For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

पं. प्रेम नारायण दीक्षित "प्रेम"
  • Male
  • Orai Uttar Pradesh
  • India
Share on Facebook MySpace

पं. प्रेम नारायण दीक्षित "प्रेम"'s Friends

  • seemahari sharma
  • harivallabh sharma
  • Dr. Vijai Shanker
  • डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव
  • लक्ष्मण रामानुज लडीवाला
 

पं. प्रेम नारायण दीक्षित "प्रेम"'s Page

Profile Information

Gender
Male
City State
Orai Uttar Pradesh
Native Place
Orai
Profession
सेवा निव्रत्त प्रधानाचार्य

पं. प्रेम नारायण दीक्षित "प्रेम"'s Blog

मुक्तक



इस पार आ रहे हैं कुछ जाने माने लोग

उस पार जा रहे हैं कुछ जाने माने लोग

कैसी है राम राम ये कैसी सलाम है

पहचान नहीं पा रहे कुछ जाने माने लोग



फिर कई सूत्र नयी धुन के रुई निकले हैं

तंग कुर्ते पतंग लहँगे…

Continue

Posted on July 31, 2014 at 9:36am — 5 Comments

मुक्तक

1

न्याय पर जनतंत्र जन कल्याण पर,

अर्थ अवसरवाद का चेहरा लगा है/

रोशनी सर्वत्र जाने में विवश है,

बादलोँ का सूर्य पर पहरा लगा है/

2

तुम अँधेरे पंथ पर क्यों चल रहे,

रोशनी के जाल हमने तिर दिये हैं/

रह गई जो कालिमा दीपक तले,

उन अँधेरोँ से तो दीपक पल रहे हैं/

3

नीँद उड़ती जा रही है,रात रिसती रह गई/

धार में नौका ना जाने किस दिशा को गह गई/

उड़ गये बादल छलक पाताल का पानी गया,

फिर बिगड़ते सन्तुलन की बात धरती कह गई/

4

कहीं…

Continue

Posted on July 28, 2014 at 8:30pm — 4 Comments

Comment Wall (4 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 10:26pm on August 7, 2014,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

आदरणीय प्रेम नारायणजी, आपके हर कहे का स्वागत है. किन्तु, निवेदन है कि, अपनी टिप्पणी को अपनी उस प्रस्तुति के थ्रेड में ही रखते तो संभवतः अन्य पाठकों को भी उस प्रस्तुति के सापेक्ष आपके विन्दुओं से सूचित तथा परिचित होने का लाभ मिलता. 

 

और, एक बात, पाण्डेयजी या कुशवाहा जी या सिंह साहब जैसे सम्बोधनों से हमॆं यथासम्भव बचने का प्रयास करना चाहिये, ऐसी मेरा दृढ़वत मानना है.

व्यक्ति के प्रथम नाम के साथ आदरसूचक शब्द लगाना भी अधिक प्रभावी और सम्मानसूचक हो सकता है.

सादर

At 12:38pm on August 5, 2014, पं. प्रेम नारायण दीक्षित "प्रेम" said…

इन्द्रियां झनक्रत हुई इक तार में

कौन सा  रस पा  गये  उपहार में॥

सभी मित्रों को सादर धन्यवाद एवम आभार प्रकट करता हूं…।

At 1:22pm on August 4, 2014, लक्ष्मण रामानुज लडीवाला said…

मित्रता का प्रस्ताव स्वीकारते हुए प्रसन्नता है स्वागत है आपका आदरणीय पं प्रेम नाराउँ दीक्षित जी 

At 12:20pm on July 29, 2014, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आपकी मित्रता मेरा गौरव है श्रीमन  i  आभार प्रकट करता हूँ i

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
yesterday
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेतुझे याद किया था हमने ... "क्या...तुम्हारे मन के द्वार…See More
yesterday
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Sunday
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Friday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Friday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Friday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Jul 21

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
Jul 20
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jul 18
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service