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Dr. Vijai Shanker
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Dr. Vijai Shanker commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post बावले (लघुकथा)
"कथा में दम है और दमदार सन्देश भी है। पर कितने ध्यान देते हैं , प्रश्न यह है। प्रयास कठिन था , इस लिए बहुत सराहनीय है। आदरणीय शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी , बधाई , सादर।"
6 hours ago
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post उपलब्धियाँ - डॉo विजय शंकर
"आदरणीय डॉo आशुतोष मिश्रा जी , रचना पर उपस्थिति एवं उसे मान देने के लिए ह्रदय से आभार एवं धन्यवाद , सादर।"
13 hours ago
Dr. Vijai Shanker commented on Dr Ashutosh Mishra's blog post डूबता जहाज
"आदरणीय डॉo आशुतोष मिश्रा जी , बहुत है सही विषय है , पर बहुत कम लोग इसे देख पा रहे हैं। प्रभावित सब हैं , पर समझ नहीं पा रहें हैं। बधाई , इस प्रस्तुति पर , सादर।"
13 hours ago
Mohammed Arif commented on Dr. Vijai Shanker's blog post सदी ऊपर का मुकद्दमा - डॉo विजय शंकर।
"आदरणीय विजय शंकर जी आदाब, आपकी लघुकथा को निम्न बिन्दुओं पर देख लेना समीचीन होगा:- (1) कथानक -कथानक की दृष्टिकोण से देखा जाय तो यह कथानक अपने आप में बहुत कुछ कहता है । हर काल परिस्थिति में राम को मुवक्किल बनाया जाएगा । बेहतरीन कथानक है , लाजवाब कथानक…"
14 hours ago
Samar kabeer commented on Dr. Vijai Shanker's blog post उपलब्धियाँ - डॉo विजय शंकर
"आपकी बात पर एक पुराना मतला याद आ गया साझा कर रहा हूँ :- 'सिमतों का तअय्युन है न मंज़िल का पता है इंसान मशीनों की तरह भाग रहा है'"
21 hours ago
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post उपलब्धियाँ - डॉo विजय शंकर
"आदरणीय समर कबीर साहब , नमस्कार , आपकी पकड़ बहुत गहरी और नज़र बहुत सही जगह पर पड़ती है , आभार , आभार। कुछ बात यूं समझ में आती है कि साहित्य और समाज का बड़ा गहरा रिश्ता होता है। साहित्य समाज का दर्पण होता है , समाज साहित्य को दर्पण की तरह देखता रहता है।…"
23 hours ago
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post उपलब्धियाँ - डॉo विजय शंकर
"आदरणीय शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी , आपकी बात में दम है , विषय सार्थक है , प्रयास करूंगा। बस बात मूड बनाने की है। सादर।"
yesterday
Dr. Vijai Shanker posted a blog post

सदी ऊपर का मुकद्दमा - डॉo विजय शंकर।

अदालत लगी हुयी थी। वकील साहब लोग अपनी अपनी कुर्सियों पर बैठ चुके थे। तभी एक मुवक्किल दौड़ता हुआ आया , सीधे अपने वकील साहब के पास पहुंचा और हाथ जोड़ कर बोला ," राम राम साहेब " ," राम राम " वकील साहेब ने कहा और उसे पीछे एक बेंच दिखा कर कहा , " वहां बैठ जाओ " . वह बैठ गया। दो चार आस पास बैठे लोगों को भी हाथ जोड़ कर वह राम राम करता रहा। तभी अर्दली ने अदालत की डॉयस पर आकर इत्तला दी ," साहेब पधार रहे हैं " .सभी लोग अपने अपनी जगह पर उठ कर खड़े हो गए।जज साहेब आये , उन्होंने अपनी कुर्सी पर बैठने के पहले…See More
yesterday
Dr Ashutosh Mishra commented on Dr. Vijai Shanker's blog post उपलब्धियाँ - डॉo विजय शंकर
"आदरणीय विजय सर आपकी रचनाएँ विविधता से भरी होती है आपकी सोच और आपके नूतन प्रयोग पढ़ने में आनन्ददाई होते है।।।दीवाली के इस पर्व पर हार्दिक शुभकामनायें सादर"
yesterday
Dr. Vijai Shanker commented on Mohammed Arif's blog post लघुकथा--मलिका
"आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी , बहुत सही प्रस्तुति। साम्प्रदायिकता पर कहानियां तो बहुत पढ़ी पर आपने सही चित्रण प्रस्तुत किया , प्रहार बिना किसी वजह वह भी तीन गोलियों का। बधाई , सादर।"
yesterday
Samar kabeer commented on Dr. Vijai Shanker's blog post उपलब्धियाँ - डॉo विजय शंकर
"आली जनाब डॉ.विजय शंकर जी आदाब,आपकी कविताएं दिल को छूती हुई गुज़रती हैं और दिल में घर बनाकर बैठ जाती हैं,और इसका मूल कारण है आपकी गहरी सोच जो नये नये कमाल दिखाती रहती है । आपकी ये कविता भी उसी श्रेणी में आती है,मस्नूई पनः पर आपने सधे हुए शब्दों में जो…"
Wednesday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Dr. Vijai Shanker's blog post उपलब्धियाँ - डॉo विजय शंकर
"दरअसल मैं उप-शीर्षक को वैकल्पिक शीर्षक समझ रहा था पाठकों के सुझाव हेतु। इस बेहतरीन उप-शीर्षक पर हम आपकी लघुकथा/व्यंग्य भी पढ़ना चाहेंगे आदरणीय सर डॉ. विजय शंकर जी।"
Wednesday
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post उपलब्धियाँ - डॉo विजय शंकर
"आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी , आपकी उपस्थिति और आपकी प्रशस्ति के लिए बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद , सादर।"
Tuesday
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post उपलब्धियाँ - डॉo विजय शंकर
"आदरणीय शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी , आपका बहुत बहुत आभार। शरीरक्षक के सुझाव के लिए भी धन्यवाद। आपका रूचि लेने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया , पर संभवतः आप उप - शीर्षक से सहमत होंगे , मैंने आर्टिफिशल इंटेलिजेंस इस लिए लिया है कि आज कल गूगल की कृपा से यह शब्द…"
Tuesday
Mohammed Arif commented on Dr. Vijai Shanker's blog post उपलब्धियाँ - डॉo विजय शंकर
"वाह! वाह!! मज़ा आ गया । गागर में सागर समा दिया आपने । बहुत ही बेहतरीन कटाक्ष । हार्दिक बधाइयाँ स्वीकार करें आदरणीय विजय शंकर जी ।"
Tuesday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Dr. Vijai Shanker's blog post उपलब्धियाँ - डॉo विजय शंकर
"शीर्षक सुझाव : //कृत्रिम उपलब्धियां//"
Tuesday

Profile Information

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Male
City State
UP
Native Place
Allahabad
Profession
Retired
About me
Educationist

.जिंदगी तुझे ही पढ़ लेते हैं ---डा० विजय शंकर

चलो किताबों को बंद कर देते हैंजिंदगी तुझे ही सीधे-सीधे पढ़ लेते हैं .किताबों में सबकुझ तेरे बारे में ही तो हैलो , तुझसे ही सीधे-सीधे बात कर लेते हैं.किताबें तो बहुत सी हैं , मिल भी जायेंगींउन को पढ़ लूँ तो क्या तू मिल जायेगी .मौत को कितने और कौन-कौन पढ़ते हैंपर उसका वादा है , सबको मिलती है .भरोसा नहीं , तू किसको मिले , कितनी मिलेतेरे लिये , तेरे चाहने वाले दिन रात लगे रहते हैं .अरे सब कुछ तो तेरे लिए ही है जिंदगी मेंतू है तो सब है , तू नहीं तो क्या है जिंदगी में .इसलिए चलो किताबों को बंद कर देते हैं .तू है , तुझसे सीधे-सीधे बात कर लेते हैं ...डा० विजय शंकर---------------( मौलिक और अप्रकाशित )

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At 5:38pm on January 1, 2017, Mohammed Arif said…
आदरणीय डॉ.विजय शंकर मेहताजी सकारात्मक सोच को उद्घरित करती रचना के लिए बधाई । नव वर्ष मंगलमय हो !
At 4:58pm on November 5, 2015, Abid ali mansoori said…

देर से ही सही.. हर्दिक आभार आपका आदरणीय विजय शंकर जी!

At 10:23pm on November 4, 2015, Abid ali mansoori said…

Haardik abhaar aapka!

At 3:46pm on July 1, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय डॉ विजय शंकर सर,

आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें 

At 7:50pm on June 3, 2015, Tanuja Upreti said…
आभार आदरणीय
At 7:28pm on May 4, 2015, Seema Singh said…
आभार सर मार्गदर्शन के लिए
At 8:35am on April 17, 2015, Mohan Sethi 'इंतज़ार' said…

आदरणीय Dr. Vijai Shanker जी आप का हार्दिक आभार ....मंगलकामनाएँ...सादर  

At 6:57am on January 18, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय डॉ विजय शंकर सर, निवेदन स्वीकार करने के लिए आभार...

विद्यार्थी की मुक्त कंठ प्रशंसा आपका बड़प्पन और आपके हृदय की विशालता का प्रमाण है.

आपका  स्नेह और आशीर्वाद  सदैव मिलता रहे, इसके लिए सदैव प्रयास करता रहूँगा. नमन 

At 10:51pm on January 15, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय डॉ विजय शंकर सर, आभार, धन्यवाद.... आप लोगो के स्नेह और आशीर्वाद से ही मंच पर सक्रिय हो पाता हूँ. आपका आभार हार्दिक धन्यवाद 

At 4:40pm on October 23, 2014, Sushil Sarna said…

आपको  सपरिवार ज्योति पर्व की हार्दिक एवं मंगलमय शुभकामनाएं...

Dr. Vijai Shanker's Blog

सदी ऊपर का मुकद्दमा - डॉo विजय शंकर।

अदालत लगी हुयी थी। वकील साहब लोग अपनी अपनी कुर्सियों पर बैठ चुके थे। तभी एक मुवक्किल दौड़ता हुआ आया , सीधे अपने वकील साहब के पास पहुंचा और हाथ जोड़ कर बोला ,

" राम राम साहेब " ,

" राम राम " वकील साहेब ने कहा और उसे पीछे एक बेंच दिखा कर कहा , " वहां बैठ जाओ " . वह बैठ गया। दो चार आस पास बैठे लोगों को भी हाथ जोड़ कर वह राम राम करता रहा। तभी अर्दली ने अदालत की डॉयस पर आकर इत्तला दी ,

" साहेब पधार रहे हैं " .

सभी लोग अपने अपनी जगह पर उठ कर खड़े हो गए।

जज साहेब आये ,… Continue

Posted on October 19, 2017 at 10:00pm — 1 Comment

उपलब्धियाँ - डॉo विजय शंकर

उप-शीर्षक -आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस से आर्टिफिशल हँसी तक।

प्रकृति ,
अनजान ,
पाषाण ,
ज्ञान
विज्ञान ,
गूगल ,
आट्रिफिश्यल विवेक ,
आर्टिफिशियल हँसी ,
शुभ प्रभात।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on October 17, 2017 at 7:34am — 12 Comments

सत्यमेव् जयते - डॉo विजय शंकर

सत्य के प्रति उनका समर्पण
झुठलाया नहीं जा सकता ,
सफलता उन्होंने चाहे कैसे ,
कितने ही झूठों से पायी हो ,
श्रेय सदैव सत्य को ही दिया।
अपनी हर जीत को सदैव
सत्य की जीत ही बताया।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on October 12, 2017 at 6:48pm — 10 Comments

पाओगे वही जो चाहोगे -- डॉo विजय शंकर

सच बोलू ,
सुन पाओगे ?
सत्य-मार्ग है ,
चल पाओगे ?
विजय-पथ है ,
लड़ पाओगे ?
प्रेम है ,
ले पाओगे ?
मित्रता है ,
निभा पाओगे ?
थोड़ा मीठा है ,
खा लोगे ?
नमक तेज है ,
खा लोगे ?
मुद्दा है ,
सुलझाओगे ?
या भुनाओगे ?
हर समस्या का
हल है ,
हल चाहोगे ?
बात ये है कि
पाओगे वही
जो चाहोगे।


मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on September 30, 2017 at 10:45am — 10 Comments

 
 
 

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