For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

रोहित डोबरियाल "मल्हार"
  • Male
  • uttarakhand, dehradun
  • India
Share

रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s Friends

  • बसंत कुमार शर्मा

रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s Groups

 

रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s Page

Profile Information

Gender
Male
City State
Dehradun
Native Place
Kargi
Profession
sitarist
About me
Musician sitarist

रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s Blog

दिया तले अंधेरा

रोशनी ही रोशनी है चारों तरफ तो क्या हुआ

दिया तले तो फिर भी अंधेरा ही हुआ,

खबर नहीं उनको मेरे इश्क़ की तो क्या हुआ

पर इश्क़ तो मुझे उनसे सच्चा ही हुआ,

है हर धड़कन पर उन्हीं का कब्जा तो क्या हुआ

अब दिल भी तो उन्हीं का ही हुआ,

उनको मेरी ग़ज़ल पसंद नहीं तो क्या हुआ

पर उनका हर लफ़्ज तो ग़ज़ल ही हुआ,

मुहब्बत में मिले जख़्म "मल्हार" तो क्या हुआ

उसकी यादें भी तो मरहम ही हुआ,

हम उन्हें हमसफ़र ना बना पाये तो क्या हुआ

उनकी यादों के साथ ये सफ़र ही तो… Continue

Posted on March 5, 2018 at 10:16pm — 2 Comments

तू प्यार है मेरा

तू प्यार है मेरा यार है मेरा, ये बात मैं सबसे क्यों बोलूँ,
जो राज दबाया है सीने में वो शहरा भर में क्यूँ खोलूँ
.
सब कहते हैं "मल्हार" तेरे गीतों में ये कशिश कहाँ से आती है
मैं दिल में रो कर,चेहेरे से हँस कर ये बात टालते जाता हूँ
.
अहसासों के कागज़ पर अब मैं ख़ुद को लिखता रहता हूँ
उम्र भर के यादों में, मैं बस तुझको ही ढूंढता रहता हूँ
.
अजीब दास्ताँ मेरे इश्क़ की, तुझे खोने से डरता…
Continue

Posted on October 5, 2017 at 1:30pm — 5 Comments

एक ख्वाहिश

एक ख्वाहिश पूरी कर दे तू इबादत के बगैर

वो आ कर गले लगा ले मेरी इजाजत के बगैर

ऐ खुदा हुस्न और दौलत तो तेरी कुदरत है

मैं मानूँ अगर वो अपना ले मुझे इनके बगैर

बोल कर इज़हार क्यों करूँ अपने इश्क़ का

मैं मानूँ अगर वो जान जाये इशारे किए बगैर

यूँ तो आदत नही किसी को देखूं मुड़ कर

पर दिल करता है देखूं तुझे पलकें गिरे बगैर

शौक लगा उसी दिन मुहब्बत का मुझे यारों

दिल खो गया था जिस दिन खोये बगैर

कोई उम्मीद,दिलासा दे दे मुलाकात…

Continue

Posted on October 1, 2017 at 10:26pm — 4 Comments

ये कैसे हो गया

ये क्यूँ और कैसे हो गया

हद में रहकर भी बेहद हो गया 

  

था कभी जो नज़रों और ख्वाबों में,

ना जाने अब क्यूँ ओझल हो गया

चाहूँ मैं उसको जितना ज्यादा 

वो दूर क्यूँ मुझसे उतना हो गया

ये क्यूँ और कैसे हो गया

हद में रहकर भी बेहद हो गया

सोचा भूल जाऊँ अब उसे मैं 

पर वो क्यूँ मेरी रूह में बस गया

लौट-लौट कर आती हैं यादें तेरी

क्यूँ हर लम्हा मेरा तेरे नाम हो गया

पाना क्यूँ…

Continue

Posted on September 25, 2017 at 10:06pm — 7 Comments

Comment Wall

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

  • No comments yet!
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post एक नया दस्तूर (ग़ज़ल - शाहिद फिरोज़पुरी)
"आदरणीय dandpani nahak साहिब, आपकी नवाज़िश और हौसला-अफ़ज़ाई के लिए बेहद शुक्रगुज़ार हूँ!"
5 hours ago
dandpani nahak commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(मूंदकर आंखें.....)
"आदरणीय मनन कुमार सिंह जी आदाब बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें"
5 hours ago
dandpani nahak commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( जाना है एक दिन न मगर फिक्र कर अभी...)
"आदरणीय सालिक गणवीर जी नमस्कार बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें !"
5 hours ago
dandpani nahak commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post एक नया दस्तूर (ग़ज़ल - शाहिद फिरोज़पुरी)
"आदरणीय रवि 'भसीन' शाहिद जी आदाब बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई और शैर दर शैर…"
5 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' posted a blog post

एक नया दस्तूर (ग़ज़ल - शाहिद फिरोज़पुरी)

22 / 22 / 22 / 22 / 22 / 22एक नया दस्तूर चलाया जा सकता हैग़म को भी महबूब बनाया जा सकता है [1]अपने आप…See More
6 hours ago
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(मूंदकर आंखें.....)
"आपका हार्दिक आभार,आदरणीय लक्ष्मण भाई।"
7 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post
12 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(मूंदकर आंखें.....)
"आ. भाई मनन कुमार जी, सादर अभिवादन । बहुत खूबसूरत गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
15 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-चाँद के चर्चे आसमानों में
"आ. भाई बृजेश कुमार जी, सुन्दर गजल हुई है । हार्दिक बधाई स्वीकारें ।"
15 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post अछूतों सा - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"आ. भाई  बृजेश जी सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और सुझाव के लिए आभार ।"
15 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post महज चाहत का रिस्ता है - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'( गजल)
"आ. भाई सुरेंद्र जी, सादर अभिवादन । गजलपर उपस्थिति व समालोचना के लिए आभार । आपके कथनानुसार गजल पर…"
15 hours ago
आशीष यादव commented on आशीष यादव's blog post पानी गिर रहा है
"आदरणीय श्री  बृजेश कुमार 'ब्रज' जी रचना पर मूल्यवान टिप्पणी के लिए बहुत…"
22 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service