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Afroz 'sahr'
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  • बृजेश कुमार 'ब्रज'

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Afroz 'sahr' commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (हम अगर राहे वफ़ा में कामरां हो जाएँगे)
"बहुत खू़ब जनाब क्या कहने वाह,,,,"
yesterday
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-96
"जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी साहिब ग़जल में शिरकत और सुख़न नवाज़ी पर आपका ममनून ओ मश्कूर हूँ।"
Jun 28
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-96
"मुहतरमा अंजली गुप्ता साहिबा सुख़न नवाज़ी पर आपका मशकूर हूँ,,,"
Jun 28
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-96
"जनाब महेंद्र कुमार जी अच्छी ग़ज़ल के लिए बधाई आप को"
Jun 28
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-96
"जनाब महेंद्र कुमार साहिब ग़ज़ल में शिरकत पर आपका मशकूर हूँ"
Jun 28
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-96
"जनाब रवि शुक्ला साहिब सुख़न नवाज़ी का शुक्रिया"
Jun 28
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-96
"जनाब आशीष जी संदर ग़ज़ल के लिए बधाई आपको,,"
Jun 28
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-96
"जनाब राज़ नवादवी साहिब गज़ल में शिरकत का शुक्रिया,,"
Jun 28
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-96
"जनाब लक्षमण धामी जी सुख़न नवाज़ी पर मश्कूर हूँ"
Jun 28
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-96
"जनाब सुरेंद्र नाथ जी ग़ज़ल में शिरकत पर आपका मश्कूर हूँ"
Jun 28
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-96
"जना आशीष जी  सुख़न नवाज़ी का शुक्रिया"
Jun 28
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-96
"आली जनाब समर साहिब हौसला अफ़जा़ई का तहे दिल से शुक्रिया"
Jun 27
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-96
"जनाब अजय गुप्ता जी सुख़न नवाज़ी का शुक्रिया"
Jun 27
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-96
"इश्क़ तेरी अजब कहानी है। दिल मेरा उनकी हुक्मरानी है।। सब्र करना मिलेगी राहत भी। चंद रोज़ा ये जाँ फ़िशानी है।। जिसके ख़ूँ में उबाल ना आए। वो जवानी भी क्या जवानी है।। सुन्नत ए कै़स यूँ हुई सरज़द। खा़क सहरा की हमने छानी है।। चाहे जिसको फ़िराक़…"
Jun 27
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
" आली जनाब समर साहिब आदाब लफ़्ज़   "कुहकन"  किसी बड़ेशायर के कलाम में प्रयोग हुआ है । जो कि मुझे अभी याद नहीं आ रहा, वैसे कुछ लफ्ज़ हैं। जिन के सही रूप के अलावा इनके भ्रष्ट रूप भी राइज़ हैं जैसे, बुहतान २२१, बोहतान…"
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Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"जी, अभी मसरूफ़ हूँ हाज़िर होता हूँ"
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Afroz 'sahr''s Blog

ग़ज़ल निकल गए आँसू,,,,

   2122  1212  22

दफ़अतन जो निकल गए आँसू।

सारे मंज़र बदल गए आँसू।।

लाख की कोशिशें छुपाने की।

राज़ दिल का उगल गए आँसू।।

इक ख़ुशी ने मुझे पुकारा है।

ये ख़बर सुन के जल गए आँसू।।

ख़ुश्क दामन तुझे बताऊँ क्या।

वो सबब जो सँभल गए आँसू।।

इत्तिफ़ाकन ही ख़ुश्क थीं पलकें।

इंतिकामन मचल गए आँसू।।

इक तबस्सुम जो आगया लब पर।

मारे ग़म के पिघल गए आँसू।।

कौन सा पल…

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Posted on December 24, 2017 at 11:00am — 11 Comments

ग़ज़ल,,,,इशारों का साथ दो,,,,,,,

221/2121/1221/212



है इख़्तियार तुमको बहारों का साथ दो।

लेकिन कभी तो दर्द के मारों का साथ दो।।



गर हैं निजात के लिए दरकार नेकियाँ।

डोली उठाने वाले कहारों का साथ दो।।



बाहम वो मिल सके न जो सारी हयात में।

मजबूर बेक़रार कनारों का साथ दो।।



तुम इन उदासियों की रिदाओं को चीर कर।

दिलकश हसीन शौख़ नजारों का साथ दो।।



ये वक़्त का तकाजा़ है दानाइ भी यही।

रक्खो ज़ुबान बंद इशारों का साथ दो।।



मिट्टी के ढेर हैं ये फ़कत और… Continue

Posted on December 4, 2017 at 1:36pm — 20 Comments

ग़ज़ल,,,,भीगी पलकों पे कई ख़्वाब,,

2122/1122/1122/22/112



अश्क़ आँखों में यूँ बेताब हुआ करते हैं

भीगी पलकों पे कई ख़्वाब हुआ करते हैं।



जिनकी क़ीमत ही नहीं लोगों की नज़रों में कोई

रब की नज़रों में वो सुरख़ाब हुआ करते हैं।



जो भी रखते हैं बुज़ुर्गों की रिवायत का भरम

लोग दुनिया में वो नायाब हुआ करतें हैं।



ख़ुश्क फूलों की तरह मुझको समझने वालों

गुल में ख़ुश्बू के कई बाब हुआ करते हैं।



तुहमतें गैरों पे साज़िश की लगाने वाले

तेरे दुश्मन तेरे एहबाब हुआ करते… Continue

Posted on November 7, 2017 at 1:00pm — 20 Comments

ग़ज़ल,,,,में अपनी हसरतें,,,,,

1222/1222/1222/1222



जो सच हो ही नहीं सकता वो सपना छोड़ आया हूँ

में अपनी हसरतें सहरा में तंहा छोड़ आया हूँ।



ख़िरद ने जबसे जोड़ा है हक़ीकत से मेंरा रिश्ता

तख़य्युल को ख़लाओं में भटकता छोड़ आया हूँ।



ज़रूरत मुझको ले कर आ गई परदेस में लेकिन

में अपने घर में इक पुतला अना का छोड़ आया हूँ।



सबब जिसके हुए जाते थे अपने ही मेंरे दुश्मन

वो चाँदी छोड़ दी मैंने वो सोना छोड़ आया हूँ।



वो इक लम्हा जो गफ़लत में तेरी चाहत के बिन… Continue

Posted on October 17, 2017 at 7:30pm — 10 Comments

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At 5:25pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय अफरोज जी आदाब
बहुत शुक्रिया आपने मेरी रचना पढ़ी मुझे अभी बहुत सीखना है आशा है आप मेरी इसी तरह मदद करेंगे
At 2:29pm on September 12, 2017,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए....

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है.

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Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 87 in the group चित्र से काव्य तक
"जय जय ..  भागीदारी के लिए हार्दिक धन्यवाद और शुभकामनाएँ आदरणीय दंड पाणी जी."
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