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आशीष यादव
  • 27, Male
  • ghazipur, uttarpradesh
  • India
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आशीष यादव's Discussions

क्या भारत मेँ अन्तर्माध्यमिक तक हिन्दी एक अनिवार्य विषय नही होनी चाहिए
15 Replies

आज जहाँ सुनिये वहीँ भाषा का बिगड़ा स्वरूप सुनाई देता है। किस पुरुष का कर्ता है और कौन सी क्रिया लग गई पता ही नही। यह भी नही की यह युवा पीढ़ी ढंग से आंग्ल भाषा ही जानती हो। तो क्या हमारी और सरकार की यह…Continue

Started this discussion. Last reply by आशीष यादव Jul 28, 2012.

 

Welcome, आशीष यादव!

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आशीष यादव commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल -और हम भी प्यार की जागीर को समझे नहीं - ( गिरिराज )
"बहुत बढ़ियाँ गज़ल। खूबसूरत।"
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सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on आशीष यादव's blog post हम तुम, दो तट नदी के
"आदरणीय आशीष भाई , गंगा जमनी तहज़ीब पर अच्छी कविता रची आपने , हार्दिक बधाइयाँ ।"
Apr 5
Samar kabeer and आशीष यादव are now friends
Apr 5
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on आशीष यादव's blog post हम तुम, दो तट नदी के
"बहुत ही सुन्दर कविता हुई"
Apr 3
Samar kabeer commented on आशीष यादव's blog post हम तुम, दो तट नदी के
"जनाब आशीष यादव जी आदाब,बहुत सुंदर कविता लिखी,इस प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें ।"
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आशीष यादव commented on विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी's blog post कुछ मुक्तक (भाग-३)
"बहुत सुंदर । एक दूसरे से बँधे से और मुक्तक भी। बहुत बहुत बधाई"
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आशीष यादव commented on Ravi Shukla's blog post तरही गजल : दिन सुहाने हो गये राते सुहीनी हा गईं
"बहुत खूब। बधाई कुबूल करें।"
Apr 1
आशीष यादव posted blog posts
Apr 1

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on आशीष यादव's blog post यह सियासत आप पर हम पर कहर होने को है
"आदरणीय आशीष भाई , बहुत अच्छी ग़ज़ल कही है , हार्दिक बधाइयाँ स्वीकार कीजिये ।"
Mar 7
Mahendra Kumar commented on आशीष यादव's blog post यह सियासत आप पर हम पर कहर होने को है
"आदरणीय आशीष जी, बढ़िया ग़ज़ल लिखी गई आपने। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। "हो भयावह रात कितनी भी सहर होने को है", मेरी समझ से यह मिसरा ठीक है। सादर"
Mar 6
आशीष यादव posted a blog post

यह सियासत आप पर हम पर कहर होने को है

2122 2122 2122 212 पग सियासी आँच पर मधु भी जहर होने को है। बच गया ईमान जो कुछ दर-ब-दर होने को है।। मुफलिसों को छोड़कर गायों गधों पर आ गई। यह सियासत आप पर हम पर कहर होने को है।। उड़ रहा है जो हकीकत की धरा को छोड़ कर। बेखबर वो जल्द ही अब बाखबर होने को है।। वो जो बल खा के चलें इतरा के घूमें कू-ब-कू। खत्म उनके हुस्न की भी दोपहर होने को है।। जुल्म से घबरा के थक के हार के बैठो न तुम।"हो भयावह रात कितनी भी सहर होने को है॥" आशीष यादवमौलिक एवम् अप्रकाशितSee More
Mar 6
आशीष यादव commented on आशीष यादव's blog post यह सियासत आप पर हम पर कहर होने को है
"आदरणीय विद्वजन अंतिम बेबहर मिसरे ( इस भयावह रात की भी सहर होने को है।। ) के स्थान पर क्या यह मिसरा उचित रहेगा? "हो भयावह रात कितनी भी सहर होने को है॥"कृपया उचित सुझाव दीजिये।"
Mar 4
आशीष यादव commented on आशीष यादव's blog post यह सियासत आप पर हम पर कहर होने को है
"आदरणीय Mohammed Arif जी बहुत बहुत आभार।  आप ने मुझे इतना मान दिया।"
Mar 4

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GHAZIPUR, U.P.
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GHAZIPUR
Profession
work in defence
About me
एक सीधा-सादा इन्सान जो जीवन एवँ मानव की सच्चाईयों को जानने मे लगा हुआ है।

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आशीष यादव's Blog

हम तुम, दो तट नदी के

हम तुम

दो तट नदी के

उद्गम से ही साथ रहें हैं

जलधारा के साथ बहे हैं

किन्तु हमारे किस्से कैसे, हिस्से कैसे

सबने देखा, सबने जाना,

रीति-कुरीति, रस्म-रिवाज, अपने-पराये

सब हमारे बीच आये

एक छोर तुम एक छोर मैं

इनकी बस हम दो ही सीमाएं

जब इनमे अलगाव हुआ दुराव हुआ

धर्म-जाति का भेदभाव हुआ

क्षेत्रवाद और ऊँच-नीच का पतितं आविर्भाव हुआ

तब हम तुम

इस जघन्य विस्तार से और दूर हुए

तब भी इन्हें हमने ही हदों…

Continue

Posted on April 1, 2017 at 1:30pm — 3 Comments

यह सियासत आप पर हम पर कहर होने को है

2122 2122 2122 212



पग सियासी आँच पर मधु भी जहर होने को है।

बच गया ईमान जो कुछ दर-ब-दर होने को है।।



मुफलिसों को छोड़कर गायों गधों पर आ गई।

यह सियासत आप पर हम पर कहर होने को है।।



उड़ रहा है जो हकीकत की धरा को छोड़ कर।

बेखबर वो जल्द ही अब बाखबर होने को है।।



वो जो बल खा के चलें इतरा के घूमें कू-ब-कू।

खत्म उनके हुस्न की भी दोपहर होने को है।।



जुल्म से घबरा के थक के हार के बैठो न तुम।

"हो भयावह रात कितनी भी सहर होने…

Continue

Posted on March 3, 2017 at 12:00pm — 16 Comments

वीर अब्दुल हमीद

हम मजा लूटते कितने सुख चैन से

कुछ तो सोचो, मजा पे क्या अधिकार है ?

जो शहादत दिए हैं हमारे लिए

याद उनको करो, ना तो धिक्कार है



अपना कर्तव्य क्या है धरा के लिए

फ़र्ज़ कितना चुकाया है हमने यहाँ

मैं कहानी सुनाता हूँ उस वीर की

खो गया आज है जो न जाने कहाँ



वीरता हरदम ही दुनिया में पूजी जाती है

बन के ज्वाला दुष्टों के हौसले जलाती है

ऐसे ही वीरता की गाथा आज गाता हूँ

वीर अब्दुल हमीद की कथा…

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Posted on January 19, 2017 at 2:30pm — 4 Comments

हाँ तुम सपने में आई थी

हाँ तुम सपने में आई थी



होठों पर मुस्कान सजाये

बालों में बादल लहराए

गालों पर थी सुबह लालिमा

माथे पर बिंदिया चमकाए

जब तुमको मैंने देखा था

पास खड़ी तुम मुस्काई थी

हाँ तुम सपने में आई थी…

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Posted on January 19, 2017 at 1:45pm — 9 Comments

Comment Wall (46 comments)

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At 11:15pm on August 6, 2012, कुमार गौरव अजीतेन्दु said…

प्रिय आशीष जी.....मेरी कविता को पसंद करने के लिए आपका हार्दिक आभार.....

At 12:51am on July 13, 2012, Sachchidanand Pandey said…
 शुक्रिया आशीष जी
At 11:26pm on July 2, 2012, कुमार गौरव अजीतेन्दु said…

आशीष जी, प्रोत्साहन हेतु आपका हार्दिक आभार.......

At 10:46am on June 25, 2012, कुमार गौरव अजीतेन्दु said…
आशीष जी, मेरी रचना को पसंद करने के लिए आपका आभार।
At 10:03am on June 6, 2012, अरुण कान्त शुक्ला said…

आशीष जी मित्र बनने का अवसर प्रदान करने के लिए धन्यवाद |

At 10:34am on June 1, 2012, डॉ. सूर्या बाली "सूरज" said…

आशीष जी आपकी शुभकमानयों और बधाइयों के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद !

At 9:33pm on May 26, 2012, डॉ. सूर्या बाली "सूरज" said…

आशीष जी आपकी दाद के लिए बहुत बहुत शुक्रिया ! अच्छा लिखते हो ! ऐसे ही लिखते रहो और सबका मनोरंजन करते रहो !!

At 8:21pm on May 19, 2012, MAHIMA SHREE said…

swagat hai

At 3:44pm on May 4, 2012,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

Dhanyavaad Ashish Bhai.

At 7:43pm on April 12, 2012, Sarita Sinha said…

thanx ashish ji for liking my post...

 
 
 

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