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  • बृजेश कुमार 'ब्रज'

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Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"जनाब लक्ष्मण धामी साहिब, आपकी मुहब्बतों का तहे दिल से शुक्रिया,,"
Nov 24, 2018
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"जनाब अजय तिवारी साहिब आदाब, आप अपना फोन नम्बर देने का कष्ट करेंं सादर,,,"
Nov 24, 2018
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"मैं इस टिप्पणी पर कुछ नहीं कहूँगा,,सादर"
Nov 24, 2018
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"जनाब तस्दीक़ साहिब आदाब, ग़ज़ल को सराहने के लिए आपका मम्नून हूँ,"
Nov 24, 2018
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"मुहतरमा अंजली साहिबा, सुख़न नवाज़ी पर आपका मश्कूर हूँ,"
Nov 24, 2018
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"जनाब अजय तिवारी साहिब, आदाब, आपने ग़ज़ल को सराहा आपका तहे दिल से शुक्रिया,"
Nov 24, 2018
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"जनाब पंकज साहिब, आपके और समर साहिब के बीच की वार्ता में मैं कहाँ हाइल हुआ, ये बात मेरी समझ से परे है, ये मंच सीखने सिखाने का मंच है, जब तक बहस मुबाहिसा नहीं होगा तब तक किसी भी बात को समझना और समझाना मुश्किल होगा, सादर,,"
Nov 24, 2018
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"जनाब पंकज कुमार साहिब आदाब, आपकी टिप्पणी पढ़ी पढ़ कर हैरत हुई, मैं आपकी इस कथित टिप्पणी का जवाब  बहुत विस्तार पूर्वक देता, परंतु यहाँ पर केवल लेखनी  आपकी है, शब्द आपके नहीं हैं , बस इतना ही कहना था, ,इस आयोजन में  आगे आपकी किसी भी…"
Nov 24, 2018
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"जनाब लक्षमण धामी साहिब, अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद क़बूल करें "देश बदला न आपकी हुकूमत में" ये मिसरा लय में नहीं है,"
Nov 24, 2018
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"जनाब मोहन जी  अच्छा प्रयास है गज़ल का, बधाई स्वीकार करें"
Nov 24, 2018
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"मुहतरमा अंजली गुप्ता साहिबा, उम्दा अश्आर मुबारकबाद क़बूल करें, "हैं समंदर की लहरें मैं और तू" इस मिसरे में  लफ़्ज़  "हैं" की जगह "ये" रखना बेहतर होगा,"
Nov 24, 2018
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"जनाब दंडपानी साहिब,  आप मंच पर मौजूद ग़ज़ल की कक्षा का लाभ लें,,, आयोजन में सहभागिता के लिए शुक्रिया"
Nov 24, 2018
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"जनाब अश्फ़ाक अ ली साहिब, उम्दा ग़ज़ल मुबारकबाद क़बूल करें,"
Nov 24, 2018
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"जनाब श्लेष साहिब, इस ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद आपको, "शख़्स वो आज कल नहीं मिलता" इस मिसरे को यूँ कहा जा सकता है, "लोग वो आजकल नहीं मिलते""
Nov 24, 2018
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"जनाब सुरेंद्र साहिब,. अच्छी ग़ज़ल हुई दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ,"
Nov 24, 2018
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"जनाब मुनव्वर अली ताज साहिब, उम्दा ग़ज़ल दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ,,"
Nov 24, 2018

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Afroz 'sahr''s Blog

ग़ज़ल निकल गए आँसू,,,,

   2122  1212  22

दफ़अतन जो निकल गए आँसू।

सारे मंज़र बदल गए आँसू।।

लाख की कोशिशें छुपाने की।

राज़ दिल का उगल गए आँसू।।

इक ख़ुशी ने मुझे पुकारा है।

ये ख़बर सुन के जल गए आँसू।।

ख़ुश्क दामन तुझे बताऊँ क्या।

वो सबब जो सँभल गए आँसू।।

इत्तिफ़ाकन ही ख़ुश्क थीं पलकें।

इंतिकामन मचल गए आँसू।।

इक तबस्सुम जो आगया लब पर।

मारे ग़म के पिघल गए आँसू।।

कौन सा पल…

Continue

Posted on December 24, 2017 at 11:00am — 11 Comments

ग़ज़ल,,,,इशारों का साथ दो,,,,,,,

221/2121/1221/212



है इख़्तियार तुमको बहारों का साथ दो।

लेकिन कभी तो दर्द के मारों का साथ दो।।



गर हैं निजात के लिए दरकार नेकियाँ।

डोली उठाने वाले कहारों का साथ दो।।



बाहम वो मिल सके न जो सारी हयात में।

मजबूर बेक़रार कनारों का साथ दो।।



तुम इन उदासियों की रिदाओं को चीर कर।

दिलकश हसीन शौख़ नजारों का साथ दो।।



ये वक़्त का तकाजा़ है दानाइ भी यही।

रक्खो ज़ुबान बंद इशारों का साथ दो।।



मिट्टी के ढेर हैं ये फ़कत और… Continue

Posted on December 4, 2017 at 1:36pm — 20 Comments

ग़ज़ल,,,,भीगी पलकों पे कई ख़्वाब,,

2122/1122/1122/22/112



अश्क़ आँखों में यूँ बेताब हुआ करते हैं

भीगी पलकों पे कई ख़्वाब हुआ करते हैं।



जिनकी क़ीमत ही नहीं लोगों की नज़रों में कोई

रब की नज़रों में वो सुरख़ाब हुआ करते हैं।



जो भी रखते हैं बुज़ुर्गों की रिवायत का भरम

लोग दुनिया में वो नायाब हुआ करतें हैं।



ख़ुश्क फूलों की तरह मुझको समझने वालों

गुल में ख़ुश्बू के कई बाब हुआ करते हैं।



तुहमतें गैरों पे साज़िश की लगाने वाले

तेरे दुश्मन तेरे एहबाब हुआ करते… Continue

Posted on November 7, 2017 at 1:00pm — 20 Comments

ग़ज़ल,,,,में अपनी हसरतें,,,,,

1222/1222/1222/1222



जो सच हो ही नहीं सकता वो सपना छोड़ आया हूँ

में अपनी हसरतें सहरा में तंहा छोड़ आया हूँ।



ख़िरद ने जबसे जोड़ा है हक़ीकत से मेंरा रिश्ता

तख़य्युल को ख़लाओं में भटकता छोड़ आया हूँ।



ज़रूरत मुझको ले कर आ गई परदेस में लेकिन

में अपने घर में इक पुतला अना का छोड़ आया हूँ।



सबब जिसके हुए जाते थे अपने ही मेंरे दुश्मन

वो चाँदी छोड़ दी मैंने वो सोना छोड़ आया हूँ।



वो इक लम्हा जो गफ़लत में तेरी चाहत के बिन… Continue

Posted on October 17, 2017 at 7:30pm — 10 Comments

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At 8:49am on November 21, 2018, Ahmed Maris said…

Good Day,
How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day
Thanks God bless.
Stella.

At 5:25pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय अफरोज जी आदाब
बहुत शुक्रिया आपने मेरी रचना पढ़ी मुझे अभी बहुत सीखना है आशा है आप मेरी इसी तरह मदद करेंगे
At 2:29pm on September 12, 2017,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए....

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है.

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