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गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत '
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Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post जब आपकी नज़र में वफ़ा सुर्ख़रू नहीं (२७ )
"'ग़लत'12 होता है,'ग़ल्त'कोई शब्द ही नहीं,ये शायद पंजाबी उच्चारण है । "ग़लती" 112 इसलिए है कि 'गेन' पर और 'लाम' दोनों पर 'ज़बर' होता है,इस शब्द को लिख कर विस्तार से समझाना मुश्किल है,बोल कर बहतर…"
11 hours ago
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yesterday
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post जब तिरंगे में लिपट गांव वो आया होगा (२८ )
"आदरणीय Samar kabeer साहेब ,आदाब और रचना की सराहना के लिए सादर आभार | "
yesterday
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post जब आपकी नज़र में वफ़ा सुर्ख़रू नहीं (२७ )
"आदरणीय Samar kabeer साहेब आदाब | आपकी हौसला आफजाई के लिए ह्रदय तल से आभार | गलती =११२ भी हो सकता है यह तो आज ही पता चला | आम तौर पर दो लघु पास आने पर ११=२ ही होता देखा है | ग़लत =१२ और ग़ल्त =२१ भी लोगों को लेते हुए देखा है | संभव हो और समय…"
yesterday
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post जब तिरंगे में लिपट गांव वो आया होगा (२८ )
"जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब,अमर शहीदों को अपनी रचना से अच्छा ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश किया आपने,बधाई स्वीकार करें । 'जब तिरंगे में लिपट गांव वो आया होगा' इस मिसरे में तनाफ़ुर देखें,मिसरा यूँ कर सकते हैं:- 'वो तिरंगे में…"
yesterday
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post जब आपकी नज़र में वफ़ा सुर्ख़रू नहीं (२७ )
"जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें । 'गलती से प्यार को करें बे-आबरू नहीं' इस मिसरे में "ग़लती" शब्द का वज़्न 112 होता है,देखियेगा । 'उस मुल्क की अवाम के बढ़ने हैं…"
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"जयहिंद "
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"जय हिन्द "
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जब तिरंगे में लिपट गांव वो आया होगा (२८ )

शहीदों को ख़िराजे अक़ीदत  ------------------------------ वो  तिरंगे में लिपट गांव जब आया होगा | तो हर इक शख़्स ने चुल्हा न जलाया होगा | ****** क्या न गुज़रेगी किसी दिल पे बयाँ हो कैसे  आख़री फूल तिरे सर पे चढ़ाया होगा | ****** जब गए दोस्त उसे आज सलामी देने याद गुज़रा उसे  बचपन भी फिर  आया होगा | ****** अश्क करते है बयाँ ज़ीस्त जो बाक़ी मेरी  आज के बाद न महबूब का साया होगा | ****** 'तेरी ख़ुशबू से जवाँ रात है मेरी अब तक ' आख़री ख़त में ये पैग़ाम भी आया होगा |  ******* फ़ख़्र से सर भी उठा और नमी आँखों में  तेरा…See More
Friday
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post जब आपकी नज़र में वफ़ा सुर्ख़रू नहीं (२७ )
"amod shrivastav (bindouri)  जी आपकी स्नेहिल सराहना के लिए हार्दिक आभार | "
Thursday
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post थम रही हैं क्यों नहीं ये सिसकियाँ (२५ )
"आदरणीय Samar kabeer साहेब , मद्दाह में दुख्त और दुख्तर ही लिखा है | हालाँकि जैसा आपने बताया मद्दाह पर भरोसा करना मुश्किल है | एक और प्रयोग में भी दुख्त =बेटी ही है | (यहाँ नुक्ता यूनिकोड में नहीं आ रहा है ) बे-दुख़्त-ए-रज़بے دخت…"
Thursday
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post थम रही हैं क्यों नहीं ये सिसकियाँ (२५ )
""दुख़्त" दुख़्तर का मुख़फ़्फ़फ़् नहीं "दुख़" है,देखियेगा ।"
Thursday
amod shrivastav (bindouri) commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post जब आपकी नज़र में वफ़ा सुर्ख़रू नहीं (२७ )
" आ दादा रचना की बधाई  सभी अर्शआर अच्छे लगे ...नमन"
Thursday
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गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post थम रही हैं क्यों नहीं ये सिसकियाँ (२५ )
"आदरणीय Samar kabeer साहेब | आदाब | इतना ध्यान रखा फिर भी एक हैं की गलती रह ही गई | आपकी हौसला आफजाई के लिए शुक्रगुजार हूँ | दुख्त =बेटी /कन्या का अर्थ लिया है जिसे दुख्तर  का लघु माना जाता है | "
Wednesday
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post थम रही हैं क्यों नहीं ये सिसकियाँ (२५ )
"जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'अब घरों में भी कहाँ महफ़ूज़ है ' इस मिसरे में 'है' को "हैं" कर लें । 'दुख्त* पर लागू पुराने क़ायदे' इस मिसरे…"
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जिस मुल्क में ग़रीब के लब पर हँसी नहीं (२९ )

जिस मुल्क में ग़रीब के लब पर हँसी नहीं 

तो मान कर चलें कि तरक़्क़ी हुई नहीं 

**

जुम्लों के दम पे जीत की आशा न कीजिये 

चलती है बार बार ये बाज़ीगरी नहीं 

**

तहज़ीब क़त्ल-ओ-ख़ून की परवान चढ़ रही 

लगता है आदमी रहा अब आदमी नहीं 

**

उम्मीद रहगुज़र कोई मिलने की मत करें 

मंज़िल के वास्ते है अगर तिश्नगी नहीं 

**

चाहें ख़ुशी जो आप…

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Posted on February 16, 2019 at 4:30pm

जब तिरंगे में लिपट गांव वो आया होगा (२८ )

शहीदों को ख़िराजे अक़ीदत 

------------------------------

वो  तिरंगे में लिपट गांव जब आया होगा |

तो हर इक शख़्स ने चुल्हा न जलाया होगा |

******

क्या न गुज़रेगी किसी दिल पे बयाँ हो कैसे 

आख़री फूल तिरे सर पे चढ़ाया होगा |

******

जब गए दोस्त उसे आज सलामी देने 

याद गुज़रा उसे  बचपन भी फिर  आया होगा |…

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Posted on February 15, 2019 at 1:00pm — 4 Comments

जब आपकी नज़र में वफ़ा सुर्ख़रू नहीं (२७ )

(२२१ २१२१ १२२१ २१२ )

जब आपकी नज़र में वफ़ा सुर्ख़रू नहीं 

दिल में हमारे इश्क़ की अब आरजू नहीं 

**

रुसवा किये बिना किसी को हों जुदा जुदा 

गलती से प्यार को करें बे-आबरू नहीं 

**

रिश्तों की सीवनों पे ज़रा ग़ौर कीजिये 

उधड़ीं जो एक बार तो होतीं रफ़ू नहीं 

**

उस मुल्क की अवाम के बढ़ने हैं रंज-ओ-ग़म 

जिस मुल्क में मुहब्बतों की आबजू…

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Posted on February 14, 2019 at 2:00am — 5 Comments

थम रही हैं क्यों नहीं ये सिसकियाँ (२५ )

थम रही हैं क्यों नहीं ये सिसकियाँ 

क्यों परेशां हैं चमन में तितलियाँ 

***

साल सत्तर से भले आज़ाद हैं 

आज भी सजती बदन की मंडियाँ

***

अब घरों में भी कहाँ महफ़ूज़ हैं 

ख़ौफ़ के साये में रहती बेटियाँ 

***

ये बशर कैसी तेरी मर्दानगी 

मार देता क्यों है नन्ही बच्चियाँ 

***

कहते हैं हम बेटा-बेटी एक से 

फ़र्क़…

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Posted on February 13, 2019 at 12:30am — 4 Comments

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