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गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत '
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गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post हक़ीक़त का हमेशा सामना करने से डरते हैं (१२४ )
"भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'  जी , उत्साहवर्धन के लिए सादर आभार "
Oct 2
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post हक़ीक़त का हमेशा सामना करने से डरते हैं (१२४ )
"आ. भाई गिरधारी सिंह जी, सादर अभिवादन । उम्दा गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Oct 2
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted a blog post

हक़ीक़त का हमेशा सामना करने से डरते हैं (१२४ )

++ग़ज़ल++( 1222 1222 1222 1222 )हक़ीक़त का हमेशा सामना करने से डरते हैंमुहब्बत की वो पहले इब्तिदा करने से डरते हैंमुहब्बत की उन्हें हासिल नहीं होती कभी मंज़िलजहाँ में जो भी इज़हार-ए-वफ़ा करने से डरते हैंन उन की कोई सुनता है न अपनी बात कह पातेजो अक्सर लोग अर्ज़-ए-मुद्दआ करने से डरते हैंकोई भी इल्म हो काबू में उनके आ नहीं सकताबशर जो ज़ीस्त में कोई ख़ता करने से डरते हैंवबा का ज़ुल्म है जारी ख़ुदा भी हो गया बहराहुए हालात ऐसे हम दुआ करने से डरते हैंबने हमराह ऐसे ग़म कि आदत हो गई इनकीग़मों को ज़िंदगी से हम जुदा…See More
Oct 2
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post फ़ितरत से हूँ मैं सब से जुदागाना समझिये (123)
"भाई  आशीष यादव  जी उत्साहवर्धन के लिए बहुत बहुत आभार एवं नमन | "
Oct 1
आशीष यादव commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post फ़ितरत से हूँ मैं सब से जुदागाना समझिये (123)
"आदरणीय गिरधारी सिंह गहलोत'तुरंत'जी प्रणाम, ख़ूबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार कीजिए।"
Oct 1
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post फ़ितरत से हूँ मैं सब से जुदागाना समझिये (123)
"भाई Nilesh Shevgaonkar जी , क़ाफ़िया रदीफ़ , कुछ भी हो कहीं भी मात्रा गिरा लो कोई दिक्कत नहीं है | हम लोग तो वरिष्ठ शाइरों के कलाम देखकर ही सीखते हैं | वैसे यह ग़ज़ल शकील साहेब की एक ग़ज़ल  पढ़ते पढ़ते   हो गई थी | जिसमें ये…"
Sep 30
Nilesh Shevgaonkar commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post फ़ितरत से हूँ मैं सब से जुदागाना समझिये (123)
"आ. तुरंत जी,मेरी मुराद क़ाफिये की मात्रा गिराए जाने से है..बाकी अन्य जगह से नहीं.सादर "
Sep 30
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted a blog post

फ़ितरत से हूँ मैं सब से जुदागाना समझिये (123)

( 221 1221 1221 122 )फ़ितरत से हूँ मैं सब से जुदागाना समझियेहै इश्क़ मुझे आप न दीवाना समझियेदस्तूर निभाए हैं सभी प्यार के मैंनेरस्म-ओ-रह-ए-उल्फ़त से न बेगाना समझियेरूदाद मेरे प्यार की है यारो हक़ीक़ततारीख़ का क़िस्सा कि न अफ़्साना समझियेसीखा है हुनर जल के बचा लेता हूँ ख़ुद कोमरता ही रहूँ ऐसा न परवाना समझियेसाक़ी को हिदायत है कि मय धीरे से डालेबेकार मैं छलकूँ वो न पैमाना समझियेहासिल है हमें जो भी ये जज़्बा-ए-मुहब्बतअल्लाह का अनमोल-सा नज़राना समझियेहै पाक सनम मस्जिद-ओ-मंदर सा मेरा दिलमहफ़िल कि इसे आप न मयख़ाना…See More
Sep 30
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post फ़ितरत से हूँ मैं सब से जुदागाना समझिये (123)
"भाई  Nilesh Shevgaonkar  जी , आपकी हौसला आफ़जाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया |  मात्रा गिराना उर्दू ग़ज़ल के अरूज़ में किसी भी प्रकार का ऐब नहीं है , सिर्फ मीर ही क्यों ग़ालिब ,फैज़ ,राहत ,इन्दोरी , दाग़ देहलवी ,किस किस का नाम गिनाएं सब बड़े और…"
Sep 29
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post फ़ितरत से हूँ मैं सब से जुदागाना समझिये (123)
"Dimple Sharma जी , हार्दिक आभार "
Sep 29
Nilesh Shevgaonkar commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post फ़ितरत से हूँ मैं सब से जुदागाना समझिये (123)
"आ. तुरंत साहब अच्छी ग़ज़ल के लिए बधाई। बस एक बात जो खटक रही है वो यह कि क़ाफ़िया की मात्रा को गिरा कर पढ़ना पड़ रहा है। हालांकि ऐसा मीर ने भी किया है लेकिन आमतौर पर ऐसा होना दोष माना जाता है।  आपकी रचना पर आपको पुनः बधाई"
Sep 29
Dimple Sharma commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post फ़ितरत से हूँ मैं सब से जुदागाना समझिये (123)
"आदरणीय गिरधारी सिंह गहलोत'तुरंत'जी नमस्ते, ख़ूबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें, चौथा शेर और आठवां शेर बहुत ज्यादा पसंद आए, बधाई स्वीकार करें।"
Sep 29
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted a blog post

फ़ितरत से हूँ मैं सब से जुदागाना समझिये (123)

( 221 1221 1221 122 )फ़ितरत से हूँ मैं सब से जुदागाना समझियेहै इश्क़ मुझे आप न दीवाना समझियेदस्तूर निभाए हैं सभी प्यार के मैंनेरस्म-ओ-रह-ए-उल्फ़त से न बेगाना समझियेरूदाद मेरे प्यार की है यारो हक़ीक़ततारीख़ का क़िस्सा कि न अफ़्साना समझियेसीखा है हुनर जल के बचा लेता हूँ ख़ुद कोमरता ही रहूँ ऐसा न परवाना समझियेसाक़ी को हिदायत है कि मय धीरे से डालेबेकार मैं छलकूँ वो न पैमाना समझियेहासिल है हमें जो भी ये जज़्बा-ए-मुहब्बतअल्लाह का अनमोल-सा नज़राना समझियेहै पाक सनम मस्जिद-ओ-मंदर सा मेरा दिलमहफ़िल कि इसे आप न मयख़ाना…See More
Sep 28
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post आती है जब शमीम-ए-सदाक़त ज़बान से(१२२ )
"आदरणीय Harash Mahajan जी ,इस प्रेरक प्रतिक्रिया एवं उत्साहवर्धन हेतु हार्दिक आभार  "
Sep 11
Harash Mahajan commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post आती है जब शमीम-ए-सदाक़त ज़बान से(१२२ )
"वाह आदरणीय गिरधारी सिंह गहलोत जी बहुत ही उम्दा । कितना सपाट कहा है " इज्ज़त बचानी आपको है बज़्म में अगर तो गुफ्तगू करें न किसी बदज़बान से" ये तो बहुत पसंद आया मगर पूरी ग़ज़ल ही शानदार । सादर"
Sep 11
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post आती है जब शमीम-ए-सदाक़त ज़बान से(१२२ )
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'  जी इस प्रेरक प्रतिक्रिया एवं उत्साहवर्धन हेतु हार्दिक आभार  "
Sep 11

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हक़ीक़त का हमेशा सामना करने से डरते हैं (१२४ )

++ग़ज़ल++( 1222 1222 1222 1222 )
हक़ीक़त का हमेशा सामना करने से डरते हैं
मुहब्बत की वो पहले इब्तिदा करने से डरते हैं
मुहब्बत की उन्हें हासिल नहीं होती कभी मंज़िल
जहाँ में जो भी इज़हार-ए-वफ़ा करने से डरते हैं
न उन की कोई सुनता है न अपनी बात कह पाते
जो अक्सर लोग अर्ज़-ए-मुद्दआ करने से डरते हैं
कोई भी इल्म हो काबू में उनके आ नहीं…
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Posted on October 1, 2020 at 1:00pm — 2 Comments

फ़ितरत से हूँ मैं सब से जुदागाना समझिये (123)

( 221 1221 1221 122 )
फ़ितरत से हूँ मैं सब से जुदागाना समझिये…
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Posted on September 27, 2020 at 10:00pm — 8 Comments

आती है जब शमीम-ए-सदाक़त ज़बान से(१२२ )

( 221 2121 1221 212 )
आती है जब शमीम-ए-सदाक़त ज़बान से
तो क्यों चले न हम जहाँ में यार शान से
जैसे बदलती रुख़ है सबा अपना यक ब यक
वैसे कभी पलटते नहीं हम बयान से
कार-ए-जियाँ में कट रही कैसे है ज़िंदगी
पूछेगा दर्द कौन किसी नौ-जवान से
मेरी सलामती है सुबूत-ए-शिक़स्त-ए-ज़ुल्म
ख़ाली गया है तीर जो निकला कमान…
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Posted on August 31, 2020 at 7:00pm — 6 Comments

तमाम उम्र किया मैंने इन्तिज़ार तेरा (१२१ )

(1212 1122 1212 22 /112 )
तमाम उम्र किया मैंने इन्तिज़ार तेरा
नहीं रहा कभी मुमकिन भुलाना प्यार तेरा
**
न तेरी आहटों का सिलसिला रुका था कभी
हवाएँ करती रहीं ज़िक्र बार बार तेरा
**
सजा रखीं हैं करीने से दिल में यादें तेरी

कि दिल की धड़कनों पे अब भी इख़्तियार तेरा

**

अगरचे तुझ से मुलाक़ात अब है ना-मुमकिन

मगर है…
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Posted on August 30, 2020 at 4:00pm — 8 Comments

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