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Afroz 'sahr'
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  • बृजेश कुमार 'ब्रज'

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Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"जनाब शैलेश साहिब, उम्दा पेशकश मुबारकबाद आपको,"
1 hour ago
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"जनाब रवि साहिब  इस पेशकश पर मुबारकबाद आपको,"
1 hour ago
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"जनाब गणेश बागी साहिब  उम्दा पेशकश मुबारकबाद आपको,"
3 hours ago
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"जनाब लक्षमण धामी साहिब,. उम्दा अश्आर मुबारकबाद आपको,,"
3 hours ago
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"जनाब महेंद्र साहिब ,.इस प्रयास हेतु बधाई आपके"
3 hours ago
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"जनाब दंडपानि नाहक़ साहिब, आयोजन में सहभागिता के लिए धन्यवाद आप मंच पर उपलब्ध ग़ज़ल की कक्षा का लाभ लें"
3 hours ago
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"जनाब गुर प्रीत सिंह साहिब, उम्दा ग़ज़ल कही है कुछ अश्आर तो दिल को छू गए,, बहुत बहुत मुबारकबाद आपको,,"
3 hours ago
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"जनाब नादिर ख़ान साहिब,. बहुत उम्दा ग़ज़ल सभी शे'र लाजवाब मेरी और से ढेरों दाद,,"
3 hours ago
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"जनाब मनन कपमार साहिब,. ग़ज़ल की अच्छी कोशिश है, बधाई आपको, गुणीजनों की इस्लाह मुफ़ीद है,,"
3 hours ago
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"अरे सर,,,,हा हा हा कमाल आप तो तंज़ओ मिजा़ह के भी मास्टर निकले,,,कमालललललललल"
3 hours ago
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"मुहतर्मा राजेश कुमारी साहिबा, हर शे'र लाजवाब दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ,,"
3 hours ago
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"जनाब अजित शर्मा साहिब  इस ग़ज़ल के लिए बधाई स्वीकार करें मक्ते के सानी मिसरे में लफ़्ज़ "अपह्रत" की जगह लफ़्ज़ "अगवा" करने से मिसरे में रवानी बढ़ जाएगी,. गौ़र कीजिएगा,"
3 hours ago
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"मुहतरम समर साहिब आदाब, ग़ज़ल पर आपकी हौसला बढ़ाने वाली प्रतिक्रिया को तहे दिल से  सलाम पेश करता हूँ, आपका मम्नून ओ मश्कूर हूँ,,"
3 hours ago
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"जनाब महेंद्र कुमार साहिब, ग़ज़ल में शिरकत और सुख़न नवाज़ी पर आपका मश्कूर हूँ,"
3 hours ago
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"जनाब गजेंद्र क्षोत्रिय साहिब, अच्छे अश्आर निकाले बहुत बहुत मुबारकबाद आपको,, ५वाँ और ६टा शे'र मेरे दिल को छू गए! गुणीजनों कीसलाह मुफ़ीद है, ११ वें शे'र में लफ़्ज़ "शिफ़ा" की जगह "दवा" करलें,,, सादर"
3 hours ago
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"जनाब निलेश नूर साहिब, उम्दा ग़ज़ल तहे दिल से बहुत बहुत मुबारकबाद,,"
4 hours ago

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Afroz 'sahr''s Blog

ग़ज़ल निकल गए आँसू,,,,

   2122  1212  22

दफ़अतन जो निकल गए आँसू।

सारे मंज़र बदल गए आँसू।।

लाख की कोशिशें छुपाने की।

राज़ दिल का उगल गए आँसू।।

इक ख़ुशी ने मुझे पुकारा है।

ये ख़बर सुन के जल गए आँसू।।

ख़ुश्क दामन तुझे बताऊँ क्या।

वो सबब जो सँभल गए आँसू।।

इत्तिफ़ाकन ही ख़ुश्क थीं पलकें।

इंतिकामन मचल गए आँसू।।

इक तबस्सुम जो आगया लब पर।

मारे ग़म के पिघल गए आँसू।।

कौन सा पल…

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Posted on December 24, 2017 at 11:00am — 11 Comments

ग़ज़ल,,,,इशारों का साथ दो,,,,,,,

221/2121/1221/212



है इख़्तियार तुमको बहारों का साथ दो।

लेकिन कभी तो दर्द के मारों का साथ दो।।



गर हैं निजात के लिए दरकार नेकियाँ।

डोली उठाने वाले कहारों का साथ दो।।



बाहम वो मिल सके न जो सारी हयात में।

मजबूर बेक़रार कनारों का साथ दो।।



तुम इन उदासियों की रिदाओं को चीर कर।

दिलकश हसीन शौख़ नजारों का साथ दो।।



ये वक़्त का तकाजा़ है दानाइ भी यही।

रक्खो ज़ुबान बंद इशारों का साथ दो।।



मिट्टी के ढेर हैं ये फ़कत और… Continue

Posted on December 4, 2017 at 1:36pm — 20 Comments

ग़ज़ल,,,,भीगी पलकों पे कई ख़्वाब,,

2122/1122/1122/22/112



अश्क़ आँखों में यूँ बेताब हुआ करते हैं

भीगी पलकों पे कई ख़्वाब हुआ करते हैं।



जिनकी क़ीमत ही नहीं लोगों की नज़रों में कोई

रब की नज़रों में वो सुरख़ाब हुआ करते हैं।



जो भी रखते हैं बुज़ुर्गों की रिवायत का भरम

लोग दुनिया में वो नायाब हुआ करतें हैं।



ख़ुश्क फूलों की तरह मुझको समझने वालों

गुल में ख़ुश्बू के कई बाब हुआ करते हैं।



तुहमतें गैरों पे साज़िश की लगाने वाले

तेरे दुश्मन तेरे एहबाब हुआ करते… Continue

Posted on November 7, 2017 at 1:00pm — 20 Comments

ग़ज़ल,,,,में अपनी हसरतें,,,,,

1222/1222/1222/1222



जो सच हो ही नहीं सकता वो सपना छोड़ आया हूँ

में अपनी हसरतें सहरा में तंहा छोड़ आया हूँ।



ख़िरद ने जबसे जोड़ा है हक़ीकत से मेंरा रिश्ता

तख़य्युल को ख़लाओं में भटकता छोड़ आया हूँ।



ज़रूरत मुझको ले कर आ गई परदेस में लेकिन

में अपने घर में इक पुतला अना का छोड़ आया हूँ।



सबब जिसके हुए जाते थे अपने ही मेंरे दुश्मन

वो चाँदी छोड़ दी मैंने वो सोना छोड़ आया हूँ।



वो इक लम्हा जो गफ़लत में तेरी चाहत के बिन… Continue

Posted on October 17, 2017 at 7:30pm — 10 Comments

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At 5:25pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय अफरोज जी आदाब
बहुत शुक्रिया आपने मेरी रचना पढ़ी मुझे अभी बहुत सीखना है आशा है आप मेरी इसी तरह मदद करेंगे
At 2:29pm on September 12, 2017,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए....

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है.

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Rana Pratap Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
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Krishnasingh Pela replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"हार्दिक धन्यवाद अादरणीय श्लेष जी ।"
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Shlesh Chandrakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"हार्दिक आभार आदरेय, सुधारात्मक सुझाव हेतु, क्या पोस्ट में एडिट का आफ्सन है। कृपया बताइए"
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Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"उत्साहवर्धन हेतु हृदय से आभारी हूँ आदरणीय राणा प्रताप सिंह जी। बहुत-बहुत धन्यवाद। सादर।"
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Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"आदरणीय महेन्द्र कुमार जी सादर, प्रस्तुत गजल पर उत्साहवर्धन के लिए आपका दिल से आभार. नाना बनने की…"
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Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"आपका हार्दिक आभार आदरणीय रवि जी। बहुत-बहुत धन्यवाद। सादर।"
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Shlesh Chandrakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"हार्दिक आभार आदरेय, सुधारात्मक सुझाव हेतु, क्या पोस्ट में एडिट का आफ्सन है। कृपया बताइए"
3 minutes ago

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