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Gajendra shrotriya
  • 36, Male
  • Kota , Rajasthan
  • India
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Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"अच्छे अशआर हुए हैं आदरणीय सुरखाब बशर साहब। शुभकामनाओं सहित बधाई स्वीकार करें।"
Nov 23
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आपका आभारी हूँ आदरणीय।"
Nov 23
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आभार आदरणीय।"
Nov 23
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"हार्दिक आभार आदरणीय शिज्जू शकूर साहब।"
Nov 23
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आपका हृदय से आभार आदरणीय पंकज जी अपेक्षित सुधार हेतु प्रयासरत हूँ । "
Nov 23
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका आभारी हूँ आ० राज़ नवादवी साहब।"
Nov 23
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आपका हृदय से आभार आदरणीय,  अपेक्षित सुधार हेतु प्रयासरत हूँ । "
Nov 23
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"सराहना के लिए हार्दिक आभार आदरणीय अनीस शेख साहब।"
Nov 23
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"वाह ! बहुत अच्छी ग़ज़ल कही आपने आ० राजेश कुमारी जी। सटीक तंज किये हैं वर्तमान सियासी माहौल पर। शुभकामनाओं के साथ बधाई स्वीकार करें।"
Nov 23
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"ख़ूब ! बहुत ख़ूब! ग़ज़ल हुई है आदरणीय मो० आरिफ साहब। बधाई स्वीकार करें।"
Nov 23
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"बहूत ख़ूब ग़ज़ल हुई है आदरणीय अनीस शेख साहब। शुभकामनाओं सहित बधाई स्वीकार करें।"
Nov 23
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आपके दिल में गर क़याम करेंहम भी हासिल कोई मक़ाम करें  दिल से हम आपको सलाम करें आप ऐसा तो कोई काम करें सुब्ह मीठी सुहानी शाम करेंकुछ न कुछ तो हमारे नाम करें ख़त्म तारीक़ी का निज़ाम करेंआओ सूरज का एहतेराम करें हम हैं बूंदें तलाशें सागर कोजीस्त फ़ित्नों…"
Nov 23
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आदरणीय समर कबीर साहब।सादर अभिवादन। आपके लिखे पर कुछ कहने लायक तो मैं स्वयं को नही पाता, आपका आशीष और नसीहत इस शेर के रूप में मेने पा लिया है // इससे किरदार परखा जाता है, यूँ ज़बाँ को न बे लगाम करें// बधाई सहित मेरी विनीत शुभकामनाएँ स्वीकार…"
Nov 23
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आदरणीय शिज्जू शकूर साहब, सादर अभिवादन।उम्दा अशआर हुए हैं आपकी ग़ज़ल में। सभी शेर पसंद आए। शुभकामनाओं के साथ बधाई स्वीकार करें।"
Nov 23
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
" आदरणीय नादिर ख़ान साहब, सादर अभिवादन, उम्दा अशआर कहें हैं आपने। गिरह भी ख़ूब लगाई है। सम्पूर्ण ग़ज़ल के साथ इन अशआर पर खास तौर से मुबारकबाद कुबूल करें //है मुकम्मल नहीं जहाँ में कोई यूँ न कमियों को सबकी आम करें// //रिज़्क लिक्खा तो है मुकद्दर…"
Nov 23
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आदरणीय राज़ नवादवी साहब। अच्छी ग़ज़ल से मुशायरे की शुरुआत की है आपने। हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ स्वीकार कीजिए।"
Nov 23

Profile Information

Gender
Male
City State
kota Rajsthan
Native Place
rajsthan
Profession
Teacher at state govt. Rajasthan

Gajendra shrotriya's Blog

चेह्रा फ़क़त हसीं न हो दिल भी हसीं रहे - तरही ग़ज़ल

221  2121 1221 212



राह- ए- बदी से हम कभी वाक़िफ़ नहीं रहे 

फिर भी तेरे निशाने पे वाइज़ हमीं रहे     

कर ग़ौर अपने तौर-तरीकों पे एक बार

चहरा फ़क़त हसीं न हो दिल भी हसीं रहे 



दिल के दियार की ज़रा रौनक बहाल हो

गर इस मकाँ में आप सा कोई मकीं रहे

कर इश्क या जगा दे तसव्वुफ़ तेरी रज़ा

ऐ दिल तेरे खिलाफ़ कभी हम नहीं रहे 



अब भी यहीं हैं फूल कली चाँद सब मगर

दिलकश तुम्हारे बाद ये उतने नहीं रहे



दिल के…

Continue

Posted on December 6, 2017 at 8:30pm — 12 Comments

दिल बड़ा अपना बनाने की ज़रूरत आज है-ग़ज़ल

2122 /2122/ 2122 /212



दिल बड़ा अपना बनाने की ज़रूरत आज है

टूटते रिश्ते बचाने की ज़रुरत आज है



प्यार जितना है जताने की ज़रूरत आज है

अपनापन खुलकर दिखाने की ज़रूरत आज है



हँसते आँगन में पसर जाए न सन्नाटा कहीं

सब गिले शिकवे भुलाने की ज़रूरत आज है



दिल के रिश्तों को ज़ुबाँ से तोड़ना मुमकिन कहाँ

अपनों को अपना बनाने की ज़रूरत आज है



घर बनाना है अगर मज़बूत फिर खुद को हमे

नींव का पत्थर बनाने की ज़रूरत आज है



अपने हक़ की बात करना… Continue

Posted on November 5, 2017 at 7:00pm — 20 Comments

गज़ल- आज ढ़लती धूप सी हैं

2122/2122/2122/212



आज ढ़लती धूप सी हैं दादी नानी फिर कहाँ

तिफ़्ल सुनले चाँद परियों की कहानी फिर कहाँ



घर घरोंदे गुड्डे गुडिया राजा रानी फिर कहाँ

कश्तियाँ कागज की ये बारिश का पानी फिर कहाँ



छोड़ ये टीवी मोबाइल दौड़कर तितली पकड़

बचपना जी भरके जी ऐसी रवानी फिर कहाँ



पेड़ों की शाखें हैं सूनी खेल के मैदान चुप

जूझना हालात से सीखे जवानी फिर कहाँ



माँ के आंचल से पिता के कांधे तक फैली थी जो

बचपने की वो हुकूमत हुक्मरानी फिर… Continue

Posted on September 1, 2017 at 9:11pm — 16 Comments

ग़ज़ल - इक जलतरंग दिल में बजाकर चले गए

221 / 2121 / 1221 / 212



इक जलतरंग दिल में बजाकर चले गए

वो रंगे इश्क मुझपे चढ़ाकर चले गए



जैसे गुलाब की कली हो जाए संदली

ख़ुशबू फिज़ा में ऐसी मिलाकर चले गए



बादल उड़े फ़लक पे बने नक़्श वो हसीं

उस नाज़नीं की याद दिलाकर चले गए



मुस्कान दे गए मुझे बचपन के यार कुछ

मेरी उदासियों को चुराकर चले गए



जुगनू ही बनके रह गए सूरज कई यहाँ

कोरस में गीत कितने ही गाकर चले गए



क्यूं शम्स के उजाले ये नींदों के फूलों से

ख्वाबों की… Continue

Posted on August 5, 2017 at 9:30pm — 21 Comments

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At 7:22pm on April 6, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय गजेन्द्र श्रोतिया जी,
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी प्रस्तुति  ग़ज़ल ("ओबीओ लाइव तरही मुशायरा" अंक 45 में प्रस्तुत) को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |


शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी

संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 

ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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