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Afroz 'sahr'
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  • बृजेश कुमार 'ब्रज'

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Afroz 'sahr' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post फितरत नहीं छिपती है - (गजल)- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"जनाब लक्षमण धामी जी इस रचना पर बधाई स्वीकार करें। आदरणीय समर साहिब की बातों पर ध्यान दें।"
Feb 2
Afroz 'sahr' commented on SALIM RAZA REWA's blog post दूर दामन से तेरे गर्दिश-ए-अय्याम रहे - SALIM RAZA REWA
"जनाब सलीम रज़ा साहिब इस रचना पर बधाई स्वीकार करें । बाकी़ गुणीजन कह चुके हैं।"
Feb 2
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-91
"जनाब आशीष जी ग़ज़ल में शिरकत और सुख़न नवाज़ी पर आपका मश्कूर हूँ।"
Jan 26
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-91
"जनाब सुरेंद्र जी ग़ज़ल में शिरकत और सुख़न नवाज़ी का शुक्रिया,,"
Jan 26
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-91
"जनाब नादिर खान साहिब गज़ल की सराहना और सुख़न नवाज़ी का शुक्रिया,,,"
Jan 26
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-91
"जनाब आरिफ़ साहिब ग़ज़ल में शिरकत पर आपका मश्कूर हूँ।"
Jan 26
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-91
"मुहतरमा राजेश कुमारी साहिबा ग़ज़ल में शिरकत और सुख़न नवाज़ी का शुक्रिया,,,,,"
Jan 26
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-91
"जनाब तस्दीक़ साहिब आदाब इसमें बहस जैसी कोई बात नहीं है। सिर्फ़ अमल का रद्द ए अमल है। सवाल का जवाब दिया जाना चाहिए। लफ़्ज़ हिंदी का हो चाहे और किसी भाषा का ग़ज़ल में इस्तेमाल होने पर लय भंग नहीं होना चाहिए। कुछ शब्द जैसे रंग, संग,जंग, तंग आदि, को…"
Jan 26
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-91
"जनाब तस्दीक़ साहिब आदाब सुख़न नवाज़ी का शुक्रिया शेर 1 का सानी मिसरा बह्र में है। क्यूँ कि लफ़्ज़ "ढंग" का वज़्न ,2, भी होता है।और ,21,भी यहां पर वज़्न ,2, लिया गया है। जिससे की लय भंग की स्थिती नहीं है।आहंग ओ मौसिक़ियत बरक़रार है।…"
Jan 26
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-91
"अल्लाह से दुआ गो हूँ की जनाब समर कबीर साहिब बहुत ही जल्द सेहतमंद हो जाएं,,,,,,आमीन"
Jan 26
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-91
"आदरणीय मनन कुमार सिंह साहिब ग़ज़ल की सराहना पर आपका मश्कूर हूँ,,,,,"
Jan 26
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-91
"आदरणीय लक्षमण धामी मुसाफ़िर साहिब ग़ज़ल में शिरकत और सुख़न नवाज़ी का शुक्रिया,,,,"
Jan 26
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-91
"आदरणीय शेख़ शहज़ाद उस्मानी साहिब ग़ज़ल को सराहने और सुख़न नवाज़ी पर मश्कूर हूँ,,,"
Jan 26
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-91
"आदरणीय रवि शुक्ला जी ग़ज़ल में शिरकत और सुख़न नवाज़ी का शुक्रिया,,,"
Jan 26
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-91
"बे ख़ौफ़ इस क़दर भी इंसान हो न जाए। हैरान इसके ढंग पे शैतान हो न जाए।। कमज़र्फ़ की इनायत वल्लाह मेरी तौबा। एहसान करके फिर वो भगवान हो न जाए।। गफ़लत में जी रहूं में तुझको भुला के मौला। ये ज़िंदगी भी इतनी आसान हो न जाए।। मौसम बड़ा सुहाना तुझको जो…"
Jan 26
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आदरणिया राजेश कुमारी साहिबा को "सारस्वत सम्मान" तथा "अदब की आवाज़" सम्मान से नवाज़ा गया इस ख़ुशी के मौक़े पर में दिल की गहराईयों से आदरणिया राजेश कुमारी साहिबा को बहुत बहुत मुबारकबाद पेश करता हूँ।,,"
Jan 17

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Afroz 'sahr''s Blog

ग़ज़ल निकल गए आँसू,,,,

   2122  1212  22

दफ़अतन जो निकल गए आँसू।

सारे मंज़र बदल गए आँसू।।

लाख की कोशिशें छुपाने की।

राज़ दिल का उगल गए आँसू।।

इक ख़ुशी ने मुझे पुकारा है।

ये ख़बर सुन के जल गए आँसू।।

ख़ुश्क दामन तुझे बताऊँ क्या।

वो सबब जो सँभल गए आँसू।।

इत्तिफ़ाकन ही ख़ुश्क थीं पलकें।

इंतिकामन मचल गए आँसू।।

इक तबस्सुम जो आगया लब पर।

मारे ग़म के पिघल गए आँसू।।

कौन सा पल…

Continue

Posted on December 24, 2017 at 11:00am — 11 Comments

ग़ज़ल,,,,इशारों का साथ दो,,,,,,,

221/2121/1221/212



है इख़्तियार तुमको बहारों का साथ दो।

लेकिन कभी तो दर्द के मारों का साथ दो।।



गर हैं निजात के लिए दरकार नेकियाँ।

डोली उठाने वाले कहारों का साथ दो।।



बाहम वो मिल सके न जो सारी हयात में।

मजबूर बेक़रार कनारों का साथ दो।।



तुम इन उदासियों की रिदाओं को चीर कर।

दिलकश हसीन शौख़ नजारों का साथ दो।।



ये वक़्त का तकाजा़ है दानाइ भी यही।

रक्खो ज़ुबान बंद इशारों का साथ दो।।



मिट्टी के ढेर हैं ये फ़कत और… Continue

Posted on December 4, 2017 at 1:36pm — 20 Comments

ग़ज़ल,,,,भीगी पलकों पे कई ख़्वाब,,

2122/1122/1122/22/112



अश्क़ आँखों में यूँ बेताब हुआ करते हैं

भीगी पलकों पे कई ख़्वाब हुआ करते हैं।



जिनकी क़ीमत ही नहीं लोगों की नज़रों में कोई

रब की नज़रों में वो सुरख़ाब हुआ करते हैं।



जो भी रखते हैं बुज़ुर्गों की रिवायत का भरम

लोग दुनिया में वो नायाब हुआ करतें हैं।



ख़ुश्क फूलों की तरह मुझको समझने वालों

गुल में ख़ुश्बू के कई बाब हुआ करते हैं।



तुहमतें गैरों पे साज़िश की लगाने वाले

तेरे दुश्मन तेरे एहबाब हुआ करते… Continue

Posted on November 7, 2017 at 1:00pm — 20 Comments

ग़ज़ल,,,,में अपनी हसरतें,,,,,

1222/1222/1222/1222



जो सच हो ही नहीं सकता वो सपना छोड़ आया हूँ

में अपनी हसरतें सहरा में तंहा छोड़ आया हूँ।



ख़िरद ने जबसे जोड़ा है हक़ीकत से मेंरा रिश्ता

तख़य्युल को ख़लाओं में भटकता छोड़ आया हूँ।



ज़रूरत मुझको ले कर आ गई परदेस में लेकिन

में अपने घर में इक पुतला अना का छोड़ आया हूँ।



सबब जिसके हुए जाते थे अपने ही मेंरे दुश्मन

वो चाँदी छोड़ दी मैंने वो सोना छोड़ आया हूँ।



वो इक लम्हा जो गफ़लत में तेरी चाहत के बिन… Continue

Posted on October 17, 2017 at 7:30pm — 10 Comments

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At 5:25pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय अफरोज जी आदाब
बहुत शुक्रिया आपने मेरी रचना पढ़ी मुझे अभी बहुत सीखना है आशा है आप मेरी इसी तरह मदद करेंगे
At 2:29pm on September 12, 2017,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए....

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है.

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