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Usha Awasthi
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Usha Awasthi posted a blog post

रखिहै सबका तुष्ट

जब तब अजिया कहत रहिंदूध पूत हैं एकजैस पियावहु दूध तसबढ़िहै ज्ञान विवेकगइयन केरी सेवा कयिकरिहौ जौ संतुष्टपइहैं पोषण पूर जबहुइहैं तब वह पुष्टअमृत  जैसन दूध बनिनिकसी बहुत पवित्ररोग दोष का नास करिरखिहै सबका तुष्टमौलिक एवं अप्रकाशितSee More
yesterday
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post घटे न उसकी शक्ति
"मैंने बहुत प्रयास किया किन्तु फोन ठीक ना होने के कारण आप सबकी प्रतिक्रिया के उत्तर नहीं दे पाई । सभी आ 0 को मेरा  सादर  आदाब,अभिवादन  एवं प्रणाम ,हार्दिक आभार ,आप सभी का"
Nov 8
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Usha Awasthi's blog post घटे न उसकी शक्ति
"वाह आदरणीया बहुत ही सुन्दर रचना।"
Nov 1
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Usha Awasthi's blog post घटे न उसकी शक्ति
"आ. ऊषा  जी , अभिवादन।अच्छी रचना हुई है, हार्दिक बधाई। "
Oct 24
Samar kabeer commented on Usha Awasthi's blog post घटे न उसकी शक्ति
"मुहतरमा ऊषा अवस्थी जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Oct 20
Usha Awasthi posted a blog post

घटे न उसकी शक्ति

परम ज्योति , शाश्वत , अनन्तकण - कण में सर्वत्रविन्दु रूप में क्यों भलाबैठेगा अन्यन्त्र ?सबमें वह , उसमें सभीचहुँदिशि उसकी गूँजक्या यह संभव है कभीसिन्धु समाए बूँद ?ज्ञान नेत्र से देखतेसंत , विवेकी व्यक्तिआत्मा ही परमात्माघटे न उसकी शक्तिमौलिक एवं  अप्रकाशितSee More
Oct 19
आशीष यादव commented on Usha Awasthi's blog post आए , तोड़े गर्व
" आदरणीया उषा अवस्थी जी प्रणाम। बहुत अच्छी रचना बनी है। बधाई स्वीकार करें। "
Sep 10
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post आए , तोड़े गर्व
"आ0 समर कबीर साहेब, मुझे आपकी प्रतिक्रिया पाकर अत्यन्त हर्ष होता है। यदि रचना आपको अच्छी लगी तो अच्छी ही होगी। आभार आपका "
Sep 8
Samar kabeer commented on Usha Awasthi's blog post आए , तोड़े गर्व
"मुहतरमा ऊषा अवस्थी जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Sep 7
Usha Awasthi posted a blog post

आए , तोड़े गर्व

धरणी को बरबाद करचन्द्र करो जा नष्टफिर ढूँढो घर तीसराजहाँ न कोई कष्टयह क्रम चलता ही रहेमानव ही जब दुष्टआपस में लड़ कर करेसर्व विभूति विनष्टसमझे मालिक स्वयं कोबन बैठा भगवानहिरनकशिपु सम सोच रखऔरों का अपमानकरते बम के परीक्षणखुशी मने ज्यों पर्वराम , कृष्ण सदृश कोईआए , तोड़े गर्वमौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Sep 3
Dimple Sharma commented on Usha Awasthi's blog post आलस करैं न नेक
"आदरणीया ऊषा अवस्थी जी नमस्ते, गांव की महक लिए बिल्कुल गांव की भाषा में रची हुई ये रचना बहुत खुबसूरत हुई है बधाई स्वीकार करें आदरणीय।"
Sep 2
Samar kabeer commented on Usha Awasthi's blog post आलस करैं न नेक
"मोहतरमा उषा अवस्थी जी आदाब , अच्छी रचना हुई है , बधाई स्वीकार करें I"
Aug 31
Usha Awasthi posted a blog post

आलस करैं न नेक

कपड़ा-लत्ता बाँधि कैजावैं अपने देसकितने दिनन बिता गएतबहुँ लगै परदेसपहुचैं अपने द्वार-घरलक्ष्य यही बस एकजा खेती - बाड़ी करैंआलस करैं न नेकधूप - ताप मा बिन रुकेचले जाँय सब गाँवसोचत जात , थमें नहींमिले जो चाहे छाँवनदियन नाला केर सबकचरा देब हटायलहर-लहर बहियैं सबैधरती पियै अघायबबुआ से कहिबै चलौगइया लेइ खरीददूध, दही , मट्ठा मिलैरोजहि मनिहै ईद बचै तो ओहिका बेचि कैराशन लइ कै आबबिना मिलावट बेचिहौंलालच मनहुँ न लाब  जो भी खेतन मा मिली नाज खाँय चाहे मोटदिन गुजरिहैं मजे माभलेहु पास कम नोटमौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Aug 30
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post सारा हिन्दुस्तान
"रचना अच्छी लगी ,जान कर खुशी हुई । आभार आपका"
Aug 26
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post गीत , चाँद हमारे अँगना
"आशीष यादव जी ,अच्छा लगा यह जान कर कि आपने इसे गाया। मेरे जो भी गीत हैं उनकी रचना गाकर ही होती है, यह गीत 1987में लिखा था। धन्यवाद।"
Aug 26
आशीष यादव commented on Usha Awasthi's blog post सारा हिन्दुस्तान
"Very good creation हुआ है। congratulations स्वीकार कीजिए।"
Aug 26

Profile Information

Gender
Female
City State
Lucknow
Native Place
Uttar Pradesh
Profession
Author

ब्राहम्ण

उषा अवस्थी

मान दिया होता यदि तुमने
ब्राम्हण को , सुविचारों को
सदगुण की तलवार काटती
निर्लज्जी व्यभिचारों को

उसको काया मत समझो ,
ज्ञान विज्ञान समन्वय है
द्वैत भाव से मुक्त, जितेन्द्रिय
सत्यप्रतिज्ञ , समुच्चय है

कर्म , वचन , मन से पावन
वह ब्रम्हपथी , समदर्शी है
नहीं जन्म से , सतत कर्म से
तेजस्वी , ब्रम्हर्षि है

मौलिक एवं अप्रकाशित

Usha Awasthi's Blog

रखिहै सबका तुष्ट

जब तब अजिया कहत रहिं

दूध पूत हैं एक

जैस पियावहु दूध तस

बढ़िहै ज्ञान विवेक

गइयन केरी सेवा कयि

करिहौ जौ संतुष्ट

पइहैं पोषण पूर जब

हुइहैं तब वह पुष्ट

अमृत  जैसन दूध बनि

निकसी बहुत पवित्र

रोग दोष का नास करि

रखिहै सबका तुष्ट

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on November 27, 2020 at 7:22pm

घटे न उसकी शक्ति

परम ज्योति , शाश्वत , अनन्त

कण - कण में सर्वत्र

विन्दु रूप में क्यों भला

बैठेगा अन्यन्त्र ?

सबमें वह , उसमें सभी

चहुँदिशि उसकी गूँज

क्या यह संभव है कभी

सिन्धु समाए बूँद ?

ज्ञान नेत्र से देखते

संत , विवेकी व्यक्ति

आत्मा ही परमात्मा

घटे न उसकी शक्ति

मौलिक एवं  अप्रकाशित

Posted on October 18, 2020 at 10:53pm — 4 Comments

आए , तोड़े गर्व

धरणी को बरबाद कर

चन्द्र करो जा नष्ट

फिर ढूँढो घर तीसरा

जहाँ न कोई कष्ट

यह क्रम चलता ही रहे

मानव ही जब दुष्ट

आपस में लड़ कर करे

सर्व विभूति विनष्ट

समझे मालिक स्वयं को

बन बैठा भगवान

हिरनकशिपु सम सोच रख

औरों का अपमान

करते बम के परीक्षण

खुशी मने ज्यों पर्व

राम , कृष्ण सदृश कोई

आए , तोड़े गर्व

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on September 3, 2020 at 7:26pm — 3 Comments

आलस करैं न नेक

कपड़ा-लत्ता बाँधि कै

जावैं अपने देस

कितने दिनन बिता गए

तबहुँ लगै परदेस

पहुचैं अपने द्वार-घर

लक्ष्य यही बस एक

जा खेती - बाड़ी करैं

आलस करैं न नेक

धूप - ताप मा बिन रुके

चले जाँय सब गाँव

सोचत जात , थमें नहीं

मिले जो चाहे छाँव

नदियन नाला केर सब

कचरा देब हटाय

लहर-लहर बहियैं सबै

धरती पियै अघाय

बबुआ से कहिबै चलौ

गइया लेइ खरीद

दूध, दही , मट्ठा…

Continue

Posted on August 30, 2020 at 11:27pm — 2 Comments

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At 6:29am on August 5, 2018, Kishorekant said…

सुन्दर रचना केलिये हार्दिक अभिनंदन सुश्री उषा अवस्थिजी ।

At 9:01pm on September 9, 2017,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए....

 ग़ज़ल की कक्षा 

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भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है.

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