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Usha Awasthi
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Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post दूजा नहीं विकल्प
"आदाब , हार्दिक आभार आपका"
12 hours ago
Samar kabeer commented on Usha Awasthi's blog post दूजा नहीं विकल्प
"मुहतरमा ऊषा अवस्थी जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें ।"
14 hours ago
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post दूजा नहीं विकल्प
"धन्यवाद वन्दना मिश्रा जी"
yesterday
Dr Vandana Misra commented on Usha Awasthi's blog post दूजा नहीं विकल्प
"सुंदर सन्देश"
yesterday
Samar kabeer commented on Usha Awasthi's blog post हिन्दी सी भला मिठास कहाँ?
"जी,आपसे सहमत हूँ,मैं भी इस समस्या से बहुत दुखी हूँ ।"
Saturday
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post हिन्दी सी भला मिठास कहाँ?
"आदाब,मेरा इशारा देश की किसी भाषा की ओर नहीं है ।अग्रेंजी भाषा का प्रसार जिस तरह हमारे देश में बढ़ा है ,देश में बोली जाने वाली सभी भाषाओं पर खतरा मंडरा रहा है।निश्चय ही इसका प्रमुख कारण रोजगार है।अन्य कारण भी हैं।हमारे बहुत से बच्चे अपनी मातृ भाषा ही…"
Saturday
Samar kabeer commented on Usha Awasthi's blog post हिन्दी सी भला मिठास कहाँ?
"मुहतरमा ऊषा अवस्थी जी आदाब,हिन्दी भाषा के प्रति आपकी कविता अच्छी है,मुझे तो हमारे देश में बोली जाने वाली हर भाषा बहुत मीठी लगती है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Saturday
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post सब निरोग सब हों सुखी
"आदाब ,आभार आपका"
Saturday
Samar kabeer commented on Usha Awasthi's blog post सब निरोग सब हों सुखी
"मुहतरमा ऊषा अवस्थी जी आदाब,अच्छी रचना हुई,बधाई ।"
Saturday
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post हिन्दी सी भला मिठास कहाँ?
"किसी भी भाषा को सीखना बुरा नहीं है।किन्तु अपने ही देशवासियों का हिन्दी को छोड़ अन्य भाषा के प्रति अत्यधिक लगाव देख कर कष्ट होता है। निश्चित ही इसके कुछ कारण अवश्य हैं , जिन्हे दूर किया जाना चाहिए। किन्तु इतनी खूबसूरती से भावो को व्यक्त करने वाली…"
Saturday
Dr. Geeta Chaudhary commented on Usha Awasthi's blog post हिन्दी सी भला मिठास कहाँ?
"आदरणीय उषा मैडम, अदभुत मीठें शब्दों  में हिंदी की मिठास को व्य करती कविता, बहुत अच्छी लगी। हार्दिक बधाई आपको।"
Saturday
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post हिन्दी सी भला मिठास कहाँ?
"हार्दिक आभार आपका । वाक्य के अन्तिम शब्दों 'भाषा शैली . . ' समझ नहीं पा रही हूँ। धन्यवाद।"
Friday
दिनेश कुमार शुक्ल commented on Usha Awasthi's blog post हिन्दी सी भला मिठास कहाँ?
"हिन्दी जैसी मिठास कहाँ जहाँ मिठास होती है वही प्रकृति होती है जहाँ ये दोनो हो वहां रस, छन्द एवं अलंकरण स्वयं भाषा शैली प्रस्तुत हो है"
Friday
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post हिन्दी सी भला मिठास कहाँ?
"इस खूबसूरत टिप्पणी के लिए धन्यवाद"
Friday
Khan Hasnain Aaqib commented on Usha Awasthi's blog post हिन्दी सी भला मिठास कहाँ?
"बहोत खूब उषा जी.. हिंदी सी मिठास कहाँ.. पूरी कविता एहसास को अधोरेखित करती है"
Friday
Usha Awasthi posted a blog post

हिन्दी सी भला मिठास कहाँ?

कोई भी भाषा हो , लेकिनहिन्दी सी भला मिठास कहाँ ?जो दिल से भाव निकलते हैंवह कोमल सा अहसास कहाँ ?है नर्तन मधुर तरंगों साअपना ' प्रणाम ' अन्यान्य कहाँ ?जिससे झंकृत हृद - तार मृदुलवह सुन्दरता , उल्लास कहाँजब बच्चा ' अम्मा , कहकर केजा , माँ के गले लिपटता हैइस नैसर्गिक उद्बोधन मेंअद्भुत आनन्द , हुलास कहाँ ?कोई भी भाषा हो , लेकिनहिन्दी सी भला मिठास कहाँ ?मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Friday

Profile Information

Gender
Female
City State
Lucknow
Native Place
Uttar Pradesh
Profession
Author

ब्राहम्ण

उषा अवस्थी

मान दिया होता यदि तुमने
ब्राम्हण को , सुविचारों को
सदगुण की तलवार काटती
निर्लज्जी व्यभिचारों को

उसको काया मत समझो ,
ज्ञान विज्ञान समन्वय है
द्वैत भाव से मुक्त, जितेन्द्रिय
सत्यप्रतिज्ञ , समुच्चय है

कर्म , वचन , मन से पावन
वह ब्रम्हपथी , समदर्शी है
नहीं जन्म से , सतत कर्म से
तेजस्वी , ब्रम्हर्षि है

मौलिक एवं अप्रकाशित

Usha Awasthi's Blog

दूजा नहीं विकल्प

है मुश्किल आई बड़ी , सारी दुनिया त्रस्त

मिल कर साथ खड़े रहें , कहता है यह वक्त

परमपिता का न्याय तो  सबके लिए समान

अरबों के मालिक भले हों कोई श्रीमान

ईश्वर पर विश्वास का व्यर्थ मुलम्मा ओढ़

कर ना भ्रष्टाचार तू , जीवन यह अनमोल

प्रकृति हमें समझा रही , पर हित लें संकल्प

अन्य बचें तब हम बचें , दूजा नहीं विकल्प

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on March 28, 2020 at 5:30pm — 4 Comments

हिन्दी सी भला मिठास कहाँ?

कोई भी भाषा हो , लेकिन

हिन्दी सी भला मिठास कहाँ ?

जो दिल से भाव निकलते हैं

वह कोमल सा अहसास कहाँ ?

है नर्तन मधुर तरंगों सा

अपना ' प्रणाम ' अन्यान्य कहाँ ?

जिससे झंकृत हृद - तार मृदुल

वह सुन्दरता , उल्लास कहाँ

जब बच्चा ' अम्मा , कहकर के

जा , माँ के गले लिपटता है

इस नैसर्गिक उद्बोधन में

अद्भुत आनन्द , हुलास कहाँ ?

कोई भी भाषा हो , लेकिन

हिन्दी सी भला मिठास कहाँ…

Continue

Posted on March 27, 2020 at 9:33am — 9 Comments

सब निरोग सब हों सुखी

कोरोना का संक्रमण सारे देश , जहान

है दुस्साध्य परिस्थिति , मुश्किल में है जान

इस संकट की घड़ी में हमको रहना एक

दृढ़ संकल्पित हों खड़े , भुला सभी मतभेद

सर्व हिताय खड़े हुए डा0 नर्स तमाम

पुलिस महकमे के लिए है आराम हराम

नित सफाई कर्मी करें बिना शिकन के काम

इनके सेवा भाव को शत , शत मेरा प्रणाम

आई है , टल जाएगी , यह जो बड़ी विपत्ति

अनुशासित घर में रहें बिना किसी आपत्ति

सब निरोग , सब हों सुखी , करना यही…

Continue

Posted on March 25, 2020 at 5:32pm — 2 Comments

वृज की होली

होरी खेलत कृष्ण मुरारी

वृज बीथिन्ह मँह , अजिर , अटारी

होरी खेलत कृष्ण मुरारी

अबिर , गुलाल मलैं गोपियन कै

लुकैं छिपैं वृज की सब नारी

ढूँढि - ढूँढि रंग - कुंकुम मारैं

घूमि - घूमि गोपी दैं गारी

श्याम सामने रोष दिखावहिं

पाछे मुसकावहिं सब ठाढ़ी

होरी खेलत कृष्ण मुरारी

चिहुँक - चिहुँक राधा पग धारहिं

श्याम पकरि चुनरी रंग डारहिं

विद्युत चाल चपल मनुहारी

लपक - झपक कीन्ही…

Continue

Posted on March 13, 2020 at 1:30pm — 4 Comments

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At 6:29am on August 5, 2018, Kishorekant said…

सुन्दर रचना केलिये हार्दिक अभिनंदन सुश्री उषा अवस्थिजी ।

At 9:01pm on September 9, 2017,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए....

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है.

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