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बसंत कुमार शर्मा
  • Male
  • जबलपुर, मध्यप्रदेश
  • India
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post मेरे ही प्यार में पगी आई. - ग़ज़ल
"आ. भाई बसंतकुमार जी, सादर अभिवादन । सुन्दर गजल हुई है । हार्दिक बधाई । "
11 hours ago
सालिक गणवीर commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post मेरे ही प्यार में पगी आई. - ग़ज़ल
"भाई बसंत कुमार शर्मा जी सादर अभिवादन उम्दा ग़ज़ल कही है आपने जनाब,दाद और मुबारकबाद स्वीकार करें."
yesterday
Madhu Passi 'महक' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post मेरे ही प्यार में पगी आई. - ग़ज़ल
"आदरणीय बसंत कुमार शर्मा जी सादर नमस्कार! ग़ज़ल बहुत ही अच्छी हुई, इसके लिए बधाई स्वीकार करें।"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post मेरे ही प्यार में पगी आई. - ग़ज़ल
"जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब, मतला समझने में क़ासिर हूँ, इस के इलावा ग़ज़ल के सभी अशआ़र लाजवाब हुए हैं, दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ।  सादर।"
yesterday
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post मेरे ही प्यार में पगी आई. - ग़ज़ल
"आदरणीय  आशीष यादव जी सादर नमस्कार  आपकी हौसलाफजाई का दिल से शुक्रिया "
yesterday
आशीष यादव commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post मेरे ही प्यार में पगी आई. - ग़ज़ल
"बहुत सुंदर। बड़े ही सहज ढँग से आपने बातों को कह दिया। बहुत बहुत बधाई हो।"
yesterday
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

मेरे ही प्यार में पगी आई. - ग़ज़ल

फ़ाइलातुन मुफ़ाइलुन फ़ेलुन2122 1212 22 मेरे ही प्यार में पगी आई. पास जब मेरी ज़िन्दगी आई.  उनके हिस्से में कुछ नहीं आया,जिनको करना न बंदगी आई.  न किसी से लगा सके दिल को,दिल से करना न दिल्लगी आई. मेरी आँखों में देखकर आँसू,उनके चेहरे पे ताज़गी आई. प्यास सबकी बुझाई दरिया ने,मेरे हिस्से में तिश्नगी आई. दिल में जो था वो कह दिया मैंने, पर न मुझको अदायगी आई."मौलिक एवं अप्रकाशित"See More
yesterday
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ग़ज़ल को सँवारा है इन दिनों.- ग़ज़ल
"आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज'   जी सादर नमस्कार  आपकी हौसला अफजाई के लिए दिल से शुक्रिया "
Monday
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ग़ज़ल को सँवारा है इन दिनों.- ग़ज़ल
"आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी सादर नमस्कार  आपकी हौसला अफजाई के लिए दिल से शुक्रिया "
Monday
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ग़ज़ल को सँवारा है इन दिनों.- ग़ज़ल
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सादर नमस्कार  आपकी हौसला अफजाई के लिए दिल से शुक्रिया "
Monday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ग़ज़ल को सँवारा है इन दिनों.- ग़ज़ल
"वाह आदरणीय शर्मा जी बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल कही है..."
Saturday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ग़ज़ल को सँवारा है इन दिनों.- ग़ज़ल
"आद0 बसन्त कुमार शर्मा जी सादर अभिवादन समसामयिक विषयो के इर्द गिर्द घूमती बेहतरीन ग़ज़ल के लिए बधाई स्वीकार कीजिए"
Friday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ग़ज़ल को सँवारा है इन दिनों.- ग़ज़ल
"आ. भाई बसंत कुमार जी, सादर अभिवादन ।बेहतरीन गजल हुई है । हार्दिक बधाई स्वीकारें ।"
Aug 6
बसंत कुमार शर्मा posted blog posts
Aug 6
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ग़ज़ल को सँवारा है इन दिनों.- ग़ज़ल
"आदरणीय TEJ VEER SINGH जी सादर नमस्कार  आपकी हौसलाअफजाई के लिए दिल से शुक्रिया "
Aug 6
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ग़ज़ल को सँवारा है इन दिनों.- ग़ज़ल
"आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' जी आदाब , आपकी हौसला अफजाई और सुझाव हेतु दिल से शुक्रिया  इसी तरह मार्गदर्शन करते रहें सादर "
Aug 6

Profile Information

Gender
Male
City State
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
Native Place
धौलपुर
Profession
भारतीय रेल यातायात सेवा
About me
बोन्साई एवं कविता लेखन में रूचि

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मेरे ही प्यार में पगी आई. - ग़ज़ल

फ़ाइलातुन मुफ़ाइलुन फ़ेलुन

2122 1212 22 

मेरे ही प्यार में पगी आई. 

पास जब मेरी ज़िन्दगी आई. 

 

उनके हिस्से में कुछ नहीं आया,

जिनको करना न बंदगी आई. 

 

न किसी से लगा…

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Posted on August 10, 2020 at 11:03am — 6 Comments

ग़ज़ल को सँवारा है इन दिनों.- ग़ज़ल

मापनी 221 2121 1221 212 

 

हर आदमी ही वक़्त  का मारा है इन दिनों.  

प्रभु के सिवा न कोई सहारा है इन दिनों.  

 

फिरते सभी नक़ाब में चेहरा छुपा-छुपा, 

चारों तरफ अजीब नज़ारा है इन दिनों. 

 

मिलना गले न हाथ मिलाना किसी…

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Posted on August 5, 2020 at 5:30pm — 10 Comments

कुँवारी आँखों में- ग़ज़ल

1212 1122 1212 22 

 

न नींद है न कहीं चैन प्यारी आँखों में, 

तमाम ख़्वाब पले हैं कुँवारी आँखों में. 

 

शिकार कैसे हुए हम समझ नहीं पाए,

दिखा न तीर न कोई कटारी आँखों में 

 

करीब जा के न कोई भी लौट कर आया,

फँसे पड़े हैं कई इन जुआरी आँखों में

 

ये दिल हमारा किसी और का हुआ जब से,  

तभी से…

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Posted on July 21, 2020 at 8:00pm — 6 Comments

दिल को झिंझोड़ा नहीं कभी- गजल

मापनी 

२२१/२१२१/१२२१/२१२१/२

पकड़ा किसी का हाथ तो छोड़ा नहीं कभी. 

जोड़ा जो रिश्ता प्यार का तोड़ा नहीं कभी. 

  

महँगा पड़ा है झूठ से लड़ना हमें मगर,

घुटनों को उसके सामने मोड़ा…

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Posted on July 17, 2020 at 9:33pm — 4 Comments

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At 2:23pm on September 28, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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