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Ravi Shukla
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Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-86
"आदरणीय कँवर करतार जी अच्छी गजल कही आपने मुबारकबाद हाज़िर है। मकते में आपके तखल्लुस के सही हिज्जे जानने के बाद ही बह्र के बारे में कुछ कहा जा सकता है । अगर कँवर है तो बह्र में नहीं है मिसरा और कंवर लिखने से वज़्न बदल जाता है ।"
Aug 26
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-86
"आदरणीया सुनंदा जी बहुत बढ़िया ग़ज़ल कही आपने बाद वाले अशआर अपेक्षाकृत बेहतर लगे हमे जैसा कि आदरणीय मोहम्मद आरिफ साहब ने कहा सरल और सरस भाषा मे आपने बात कही , संप्रेषित हुई । बहुत बहुत मुबारक इस ग़ज़ल के लिए ।"
Aug 26
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-86
"आदरणीया सुनंदा जी ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद"
Aug 26
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-86
"हा हा हा बहुत खूब आदरणीय नीलेश जी आपकी गुदगुदाती टिप्पणी से बहुत खुशी हुई । बहुत बहुत शुक्रिया ग़ज़ल की सराहना के लिए"
Aug 26
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-86
"आदरणीय तस्दीक साहब आप मुत्मइन हुए कोशिश कामयाब हुई । शुक्रिया आदरणीय"
Aug 26
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-86
"आदरणीय सुरेंद्र जी ग़ज़ल की सराहना और हमारी पसंद के शेर को इंगित करने के लिए हार्दिक आभार"
Aug 26
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-86
"आदतनीय महेंद्र जी आपने ग़ज़ल के प्रयास को मान दिया हार्दिक धन्यवाद स्वीकार करें ।"
Aug 26
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-86
"आदरणीय समर साहब आदाब आपसे गजल पर सराहना पाकर लिखना सार्थक हुआ । आखरी शेर आपके लिए ही है ।सादर"
Aug 26
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-86
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय आरिफ साहब"
Aug 26
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-86
"आदरणीय मनन जी आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया का बहुत बहुत आभार । सादर"
Aug 26
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-86
"आदरणीय सलीम रजा जी उम्दा ग़ज़ल कही आपने शेर दर शेर मुबारकबाद कुबूल करें"
Aug 25
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-86
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय सलीम जी"
Aug 25
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-86
"आदरणीय राज नवादवी जी गाल में शिरकत और हौसलाअफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया ।"
Aug 25
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-86
"आदरणीया कल्पना जी ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका बहुत बहुत आभार । सादर"
Aug 25
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-86
"बहुत बहुत आभार दीदी हमारे कहे को मां देने के लिए । मेजबान की व्यस्तताएं समझ सकते है हम। आपके ओ बी ओ के प्रति समर्पण और श्रम साध्य व्यवस्थाओं के लिए किए जा रहे प्रयासों के लिए सादर प्रणाम ।"
Aug 25
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-86
"ओह क्षमा आदरणीय मनन जी । हमारा ध्यान शीरानी वाले शेर पर ही था। आपसे सहमत हैं । हमें सार्वजनिक मंच पर राजनीतिक नामो और विचारधारा के ऐसे प्रयोग से बचना चाहिए।"
Aug 25

Profile Information

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Male
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Bikaner
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Bikaner
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cool

Ravi Shukla's Blog

गीत : एक भारत श्रेष्ठ भारत

एक भारत श्रेष्ठ भारत आइये मिलकर बनाएं

देश का  सम्मान गौरव लक्ष्य हासिल कर बढ़ाएं

 

शांति के हम पथ प्रदर्शक ध्वज अहिंसा ले चलेंगे

विश्‍व गुरु बन कर पुन: संस्थापना सच की करेंगे

दें नहीं उपदेश अपने आचरण से  कर दिखाएं

 

धर्म पूजा, जाति भाषा, वेश भूषा, बोलियाँ सब

एकता के सूत्र में बंध कर चली है टोलियाँ सब

संगठन में शक्ति है, ऐसी लिखें फिर से कथाएं

 

रेल का हमको दिखाई दे रहा है पथ समांतर

मूल में इसके छिपा है साथ…

Continue

Posted on July 25, 2017 at 11:00am — 9 Comments

तरही ग़ज़ल

221 2121 1221 212



आए वो बज़्म ए शौक में आ कर चले गए,

फ़ित्ना सा एक दिल में उठा कर चले गए।



महफ़िल में आये जलवः दिखा कर चले गए,

जादू सा एक पल में जगा कर चले गए।



आने का और जाने का होता नहीं यकीन,

कुछ लोग इस तरह से भी आकर चले गए।



आँचल सरक के दोश से पहलू में क्या गिरा,

बैठे भी वो नहीं थे लजा कर चले गए।



पुरसान-ए-हाल के लिये यूँ आये मेरे पास

गोया कि एक रस्म निभा कर चले गए



आये वो दर्द बाँटने लेकिन… Continue

Posted on July 18, 2017 at 1:53pm — 18 Comments

तरही गजल : फूल जंगल में खिले किन के लिये

2122 2122 212

कार्ड काफी था न लॉगिन के लिए

वो हमे भी ले गए पिन के लिए



चाँद पर जाकर शहद वो खा रहे

आप अब भी रो रहे जिन के लिए



शेर को आता है बस करना शिकार

फूल जंगल में खिले किन के लिए



गुठलियों के दाम भी वो ले गया

उसने शीरीं आम जब गिन के लिये



आ गई अब ब्रेड में बीमारियाँ

जी रहे थे क्या इसी दिन के लिए



आये थे जापान से कल लौट कर

फिर उड़े वो रूस बर्लिन के लिए



पास पप्पू एक दिन हो…

Continue

Posted on May 9, 2017 at 11:46am — 27 Comments

तरही गजल : दिन सुहाने हो गये राते सुहीनी हा गईं

2122   2122   2122   212

दिन सुहाने हो गए राते सुहानी हो गईं,

उनके आते ही बहारें जाफ़रानी हो गईं।



रंग और खुशबू की बातें अब कहानी हो गईं,

मुश्किलें लगता है जैसे जाविदानी हो गईं।



आसमाँ ने जब उफ़क पर चूम धरती को लिया,

कमसिनी को छोड़कर ऋतुएं सुहानी हो गईं।



बेकरारी आज जितनी है कभी पहले न थी,

आदतें भी सब्र की जैसे कहानी हो गईं।



मिहनतों को जब मिला तेरा सहारा ए ख़ुदा,

मुश्किलें भी मेरी घट कर दरमियानी हो गईं।



रेत का इक सैल…

Continue

Posted on March 31, 2017 at 11:06am — 17 Comments

Comment Wall (9 comments)

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At 3:39pm on April 5, 2017, Gurpreet Singh said…

आदरणीय रवि शुक्ला जी आपसे बहुत अच्छी चैटिंग हो रही थी... लेकिन ऐन वक़्त पर मेरे नेट ने धोखा दे दिया ( ये अक्सर मेरे साथ ऐसा ही करता है ) और आप से  बात चीत बीच में ही कट गई ,,, खैर फिर मौका मिला तो बात आगे बढ़ांएंगे,,, संपर्क करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद 

At 11:45pm on July 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय रवि शुक्ल जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी  ग़ज़ल - व्यापार होना चाहिए को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 8:23pm on December 17, 2015, Nirdosh Dixit said…
प्रणाम स्वीकारें आदरणीय शुक्ल जी, सादर आभार आपका।
At 11:19pm on November 7, 2015, जयनित कुमार मेहता said…
आपका हार्दिक आभार आदरणीय रवि जी..
At 7:31pm on November 4, 2015,
सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh
said…

क्षमा कीजियेगा आ० रवि शुक्ल जी आज ही आपका कमेंट देखा...

करवाचौथ पर लिखा गया मेरा गीत मात्रिक गीत नहीं है... इसे फायलुन X 4 की आवृति पर  लिखा गया है..

मात्रिक गीतों में मात्रा को गिराकर पढने का कोई विधान नहीं होता .. 

मात्रिक गीत (गीतिका छंद पर आधारित) के  कुछ  उदाहरण देखिये 

http://www.openbooksonline.com/profiles/blogs/5170231:BlogPost:557225

http://www.openbooksonline.com/profiles/blogs/5170231:BlogPost:518431

मंच पर गीत नवगीत पर एक आलेख देखिये 

http://www.openbooksonline.com/group/chhand/forum/topics/5170231:Topic:358338?commentId=5170231%3AComment%3A359492&xg_source=activity&groupId=5170231%3AGroup%3A156482

At 9:36pm on September 16, 2015, shree suneel said…
आदरणीय रवि शुक्ला जी, हार्दिक बधाई आपको 'महीने का सक्रिय सदस्य' चुने जाने पर, मेरी ओर से. सादर.
At 2:01pm on September 16, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

रवि शुक्ला जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 4:59pm on July 17, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपको दोहा गीत पसंद आया, जानकार मन गद्गद् हो गया. ओबीओ का यह आयोजन "चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" छंदों को ही समर्पित है. यह एक कार्यशाला है जहाँ सभी आपस में एक दुसरे से सीखते है. आप आयोजन में सम्मिलित होंगे तो आपको कुछ नया सीखने मिलेगा और आपके अनुभव का लाभ मंच के अन्य सदस्यों को होगा. आप इस आयोजन में सम्मिलित होंगे तो बहुत ख़ुशी होगी. लिंक साझा कर रहा हूँ - ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव"

At 1:36pm on July 15, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

स्वागत अभिनन्दन 

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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