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गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत '
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गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted a blog post

किस लिए तर्क-ए-तअल्लुक़ के तू पहलू देखे (131 )

ग़ज़ल( 2122 1122 1122 22 /112 )किस लिए तर्क-ए-तअल्लुक़ के तू पहलू देखेज़ीस्त भर के लिए क्यों हिज्र के बिच्छू देखे**था कभी वक़्त तुझे दिखती थी बस अच्छाईजब भी देखे तू मेरी अब तो बुरी खू देखे**सूखे टुकड़े भी हैं देखे किसी थाली में कभीजाम-ए-मय संग कहीं सजते हैं काजू देखे**इश्क़ में देखे हैं तेज़ाब से झुलसे चेहरेऔर कहीं शम'अ पे लुटते हुए जुगनू देखे**ज़ुल्म ये दोस्त रक़ीबों के भी है बस का नहींकौन चाहेगा तेरी आँख में आंसू देखे**आजकल इश्क़ का मतलब है फ़क़त हासिल-ए-जिस्मकिसको फ़ुरसत है कोई प्यार की ख़ुश्बू देखे**पाटते…See More
Feb 23
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ग़ज़ल
"भाई सालिक गणवीर साहेब , आपकी हौसला आफजाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया , आदरणीय  Samar kabeer साहेब ,हमेशा मेरी शकाओं का समाधान करते रहते हैं , ईश्वर से प्रार्थना है वे हमेशा हमारा मार्गदर्शन करते रहें , उनके दिए समाधान सटीक…"
Feb 20
सालिक गणवीर commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' जी सादर अभिवादन बहुत उम्दः ग़ज़ल कही है आपने ,सर्वप्रथम इसके बधा इयाँ स्वीकार कीजिये। और इससे भी बढ़ कर कबीर साहब की टिप्पणियाँ हैं जिसमें उन्होंने विस्तार पूर्वक मेरी भी बहुत सारी शंकाओं का समाधान…"
Feb 20
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post वो कहते हैं वतन के ख़्वाब हम मिस्मार कर देंगे( 130 )
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'  जी , आदाब , आपकी हौसला आफ़जाई के लिए दिल से शुक्रगुज़ार हूँ | "
Feb 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post वो कहते हैं वतन के ख़्वाब हम मिस्मार कर देंगे( 130 )
"आ. भाई गिरधारी सिंह जी, सादर अभिवादन । अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Feb 19
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post वो कहते हैं वतन के ख़्वाब हम मिस्मार कर देंगे( 130 )
"आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज'  जी , आदाब , आपकी हौसला आफ़जाई के लिए दिल से शुक्रगुज़ार हूँ | "
Feb 19
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post वो कहते हैं वतन के ख़्वाब हम मिस्मार कर देंगे( 130 )
"बहुत ही बढ़िया ग़ज़ल कही है आदरणीय गहलोत जो....तीसरे शे'र पे जरा गौर फरमाएं..सादर।"
Feb 18
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post वो कहते हैं वतन के ख़्वाब हम मिस्मार कर देंगे( 130 )
"भाई Aazi Tamaam जी , आपकी हौसला आफ़जाई के लिए दिल से शुक्रगुज़ार हूँ | "
Feb 17
Aazi Tamaam commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post वो कहते हैं वतन के ख़्वाब हम मिस्मार कर देंगे( 130 )
"सादर प्रणाम जनाब तुरंत जी बेहद खूबसूरत ग़ज़ल है बधाई स्वीकार करें........... "
Feb 17
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted a blog post

वो कहते हैं वतन के ख़्वाब हम मिस्मार कर देंगे( 130 )

वो कहते हैं वतन के ख़्वाब हम मिस्मार कर देंगेसभी के बीच नफ़रत की खड़ी दीवार कर देंगे**सियासत सिर्फ़ चमके एक है उनका यही मक़सदघरों में दुश्मनों की फौज़ को तय्यार कर देंगे**वो ऐसे बीज बोएँगे उगेगी फ़स्ल काँटों कीउन्ही काँटों से फिर हर रास्ता दुश्वार कर देंगे**वो इतनी नफ़रतें भी पाल कर क्यों चैन से रहतेसुकूँ इस मुल्क से क्या ख़त्म कुछ मक्कार कर देंगे**वतन के वास्ते क्या फ़र्ज़ हैं उससे नहीं वाक़िफ़मगर हक़ के लिए तक़रीर की बौछार कर देंगे**रिआया ने दिया दुत्कार जिनको है चुनावों मेंतमन्ना उनकी है जनता को हम लाचार…See More
Feb 17
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post अम्न का माहौल हो आराम-ए-जाँ के वास्ते (129 )
"आदरणीय  अमीरुद्दीन 'अमीर' साहेब  प्रेरक प्रतिक्रिया एवं उत्साहवर्धन हेतु हार्दिक आभार एवं नमन | "
Feb 12
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post अम्न का माहौल हो आराम-ए-जाँ के वास्ते (129 )
"Aazi Tamaam, साहेब , आपकी  प्रेरक प्रतिक्रिया एवं उत्साहवर्धन हेतु हार्दिक आभार एवं नमन |  "
Feb 12
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post अम्न का माहौल हो आराम-ए-जाँ के वास्ते (129 )
"'' क्या फ़साने नज़्म होते हैं फ़क़त अल्फ़ाज़ से    सोज़-ए-दिल भी है ज़रूरी दास्ताँ के वास्ते "  चौथा शे'र ... लाजवाब। मुहतरम 'तुरंत' साहिब आदाब। मुबारकबाद पेश करता हूँ। पाँचवा और छठा शे'र भी उम्दा हुए हैं।…"
Feb 12
Aazi Tamaam commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post अम्न का माहौल हो आराम-ए-जाँ के वास्ते (129 )
"बेहद ही खूबसूरत ग़ज़ल है बधाई स्वीकार करें आ० गहलोत जी"
Feb 11
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post अम्न का माहौल हो आराम-ए-जाँ के वास्ते (129 )
"आदरणीय  Sushil Sarna  जी ,  इस प्रेरक प्रतिक्रिया एवं उत्साहवर्धन हेतु हार्दिक आभार एवं नमन | "
Feb 10
Sushil Sarna commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post अम्न का माहौल हो आराम-ए-जाँ के वास्ते (129 )
"मौज में अपनी गरजते और बरसते हैं सहाबकौन करता है मदद अब्र-ए-रवाँ के वास्ते वाह आदरणीय गहलोत साहब वह क्या अशआर हैं। हमेशा की तरह खूबसूरत अहसासों की शानदार ग़ज़ल. . हार्दिक बधाई सर।"
Feb 10

Profile Information

Gender
Male
City State
BIKANER (RAJASTHAN)
Native Place
BIKANER
Profession
RETIRED GOVT EMPLOYEE
About me
POET WRITER

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किस लिए तर्क-ए-तअल्लुक़ के तू पहलू देखे (131 )

ग़ज़ल( 2122 1122 1122 22 /112 )
किस लिए तर्क-ए-तअल्लुक़ के तू पहलू देखे
ज़ीस्त भर के लिए क्यों हिज्र के बिच्छू देखे
**
था कभी वक़्त तुझे दिखती थी बस अच्छाई
जब भी देखे तू मेरी अब तो बुरी खू देखे
**
सूखे टुकड़े भी हैं देखे किसी थाली में कभी
जाम-ए-मय संग कहीं सजते हैं काजू देखे
**…
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Posted on February 23, 2021 at 9:30pm

वो कहते हैं वतन के ख़्वाब हम मिस्मार कर देंगे( 130 )

वो कहते हैं वतन के ख़्वाब हम मिस्मार कर देंगे
सभी के बीच नफ़रत की खड़ी दीवार कर देंगे
**
सियासत सिर्फ़ चमके एक है उनका यही मक़सद
घरों में दुश्मनों की फौज़ को तय्यार कर देंगे
**
वो ऐसे बीज बोएँगे उगेगी फ़स्ल काँटों की
उन्ही काँटों से फिर हर रास्ता दुश्वार कर देंगे
**
वो इतनी नफ़रतें भी पाल कर…
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Posted on February 16, 2021 at 10:00pm — 6 Comments

अम्न का माहौल हो आराम-ए-जाँ के वास्ते (129 )

ग़ज़ल( 2122 2122 2122 212 )
अम्न का माहौल हो आराम-ए-जाँ के वास्ते
जूँ कि गुल दरकार है इक गुलसिताँ के वास्ते
**
है शराब अच्छी अगर तो रिन्द ख़ाली कर सुबू
पर नमूना छोड़ दे पीर-ए-मुग़ाँ के वास्ते
**
है चना कोई अकेला भाड़ क्या फोड़ेगा वो
लोग होते हैं ज़रूरी कारवाँ के वास्ते
**…
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Posted on February 10, 2021 at 3:30pm — 6 Comments

न तनाब-ए-इश्क़ छुड़ाइए ये सितम हुज़ूर न ढाइए (128 )

ग़ज़ल  ( 11212 11212 11212 11212 )
न तनाब-ए-इश्क़ छुड़ाइए ये सितम हुज़ूर न ढाइए
यही इल्तज़ा है कि दिल से यूँ न उमीद-ए-ज़ीस्त मिटाइए
**
हमें इश्क़ में हैं तलाशने कई संग-ए-रह बनें हमसफ़र
है मुफ़ीद ये कि क़दम सनम ज़रा साथ साथ बढ़ाइए
**
ये जो कनखियों से है देखना ये झुकी नज़र फिर उठी नज़र
ये अदा है आपकी पुरख़तर किसी और को न…
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Posted on February 6, 2021 at 12:30pm

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