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Usha Awasthi
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Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post मुझे ना मार पाएगी (अतुकान्त)
"आ0 विजय निकोरे जी ,जानकर अत्यन्त हर्ष हुआ कि इस रचना से आपने आश्वासन प्राप्त किया। मेरा लेखन सार्थक हुआ।"
Oct 1
vijay nikore commented on Usha Awasthi's blog post मुझे ना मार पाएगी (अतुकान्त)
"बहुत ही सुन्दर रचना... मुझको आश्वासन दे रही है कि जीवन में घबराना नहीं है"
Sep 30
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post मुझे ना मार पाएगी (अतुकान्त)
"आ0 समर कबीर साहेब, रचना सुन्दर लगी , जानकर प्रसन्न हूँ। बहुत आभार आपका"
Sep 22
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post मुझे ना मार पाएगी (अतुकान्त)
"आ0 लक्ष्मण धामी  'मुसाफिर ' जी । आपको रचना सुन्दर लगी , जानकर खुशी हुई। हार्दिक  धन्यवाद"
Sep 22
Samar kabeer commented on Usha Awasthi's blog post मुझे ना मार पाएगी (अतुकान्त)
"मुहतरमा ऊषा अवस्थी जी, सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।"
Sep 22
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Usha Awasthi's blog post मुझे ना मार पाएगी (अतुकान्त)
"आ. ऊषा जी, सादर अभिवादन। सुन्दर प्रस्तुति हुई है । हार्दिक बधाई।"
Sep 18
Usha Awasthi posted a blog post

मुझे ना मार पाएगी (अतुकान्त)

खाली हो गई हूँइच्छाओं से, आशाओं सेव्यर्थ विचारों सेनिरर्थक प्रवाहों सेअस्थिर लगावों सेअनर्गल खिंचावों सेआधुनिक चकाचौंध सेकौन जाने, मौतकब दरवाजा खटखटा देसाथ ले जाने कोकिन्तु वह क्या साथले जा पाएगी ?वह तो पंच तत्वों मेंतन को मिलाएगीमुझे ना मार पाएगीमौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Sep 17
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post कोरोना
"आ0 समर कबीर साहेब , हार्दिक आभार आपका सही सलाह हेतु बहुत धन्यवाद। "
Sep 12
Samar kabeer commented on Usha Awasthi's blog post कोरोना
"मुहतरमा ऊषा अवस्थी जी आदाब, अच्छी रचना है, बधाई स्वीकार करें । 'जिजीवषा जो इन्सा की' इन्सा--'इंसाँ'"
Sep 12
Usha Awasthi shared their blog post on Facebook
Sep 8
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Sep 8
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post कोरोना
"हार्दिक धन्यवाद आशीष यादव जी, सादर"
Sep 8
आशीष यादव commented on Usha Awasthi's blog post कोरोना
"बहुत अच्छी आशावादी कविता।"
Sep 8
Usha Awasthi posted a blog post

कोरोना

जिजीवषा जो इन्सा कीवह नहीं  कभी भी हारेगीजन-जन तक पहुँचाने सुविधाअपने श्रम बल को वारेगीउत्पाती कोरोना की यहसघन श्रृंखला टूटेगीजकड़न से पाश मुक्त होकरमानवी हताशा छूटेगीगहन बुद्धि अन्वेषण सेवैज्ञानिक युक्ति निकालेगानिर्मित कर अचूक औषधियाँ इसको  तो जड़ से मारेगाभय  जाएगा मन से समूलकीटाणु सर्वदा हारेगामास्क, शुद्धता, शारीरिक दूरी का भूत उतारेगा मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Sep 8
Usha Awasthi posted a blog post

गृहणी

झाड़ू -पोंछा कर रहीअन्तर में अनुरागस्वस्थ रहें सब, उल्लसितहृदय भैरवी रागदाल, सब्जियाँ पक रहींउफन रही है प्रीतक्यों ना खा सब तृप्त हों?जब पवित्र मन मीतचकले पर  रोटी बिलीतवे पकाया प्यारउमग खिलाती प्रेम से गृहणी नेह सम्हारबरतन हैं जब मँज रहेसृजन हो रहा गीतताल बद्ध , लय बद्ध होबजता नव संगीतमौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Aug 25
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post गृहणी
"आदरणीय सौरभ पान्डेय जी, हार्दिक धन्यवाद आपका।आपको रचना सार्थक  लगी , जानकर खुशी हुई ।आपके सुझाव का ध्यान रक्खूँगी। सादर प्रणाम"
Aug 25

Profile Information

Gender
Female
City State
Lucknow
Native Place
Uttar Pradesh
Profession
Author

ब्राहम्ण

उषा अवस्थी

मान दिया होता यदि तुमने
ब्राम्हण को , सुविचारों को
सदगुण की तलवार काटती
निर्लज्जी व्यभिचारों को

उसको काया मत समझो ,
ज्ञान विज्ञान समन्वय है
द्वैत भाव से मुक्त, जितेन्द्रिय
सत्यप्रतिज्ञ , समुच्चय है

कर्म , वचन , मन से पावन
वह ब्रम्हपथी , समदर्शी है
नहीं जन्म से , सतत कर्म से
तेजस्वी , ब्रम्हर्षि है

मौलिक एवं अप्रकाशित

Usha Awasthi's Blog

मुझे ना मार पाएगी (अतुकान्त)

खाली हो गई हूँ

इच्छाओं से, आशाओं से

व्यर्थ विचारों से

निरर्थक प्रवाहों से

अस्थिर लगावों से

अनर्गल खिंचावों से

आधुनिक चकाचौंध से

कौन जाने, मौत

कब दरवाजा खटखटा दे

साथ ले जाने को

किन्तु वह क्या साथ

ले जा पाएगी ?

वह तो पंच तत्वों में

तन को मिलाएगी

मुझे ना मार पाएगी

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on September 16, 2021 at 10:59pm — 6 Comments

कोरोना

जिजीवषा जो इन्सा की

वह नहीं  कभी भी हारेगी

जन-जन तक पहुँचाने सुविधा

अपने श्रम बल को वारेगी

उत्पाती कोरोना की यह

सघन श्रृंखला टूटेगी

जकड़न से पाश मुक्त होकर

मानवी हताशा छूटेगी

गहन बुद्धि अन्वेषण से

वैज्ञानिक युक्ति निकालेगा

निर्मित कर अचूक औषधियाँ

 इसको  तो जड़ से मारेगा

भय  जाएगा मन से समूल

कीटाणु सर्वदा हारेगा

मास्क, शुद्धता, शारीरिक 

दूरी का भूत…

Continue

Posted on September 8, 2021 at 9:58pm — 4 Comments

गृहणी

झाड़ू -पोंछा कर रही

अन्तर में अनुराग

स्वस्थ रहें सब, उल्लसित

हृदय भैरवी राग

दाल, सब्जियाँ पक रहीं

उफन रही है प्रीत

क्यों ना खा सब तृप्त हों?

जब पवित्र मन मीत

चकले पर  रोटी बिली

तवे पकाया प्यार

उमग खिलाती प्रेम से 

गृहणी नेह सम्हार

बरतन हैं जब मँज रहे

सृजन हो रहा गीत

ताल बद्ध , लय बद्ध हो

बजता नव संगीत

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on August 22, 2021 at 8:30pm — 6 Comments

कुछ उक्तियाँ

पृथ्वी सम्हलती नहीं

मंगल सम्हालेंगे

यहाँ ऑक्सीजन नष्ट की

वहाँ डेरा डालेंगे

बहुत मनाईं देवियाँ

बहुत मनाए देव

कर्म-लेख मिटता कहाँ ?

भाग्य लिखा सो होय

बुज़ुर्ग बेमिसाल होते हैं

समस्त जीवन के अनुभवों की

अलिखित किताब होते हैं

बुज़ुर्ग बेमिसाल होते हैं

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on May 3, 2021 at 8:04pm

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At 6:29am on August 5, 2018, Kishorekant said…

सुन्दर रचना केलिये हार्दिक अभिनंदन सुश्री उषा अवस्थिजी ।

At 9:01pm on September 9, 2017,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए....

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है.

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