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Dr. Vijai Shanker
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Dr. Vijai Shanker commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'सेटिंग' या 'अवलम्बन' (लघुकथा)
"सामयिक एवं सार्थक प्रस्तुति के लिए बधाई , आदरणीय शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी , सादर।"
Saturday
Dr. Vijai Shanker commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'सत्य अब तक!' (लघुकथा)
"आदरणीय शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी , बात तो दमदार है , “ ऐसी' जनता जब तक, 'ऐसी' सियासत तब तक और 'ऐसा' जनतंत्र तब तक!". सच तो यही है कि एक बार सारी जनता जाग जाए और सिर्फ जनता बन कर चुनाव निपटा दे , सब कुछ बहुत अच्छे से…"
Sep 15
Dr. Vijai Shanker commented on TEJ VEER SINGH's blog post अंधा कानून  -  लघुकथा  –
"मुझे वर्तमान स्थिति का पता नहीं है , महिलाओं पर अत्याचार ( पारवारिक कलह ) के विरूद्ध एक विशेष न्यायालय की व्यवस्था की गई थी। अब उसके विषय में सुनने में नहीं आता था , पर यह अवश्य सुनने में आता था कि इस क़ानून का दुरपयोग होता है। शायद कुछ लोग अपने ही…"
Sep 15
Dr. Vijai Shanker commented on TEJ VEER SINGH's blog post औक़ात - लघुकथा –
"अंत की पंक्ति आते आते कहानी बहुत बड़ी कहानी बन गई। बहुत बहुत बधाई आदरणीय तेजवीर सिंह जी , सादर।"
Sep 10
Dr. Vijai Shanker replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-41
"आदरनीत वीरेंद्र वीर जी , प्रस्तुति हेतु हार्दिक बधाई ! सादर।"
Aug 31
Dr. Vijai Shanker replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-41
"आदरनीत तेजवीर सिंह जी , बहुत ही लाजवाब प्रस्तुति। बधाई ! सादर।"
Aug 31
Dr. Vijai Shanker replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-41
"आदरणीय महेंद्र कुमार जी , आपकी उत्साहवर्धक बधाई के लिए आभार एवं धन्यवाद , सादर।"
Aug 31
Dr. Vijai Shanker replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-41
"आदरणीय वीरेंद्र वीर जी , आपकी उत्साहवर्धक बधाई के लिए आभार एवं धन्यवाद , सादर।"
Aug 31
Dr. Vijai Shanker replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-41
"आदरणीय सुश्री बरखा शुक्ला जी , आपकी उत्साहवर्धक बधाई के लिए आभार एवं धन्यवाद , सादर।"
Aug 31
Dr. Vijai Shanker replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-41
"आदरणीय तेजवीर सिंह जी , आपकी उत्साहवर्धक बधाई के लिए आभार एवं धन्यवाद , सादर।"
Aug 31
Dr. Vijai Shanker replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-41
"आदरणीय सुश्री बरखा शुक्ला जी , आपकी उत्साहवर्धक बधाई के लिए आभार एवं धन्यवाद , सादर।"
Aug 31
Dr. Vijai Shanker replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-41
"आदरणीय सुश्री बबीता गुप्ता जी , लघु - कथा में गहरी रूचि लेने एवं सार्थक विवेचना के लिए बहुत बहुत आभार , बधाई के लिए धन्यवाद , सादर।  "
Aug 31
Dr. Vijai Shanker replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-41
"आदरणीय मोहम्मद आरिफ साहब , लघु - कथा को मान देने के लिए बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद , सादर।"
Aug 31
Dr. Vijai Shanker replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-41
"आदरणीय योगराज प्रभाकर जी , लघु - कथा की सराहना एवं उसे मान देने के लिए बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद , सादर। आपके सुझाव पर आगे अवश्य ध्यान रखूंगा।"
Aug 31
Dr. Vijai Shanker replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-41
"आदरणीय योगराज प्रभाकर जी , काफी जानकारी देती लघु - कथा के लिए हार्दिक बधाई , सादर।"
Aug 31
Dr. Vijai Shanker replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-41
"आदरणीय अजय गुप्ता जी , प्रभावी प्रस्तुति के लिए बधाई , सादर।"
Aug 31

Profile Information

Gender
Male
City State
UP
Native Place
Allahabad
Profession
Retired
About me
Educationist

.जिंदगी तुझे ही पढ़ लेते हैं ---डा० विजय शंकर

चलो किताबों को बंद कर देते हैंजिंदगी तुझे ही सीधे-सीधे पढ़ लेते हैं .किताबों में सबकुझ तेरे बारे में ही तो हैलो , तुझसे ही सीधे-सीधे बात कर लेते हैं.किताबें तो बहुत सी हैं , मिल भी जायेंगींउन को पढ़ लूँ तो क्या तू मिल जायेगी .मौत को कितने और कौन-कौन पढ़ते हैंपर उसका वादा है , सबको मिलती है .भरोसा नहीं , तू किसको मिले , कितनी मिलेतेरे लिये , तेरे चाहने वाले दिन रात लगे रहते हैं .अरे सब कुछ तो तेरे लिए ही है जिंदगी मेंतू है तो सब है , तू नहीं तो क्या है जिंदगी में .इसलिए चलो किताबों को बंद कर देते हैं .तू है , तुझसे सीधे-सीधे बात कर लेते हैं ...डा० विजय शंकर---------------( मौलिक और अप्रकाशित )

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Comment Wall (18 comments)

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At 5:38pm on January 1, 2017, Mohammed Arif said…
आदरणीय डॉ.विजय शंकर मेहताजी सकारात्मक सोच को उद्घरित करती रचना के लिए बधाई । नव वर्ष मंगलमय हो !
At 4:58pm on November 5, 2015, Abid ali mansoori said…

देर से ही सही.. हर्दिक आभार आपका आदरणीय विजय शंकर जी!

At 10:23pm on November 4, 2015, Abid ali mansoori said…

Haardik abhaar aapka!

At 3:46pm on July 1, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय डॉ विजय शंकर सर,

आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें 

At 7:50pm on June 3, 2015, Tanuja Upreti said…
आभार आदरणीय
At 7:28pm on May 4, 2015, Seema Singh said…
आभार सर मार्गदर्शन के लिए
At 8:35am on April 17, 2015, Mohan Sethi 'इंतज़ार' said…

आदरणीय Dr. Vijai Shanker जी आप का हार्दिक आभार ....मंगलकामनाएँ...सादर  

At 6:57am on January 18, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय डॉ विजय शंकर सर, निवेदन स्वीकार करने के लिए आभार...

विद्यार्थी की मुक्त कंठ प्रशंसा आपका बड़प्पन और आपके हृदय की विशालता का प्रमाण है.

आपका  स्नेह और आशीर्वाद  सदैव मिलता रहे, इसके लिए सदैव प्रयास करता रहूँगा. नमन 

At 10:51pm on January 15, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय डॉ विजय शंकर सर, आभार, धन्यवाद.... आप लोगो के स्नेह और आशीर्वाद से ही मंच पर सक्रिय हो पाता हूँ. आपका आभार हार्दिक धन्यवाद 

At 4:40pm on October 23, 2014, Sushil Sarna said…

आपको  सपरिवार ज्योति पर्व की हार्दिक एवं मंगलमय शुभकामनाएं...

Dr. Vijai Shanker's Blog

टकराव — डॉo विजय शंकर

फिर एक बार 

स्वाधीनता का 

जश्न मनाया हमने। 

पर अभी भी स्वाधीनता 

का…

Continue

Posted on August 15, 2018 at 9:59am — 8 Comments

मार्केटिंग - डॉo विजय शंकर

प्रचार हो रहा है ,
प्रचार चल रहा है ,
दुष्प्रचार दौड़ रहा है ,
अपनी ढपली ,
अपना राग बज रहा है ,
स्वप्रचार ,
स्वयं का उपहास बन रहा है ,
दूसरे का दुष्प्रचार ,
न हास्य है , न व्यंग है ,
स्वयं आपके व्यक्तित्व से
चिपटता जा रहा है।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on August 7, 2018 at 7:59pm — 11 Comments

क्षणिकायें — डॉo विजय शंकर



बहुत कुछ , बहुत हास्यास्पद है ,

फिर भी किसी को हंसी आती नहीं।

बहुत कुछ , बहुत दुखदायी है , 

फिर भी आंसू किसी को आते नहीं।… 1.

बाज़ार भी अजीब जगह है

जहां आप शाहंशाह होकर भी

रोज बिक तो सकते हैं , पर एक

दिन को भी अपनी पूरी हुकूमत में ,

पूरा बाज़ार खरीद नहीं सकते ………. 2 .

बहुत शिकायतें हैं हवा से

कि बुझा देती हैं चिरागों को ,

चलो एक चिराग ही बिना

हवा के जला के दिखा दो। ……….. 3…

Continue

Posted on June 21, 2018 at 8:30pm — 13 Comments

कोई फरक नहीं पड़ता — डॉo विजय शंकर

क्या फरक पड़ता है ,
कुछ पढ़े-लिखे लोगों ने
आपको और आपकी
किसी भी बात को नहीं समझा।
आपको , आप जैसे लोगों ने तो
समझा और खूब समझा।
आपकी नैय्या उनसे और
उनकी नैय्या आपसे
पार लग ही रही है ,
आगे भी लग जाएगी ।

- मौलिक एवं अप्रकाशित
 

Posted on March 23, 2018 at 5:41am — 7 Comments

 
 
 

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