For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")


सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh
  • Female
  • Haldwani
  • India
Online Now
Share

Dr.Prachi Singh's Discussions

ओबीओ लाइव महोत्सव अंक 60 की सभी रचनाओं का संकलन
14 Replies

१. सौरभ पाण्डेय जीपाँच दोहे  ====== देख शहर की रौनकें भौंचक हुआ किसान  भूखी बस्ती रो रही कहाँ गया सब धानअबकी फिर माँ के लिए ’फले पूत’ वरदान  बिटिया बैठी ताड़ती बिन जनमे का मानबादल आये झूम कर लेकिन…Continue

Started this discussion. Last reply by pratibha pande Oct 21, 2015.

ओबीओ लाइव महोत्सव अंक 59 की समस्त रचनाओं का संकलन
26 Replies

1.आ० राजेश कुमारी जीग़ज़लवक़्त बड़ा बलवान सुना है भैया जीछूट गया जो साथ डुबोता नैया जी कर लो पूरे काम न छोड़ो कल पर तुमकरवायेगा वरना ताता थैया जी मँहगाई में सौ-सौ नखरेबाज हुआकितना हाय कमीना आज रुपैया…Continue

Started this discussion. Last reply by Dr.Prachi Singh Oct 8, 2015.

ओबीओ लाइव महोत्सव अंक-58 की समस्त रचनाएं एक साथ
39 Replies

 आदरणीय सुधीजनो, दिनांक -8 अगस्त’ 2015 को सम्पन्न हुए  “ओबीओ लाइव महोत्सव अंक-58” की समस्त स्वीकृत रचनाएँ संकलित कर ली गयी हैं. सद्यः समाप्त हुए इस आयोजन हेतु आमंत्रित रचनाओं के लिए शीर्षक “फंदा”…Continue

Started this discussion. Last reply by Janki wahie Aug 30, 2015.

ओबीओ लाइव महोत्सव अंक-56 की समस्त स्वीकृत रचनाओं का संकलन
25 Replies

आदरणीय सुधीजनो, दिनांक -14जून’ 2015 को सम्पन्न हुए  “ओबीओ लाइव महोत्सव अंक-56” की समस्त स्वीकृत रचनाएँ संकलित कर ली गयी हैं. सद्यः समाप्त हुए इस आयोजन हेतु आमंत्रित रचनाओं के लिए शीर्षक “गर्मी की…Continue

Started this discussion. Last reply by मिथिलेश वामनकर Jun 24, 2015.

Dr.Prachi Singh's Friends

  • babitagupta
  • बृजमोहन स्वामी 'बैरागी'
  • KALPANA BHATT ('रौनक़')
  • Arpana Sharma
  • Amit  Tripathi Azaad
  • Rahila
  • सतविन्द्र कुमार राणा
  • Ravi Shukla
  • Dr. (Mrs) Niraj Sharma
  • Ashish Painuly
  • MAROOF KHAN
  • Neeles Sharma
  • संदेश नायक 'स्वर्ण'
  • Manan Kumar singh
  • seemahari sharma
 

Dr. Prachi.

Dr.Prachi Singh's Blog

क्या यही तेरा सृजन था

प्रश्न मैं तुझ पर उठाऊँ, हूँ नहीं इतना पतित भी,

किन्तु जो प्रत्यक्ष है उस पर अचंभित हूँ, अकिंचन!

पूछ बैठा हूँ स्वयं के, बोध की अल्पज्ञता में,

बोल दे हे नाथ मेरे, क्या यही तेरा सृजन था?

जब दिखी मुस्कान तब-तब, आँसुओं…

Continue

Posted on November 27, 2019 at 5:00pm — 2 Comments

प्रेम: विविध आयाम

प्रेम : विविध आयाम

प्रेम

ठहरा था

बन के ओस

तेरी पलकों पर...

उफ़ तेरी ज़िद

कि बन के झील

वो…

Continue

Posted on November 13, 2019 at 2:00pm — 4 Comments

तुम आओ तो...

मैंने केसर-केसर मन से रची रंगोली,

मैंने रेशम-रेशम बंधनवार सजाए,

कुछ महके कुछ मीठे से पकवान बना लूँ-

तुम आओ तो उत्सव जैसा तुम्हे मना लूँ...

 

कंगूरों तक रुकी धूप से कर…

Continue

Posted on October 5, 2019 at 1:10am — 5 Comments

ऐसा हो तो फिर क्या होगा ....डॉ प्राची सिंह

मेरे मन की शांत नदी में अविरल बहती भाव लहर हो

मेरे गीतों से निस्सृत अक्षर-अक्षर का गुंजित स्वर हो

मैं तुलसी तुम मेरा आँगन, मैं श्वासों का अर्पित वंदन,

साथी-सखा-स्वप्न सब तुम ही, सच कह दूँ- मेरे ईश्वर हो !

 

आतुर…

Continue

Posted on July 21, 2019 at 6:56pm — 3 Comments

..ऐसा हो तो फिर क्या होगा (गीत) ~ डॉ. प्राची

पूछ रहा हूँ मैं उन सच्ची ध्वनियों से जो मौन ओढ़ कर

मुझमें गूँजा करतीं हैं जो संदल-संदल अर्थ छोड़ कर...

...साँझ ढले और मैं ना आऊँ, ऐसा हो तो फिर क्या होगा ?

...धुँआ-धुँआ बन कर खो जाऊँ, ऐसा हो तो फिर क्या होगा…

Continue

Posted on July 6, 2019 at 2:26am — 5 Comments

आखिर क्यों ?

आख़िर क्यों पूछे तू ऐसे प्रश्न
नियति, जिनके उत्तर
ख़ुद तुझको ही स्वीकार नहीं…
Continue

Posted on May 9, 2019 at 6:00pm — 1 Comment

अभी अभी बस

अभी-अभी 

उतरी आँगन में 

धूप गुनगुनी, 

अभी-अभी 

खोले हैं 

सपनों की तितली ने पर,

अभी-अभी 

खुद सोनपरी नें 

रची रंगोली,

अभी-अभी 

बस…
Continue

Posted on May 2, 2019 at 10:00am — 6 Comments

जश्न सा तुझको मनाऊँ (एक गीत )

गुनगुनी सी आहटों पर

खोल कर मन के झरोखे

रेशमी कुछ सिलवटों पर सो चुके सपने जगाऊँ..

इक सुबह ऐसी खिले जब जश्न सा तुझको मनाऊँ..

साँझ की दीवानगी से कुछ महकते…

Continue

Posted on December 25, 2018 at 11:12pm — 7 Comments

नया सवेरा आएगा

.........



सात दशक से आज़ादी की केसरिया चादर को ओढ़े

हम बैठे हैं मौन

किंतु अगर अब भी ना बोले तो असली मुद्दों की बातों

पर बोलेगा कौन



........

मद तंद्रा में जो बैठे हैं उनको हमें जगाना होगा....

जलते हुए… Continue

Posted on August 24, 2018 at 1:05am — 6 Comments

कब तक झूलोगी? (नवगीत)//प्राची

झूठ-सत्य के दो पलड़ों पर

टँगी हुई उम्मीदों बोलो-

कब तक झूलोगी ?

अनुत्तरित प्रश्नों के उत्तर

पाने की आवारा ज़िद में-

क्या-क्या भूलोगी…

Continue

Posted on December 9, 2017 at 10:36am — 3 Comments

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-110
"बहुत खूबसूरत तुकांत कविता आ० छोटेलाल सिंह जी बहुत बहुत बधाई "
25 minutes ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-110
"रहे सर्वदा पूज्य जो , मातृ शक्ति के रूप जानें क्यों उस राह पर, अब हैं अंधे कूप अब हैं अंधे कूप, कहाँ अब जाए नारी अष्ट दिशा से हाय! बरसती विपदा भारी काश सहेजे राष्ट्र स्वयं की पुण्य सम्पदा जी पाए आश्वस्त, सुरक्षित रहे…"
28 minutes ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-110
"जो कुल नारी का करे, देवी सा सत्कारउस कुल लेते जन्म हैं, अंशों में अवतार।१। .............नारी का सम्मान हो, यह उसका अधिकार .............वो संतति की वाहिनी, वो घर का आधार  शिव नारी के मान को, देते आधी देहतभी अधूरा ही रहे, नारी बिन हर…"
58 minutes ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-110
"कोमल है तू कभी कुसुम सी ,तीखी कभी कटारी है।रूप ईश का लेकर नारी ,धरती पर अवतारी है। .............सौम्य रूप है ईश्वर जैसा, ममता की प्रतिमा नारी .............रौद्र रूप भी धर लेती है, विपदा जो आए भारी कभी तोड़ती पत्थर मग में ,गर्मी में भूखी…"
3 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh replied to Saurabh Pandey's discussion मात्रिक पदों में शब्द-संयोजन in the group भारतीय छंद विधान
"बहुत बारीकी सी समझाया गया कल गणना और निर्वहन का मन्त्र  सादर "
Dec 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh replied to Saurabh Pandey's discussion पद्य-रचनाओं में पंक्चुएशन के चिह्न // --सौरभ in the group भारतीय छंद विधान
"बहुत आवश्यक जानकारी देता विस्तृत आलेख साधुवाद आदरणीय "
Dec 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh replied to Saurabh Pandey's discussion हरिगीतिका छन्द के मूलभूत सिद्धांत // --सौरभ in the group भारतीय छंद विधान
"हरिगीतिका छंद (२२१२,२२१२,२२१२,२२१२ )पर हम सबने यहीं मंच पर बहुत गंभीर रचनाएँ की हैं.. और आगे भी करते रहेंगे आदरणीय सौरभ जी,  २१२२, २१२२, २१२२, २१२२ ये वार्णिक क्रम कौन से छंद का है, क्या इस बारे में आप जानकारी दे सकते हैं ?? सादर "
Dec 6
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Dr.Prachi Singh's blog post क्या यही तेरा सृजन था
"आ. प्राची बहन, सादर अभिवादन । उत्तम रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Nov 29
प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on Dr.Prachi Singh's blog post क्या यही तेरा सृजन था
"बेहतरीन रचना हुई बधाई"
Nov 29

सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh posted a blog post

क्या यही तेरा सृजन था

प्रश्न मैं तुझ पर उठाऊँ, हूँ नहीं इतना पतित भी, किन्तु जो प्रत्यक्ष है उस पर अचंभित हूँ, अकिंचन! पूछ बैठा हूँ स्वयं के, बोध की अल्पज्ञता में, बोल दे हे नाथ मेरे, क्या यही तेरा सृजन था?जब दिखी मुस्कान तब-तब, आँसुओं का आचमन था।आस के मोती हृदय की, सीप में किसने भरे थे? कौन भावों की लहर में, घोल रंगों को गया था ? धड़कनों की थाप पर, किसने किया मन एकतारा? प्रीत की पहली छुअन को, पुण्य सम किसने किया था?किन्तु क्षण के बाद ही, जब-तब समय का फेर देखा, स्वप्न से रीते हृदय के, नाम विष का देख लेखा, सोचता हूँ पूर्णता के हे शिखर! तूने रचा तो, इस धरा पर क्यों निरंतर, बस अधूरा हर मिलन था? बोल दे हे नाथ मेरे, क्या यही तेरा सृजन था? चाहतों की सूचियाँ ले, थाल में दीपक सजाए, कब झुकाए सर, हथेली खोल, कोई याचना की? सृष्टि के हर एक कण में, देख कर प्रतिबिंब तेरा, प्रेमवत अविराम तेरी, सिर्फ तेरी वंदना की।जब कहीं ठहरा हृदय, तब रूप तेरा ही दिखा था, पर सृजन के पृष्ठ पर, निकृष्टतम किसने लिखा था? झूठ विजयी देख कर मैं, सर्वव्यापी बूझता हूँ, तू अगर है सत्य तब फिर, सत्य का ही क्यों दमन था? बोल दे हे नाथ मेरे, क्या यही…See More
Nov 27
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Dr.Prachi Singh's blog post प्रेम: विविध आयाम
"आ. प्राची बहन, बेहतरीन रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Nov 20
vijay nikore commented on Dr.Prachi Singh's blog post प्रेम: विविध आयाम
"  इस सुन्दर भावपूर्ण रचना के लिए बधाई, प्राची जी।"
Nov 19

Profile Information

Gender
Female
City State
Haldwani / Uttarakhand
Native Place
Haldwani
Profession
Dean Academics (MIET-KUMAON)
About me
Dr. Prachi is working as a Dean Academics, in a Professional Engineering College. She is an adviser to Vivekanand Education Society.She also organizes interactive discussion and lectures with teachers & students on regular basis. Dr.Prachi has a Masters’s degree in Environment Science from Gurukul Kangri vishwavidyalaya (M.Sc. Gold Medalist) and Ph.D. in Bioscience from Banasthali Vidyapith. She has also qualified UGC-NET examination. She is recipient of Young Scientist Award by Department of Science & Technology (DST), Government of India in " a contact programme for young scientists organized by TBGRI, Thiruvananthpuram, Kerala in 2002. She has also designed a unique Personality Development Course for college students. She is a god gifted artist & poetess, and remains actively involved in sketching portraits of National Leaders and famous personalities as well as writing poems on many issues close to her heart.

Dr.Prachi Singh's Videos

  • Add Videos
  • View All

Dr.Prachi Singh's Photos

  • Add Photos
  • View All

Comment Wall (7 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 3:50pm on November 2, 2015, Ravi Shukla said…

आदरणीया प्राची जी नमस्‍कार

करवा चौथ का आपका गीत पढ़ कर कुछ मार्ग दर्शन की आकांक्षा है क्‍योंकि अपने पुराने लिखे गीतो पर फिर से काम कर रहे है ।

आपने अपने इस गीत में वर्ण को आधार बनाया है या मात्रा को

मात्रा के अनुसार है तो क्‍या गीतो में मात्रा गिरा कर पढ़ा जा सकता है जैसे उर्दू बह्र में छूट है

मात्रा गणना में कितनी छूट स्‍वीकार्य है

मैं पिया के हृदय में सदा ही रहूँ

2 1 2   2 1 11  2 1 1  2 1 2   ( 21 2 की चार आवृत्ति ) 20 मात्रा

वो ही सागर मेरे, मैं नदी सी बहूँ

2 2 2  1 1  2 2   2 1 2  2 1 2  ( मात्रा गिरा के पढ़ने से लय बन रही है ) 22 मात्रा

आशा है हम अपनी बात रख पाये है

आपका गीत बहुत ही सुन्‍दर है और प्रासंगिक होने से और भी अच्‍छा लगा है बधाई

यदि गीतो के बारे में कुछ जानकारी मंच में हो तो उसे बताये पढ़ने के बाद फिर संपर्क करेंगे छंद विधान मे छंद की जानकारी उपलब्‍ध है किन्‍तु उससे हमारी शंका का समाधान नहीं हो पा रहा ।

At 3:14pm on October 15, 2015, Sushil Sarna said…

आदरणीया डॉ प्राची सिंह जी आपको जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामना   .... प्रभु आपके जीवन के हर पल को खुशियों से भरपूर करे। 

At 12:14pm on October 15, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीया डॉ प्राची सिंह जी, आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 7:46am on October 15, 2014, जितेन्द्र पस्टारिया said…

आदरणीया डा.प्राची जी, आपको जन्मदिन की बहुत-बहुत शुभकामनायें.

सादर!

At 9:01pm on June 26, 2014, Santlal Karun said…

आदरणीया डॉ. प्राची जी,

'साथ जीने की सज़ा' पर आप की टिप्पणी से जिज्ञासा-वश मैं आप के ब्लॉग पर आया | अधिक तो न पढ़ सका, किन्तु 'सत्य पिरो लूँ' नवगीत के कथ्य तथा शिल्प दोनों के अनूठेपन में मन ऊभ-चूभ हो उठा | संवेदनाओं की वीणा-सी झंकृत इस सूक्ष्म भावों की हृदयस्पर्शी रचना के लिए हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ !

At 8:49pm on June 15, 2014, mrs manjari pandey said…
आदरणीया साधुवाद . वस्तुतः विषय ज्वलंत है इसलिए तुरंत लिख कर मैंने बस आहुति में अपनी उपस्थिति दर्ज़ कराई है . मै इन दिनों आस्ट्रेलिया आई हूँ बेटी के पास। नाती दिन भर तो कुछ करने नहीं देता। फिर भी आपने मेरा मान बढ़ाया है
At 2:39pm on March 16, 2014, Sushil Sarna said…

मेरी ओर से होली के पावन पर्व पर सपरिवार आप को होली की शुभकामनाएं। उस परम पिता परमेश्वर से प्रार्थना है कि वो सदा आपके आँगन में खुशियों के रंग बिखेरता रहे।

सुशील सरना

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-110
"बहुत खूबसूरत तुकांत कविता आ० छोटेलाल सिंह जी बहुत बहुत बधाई "
25 minutes ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-110
"रहे सर्वदा पूज्य जो , मातृ शक्ति के रूप जानें क्यों उस राह पर, अब हैं अंधे कूप अब हैं…"
28 minutes ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-110
"जो कुल नारी का करे, देवी सा सत्कारउस कुल लेते जन्म हैं, अंशों में अवतार।१। .............नारी का…"
58 minutes ago
आशीष यादव commented on Manan Kumar singh's blog post एनकाउंटर(लघुकथा)
"जी बिलकुल, "यही सच है"। अच्छी लघुकथा।"
1 hour ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post विशाल सागर ......
"अच्छी कविता पर बधाई स्वीकार कीजिए।"
1 hour ago
आशीष यादव commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : इक दिन मैं अपने आप से इतना ख़फ़ा रहा
"बेहतरीन अशआर। सुंदर गजल।"
1 hour ago
आशीष यादव commented on विमल शर्मा 'विमल''s blog post महकता यौवन/ विमल शर्मा 'विमल'
"बहुत सुंदर, बहुत सुंदर।"
1 hour ago
आशीष यादव commented on Manan Kumar singh's blog post नागरिक(लघुकथा)
"अच्छी लघुकथा।"
1 hour ago
आशीष यादव commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(वोटर.....)
"बहुत सटीक सर।"
1 hour ago
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-110
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी उत्साह वर्धन के लिए दिल से आभार"
2 hours ago
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-110
"आदरणीय राणा जी सुंदर भावात्मक रचना के लिए बहुत बहुत बधाई"
2 hours ago
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-110
"आदरणीया डॉ प्राची सिंह जी बहुत बढ़िया लिखा कितनी भी प्रशंसा की जाय कम है, बहुत बहुत बधाई"
2 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service