For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

PHOOL SINGH
  • Male
  • India
Share

PHOOL SINGH's Friends

  • Yogi Saraswat
  • Rekha Joshi
  • Dr.Prachi Singh
  • Ashok Kumar Raktale
  • PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA
  • rajesh kumari
  • Naval Kishor Soni
  • Shubhranshu Pandey
  • DR SHRI KRISHAN NARANG
  • वीनस केसरी
  • Deepak Sharma Kuluvi
 

PHOOL SINGH's Page

Latest Activity

Samar kabeer commented on PHOOL SINGH's blog post अच्छा लगा
"जनाब फूल सिंह जी आदाब,अच्छी रचना है,बधाई स्वीकार करें । टंकण त्रुटियों की तरफ़ ध्यान दें ।"
4 hours ago
Samar kabeer commented on PHOOL SINGH's blog post “भ्रम जाल”
"जनाब फूल सिंह जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें ।"
5 hours ago
vijay nikore commented on PHOOL SINGH's blog post “भ्रम जाल”
"रचना अच्छी लगी। बधाई मित्र फूल सिंह जी।"
19 hours ago
PHOOL SINGH posted a blog post

एक अभागिन किन्नर

ना मर्म का मेरे भान किसी को, लेकिन फिर भी जिंदा हूँना औरत, ना पुरुष हूँ, कहने को मैं किन्नर हूँ| सारा समाज धुत्कार मै खाती, जैसे समाज पे अभिशाप कोईसोलह शृंगार कर हर दिन सजती, जैसे सुहागिन औरत हूँ | मात-पिता भी कलंक समझते, बदनामी का उनकी कारण हूँदुख-दर्द भी ना कोई पूछता, जैसी उनकी ना मै कोई हूँ | ना रोजी-रोटी का साधन कोई, मांग माँग कर खाती हूँइज्जत आबरू का मान ना जग में, कभी-कभी शरीर पे भी दांव लगाती हूँ| शादी प्रसंग में जा खुशी मनाते, नाच-नाच कर गाती हूँबच्चो के जन्म पर तालियाँ बजाती, दे…See More
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on PHOOL SINGH's blog post अच्छा लगा
"आ. भाई फूलसिंह जी, अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Wednesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on PHOOL SINGH's blog post “भ्रम जाल”
"आ. भाई फूलसिंह जी, अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई।"
Wednesday
PHOOL SINGH posted blog posts
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on PHOOL SINGH's blog post दंगाइयो से मेरी विनती
"आ. भाई फूल सिंह जी, अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Tuesday
PHOOL SINGH commented on PHOOL SINGH's blog post दंगाइयो से मेरी विनती
"कबीर साहब आपका कोटि कोटि धन्यवाद "
Jan 13
Samar kabeer commented on PHOOL SINGH's blog post दंगाइयो से मेरी विनती
"जनाब फूल सिंह जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें ।"
Jan 3
Samar kabeer commented on PHOOL SINGH's blog post एक भिखारिन की वेदना
"जनाब फूल सिंह जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Dec 29, 2019
PHOOL SINGH posted a blog post

दंगाइयो से मेरी विनती

क्या तुम्हारा जमीर ना जागताक्यों घायल किसी को करते होपुलिस वाले भी अपने भाई-बंधुपत्थर उनको क्यूँ मारते हो || विरोध करना, विरोध करो तुमसंविधान अधिकार ये देता हैउपद्रव ना मचाने कीहिदायत भी संविधान हमारा देता है || उपद्रव का ना मार्ग चुनोशांति से विरोध करोपुलिस करती रखवाली हमारीउस पर बेवजह ना वार करो || दिन रात करती हमारी सेवाइस बात का तो ध्यान करोपढे लिखे अच्छे समाज से आएइस बात का थोड़ा ध्यान करो || हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाईधर्मो को लेकर भेद ना होराजनीति का चक्कर है सबअफवाहों पर ध्यान ना दो || धर्म…See More
Dec 28, 2019
PHOOL SINGH posted a blog post

एक भिखारिन की वेदना

जाने कैसी विडम्बना जीवन कीजो इस दशा आ गिरीना कोई हमदर्द अपनाना ही मेरा साथी कोई, ना किसी ने वेदना सुनी ||   आते-जाते सब देखतेमिलता ना अब तक बिरला कोईमेरी सुने कभी अपनी सुनायेआत्मीयता से मिले कभी || ना क्षुधा मुझे किसी के धन कीना लोभ भी मन में कोईकहीं पड़ा मिल जाता पाथेयउससे अपना पेट भरी || आमूल तक मै टूट चुकीमहि मुझको कोष रहीव्रजपात सा होता हृदयभिखारिन की जो आवाज सुनी || अब तो आदत सी हो गयीनिशि-दिवस का ध्यान नहींनवल सपनों के अंकुरो का भीमुझको अब ना भान कोई ||मौलिक व अप्रकाशित See More
Dec 24, 2019
PHOOL SINGH commented on PHOOL SINGH's blog post पिशुन/चुगलखोर-एक भेदी
"भाई विजय निकोरे आपने मेरी रचना के अपना समय निकाला उसके लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद "
Dec 10, 2019
PHOOL SINGH commented on PHOOL SINGH's blog post एक पागल की आत्म गाथा
"कबीर साहब को मेरी रचना के लिए समय निकालने के लिए कोटि कोटि धन्यवाद "
Dec 10, 2019
Samar kabeer commented on PHOOL SINGH's blog post एक पागल की आत्म गाथा
"जनाब फूल सिंह जी आदाब,अच्छी रचना है,बधाई स्वीकार करें ।"
Dec 9, 2019

Profile Information

Gender
Male
City State
DELHI
Native Place
DELHI
Profession
KALSHANIA CONSULTANCY
About me
NOTHING MUCH

जीवन संगिनी

हार हार का टूट चुका जब

तुमसे ही आश बाँधी है

मैं नहीं तो तुम सही

समर्थ जीवन की ठानी है||

 

मजबूर नहीं मगरूर नहीं मैं 

मोह माया में चूर नहीं मैं

साथ तुम्हारा मिल जाए तो

लक्ष्य से भी दूर नहीं मैं ||

 

सुख दुःख की घटना तो

जीवन में घटती रहती है

छोटी छोटी नोक झोंक भी

हर रिश्ते में होती है 

छोड़ न देना साथ निभाना

तुमसे, प्रेम की डोर जो बाँधी है||

 

गलत किये थे कुछ निर्णय

ये बात भी स्वीकारी है

मैं  गलत और तुम सही

गलती मैंने मानी है

मझधार में फसीं जिंदगी की

नैया पार लगानी है||

 

जीवन संगिनी बनकर,

मेरी जिंदगी, सँवारी है

घर नहीं मेरे दिल में रहना

बस ख़्वाहिश ये हमारी है

मैं नहीं तो तुम सही

समर्थ जीवन की ठानी है||

 

PHOOL SINGH's Blog

एक अभागिन किन्नर

ना मर्म का मेरे भान किसी को, लेकिन फिर भी जिंदा हूँ

ना औरत, ना पुरुष हूँ, कहने को मैं किन्नर हूँ|

 

सारा समाज धुत्कार मै खाती, जैसे समाज पे अभिशाप कोई

सोलह शृंगार कर हर दिन सजती, जैसे सुहागिन औरत हूँ |

 

मात-पिता भी कलंक समझते, बदनामी का उनकी कारण हूँ

दुख-दर्द भी ना कोई पूछता, जैसी उनकी ना मै कोई हूँ |

 

ना रोजी-रोटी का साधन कोई, मांग…

Continue

Posted on January 15, 2020 at 11:56am

अच्छा लगा

अच्छा लगा तेरा प्रेम से मिलना

कुछ अपनी कही, कुछ मेरे सुनना

स्वार्थ से भरी इस दुनियाँ में

सभी के हित की बातें करना ||

 

वक़्त के संग में तेरा बदलना

हसमुखता को धारण करना

उड़ान भर खुली हवा में

सुंदर, ख्वाबो की माला बनुना ||

 

 हौंसलों भर अपने उर में

भूल के बीती बात को  आगे बढ़ना

याद आ जाए कोई भुला-बिसरा

झट से उसका हाल जानना || 

 

काम, क्रोध और…

Continue

Posted on January 14, 2020 at 5:22pm — 2 Comments

“भ्रम जाल”

भ्रम जाल ये कैसा फैला

खुद को खुद ही भूल चुका  

ना वाणी पर संयम किसीका  

उर में माया, द्वेष भरा |

 

कोह में अपना विनती भाव भुलाया  

जो धैर्य भी से दूर हुआ

गरल इतना उर में भरा है कि

क्षमा, प्रेम करना ही भूल गया |

 

करुणा दया भी पास नहीं अब

पशुत्व के जैसा बन चुका

भलाई का दामन ओढ़ की जाने

पीठ पीछे चुरा घोप रहा |

 

आत्महित में अनेत्री बन गए जैसे  

भयंकर बैर का…

Continue

Posted on January 13, 2020 at 4:29pm — 3 Comments

दंगाइयो से मेरी विनती

क्या तुम्हारा जमीर ना जागता

क्यों घायल किसी को करते हो

पुलिस वाले भी अपने भाई-बंधु

पत्थर उनको क्यूँ मारते हो ||

 

विरोध करना, विरोध करो तुम

संविधान अधिकार ये देता है

उपद्रव ना मचाने की

हिदायत भी संविधान हमारा देता है ||



उपद्रव का ना मार्ग चुनो

शांति से विरोध करो

पुलिस करती रखवाली हमारी

उस पर बेवजह ना वार करो ||



दिन रात करती हमारी…

Continue

Posted on December 26, 2019 at 3:21pm — 3 Comments

Comment Wall

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

  • No comments yet!
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-105 in the group चित्र से काव्य तक
"बहुत बधाई लीजिए, छंदविशारद आप आए क्यों पर देर से, देने अपनी छाप ?? सादर "
2 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-105 in the group चित्र से काव्य तक
"जी ! सादर प्रणाम."
2 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-105 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी, आपका सुझाव शिरोधार्य है. किंतु, एक मत यह भी हो सकता है, कि दोहा में प्रयुक्त…"
2 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-105 in the group चित्र से काव्य तक
"दोहे   काम सदा इन्सान के, आता है इंसान । फोटो खूब खिंचाइये, किन्तु कीजिये दान ।।1   हाथ…"
2 hours ago
Satyanarayan Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-105 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक रक्ताले जी इस प्रयास पर आपकी सराहना के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय  जी आपके…"
2 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-105 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय भाई सत्यनारायण सिंह जी सादर, प्रदत्त चित्र के माध्यम से दीनों के हित कार्य करने का सन्देश…"
2 hours ago
Satyanarayan Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-105 in the group चित्र से काव्य तक
"उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से आभार आदरणीय अखिलेश कुमार जी सादर"
2 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-105 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी इस उत्सव में आपका आना सुखद है। उत्साहवर्धन और प्रशंसा के लिए हृदय से धन्यवाद आभार"
2 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-105 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय भाई सतविन्द्र कुमार जी सादर, प्रदत्त चित्र पर सुंदर दोहा गीतिका रची है आपने. हार्दिक बधाई…"
2 hours ago
Satyanarayan Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-105 in the group चित्र से काव्य तक
"उत्सासाहवर्धन के लिए हृदय से आभार आपका आदरणीया प्रतिभा पांडे जी"
2 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-105 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सत्यनारायण जी अति सुंदर गीतिका आधारित दोहा छंद , हार्दिक बधाई।"
2 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-105 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, प्रदत्त चित्र को सुन्दरता के साथ आपने दोहों में परिभाषित…"
2 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service