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बृजेश कुमार 'ब्रज'
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...पिछले कुछ दिनों से-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आदरणीय मोहित जी आपका हार्दिक आभार..सादर"
Saturday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...पिछले कुछ दिनों से-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"स्वागत संग आभार आदरणीया रक्षिता जी..सादर"
Saturday
Mohit mishra (mukt) commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...पिछले कुछ दिनों से-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"उम्दा ग़ज़ल आदरणीय जोश में है भीड़ 'ब्रज' आक्रोश भी है बस नहीं है जान पिछले कुछ दिनों से बधाई"
Friday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post ग़ज़ल (प्रथम प्रयास ):-मोहित मुक्त
"अच्छी कोशिश भाई..अरकान नहीं लिखे हैं आपने..जो आदरणीय गुमनाम जी ने बताया वही हैं तो उनकी बातों का संज्ञान लें.."
Friday
Rakshita Singh commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...पिछले कुछ दिनों से-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आदरणीय बृजेश जी नमस्कार, "बस नहीं है जान पिछले कुछ दिनों से" खूबसूरत गजल के साथ  बहुत ही बेहतरीन पंक्ति ... बहुत बहुत मुबारकबाद ..."
Friday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on vijay nikore's blog post अकुलायी थाहें
"बहुत ही बेहतरीन भाव भरे हैं कविता में आदरणीय..वाह"
Thursday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post दि 'बेस्ट' या 'वर्स्ट' (लघुकथा)
"बहुत ही सटीक और सार्थक विषय से ओतप्रोत लघुकथा..वाह बहुतखूब आदरणीय"
Thursday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on TEJ VEER SINGH's blog post बिजली – लघुकथा -
"आजकल की राजनीति को आईना दिखाती हुई रचना है आदरणीय..सादर"
Thursday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on SudhenduOjha's blog post है अगर कोई मुसीबत,
"अच्छी रचना है आदरणीय...विद्या भी लिख देते तो ज्यादा बेहतर होता है.."
Thursday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post गीत...धीरे धीरे आओ चन्दा (सार छंद 16,12 पर आधारित गीत)
"हार्दिक आभार सतविंद्र भाई.."
Thursday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...पिछले कुछ दिनों से-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"उत्साहवर्धन के लिए आपका आभार आदरणीय महेंद्र जी"
Thursday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...पिछले कुछ दिनों से-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आभार संग नमन आदरणीय शर्मा जी"
Thursday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...पिछले कुछ दिनों से-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"स्वागत संग आभार आदरणीय गुमनाम जी"
Thursday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...पिछले कुछ दिनों से-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"हार्दिक वंदन एवं अभिनदंन आदरणीय तेजवीर सिंह जी"
Thursday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...पिछले कुछ दिनों से-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"बहुत बहुत आभार आदरणीय धामी जी"
Thursday
बृजेश कुमार 'ब्रज' posted a blog post

ग़ज़ल...पिछले कुछ दिनों से-बृजेश कुमार 'ब्रज'

फाइलातुन फाइलातुन फाइलातुनहूँ बहुत हैरान पिछले कुछ दिनों से ज़ीस्त है हलकान पिछले कुछ दिनों सेचाँद भी है आजकल कुछ खोया खोया रातें हैं वीरान पिछले कुछ दिनों सेआदमी हूँ आदमी के काम आऊँ है यही अरमान पिछले कुछ दिनों सेकौड़ियों के भाव बिकती हैं अनाएं मर गया ईमान पिछले कुछ दिनों सेजोश में है भीड़ 'ब्रज' आक्रोश भी है बस नहीं है जान पिछले कुछ दिनों से (मौलिक एवं अप्रकाशित) बृजेश कुमार 'ब्रज'See More
Thursday

Profile Information

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Male
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jhansi

बृजेश कुमार 'ब्रज''s Blog

ग़ज़ल...पिछले कुछ दिनों से-बृजेश कुमार 'ब्रज'

फाइलातुन फाइलातुन फाइलातुन

हूँ बहुत हैरान पिछले कुछ दिनों से

ज़ीस्त है हलकान पिछले कुछ दिनों से

चाँद भी है आजकल कुछ खोया खोया

रातें हैं वीरान पिछले कुछ दिनों से

आदमी हूँ आदमी के काम आऊँ

है यही अरमान पिछले कुछ दिनों से

कौड़ियों के भाव बिकती हैं अनाएं

मर गया ईमान पिछले कुछ दिनों से

जोश में है भीड़ 'ब्रज' आक्रोश भी है

बस नहीं है जान पिछले कुछ दिनों से

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

बृजेश कुमार…

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Posted on June 12, 2018 at 5:00pm — 14 Comments

गीत...धीरे धीरे आओ चन्दा (सार छंद 16,12 पर आधारित गीत)

धीरे धीरे आओ चन्दा

धीरे धीरे आओ

होंठों पर मुस्कान सजाये

सोया है मृग छौना

आहट से तेरी टूटेगा

उसका ख्वाब सलोना

बात समझ भी जाओ चन्दा

धीरे धीरे आओ

तुम चलते हो पीछे पीछे

चलते हैं सब तारे

और तुम्हारी सुंदरता पर

इठलाते हैं सारे

तुम तो मत इतराओ चन्दा

धीरे धीरे आओ

ऐसे भी कुछ घर आँगन हैं

बसते जहाँ अँधेरे

भूख वहाँ करताल बजाये

संध्या और सबेरे

उस दर भी मुस्काओ चन्दा

धीरे…

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Posted on June 8, 2018 at 6:30pm — 18 Comments

ग़ज़ल...आँख से लाली गई ना पांव से छाले गये-बृजेश कुमार 'ब्रज'

2122 2122 2122 212

दर्द दिल के आशियाँ में इस क़दर पाले गये

आँख से लाली गई ना पांव से छाले गये

रोटियों से भूख की इतनी अदावत बढ़ गई

पेट में सूखे निवाले ठूंस के डाले गये

इस क़दर उलझे हुये हैं आलम-ए-तन्हाई में

मकड़ियां यादों की चल दी भाव के जाले गये

मुफ़लिसी की आँधियाँ थीं याद के थे खंडहर

नीव भी कमजोर थी सो टूट सब आले गये

ख़्वाब की आँखों से 'ब्रज' घटती नहीं हैं दूरियां

बात दीगर है सभी पलकों तले पाले गये…

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Posted on April 30, 2018 at 4:00pm — 10 Comments

ग़ज़ल...परेशां रहा हूँ मैं अहल-ए-सितम से-बृजेश कुमार 'ब्रज'

122 122 122 122

गम-ए-दिल उठाऊँ,अज़ीमत नहीं है

मगर बच निकलने की सूरत नहीं है

सुनो बख़्श दो मुझको वादों वफ़ा से

यहाँ अब किसी की जरुरत नहीं है

परेशां रहा हूँ मैं अहल-ए-सितम से

तुम्हारी भी क़ुर्बत की नीयत नहीं है

ओ महताब तू है तो ग़ज़लें हैं रौशन

वगरना सुख़नवर की अज़्मत नहीं है

सरेआम  'ब्रज' की ग़ज़ल गुनगुनाना

ये है और क्या गर मुहब्बत नहीं है

अज़ीमत-इरादा

अहल-ए-सितम-तानाशाह…

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Posted on April 8, 2018 at 1:30pm — 20 Comments

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At 6:59pm on October 24, 2017, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

स्वागत है आदरणीय ,  आपको मित्र के रूप में पाना मेरा सौभाग्य है .

At 11:43pm on November 17, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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