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Usha Awasthi
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"आ0 सुशील सरन जी , हार्दिक आभार आपका"
yesterday
Sushil Sarna commented on Usha Awasthi's blog post कुछ उक्तियाँ
"वाह भावपूर्ण प्रस्तुति आदरणीया ऊषा जी । हार्दिक बधाई"
yesterday
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post कुछ उक्तियाँ
"हार्दिक धन्यवाद आपको, लक्ष्मण धामी जी, सादर"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Usha Awasthi's blog post कुछ उक्तियाँ
"आ. ऊषा जी, अच्छी प्रस्तुति हुई है । हार्दिक बधाई।"
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कुछ उक्तियाँ

कैसी फ़ितरत के लोग होते हैं ?दूसरे की आँखों में धूल झोंकने हेतुनम्बर वही मोबाइल परनाम कुछ और जोड़ लेते हैंदुर्जनों के दुर्वचनसहिष्णुता की परख होते हैंअपनी नहीं खुद उनकीऔक़ात बता देते हैंउनकी माँ नहीं थीं, मेरे पितावे मुझमें माँ ढूँढते रहे,मैं उनमें पिताउन्हे ना माँ मिलीं, ना मुझे पितामौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Friday
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post कुछ अतुकान्त
"आ0 लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर ' जी,सादर प्रणाम। बहुत धन्यवाद आपको।"
Mar 9
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Usha Awasthi's blog post कुछ अतुकान्त
"आ. ऊषा जी, सादर अभिवादन । अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Mar 9
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post कुछ अतुकान्त
"श्रीमान कृश मिश्रा जी , हार्दिक आभार आपका"
Mar 8
Krish mishra 'jaan' gorakhpuri commented on Usha Awasthi's blog post कुछ अतुकान्त
"बहुत सुंदर अतुकांत हेतु बधाई आ. ऊषा जी"
Mar 8
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post कुछ अतुकान्त
"आ0 अमीरुद्दीन 'अमीर' साहेब, आदाब। रचना पसंद आने हेतु हार्दिक धन्यवाद आपको"
Mar 7
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Usha Awasthi's blog post कुछ अतुकान्त
"मुहतरमा ऊषा अवस्थी जी आदाब, वास्तविक कथन का सुन्दर चित्रण करती रचना हुई है।  बधाई स्वीकार करें।  सादर। "
Mar 7
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post कुछ अतुकान्त
"आ0 समर कबीर जी,आदाब। रचना आपको अच्छी लगी, मेरा लिखना सार्थक हुआ। हार्दिक आभार आपका लिखना सार्थक हुआ।"
Mar 7
Samar kabeer commented on Usha Awasthi's blog post कुछ अतुकान्त
"मुहतरमा ऊषा अवस्थी जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Mar 7

Profile Information

Gender
Female
City State
Lucknow
Native Place
Uttar Pradesh
Profession
Author

ब्राहम्ण

उषा अवस्थी

मान दिया होता यदि तुमने
ब्राम्हण को , सुविचारों को
सदगुण की तलवार काटती
निर्लज्जी व्यभिचारों को

उसको काया मत समझो ,
ज्ञान विज्ञान समन्वय है
द्वैत भाव से मुक्त, जितेन्द्रिय
सत्यप्रतिज्ञ , समुच्चय है

कर्म , वचन , मन से पावन
वह ब्रम्हपथी , समदर्शी है
नहीं जन्म से , सतत कर्म से
तेजस्वी , ब्रम्हर्षि है

मौलिक एवं अप्रकाशित

Usha Awasthi's Blog

कुछ उक्तियाँ

कैसी फ़ितरत के लोग होते हैं ?

दूसरे की आँखों में धूल झोंकने हेतु

नम्बर वही मोबाइल पर

नाम कुछ और जोड़ लेते हैं

दुर्जनों के दुर्वचन

सहिष्णुता की परख होते हैं

अपनी नहीं खुद उनकी

औक़ात बता देते हैं

उनकी माँ नहीं थीं, मेरे पिता

वे मुझमें माँ ढूँढते रहे,मैं उनमें पिता

उन्हे ना माँ मिलीं, ना मुझे पिता

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on April 16, 2021 at 10:43am — 4 Comments

कुछ अतुकान्त

बच्चे सरायों में नहीं

घरों में पलते हैं

व्यक्तित्व आया से नहीं 

माँओं से बनते हैं

कितनी जल्दी लोग

पाला बदल लेते हैं

आज गँठजोड़ किसी से

कल,किसी और से कर लेते हैं

क्या कहें वक्त के सफ़र को हम

जहाँ निजता की चाह होती है

एक ही घर के बन्द कमरों में

अब,मोबाइल से बात होती है

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on March 6, 2021 at 1:25am — 8 Comments

मनुज कभी न हारेगा

समय का चक्र घूमता

कठोर काल झूमता

प्रचंड वेग धारता

दहाड़ता , पछाड़ता

लपक- लपक, झपक - झपक

नगर - नगर , डगर- डगर

मृत्यु - बिगुल फूँकता

बन के वज्र टूटता

सिरिंज की कमान से

वैक्सिन के वाण से

संक्रमण को नष्ट कर

यह कोरोना ध्वस्त कर

निकालेगा जहान से

खड़ा हुआ वो शान से

विजय ध्वजा को धारेगा

मनुज कभी न हारेगा

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on January 8, 2021 at 7:44pm — 2 Comments

डरे भला क्यों मौत से ?

जब तक इन्द्रिय भोग में होती मन की वृत्ति

सकल दुखों ,भव - ताप से मिलती नहीं निवृत्ति

उस असीम की शक्ति से संचालित सब कर्म

परम विवेकी संत ही जाने उसका मर्म

पंच तत्व के मेल से बनें प्रकृति के रूप

यह दर्पण , इसमें दिखे सत्य ,'अरूप' , अनूप

दृढ़ संकल्पित यदि रहे नित्य , सनातन जान

डरे भला क्यों मौत से ? अजर , अजेय , अमान

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on December 23, 2020 at 11:03am — 2 Comments

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At 6:29am on August 5, 2018, Kishorekant said…

सुन्दर रचना केलिये हार्दिक अभिनंदन सुश्री उषा अवस्थिजी ।

At 9:01pm on September 9, 2017,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए....

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 ग़ज़ल की बातें 

 

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"सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय बसंत कुमार शर्मा जी ।बहुत सुंदर सुझाव । हार्दिक…"
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Sushil Sarna commented on Usha Awasthi's blog post कुछ उक्तियाँ
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