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MAHIMA SHREE
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MAHIMA SHREE replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-90
"वाह बहुत ही उम्दा गजल..आ. राजेश दी अर्श पर बैठा मदारी नाम है सबको उँगली पर नचाना काम है   लो दुकानें खुल गई ले जाइए ये नबी है और वो श्री राम है आदमी ही आदमी को बांटता इक यहाँ पर ख़ास है इक आम है.....ये शेर खास पसंद आये. आपको बहुत बधाई"
Dec 23, 2017
MAHIMA SHREE replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-90
"तन सजे कपड़े बगल में कार भी पर शराफ़त के लिए दिल जाम है |....बहुत खूब कहा आपने... बहुत बधाई आपको"
Dec 23, 2017
MAHIMA SHREE replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-90
"वाहहह...लाजबाव..अशआर हुये है.आ. रवि शुक्ला जी, मतला वाकई मजेदार बन पड़ा है। आपको बहुत बहुत बधाइयाँ।"
Dec 23, 2017
MAHIMA SHREE replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-90
"बेहतरीन ग़जल के लिए बहुत बधाई आपको"
Dec 23, 2017
MAHIMA SHREE replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-90
"आ.मंच संचालक महोदय से अनुरोध है कि मेरी ग़जल से मतला हटा कर नया मतला जोड़ दे..... आदमी यूँ हो रहा बदनाम है मर रही संवेदना हर गाम है। व नोटबंदी वाले शेर से पहले मिसरा हटा के लगा दें रुक नहीं पाई करो की चोरियाँ.... बहुत आभार"
Dec 23, 2017
MAHIMA SHREE replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-90
"नमस्कार जनाब आरीफ जी.. बहुत बहुत शुक्रिया आपका .आपको शेर पसंद आये। जी मैंने सुधार कर लिया है।"
Dec 23, 2017
MAHIMA SHREE replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-90
"आपका बहुत बहुत शुक्रिया मोहन बेगोवाल जी"
Dec 23, 2017
MAHIMA SHREE replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-90
"बहुत खूबसूरत गजल है..बधाई आपको"
Dec 22, 2017
MAHIMA SHREE replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-90
"बेहद उम्दा  ..बहुत बधाई"
Dec 22, 2017
MAHIMA SHREE replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-90
"इसे मैंने डायरी में नोट कर लिया है। "
Dec 22, 2017
MAHIMA SHREE replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-90
"शानदार......हर शेर.. जिंदाबाद .. चाँद, सूरज, आसमाँ, पानी, हवाइस के आगे बस ख़ुदा का नाम है.... गिरह भी बहुत खूबसूरत लगी है. बहुत बधाई आपको"
Dec 22, 2017
MAHIMA SHREE replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-90
"बहुत बढिया ग़जल ...बधाई आपको"
Dec 22, 2017
MAHIMA SHREE replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-90
"समय देने के लिए आभारी हूँ आ. राजेश दी...सादर"
Dec 22, 2017
MAHIMA SHREE replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-90
"जी बहुत बेहतरीन सुझाव ... दिली शुक्रिया आपका "
Dec 22, 2017
MAHIMA SHREE replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-90
"भावपूर्ण हर शेर...बहुत बधाई आपको"
Dec 22, 2017
MAHIMA SHREE replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-90
"कामनाएं भी बहुत सीमित रखीं,किंतु जीवन में वही संग्राम है।...वाहह बहुत  खूब... बधाई आपको"
Dec 22, 2017

Profile Information

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Female
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NEW DELHI
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PATNA
Profession
स्वतंत्र लेखन
About me
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पंछी मन
नापता आकाश
छूता सागर
फिर लौट आता
नीड़ में
अपनी चोंच में दबाये
यादों के दाने

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बैठे-ठाले

तन्हाई चीखती है कहीं

पगलाई-सी हवा धमक पड़ती है ।

अंधेरे में भी दरवाजे तक पहुँच कर

बेतहाशा कुंडियाँ खटखटाती है।

अकेला सोया पड़ा इंसान अपने ही भीतर हो रहे शोर से

घबड़ा कर उठ बैठता है ।

मोबाइल में चौंक कर देखता है समय

“रात के ढ़ाई ही तो अभी बजे हैं “ बुदबुदाता है।

सन्नाटा उसकी दशा पर मुस्कुराता है।

उधर दुनिया के कहीं कोने में

भीड़ भूख-प्यास से बेकाबू हो कर सड़को पर नहीं निकलती,

सामूहिक आत्महत्याएं कर रही होती…

Continue

Posted on August 24, 2015 at 8:30pm — 9 Comments

चुप्पी

कभी किसी की चुप्पी

कितना उदास कर जाती है।

साँसे  भी भारी होती जाती है।

मन हो जाता है उस झील- सा

जो कब से बारिश के इंतजार मे  थम सी गई हो 

और उसकी लहरें भी उंघ रही हो किसी किनारे बैठ के

शाम भी तो धीरे से गुजरी है अभी कुछ फुसफूसाती हुई

उसे भी किसी की चुप्पी का खयाल था शायद।

 

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on July 2, 2015 at 8:00pm — 9 Comments

ग़ज़ल

2122 2122 2122 212

जिंदगी से जो चली अपनी ढ़िठाई दोस्तों

खाक में ही उम्र सारी यूँ  बिताई दोस्तों

अम्न की वंशी बजाई और गाये गीत भी

नफरतों की होलिका हमने जलाई दोस्तों

जब कभी दुश्वारियाँ आयी हमारी राह में

एक माँ की ही दुआ फिर काम आई दोस्तों

दोस्ती है एक नेमत टूटना अच्छा नहीं

साथ चलने में कहाँ कोई बुराई दोस्तों

हो भला सबका यहाँ मेरी दुआ है बस यही

ना करें कोई भी मज़हब की लड़ाई…

Continue

Posted on June 13, 2015 at 12:00pm — 13 Comments

फोकस (लघुकथा)

“हैलो! क्या चल रहा है ?”

“सर!  अभी प्रमुख नेताओं का भाषण बाकी है, लगता है लम्बा चलेगा । भीड़ भी काफी है।“

"ओके!" 

“हैलो! , सर !  मंच के ठीक सामने कुछ दूरी पर एक पेड़ है, उस पर एक आदमी फांसी लगाने की कोशिश कर रहा है।“

“अरे! “सोच क्या रहे हो ? , कैमरा घुमाओ उसकी तरफ !, फोकस करो! , हिलना भी मत जबतक................!”

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on May 1, 2015 at 7:02pm — 20 Comments

Comment Wall (40 comments)

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At 8:18pm on May 2, 2015, Manan Kumar singh said…

हेलो,।

At 1:22am on May 1, 2015, Dr. Vijai Shanker said…
आदरणीय सुश्री महिमा श्री जी , लघु-कथा पर अपनी द्वितीय प्रस्तुति पर आपकी प्रतिक्रिया अभी विलम्ब से देखी , आपकी सकारात्मक प्रतिक्रिया के लिए आपका आभार एवं धन्यवाद। सादर।
At 9:49pm on November 18, 2013,
सदस्य कार्यकारिणी
sharadindu mukerji
said…

आदरणीया महिमाश्री जी, पुरस्कार के लिये बधाई हेतु हार्दिक धन्यवाद. शरदिंदु.

At 2:16pm on October 18, 2013, Abhinav Arun said…

JANM DIN KI HARDIK BADHAI AUR ANANT SHUBHKAMNAYEN AA. MAHIMA JI ! SAHITYA KE KSHETRA ME AAPKI UDAAN UNCHI HO AAP KAALJAYI RACHEN ..AAPKI MAHIMA CHATURDIK VISTAR LE YAHI KAAMNA HAI !! BAHUT AASHIRWAAD AAPKO !!

At 11:15pm on August 11, 2013, mrs manjari pandey said…

   महिमाश्री जी आपको रचना पसन्द आई मेरा मन भी प्रफ़ुल्लित हुआ ! धन्यवाद

At 7:00pm on August 4, 2013, जितेन्द्र पस्टारिया said…

आदरणीया महिमा जी,

आपका बहुत बहुत आभार

सादर!

At 5:25pm on July 7, 2013, डॉ नूतन डिमरी गैरोला said…

आदरणीय महिमा जी आपका सहृदय आभार 

At 9:19pm on June 20, 2013, Abhinav Arun said…

वेलकम जी ! बहुत सुखद रहा ओ बी ओ परिवार का सम्मिलन !!

At 9:00am on March 31, 2013, श्रीराम said…

 सुंदर प्रस्तुति ... बहुत-बहुत बधाई

At 9:59am on December 31, 2012, कुमार गौरव अजीतेन्दु said…

महिमा जी, नववर्ष की हार्दिक बधाई स्वीकार करें.....

 
 
 

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