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बृजेश कुमार 'ब्रज'
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बृजेश कुमार 'ब्रज' posted a blog post

ग़ज़ल-और तुम हो

फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुनज़िन्दगी में सिर्फ़ ग़म हैं और तुम हो आज फिर से आँखें नम हैं और तुम होलग रहा है अब मिलन मुमकिन नहीं है वक़्त से लाचार हम हैं और तुम होरात चुप, है चाँद तन्हा, साँस मद्धम इश्क़ में लाखों सितम हैं और तुम होदिल की बस्ती में अकेला तो नहीं हूँ नींद से बोझिल क़दम हैं और तुम होक्या बताऊँ किसलिये है 'ब्रज' परेशां वस्ल के आसार कम हैं और तुम हो(मौलिक एवं अप्रकाशित) बृजेश कुमार 'ब्रज'See More
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-और तुम हो
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय समर जी संशय दूर करने के लिए।दरअसल पहले आंख रखा था लेकिन वो भी ठीक नही था।सुधार करता हूँ सादर"
Monday
Samar kabeer commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-और तुम हो
"जनाब बृजेश कुमार 'ब्रज' जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें । 'आज फिर से चश्म-ए-नम हैं और तुम हो' इस मिसरे में 'चश्म' एक वचन है,और रदीफ़ का 'हैं' बहुवचन में,इस मिसरे को यूँ कह सकते…"
Monday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-और तुम हो
"आदरणीय अमीरुद्दीन जी आपके खूबसूरत शब्दों से अति प्रसन्नता का अनुभव हुआ..शुक्रिया आपका..सादर"
Saturday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-और तुम हो
"आदरणीय धामी जी हार्दिक अभिनंदन एवं आभार..."
Saturday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-और तुम हो
"हौसलाफजाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय गुमनाम जी...."
Saturday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-और तुम हो
"ग़ज़ल पसंदगी के लिए शुक्रिया भाई कृष मिश्रा जी..."
Saturday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-और तुम हो
"ग़ज़ल पे आपकी हौसलाफजाई के लिए शुक्रिया मित्र आजी तमाम जी..."
Saturday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-और तुम हो
"जनाब बृजेश कुमार जी आदाब, शानदार ग़ज़ल पेश की है आपने, शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ। सादर।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-और तुम हो
"आ. भाई बृजेश कुमार जी, सादर अभिवादन । उत्तम गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Friday
gumnaam pithoragarhi commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-और तुम हो
"वाह शानदार ग़ज़ल हुई है बधाई। अच्छी लगी वाह। ...... "
Friday
Krish mishra 'jaan' gorakhpuri commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-और तुम हो
"बहुत खूब,ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई भाई  बृजेश जी।"
Friday
Aazi Tamaam commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-और तुम हो
"आदरणीय जनाब ब्रजेश जी बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल है और तुम हो........ बेहतरीन बधाई स्वीकार करें"
Friday
बृजेश कुमार 'ब्रज' posted a blog post

ग़ज़ल-और तुम हो

फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुनज़िन्दगी में सिर्फ़ ग़म हैं और तुम हो आज फिर से आँखें नम हैं और तुम होलग रहा है अब मिलन मुमकिन नहीं है वक़्त से लाचार हम हैं और तुम होरात चुप, है चाँद तन्हा, साँस मद्धम इश्क़ में लाखों सितम हैं और तुम होदिल की बस्ती में अकेला तो नहीं हूँ नींद से बोझिल क़दम हैं और तुम होक्या बताऊँ किसलिये है 'ब्रज' परेशां वस्ल के आसार कम हैं और तुम हो(मौलिक एवं अप्रकाशित) बृजेश कुमार 'ब्रज'See More
Friday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कच्ची कलियाँ क्यों मरती - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"अहा...क्या कहने आदरणीय बेहद खूबसूरत...हर शे'र एक से बढ़कर एक..बधाई काँटा चुभता अगर पाँव को धीरे धीरेआ जाते हम  यार  ठाँव को धीरे धीरे। वाह वाह"
Feb 18
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- तिफ़्ल कमाल के
"बढ़िया ग़ज़ल कही आदरणीया। बधाई...आदरणीय समर जी की इस्लाह हमेशा की तरह गौर करने लायक है।सादर"
Feb 18

Profile Information

Gender
Male
City State
noida
Native Place
jhansi

बृजेश कुमार 'ब्रज''s Blog

ग़ज़ल-और तुम हो

फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन

ज़िन्दगी में सिर्फ़ ग़म हैं और तुम हो

आज फिर से आँखें नम हैं और तुम हो

लग रहा है अब मिलन मुमकिन नहीं है

वक़्त से लाचार हम हैं और तुम हो

रात चुप, है चाँद तन्हा, साँस मद्धम

इश्क़ में लाखों सितम हैं और तुम हो

दिल की बस्ती में अकेला तो नहीं हूँ

नींद से बोझिल क़दम हैं और तुम हो

क्या बताऊँ किसलिये है 'ब्रज' परेशां

वस्ल के आसार कम हैं और तुम हो

(मौलिक एवं अप्रकाशित)…

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Posted on February 18, 2021 at 9:30pm — 11 Comments

गीत-लोचन लोचन अश्रु बावरे बहते हैं अविराम (सरसी छंद)

विधान – 27 मात्रा, 16,11 पर यति, चरणान्त में 21 लगा अनिवार्य l कुल चार चरण, क्रमागत दो-दो चरण तुकांत l

ह्रदय बसाये देवी सीता

वन वन भटकें राम

लोचन लोचन अश्रु बावरे

बहते हैं अविराम

सुन चन्दा तू नीलगगन से

देख रहा संसार

किस नगरी में किस कानन में

खोया जीवन सार

हे नदिया हे गगन,समीरा 

ओ दिनकर ओ धूप

तृण तृण से यूँ हाथ जोड़कर

पूछ रहे…

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Posted on December 10, 2020 at 7:00pm — 8 Comments

ग़ज़ल-तुमसे ग़ज़ल ने कुछ नहीं बोला?

2122       2122        2122        2

चुप रहीं आँखें सजल ने कुछ नहीं  बोला

इसलिए  मनवा विकल ने कुछ नहीं बोला

भाव जितने हैं सभी को लिख दिया हमदम

क्या कहूँ! तुमसे ग़ज़ल ने कुछ नहीं बोला?

जिस  किनारे  बैठ  के  पहरों  तुम्हें  सोचूँ

उस जलाशय के कमल ने कुछ नहीं बोला?

एक  पत्थर  झील में  फेंका कि जुम्बिश हो

झील के  खामोश जल ने कुछ नहीं  बोला

साथ 'ब्रज' के रात भर पल पल रहे जलते

जुगनुओं  के नेक  दल ने…

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Posted on November 19, 2020 at 9:00pm — 6 Comments

ग़ज़ल..कहीं लौकी कहीं कद्दू कहीं कटहल के ठेले हैं

मुफाईलुन*4

खरीदूँ कौन सी सब्जी बड़े लगते झमेले हैं

कहीं लौकी कहीं कद्दू कहीं कटहल के ठेले हैं

इधर भिन्डी बड़ी शर्मो हया से मुस्कुराती है

अजब नखरे टमाटर के पड़ोसी कच्चे केले हैं

तुनक में मिर्च बोली आ तुझे जलवा दिखाती हूँ

कहे धनिया हमें भी साथ ले लो हम अकेले हैं

शकरकंदी,चुकंदर ने सजाई नाज से महफ़िल

सुनाया राग आलू ने मगन बैगन,करेले हैं

घड़ी भर को जरा पहलु में लहसुन,प्याज आ बैठो

जुदाई में तुम्हारी 'ब्रज' ने…

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Posted on November 1, 2020 at 8:00pm — 7 Comments

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At 6:59pm on October 24, 2017, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

स्वागत है आदरणीय ,  आपको मित्र के रूप में पाना मेरा सौभाग्य है .

At 11:43pm on November 17, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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