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Amit Tripathi Azaad
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Sep 15, 2016
Amit Tripathi Azaad commented on Sulabh Agnihotri's blog post राम-रावण कथा (पूर्व-पीठिका) 38
"शानदार लेख अग्निहोत्री जी बधाई स्वीकार करें "
Jul 30, 2016
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"आके सजन लग जा गले सावन जले भादो जले अंबर की छाया तले दो दिल मिले संग संग चलें आके सजन ..... किस बात से मजबूर है किस बात से है तू ख़फ़ा कियूँ ख़्वाब में आता है तू कियूँ बन गया है बेवफ़ा कियूँ दूर तक थे हम चले सावन जले भादो जले ...२ तू तो मेरा हमराज़…"
Jul 30, 2016
Amit Tripathi Azaad commented on Admin's group हिंदी की कक्षा
"हिंदी सीखने का इससे सुन्दर स्थान दूसरा नहीं है ,आभार आचार्य संजीव जी का |"
May 11, 2016
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Amit Tripathi Azaad commented on Admin's group हिंदी की कक्षा
"आदरणीय संजीव सर कहानी और कविता की बारीकियों का ज्ञान देने का आशीर्वाद प्रदान करें "
May 11, 2016
Amit Tripathi Azaad commented on Amit Tripathi Azaad's blog post मेरे महबूब
"आदरणीय गिरिराज जी आपके द्वरा दिया गया सुझाव का सम्मान करते हुवे ये बता दूँ कि मै अभी सीख  ही रहा हूँ पर आपकी उचित सलाह को नमन करता हूँ "
May 2, 2016
Amit Tripathi Azaad commented on Amit Tripathi Azaad's blog post मेरे महबूब
"आदरणीया राजेश कुमारी जी आपके द्वारा दी गई सलाह को सर आँखों पर रखते हुवे आभार प्रगट करता हूँ "
May 2, 2016

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on Amit Tripathi Azaad's blog post मेरे महबूब
"आ० अमित जी ,प्रयास रत रहिये बेहतर कर सकेंगे विद्वद जनों की राय काबिले गौर है "
Apr 25, 2016

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on Amit Tripathi Azaad's blog post मेरे महबूब
"आदरणीय अमित भाई , गज़ल का प्रयास अच्छा हुआ है , प्रयास जारी रखियेगा ! गज़ल की कक्षा के पाठ जरूर पढियेगा । आपको हार्दिक शुभकामनाये और बधाइयाँ ।"
Apr 25, 2016
Ravi Shukla commented on Amit Tripathi Azaad's blog post मेरे महबूब
"आदरणीय अमित जी आज़ाद अच्छा प्रयास हुआ है । आदरणीय समर साहब की सलाह पर ध्यान दीजियेगा । सादर ।"
Apr 24, 2016
Samar kabeer commented on Amit Tripathi Azaad's blog post मेरे महबूब
"जनाब आज़ाद साहिब आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है लेकिन अभी अभ्यास करना होगा,ओबीओ पर ग़ज़ल की कक्षा का लाभ लें । मतले के ऊला मिसरे में क़ाफ़िया नदारद है, तीसरे शैर में सानी मिसरा ऊला की जगह है,आख़री शैर में तुम और तेरे का फ़र्क़ है, प्रयासरत रहें ।"
Apr 24, 2016
Amit Tripathi Azaad posted a blog post

मेरे महबूब

मेरे महबूब सपनों से हक़ीक़त बन तू आ जाए मेरा उजड़ा हुवॉ जीवन मेरी जाँ फिर सवर जाएमुझे अहसास अब होने लगा है इश्क़ में तेरे कहीं ना ज़िन्दगी तेरी ही गलियों में गुज़र जाएजिसे हो जुस्तजू तेरी वो बेचारा किधर जाएजिए वो ज़िंदगी अपनी या आहें भर के मर जाएमैं अक्सर आह भरता हूँ तेरे दीदार के ख़ातिर झलक तेरी मिले गर तो मेरा जीवन सँवर जाएतेरी गलियों की मिट्टी भी मुझे जन्नत से प्यारी है चले गर साथ हम दोनों मुहब्बत भी निखर जाएनिगाहें मुन्तज़िर मेरी है मुद्दत से तेरीे ख़ातिर सहारा जाविदाँ मुझको मिले जीवन सुधर…See More
Apr 22, 2016
Sushil Sarna commented on Amit Tripathi Azaad's blog post मेरे सपनों का गाँव
"आदरणीय गाँवों के बदलते परिवेश को अपने शब्दों में आपने खूब उकेरा है , हार्दिक बधाई। वैसे क्षमा सहित मैं आदरणीय भ्रमर जी टिप्पणी से सहमत हूँ। भ्रमर जी की टिप्पणी के प्रत्युत्तर में भी अशुद्धि प्रतीत हो रही है यथा ''रचना में हुईं (हुई)…"
Apr 19, 2016

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur
Native Place
Allahabad
Profession
Writing

samast hindi dhurandhar ,sammanniy,mahamahim mitro ko mera sadar abhinandan 

Comment Wall (2 comments)

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At 4:52pm on February 1, 2016, Amit Tripathi Azaad said…
श्रेष्ठ अग्रज रवि जी को मेरा नमन स्वीकार हो
At 1:36pm on February 1, 2016, Ravi Shukla said…

आदरणीय अमित जी आपका स्‍वागत है

Amit Tripathi Azaad's Blog

मेरे महबूब

मेरे महबूब सपनों से हक़ीक़त बन तू आ जाए

मेरा उजड़ा हुवॉ जीवन मेरी जाँ फिर सवर जाए



मुझे अहसास अब होने लगा है इश्क़ में तेरे

कहीं ना ज़िन्दगी तेरी ही गलियों में गुज़र जाए

जिसे हो जुस्तजू तेरी वो बेचारा किधर जाए

जिए वो ज़िंदगी अपनी या आहें भर के मर जाए

मैं अक्सर आह भरता हूँ तेरे दीदार के ख़ातिर

झलक तेरी मिले गर तो मेरा जीवन सँवर जाए

तेरी गलियों की मिट्टी भी मुझे जन्नत से प्यारी है

चले गर साथ हम दोनों मुहब्बत भी निखर…

Continue

Posted on April 22, 2016 at 10:03am — 6 Comments

चेहरा तेरा चाँद का टुकड़ा

चेहरा तेरा चाँद का  टुकड़ा

भौहें तनी कमान हैं क्या

इन आँखों में मैं मर जाऊँ

होंठों का तिल शान है क्या..2

तेरे तन की ख़ुशबू लेकर

फूल चमन में खिलते हैं

शायर तेरे हुशनो जवाँ की

दिल में किताबें लिखते हैं

उठी नज़र फिर झुक जाए तो

ढल जाती ये शाम है क्या

इन आँखों पे ...

तेरे लबों की बात करूँ तो

खिले कमल शर्माते हैं

तेरे क़दम जो पड़े जमी पे

शहंशाह झुक जाते हैं

तेरा खनकता स्वर गूंजा या

वीना की कोई तार है…

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Posted on April 19, 2016 at 6:14pm

मेरे सपनों का गाँव

मेरे सपनों में अक्सर ही

आकर मुझे जागता है

गाँव मेरा मुझको फिर यारों

वापस मुझे बुलाता है

वो खलिहानों की पगडंडी

सड़क बन गई काली है

दीपक भी अब नहीं रह गए

लाइट चमक निराली है

जिनके ख़ातिर दूर गया तू

वो सब मुझे दिखाता है

गाँव मेरा ....

मिट्टी के घर नहीं रहे अब

ईंटों के माकान बने

निर्मल निश्चल दिल वाले

अब पत्थर के इंसान बने

दिन प्रति दिन उन पत्थर में

इंसान नज़र ना आता है

गाँव...

हरे भरे तालाब सूखकर खेलों के…

Continue

Posted on April 19, 2016 at 1:09pm — 3 Comments

"माँ शारदे वंदना "

भवदिव्य भाव मनोरमां,झन झनक झन झनकार दे

जय जयति जय जय ,जयति जय जय जयति जय माँ शारदे

कमलासिनी वरदायिनी माता हमें वरदान दे

जय जयति ........

चरणों में तेरे हैं समर्पित ज्ञान की ले याचना

वेदों का कर दो दान माते कर रहे हम प्रार्थना

माँ हम फसें मझधार में भवतारिणी तू तार दे

जय जयति.......

माँ छेड़ दो वो राग जिससे स्वरमयी धारा बहे

लोकों में तीनो मातु तेरी लोग सब जै जै कहें

स्वरदायनी माँ स्वरस्वती स्वर का हमें अधिकार दे

जय…

Continue

Posted on February 12, 2016 at 10:00am — 1 Comment

 
 
 

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