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Gajendra shrotriya
  • 35, Male
  • Kota , Rajasthan
  • India
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Gajendra shrotriya commented on Gajendra shrotriya's blog post दिल बड़ा अपना बनाने की ज़रूरत आज है-ग़ज़ल
"ग़ज़ल के प्रयास को सराहने के लिए आपका ह्रदय से आभार आ० धमेन्द्र जी।"
Nov 12
Gajendra shrotriya commented on Gajendra shrotriya's blog post दिल बड़ा अपना बनाने की ज़रूरत आज है-ग़ज़ल
"ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका बहुत आभार आ० सतविन्द्र कुमार जी।"
Nov 12
Gajendra shrotriya commented on Gajendra shrotriya's blog post दिल बड़ा अपना बनाने की ज़रूरत आज है-ग़ज़ल
"हार्दिक आभार आ० ब्रजेश कुमार जी।"
Nov 12
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on Gajendra shrotriya's blog post दिल बड़ा अपना बनाने की ज़रूरत आज है-ग़ज़ल
"बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है आदरणीय गजेन्द्र जी, बधाई स्वीकार करें।"
Nov 10
सतविन्द्र कुमार commented on Gajendra shrotriya's blog post दिल बड़ा अपना बनाने की ज़रूरत आज है-ग़ज़ल
"सुंदर गजल कहि आपने। हार्दिक बधाई स्वीकारें•"
Nov 9
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Gajendra shrotriya's blog post दिल बड़ा अपना बनाने की ज़रूरत आज है-ग़ज़ल
"उम्दा ग़ज़ल हुई आदरणीय..बधाइयाँ"
Nov 9
Samar kabeer commented on Gajendra shrotriya's blog post दिल बड़ा अपना बनाने की ज़रूरत आज है-ग़ज़ल
"मेरे कहे को मान देने के लिए धन्यवाद ।"
Nov 7
Gajendra shrotriya commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल - जानवर कितने समझदार मिले
"आ० रामअवध जी नमस्कार!बहुत अच्छे और नये अशआर कहे हैं आपने। इस सार्थक और कामयाब ग़ज़ल के लिए मेंरी बधाई स्वीकार करें।"
Nov 7
Gajendra shrotriya commented on Gajendra shrotriya's blog post दिल बड़ा अपना बनाने की ज़रूरत आज है-ग़ज़ल
"ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका आभारी हूँ आ० ब्रजेश कुमार जी।"
Nov 7
Gajendra shrotriya commented on Gajendra shrotriya's blog post दिल बड़ा अपना बनाने की ज़रूरत आज है-ग़ज़ल
"ग़ज़ल से ऐब-ए-तनाफ़ुर हटाने के लिए आपका हार्दिक आभार आ० समर कबीर साहब। बहुत शुक्रिया। आपके द्वारा सुझाए अनुसार आवश्यक संशोधन कर दिया है।सादर।"
Nov 7
Gajendra shrotriya commented on Gajendra shrotriya's blog post दिल बड़ा अपना बनाने की ज़रूरत आज है-ग़ज़ल
"बहुत शुक्रिया जनाब सलीम रजा साहब।"
Nov 7
Gajendra shrotriya posted a blog post

दिल बड़ा अपना बनाने की ज़रूरत आज है-ग़ज़ल

2122 /2122/ 2122 /212दिल बड़ा अपना बनाने की ज़रूरत आज हैटूटते रिश्ते बचाने की ज़रुरत आज हैप्यार जितना है जताने की ज़रूरत आज हैअपनापन खुलकर दिखाने की ज़रूरत आज हैहँसते आँगन में पसर जाए न सन्नाटा कहींसब गिले शिकवे भुलाने की ज़रूरत आज हैदिल के रिश्तों को ज़ुबाँ से तोड़ना मुमकिन कहाँअपनों को अपना बनाने की ज़रूरत आज हैघर बनाना है अगर मज़बूत फिर खुद को हमेनींव का पत्थर बनाने की ज़रूरत आज हैअपने हक़ की बात करना ही फ़क़त काफ़ी नहींफ़र्ज भी अपना निभाने की ज़रूरत आज हैबूढ़ा बरगद है परेशाँ कुछ परिंदों के लिएउनको घर वापस…See More
Nov 7
Gajendra shrotriya's blog post was featured

दिल बड़ा अपना बनाने की ज़रूरत आज है-ग़ज़ल

2122 /2122/ 2122 /212दिल बड़ा अपना बनाने की ज़रूरत आज हैटूटते रिश्ते बचाने की ज़रुरत आज हैप्यार जितना है जताने की ज़रूरत आज हैअपनापन खुलकर दिखाने की ज़रूरत आज हैहँसते आँगन में पसर जाए न सन्नाटा कहींसब गिले शिकवे भुलाने की ज़रूरत आज हैदिल के रिश्तों को ज़ुबाँ से तोड़ना मुमकिन कहाँअपनों को अपना बनाने की ज़रूरत आज हैघर बनाना है अगर मज़बूत फिर खुद को हमेनींव का पत्थर बनाने की ज़रूरत आज हैअपने हक़ की बात करना ही फ़क़त काफ़ी नहींफ़र्ज भी अपना निभाने की ज़रूरत आज हैबूढ़ा बरगद है परेशाँ कुछ परिंदों के लिएउनको घर वापस…See More
Nov 7
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Gajendra shrotriya's blog post दिल बड़ा अपना बनाने की ज़रूरत आज है-ग़ज़ल
"अच्छी ग़ज़ल हुई आदरणीय..बधाई"
Nov 6
Samar kabeer commented on Gajendra shrotriya's blog post दिल बड़ा अपना बनाने की ज़रूरत आज है-ग़ज़ल
"'दिल के रिश्तों को ज़बाँ से तोडना मुमकिन नहीं' इस मिसरे को यूँ कर लें तो ऐब निकल जाएगा:- 'दिल के रिश्तों को ज़बाँ से तोडना मुमकिन कहाँ' 'घर बनाना है अगर मज़बूत,फिर ख़ुद को हमें'"
Nov 6
SALIM RAZA REWA commented on Gajendra shrotriya's blog post दिल बड़ा अपना बनाने की ज़रूरत आज है-ग़ज़ल
"आ. गजेंद्र जी, ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए बधाई."
Nov 6

Profile Information

Gender
Male
City State
kota Rajsthan
Native Place
rajsthan
Profession
Teacher at state govt. Rajasthan

Gajendra shrotriya's Blog

दिल बड़ा अपना बनाने की ज़रूरत आज है-ग़ज़ल

2122 /2122/ 2122 /212



दिल बड़ा अपना बनाने की ज़रूरत आज है

टूटते रिश्ते बचाने की ज़रुरत आज है



प्यार जितना है जताने की ज़रूरत आज है

अपनापन खुलकर दिखाने की ज़रूरत आज है



हँसते आँगन में पसर जाए न सन्नाटा कहीं

सब गिले शिकवे भुलाने की ज़रूरत आज है



दिल के रिश्तों को ज़ुबाँ से तोड़ना मुमकिन कहाँ

अपनों को अपना बनाने की ज़रूरत आज है



घर बनाना है अगर मज़बूत फिर खुद को हमे

नींव का पत्थर बनाने की ज़रूरत आज है



अपने हक़ की बात करना… Continue

Posted on November 5, 2017 at 7:00pm — 19 Comments

गज़ल- आज ढ़लती धूप सी हैं

2122/2122/2122/212



आज ढ़लती धूप सी हैं दादी नानी फिर कहाँ

तिफ़्ल सुनले चाँद परियों की कहानी फिर कहाँ



घर घरोंदे गुड्डे गुडिया राजा रानी फिर कहाँ

कश्तियाँ कागज की ये बारिश का पानी फिर कहाँ



छोड़ ये टीवी मोबाइल दौड़कर तितली पकड़

बचपना जी भरके जी ऐसी रवानी फिर कहाँ



पेड़ों की शाखें हैं सूनी खेल के मैदान चुप

जूझना हालात से सीखे जवानी फिर कहाँ



माँ के आंचल से पिता के कांधे तक फैली थी जो

बचपने की वो हुकूमत हुक्मरानी फिर… Continue

Posted on September 1, 2017 at 9:11pm — 16 Comments

ग़ज़ल - इक जलतरंग दिल में बजाकर चले गए

221 / 2121 / 1221 / 212



इक जलतरंग दिल में बजाकर चले गए

वो रंगे इश्क मुझपे चढ़ाकर चले गए



जैसे गुलाब की कली हो जाए संदली

ख़ुशबू फिज़ा में ऐसी मिलाकर चले गए



बादल उड़े फ़लक पे बने नक़्श वो हसीं

उस नाज़नीं की याद दिलाकर चले गए



मुस्कान दे गए मुझे बचपन के यार कुछ

मेरी उदासियों को चुराकर चले गए



जुगनू ही बनके रह गए सूरज कई यहाँ

कोरस में गीत कितने ही गाकर चले गए



क्यूं शम्स के उजाले ये नींदों के फूलों से

ख्वाबों की… Continue

Posted on August 5, 2017 at 9:30pm — 21 Comments

एक नज़्म - रतजगे

एक नज़्म

रतजगे

इक खयाल दिल मे उठा

रात के सन्नाटे मे

मेरी नींदों को उड़ाकर

क्या वो भी जागी है

मैं ही बुनता हूँ उसके

ख्वाब या फिर

मेरे ख़याल से

वाबस्ता वो भी है

मेरे अश्कों के लबों पे

है बस सवाल यही

उसके तकिये पे भी

थोड़ी सी नमी है कि नहीं

रतजगों से है परेशान

अब मेरा बिस्तर

उसने भी काटी है क्या

कोई शब जगकर

मेरे ज़ेहन के दरीचों से…

Continue

Posted on May 2, 2014 at 6:00am — 13 Comments

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At 7:22pm on April 6, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय गजेन्द्र श्रोतिया जी,
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी प्रस्तुति  ग़ज़ल ("ओबीओ लाइव तरही मुशायरा" अंक 45 में प्रस्तुत) को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |


शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी

संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 

ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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