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PHOOL SINGH
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PHOOL SINGH posted a blog post

सच-एक मौन

मौन रहता सच सदा ही, आवाज झूठ ही करता हैकर्म दिखाता सच का चेहरा, झूठ भ्रम को पैदा करता है || प्रमाण देता झूठ सदा ही, खूब खोखले दावे करता हैपरवाह ना सच को किसी बात की, वो तो हौंसले की उड़ान को भरता है || तकलीफ होती झूठ को हरदम, ना खुशी बर्दास्त ही करता हैआग लगाता कहीं ना कहीं, जब भी शोर वो करता है || सच सागर सी शक्ति का मालिक, सदा मर्यादा धारण करता हैगमगीन रहता तह हृदय से, नए मुकाम वो हासिल करता है || झूठ तो जलता अपनी आग में, सच शांति की आंहे भरता हैविनर्मता रहती वाणी में सच की, हृदय में सीधा…See More
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on PHOOL SINGH's blog post पैसा- दूसरा ईश्वर
"आ. भाई फूलसिंह जी, सादर अभिवादन । अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Dec 23, 2020
Samar kabeer commented on PHOOL SINGH's blog post पैसा- दूसरा ईश्वर
"जनाब फूल सिंह जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Dec 22, 2020
PHOOL SINGH posted a blog post

पैसा- दूसरा ईश्वर

धन, दौलत तो उपयोग की वस्तु, जाती कभी भी साथ नहींकद्र ना होती उस शख्स की, पैसा जिसके पास नहीं || आज बचा लो कल मिलेगा, इसे बचाना दोष नहींदर-दर की वो ठोकर खाता, गरीब की कोई औकात नहीं || सुख-वैभव उसके दर विराजे, पैसो की ना जिसके पास कमीअनकहे रिश्ते खुद बन जाते, आदर्श बनती हर बात कही || कुछ दोष तो यूं छिप जाते, उम्मीद जिसकी होती नहींगरीब के आँसू झूठे लगते, अमीर के ना होते दोष कभी || साथ भले ही पैसा ना जाता, पर पैसे वाले बर्बाद नहींइस जहां में राज करेगा, चाहे धर्म-कर्म में विश्वास नहीं || नियत तेरी…See More
Dec 22, 2020
Samar kabeer commented on PHOOL SINGH's blog post भाई-एक विश्वास
"जनाब फूल सिंह जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Dec 21, 2020
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on PHOOL SINGH's blog post भाई-एक विश्वास
"आ. भाई फूलसिंह जी, सादर अभिवादन । उत्तम रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Dec 16, 2020
PHOOL SINGH posted a blog post

भाई-एक विश्वास

एक भ्रात है भरत के जैसा,जिसमें कुछ पाने का भाव नहींसमर्पित करता भ्रात चरण में,राज्य संग सुख, चैन सभी || तिलभर भी छल ना मन में,जग भी उसके साथ नहींकठोरता/ताने सहता सारे जन की,मातृ की करनी उसकी सभी || विभीषण भी एक भ्रात उधर हैसिंहासन पर जिसकी आँख लगीकठिन समय में भ्रात छोड़ता,शत्रुओं को बताता भेद सभी || ना अंतक्रिया भी भ्रात की करतासुख-भोग से भी इंकार नहींमौका मिले तो विवाह भी करलेमाँ समान अपनी भाभी अभी || गूढ ज्ञान है दोनों भ्रात मेंये देव-दानव की बात नहींएक बना सदा शक्ति भ्रात कीदूजे को चाहिए सुख…See More
Dec 16, 2020
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on PHOOL SINGH's blog post एक प्रश्न ?
"आ. भाई फूल सिंह जी, अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Dec 5, 2020
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on PHOOL SINGH's blog post वृक्ष की पुकार
"आ. भाई फूलसिंह जी, सादर अभिवादन । अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Dec 5, 2020
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on PHOOL SINGH's blog post धूप-छांव
"आ. भाई फूल सिंह जी, सादर अभिवादन । अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Dec 5, 2020
Samar kabeer commented on PHOOL SINGH's blog post धूप-छांव
"जनाब फूल सिंह जी आदाब, सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।"
Dec 4, 2020
Samar kabeer commented on PHOOL SINGH's blog post वृक्ष की पुकार
"जनाब फूल सिंह जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Dec 4, 2020
Samar kabeer commented on PHOOL SINGH's blog post एक प्रश्न ?
"जनाब फूल सिंह जी आदाब, अच्छी रचना हुई, बधाई स्वीकार करें ।"
Dec 4, 2020
PHOOL SINGH posted a blog post

धूप-छांव

कब रुका जो आज रुकेगा, वक़्त है ये तो चलता रहेगावक्त पर हकूमत कर सके ऐसा, नहीं जन्मा जो अब जन्मेगा || संग में इसके हँसना-रोना, सबको संग में इसके चलना पड़ेगाअटल होकर चल रहा जो, उसे, वक़्त के आगे झुकना पड़ेगा || बेदर्दी ये वक़्त बड़ा है, घाव-क्लेश तो देता रहेगाखुशियों के पल छोटे करके, दशा पर तेरी हँसता रहेगा || आस बांधता, विश्वास दिलाता, विश्वासघात भी करता रहेगागिरगिट जैसा रूप बदल कर, अनुभव खट्टे-मीठे देता रहेगा || धरी रह जायेगी तेरी कमाई भी, सब रह जाएंगे रोते-बिलखतेकोई, कुछ भी नहीं कर पायेगा, जब वक़्त…See More
Dec 4, 2020
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Dec 2, 2020
Samar kabeer commented on PHOOL SINGH's blog post अहिल्याबाई होलकर
"जनाब फूल सिंह जी आदाब, सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।"
Nov 3, 2020

Profile Information

Gender
Male
City State
DELHI
Native Place
DELHI
Profession
KALSHANIA CONSULTANCY
About me
NOTHING MUCH

जीवन संगिनी

हार हार का टूट चुका जब

तुमसे ही आश बाँधी है

मैं नहीं तो तुम सही

समर्थ जीवन की ठानी है||

 

मजबूर नहीं मगरूर नहीं मैं 

मोह माया में चूर नहीं मैं

साथ तुम्हारा मिल जाए तो

लक्ष्य से भी दूर नहीं मैं ||

 

सुख दुःख की घटना तो

जीवन में घटती रहती है

छोटी छोटी नोक झोंक भी

हर रिश्ते में होती है 

छोड़ न देना साथ निभाना

तुमसे, प्रेम की डोर जो बाँधी है||

 

गलत किये थे कुछ निर्णय

ये बात भी स्वीकारी है

मैं  गलत और तुम सही

गलती मैंने मानी है

मझधार में फसीं जिंदगी की

नैया पार लगानी है||

 

जीवन संगिनी बनकर,

मेरी जिंदगी, सँवारी है

घर नहीं मेरे दिल में रहना

बस ख़्वाहिश ये हमारी है

मैं नहीं तो तुम सही

समर्थ जीवन की ठानी है||

 

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सच-एक मौन

मौन रहता सच सदा ही, आवाज झूठ ही करता है

कर्म दिखाता सच का चेहरा, झूठ भ्रम को पैदा करता है ||

 

प्रमाण देता झूठ सदा ही, खूब खोखले दावे करता है

परवाह ना सच को किसी बात की, वो तो हौंसले की उड़ान को भरता है ||

 

तकलीफ होती झूठ को हरदम, ना खुशी बर्दास्त ही करता है

आग लगाता कहीं ना कहीं, जब भी शोर वो करता है ||

 

सच सागर सी शक्ति का मालिक, सदा मर्यादा…

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Posted on January 20, 2021 at 9:59pm

पैसा- दूसरा ईश्वर

धन, दौलत तो उपयोग की वस्तु, जाती कभी भी साथ नहीं

कद्र ना होती उस शख्स की, पैसा जिसके पास नहीं ||

 

आज बचा लो कल मिलेगा, इसे बचाना दोष नहीं

दर-दर की वो ठोकर खाता, गरीब की कोई औकात नहीं ||

 

सुख-वैभव उसके दर विराजे, पैसो की ना जिसके पास कमी

अनकहे रिश्ते खुद बन जाते, आदर्श बनती हर बात कही ||

 

कुछ दोष तो यूं छिप जाते, उम्मीद जिसकी होती…

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Posted on December 19, 2020 at 1:44pm — 2 Comments

भाई-एक विश्वास

एक भ्रात है भरत के जैसा,

जिसमें कुछ पाने का भाव नहीं

समर्पित करता भ्रात चरण में,

राज्य संग सुख, चैन सभी ||

 

तिलभर भी छल ना मन में,

जग भी उसके साथ नहीं

कठोरता/ताने सहता सारे जन की,

मातृ की करनी उसकी सभी ||

 

विभीषण भी एक भ्रात उधर है

सिंहासन पर जिसकी आँख लगी

कठिन समय में भ्रात छोड़ता,

शत्रुओं को बताता भेद सभी ||

 

ना अंतक्रिया भी भ्रात की करता

सुख-भोग से भी इंकार…

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Posted on December 15, 2020 at 6:58pm — 2 Comments

धूप-छांव

कब रुका जो आज रुकेगा, वक़्त है ये तो चलता रहेगा

वक्त पर हकूमत कर सके ऐसा, नहीं जन्मा जो अब जन्मेगा ||

 

संग में इसके हँसना-रोना, सबको संग में इसके चलना पड़ेगा

अटल होकर चल रहा जो, उसे, वक़्त के आगे झुकना पड़ेगा ||

 

बेदर्दी ये वक़्त बड़ा है, घाव-क्लेश तो देता रहेगा

खुशियों के पल छोटे करके, दशा पर तेरी हँसता रहेगा ||

 

आस बांधता, विश्वास दिलाता, विश्वासघात भी करता रहेगा

गिरगिट जैसा रूप बदल कर, अनुभव खट्टे-मीठे देता रहेगा…

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Posted on December 3, 2020 at 2:30pm — 2 Comments

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