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तू प्यार है मेरा यार है मेरा, ये बात मैं सबसे क्यों बोलूँ,
जो राज दबाया है सीने में वो शहरा भर में क्यूँ खोलूँ
.
सब कहते हैं "मल्हार" तेरे गीतों में ये कशिश कहाँ से आती है
मैं दिल में रो कर,चेहेरे से हँस कर ये बात टालते जाता हूँ
.
अहसासों के कागज़ पर अब मैं ख़ुद को लिखता रहता हूँ
उम्र भर के यादों में, मैं बस तुझको ही ढूंढता रहता हूँ
.
अजीब दास्ताँ मेरे इश्क़ की, तुझे खोने से डरता हूँ
कैसे इजहार करूँ मैं बस, यही सोचता रहता हूँ
.
तू प्यार है मेरा यार है मेरा, यह बात मैं सबसे क्यों बोलूँ,
अगर इजाजत तू कर दे तो आयात इश्क़ की मैं पढ़ लूँ
.
तू प्यार है मेरा यार है मेरा, यह बात मैं सबसे क्यों बोलूँ,
जो राज दबाया है सीने में, वो शहरा भर में क्यूँ खोलूँ
.
तू प्यार है मेरा यार है मेरा, यह बात मैं सबसे क्यों बोलूँ,
यह बात मैं सबसे क्यों बोलूँ...........
.
 मौलिक/अप्रकाशित
 रोहित डोबरियाल "मल्हार"

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Comment

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Comment by SALIM RAZA REWA on October 6, 2017 at 9:45pm

जनाब रोहित जी आदाब,

सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें 

भाई बिधा जानना तो बहुत ही ज़रूरी है , बिना मंज़िल जाने सफ़र का क्या मतलब ,

Comment by रोहित डोबरियाल "मल्हार" on October 6, 2017 at 11:15am

आदरणीय samar kabeer जी  उत्साहवर्धन के धन्यवाद , एवं यह रचना किस छंद या विधा में है ये तो मैं भी नही जानता , में केवल जैसे सोचता हूँ लिख देता हूँ

Comment by रोहित डोबरियाल "मल्हार" on October 6, 2017 at 11:14am

आदरणीय samar kabeer जी  उत्साहवर्धन के धन्यवाद , एवं यह रचना किस छंद या विधा में है ये तो मैं भी नही जानता , में केवल जैसे सोचता हूँ लिख देता हूँ

Comment by Afroz 'sahr' on October 5, 2017 at 5:41pm
जनाब रोहित जी जनाब समर साहब ने इस विधा के बारे में पूछा है । बताने का कष्ट करें सादर,,,,,
Comment by Samar kabeer on October 5, 2017 at 5:35pm
जनाब रोहित जी आदाब,सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।
ये रचना किस विधा में है भाई ?

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