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बृजेश कुमार 'ब्रज'
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बृजेश कुमार 'ब्रज''s Page

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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ठहर जाता तो अच्छा था- एक ग़ज़ल बसंत की
"क्या कहने आदरणीय..बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई..सादर"
12 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Afroz 'sahr''s blog post ग़ज़ल -ए- सहर
"बड़ी खूबसूरत ग़ज़ल हुई आदरणीय अफ़रोज़ जी.."
12 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...वही बारिश वही बूँदें वही सावन सुहाना है-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आदरणीय श्रीवास्तव जी उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार..सादर"
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल....धीरे धीरे रीत गया - बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आदरणीय नीलेश जी आपकी उपस्थिति स्वागतयोग्य है..आम बोल चाल में हम इस शब्द का इस्तेमाल करते हैं..इसके अलावा मैंने कई बार पढ़ा भी है। सोहन लाल द्विवेदी जी की बाल कविता उठो लाल अब आँखें खोलो में नन्ही नन्ही किरणें आई, फूल खिले कलियाँ मुस्काई। सूर्यकान्त…"
yesterday
MUKESH SRIVASTAVA commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...वही बारिश वही बूँदें वही सावन सुहाना है-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"वही बारिश वही बूँदें वही सावन सुहाना हैतेरी यादों का मौसम है लबों पे इक तराना है KYA BAT MITRA"
yesterday
Nilesh Shevgaonkar commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल....धीरे धीरे रीत गया - बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आ. बृजेश जी,अच्छी भावपूर्ण   ग़ज़ल हुई  है ...मुस्काई सही चयन  नहीं है ..मुस्कुराई होना चाहिये ..मुस्कान , मुस्कुराना , मुस्कुराहट को मुस्काना या   मुसकाहट    नहीं कहना    चाहिए .बधाई "
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on योगराज प्रभाकर's blog post ग़ज़ल नo-१ (योगराज प्रभाकर)
"श्रद्धा नहीं तो हर नदी पानी के सिवा क्या ? श्रद्धा हो ग़र तो हर नदी गंगा दिखाई दे...वाह वाह आदरणीय क्या खूबसूरत बात कही है..नमन है लेखनी को..सादर"
Sunday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल....धीरे धीरे रीत गया - बृजेश कुमार 'ब्रज'
"हार्दिक आभार आदरणीय नीरज कुमार जी..सादर"
Sunday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल....धीरे धीरे रीत गया - बृजेश कुमार 'ब्रज'
"लिखना सफल हुआ आपकी टिप्पड़ी से आदरणीय गिरिराज जी..सादर प्रणाम"
Sunday
Niraj Kumar commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल....धीरे धीरे रीत गया - बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आदरणीय बृजेश जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है दाद के साथ मुबारकबाद. सादर  "
Sunday

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल....धीरे धीरे रीत गया - बृजेश कुमार 'ब्रज'
"क्या बात है , आ. बृजेश भाई , अच्छी गज़ल हुई है , बधाइयाँ  स्वीकार करें ।"
Sunday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल....धीरे धीरे रीत गया - बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आपकी टिप्पड़ी से नवीन ऊर्जा का संचार हुआ आदरणीय समर कबीर जी..प्रणाम"
Sunday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल....धीरे धीरे रीत गया - बृजेश कुमार 'ब्रज'
"तहेदिल से शुक्रिया ज़नाब सलीम साहेब.."
Sunday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल....धीरे धीरे रीत गया - बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आपको नमन करता हूँ आदरणीय वासुदेव जी..स्नेह बनाये रखें सादर"
Sunday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल....धीरे धीरे रीत गया - बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आपका स्वागत है आदरणीय मोहित जी..सादर"
Sunday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल....धीरे धीरे रीत गया - बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आपके शब्दों से अतिप्रसन्ता का अनुभव हुआ आदरणीय शर्मा जी..सादर"
Sunday

Profile Information

Gender
Male
City State
noida
Native Place
jhansi

बृजेश कुमार 'ब्रज''s Blog

ग़ज़ल....धीरे धीरे रीत गया - बृजेश कुमार 'ब्रज'

22 22 22 22 22 22 22 2

यादों के गलियारे होकर जब मैं आज अतीत गया

लाख सँभाला आँखों ने पर धीरे धीरे रीत गया



नाम पुकारा कुछ ने मेरा कुछ के अश्क़ छलक आये

कुछ तस्वीरें मुस्काईं तो गूँज कहीं संगीत गया



ख्वाब सुहाने कुछ बचपन के टूट गये कुछ रूठ गये

कैसे जी को समझाऊँ मैं क्या गुजरी क्या बीत गया



ऐसा क्या माँगा था उनसे ऐसी क्या मज़बूरी थी

बीच भँवर क्यों हाथ छुड़ाकर बेदर्दी मनमीत गया



खेल रचा क्या भावों का हाथों की चन्द लकीरों ने

हार गया… Continue

Posted on September 16, 2017 at 8:25pm — 22 Comments

गैर मुरद्दफ़ ग़ज़ल..मेरे दीदा ए नम में तू ही तू-बृजेश कुमार 'ब्रज'

गैर मुरद्दफ़ ग़ज़ल
2122 1212 22
तेरी आँखें ज़हान की खुशबू
मेरे दीदा ए नम में तू ही तू

गीत ग़ज़लों में तू नुमायाँ है
तेरा ही चर्चा नज़्म में हर सू

याद किसकी शुरुर है किसका
किसलिये आँखों से रवां आँसू

तेरी जुल्फों की खुशबुएँ लेकर
कोई झोंका सबा का जाये छू

धर्म मजहब से ये हुआ हासिल
जल रहे हैं बशर यहाँ धू धु

राज है 'ब्रज' तेरी उदासी में
बेसबब आज फिर बहे आँसू
(मौलिक एवं अप्रकाशित)
बृजेश कुमार 'ब्रज'

Posted on September 6, 2017 at 3:00pm — 2 Comments

ग़ज़ल....दुआयें साथ हैं माँ की वगरना मर गये होते-बृजेश कुमार 'ब्रज'

1222 1222 1222 1222

रगों को छेदते दुर्भाग्य के नश्तर गये होते

दुआयें साथ हैं माँ की वगरना मर गये होते



वजह बेदारियों की पूछ मत ये मीत हमसे तू

हमें भी नींद आ जाती अगरचे घर गये होते



नज़र के सामने जो है वही सच हो नहीं मुमकिन

हो ख्वाहिशमंद सच के तो पसे मंज़र गये होते



अगर होती फ़ज़ाओं में कहीं आमद ख़िज़ाओं की

हवायें गर्म होतीं और पत्ते झर गये होते



शिकायत भी नहीं रहती गमे फ़ुर्क़त भी होता कम

न होती आँख में शबनम अगर कहकर गये… Continue

Posted on August 28, 2017 at 11:00am — 18 Comments

ग़ज़ल...वही बारिश वही बूँदें वही सावन सुहाना है-बृजेश कुमार 'ब्रज'

१२२२   १२२२ ​   १२२२    १२२२​

वही बारिश वही बूँदें वही सावन सुहाना है

तेरी यादों का मौसम है लबों पे इक तराना है



तुझी को याद करता हूँ तेरा ही नाम लेता हूँ

यही इक काम है बाकी तुझे अपना बनाना है



कभी जाये न ये मौसम बहे नैंनो से यूँ सावन

दिखाऊँ किस तरह जज्बात​ राहों में जमाना है



रही बस याद बाकी है यही फरियाद बाकी है

सुनाऊँ क्या जमाने को खुदी को आजमाना है



मिलन होता न उल्फत में कटेगी जिन्दगी पल में

ये साँसें हैं बिखर जायें अमर… Continue

Posted on August 22, 2017 at 5:00pm — 22 Comments

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At 11:43pm on November 17, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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