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PHOOL SINGH
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on PHOOL SINGH's blog post चंद्रयान- 2 का सफर
"आ. भाई फूल सिंह जी, सुंदर रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
yesterday
PHOOL SINGH commented on PHOOL SINGH's blog post कर्ज़- एक मर्ज़
"विजय भाई मेरी रचना को पसंद करने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद "
Sep 12
PHOOL SINGH commented on PHOOL SINGH's blog post चंद्रयान- 2 का सफर
"कबीर साहब नमस्कार मेरा उत्साहवर्धन के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद "
Sep 12
vijay nikore commented on PHOOL SINGH's blog post कर्ज़- एक मर्ज़
"सुन्दर रचना के लिए बधाई, आदरणीय फूल सिंह जी"
Sep 12
Samar kabeer commented on PHOOL SINGH's blog post चंद्रयान- 2 का सफर
"जनाब फूल सिंह जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें ।"
Sep 10
PHOOL SINGH posted a blog post

चंद्रयान- 2 का सफर

संपर्क टूटा विक्रम से तोना समझ ये विफल रहाआर्बिटर अभी चक्कर लगा रहाधैर्य रख, थोड़ा इंतज़ार तो करचिंता नहीं बस चिंतन कर || मार्ग विक्रम भटक गयाभ्र्स्ट ही शायद कारण होखंड-खंड होकर बिखर भी गया तो  खोजने का प्रयास तो करचिंता नहीं बस चिंतन कर || वैज्ञानिकों का अपने हौंसला बढ़ासाहस के उनके तारीफ तो करचूक कहाँ हो गई प्रयास मेइस बात पर थोड़ा गौर तो करचिंता नहीं बस चिंतन कर || चमत्कार की भी आस बची तोउसकी थोड़ी प्रतीक्षा करमायूसी को दर-किनार करविक्रम से, संपर्क साधने का प्रयास तो करचिंता नहीं बस चिंतन कर…See More
Sep 9
PHOOL SINGH commented on PHOOL SINGH's blog post कर्ज़- एक मर्ज़
"कबीर साहब जी आपका बहुत बहुत धन्यवाद की आपने मेरी रचना के लिए थोड़ा सा समय निकाला आपका बहुत बहुत धन्यवाद "
Sep 9
Samar kabeer commented on PHOOL SINGH's blog post कर्ज़- एक मर्ज़
"जनाब फूल सिंह जी आदाब, सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।"
Sep 7
PHOOL SINGH posted a blog post

कर्ज़- एक मर्ज़

कर्ज़ का मर्ज़ होता है कैसासमझ कभी ना पाया थाजब तक कर्ज में नहीं था डूबाऋणकर्ता का मजाक बनाया थासमय बदलते देर ना लगती     अपनी मूर्खताओ की वजह सेमैं भी जब बाल-बाल बंधवायातब समझ में आया था || माँ कहती थी कर्ज ना लेनागरीबी में तुम रह लेनामुँह छोटा ओर पेट बड़ाकर्ज का होता है बेटाआसानी से ये नहीं चुकताअच्छे-अच्छे को ले डूबतापर आसानी से नहीं चुकताइतना समझ लेना बेटा ||      भाई-बन्धुओ ने मना कियाबहन का प्रस्ताव भी ठुकराया थामहत्वकांक्षा में अंधा हो मैंलालच में डुबकी लगाया थापानी की तरह पैसा बहा मैंअपने,…See More
Sep 6
PHOOL SINGH commented on PHOOL SINGH's blog post कुर्सी- एक जादुई छड़ी
"कबीर साहब जी आपका कोटि कोटि धन्यवाद कि आपने मेरी रचना के लिए थोड़ा सा वक्त निकाला|"
Sep 5
Samar kabeer commented on PHOOL SINGH's blog post कुर्सी- एक जादुई छड़ी
"जनाब फूल सिंह जी आदाब,अच्छी रचना हुई,बधाई स्वीकार करें ।"
Sep 1
PHOOL SINGH posted a blog post

कुर्सी- एक जादुई छड़ी

त्याग, बलिदान, जोश, श्रमचार पावों पर खड़ी हूँ मैंसत्ता की मै बन धुरीचमक-धमक से सजी-धजीजादू की फूलझड़ी हूँ मैंसपनों की सुंदर परी हूँ|| महत्वकांक्षा की कड़ी हूँ मैंस्वागत को तेरे खड़ी हूँ मैंधैर्य की सबकी परीक्षा लेतीकर्म मार्ग की लड़ी हूँ मैंनियत, मेहनत का मूल्यांकन करतीतेरे सुख-दुख की कड़ी हूँ मैं|| उठक-बैठक कर खेल दिखाकभी किसी को मौज करातीकभी प्रशंसा के बोल सुनासभी से काम करातीअपना प्रभाव मै दिखाअहं को सबके धूल मिलातीपूर्ण स्वार्थ से भरी हूँ मैं || कभी बन मैं राज सिंहासनराजाओं की सभा बढ़ातीकभी किसी…See More
Aug 27
PHOOL SINGH commented on PHOOL SINGH's blog post सड़क की बेबसी
"कबीर साहब को नमस्कार मेरी रचना को पसंद करने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद "
Aug 27
Samar kabeer commented on PHOOL SINGH's blog post सड़क की बेबसी
"जनाब फूल सिंह जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें ।"
Aug 25
PHOOL SINGH posted a blog post

सड़क की बेबसी

कभी खूनी, कभी कातिलकभी गुनाहों का मार्ग कहलातीजुर्म को होते देख चीखतीखून खराबे से मैं थर्रातीकभी खून की प्यासी तोकभी डायन हूँ कहलातीचाह के भी कुछ कर ना पातीबेबसी पर नीर बहाती || हैवानियत की, कभी बलात्कार की,   ना चाह मैं साक्षी बनतीहत्या कभी षडयंत्रो काअंजान देने पथ भी बनतीतैयार की गई हर साजिश को   हादसो का मैं नाम दिलाती   निर्दयता में साथ निभा तेराआत्मा को अपनी फटकार लगातीभयानक दर्द से मै चीख चीख कर  अपनी बेबसी जब नीर बहाती|| घटित हर अपराध कीगवाही देने का पुरजोर लगातीपर कशमश की स्थिति पातीकभी…See More
Aug 21
PHOOL SINGH commented on PHOOL SINGH's blog post पेड़-पोधे और हम
""कबीर साहब" को कोटि-कोटि प्रणाम और मेरी होसला अफजाई के लिए धन्यवाद|"
May 1

Profile Information

Gender
Male
City State
DELHI
Native Place
DELHI
Profession
KALSHANIA CONSULTANCY
About me
NOTHING MUCH

जीवन संगिनी

हार हार का टूट चुका जब

तुमसे ही आश बाँधी है

मैं नहीं तो तुम सही

समर्थ जीवन की ठानी है||

 

मजबूर नहीं मगरूर नहीं मैं 

मोह माया में चूर नहीं मैं

साथ तुम्हारा मिल जाए तो

लक्ष्य से भी दूर नहीं मैं ||

 

सुख दुःख की घटना तो

जीवन में घटती रहती है

छोटी छोटी नोक झोंक भी

हर रिश्ते में होती है 

छोड़ न देना साथ निभाना

तुमसे, प्रेम की डोर जो बाँधी है||

 

गलत किये थे कुछ निर्णय

ये बात भी स्वीकारी है

मैं  गलत और तुम सही

गलती मैंने मानी है

मझधार में फसीं जिंदगी की

नैया पार लगानी है||

 

जीवन संगिनी बनकर,

मेरी जिंदगी, सँवारी है

घर नहीं मेरे दिल में रहना

बस ख़्वाहिश ये हमारी है

मैं नहीं तो तुम सही

समर्थ जीवन की ठानी है||

 

PHOOL SINGH's Blog

चंद्रयान- 2 का सफर

संपर्क टूटा विक्रम से तो

ना समझ ये विफल रहा

आर्बिटर अभी चक्कर लगा रहा

धैर्य रख, थोड़ा इंतज़ार तो कर

चिंता नहीं बस चिंतन कर ||

 

मार्ग विक्रम भटक गया

भ्र्स्ट ही शायद कारण हो

खंड-खंड होकर बिखर भी गया तो  

खोजने का प्रयास तो कर

चिंता नहीं बस चिंतन कर ||

 

वैज्ञानिकों का अपने हौंसला बढ़ा

साहस के उनके तारीफ तो कर

चूक कहाँ हो गई प्रयास मे

इस बात पर थोड़ा गौर तो कर

चिंता नहीं बस…

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Posted on September 9, 2019 at 11:06am — 3 Comments

कर्ज़- एक मर्ज़

कर्ज़ का मर्ज़ होता है कैसा

समझ कभी ना पाया था

जब तक कर्ज में नहीं था डूबा

ऋणकर्ता का मजाक बनाया था

समय बदलते देर ना लगती     

अपनी मूर्खताओ की वजह से

मैं भी जब बाल-बाल बंधवाया

तब समझ में आया था ||

 

माँ कहती थी कर्ज ना लेना

गरीबी में तुम रह लेना

मुँह छोटा ओर पेट बड़ा

कर्ज का होता है बेटा

आसानी से ये नहीं चुकता

अच्छे-अच्छे को ले डूबता

पर आसानी से नहीं चुकता

इतना समझ लेना बेटा…

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Posted on September 5, 2019 at 5:00pm — 4 Comments

कुर्सी- एक जादुई छड़ी

त्याग, बलिदान, जोश, श्रम

चार पावों पर खड़ी हूँ मैं

सत्ता की मै बन धुरी

चमक-धमक से सजी-धजी

जादू की फूलझड़ी हूँ मैं

सपनों की सुंदर परी हूँ||

 

महत्वकांक्षा की कड़ी हूँ मैं

स्वागत को तेरे खड़ी हूँ मैं

धैर्य की सबकी परीक्षा लेती

कर्म मार्ग की लड़ी हूँ मैं

नियत, मेहनत का मूल्यांकन करती

तेरे सुख-दुख की कड़ी हूँ मैं||

 

उठक-बैठक कर खेल…

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Posted on August 27, 2019 at 4:21pm — 2 Comments

सड़क की बेबसी

कभी खूनी, कभी कातिल

कभी गुनाहों का मार्ग कहलाती

जुर्म को होते देख चीखती

खून खराबे से मैं थर्राती

कभी खून की प्यासी तो

कभी डायन हूँ कहलाती

चाह के भी कुछ कर ना पाती

बेबसी पर नीर बहाती ||

 

हैवानियत की, कभी बलात्कार की,   

ना चाह मैं साक्षी बनती

हत्या कभी षडयंत्रो का

अंजान देने पथ भी बनती

तैयार की गई हर साजिश को   

हादसो का मैं नाम दिलाती…

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Posted on August 20, 2019 at 4:29pm — 2 Comments

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