For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत '
Share

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s Friends

  • Samar kabeer

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s Groups

 

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s Page

Latest Activity

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post वक़्त ने हमसे मुसल्सल इस तरह की रंजिशें (११९ )
"आपकी स्नेहिल सराहना के लिए हार्दिक आभार Dimple Sharma जी  एवं नमन | "
Saturday
Dimple Sharma commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post वक़्त ने हमसे मुसल्सल इस तरह की रंजिशें (११९ )
"आदरणीय गिरधारी सिंह गहलोत'तुरंत'जी नमस्ते, इस खुबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय।"
Saturday
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post वक़्त ने हमसे मुसल्सल इस तरह की रंजिशें (११९ )
"आशीष यादव जी , हौसला आफ़जाई के लिए दिल से शुक्रिया | "
Aug 5
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post वक़्त ने हमसे मुसल्सल इस तरह की रंजिशें (११९ )
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी , स्नेहिल सराहना के लिए दिली शुक्रिया एवं सादर नमन | "
Aug 5
आशीष यादव commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post वक़्त ने हमसे मुसल्सल इस तरह की रंजिशें (११९ )
"एक बढ़िया ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय।"
Aug 5
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post वक़्त ने हमसे मुसल्सल इस तरह की रंजिशें (११९ )
"आ. भाई गिरधारी सिंह जी, सादर अभिवादन । बेहतरीन गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Aug 5
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted a blog post

वक़्त ने हमसे मुसल्सल इस तरह की रंजिशें (११९ )

एक ग़ैर मुरद्दफ़ ग़ज़ल (2122 2122 2122 212 )वक़्त ने हमसे मुसल्सल इस तरह की रंजिशेंख़ुदक़ुशी को हो गईं मज़बूर अपनी ख़्वाहिशेंअजनबी जो भी मिले सारे मुहब्बत से मिलेऔर की हैं ख़ास अपनों ने हमेशा साज़िशेंक्या ख़ुदा नाराज़ है कुछ आदमी से इन दिनोंगर्मियोँ के बाद आईं थोक में हैं बारिशेंक्यों नुज़ूमी को दिखाता हाथ है तू बार बारक्या लकीरें हाथ की रोकेंगीं तेरी गर्दिशेंबात सब करते हैं लेकिन दी कहाँ आज़ादियाँमुल्क में हैं बेटियों पर अब तलक भी बंदिशेंकब तलक बरपा रहेगा क़ह्र क़ुदरत का ख़ुदाऔर जलाएँगीं हमें कब तक वबा की…See More
Aug 4
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post तू अपने आप को अब मेरे रू ब रू कर दे(११८ )
"हौसला आफ़जाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया भाई बृजेश कुमार 'ब्रज'  जी , सादर नमन | "
Aug 4
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post तू अपने आप को अब मेरे रू ब रू कर दे(११८ )
"बेहतरीन ग़ज़ल कही आदरणीय गिरधारी जी..."
Aug 4
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post तू अपने आप को अब मेरे रू ब रू कर दे(११८ )
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'  जी , हौसला आफ़जाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया | "
Aug 2
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post तू अपने आप को अब मेरे रू ब रू कर दे(११८ )
"आ. भाई गिरधारी सिंह जी, सादर अभिवादन । अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Aug 2
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post अपने हिसार-ए-फ़िक्र से बाहर बशर निकल (११७ )
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सराहना के लिए सादर आभार एवं नमन | "
Aug 1
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post अपने हिसार-ए-फ़िक्र से बाहर बशर निकल (११७ )
"आ. भाई गिरधारी सिह जी, सादर अभिवादन । सुन्दर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Aug 1
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post तू अपने आप को अब मेरे रू ब रू कर दे(११८ )
"बहुत बहुत शुक्रिया Dimple Sharma जी  "
Jul 30
Dimple Sharma commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post तू अपने आप को अब मेरे रू ब रू कर दे(११८ )
"आदरणीय गिरधारी सिंह गहलोत'तुरंत'जी नमस्ते, वाह बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई है आदरणीय खासतौर पर सातवें शेर ने तो जैसे खुद ही वाह करवाई हो , खुबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय।"
Jul 30
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted a blog post

तू अपने आप को अब मेरे रू ब रू कर दे(११८ )

(1212 1122 1212 22 /112 )तू अपने आप को अब मेरे रू ब रू कर देबहुत दिनों की मेरी पूरी आरज़ू कर दे**वबा के वार से दुश्वार हो गया जीनाख़ुदाया अम्न को तारी तू चार सू कर दे**बता मैं दश्त में पानी कहाँ तलाश करूँचल अपनी चश्म के अश्कों से बा-वज़ू कर दे**ख़ुदा किसी को न औलाद ऐसी अब देनाजो वालिदेन की इज़्ज़त लहू लहू कर दे**मैं जानता हूँ सदाओं की भीड़ है फिर भीख़ुदाया मुझ पे करम भी कभू कभू कर दे**सभी का फ़र्ज़ है रखना नज़र पड़ोसी परकि अम्न ख़त्म वतन का न ये अदू कर दे**तलाश करने हैं तुझको कभी जो ऐब तेरेतो ख़ुद को आइने के…See More
Jul 30

Profile Information

Gender
Male
City State
BIKANER (RAJASTHAN)
Native Place
BIKANER
Profession
RETIRED GOVT EMPLOYEE
About me
POET WRITER

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s Blog

वक़्त ने हमसे मुसल्सल इस तरह की रंजिशें (११९ )

एक ग़ैर मुरद्दफ़ ग़ज़ल 

(2122 2122 2122 212 )

वक़्त ने हमसे मुसल्सल इस तरह की रंजिशें

ख़ुदक़ुशी को हो गईं मज़बूर अपनी ख़्वाहिशें

अजनबी जो भी मिले सारे मुहब्बत से मिले

और की हैं ख़ास अपनों ने हमेशा साज़िशें

क्या ख़ुदा नाराज़ है कुछ आदमी से इन दिनों

गर्मियोँ के बाद आईं थोक में हैं बारिशें

क्यों नुज़ूमी को दिखाता हाथ है तू बार बार

क्या लकीरें हाथ की रोकेंगीं तेरी…

Continue

Posted on August 4, 2020 at 9:30pm — 6 Comments

तू अपने आप को अब मेरे रू ब रू कर दे(११८ )

(1212 1122 1212 22 /112 )

तू अपने आप को अब मेरे रू ब रू कर दे

बहुत दिनों की मेरी पूरी आरज़ू कर दे

**

वबा के वार से दुश्वार हो गया जीना

ख़ुदाया अम्न को तारी तू चार सू कर दे

**

बता मैं दश्त में पानी कहाँ तलाश करूँ

चल अपनी चश्म के अश्कों से बा-वज़ू कर दे

**

ख़ुदा किसी को न औलाद ऐसी अब देना

जो वालिदेन की इज़्ज़त लहू लहू कर दे

**

मैं जानता हूँ सदाओं की भीड़…

Continue

Posted on July 30, 2020 at 4:00pm — 6 Comments

अपने हिसार-ए-फ़िक्र से बाहर बशर निकल (११७ )

(221 2121 1221 212 )

अपने हिसार-ए-फ़िक्र से बाहर बशर निकल

दुनिया बदल गई है तू भी अब ज़रा बदल

**

रफ़्तार अपनी वक़्त कभी थामता नहीं

अच्छा यही है वक़्त के माफ़िक तू दोस्त ढल

**

पीछे रहा तो होंगी न दुश्वारियां ये कम

चाहे तरक़्क़ी गर तो ज़माने के साथ चल

**

रिश्ते निभाने के लिए है सब्र लाज़मी

रखना तुझे है गाम हर एक अब सँभल सँभल

**

तूफ़ान में चराग़ की मानन्द क्यों…

Continue

Posted on July 27, 2020 at 10:30pm — 6 Comments

मुहब्बत कीजिए यारो सदा दिलदार की सूरत (११६ )

ग़ज़ल (1222 1222 1222 1222 )

.

मुहब्बत कीजिए यारो सदा दिलदार की सूरत

भरोसा कीजिए मज़बूत इक दीवार की सूरत

**

रहें कुछ राज़ अपनी ज़िंदगी के राज़ ही बेहतर

नहीं अच्छा कि हो ये ज़िंदगी अख़बार की सूरत

**

ख़ुशी के चंद पल ही ज़िंदगी में दोस्त मिलते हैं

मगर आते हैं ग़म अक्सर सबा-रफ़्तार की सूरत

**

भले पैदा हुए हैं आप मुफ़लिस कीजिए कोशिश

न समझें आप ख़ुद को…

Continue

Posted on July 7, 2020 at 6:30pm — 5 Comments

Comment Wall

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

  • No comments yet!
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sarfaraz kushalgarhi commented on Sarfaraz kushalgarhi's blog post नाज़ नख़रों का अंदाज़....
"मुहतरम अमीरुद्दीन साहब नवाज़िश के लिये बहुत शुक्रियः सलामत रहें"
3 minutes ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Sarfaraz kushalgarhi's blog post नाज़ नख़रों का अंदाज़....
"मुहतरम जनाब सरफ़राज़ साहिब आदाब, बहतरीन ग़ज़ल से अपनी मौजूदगी दर्ज करने के लिए आपको दाद के साथ…"
9 minutes ago
Sarfaraz kushalgarhi commented on Sarfaraz kushalgarhi's blog post नाज़ नख़रों का अंदाज़....
"आदरणीय रवि भाई बहुत बहुत शुक्रियः नवाज़िश"
10 minutes ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Sarfaraz kushalgarhi's blog post नाज़ नख़रों का अंदाज़....
"आदरणीय Sarfaraz kushalgarhi भाई, इस सुंदर ग़ज़ल से अपने ओबीओ के सफ़र का आग़ाज़ करने पर आपको…"
21 minutes ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post एक नया दस्तूर (ग़ज़ल - शाहिद फिरोज़पुरी)
"आदरणीय Sarfaraz kushalgarhi भाई, आपका हार्दिक आभार। मंच पर आपका बहुत स्वागत है।"
27 minutes ago
Sarfaraz kushalgarhi posted a blog post

नाज़ नख़रों का अंदाज़....

212 212 212 212 नाज़   नख़रों   का  अंदाज़  अच्छा  लगा इस  मुहब्बत  का  आग़ाज़  अच्छा  लगा-1सोचा  था …See More
28 minutes ago
Rupam kumar -'मीत' posted blog posts
29 minutes ago
Sarfaraz kushalgarhi commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post एक नया दस्तूर (ग़ज़ल - शाहिद फिरोज़पुरी)
"बहुत ख़ूब भाई लाजवाब "
33 minutes ago
रवि भसीन 'शाहिद' left a comment for Sarfaraz kushalgarhi
"आदरणीय Sarfaraz kushalgarhi भाई, आपका बहुत स्वागत है!"
57 minutes ago
Sarfaraz kushalgarhi is now a member of Open Books Online
1 hour ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post ३ क्षणिकाएँ : याद
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से शुक्रिया ।"
3 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post मोहब्बत क्या है .......
"आदरणीय लक्ष्मण धामी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से शुक्रिया ।"
3 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service