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राजस्थानी साहित्य Discussions (12)

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एक राजस्थानी मुसल्सल ग़ज़ल -यादड़ल्याँ रा घोड़ां ने थे पीव लगावो एड़ |

एक राजस्थानी मुसल्सल ग़ज़ल ***यादड़ल्याँ रा घोड़ां ने थे पीव लगावो एड़ | सुपणे मांयां आय पिया जी छोड़ो म्हासूँ छेड़ | १| ***इंया तो म्हें गेली प्र…

Started by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत '

0 Jan 11, 2019

सावण सूखो क्यूँ !

सावण सूखो क्यूँ ! इबकाळ रामजी न जाण के सूझी, क बरसण क दिनां मं च्यारूँ कान्या तावड़ की  बळबळती सिगड़ी सिलागायाँ बठ्यो है | जठे देखो बठे ई…

Started by Ganga Dhar Sharma 'Hindustan'

0 Mar 4, 2016

बिठाऊँ केइया नाव म- - -- - - (राजस्थानी गीत)

बिठाऊँ केइया नाव म- - -- - -   छोटी सी या म्हारी  है नाँव, जादू भरया लागे थारा पाँव | मनै डर सता रह्यों है राम, थानै बिठाऊँ केइया नाँव में…

Started by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला

0 Jun 27, 2015

राजस्थानी कविता उत्सव 26 फरवरी से 28 फरवरी तक आयोजित

राजस्थानी साहित्य प्रेमियों को यह जानकार प्रसन्नता होगी कि साहित्य अकादमी, दिल्ली और राजस्थान अध्ययन केंद्र, राजथान यूनिवर्सिटी, जयपुर के स…

Started by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला

1 Feb 27, 2015
Reply by डिम्पल गौड़ 'अनन्या'

धरती रंग सुरंगी ...

धरती रंग सुरंगी सी  मन मां रस जगावे रे  ऊँचा ऊँचा टीबा इण रां जीवण री आस जगावे रे लहर लहर लहरियों उड़ उड़ आसमान पर छावे रे पंछी भी तो गीत ध…

Started by डिम्पल गौड़ 'अनन्या'

0 Feb 15, 2015

कस्तूरी री महक

थारे बिण म्हारो जियो रे  भटके  सुण क्यूं न  लेवे   तू म्हारी पुकार  म्हाने रात्यां में नींद कोणी  आवे रे  थारी ओल्युं ढोला म्हाने जगावे  रे…

Started by डिम्पल गौड़ 'अनन्या'

1 Feb 2, 2015
Reply by डिम्पल गौड़ 'अनन्या'

मीरा बाट जोवे थारी .....

म्हारी आँख्यां  बाट जोवे थारी  ओ  सावरिया म्हारा  गिरधारी  मीरा रे मन री  बातां समझे रे कुण आ तो दरस निहारे थारी ओ बनवारी वीणां रां तार बाज…

Started by डिम्पल गौड़ 'अनन्या'

2 Jan 31, 2015
Reply by डिम्पल गौड़ 'अनन्या'

फरक है याद रै मांय / राजस्थानी कविता/ कृष्ण वृहस्पति

म्हूं तेरै पांती रै मेह मांय भीजै हो जणा तू तपै ही मेरै हिस्सै रै तावड़ै मांय। आज भी तूं म्हारी याद रै मरूथळ मांय बळै है दिन-रात अर म्हे बै…

Started by Krishan Vrihaspati

0 Sep 13, 2013

सुप्रभात राजस्थान

लाल सुरंगो सूरज ऊग्यौ, सुरंगो हुयौ असमान। कहे बिरकाळी भायां नै, सुप्रभात राजस्थान।। बात बताऊं एक पते गी, सुणल्यौ ध्यान लगाय। आपणी भाषा राज…

Started by सतवीर वर्मा 'बिरकाळी'

0 Feb 28, 2013

राजस्थानी भाषारी मान्यता र वास्ते

राजस्थानी भाषारी मान्यता र वास्ते  विकास बारे में राजस्थान साहित्य अकादमी न पुरजोर मांग कर राजस्थानी भाषा न  मान्यता दिलाबा र वास्ते जितरी…

Started by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला

0 Feb 19, 2013

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