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PHOOL SINGH
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PHOOL SINGH commented on PHOOL SINGH's blog post आखिरी ख़्वाहिश
"कबीर साहब आपका कोटि कोटि धन्यवाद"
Feb 11
Samar kabeer commented on PHOOL SINGH's blog post आखिरी ख़्वाहिश
"जनाब फूल सिंह जी आदाब, अच्छी रचना हुई,बधाई स्वीकार करें ।"
Feb 8
PHOOL SINGH posted a blog post

आखिरी ख़्वाहिश

देख लोगो को रोते हुएज़ोर से लाश एक हँस पड़ीजीते जी तो जीने दिया नागुस्से में वो बिफर पड़ी ||खरी-खोटी मुझे रोज सुनातेतनिक भी ना परवाह थीदिल पे मेरी क्या गुजरतीघुट-घुट के मैं रोती थी ||खुदा बक्शे अगर, जिंदगीऔकात दिखा दे अभी सभीघड़ियाल से आँसू जो बहातेअसलियत आ जाए सामने अभी ||भूल जायेंगें कुछ ही दिन मेंयाद ना आयें मेरी कभीअच्छी-बुरी मेरी बातें करसहानुभूति पाएंगें सभी ||छोड़ चली मैं अहम की दुनियांईश्वर के द्वार में मैं चलीखुदा के चरण में स्थान मिलेआखिरी ख़्वाहिश है ये मेरी ||“मौलिक व अप्रकाशित”See More
Feb 1
Samar kabeer commented on PHOOL SINGH's blog post आधुनिक नारी
"जनाब फूल सिंह जी आदाब,अच्छी रचना हुई,बधाई स्वीकार करें ।"
Jan 28
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on PHOOL SINGH's blog post आधुनिक नारी
"आ. भाई फूलसिंह जी, अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Jan 27
Samar kabeer commented on PHOOL SINGH's blog post एक अभागिन किन्नर
"जनाब फूल सिंह जी आदाब,किन्नर पर रचना का अच्छा प्रयास है,बधाई स्वीकार करें । शीर्षक में 'अभागिन' शब्द मेरे ख़याल से उचित नहीं,क्योंकि किन्नर न स्त्री है न पुरुष,इस पर विचार करें ।"
Jan 21
PHOOL SINGH commented on PHOOL SINGH's blog post “भ्रम जाल”
"आप सभी ने मेरी रचना के लिये समय निकाला उसके आप सबका शुक्रिया"
Jan 21
PHOOL SINGH commented on PHOOL SINGH's blog post दंगाइयो से मेरी विनती
"भाई लक्ष्मण कों हौंसलअफजाई के लिये धन्यवाद"
Jan 21
PHOOL SINGH commented on PHOOL SINGH's blog post अच्छा लगा
"आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद"
Jan 21
PHOOL SINGH commented on PHOOL SINGH's blog post एक अभागिन किन्नर
"भाई सुरेन्द्र आपका बहुत बहुत धन्यवाद आपके सुझाव के लिये आपका बहुत शुक्रिया"
Jan 21
PHOOL SINGH posted a blog post

आधुनिक नारी

संचालित कर दया करूणा, स्वार्थ पूर्ति का भाव नहींखुद को समर्पित तुझको कर दूँ,इच्छाऐं मेरी खास नहीं ॥ डोली सजा तेरे दर पर आई, उगने वाली कोइ घास नहींहाथ उठाने की गलती ना करना,नहीं सहुंगी वार कोई ॥ तेरे इशारों पर इत-उत डोलूँ, तूँ कोई सरकार नहींक्रोध करो मैं थर्र थर्र कांपू,डरने वाली मैं नार नहीं ॥ तुम जालाओं शमां की महफिल, होके नशे में धुत कहींढूँढ बहाने झूठ भी बोलोइतना तुम पर ऐतबार नहीं ॥ भरोसा करूँ मैं खुद से ज्यादा, धोखा ना देना मुझको कभीछोड़ ने तुझको देर करूँ नादिल्लगी मुझको पसंद नहीं ॥ पढ़ी…See More
Jan 21
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on PHOOL SINGH's blog post एक अभागिन किन्नर
"आद0 फूल सिंह जी सादर अभिवादन। किन्नर आधारित इस रचना के लिए बधाई। इसे आप किसी विधा पर लिखते तो लय बेहतरीन आता"
Jan 20
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on PHOOL SINGH's blog post अच्छा लगा
"आद0 फूल सिंह जी सादर अभिवादन, अच्छी रचना लिखी आपने,, बधाई स्वीकार कीजिये। सादर"
Jan 20
Samar kabeer commented on PHOOL SINGH's blog post अच्छा लगा
"जनाब फूल सिंह जी आदाब,अच्छी रचना है,बधाई स्वीकार करें । टंकण त्रुटियों की तरफ़ ध्यान दें ।"
Jan 19
Samar kabeer commented on PHOOL SINGH's blog post “भ्रम जाल”
"जनाब फूल सिंह जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें ।"
Jan 19
vijay nikore commented on PHOOL SINGH's blog post “भ्रम जाल”
"रचना अच्छी लगी। बधाई मित्र फूल सिंह जी।"
Jan 19

Profile Information

Gender
Male
City State
DELHI
Native Place
DELHI
Profession
KALSHANIA CONSULTANCY
About me
NOTHING MUCH

जीवन संगिनी

हार हार का टूट चुका जब

तुमसे ही आश बाँधी है

मैं नहीं तो तुम सही

समर्थ जीवन की ठानी है||

 

मजबूर नहीं मगरूर नहीं मैं 

मोह माया में चूर नहीं मैं

साथ तुम्हारा मिल जाए तो

लक्ष्य से भी दूर नहीं मैं ||

 

सुख दुःख की घटना तो

जीवन में घटती रहती है

छोटी छोटी नोक झोंक भी

हर रिश्ते में होती है 

छोड़ न देना साथ निभाना

तुमसे, प्रेम की डोर जो बाँधी है||

 

गलत किये थे कुछ निर्णय

ये बात भी स्वीकारी है

मैं  गलत और तुम सही

गलती मैंने मानी है

मझधार में फसीं जिंदगी की

नैया पार लगानी है||

 

जीवन संगिनी बनकर,

मेरी जिंदगी, सँवारी है

घर नहीं मेरे दिल में रहना

बस ख़्वाहिश ये हमारी है

मैं नहीं तो तुम सही

समर्थ जीवन की ठानी है||

 

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आखिरी ख़्वाहिश

देख लोगो को रोते हुए

ज़ोर से लाश एक हँस पड़ी

जीते जी तो जीने दिया ना

गुस्से में वो बिफर पड़ी ||

खरी-खोटी मुझे रोज सुनाते

तनिक भी ना परवाह थी

दिल पे मेरी क्या गुजरती

घुट-घुट के मैं रोती थी ||

खुदा बक्शे अगर, जिंदगी

औकात दिखा दे अभी सभी

घड़ियाल से आँसू जो बहाते

असलियत आ जाए सामने अभी ||

भूल जायेंगें कुछ ही दिन में

याद ना आयें मेरी कभी

अच्छी-बुरी मेरी बातें कर

सहानुभूति…

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Posted on January 31, 2020 at 5:00pm — 2 Comments

आधुनिक नारी

संचालित कर दया करूणा, स्वार्थ पूर्ति का भाव नहीं

खुद को समर्पित तुझको कर दूँ,

इच्छाऐं मेरी खास नहीं ॥

 

डोली सजा तेरे दर पर आई, उगने वाली कोइ घास नहीं

हाथ उठाने की गलती ना करना,

नहीं सहुंगी वार कोई ॥

 

तेरे इशारों पर इत-उत डोलूँ, तूँ कोई सरकार नहीं

क्रोध करो मैं थर्र थर्र कांपू,

डरने वाली मैं नार नहीं ॥

 

तुम जालाओं शमां की महफिल, होके नशे में धुत कहीं

ढूँढ बहाने झूठ भी बोलो

इतना तुम पर ऐतबार…

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Posted on January 21, 2020 at 12:00pm — 2 Comments

एक अभागिन किन्नर

ना मर्म का मेरे भान किसी को, लेकिन फिर भी जिंदा हूँ

ना औरत, ना पुरुष हूँ, कहने को मैं किन्नर हूँ|

 

सारा समाज धुत्कार मै खाती, जैसे समाज पे अभिशाप कोई

सोलह शृंगार कर हर दिन सजती, जैसे सुहागिन औरत हूँ |

 

मात-पिता भी कलंक समझते, बदनामी का उनकी कारण हूँ

दुख-दर्द भी ना कोई पूछता, जैसी उनकी ना मै कोई हूँ |

 

ना रोजी-रोटी का साधन कोई, मांग…

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Posted on January 15, 2020 at 11:56am — 3 Comments

अच्छा लगा

अच्छा लगा तेरा प्रेम से मिलना

कुछ अपनी कही, कुछ मेरे सुनना

स्वार्थ से भरी इस दुनियाँ में

सभी के हित की बातें करना ||

 

वक़्त के संग में तेरा बदलना

हसमुखता को धारण करना

उड़ान भर खुली हवा में

सुंदर, ख्वाबो की माला बनुना ||

 

 हौंसलों भर अपने उर में

भूल के बीती बात को  आगे बढ़ना

याद आ जाए कोई भुला-बिसरा

झट से उसका हाल जानना || 

 

काम, क्रोध और…

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Posted on January 14, 2020 at 5:22pm — 4 Comments

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"जनाब रवि भसीन 'शाहिद' जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें…"
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