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Gajendra shrotriya
  • 37, Male
  • Kota , Rajasthan
  • India
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Gajendra shrotriya's blog post इक ही दिन काफ़ी नही है - ग़ज़ल
"आ. भाई गजेंद्र जी, माँ को समर्पित सुंदर गजल के लिए हार्दिक बधाई।"
May 20
Hariom Shrivastava commented on Gajendra shrotriya's blog post इक ही दिन काफ़ी नही है - ग़ज़ल
"वाह,वाहहह,माँ को समर्पित लाजवाब ग़ज़ल कही आदरणीय गजेन्द्र जी।"
May 15
Sushil Sarna commented on Gajendra shrotriya's blog post इक ही दिन काफ़ी नही है - ग़ज़ल
"वाह आदरणीय गजेंद्र जी माँ को समर्पित बहुत ही भावुक,सृजन प्रस्तुत किया है आपने। माँ शब्द के अंतर् में ऐसी गूँज है जो अंबर को भी हिला देती है। इस बेहतरीन प्रस्तुति के लिए दिल से बधाई।"
May 13
Gajendra shrotriya posted a blog post

इक ही दिन काफ़ी नही है - ग़ज़ल

मातृ-दिवस विशेष-----------------------------2122/ 2122/2122/212इक ही दिन काफ़ी नही है ममता के सम्मान को कम पड़ेंगे सौ जनम भी, माँ तेरे गुणगान कोजो बना देती है क़ाबिल एक नन्हीं जान को है ज़रूरत माँ कि ममता की बहुत इंसान कोलाख लानत भेजिए उस सरफिरे नादान को माँ को खुद से दूर करके ढूँढे जो भगवान कोमाँ का दिल इससे बड़ा है जिसमें तुम रहते मियाँ नाज़ से देखो न अपने बंग्ले आलीशान कोगाड़ी बंग्ले पैसे ज़ेवर उसको कुछ भी मत दिखा देखकर खुश होती है माँ बस तेरी मुस्कान कोपहले उसको मानाे यारों सीख माँ से…See More
May 12
Gajendra shrotriya commented on Samar kabeer's blog post ओ.बी.ओ.की 9 वी सालगिरह का तुहफ़ा
"परम आदरणीय समर कबीर साहिब, सादर नमस्कार । आपके साहित्यिक लगाव और विशेषतः ओबीओ के इस प्रतिष्ठित मंच के प्रति आपके समर्पण को हृदय से नमन करता हूँ। साथ ही उन सभी सम्माननीय महानुभावो काे सादर प्रणाम करता हूँ जो इस मंच की स्थापना से लेकर आज इसके समुन्नत…"
May 12
Mahendra Kumar commented on Gajendra shrotriya's blog post मेरी दस्तार ख़ानदानी है- ग़ज़ल
"बढ़िया ग़ज़ल है आदरणीय गजेन्द्र जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. "
Jan 16
Ajay Tiwari commented on Gajendra shrotriya's blog post मेरी दस्तार ख़ानदानी है- ग़ज़ल
"आदरणीय गजेन्द्र जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई."
Jan 15
Ravi Shukla commented on Gajendra shrotriya's blog post मेरी दस्तार ख़ानदानी है- ग़ज़ल
"आदरणीय गजेंद्र जी बहुत अच्छी गजल आपने कही छोटी बहर में अच्छे निकाले हैं दिली मुबारकबाद पेश करता हूं"
Jan 14
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"बहुत अच्छे हाइकु सृजित किए हैं आदरणीय शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी। बधाई स्वीकारें। तीसरे हाइकु में कामाग्निपथ शब्द का प्रयोग समझ नही आया। सादर।"
Jan 12
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"आदरणीय महेंद्र कुमार जी  सादर अभिवादन।बहुत अच्छे अशआर बुने हैं आपने । लगभग सभी शेर काबिले तारीफ है। बहुत बहुत बधाई।"
Jan 12
Gajendra shrotriya commented on Gajendra shrotriya's blog post मेरी दस्तार ख़ानदानी है- ग़ज़ल
"सराहना के लिए हार्दिक आभार आ० फूल सिंह जी।"
Jan 12
PHOOL SINGH commented on Gajendra shrotriya's blog post मेरी दस्तार ख़ानदानी है- ग़ज़ल
""भाई साहब " बहुत खूब उम्दा रचना बधाई स्वीकारें"
Jan 10
राज़ नवादवी commented on Gajendra shrotriya's blog post मेरी दस्तार ख़ानदानी है- ग़ज़ल
"जी जनाब समर कबीर साहब, ध्यान रखूंगा, हो गई ग़लती के लिए क्षमा करें. सादर. "
Jan 10
Gajendra shrotriya posted a blog post

मेरी दस्तार ख़ानदानी है- ग़ज़ल

2122/1212/22 ------------------------------ हार तूफ़ान से न मानी है कश्ती ने तैरने कि ठानी है मेरी पलकों पे ये जो पानी है ऐ मुहब्बत तेरी निशानी है हमने माना बहुत पुरानी है पर बहुत ख़ूब ये कहानी है दिल पे चस्पां है जो नही मिटतीयूूँ तेरी हर शबीह फानी है राख मैं कर चुका तेरे ख़त को याद लेकिन मुझे ज़बानी है हर किसी दर पे ये नही झुकती मेरी दस्तार ख़ानदानी है पहली बारिश है तिफ़्ल बन जाओ फेंक दो क्यूँ ये छतरी तानी है आब-संदल कभी थे हम दोनों आज इक आग दूजा पानी है जिसका अंजाम जंग तक पहुँचे बात इतनी नहीं बढ़ानी…See More
Jan 9
Gajendra shrotriya commented on Gajendra shrotriya's blog post मेरी दस्तार ख़ानदानी है- ग़ज़ल
"अनुमोदन के लिए आपका आभारी हूँ आदरणीय समर कबीर साहिब।"
Jan 9
Samar kabeer commented on Gajendra shrotriya's blog post मेरी दस्तार ख़ानदानी है- ग़ज़ल
"राज़ साहिब,इस मंच पर उस्ताद शागिर्द की परिपाटी नहीं है,इसलिए मुझे उस्ताद न लिखा करें,हम सब एक परिवार के सदस्य हैं ।"
Jan 8

Profile Information

Gender
Male
City State
kota Rajsthan
Native Place
rajsthan
Profession
Teacher at state govt. Rajasthan

Gajendra shrotriya's Blog

इक ही दिन काफ़ी नही है - ग़ज़ल

मातृ-दिवस विशेष

-----------------------------

2122/ 2122/2122/212

इक ही दिन काफ़ी नही है ममता के सम्मान को

कम पड़ेंगे सौ जनम भी, माँ तेरे गुणगान को

जो बना देती है क़ाबिल एक नन्हीं जान को

है ज़रूरत माँ कि ममता की बहुत इंसान को

लाख लानत भेजिए उस सरफिरे नादान को

माँ को खुद से दूर करके ढूँढे जो भगवान को

माँ का दिल इससे बड़ा है जिसमें तुम रहते मियाँ

नाज़ से देखो न अपने बंग्ले आलीशान…

Continue

Posted on May 12, 2019 at 12:30pm — 3 Comments

मेरी दस्तार ख़ानदानी है- ग़ज़ल

2122/1212/22

------------------------------

हार तूफ़ान से न मानी है

कश्ती ने तैरने कि ठानी है



मेरी पलकों पे ये जो पानी है

ऐ मुहब्बत तेरी निशानी है



हमने माना बहुत पुरानी है

पर बहुत ख़ूब ये कहानी है



दिल पे चस्पां है जो नही मिटती

यूूँ तेरी हर शबीह फानी है



राख मैं कर चुका तेरे ख़त को

याद लेकिन मुझे ज़बानी है



हर किसी दर पे ये नही झुकती

मेरी दस्तार ख़ानदानी है



पहली बारिश है तिफ़्ल बन…

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Posted on January 9, 2019 at 11:59am — 16 Comments

चेह्रा फ़क़त हसीं न हो दिल भी हसीं रहे - तरही ग़ज़ल

221  2121 1221 212



राह- ए- बदी से हम कभी वाक़िफ़ नहीं रहे 

फिर भी तेरे निशाने पे वाइज़ हमीं रहे     

कर ग़ौर अपने तौर-तरीकों पे एक बार

चहरा फ़क़त हसीं न हो दिल भी हसीं रहे 



दिल के दियार की ज़रा रौनक बहाल हो

गर इस मकाँ में आप सा कोई मकीं रहे

कर इश्क या जगा दे तसव्वुफ़ तेरी रज़ा

ऐ दिल तेरे खिलाफ़ कभी हम नहीं रहे 



अब भी यहीं हैं फूल कली चाँद सब मगर

दिलकश तुम्हारे बाद ये उतने नहीं रहे



दिल के…

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Posted on December 6, 2017 at 8:30pm — 12 Comments

दिल बड़ा अपना बनाने की ज़रूरत आज है-ग़ज़ल

2122 /2122/ 2122 /212



दिल बड़ा अपना बनाने की ज़रूरत आज है

टूटते रिश्ते बचाने की ज़रुरत आज है



प्यार जितना है जताने की ज़रूरत आज है

अपनापन खुलकर दिखाने की ज़रूरत आज है



हँसते आँगन में पसर जाए न सन्नाटा कहीं

सब गिले शिकवे भुलाने की ज़रूरत आज है



दिल के रिश्तों को ज़ुबाँ से तोड़ना मुमकिन कहाँ

अपनों को अपना बनाने की ज़रूरत आज है



घर बनाना है अगर मज़बूत फिर खुद को हमे

नींव का पत्थर बनाने की ज़रूरत आज है



अपने हक़ की बात करना… Continue

Posted on November 5, 2017 at 7:00pm — 20 Comments

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At 7:22pm on April 6, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय गजेन्द्र श्रोतिया जी,
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी प्रस्तुति  ग़ज़ल ("ओबीओ लाइव तरही मुशायरा" अंक 45 में प्रस्तुत) को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |


शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी

संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 

ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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