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Usha Awasthi
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"सुन्दर रचना आदरणीया। जय माँ काली। बधाई "
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SALIM RAZA REWA commented on Usha Awasthi's blog post जय हे काली
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Usha Awasthi posted a blog post

जय हे काली

जय हे काली,करालि,कालिकेवसुधा का प्रांगण स्वच्छ करोदुर्व्यसनी दुष्ट पिशाचों कासंहार करो,संहार करोविषयी,कामातुर,कुलहंताकरते कलियों का शीलभंगऐसे पापी व्यभिचारियों कातुम अंत त्वरित अविलम्ब करोनहीं जिन्हें शील कुल की लज्जाबढ़ रहे रक्तबीजों से जोउन निर्लज्जों के शोणित काखप्पर भर भरकर पान करोपर धन हर्ता महिषासुरों काजब दर्प भंग कर आओगीकलियुग के शुंभ निशुंभों काजब मान रौंदकर आओगीतब रक्तरंजित असि को तेरीप्रसून जल से धुलवाएँगेश्रम तेरा हर लेने को हमगंगाजल स्नान कराएँगेफिर धूप दीप घृत चंदन सेतेरी आरती…See More
22 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर left a comment for Usha Awasthi
"ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए....  ग़ज़ल की कक्षा   ग़ज़ल की बातें    भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है. | | | | | | | | आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ पोस्ट कर सकते…"
Sep 9
Usha Awasthi updated their profile
Sep 9
Usha Awasthi is now a member of Open Books Online
Aug 5

Profile Information

Gender
Female
City State
Lucknow
Native Place
Uttar Pradesh
Profession
Author

Usha Awasthi's Blog

जय हे काली

जय हे काली,करालि,कालिके

वसुधा का प्रांगण स्वच्छ करो

दुर्व्यसनी दुष्ट पिशाचों का

संहार करो,संहार करो



विषयी,कामातुर,कुलहंता

करते कलियों का शीलभंग

ऐसे पापी व्यभिचारियों का

तुम अंत त्वरित अविलम्ब करो



नहीं जिन्हें शील कुल की लज्जा

बढ़ रहे रक्तबीजों से जो

उन निर्लज्जों के शोणित का

खप्पर भर भरकर पान करो



पर धन हर्ता महिषासुरों का

जब दर्प भंग कर आओगी

कलियुग के शुंभ निशुंभों का

जब मान रौंदकर आओगी



तब… Continue

Posted on September 18, 2017 at 11:29pm — 3 Comments

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At 9:01pm on September 9, 2017,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए....

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है.

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