास ख़ास बैठे…

Continue

Posted on May 5, 2020 at 8:28pm — 7 Comments

ज़िंदगी का हिसाब हो जाऊँ - ग़ज़ल - बसंत

मापनी 2122 1212 22/112

गर कहो तो जनाब हो जाऊँ

तुम जो देखो वो ख़्वाब हो जाऊँ

 

रोज पढ़ने का गर करो वादा

प्रेम की मैं क़िताब हो जाऊँ 

 

मुझको काँटों से डर नहीं लगता 

चाहता हूँ गुलाब हो…

Continue

Posted on May 1, 2020 at 12:30pm — 6 Comments

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At 2:23pm on September 28, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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