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बसंत कुमार शर्मा
  • Male
  • जबलपुर, मध्यप्रदेश
  • India
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Samar kabeer commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ग़ज़ल - आँसू बहाने के लिए
"जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब,आपकी ग़ज़लों पर दिन ब दिन निखार आता जा रहा है,ये देख कर प्रसन्नता हुई । ये ग़ज़ल भी अच्छी हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
Jul 20
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ग़ज़ल - आँसू बहाने के लिए
"आदरणीय  C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi जी सादर नमस्कार, हौसलाअफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया "
Jul 19
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ग़ज़ल - आँसू बहाने के लिए
""तितलियाँ उड़ती रहीं करते रहे गुंजन भ्रमर पुष्प में मकरंद जब तक था लुभाने के लिए "वाह वाह ! शानदार शेर | ग़ज़ल के अन्य मिसरे भी बहुत बढ़िया हैं | बधाई  बसंत कुमार शर्मा जी | "
Jul 19
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

ग़ज़ल - आँसू बहाने के लिए

आप आये अब गले हमको लगाने के लिए जब न आँखों में बचे आँसू बहाने के लिए  छाँव जब से कम हुई पीपल अकेला हो गया  अब न जाता पास कोई सिर छुपाने के लिए तितलियाँ उड़ती रहीं करते रहे गुंजन भ्रमरपुष्प में मकरंद जब तक था लुभाने के लिए  हम नदी से बह रहे हैं खुद बनाकर रास्ता चाह कब है सिन्धु से आये बुलाने के लिए  दर्द में डूबे हुए कब तक गुजारें जिन्दगी कुछ गमों को छोड़ना बेहतर ज़माने के लिए"मौलिक एवं अप्रकाशित"See More
Jul 19
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post हो गए - ग़ज़ल
"आदरणीया   विजय जी, सादर नमस्कार, आपकी हौसलाअफजाई दिली शुक्रिया "
Jun 30
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post हो गए - ग़ज़ल
"आदरणीया   Rakshita Singh जी, सादर नमस्कार, आपकी हौसलाअफजाई दिली शुक्रिया "
Jun 30
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post हो गए - ग़ज़ल
"आदरणीय समर कबीर जी, सादर नमस्कार, आपकी हौसलाअफजाई दिली शुक्रिया "
Jun 30
vijay nikore commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post हो गए - ग़ज़ल
"बहुत ही सुन्दर गज़ल के लिए बधाई, मित्र बसंत कुमार जी।"
Jun 23
Rakshita Singh commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post हो गए - ग़ज़ल
"आदरणीय बसंत जी नमस्कार,  बहुत ही सुंदर रचना बहुत बहुत बधाई ।"
Jun 22
Samar kabeer commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post हो गए - ग़ज़ल
"जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब,बहुत उम्द: ग़ज़ल कही आपने,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
Jun 22
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

हो गए - ग़ज़ल

मापनी २१२*4 चाहते हम नहीं थे मगर हो गएप्यार में जून की दोपहर हो गए हर कहानी खुशी की भुला दी गईदर्द के सारे किस्से अमर हो गए खो गए आपके प्यार में इस कदरसारी दुनिया से हम बेखबर हो गए प्रेम के यज्ञ में हो गया सब हवनमंत्र जो थे सभी बेअसर हो गए जो कभी थे बड़े खूबसूरत महलदेखते देखते खंडहर हो गए कह दिया आपने जो हुआ सो हुआआँसुओं से नयन तरबतर हो गएसुर्ख़ियों में रहे रोज अख़बार की  वक़्त के साथ बासी खबर हो गए"मौलिक एवं अप्रकाशित" See More
Jun 17
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post आदमी - ग़ज़ल
"आदरणीय   vijay nikore जी सादर नमस्कार, आपकी हौसला अफजाई के लिए हृदय से आभार "
May 30
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post आदमी - ग़ज़ल
"आदरणीय  Hardam Singh Maan जी सादर नमस्कार, आपकी हौसला अफजाई के लिए हृदय से आभार "
May 30
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post आदमी - ग़ज़ल
"आदरणीय   dandpani nahak जी सादर नमस्कार, आपकी हौसला अफजाई के लिए हृदय से आभार "
May 30
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post आदमी - ग़ज़ल
"आदरणीय   Anamika singh Ana जी सादर नमस्कार, आपकी हौसला अफजाई के लिए हृदय से आभार "
May 30
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post आदमी - ग़ज़ल
"आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सादर नमस्कार, आपकी हौसला अफजाई के लिए हृदय से आभार "
May 30

Profile Information

Gender
Male
City State
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
Native Place
धौलपुर
Profession
भारतीय रेल यातायात सेवा
About me
बोन्साई एवं कविता लेखन में रूचि

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ग़ज़ल - आँसू बहाने के लिए

आप आये अब गले हमको लगाने के लिए 

जब न आँखों में बचे आँसू बहाने के लिए 

 

छाँव जब से कम हुई पीपल अकेला हो गया  

अब न जाता पास कोई सिर छुपाने के लिए

 

तितलियाँ उड़ती रहीं करते रहे गुंजन भ्रमर

पुष्प में मकरंद जब तक था लुभाने…

Continue

Posted on July 19, 2019 at 9:26am — 3 Comments

हो गए - ग़ज़ल

मापनी २१२*4 

चाहते हम नहीं थे मगर हो गए

प्यार में जून की दोपहर हो गए

 

हर कहानी खुशी की भुला दी गई

दर्द के सारे किस्से अमर हो गए

 

खो गए आपके प्यार में इस कदर

सारी दुनिया से हम बेखबर हो…

Continue

Posted on June 17, 2019 at 11:56am — 6 Comments

आदमी - ग़ज़ल

है कहाँ फूल जैसा खिला आदमी

हो गया है ग़मों का किला आदमी

 

मंदिरों, मस्जिदों में रहे ढूँढते  

जब मिला आदमी में मिला आदमी

 

गाँठ दिल में लगी तो खुली ही नहीं

भूल पाया न शिकवा-गिला आदमी

 …

Continue

Posted on May 24, 2019 at 10:07am — 10 Comments

सभी कुछ बता दिया - ग़ज़ल

मापनी २२१२ १२१ १२२ १२१२ 

हमने रखा न राज़ सभी कुछ बता दिया

खिड़की से आज उसने भी परदा हटा दिया

 

बंजर जमीन दिल की’ हुई अब हरी-भरी

सींचा है उसने प्रेम से’ गुलशन बना दिया

 

जज्बात मेरे’ दिल के’ मचलते चले…

Continue

Posted on April 19, 2019 at 9:00pm — 3 Comments

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At 2:23pm on September 28, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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