For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

राजस्थानी साहित्य

Information

राजस्थानी साहित्य

इस ग्रुप मे राजस्थानी साहित्य लिखा जा सकता है |

Location: विश्व
Members: 38
Latest Activity: Dec 18, 2022

Discussion Forum

राजस्थानी भाषा में दोहे

एक प्रयास ( राजस्थानी भाषा  में दोहे )छोरी चाली सासरे ,पकड़ बींद रो हाथ।बाबुल रो घर छोड़ियो , बींद बणायो नाथ ।।बाबुल रो घर छोड़यो, बींद बणायो नाथ ।दारू पी कर बींद ने, खूब मरोड़ो हाथ ।।आँख दिखावे बापरो,…Continue

Started by Sushil Sarna Dec 18, 2022.

किशोर छंद

किशोर छंदकिशोर मुक्तक "कोरोना"भारी रोग निसड़लो आयो, कोरोना,सगलै जग मैं रुदन मचायो, कोरोना,मिनखाँ नै मिनखाँ सै न्यारा, यो कीन्योकुचमादी चीन्याँ रो जायो, कोरोना।*** ***किशोर मुक्तक "बालाजी"एक आसरो…Continue

Tags: छंद, किशोर

Started by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' Dec 9, 2021.

हेली गीत "परदेशाँ जाय बैठ्या"

हेली गीत "परदेशाँ जाय बैठ्या"परदेशाँ जाय बैठ्या बालमजी म्हारी हेली!ओळ्यूँ आवै सारी रात।हिया मँ उमड़ै काली कलायण म्हारी हेली!बरसै नैणां स्यूँ बरसात।।मनड़ा रो मोर करै पिऊ पिऊ म्हारी हेली!पिया मेघा ने दे…Continue

Tags: हेली_गीत

Started by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' Apr 26, 2021.

जकड़ी गीत "आसरो थारो बालाजी"

जकड़ी गीत "आसरो थारो बालाजी"आसरो थारो बालाजी, काज सब सारो बालाजी।भव सागर से पार उतारो, नाव फंसी मझ धाराँ जी।।जद रावण सीता माता नै, हर लंका में ल्याओ,सौ जोजन का सागर लाँघ्या, माँ को पतो लगायो।आसरो थारो…Continue

Tags: राजस्थानी, जकड़ी

Started by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' Apr 26, 2021.

गीत (रोज सुणै है कै)

रोज 'सुणै है कै' कै बाळो जद बोल्यो 'सुण धापाँ'।सुणकै मुळकी, हुयो हियो है तब सै बागाँ बागाँ।आज खटिनै से बागाँ माँ ये कोयलड़ी कूकी,पाणी सिंच्यो आज बेल माँ पड़ी जकी थी सूकी,मुख सै म्हारो नाँव सुन्यो तो…Continue

Started by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' Aug 30, 2020.

एक राजस्थानी मुसल्सल ग़ज़ल -यादड़ल्याँ रा घोड़ां ने थे पीव लगावो एड़ |

एक राजस्थानी मुसल्सल ग़ज़ल ***यादड़ल्याँ रा घोड़ां ने थे पीव लगावो एड़ | सुपणे मांयां आय पिया जी छोड़ो म्हासूँ छेड़ | १| ***इंया तो म्हें गेली प्रीतड़ली में थांरी भोत चालूँ थांरे लारे लारे ज्यूँ सीधी सी भेड़…Continue

Started by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' Jan 11, 2019.

सावण सूखो क्यूँ !

सावण सूखो क्यूँ !इबकाळ रामजी न जाण के सूझी, क बरसण क दिनां मं च्यारूँ कान्या तावड़ की  बळबळती सिगड़ी सिलागायाँ बठ्यो है | जठे देखो बठे…Continue

Started by Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' Mar 4, 2016.

बिठाऊँ केइया नाव म- - -- - - (राजस्थानी गीत)

बिठाऊँ केइया नाव म- - -- - - छोटी सी या म्हारी  है नाँव,जादू भरया लागे थारा पाँव |मनै डर सता रह्यों है राम,थानै बिठाऊँ केइया नाँव में | म्हारी तो या लकड़ी री नाँव,थे बणाद्यों भाटा न भी नार |ई सूं मनै…Continue

Started by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला Jun 27, 2015.

राजस्थानी कविता उत्सव 26 फरवरी से 28 फरवरी तक आयोजित 1 Reply

राजस्थानी साहित्य प्रेमियों को यह जानकार प्रसन्नता होगी कि साहित्य अकादमी, दिल्ली और राजस्थान अध्ययन केंद्र, राजथान यूनिवर्सिटी, जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में 26 से 28 फरवरी,2015 तक राजस्थान…Continue

Started by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला. Last reply by डिम्पल गौड़ Feb 27, 2015.

धरती रंग सुरंगी ...

धरती रंग सुरंगी सी मन मां रस जगावे रे ऊँचा ऊँचा टीबा इण रांजीवण री आस जगावे रेलहर लहर लहरियों उड़ उड़आसमान पर छावे रेपंछी भी तो गीत धरा का मधुर स्वरां म गावे रे धरती रंग सुरंगी सी मन मां रस जगावे…Continue

Tags: कविता

Started by डिम्पल गौड़ Feb 15, 2015.

 

Members (38)

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अशोक भाईजी धन्यवाद ... मेरा प्रयास  सफल हुआ।"
9 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह वाह वाह !!! बहुत दिनों बाद ऐसी लाजवाब प्रतिक्रिया पढने में आई है। कांउटर अटैक ॥ हजारों धन्यवाद…"
9 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी सादर, सरकारी शालाओं की गलत परम्परा की ओर ध्यान आकृष्ट कराती…"
9 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"सार्थक है आपका सुझाव "
9 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ रचना पटल पर उपस्थिति और समीक्षाओं हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी। मेरी…"
9 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभाजी ।  इसमें कुछ कमी हो सकती है लेकिन इस प्रकार के आयोजन शहरों…"
9 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, बिना सोचे बोलने के परिणाम पर सुन्दर और संतुलित लघुकथा…"
9 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"अमराई में उत्सव छाया,कोयल को न्यौता भिजवाया। मौसम बदले कपड़े -लत्ते, लगे झूमने पत्ते-…"
9 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"ठण्ड गई तो फागुन आया। जन मानस में खुशियाँ लाया॥ आम  लगे सब हैं बौराने। पंछी गाते सुर में…"
9 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"लघुकथा किसी विसंगति से उभरती है और अपने पीछे पाठको के पीछे एक प्रश्न छोड़ जाती है। सबकुछ खुलकर…"
10 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अखिलेश जी स्वयं के प्रचार प्रसार के लिए इस तरह के प्रायोजित कार्यक्रमों का चलन साहित्य और…"
10 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"  जी ! //हापुस लँगड़ा नीलम केसर। आम सफेदा चौसा उस पर।।//... कुछ इस तरह किया जा सकता है.…"
10 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service