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Afroz 'sahr'
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  • बृजेश कुमार 'ब्रज'

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Afroz 'sahr' commented on Samar kabeer's blog post 'ग़ालिब'की ज़मीन में एक ग़ज़ल
"आली जनाब समर कबीर साहब निहायत ही ख़ूबसूरत ग़ज़ल कही आपने शेर दर शेर दिल बाग़ बाग़ हो गया हर इक शेर अपने आप में लाजवाब है।दिल की गहराइयों से मुबारकबाद पेश कपता हूँ सादर,,,,"
Oct 22, 2017
Afroz 'sahr' commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल - यूँ ही गाल बजाते रहिये
"आदरणीय राम अवध जी कोई बात नहीं एसा अनचाहे हो जाता है । पुन: आपको इस रचना पर बधाई देता हूँ।सादर,,,,"
Oct 20, 2017
Afroz 'sahr' commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(बाअदब सब....)
"आदरणीय मनन जी बहुत बधाई आपको इस रचना के लिए,,,"
Oct 20, 2017
Afroz 'sahr' commented on Afroz 'sahr''s blog post ग़ज़ल,,,,में अपनी हसरतें,,,,,
"आदरणीय बृजेश जी आपको रचना पसंद आई आपका आभार प्रकट करता हूँ। सादर"
Oct 20, 2017
Afroz 'sahr' commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post एक ग़ज़ल
"आदरणीय सतविंदर जी आपने मेंरे कहे को मान दिया आपका मश्कूर हूँ। सादर,,"
Oct 20, 2017
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Afroz 'sahr''s blog post ग़ज़ल,,,,में अपनी हसरतें,,,,,
"बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल हुई आदरणीय अफ़रोज़ जी..हार्दिक बधाई"
Oct 20, 2017
Afroz 'sahr' commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post कहीं दीप जले, कहीं दिल (लघुकथा)/ शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"वाह वाहहहहहह क्या बात है उस्मानी साहब सफल लघु कथा । ख़ूबसूरत तंज़ ,,,मेंरी और से बहुत बधाई आपको,,,"
Oct 19, 2017
Afroz 'sahr' commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(आग जलने...)
"आदरणीय मनन कुमार जी इस रचना पर बहुत बहुत बधाई आपको,,,,,"
Oct 19, 2017
Afroz 'sahr' commented on SALIM RAZA REWA's blog post सबसे बड़ी रदीफ़ में ग़ज़ल का प्रयास, सिर्फ रदीफ़ और क़ाफ़िया में पूरी ग़ज़ल - सलीम रज़ा रीवा
"आदरणीय सलीम रज़ा साहिब तवील रदीफ़ में ख़ूबसूरत कलाम मेंरी और से बहुत बधाई आपको,,,"
Oct 19, 2017
Afroz 'sahr' commented on Afroz 'sahr''s blog post ग़ज़ल,,,,में अपनी हसरतें,,,,,
"जनाब सलीम रज़ा साहिब ग़ज़ल में शिरकत और सुख़न नवाज़ी पर आपका शुक्रगुज़ार हूँ।"
Oct 19, 2017
Afroz 'sahr' commented on Ajay Tiwari's blog post सोचो कुछ उनके बारे में, जिनका दिया जला नहीं
"आदरणीय अजय जी इस रचना पर आपको बहुत बधाई"
Oct 19, 2017
SALIM RAZA REWA commented on Afroz 'sahr''s blog post ग़ज़ल,,,,में अपनी हसरतें,,,,,
"जनाब अफरोज साहब, मज़ा आ गया, ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए मुबारक़बाद."
Oct 19, 2017
Afroz 'sahr' commented on Afroz 'sahr''s blog post ग़ज़ल,,,,में अपनी हसरतें,,,,,
"आदरणीय अजय तिवारी जी ग़ज़ल में शिरकत और सुख़न नवाज़ी का बहुत बहुत शुक्रिया,,,,"
Oct 19, 2017
Ajay Tiwari commented on Afroz 'sahr''s blog post ग़ज़ल,,,,में अपनी हसरतें,,,,,
"आदरणीय अफरोज साहब, बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है. शुभकामनाएं . सादर "
Oct 19, 2017
Afroz 'sahr' commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post तरही गजल
"आदरणीय सतविंदर जी बहुत सुंदर रचना के लिए आपको बधाई। ग़ज़ल के दूसरे शेर के सानी मिसरे में "जबके" की जगह "उसकी" बेहतर रहेगा,सातवें शेर का ऊला मिसरा , ""बना दो मुहब्बत को औज़ार मेंरी" में "मेंरी" की जगह…"
Oct 18, 2017
Afroz 'sahr' commented on Afroz 'sahr''s blog post ग़ज़ल,,,,में अपनी हसरतें,,,,,
"आदरणीय समर साहिब आपने ग़ज़ल को वक़्त दिया । ग़ज़ल को आपकी सराहना मिली ये मेंरी खुश नसीबी है। मेंरी रचना सार्थक हूई।,,,,,सादर,,,"
Oct 18, 2017

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Afroz 'sahr''s Blog

ग़ज़ल निकल गए आँसू,,,,

   2122  1212  22

दफ़अतन जो निकल गए आँसू।

सारे मंज़र बदल गए आँसू।।

लाख की कोशिशें छुपाने की।

राज़ दिल का उगल गए आँसू।।

इक ख़ुशी ने मुझे पुकारा है।

ये ख़बर सुन के जल गए आँसू।।

ख़ुश्क दामन तुझे बताऊँ क्या।

वो सबब जो सँभल गए आँसू।।

इत्तिफ़ाकन ही ख़ुश्क थीं पलकें।

इंतिकामन मचल गए आँसू।।

इक तबस्सुम जो आगया लब पर।

मारे ग़म के पिघल गए आँसू।।

कौन सा पल…

Continue

Posted on December 24, 2017 at 11:00am — 11 Comments

ग़ज़ल,,,,इशारों का साथ दो,,,,,,,

221/2121/1221/212



है इख़्तियार तुमको बहारों का साथ दो।

लेकिन कभी तो दर्द के मारों का साथ दो।।



गर हैं निजात के लिए दरकार नेकियाँ।

डोली उठाने वाले कहारों का साथ दो।।



बाहम वो मिल सके न जो सारी हयात में।

मजबूर बेक़रार कनारों का साथ दो।।



तुम इन उदासियों की रिदाओं को चीर कर।

दिलकश हसीन शौख़ नजारों का साथ दो।।



ये वक़्त का तकाजा़ है दानाइ भी यही।

रक्खो ज़ुबान बंद इशारों का साथ दो।।



मिट्टी के ढेर हैं ये फ़कत और… Continue

Posted on December 4, 2017 at 1:36pm — 20 Comments

ग़ज़ल,,,,भीगी पलकों पे कई ख़्वाब,,

2122/1122/1122/22/112



अश्क़ आँखों में यूँ बेताब हुआ करते हैं

भीगी पलकों पे कई ख़्वाब हुआ करते हैं।



जिनकी क़ीमत ही नहीं लोगों की नज़रों में कोई

रब की नज़रों में वो सुरख़ाब हुआ करते हैं।



जो भी रखते हैं बुज़ुर्गों की रिवायत का भरम

लोग दुनिया में वो नायाब हुआ करतें हैं।



ख़ुश्क फूलों की तरह मुझको समझने वालों

गुल में ख़ुश्बू के कई बाब हुआ करते हैं।



तुहमतें गैरों पे साज़िश की लगाने वाले

तेरे दुश्मन तेरे एहबाब हुआ करते… Continue

Posted on November 7, 2017 at 1:00pm — 20 Comments

ग़ज़ल,,,,में अपनी हसरतें,,,,,

1222/1222/1222/1222



जो सच हो ही नहीं सकता वो सपना छोड़ आया हूँ

में अपनी हसरतें सहरा में तंहा छोड़ आया हूँ।



ख़िरद ने जबसे जोड़ा है हक़ीकत से मेंरा रिश्ता

तख़य्युल को ख़लाओं में भटकता छोड़ आया हूँ।



ज़रूरत मुझको ले कर आ गई परदेस में लेकिन

में अपने घर में इक पुतला अना का छोड़ आया हूँ।



सबब जिसके हुए जाते थे अपने ही मेंरे दुश्मन

वो चाँदी छोड़ दी मैंने वो सोना छोड़ आया हूँ।



वो इक लम्हा जो गफ़लत में तेरी चाहत के बिन… Continue

Posted on October 17, 2017 at 7:30pm — 10 Comments

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At 8:49am on November 21, 2018, Ahmed Maris said…

Good Day,
How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day
Thanks God bless.
Stella.

At 5:25pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय अफरोज जी आदाब
बहुत शुक्रिया आपने मेरी रचना पढ़ी मुझे अभी बहुत सीखना है आशा है आप मेरी इसी तरह मदद करेंगे
At 2:29pm on September 12, 2017,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए....

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है.

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