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Chetan Prakash
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Chetan Prakash commented on Chetan Prakash's blog post ग़ज़ल : बहुत वो देर लगी आग दिल लगाने में
"आ. समर कबीर  साहब,  आज अवसर मिला कि आपके  मार्गदर्शन के आलोक  मे  निर्देशानुसार संशोधन कर सकूँ सकूँ , मतले  कि सानी  कृपया पुन:  यूँ किया : " उन्होंने खेल  जो  खेला उसे मिटाने में ( 1212 …"
yesterday
Chetan Prakash commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post गीत -२
"आदाब, आ. बहुत खूबसूरत गीत हुआ इस बार! अन्तरों में गीतिका छंद को  दो हिस्सों में विभक्त कर सुन्दर गीत की रचना हुई है, हार्दिक बधाई! "
yesterday
Chetan Prakash commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post गीत
"नमस्कार, 'मुसाफ़िर' साहब गीत का अच्छा प्रयास किया आपने! मैं आपका पहला गीत देख रहा हूँ, बधाई  ! हाँ, लेकिन गीत किसी मीटर / तय प्रबंधन पर ही रचे जाते है, नवगीत की बात यहाँ मैं नहीं कर रहा हूँ! आपके स्थायी में मात्राओं की संख्या कुछ और…"
yesterday
Chetan Prakash commented on Chetan Prakash's blog post ग़ज़ल : बहुत वो देर लगी आग दिल लगाने में
"आदाब, समर कबीर साहब,  आपने अपना समय मेरी किसी पोस्ट को दिया, इसके लिए आपका आभारी हूँ ! आपके  मार्ग दर्शन के  आलोक में आवश्यक  संशोधन  कर इसको  पुन: पोस्ट  करने का प्रयास करूँगा  ! और हाँ, ग़ज़ल की कक्षा …"
Wednesday
Samar kabeer commented on Chetan Prakash's blog post ग़ज़ल : बहुत वो देर लगी आग दिल लगाने में
"जनाब चेतन प्रकाश जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, लेकिन ग़ज़ल अभी समय चाहती है, बहरहाल बधाई स्वीकार करें I  'जो खेल उस ने खेला रात भर बुझाने में'-- ये मिसरा बह्र में नहीं है, देखिएगा I  'बहुत महनत लगी है  ज़िन्दगी…"
Wednesday
Chetan Prakash posted a blog post

ग़ज़ल : बहुत वो देर लगी आग दिल लगाने में

1212     1122     1212     22 / 122 बहुत वो देर लगी आग दिल  लगाने  में जो खेल उस ने खेला रात भर बुझाने मेंअभी तो आप नहीं भूल पाए प्यार सनम !लगेगा वक़्त अभी आग वो  बुझाने  में वो रात कल भी तो गुज़री है भारी हम पर जाँ  बहुत महनत लगी है  ज़िन्दगी बनाने  मेंतुम्हारा कुछ नहीं बिगड़ा हमें रुलाकर भीकि शम'अ बुझ अभी जाती है आज़माने मेंगया मैं वक़्त नहीं लौट कर न आ सकूँ जोहरा चुका हूँ कभी मौत को मिटाने मेंहदें जो भूले हैं हालात को समझने में हैं रोए उम्र भर दुनिया हँसाते जाने  मेंलगे तुम्हें न नज़र…See More
Monday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-143
" (3)  अंतिम पक्ति, " गयीं जो विश्व छूट, जगत कहानी अधूरी " पढ़े, कृपया! "
Sep 17
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-143
"कुडण्लिया छंदः अधूरी कहानी ( 1 ) अधूरा ..आदमी रहा, पूर्ण मात्र भगवान । तड़प ..अधूरापन कहीं, देती हमे उड़ान।। देती... हमें ..उड़ान, प्रेरणा डग भरने की । जाँचते फिर वकार, लोग क्षमता जो बाकी।। कह चेतन कविराय,कला सोलह जो पूरा । है राधा का कृष्ण, शेष सब…"
Sep 17
Chetan Prakash posted blog posts
Sep 17
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Sep 13
Chetan Prakash commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल
"आदाब, भाई बृजेश कुमार ब्रज, आप यूँ समझिये, सानी और ऊला दो रस्सी के टुकड़े हैं, आपको उन्हें एक करना है, कितने जोड़ लगाइएगा, बताइये! भाषा शास्त्र और ध्वन्यात्मक विज्ञान  Linguistics & Phonetics) ताउम्र विश्व विद्यालय स्तर पर पढ़ाया, आप मेरी…"
Sep 13
Chetan Prakash commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल
"आदाब, श्रद्धेय समर कबीर साहब, आपने इस नाचीज़ की टिप्पणी का संज्ञान लिया, आपका आभारी हूँ! वस्तुतः मेरा संकेत ऊला के संदर्भ में सानी में सुधार की अपेक्षा से था! कहना न होगा कि शे'र दोनों मिसरों का समन्वय है, और कुल कथन है, फिर एक ही स्टेटमेंन्ट…"
Sep 13
Chetan Prakash commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल
"आदाब, जनाब 'ब्रज ', अच्छा प्रयास हुआ, इस बह्र में । हाँ मकते का सानी," ब्रज इतना बुरा है तो कहानी से निकालो", मेरी नज़र में सुधार चाहता है। शुभ प्रभात"
Sep 13
Chetan Prakash posted a blog post

कह मुकरियाँ

         ( 1 )आ जाये दिल खुश हो जायेचला जाय तो भादों आवेचाकर बन पैरों गिर पसराक्या सखि  साजन ? ना सखि भँवरा !           ( 2 )दादुर मोर पपीहा बोले कोयल सी वो  बोली बोले समीर बहती है दिल-आँगन क्या सखि साजन ? ना सखि सावन !           ( 3 )पोर- पोर में रस भर जावेचहुँओर मुरलिया सी बाजेखुशियों का नहीं जग में अंतक्या सखि साजन ? ना सखि बसंतमौलिक व अप्रकाशित प्रोफ.  चेतन प्रकाश 'चेतन'See More
Sep 4
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-89 (विषय: बाज़ार)
"आदरेया बबिता गुप्ता जी नमन, अच्छी लघुकथा आपने कही, मानवगत क्षुद्रता और ईर्ष्या को उकेरती कथा प्रेरणास्पद है! "
Aug 31
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-89 (विषय: बाज़ार)
"आ. लघुकथा का कालखण्ड सौ प्रतिशत समसामयिक है! टंकण की त्रुटि तो ' 'बहतायत' भी है!  इति! "
Aug 31

Profile Information

Gender
Male
City State
Baraut
Native Place
Hapur
Profession
Teaching
About me
I'm a poet rather born than made or trained since my childhood

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ग़ज़ल : बहुत वो देर लगी आग दिल लगाने में

1212     1122     1212     22 / 122

 

बहुत वो देर लगी आग दिल  लगाने  में 

जो खेल उस ने खेला रात भर बुझाने में

अभी तो आप नहीं भूल पाए प्यार सनम !

लगेगा वक़्त अभी आग वो  बुझाने  में 

वो रात कल भी तो गुज़री है भारी हम पर जाँ 

 बहुत महनत लगी है  ज़िन्दगी बनाने  में

तुम्हारा कुछ नहीं बिगड़ा हमें रुलाकर भी

कि शम'अ बुझ अभी जाती है आज़माने में

गया मैं वक़्त नहीं लौट कर न आ सकूँ जो

हरा चुका…

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Posted on September 19, 2022 at 3:54pm — 3 Comments

ग़ज़ल: : हिन्दी

1222     1222     1222     1222

बह्रे  हजज़  मुसम्मन सालिम 

जो बोला है  वही लिखती मेरा सम्मान है हिन्दी 

है बिन्दी माँ के  माथे सी पिता का मान है हिन्दी 

तुम्हारी माँ अग्रजा मम शिखा का मान है हिन्दी

है सरकारी वो रोटी आज भोजन आन है हिन्दी

खड़ी बोली है हरियाणा कि  दिल्ली प्रान है हिन्दी 

न है अनजान  कोई उससे मेरी शान है हिन्दी 

कहूँ क्या आपसे साथी स्वयं भण्डार भाषा है

वो सुमधुर गीत फिल्मों के बड़ा…

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Posted on September 16, 2022 at 7:30pm

गज़ल

ग़ज़ल

1222 1222 1222 122

रहे जिससे मरासिम थे वही अखबार निकला

मुसीबत है अभी जीवन निरा श्रृंगार निकला

शबे ग़म दिल मिरा टूटा रही वो आँख रोती

कई दिन हो गये सूरज न वो संसार निकला

अँधेरे अधखुली आँखों मुझे अब देखते हैं

बुरा हो इश्क़ तेरा यार वो अख़बार निकला

न कोई दोस्त है दुनिया न ही हमदम यहाँ है

जिसे गलहार समझा था अभी खूँख़्वार निकला

न हमजोली बचा है आज तो…

Continue

Posted on September 12, 2022 at 8:30pm

कह मुकरियाँ

         ( 1 )

आ जाये दिल खुश हो जाये

चला जाय तो भादों आवे

चाकर बन पैरों गिर पसरा

क्या सखि  साजन ? ना सखि भँवरा !

           ( 2 )

दादुर मोर पपीहा बोले 

कोयल सी वो  बोली बोले 

समीर बहती है दिल-आँगन 

क्या सखि साजन ? ना सखि सावन !

           ( 3 )

पोर- पोर में रस भर जावे

चहुँओर मुरलिया सी बाजे

खुशियों का नहीं जग में अंत

क्या सखि साजन ? ना सखि…

Continue

Posted on September 4, 2022 at 3:36pm

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At 6:35am on July 22, 2021, रणवीर सिंह 'अनुपम' said…
आदरणीय, चेतन जी, "दोहे : कैसे- कैसे  लोग" शीर्षक के तहत लिखे गए दोहे बहुत सुंदर हैं और बहुत अच्छे लगे।

निम्न चरण विधान में न होने से इनमें लय भंग है। जिसे दूर करने की जरूरत है।

जन्म-भूमि स्वर्ग सम हो
(कारण-नवीं मात्रा पर शब्द पूरा हो रहा है जो नहीं होना चाहिए)

कृतघ्न पक्के लोग
(कारण-आरंभ में जगण "कृतघ्न"आ रहा है, जो नहीं होना चाहिए)

कर रहे बस भोग
(कारण-एक मात्राभार कम है, साथ ही पाँचवीं मात्रा पर शब्द पूरा हो रहा है जो नहीं होना चाहिए)

न हों कभी बदनाम
(कारण-पहली मात्रा पर शब्द पूरा हो रहा है जो नहीं होना चाहिए)

विद्या  हमें  सिखाती है,
(कारण-13 मात्राओं की जगह 14 मात्राएँ हैं, जो नहीं होनी चाहिए)

कर अन्याय प्रतिकार
(कारण-11 की जगह 12 मात्राएँ हैं जो नहीं होनी चाहिए)
At 11:46pm on November 22, 2020, DR ARUN KUMAR SHASTRI said…

भाई चेतन जी
नमन -
इस्लाह का
सलीका आ जायेगा
मैंने आज तलक
मुकम्मल तो कोई देखा नहीं
गलतियां निकालोगे-
तो सीखूंगा ही ।।
मैं तो अधूरा था
अधूरा रहा
और हूँ अब तलक
आज आया हूँ आपकी बज्म में
कुछ सिखा दोगे -
तो सीखूंगा भी ।।

At 11:59am on June 27, 2020, Samar kabeer said…

जनाब चेतन प्रकाश जी,ये टिप्पणी आप मुशाइर: में दें,तो मुझे जवाब देने में आसानी होगी ।

 
 
 

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