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Afroz 'sahr'
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Afroz 'sahr' commented on Afroz 'sahr''s blog post ग़ज़ल -ए- सहर
"आदरणीय बृजेश जी आपने ग़ज़ल को सराहा आपका बहुत आभारी हूँ ।सादर"
15 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Afroz 'sahr''s blog post ग़ज़ल -ए- सहर
"बड़ी खूबसूरत ग़ज़ल हुई आदरणीय अफ़रोज़ जी.."
15 hours ago
Afroz 'sahr' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post दबी हर बात जिंदा क्यूँ करें हम (ग़ज़ल)
"आदरणीय सुरेंद्र जी वाह ख़ूबबसूरत ग़ज़ल के लिए बधाई स्वीकार करें"
18 hours ago
Afroz 'sahr' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल शाम होते ही सँवर जाएंगे
"आदरणीय नवीन जी आदाब सुंदर ग़ज़ल के लिए आपको बधाई देता हूँ । ग़ज़ल का मतला आपने यूँ कहा है । बिजलियाँ फिर गिरा के जाएँगे । शाम होते वो सँवर जाएँगे । इसमें काफ़िया क्या है कृपा कर बताएँ ता की असमंजस दूर हो ।"
18 hours ago
Afroz 'sahr' commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post हर मुख हिंदी कब गायेगा ?:-मोहित मुक्त
"जनाब मोहित जी सुंदर रचना पर बधाई स्वीकार करें ।आदरणीय समर सहब के सुझाव क़ाबिल ए गो़र होते हैं ।सादर,,,,"
21 hours ago
Afroz 'sahr' commented on MUKESH SRIVASTAVA's blog post मुट्ठी भर ताकतवर और बुद्धिमान
"आदरणीय मुकेश जी अच्छा विषय है । सुंदर रचना बधाई आपको ।"
21 hours ago
Afroz 'sahr' commented on Afroz 'sahr''s blog post ग़ज़ल -ए- सहर
"जनाब तस्दीक़ साहब आपने ग़जल को सराहा बहुत शुक्रिया आपका । नवाज़िशें"
21 hours ago
Afroz 'sahr' commented on Afroz 'sahr''s blog post ग़ज़ल -ए- सहर
"जनाब आरिफ़ साहब ग़ज़ल में आपकी शिरकत पर आपका मश्कूर हूँ ।"
21 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Afroz 'sahr''s blog post ग़ज़ल -ए- सहर
"जनाब अफ़रोज़ साहिब ,अच्छी ग़ज़ल हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं। मुहतरम समर साहिब के मश्वरे पर ध्यान जरूर दीजियेगा"
23 hours ago
Mohammed Arif commented on Afroz 'sahr''s blog post ग़ज़ल -ए- सहर
"आदरणीय अफरोज़ जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल । आली जनाब समर कबीर साहब की इस्लाह से सहमत हूँ । मुबारकबाद क़ुबूल करें"
23 hours ago
Afroz 'sahr' commented on Afroz 'sahr''s blog post ग़ज़ल -ए- सहर
"आदरणीय समर साहब आदाब आपने बिल्कुल सही फ़रमाया है !मैं दुरुस्त करता हूूँ !सादर,,,,,"
yesterday
Samar kabeer commented on Afroz 'sahr''s blog post ग़ज़ल -ए- सहर
"एक बात बताना भूल गया था 'ग़ज़ल'शब्द में इज़ाफ़त नहीं लगाई जाती,इसे 'ग़ज़ल सहर की'लिखना मुनासिब होगा ।"
yesterday
Afroz 'sahr' commented on गिरिराज भंडारी's blog post तरही ग़ज़ल - दो पहर की धूप भी अच्छी लगी ( गिरिराज भंडारी )
"आदरणीय गिरीराज जी बहुत सुंदर ग़ज़ल के लिए बहुत बधाई आपको! आपने अर्कान लिखे हैं!2122/2122/2122 जोकी भ्रम पैदा कर रहे हैं !इसे सही करलें !सादर,,,,"
yesterday
Afroz 'sahr' commented on Afroz 'sahr''s blog post ग़ज़ल -ए- सहर
"आदरणीय समर साहब ग़ज़ल को आपकी सराहना मिली बड़ी बात है!आपका शुक्रिया अदा करता हूँ !आपके तमाम मशवरे बहुत ही मुफ़ीद हैं !ह्रदय से आभार प्रकट करता हूँ ! सादर,,,,,,"
yesterday
Samar kabeer commented on Afroz 'sahr''s blog post ग़ज़ल -ए- सहर
"जनाब अफ़रोज़'सहर'साहिब आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा हुआ है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । 'अजब मैं दिवाना ये क्या चाहता हूँ' इस मिसरे को अगर यूँ कर लिया जाये तो रवानी बढ़ जाएगी:- "अजब मैं दिवाना हूँ क्या चाहता…"
yesterday
Afroz 'sahr' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post दबी हर बात जिंदा क्यूँ करें हम (ग़ज़ल)
"आदरणीय समर साहब ""तुहफ़ा"" स्वीकार्य सादर,,,,,"
yesterday

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ujjain
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contractor
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Afroz 'sahr''s Blog

ग़ज़ल -ए- सहर

अर्कान,,,122/122/122/122



मुहब्बत में होना फ़ना चाहता हूँ।

अजब में दिवाना ये क्या चाहता हूँ।



चराग़ ए सुख़न यूँ जला चाहता हूँ।

ग़ज़ल में नया फ़लसफ़ा चाहता हूँ।



नहीं हूँ में कायल के झूठी अना का।

ख़ुदाया तिरी बस रज़ा चाहता हूँ।



सुख़नवर बहुत हैं अनोखे निराले।

में अंदाज़ अपना जुदा चाहता हूँ।



जुनूँ ने ख़िरद से ये क्या कह दिया है।

तिरी हिकमतों का पता चाहता हूँ।



जहाँ भी रहे तू महकता रहे बस।

फ़कत ये ख़ुदा से… Continue

Posted on September 17, 2017 at 1:29pm — 18 Comments

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At 2:29pm on September 12, 2017,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए....

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है.

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