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बसंत कुमार शर्मा
  • Male
  • जबलपुर, मध्यप्रदेश
  • India
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बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post दिल भी मिलाना है
"आदरणीय PHOOL SINGH जी शुभ प्रभातम, आपकी  हौसलाअफजाई का दिल से शुक्रिया"
Wednesday
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post सबके अपने अपने मठ हैं - नवगीत
"आदरणीय  Samar kabeer  जी शुभ प्रभातम, आपकी प्रतिक्रिया का दिल से शुक्रिया, कुछ और तरीके से कोशिश करता हूँ।  सादर नमन आपको "
Wednesday
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post सबके अपने अपने मठ हैं - नवगीत
"आदरणीय  PHOOL SINGH जी शुभ प्रभातम, आपकी प हौसलाअफजाई का दिल से शुक्रिया "
Wednesday
Samar kabeer commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post सबके अपने अपने मठ हैं - नवगीत
"जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब,नवगीत अच्छा है लेकिन आप जो कहना चाहते हैं वो पूरी तरह उजागर नहीं हो सका,ख़ैर ! इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Tuesday
PHOOL SINGH commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post दिल भी मिलाना है
"क्या बात है सर जी बहुत सूंदर बधाई "
Tuesday
PHOOL SINGH commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post सबके अपने अपने मठ हैं - नवगीत
"क्या बात है सर जी बहुत सूंदर बधाई "
Tuesday
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post सबके अपने अपने मठ हैं - नवगीत
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी शुभ प्रभातम, आपकी हौसलाअफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया "
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post सबके अपने अपने मठ हैं - नवगीत
"आ. भाई बसंत जी, सुंदर रचना हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
Monday
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

सबके अपने अपने मठ हैं - नवगीत

व्हाट्सएप्प हो या मुखपोथी*सबके अपने-अपने मठ हैंदिखते हैं छत्तीस कहीं पर,और कहीं पर वे तिरसठ हैं*फेसबुक  रंग निराले, ढंग अनोखे,ओढ़े हुए मुखौटे अनगिनलाइक और कमेंट खटाखट,चलते ही रहते हैं निशदिन छंद हुए स्वच्छंद सरीखे,गीत, ग़ज़ल के भी नव हठ हैं नजर लक्ष्य पर रखते अपनी,बगुले जैसा ध्यान लगातेकोई मछली दिखी कहीं पर,उधर तुरत ही चौंच बढ़ाते फैलाने को अपनी सत्ता,हरदम लगनशील कर्मठ हैं   मेरी मुर्गी तीन टाँग की,हर हालत में सिद्ध कर रहेभले स्वयं की गागर रीती,लेकिन सबका कलश भर रहे आलोचक की जगह नहीं है,कहते हैं सब…See More
Sunday
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post दिल भी मिलाना है
"आदरणीय राज़ नवादवी जी शुभ संध्या, आपकी हौसला अफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया "
Sunday
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post दिल भी मिलाना है
"आदरणीय समर कबीर जी सादर नमस्कार, मैं आपका इशारा समझ गया, अवश्य प्रयास करता हूँ, यइसी तरह स्नेह बनाये रखें "
Sunday
राज़ नवादवी commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post दिल भी मिलाना है
"आदरणीय बसंत कुमार जी, आदाब, सुन्दर ग़ज़ल की प्रस्तुति के लिए मुबारकबाद. सादर. "
Dec 7
Samar kabeer commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post दिल भी मिलाना है
"जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल है,बधाई स्वीकार करें । थोड़ा शिल्प पर अभ्यास करें ।"
Dec 7
TEJ VEER SINGH commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post दिल भी मिलाना है
"हार्दिक बधाई आदरणीय बसंत कुमार जी।बेहतरीन गज़ल। हों लाख कड़े पहरे, दरिया के’ किनारों पर पर प्रेम के’ दरिया में, डुबकी तो’ लगाना है"
Dec 7
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

दिल भी मिलाना है

मापनी २२१ १२२२ २२१ १२२२ नफरत के’ किले सारे, हमको ही’ ढहाना है जो हाथ मिलाया है, तो दिल भी’ मिलाना है यूँ रोज हमें खलती, पानी की’ कमी बेशकपर फूल मरुस्थल में, हमको तो’ खिलाना है वादा जो’ किया तुमने, हर हाल निभा देना,ये प्यार की’ दुनिया है, चलता न बहाना है हों लाख कड़े पहरे, दरिया के’ किनारों परपर प्रेम के’ दरिया में, डुबकी तो’ लगाना हैखुशियाँ हों’ भले थोड़ी, मिल साथ मना लेनाभरमार दुखों की है, सुख का न ठिकाना है"मौलिक एवं अप्रकाषित "See More
Dec 6
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post नवगीत:रैली, थैली, भीड़-भड़क्का सजी हुई चौपाल
"आदरणीय Samar kabeer जी सादर नमस्कार, आपकी हौसला अफजाई का दिल से शुक्रिया "
Dec 6

Profile Information

Gender
Male
City State
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
Native Place
धौलपुर
Profession
भारतीय रेल यातायात सेवा
About me
बोन्साई एवं कविता लेखन में रूचि

बसंत कुमार शर्मा's Blog

सबके अपने अपने मठ हैं - नवगीत

व्हाट्सएप्प हो या मुखपोथी*

सबके अपने-अपने मठ हैं

दिखते हैं छत्तीस कहीं पर,

और कहीं पर वे तिरसठ हैं

*फेसबुक 

 

रंग निराले, ढंग अनोखे,

ओढ़े हुए मुखौटे अनगिन…

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Posted on December 9, 2018 at 9:30pm — 6 Comments

दिल भी मिलाना है

मापनी २२१ १२२२ २२१ १२२२ 

नफरत के’ किले सारे, हमको ही’ ढहाना है

जो हाथ मिलाया है, तो दिल भी’ मिलाना है



यूँ रोज हमें खलती, पानी की’ कमी बेशक…

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Posted on December 6, 2018 at 4:49pm — 8 Comments

नवगीत:रैली, थैली, भीड़-भड़क्का सजी हुई चौपाल

एक नवगीत 

समीक्षा का हार्दिक स्वागत 

रैली, थैली, भीड़-भड़क्का, 

सजी हुई चौपाल



तंदूरी रोटी के सँग है,

तड़के वाली दाल

गली-गली में तवा गर्म है,

लोग पराँठे सेक रहे 

जन गण के दरवाजे जाकर,

नेता घुटने टेक रहे

पाँच साल के बाद सियासत,

दिखा रही निज चाल

वादों की तस्वीरें…

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Posted on November 29, 2018 at 1:00pm — 4 Comments

मुस्कराहट आप से है -ग़ज़ल

मापनी २१२२ २१२२ २१२२ २१२ 

द्वार पर जो दिख रही सारी सजावट आप से है

आज अधरों पर हमारे मुस्कुराहट आप से है  

 

आपकी आमद से मौसम हो गया कितना सुहाना

जो हुई महसूस गरमी में तरावट आप से है

 

यूँ तो मेरी जिन्दगी…

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Posted on November 27, 2018 at 9:08am — 9 Comments

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At 2:23pm on September 28, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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