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Dr. Vijai Shanker
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Dr. Vijai Shanker commented on Samar kabeer's blog post 'आपके पास है जवाब कोई'
"वाह ! सबसे उनको छुपा के रखता हूँ तोड़ डाले न मेरे ख़्वाब कोई। बहुत खूब। हर शेऱ लाजवाब है। आदरणीय समर कबीर साहब , नमस्कार , इस खूबसूरत ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई , सादर।"
Friday
Dr. Vijai Shanker commented on Dr Ashutosh Mishra's blog post जनाजा
"सुन्दर ,सार्थक प्रयास। इस जटिल प्रश्न को उठाने के लिए बधाई , आदरणीय डॉo आशुतोष मिश्रा जी , सादर।"
Friday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Dr. Vijai Shanker's blog post पढ़े-लिखे हैं आप तो - डॉo विजय शंकर
"आद0 विजय शंकर जी सादर अभिवादन, आपकी उसी त्रुटि से मन मे शंका हुई कि यह लघुकथा कैसे, अब बात स्पष्ट हुई। पुनः बधाई इस सृजन पर्।"
Wednesday
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post पढ़े-लिखे हैं आप तो - डॉo विजय शंकर
"आदरणीय सुरेंद्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप जी , आपकी बधाई के लिए आभार। आदरणीय समर कबीर साहब से इस प्रसंग में चर्चा में मैं त्रुटिवश कविता की जगह लघु-कथा टाइप कर गया था। इसे मैंने अपने अगले वक्तव्य में स्वीकार भी करा है और खेद भी व्यक्त किया हैं। कृपया…"
Wednesday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Dr. Vijai Shanker's blog post पढ़े-लिखे हैं आप तो - डॉo विजय शंकर
"आद0 डॉ विजय शंकर जी सादर अभिवादन, आप ने जो लिखा है, भाव पक्ष के दृष्टिकोण से अच्छा है पर अगर प्रतिक्रिया को न् देखूँ तो इसको लघुकथा कहना मेरे लिए मुश्क़िल है, क्या लघुकथा ऐसे गेयता आधारित लिखी भी जा सकती है, गौर कीजियेगा।आद0 समर साहब की बात से सहमत…"
Wednesday
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post पढ़े-लिखे हैं आप तो - डॉo विजय शंकर
"आदरणीय सलीम रज़ा रेवा जी, आपका आभार एवं धन्यवाद , सादर।"
Wednesday
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post पढ़े-लिखे हैं आप तो - डॉo विजय शंकर
"आदरणीय विजय निकोर जी, आपका आभार एवं धन्यवाद , सादर।"
Wednesday
SALIM RAZA REWA commented on Dr. Vijai Shanker's blog post पढ़े-लिखे हैं आप तो - डॉo विजय शंकर
"आ. सुन्दर रचना के लिए बधाई."
Nov 14
vijay nikore commented on Dr. Vijai Shanker's blog post पढ़े-लिखे हैं आप तो - डॉo विजय शंकर
"रचना में कटाक्ष बहुत अच्छा बना है। मैंने भी इस रचना को कविता की तरह पढ़ा, और थोड़ा confuse हो गया, पर फिर कटाक्ष का आनन्द आ गया। बधाई, आदरणीय विजय शंकर जी।"
Nov 14
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post पढ़े-लिखे हैं आप तो - डॉo विजय शंकर
"आदरणीय कालीपद प्रसाद मंडल जी , कविता को पसंद करने के लिए आभार एवं बधाई हेतु धन्यवाद , सादर।"
Nov 14
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post पढ़े-लिखे हैं आप तो - डॉo विजय शंकर
"आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी , आपने कविता को पसंद किया , आभार एवं बधाई हेतु धन्यवाद , सादर।"
Nov 14
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post पढ़े-लिखे हैं आप तो - डॉo विजय शंकर
"आदरणीय समर कबीर साहब, नमस्कार , लघु- कथा लिखने की त्रुटि के लिए खेद है। सादर।"
Nov 14
Samar kabeer commented on Dr. Vijai Shanker's blog post पढ़े-लिखे हैं आप तो - डॉo विजय शंकर
"//इस लघुकथा के माध्यम से मैंने अपने ही प्रवेश में व्याप्त उस समस्या की और ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया है// लेकिन मुहतरम ये लघुकथा तो किसी भी ज़ाविये से नहीं लगती?,इसका अंदाज़ कविता जैसा है,और मैंने इसे कविता की तरह ही पढ़ा भी है, ये तो अब पता चला…"
Nov 14
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post पढ़े-लिखे हैं आप तो - डॉo विजय शंकर
"आदरणीय समर कबीर साहब , नमस्कार , रचना के प्रति आपकी बधाई हेतु ह्रदय से आभार एवं धन्यवाद। इस लघु-कथा के माध्यम से मैंने अपने ही प्रवेश में व्याप्त उस समस्या की ओर ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया है जिसे हम identity cricis कहते हैं। वैसे तो यह…"
Nov 14
Kalipad Prasad Mandal commented on Dr. Vijai Shanker's blog post पढ़े-लिखे हैं आप तो - डॉo विजय शंकर
"आ विजय शंकर जी ,आदाब , सामयिक एवं करारा तंज लिए रचना के लिए हार्दिक बधाई |"
Nov 14
Mohammed Arif commented on Dr. Vijai Shanker's blog post पढ़े-लिखे हैं आप तो - डॉo विजय शंकर
"आदरणीय विजय शंकर जी आदाब, बहुत ही कटाक्षपूर्ण रचना । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Nov 13

Profile Information

Gender
Male
City State
UP
Native Place
Allahabad
Profession
Retired
About me
Educationist

.जिंदगी तुझे ही पढ़ लेते हैं ---डा० विजय शंकर

चलो किताबों को बंद कर देते हैंजिंदगी तुझे ही सीधे-सीधे पढ़ लेते हैं .किताबों में सबकुझ तेरे बारे में ही तो हैलो , तुझसे ही सीधे-सीधे बात कर लेते हैं.किताबें तो बहुत सी हैं , मिल भी जायेंगींउन को पढ़ लूँ तो क्या तू मिल जायेगी .मौत को कितने और कौन-कौन पढ़ते हैंपर उसका वादा है , सबको मिलती है .भरोसा नहीं , तू किसको मिले , कितनी मिलेतेरे लिये , तेरे चाहने वाले दिन रात लगे रहते हैं .अरे सब कुछ तो तेरे लिए ही है जिंदगी मेंतू है तो सब है , तू नहीं तो क्या है जिंदगी में .इसलिए चलो किताबों को बंद कर देते हैं .तू है , तुझसे सीधे-सीधे बात कर लेते हैं ...डा० विजय शंकर---------------( मौलिक और अप्रकाशित )

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At 5:38pm on January 1, 2017, Mohammed Arif said…
आदरणीय डॉ.विजय शंकर मेहताजी सकारात्मक सोच को उद्घरित करती रचना के लिए बधाई । नव वर्ष मंगलमय हो !
At 4:58pm on November 5, 2015, Abid ali mansoori said…

देर से ही सही.. हर्दिक आभार आपका आदरणीय विजय शंकर जी!

At 10:23pm on November 4, 2015, Abid ali mansoori said…

Haardik abhaar aapka!

At 3:46pm on July 1, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय डॉ विजय शंकर सर,

आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें 

At 7:50pm on June 3, 2015, Tanuja Upreti said…
आभार आदरणीय
At 7:28pm on May 4, 2015, Seema Singh said…
आभार सर मार्गदर्शन के लिए
At 8:35am on April 17, 2015, Mohan Sethi 'इंतज़ार' said…

आदरणीय Dr. Vijai Shanker जी आप का हार्दिक आभार ....मंगलकामनाएँ...सादर  

At 6:57am on January 18, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय डॉ विजय शंकर सर, निवेदन स्वीकार करने के लिए आभार...

विद्यार्थी की मुक्त कंठ प्रशंसा आपका बड़प्पन और आपके हृदय की विशालता का प्रमाण है.

आपका  स्नेह और आशीर्वाद  सदैव मिलता रहे, इसके लिए सदैव प्रयास करता रहूँगा. नमन 

At 10:51pm on January 15, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय डॉ विजय शंकर सर, आभार, धन्यवाद.... आप लोगो के स्नेह और आशीर्वाद से ही मंच पर सक्रिय हो पाता हूँ. आपका आभार हार्दिक धन्यवाद 

At 4:40pm on October 23, 2014, Sushil Sarna said…

आपको  सपरिवार ज्योति पर्व की हार्दिक एवं मंगलमय शुभकामनाएं...

Dr. Vijai Shanker's Blog

पढ़े-लिखे हैं आप तो - डॉo विजय शंकर

पढ़े-लिखे हैं आप तो आपको

पढ़े-लिखे दिखना चाहिए।

मोटर कार हो सब ,फिर भी अक्ल से ,

आपको , बिलकुल पैदल दिखना चाहिए।

कपड़े अजीब, चाल अजीब , हाव-भाव अजीब ,

बातचीत में अजीब होना और दिखना चाहिये।

रचनात्मक होना तो बहुत कठिन होता है ,

विध्वंस और क्रान्ति की बात करनी आनी चाहिए।

सबसे बड़ी बात आपको

घर फूंक तमाशा देखना आना चाहिए।

अपनी बुनियाद को निरंतर हिलाना और

मौक़ा लगते ही उखाड़ देना चाहिए।

आपको वो तो लपक लेंगे ही

जो उकसा रहे हैं… Continue

Posted on November 13, 2017 at 10:57am — 15 Comments

लोकतंत्र - डॉo विजय शंकर

( 1 )
लोकतंत्र ?
जो लोक ले
उसी का तंत्र।

( 2 )
लोक तंत्र ,
इहलोक तक
परलोक का
विचार नहीं।

( 3 )
लोकतंत्र ,
लोक का तंत्र
या लोक से
ऊपर तंत्र।

( 4 )
शेर अकेला हो तो उसकी
दहाड़ के सामने भी आवाज़
उठा देते हैं लोग।
झुण्ड में भेड़-बकरिया हों तो
उनकीं हाँ में हाँ मिलाते हैं वही लोग।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on November 7, 2017 at 8:30am — 12 Comments

हवा में - डॉo विजय शंकर

हमने एक मकान बनाया ,
सबसे पहले
छत को बनाया ,
चढ़ कर उस पर
उछले-कूदे ,
खूब चिल्लाये ,
नाचे- गाये ,
देख आसमान ,
खूब इतराये ,
लगा , लपक कर
छू लेंगें ,
मुठ्ठी में नभ कर लेंगें ,
और जब नीचे झाँका , देखा ,
अचानक तब घबराये ,
हा , बुनियाद ,
कहाँ छोड़ आये।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on October 24, 2017 at 10:29am — 21 Comments

सदी ऊपर का मुकद्दमा - डॉo विजय शंकर।

अदालत लगी हुयी थी। वकील साहब लोग अपनी अपनी कुर्सियों पर बैठ चुके थे। तभी एक मुवक्किल दौड़ता हुआ आया , सीधे अपने वकील साहब के पास पहुंचा और हाथ जोड़ कर बोला ,

" राम राम साहेब " ,

" राम राम " वकील साहेब ने कहा और उसे पीछे एक बेंच दिखा कर कहा , " वहां बैठ जाओ " . वह बैठ गया। दो चार आस पास बैठे लोगों को भी हाथ जोड़ कर वह राम राम करता रहा। तभी अर्दली ने अदालत की डॉयस पर आकर इत्तला दी ,

" साहेब पधार रहे हैं " .

सभी लोग अपने अपनी जगह पर उठ कर खड़े हो गए।

जज साहेब आये ,… Continue

Posted on October 19, 2017 at 10:00pm — 2 Comments

 
 
 

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