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गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत '
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गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post रस्सा-कशी खेल था जीवन(५८ )
"आदरणीय Samar kabeer साहेब ,आपके आशीर्वचनों से कृतकृत्य हुआ ,सृजन सार्थक हुआ ,सादर आभार एवं नमन | "
16 hours ago
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post रस्सा-कशी खेल था जीवन(५८ )
"जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब, अच्छा गीत लिखा आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
23 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post क्यों चिंता की लहरें मुख पर आखिर क्या है बात प्रिये ? (५७)
"आदरणीय Samar kabeer साहेब , आपकी सराहनात्मक  प्रतिक्रिया के लिए ह्रदय तल से आभार एवं सादर नमन |"
yesterday
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted a blog post

रस्सा-कशी खेल था जीवन(५८ )

एक विरह गीत===========रस्सा-कशी खेल था जीवनएक तरफ का रस्सा छोड़ा |इतनी भी क्या जल्दी थी जोमीत अचानक नाता तोड़ा |**जीवन नदिया अपनी धुन मेंअठखेली करती बहती थी |और खुशी भी इस आँगन मेंअपनी मर्जी से रहती थी |सब कुछ अपने काबू में थाकैसे रहना क्या करना है,हाँ थोड़े से दुख के झटकेकभी ज़िंदगी भी सहती थी |लेकिन तुम थे साथ हमेशाहँस हँस कर सह ली हर पीड़ा,खत्म कर दिया चन्द पलों मेंख़ुद जो तुमने बंधन जोड़ा |इतनी भी क्या ..........**अब पुरवैया भूल गई हैतुम बिन मन आँगन में आना |कौन सवेरे रोज चुगायेछत पर जा चिड़ियों को…See More
yesterday
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post क्यों चिंता की लहरें मुख पर आखिर क्या है बात प्रिये ? (५७)
"जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब,बहुत सुंदर गीत लिखा आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
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गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post किसी के प्यार की ख़ातिर हमारा दिल तरसे (५६ )
"आदरणीय  Samar kabeer साहेब ,आपकी हौसला आफजाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया | शाद-ओ-आबाद-ओ-सेहतयाब रहें | "
yesterday
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post किसी के प्यार की ख़ातिर हमारा दिल तरसे (५६ )
"आदरणीय  Samar kabeer साहेब ,आपकी हौसला आफजाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया | शाद-ओ-आबाद-सेहतयाब रहें | "
yesterday
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"जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल कही आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
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क्यों चिंता की लहरें मुख पर आखिर क्या है बात प्रिये ? (५७)

एक गीत प्रीत का --------------------क्यों चिंता की लहरें मुख पर आखिर क्या है बात प्रिये ? पलकों के कोरों पर ठहरी क्यों कर है बरसात प्रिये ?**शुष्क अधर क्यों बाल बिखर कर अलसाये हैं शानों पर ?काजल क्रोधित होकर पिघला जा पहुँचा है कानों पर | मीत कपोलों पर जो रहती वह गायब है अरुणाई | ऐसा लगता है ज्यों खो दी चंद पलों में तरुणाई | सजना धजना भूल गयी सब और मलिन मुख हो बैठी क्या है दुख जो आज अचानक जागी सारी रात प्रिये ?पलकों के कोरों पर ठहरी क्यों कर है बरसात प्रिये ?**पहला पहला प्यार ह्रदय में परिवर्तन…See More
Thursday
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क्यों चिंता की लहरें मुख पर आखिर क्या है बात प्रिये ? (५७)

एक गीत प्रीत का --------------------क्यों चिंता की लहरें मुख पर आखिर क्या है बात प्रिये ? पलकों के कोरों पर ठहरी क्यों कर है बरसात प्रिये ?**शुष्क अधर क्यों बाल बिखर कर अलसाये हैं शानों पर ?काजल क्रोधित होकर पिघला जा पहुँचा है कानों पर | मीत कपोलों पर जो रहती वह गायब है अरुणाई | ऐसा लगता है ज्यों खो दी चंद पलों में तरुणाई | सजना धजना भूल गयी सब और मलिन मुख हो बैठी क्या है दुख जो आज अचानक जागी सारी रात प्रिये ?पलकों के कोरों पर ठहरी क्यों कर है बरसात प्रिये ?**पहला पहला प्यार ह्रदय में परिवर्तन…See More
Aug 20
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किसी के प्यार की ख़ातिर हमारा दिल तरसे (५६ )

किसी के प्यार की ख़ातिर हमारा दिल तरसे घटा-ए-इश्क़ तो छाई न जाने कब बरसे ** न तीर दिल पे चला यार ज़ख़्म गर देना कि इस पे ज़ख़्म हुआ करते जब गुल-ए-तर से ** क़दम बढ़ाना भी मुश्किल है जानिब-ए-मंज़िल मिला फ़रेब हमें इस क़दर है रहबर से ** करेगा चूर अगर ज़ुल्म की हदें टूटें उमीद और है क्या आईने को पत्थर से ** ख़ुदाया देख ज़रा भी किसी को, दर्द नहीं किसी के दर्द बड़े हो गए समंदर से ** लकीरें हाथों की जिसने बनाई मेहनत से उसे हुआ है भला कब गिला मुक़द्दर से ** उगलते बनते न ग़म और निगलते भी न बनें हुए है हाल…See More
Aug 19
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मिटाने फासले तुझको अगर है गुफ़्तगू कर ले (५५ )

मिटाने फासले तुझको अगर हैं  गुफ़्तगू कर ले  सियेगा ज़ख्म कोई सोच मत ख़ुद ही रफ़ू कर ले  ** मुक़ाबिल ख़ौफ़-ए-ग़म होजा अगर पीछा छुड़ाना है ग़मों से भाग मत इक बार तू रुख़ रूबरू कर ले  ** नहीं महफ़ूज़ गुलशन में कली कच्ची अभी तक भी  बचा है कौन अब उसकी जो फ़िक्र-ए-आबरू कर ले  ** कोई तो दर्द है दिल में लबों पर आ नहीं पाता  वगरना कौन है जो चश्म दोनों आबजू कर ले  ** नहीं तूने ख़ता कोई अगर की ख़ौफ़ किसका है  नहीं मुमकिन कोई मर्ज़ी से अपना ज़र्द-रू कर ले  **छुपाएगा अगर ग़म को बढ़ेगा दर्द ज़िद मत कर  यही बेहतर किसी के साथ तू…See More
Jul 30
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post मिटाने फासले तुझको अगर है गुफ़्तगू कर ले (५५ )
"कमियों पर नज़र डालकर दुरुस्त करवाने के लिए बहुत बहुत आभार आदरणीय समर कबीर साहेब ,सादर नमन | "
Jul 30
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post मिटाने फासले तुझको अगर है गुफ़्तगू कर ले (५५ )
"जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें । 'मिटाने फासले तुझको अगर है गुफ़्तगू कर ले' इस मिसरे में 'फ़ासले' शब्द बहुवचन है,इस कारण 'है' को "हैं" कर लें…"
Jul 30
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted a blog post

मिटाने फासले तुझको अगर है गुफ़्तगू कर ले (५५ )

मिटाने फासले तुझको अगर हैं  गुफ़्तगू कर ले  सियेगा ज़ख्म कोई सोच मत ख़ुद ही रफ़ू कर ले  ** मुक़ाबिल ख़ौफ़-ए-ग़म होजा अगर पीछा छुड़ाना है ग़मों से भाग मत इक बार तू रुख़ रूबरू कर ले  ** नहीं महफ़ूज़ गुलशन में कली कच्ची अभी तक भी  बचा है कौन अब उसकी जो फ़िक्र-ए-आबरू कर ले  ** कोई तो दर्द है दिल में लबों पर आ नहीं पाता  वगरना कौन है जो चश्म दोनों आबजू कर ले  ** नहीं तूने ख़ता कोई अगर की ख़ौफ़ किसका है  नहीं मुमकिन कोई मर्ज़ी से अपना ज़र्द-रू कर ले  **छुपाएगा अगर ग़म को बढ़ेगा दर्द ज़िद मत कर  यही बेहतर किसी के साथ तू…See More
Jul 26
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post "मुहब्बत की नहीं मुझसे " , प्रिये ! तुम झूठ मत बोलो |  (५३ )
"आपकी स्नेहिल सराहना से उत्साहवर्धन के लिए ह्रदय तल से आभार narendrasinh chauhan साहेब "
Jul 25

Profile Information

Gender
Male
City State
BIKANER (RAJASTHAN)
Native Place
BIKANER
Profession
RETIRED GOVT EMPLOYEE
About me
POET WRITER

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रस्सा-कशी खेल था जीवन(५८ )

एक विरह गीत

===========

रस्सा-कशी खेल था जीवन

एक तरफ का रस्सा छोड़ा |

इतनी भी क्या जल्दी थी जो

मीत अचानक नाता तोड़ा |

**

जीवन नदिया अपनी धुन में

अठखेली करती बहती थी |

और खुशी भी इस आँगन में

अपनी मर्जी से रहती थी |

सब कुछ अपने काबू में था

कैसे रहना क्या करना है,

हाँ थोड़े से दुख के झटके

कभी ज़िंदगी भी सहती थी |

लेकिन तुम थे साथ हमेशा

हँस हँस कर सह ली हर…

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Posted on August 25, 2019 at 1:30pm — 2 Comments

क्यों चिंता की लहरें मुख पर आखिर क्या है बात प्रिये ? (५७)

एक गीत प्रीत का 

--------------------

क्यों चिंता की लहरें मुख पर आखिर क्या है बात प्रिये ? 

पलकों के कोरों पर ठहरी क्यों कर है बरसात प्रिये ?

**

शुष्क अधर क्यों बाल बिखर कर अलसाये हैं शानों पर ?

काजल क्रोधित होकर पिघला जा पहुँचा है कानों पर | 

मीत कपोलों पर जो रहती वह गायब है अरुणाई | 

ऐसा लगता है ज्यों खो दी चंद पलों में तरुणाई…

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Posted on August 20, 2019 at 9:00am — 2 Comments

किसी के प्यार की ख़ातिर हमारा दिल तरसे (५६ )

किसी के प्यार की ख़ातिर हमारा दिल तरसे

घटा-ए-इश्क़ तो छाई न जाने कब बरसे

**

न तीर दिल पे चला यार ज़ख़्म गर देना

कि इस पे ज़ख़्म हुआ करते जब गुल-ए-तर से

**

क़दम बढ़ाना भी मुश्किल है जानिब-ए-मंज़िल

मिला फ़रेब हमें इस क़दर है रहबर से

**

करेगा चूर अगर ज़ुल्म की हदें टूटें

उमीद और है क्या आईने को पत्थर से

**

ख़ुदाया देख ज़रा भी किसी को, दर्द नहीं

किसी के दर्द बड़े हो गए समंदर से

**

लकीरें हाथों की जिसने बनाई मेहनत से

उसे…

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Posted on August 18, 2019 at 1:00am — 2 Comments

मिटाने फासले तुझको अगर है गुफ़्तगू कर ले (५५ )



मिटाने फासले तुझको अगर हैं  गुफ़्तगू कर ले 

सियेगा ज़ख्म कोई सोच मत ख़ुद ही रफ़ू कर ले 

**

मुक़ाबिल ख़ौफ़-ए-ग़म होजा अगर पीछा छुड़ाना है

ग़मों से भाग मत इक बार तू रुख़ रूबरू कर ले 

**

नहीं महफ़ूज़ गुलशन में कली कच्ची अभी तक भी 

बचा है कौन अब उसकी जो फ़िक्र-ए-आबरू कर ले 

**

कोई तो दर्द है दिल में लबों पर आ नहीं पाता …

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Posted on July 26, 2019 at 5:30pm — 2 Comments

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