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गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत '
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गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post किस तरह होते फ़ना प्यार निभाने के लिए (४६ )
"vijay nikore साहेब बहुत बहुत शुक्रिया हौसला आफजाई के लिए | "
Tuesday
vijay nikore commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post किस तरह होते फ़ना प्यार निभाने के लिए (४६ )
"गज़ल अच्छी लिखी है। बधाई गिरधारी सिंह जी"
Tuesday
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Jun 13
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post किस तरह होते फ़ना प्यार निभाने के लिए (४६ )
"बे'पनाह, मुहब्बतों, नवाज़िशों का दिल से बे'हद शुक्रिया ! शाद-औ-आबाद रहें आदरणीय Samar kabeer साहेब   "
Jun 12
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post किस तरह होते फ़ना प्यार निभाने के लिए (४६ )
"जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें । 'किस तरह होते फ़ना प्यार निभाने के लिए' इस मिसरे को यूँ कर लें,इसमें 'हज़फ़-ए-लफ़्ज़ का ऐब है:- 'कैसे होते हैं फ़ना प्यार निभाने के…"
Jun 11
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted a blog post

किस तरह होते फ़ना प्यार निभाने के लिए (४६ )

कैसे होते हैं  फ़ना प्यार निभाने के लिए  छोड़ जाऊंगा नज़ीर ऐसी ज़माने के लिए  ** रूह का हुस्न जिसे दिखता वही आशिक़ है  जिस्म का हुस्न तो होता है लुभाने के लिए  ** दरमियाँ गाँठ दिलों के जो पड़ी कब सुलझी  कौन दीवार उठाता है गिराने के लिए  ** अच्छे लोगों की कमी रहती है क्या जन्नत में  क्यों ख़ुदा उनको है तैयार बुलाने के लिए  ** आग को देना हवा काम बचा लोगों का  कोशिशें कोई न करता है बुझाने के लिए  ** दाँत खाने के जुदा जिनके दिखाने के जुदा  लोग ऐसे हैं ख़तरनाक ज़माने के लिए  **दिन ब दिन और हुए जाते हैं हालात…See More
Jun 8
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post वफ़ा ढूंढते हो जफ़ा के नगर में यहाँ पर वफ़ा अब बची ही कहाँ है (४५ )
" गिरिराज भंडारी जी आपकी हौसला आफजाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया | सादर नमन | तक़बूले रदीफ़ संज्ञान में तो था लेकिन शिल्प की दृष्टि से इस लम्बी बह्र में इग्नोर किया क्योंकि मुझे तीरगी को  खीरगी से मिलाना था | वैसे अहमद फ़राज़ जैसे शायर…"
Jun 1

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post वफ़ा ढूंढते हो जफ़ा के नगर में यहाँ पर वफ़ा अब बची ही कहाँ है (४५ )
"आदरणीय गिरधारी सिंह जी अच्छी ग़ज़ल कही है , दिली बधाईयाँ स्वीकार करें | पांचवे शेर में तकाबुले रदीफ  दोष आ गया है .. संभव  हो तो देख लीजिएगा |"
Jun 1
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted a blog post

वफ़ा ढूंढते हो जफ़ा के नगर में यहाँ पर वफ़ा अब बची ही कहाँ है (४५ )

(१२२ १२२ १२२ १२२ १२२ १२२ १२२ १२२ ).वफ़ा ढूंढते हो जफ़ा के नगर में यहाँ पर वफ़ा अब बची ही कहाँ है  बुझी है वफ़ा की मशालें दिलों से वफ़ा का नहीं कोई नाम-ओ-निशाँ है  ** यहाँ राज करते हवस के पुजारी किसी की नहीं है मुहब्बत से यारी  इधर बेवफ़ाओं का लगता है मेला कोई बावफ़ा अब न मिलता यहाँ है  ** इधर पैसा फेंको दिखेगा तमाशा अगर जेब ख़ाली मिलेगी हताशा  इधर है न रिश्ता न कोई सगा है फ़क़त पैसा होता धरम और इमाँ है  ** यहाँ नाम-लेवा वफ़ा का न कोई वफ़ा की यहाँ सबने उम्मीद खोई  सजी है दुकानें यहाँ जिस्म की बस मुहब्बत की…See More
Jun 1
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post रंज-ओ-ग़म हो न अगर आँखें कभी रोती क्या ?(४४)
"आपकी सराहनापूर्ण उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए अंतस से आभार भाई narendrasinh chauhan   जी "
May 29
narendrasinh chauhan commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post रंज-ओ-ग़म हो न अगर आँखें कभी रोती क्या ?(४४)
"सुन्दर रचना"
May 29
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post रंज-ओ-ग़म हो न अगर आँखें कभी रोती क्या ?(४४)
"आपकी सराहनापूर्ण उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए अंतस से आभार संग नमन |Sushil Sarna जी "
May 28
Sushil Sarna commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post रंज-ओ-ग़म हो न अगर आँखें कभी रोती क्या ?(४४)
"गज़ब के अशआर हैं आदरणीय गहलोत साहिब .... दिल में उतर जाते हैं आपके शे'र .... दिल से मुबारकबाद कबूल फरमाएं सर।"
May 28
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted blog posts
May 28
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : मैं अपने आप को दफ़ना रहा हूँ
"क्या बात है लाजवाब | समर सर की इस्लाह भी लाजवाब | "
May 27
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल- बलराम धाकड़ (मुहब्बत के सफ़र में सैकड़ों आज़ार आने हैं)
"लाजवाब ग़ज़ल | आदरणीय समर सर की इस्लाह से तो जबरदस्त निखार आ गया है | "
May 27

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ताज़ा गर दिल टूटा है तो वक़्त ज़रा दीजै (४७ )

ताज़ा गर दिल टूटा है तो वक़्त ज़रा दीजै 

क़ायम रखना रिश्ता है तो वक़्त ज़रा दीजै 

**

सिर्फ़ शनासाई से होता प्यार कहाँ मुमकिन 

इश्क़ मुक़म्मल करना है तो वक़्त ज़रा दीजै 

**

पहले के दिल के ज़ख़्मों का भरना है बाक़ी 

ज़ख़्म नया गर देना है तो वक़्त ज़रा दीजै 

**

ख़्वाब कभी क्या बुनने से ही होता है कामिल 

पूरा करना सपना है तो वक़्त ज़रा…

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Posted on June 13, 2019 at 1:30am

किस तरह होते फ़ना प्यार निभाने के लिए (४६ )

कैसे होते हैं  फ़ना प्यार निभाने के लिए 

छोड़ जाऊंगा नज़ीर ऐसी ज़माने के लिए 

**

रूह का हुस्न जिसे दिखता वही आशिक़ है 

जिस्म का हुस्न तो होता है लुभाने के लिए 

**

दरमियाँ गाँठ दिलों के जो पड़ी कब सुलझी 

कौन दीवार उठाता है गिराने के लिए 

**

अच्छे लोगों की कमी रहती है क्या जन्नत में 

क्यों ख़ुदा उनको है तैयार बुलाने…

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Posted on June 8, 2019 at 12:30pm — 4 Comments

वफ़ा ढूंढते हो जफ़ा के नगर में यहाँ पर वफ़ा अब बची ही कहाँ है (४५ )

(१२२ १२२ १२२ १२२ १२२ १२२ १२२ १२२ )

.

वफ़ा ढूंढते हो जफ़ा के नगर में यहाँ पर वफ़ा अब बची ही कहाँ है 

बुझी है वफ़ा की मशालें दिलों से वफ़ा का नहीं कोई नाम-ओ-निशाँ है 

**

यहाँ राज करते हवस के पुजारी किसी की नहीं है मुहब्बत से यारी 

इधर बेवफ़ाओं का लगता है मेला कोई बावफ़ा अब न मिलता यहाँ है 

**

इधर पैसा फेंको दिखेगा तमाशा अगर जेब ख़ाली मिलेगी हताशा 

इधर है न…

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Posted on May 31, 2019 at 4:30pm — 2 Comments

रंज-ओ-ग़म हो न अगर आँखें कभी रोती क्या ?(४४)

(२१२२ ११२२ ११२२ २२/११२ )

.

रंज-ओ-ग़म हो न अगर आँखें कभी रोती क्या ?

बेसबब साहिल-ए-मिज़गाँ पे नमी होती क्या ?

**

ज़ख़्म ख़ुद साफ़ करें और लगाएं मरहम

ज़ख़्म क़ुदरत किसी के ज़िंदगी में धोती क्या ?

**

चन्द लोगों के नसीबों में लिखी है ग़ुरबत

ज़ीस्त सबकी ग़मों का बोझ कभी ढोती क्या ?

**

बाग़बाँ फ़र्ज़ निभाता जो तू मुस्तैदी से

तो कली बाग़ की अस्मत को कभी खोती क्या ?

**

क्यों किनारे पे कई बार सफ़ीने डूबे

इस तरह रब कभी क़िस्मत किसी की…

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Posted on May 28, 2019 at 12:30am — 4 Comments

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