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PHOOL SINGH
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PHOOL SINGH posted a blog post

कैसी विपदा कैसा डर

सुनसान सड़क, सुनसान रात है, सुनसान सबके अन्तर्मनकैसे विपदा आन पड़ी ये, दुख, तड़प और है उलझन || चिराग भुझ रहे हर पल, हर क्षण, लगा दो चाहे तन, मन, धनकड़ा समाधान न मिला अभी तक, जकड़ रहा है गहरा तम || भूख, प्यास और खाली है घर, रोजी रोटी भी हो गई बंदवायु में जैसे विष घुला है, कैसा संकट ये कैसा कष्ट || हर पीड़ित अब यही पूछता, भूख लगने पर हो बंधनपापी-खाली पेट तो मान रहा न, कैसे इच्छापूर्ति करेगा रंक || हाथ पसारे मांग न सकते, खोने आत्म-सम्मान होता डर  मदद करे भी तो कैसे करें, विचलित है आज हर एक मन || दया,…See More
Apr 18
Samar kabeer commented on PHOOL SINGH's blog post शिकायत-एक अद्रश्य अपराध
"जनाब फूल सिंह जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Jan 30
Samar kabeer commented on PHOOL SINGH's blog post सच-एक मौन
"जनाब फूल सिंह जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Jan 29
PHOOL SINGH posted a blog post

शिकायत-एक अद्रश्य अपराध

शिकायत कभी भी खत्म ना होतीकोई जीवन चाहे कुर्बान करें  खाली दिमाग का सब फितूर हैये सोच के अपना काम करें || हर तरह के लोग जहां मेंबस मेहनती लोगो की बात करेंकष्ट सहकर भी हार ना मानेजज्बे को उनके सलाम करें || पद मिले तो अभिमान में भरतेना बड़े-छोटे का सम्मान करेंसंस्कारों की बात कहीं नाबस अपने कर्मो का गुणगान करें || कुछ लोगो की आदत बुरी हैउनकी कभी ना बात करें  हर शख्स में नुक्स निकालतेना खुद बड़ा कोई काम करें ||मौलिक व अप्रकाशित See More
Jan 28
PHOOL SINGH posted a blog post

सच-एक मौन

मौन रहता सच सदा ही, आवाज झूठ ही करता हैकर्म दिखाता सच का चेहरा, झूठ भ्रम को पैदा करता है || प्रमाण देता झूठ सदा ही, खूब खोखले दावे करता हैपरवाह ना सच को किसी बात की, वो तो हौंसले की उड़ान को भरता है || तकलीफ होती झूठ को हरदम, ना खुशी बर्दास्त ही करता हैआग लगाता कहीं ना कहीं, जब भी शोर वो करता है || सच सागर सी शक्ति का मालिक, सदा मर्यादा धारण करता हैगमगीन रहता तह हृदय से, नए मुकाम वो हासिल करता है || झूठ तो जलता अपनी आग में, सच शांति की आंहे भरता हैविनर्मता रहती वाणी में सच की, हृदय में सीधा…See More
Jan 21
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on PHOOL SINGH's blog post पैसा- दूसरा ईश्वर
"आ. भाई फूलसिंह जी, सादर अभिवादन । अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Dec 23, 2020
Samar kabeer commented on PHOOL SINGH's blog post पैसा- दूसरा ईश्वर
"जनाब फूल सिंह जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Dec 22, 2020
PHOOL SINGH posted a blog post

पैसा- दूसरा ईश्वर

धन, दौलत तो उपयोग की वस्तु, जाती कभी भी साथ नहींकद्र ना होती उस शख्स की, पैसा जिसके पास नहीं || आज बचा लो कल मिलेगा, इसे बचाना दोष नहींदर-दर की वो ठोकर खाता, गरीब की कोई औकात नहीं || सुख-वैभव उसके दर विराजे, पैसो की ना जिसके पास कमीअनकहे रिश्ते खुद बन जाते, आदर्श बनती हर बात कही || कुछ दोष तो यूं छिप जाते, उम्मीद जिसकी होती नहींगरीब के आँसू झूठे लगते, अमीर के ना होते दोष कभी || साथ भले ही पैसा ना जाता, पर पैसे वाले बर्बाद नहींइस जहां में राज करेगा, चाहे धर्म-कर्म में विश्वास नहीं || नियत तेरी…See More
Dec 22, 2020
Samar kabeer commented on PHOOL SINGH's blog post भाई-एक विश्वास
"जनाब फूल सिंह जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Dec 21, 2020
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on PHOOL SINGH's blog post भाई-एक विश्वास
"आ. भाई फूलसिंह जी, सादर अभिवादन । उत्तम रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Dec 16, 2020
PHOOL SINGH posted a blog post

भाई-एक विश्वास

एक भ्रात है भरत के जैसा,जिसमें कुछ पाने का भाव नहींसमर्पित करता भ्रात चरण में,राज्य संग सुख, चैन सभी || तिलभर भी छल ना मन में,जग भी उसके साथ नहींकठोरता/ताने सहता सारे जन की,मातृ की करनी उसकी सभी || विभीषण भी एक भ्रात उधर हैसिंहासन पर जिसकी आँख लगीकठिन समय में भ्रात छोड़ता,शत्रुओं को बताता भेद सभी || ना अंतक्रिया भी भ्रात की करतासुख-भोग से भी इंकार नहींमौका मिले तो विवाह भी करलेमाँ समान अपनी भाभी अभी || गूढ ज्ञान है दोनों भ्रात मेंये देव-दानव की बात नहींएक बना सदा शक्ति भ्रात कीदूजे को चाहिए सुख…See More
Dec 16, 2020
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on PHOOL SINGH's blog post एक प्रश्न ?
"आ. भाई फूल सिंह जी, अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Dec 5, 2020
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on PHOOL SINGH's blog post वृक्ष की पुकार
"आ. भाई फूलसिंह जी, सादर अभिवादन । अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Dec 5, 2020
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on PHOOL SINGH's blog post धूप-छांव
"आ. भाई फूल सिंह जी, सादर अभिवादन । अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Dec 5, 2020
Samar kabeer commented on PHOOL SINGH's blog post धूप-छांव
"जनाब फूल सिंह जी आदाब, सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।"
Dec 4, 2020
Samar kabeer commented on PHOOL SINGH's blog post वृक्ष की पुकार
"जनाब फूल सिंह जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Dec 4, 2020

Profile Information

Gender
Male
City State
DELHI
Native Place
DELHI
Profession
KALSHANIA CONSULTANCY
About me
NOTHING MUCH

जीवन संगिनी

हार हार का टूट चुका जब

तुमसे ही आश बाँधी है

मैं नहीं तो तुम सही

समर्थ जीवन की ठानी है||

 

मजबूर नहीं मगरूर नहीं मैं 

मोह माया में चूर नहीं मैं

साथ तुम्हारा मिल जाए तो

लक्ष्य से भी दूर नहीं मैं ||

 

सुख दुःख की घटना तो

जीवन में घटती रहती है

छोटी छोटी नोक झोंक भी

हर रिश्ते में होती है 

छोड़ न देना साथ निभाना

तुमसे, प्रेम की डोर जो बाँधी है||

 

गलत किये थे कुछ निर्णय

ये बात भी स्वीकारी है

मैं  गलत और तुम सही

गलती मैंने मानी है

मझधार में फसीं जिंदगी की

नैया पार लगानी है||

 

जीवन संगिनी बनकर,

मेरी जिंदगी, सँवारी है

घर नहीं मेरे दिल में रहना

बस ख़्वाहिश ये हमारी है

मैं नहीं तो तुम सही

समर्थ जीवन की ठानी है||

 

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कैसी विपदा कैसा डर

सुनसान सड़क, सुनसान रात है, सुनसान सबके अन्तर्मन

कैसे विपदा आन पड़ी ये, दुख, तड़प और है उलझन ||

 

चिराग भुझ रहे हर पल, हर क्षण, लगा दो चाहे तन, मन, धन

कड़ा समाधान न मिला अभी तक, जकड़ रहा है गहरा तम ||

 

भूख, प्यास और खाली है घर, रोजी रोटी भी हो गई बंद

वायु में जैसे विष घुला है, कैसा संकट ये कैसा कष्ट ||

 

हर पीड़ित अब यही पूछता, भूख लगने पर हो बंधन

पापी-खाली पेट तो मान रहा न, कैसे इच्छापूर्ति करेगा रंक ||

 

हाथ…

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Posted on April 18, 2021 at 10:00am

शिकायत-एक अद्रश्य अपराध

शिकायत कभी भी खत्म ना होती

कोई जीवन चाहे कुर्बान करें  

खाली दिमाग का सब फितूर है

ये सोच के अपना काम करें ||

 

हर तरह के लोग जहां में

बस मेहनती लोगो की बात करें

कष्ट सहकर भी हार ना माने

जज्बे को उनके सलाम करें ||

 

पद मिले तो अभिमान में भरते

ना बड़े-छोटे का सम्मान करें

संस्कारों की बात कहीं ना

बस अपने कर्मो का गुणगान करें ||

 

कुछ लोगो की आदत बुरी है

उनकी कभी ना बात करें  

हर…

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Posted on January 27, 2021 at 6:30pm — 1 Comment

सच-एक मौन

मौन रहता सच सदा ही, आवाज झूठ ही करता है

कर्म दिखाता सच का चेहरा, झूठ भ्रम को पैदा करता है ||

 

प्रमाण देता झूठ सदा ही, खूब खोखले दावे करता है

परवाह ना सच को किसी बात की, वो तो हौंसले की उड़ान को भरता है ||

 

तकलीफ होती झूठ को हरदम, ना खुशी बर्दास्त ही करता है

आग लगाता कहीं ना कहीं, जब भी शोर वो करता है ||

 

सच सागर सी शक्ति का मालिक, सदा मर्यादा…

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Posted on January 20, 2021 at 9:59pm — 1 Comment

पैसा- दूसरा ईश्वर

धन, दौलत तो उपयोग की वस्तु, जाती कभी भी साथ नहीं

कद्र ना होती उस शख्स की, पैसा जिसके पास नहीं ||

 

आज बचा लो कल मिलेगा, इसे बचाना दोष नहीं

दर-दर की वो ठोकर खाता, गरीब की कोई औकात नहीं ||

 

सुख-वैभव उसके दर विराजे, पैसो की ना जिसके पास कमी

अनकहे रिश्ते खुद बन जाते, आदर्श बनती हर बात कही ||

 

कुछ दोष तो यूं छिप जाते, उम्मीद जिसकी होती…

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Posted on December 19, 2020 at 1:44pm — 2 Comments

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