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Usha Awasthi
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Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post जरा धीरे चलो
"आभार रक्षिता जी।"
Friday
Rakshita Singh commented on Usha Awasthi's blog post जरा धीरे चलो
"आदरणीया ऊषा जी, नमस्कार बहुत सुन्दर पंक्तियाँ ....हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Friday
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post जरा धीरे चलो
"आभार महेन्द्र जी।"
Jun 13
Mahendra Kumar commented on Usha Awasthi's blog post जरा धीरे चलो
"//तेज इस रफ्तार से घात से प्रतिघात से वक्त रहते , सम्भल जाओजरा धीरे चलो// इस बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए आदरणीया उषा अवस्थी जी. सादर. "
Jun 13
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post जरा धीरे चलो
"धन्यवाद नीलम जी।"
Jun 13
Neelam Upadhyaya commented on Usha Awasthi's blog post जरा धीरे चलो
"आदरणीया उषा अवस्थी जी, नमस्कार । सुंदर भावपूर्ण रचना के लिए हार्दिक बधाई ।"
Jun 13
बसंत कुमार शर्मा commented on Usha Awasthi's blog post जरा धीरे चलो
"सुंदर भाव पूर्ण सृजन "
Jun 13
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post जरा धीरे चलो
"धन्यवाद आपका बसंत कुमार जी।"
Jun 13
बसंत कुमार शर्मा commented on Usha Awasthi's blog post जरा धीरे चलो
"सुंदर भाव पूर्ण सृजन "
Jun 13
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post जरा धीरे चलो
" आभार आपका श्याम नारायण जी।"
Jun 13
Shyam Narain Verma commented on Usha Awasthi's blog post जरा धीरे चलो
"सुन्दर भाव पूर्ण रचना के लिये आपको बधाइयाँ । सादर "
Jun 13
Usha Awasthi posted a blog post

जरा धीरे चलो

जिन्दगी थोड़ा ठहर जाओ जरा धीरे चलो तेज इस रफ्तार से  घात से प्रतिघात से  वक्त रहते , सम्भल जाओ जरा धीरे चलो जिन्दगी - - - - कामना के ज्वार में मान के अधिभार में डूबने से बच , उबर जाओ जरा धीरे चलो जिन्दगी - - - - शब्दाडम्बरों के उत्तरों प्रत्युत्तरों के जाल से बच कर , निकल जाओ  जरा धीरे चलो जिन्दगी - - - -(मौलिक एवम अप्रकाशित)See More
Jun 13
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post कितने रोगों से बच जाते
"शुक्रिया मोहम्मद आरिफ़ जी"
May 24
Mohammed Arif commented on Usha Awasthi's blog post कितने रोगों से बच जाते
"आलरणीया ऊषा अवस्थी जी आदाब, बहुत ही साधारण अंदाज़ की कविता । नोटों के बदले सिक्कों की महिमा का बखान करती कविता । काश ! बिम्बों-प्रतीकों का भी प्रयोग देखने को मिलता । बधाई स्वीकार करें ।"
May 22
Usha Awasthi posted a blog post

कितने रोगों से बच जाते

जब कागज के ये रुपये सुन्दर सिक्कों में ढल जाते तब सचमुच अच्छा होता कितने रोगों से बच जाते कम से कम गंदे नोटों को हमें नहीं छूना पड़ता जिनमें गुटखा पीक लगा हो और हिसाब लिखा चुभता तभी पुराने महाराजे सुन्दर सिक्के गढ़वाते थे जो भी हो , गंदे सिक्केपानी  से तो धुल जाते थेसिक्कों की प्राचीन प्रथा सचमुच में कितनी अच्छी थी स्वस्थ रहे जनता अपनी यह सुभग भावना सच्ची थीनोट छापना बहुत जरूरी उनको ऐसे छपवाएँ साफ रह सकें , लगें सुहाने और हमारे मन भाएँस्वच्छ रहे भारत अपना यह सुघट कल्पना अच्छी है उज्ज्वल…See More
May 22
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post रोगी मन का शब्दों से उपचार नहीं होने वाला
"नीलेश शिवगांवकर जी, हर्ष महाजन जी, बृजेश कुमार 'ब्रज' जी, समर कबीर जी, मोहम्मद आरिफ़ जी, बबिता गुप्ता जी एवं लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी, आप सभी का हार्दिक आभार ।"
May 6

Profile Information

Gender
Female
City State
Lucknow
Native Place
Uttar Pradesh
Profession
Author

Usha Awasthi's Blog

जरा धीरे चलो

जिन्दगी थोड़ा ठहर जाओ
जरा धीरे चलो
तेज इस रफ्तार से 
घात से प्रतिघात से 
वक्त रहते , सम्भल जाओ
जरा धीरे चलो
जिन्दगी - - - -
कामना के ज्वार में
मान के अधिभार में
डूबने से बच , उबर जाओ
जरा धीरे चलो
जिन्दगी - - - -
शब्दाडम्बरों के
उत्तरों प्रत्युत्तरों के
जाल से बच कर , निकल जाओ 
जरा धीरे चलो
जिन्दगी - - - -

(मौलिक एवम अप्रकाशित)

Posted on June 12, 2018 at 10:27pm — 11 Comments

कितने रोगों से बच जाते

जब कागज के ये रुपये

सुन्दर सिक्कों में ढल जाते

तब सचमुच अच्छा होता

कितने रोगों से बच जाते



कम से कम गंदे नोटों को

हमें नहीं छूना पड़ता

जिनमें गुटखा पीक लगा हो

और हिसाब लिखा चुभता



तभी पुराने महाराजे

सुन्दर सिक्के गढ़वाते थे

जो भी हो , गंदे सिक्के

पानी  से तो धुल जाते थे

सिक्कों की प्राचीन प्रथा

सचमुच में कितनी अच्छी थी

स्वस्थ रहे जनता अपनी

यह सुभग भावना सच्ची…

Continue

Posted on May 21, 2018 at 7:30pm — 2 Comments

रोगी मन का शब्दों से उपचार नहीं होने वाला

चाहे जितने लेख लिखें हम

और लिखें कितनी कविता

नहीं समझ आती कामी को

अब कोई भी मर्यादा



रोगी मन का शब्दों से

उपचार नहीं होने वाला

सद्गुण , संस्कार के बिन

उद्धार नहीं…

Continue

Posted on April 28, 2018 at 7:30pm — 9 Comments

समता दीपक जलना होगा

राजनीति करते वोटों की

कुत्सित चाल चला करते

अपना स्वार्थ सिद्ध करने को

आपस में झगड़ा करते

भीड़ जुटाकर आग उगलते

वाक्-वाण वे चलवाते

धर्म जाति का जहर घोल

भड़काकर नफरत फैलाते

कर दें विफल योजना इनकी

जो जन धन लूटा करते

इन्हें नहीं है प्यार राष्ट्र से

यह अपना ही घर भरते

जाने कितने शकुनि यहाँ पर

अनगिन चालें चलवाते

लड़वाते जन को आपस में

खुद बेदाग निकल जाते

इनके…

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Posted on February 22, 2018 at 6:40pm — 4 Comments

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At 9:01pm on September 9, 2017,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए....

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है.

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