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बसंत कुमार शर्मा
  • Male
  • जबलपुर, मध्यप्रदेश
  • India
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बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post मन तिरता आकाश - गीत
"आदरणीय लक्ष्मण धामी मुसाफिर जी सादर नमस्कार, आपकी हौसलाअफजाई का दिल से शुक्रिया "
Feb 8
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post मन तिरता आकाश - गीत
"आदरणीय समर कबीर जी सादर नमस्कार, आपकी हौसलाअफजाई को सादर नमन "
Feb 8
Samar kabeer commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post मन तिरता आकाश - गीत
"जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब,अच्छा गीत लिखा आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
Feb 8
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post मन तिरता आकाश - गीत
"आ. भाई बसंत जी, सादर अभिवादन । सुंदर गीत हुआ है । हार्दिक बधाई ।"
Feb 8
बसंत कुमार शर्मा commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post नफरत को लोग शान से सर पर बिठा रहे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सादर नमस्कार, वाह लाजबाव ग़ज़ल हुई , बधाई स्वीकारें"
Feb 7
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

मन तिरता आकाश - गीत

 मन तिरता आकाश नैनों में सपने तिरते हैं,मन तिरता आकाशदेखूं जब भी तेरा मुखड़ा,लगता खिला पलाश मधुरिम गीत लिख रही मेंहदी,पायल गाती हैमाथे पर कुमकुम की ज्वाला,तन दहकाती है मावस रात लगे पूनम सी,ऐसा हुआ प्रकाश   तेरे कदमों की आहट जब,द्वारे पर आईमेरे मन के भीतर गूंजी,मीठी शहनाई तुझे अंक में भर लेने को,हैं व्याकुल भुजपाश बाकी सारी दुनियादारी,लगती है फरजीसाथ तुम्हारा रहे हमेशा,यही एक अरजी प्रतिदिन हो बरसात प्रेम की,हो न कभी अवकाश"मौलिक एवं अप्रकाशित"See More
Feb 7
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post आग नहीं वो पानी होगी- बसंत
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सादर नमस्कार, आपकी हौसलाअफजाई का शुक्रिया "
Feb 7
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post आग नहीं वो पानी होगी- बसंत
"आ. भाई बसंत जी, सुंदर गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
Jan 29
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post आग नहीं वो पानी होगी- बसंत
"आदरणीय समर कबीर जी, सादर नमस्कार, आपकी हौसलाअफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया "
Jan 28
Surkhab Bashar commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post आग नहीं वो पानी होगी- बसंत
"आ.  बसंत कुमार शर्मा जी उम्दा ग़ज़ल हुई"
Jan 28
Samar kabeer commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post आग नहीं वो पानी होगी- बसंत
"जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।"
Jan 28
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

आग नहीं वो पानी होगी- बसंत

बह्र - फैलुन *४ जो मेरी दीवानी होगीआग नहीं वो पानी होगी हाथ बढ़ाया है जब उसनेकुछ तो मन में ठानी होगी एक नजर में लूट लिया दिलकुछ तो बात पुरानी होगी पलकें’ झुकाना फिर कह देना  कहने में आसानी होगी उसकी सुनूँ न, अपनी कह दूँये तो बेईमानी होगी दूर बहुत वो, फिर भी खुश हैकोई पास निशानी होगी दर्द का दरिया बह जाएगा   तब मशहूर कहानी होगी"मौलिक एवं अप्रकाशित"See More
Jan 25
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post दिल भी मिलाना है
"आदरणीय PHOOL SINGH जी शुभ प्रभातम, आपकी  हौसलाअफजाई का दिल से शुक्रिया"
Dec 12, 2018
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post सबके अपने अपने मठ हैं - नवगीत
"आदरणीय  Samar kabeer  जी शुभ प्रभातम, आपकी प्रतिक्रिया का दिल से शुक्रिया, कुछ और तरीके से कोशिश करता हूँ।  सादर नमन आपको "
Dec 12, 2018
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post सबके अपने अपने मठ हैं - नवगीत
"आदरणीय  PHOOL SINGH जी शुभ प्रभातम, आपकी प हौसलाअफजाई का दिल से शुक्रिया "
Dec 12, 2018
Samar kabeer commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post सबके अपने अपने मठ हैं - नवगीत
"जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब,नवगीत अच्छा है लेकिन आप जो कहना चाहते हैं वो पूरी तरह उजागर नहीं हो सका,ख़ैर ! इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Dec 11, 2018

Profile Information

Gender
Male
City State
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
Native Place
धौलपुर
Profession
भारतीय रेल यातायात सेवा
About me
बोन्साई एवं कविता लेखन में रूचि

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मन तिरता आकाश - गीत

 

मन तिरता आकाश

 

नैनों में सपने तिरते हैं,

मन तिरता आकाश

देखूं जब भी तेरा मुखड़ा,

लगता खिला पलाश

 

मधुरिम गीत लिख रही मेंहदी,

पायल गाती है

माथे पर कुमकुम…

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Posted on February 7, 2019 at 5:15pm — 4 Comments

आग नहीं वो पानी होगी- बसंत

बह्र - फैलुन *४ 

जो मेरी दीवानी होगी

आग नहीं वो पानी होगी

 

हाथ बढ़ाया है जब उसने

कुछ तो मन में ठानी होगी

 

एक नजर में लूट लिया दिल

कुछ तो बात पुरानी होगी

 …

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Posted on January 25, 2019 at 3:42pm — 5 Comments

सबके अपने अपने मठ हैं - नवगीत

व्हाट्सएप्प हो या मुखपोथी*

सबके अपने-अपने मठ हैं

दिखते हैं छत्तीस कहीं पर,

और कहीं पर वे तिरसठ हैं

*फेसबुक 

 

रंग निराले, ढंग अनोखे,

ओढ़े हुए मुखौटे अनगिन…

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Posted on December 9, 2018 at 9:30pm — 6 Comments

दिल भी मिलाना है

मापनी २२१ १२२२ २२१ १२२२ 

नफरत के’ किले सारे, हमको ही’ ढहाना है

जो हाथ मिलाया है, तो दिल भी’ मिलाना है



यूँ रोज हमें खलती, पानी की’ कमी बेशक…

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Posted on December 6, 2018 at 4:49pm — 8 Comments

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At 2:23pm on September 28, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

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 ग़ज़ल की बातें 

 

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