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बृजेश कुमार 'ब्रज'
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-आख़िर
"आदरणीय उपाध्याय जी हार्दिक आभार आपका..."
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' and C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" are now friends
May 30
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-आख़िर
""उसे कुछ कह नहीं सकता मगर चुप भी रहूँ कैसेकरूँ तो क्या करूँ उलझे हुए हालात में आख़िर"वाह वाह ! बहुत सार्थक ग़ज़ल |  हार्दिक बधाई  बृजेश कुमार 'ब्रज जी | "
May 30
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-आख़िर
"बहुत बहुत शुक्रिया भाई आज़ी तमाम जी..."
May 20
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-आख़िर
"हार्दिक आभार आदणीय धामी जी"
May 20
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on विनय कुमार's blog post हम क्यों जीते हैं--कविता
"बढ़िया कविता लिखी है विनय कुमार जी..बधाई"
May 19
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Aazi Tamaam's blog post नग़मा: माँ की ममता
"बहुत ही खूबसूरत लिखा भाई तमाम जी...बधाई"
May 19
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मातृ दिवस पर ताजातरीन गजल -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"बहुत ही खूब ग़ज़ल कही आदरणीय धामी जी...बधाई"
May 19
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on सालिक गणवीर's blog post जग में नाम कमाना है....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"अच्छी ग़ज़ल कही आदरणीय सालिक जी..."
May 19
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi"'s blog post दोहे
"बड़े ही सुंदर और सारगर्भित दोहे...बधाई आदरणीय"
May 19
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on amita tiwari's blog post दस वर्षीय का सवाल
"वाह बहुत ही शानदार हास्यात्मक गंभीरता समेटे हुए रचना...हार्दिक बधाई आदरणीया"
May 19
Aazi Tamaam commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-आख़िर
"आ ब्रज जी सादर प्रणाम बेहद खूबसूरत ग़ज़ल है"
May 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-आख़िर
"आ. भाई ब्रिजेश जी, अभिवादन। बहुत खूबसूरत गजल हुई है । हार्दिक बधाई।"
May 17
बृजेश कुमार 'ब्रज' posted a blog post

ग़ज़ल-आख़िर

1222     1222     1222      1222छुड़ाया  चाँद ने  दामन अँधेरी  रात में  आख़िरपरेशां  हूँ कमी  क्या है  मेरे ज़ज़्बात  में आख़िरउसे कुछ कह नहीं सकता मगर चुप भी रहूँ कैसेकरूँ तो क्या करूँ उलझे हुए हालात में आख़िरभुलाना  चाहता तो  हूँ मगर  मजबूरियाँ  भी  हैंउसी की बात आ जाती मेरी हर बात में आख़िरसुनो अय आँसुओं बेवक़्त का ढलना नहीं अच्छाजलूँगा कब तलक मैं इस क़दर बरसात में आख़िरमुख़ातिब हैं सभी मुझसे कि आगे और क्या है 'ब्रज'मिले  हैं  ग़म  जुदाई  के  मुझे  ख़ैरात में  आख़िर(मौलिक एवं अप्रकाशित)बृजेश कुमार 'ब्रज'See More
May 17
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-मेरी  उदासी  मुझे अकेला  न छोड़  देना
"ग़ज़ल पे आपकी शिरक़त के लिए बहुत बहुत शुक्रिया भी तमाम जी..."
Apr 16
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"बढ़िया कहा भाई मनोज जी...बधाई कुबूल करें..."
Apr 16

Profile Information

Gender
Male
City State
noida
Native Place
jhansi

बृजेश कुमार 'ब्रज''s Blog

ग़ज़ल-आख़िर

1222     1222     1222      1222

छुड़ाया  चाँद ने  दामन अँधेरी  रात में  आख़िर

परेशां  हूँ कमी  क्या है  मेरे ज़ज़्बात  में आख़िर

उसे कुछ कह नहीं सकता मगर चुप भी रहूँ कैसे

करूँ तो क्या करूँ उलझे हुए हालात में आख़िर

भुलाना  चाहता तो  हूँ मगर  मजबूरियाँ  भी  हैं

उसी की बात आ जाती मेरी हर बात में आख़िर

सुनो अय आँसुओं बेवक़्त का ढलना नहीं अच्छा

जलूँगा कब तलक मैं इस क़दर बरसात में आख़िर

मुख़ातिब हैं सभी मुझसे कि आगे…

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Posted on May 17, 2021 at 2:20pm — 6 Comments

ग़ज़ल-मेरी  उदासी  मुझे अकेला  न छोड़  देना

121   22   121   22   121   22

अगर कभी जो क़रार आये झिझोड़ देना

मेरी  उदासी  मुझे अकेला  न छोड़  देना

बिना तुम्हारे  ये ज़िन्दगी अब  कटेगी कैसे

जो तू नहीं तो नफ़स की डोरी भी तोड़ देना

जरा  सी कोई  रहे  हरारत  न जान  बाकी

कि  जाते जाते  बदन  हमारा निचोड़ देना

कभी हमारे ग़मों पे तुझको दुलार आये

वहीं उसी पल कतार भावों की मोड़ देना

तेरे ग़मो का उसे न होगा पता, है मुमकिन

मगर सिरा 'ब्रज' उदासियों का न जोड़…

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Posted on April 7, 2021 at 10:30am — 11 Comments

ग़ज़ल-उदासी इस क़दर मुझमें उतरती जा रही है

1222      1222      1222      122

ग़मों की दिन-ब-दिन क़िस्मत सँवरती जा रही है

उदासी इस क़दर मुझमें उतरती जा रही है



अभी तो वक़्त है पतझर के आने में,हवा क्यों

चली ऐसी कि मन वीरान करती जा रही है



बहारों ने चमन लूटा मगर बाद-ए-सबा ये 

खिज़ाओं पे हरिक इलज़ाम धरती जा रही है



फ़िराक-ए-यार का मौसम बहुत नज़दीक…
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Posted on March 19, 2021 at 10:30am — 14 Comments

ग़ज़ल-और तुम हो

फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन

ज़िन्दगी में सिर्फ़ ग़म हैं और तुम हो

आज फिर से आँखें नम हैं और तुम हो

लग रहा है अब मिलन संभव नहीं है

वक़्त से लाचार हम हैं और तुम हो

रात चुप, है चाँद तन्हा, साँस मद्धम

इश्क़ में लाखों सितम हैं और तुम हो

दिल की बस्ती में अकेला तो नहीं हूँ

नींद से बोझिल क़दम हैं और तुम हो

क्या बताऊँ किसलिये है 'ब्रज' परेशां

वस्ल के आसार कम हैं और तुम हो

(मौलिक एवं अप्रकाशित)…

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Posted on February 18, 2021 at 9:30pm — 11 Comments

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At 6:59pm on October 24, 2017, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

स्वागत है आदरणीय ,  आपको मित्र के रूप में पाना मेरा सौभाग्य है .

At 11:43pm on November 17, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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