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Usha Awasthi
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Jul 14
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विचारणीय

विचारणीय सत्य है, लोग व्यवहारिक हो गए हैं कल के रिश्ते आज खो गए हैं किसी के बाप किसी की माँ का पता ही नहीं झेलें अवसाद बचपन जिया ही नहीं आख़िर हवा किधर बह रही है? इन्सान भ्रमित है कभी इधर, कभी उधर बह रही है अपनी ही धुन में, निर्बन्ध जवानी जिए जाते हैं आया बुढ़ापा सिर धुन पछताते हैं मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Jul 14
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Jul 11
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post सत्य
"हार्दिक आभार ब्रजेश कुमार 'ब्रज'जी,सादर।"
Jul 10
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Usha Awasthi's blog post सत्य
"बढ़िया धारदार लेखन आदरणीया..."
Jul 10
Usha Awasthi posted a blog post

कुछ उक्तियाँ

कुछ उक्तियाँ उषा अवस्थी आज 'गधे' को पीट कर 'घोड़ा' दिया बनाय कल फिर तुम क्या करोगे जब रेंकेगा जाय? कैसे - कैसे लोग है कैसे - कैसे घाघ? वोट - नीति के नाम पर करें देश बरबाद बदल - बदल कर मुखौटे लगे घूमने धूर्त दुनियाँ का ठेका लिए बने शान्ति के दूत स्वयं आचरण मत करो दूजों को उपदेश क्या ऐसे व्यवहार से आप बनाएँ देश? मौलिक एवं अप्रकाशित See More
Jul 6
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सब एक

सब एक उषा अवस्थी सत्य में स्थित कौन किसे हाराएगा? कौन किससे हारेगा? जो तुम, वह हम सब एक ज्ञानी वही अज्ञानी भी वही हारने हराने का सिलसिला तर्क -वितर्क ; संशय तक संशय समाप्त, समग्र प्राप्त तुममें हममें क्या फ़र्क है? शेष सांसारिक तर्क है जो व्यर्थ है,अवसाद है बढ़ाता उन्माद है राह का रोड़ा है निरर्थक बखेड़ा है केवल सब एक है बस : सब एक है मौलिक एवं अप्रकाशित See More
Jul 3
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Jul 1
Usha Awasthi posted a blog post

सत्य

सत्यउषा अवस्थीअसत्य को धार देकरबढ़ाने का ख़ुमार हो गया हैस्वस्थ परिचर्चा को ग़लत दिशा देनालोगों की आदत में शुमार हो गया है। असत्य के महल खड़े करखिल्ली मत उड़ाओअनेकानेक झूठ कोसत्य से,धूल चटाओशास्त्र वाक्यों को दोराकरअभिमान मत जताओकर्म में परिणित करोव्यर्थ मत,समय गँवाओमौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Jul 1
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post पत्रकार
"आ0, लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी, सादर प्रणाम। हार्दिक आभार आपका"
Jun 5
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Usha Awasthi's blog post पत्रकार
"आ. ऊषा जी, सादर अभिवादन। अच्छी रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jun 5
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May 29
Usha Awasthi posted a blog post

पत्रकार

कलम की धार सशक्त हथियार चौबीसों घण्टे चलता व्यापार निष्पक्ष समाचार बुराई पर वार सम्भावित, हर लम्हा तलवार की धार क्षण - क्षण की ख़बरें दृष्टि में ठहरें गहरा अवलोकन संघर्षों की लहरें मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
May 29
Usha Awasthi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-138
"आ0 प्रतिभा पाण्डे जी, आपको  रचना भाव, शिल्प तथा प्रदत्त विषय को संतुष्ट करती लगी, जानकर अत्यन्त हर्ष हुआ। हार्दिक आभार आपका,सादर।"
Apr 18
Usha Awasthi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-138
"आ0 चेतन प्रकाश जी, नमन। मैंने पटल पर कई बार देखा, इस विषय पर कोई रचना नहीं थी। ज्ञात हुआ, कोई तकनीकी समस्या थी। मैंने उसी 'वक़्त' लिख कर डाला और रचना पटल पर चली भी गई। रचना अच्छी लगने हेतु हार्दिक धन्यवाद आपका।"
Apr 18
Usha Awasthi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-138
"वक़्त पुराना और था आज वक़्त कुछ और ढूँढे आज विदेश में रोज़ी रोटी , ठौर छोड़ दिया माँ- बाप को उनको,उनके हाल चाहें ख़ुद औलाद से रक्खे उनका ख़्याल विकसित करते देश नित नव संहारक अस्त्र दो मुल्कों के युद्ध में होता मानव त्रस्त हुआ विनाश विवेक का इक…"
Apr 17

Profile Information

Gender
Female
City State
Lucknow
Native Place
Uttar Pradesh
Profession
Author

ब्राहम्ण

उषा अवस्थी

मान दिया होता यदि तुमने
ब्राम्हण को , सुविचारों को
सदगुण की तलवार काटती
निर्लज्जी व्यभिचारों को

उसको काया मत समझो ,
ज्ञान विज्ञान समन्वय है
द्वैत भाव से मुक्त, जितेन्द्रिय
सत्यप्रतिज्ञ , समुच्चय है

कर्म , वचन , मन से पावन
वह ब्रम्हपथी , समदर्शी है
नहीं जन्म से , सतत कर्म से
तेजस्वी , ब्रम्हर्षि है

मौलिक एवं अप्रकाशित

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विचारणीय

  • विचारणीय



    सत्य है, लोग

    व्यवहारिक हो गए हैं

    कल के रिश्ते

    आज खो गए हैं



    किसी के बाप

    किसी की माँ का पता ही नहीं

    झेलें अवसाद…

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Posted on July 11, 2022 at 11:11pm

कुछ उक्तियाँ

कुछ उक्तियाँ



उषा अवस्थी



आज 'गधे' को पीट कर

'घोड़ा' दिया बनाय

कल फिर तुम क्या करोगे

जब रेंकेगा जाय?



कैसे - कैसे लोग है

कैसे - कैसे घाघ?…

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Posted on July 6, 2022 at 3:30pm

सब एक

सब एक



उषा अवस्थी



सत्य में स्थित



कौन किसे हाराएगा?

कौन किससे हारेगा?

जो तुम, वह हम

सब एक



ज्ञानी वही अज्ञानी भी वही…

Continue

Posted on July 3, 2022 at 6:56pm

सत्य

सत्य

उषा अवस्थी

असत्य को धार देकर

बढ़ाने का ख़ुमार हो गया है

स्वस्थ परिचर्चा को 

ग़लत दिशा देना

लोगों की आदत में 

शुमार हो गया है।

 

असत्य के महल खड़े कर

खिल्ली मत उड़ाओ

अनेकानेक झूठ को

सत्य से,धूल चटाओ

शास्त्र वाक्यों को दोराकर

अभिमान मत जताओ

कर्म में परिणित करो

व्यर्थ मत,समय गँवाओ

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on July 1, 2022 at 7:05pm — 2 Comments

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At 6:29am on August 5, 2018, Kishorekant said…

सुन्दर रचना केलिये हार्दिक अभिनंदन सुश्री उषा अवस्थिजी ।

At 9:01pm on September 9, 2017,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए....

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है.

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