For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत '
Share

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s Friends

  • Samar kabeer

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s Groups

 

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s Page

Latest Activity

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted a blog post

ग़रीब हूँ मैं मगर शौक इक नवाबी है(८०)

(1212 1122 1212 22 /112 )ग़रीब हूँ मैं मगर शौक इक नवाबी हैख़िज़ाँ की उम्र में भी दिल मेरा गुलाबी है**अधूरा काम कोई छोड़ना नहीं आताकि मुझ में बचपने से एक ये ख़राबी है**मेरे लिए ही सनम क्यों हया का है पर्दारक़ीब से तो बहुत तेरी बेहिजाबी है**यक़ीन आता नहीं आज चन्द लोगों कीन फ़िक्र और न ही सोच इंकलाबी है**फिर एक बार उठाया है नफ़रतों ने सरकहाँ पे आज हुई गुम सुकूँ की चाबी है**सुकूँ की धूप सहर-शाम बाँटता हूँ मैंअभी तलक मेरी फ़ितरत ये आफ़ताबी है**उक़ाब* चुग रहे हैं इन दिनों सुना दाना (*बाज़ )कबूतरों की हवस हो गई…See More
18 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post छुड़ाना है कभी मुमकिन बशर का ग़म से दामन क्या ? (७० )
"स्नेहिल सराहना के लिए हार्दिक आभार भाई Ram Ashery जी , सादर नमन    "
yesterday
Ram Ashery commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post छुड़ाना है कभी मुमकिन बशर का ग़म से दामन क्या ? (७० )
"अति सुंदर रचना के लिए आपको बहुत बहित बधाई स्वीकार हो "
yesterday
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post यक़ीं के साथ तेरा सब्र इम्तिहाँ पर है(७८)
"हार्दिक आभार  Salik Ganvir जी "
yesterday
Salik Ganvir commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post यक़ीं के साथ तेरा सब्र इम्तिहाँ पर है(७८)
"भाई गहलोत जी. एक और अच्छी ग़ज़ल पोस्ट करने के हार्दिक बधाइयाँ स्वीकारें"
yesterday
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted a blog post

यक़ीं के साथ तेरा सब्र इम्तिहाँ पर है(७८)

(1212 1122 1212  22 /112 )यक़ीं के साथ तेरा सब्र इम्तिहाँ पर हैहयात जैसे बशर लग रही सिनाँ पर है**हमारा मुल्क परेशान और ख़ौफ़ में हैसुकून-ओ-चैन की अब जुस्तजू यहाँ पर है**वजूद अपना बचाने में अब लगा है बशरन जाने आज ख़ुदा छुप गया कहाँ पर है**बचेगा क़ह्र से कोविड के आज कैसे भला बशर पे ज़ुल्म-ओ-सितम उसका आसमाँ पर है**वहाँ की प्यास भला दूर क्या करे कोईशिकार-ए-तिश्नगी ख़ुद आबजू जहाँ पर है**बिछड़ के लौट गया हूँ पनाह दे कि न देये फ़ैसला तो नए मीर-ए-कारवाँ पर है**उठा रहे हैं कई लोग मसअला-ए-जुबाँमुझे तो नाज़ वतन की…See More
yesterday
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post यक़ीं के साथ तेरा सब्र इम्तिहाँ पर है(७८)
"यहाँ सवाल इज़ाफ़त का है,और इज़ाफ़त का नियम ये है कि हिन्दी और अंग्रेज़ी शब्दों में नहीं लगाई जा सकती ।"
Thursday
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post यक़ीं के साथ तेरा सब्र इम्तिहाँ पर है(७८)
"आदरणीय Samar kabeer साहेब , मेरे जिज्ञासा है कि  , व्यक्तिवाचक संज्ञा ,जातिवाचक संज्ञा जिनके नामों में किसी भी भाषा में परिवर्तन न हो पाए , जैसे कोरोना ,कोविड ,कंप्यूटर , ट्रम्प , इमरान खान , प्लेटफार्म , स्टेशन , मोबाईल आदि का…"
Thursday
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post यक़ीं के साथ तेरा सब्र इम्तिहाँ पर है(७८)
""कोविड" शब्द उर्दू का कैसे हुआ?"
Thursday
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post यक़ीं के साथ तेरा सब्र इम्तिहाँ पर है(७८)
"आपकी क़ीमती दाद मेरे लिए वाइस-ए-फ़ख्र है मोहतरम Samar kabeer  साहेब | नवाज़िश-ओ-करम का दिल से शुक्रिया | मेरे ख़याल से संज्ञा शब्द तो हर भाषा में ज्यों के त्यों प्रयोग होते हैं , इसलिए मैंने कोविड को उर्दू शब्द मान लिया है | यदि इस बारे में भी…"
Thursday
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post अंतस के हिम निर्झर से जब भाव पिघलने लगते है|(७९ )
"सादर आभार आदरणीय Dayaram Methani जी "
Thursday
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post अंतस के हिम निर्झर से जब भाव पिघलने लगते है|(७९ )
"सादर आभार आदरणीय Samar kabeer साहेब | "
Thursday
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post अंतस के हिम निर्झर से जब भाव पिघलने लगते है|(७९ )
"जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें ।"
Thursday
Dayaram Methani commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post अंतस के हिम निर्झर से जब भाव पिघलने लगते है|(७९ )
"आदरणीय गिरधारी सिंह गहलोत जी, अति सुंदर रचना के लिए बधाई स्वीकार करें।"
Thursday
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post यक़ीं के साथ तेरा सब्र इम्तिहाँ पर है(७८)
"जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'बचेगा कैसे भला कोई क़ह्र-ए-कोविड से' इस मिसरे में इज़ाफ़त का इस्तेमाल उचित नहीं,देखियेगा ।"
Thursday
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted blog posts
Wednesday

Profile Information

Gender
Male
City State
BIKANER (RAJASTHAN)
Native Place
BIKANER
Profession
RETIRED GOVT EMPLOYEE
About me
POET WRITER

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s Blog

ग़रीब हूँ मैं मगर शौक इक नवाबी है(८०)

(1212 1122 1212 22 /112 )

ग़रीब हूँ मैं मगर शौक इक नवाबी है

ख़िज़ाँ की उम्र में भी दिल मेरा गुलाबी है

**

अधूरा काम कोई छोड़ना नहीं आता

कि मुझ में बचपने से एक ये ख़राबी है

**

मेरे लिए ही सनम क्यों हया का है…

Continue

Posted on April 4, 2020 at 12:30pm

अंतस के हिम निर्झर से जब भाव पिघलने लगते है|(७९ )

अंतस के हिम निर्झर से जब

भाव पिघलने लगते है|

गीतों में ढलने को मेरे

शब्द मचलने लगते हैं ॥

***

लेखन आता नहीं मुझे पर लिखता हृद उद्गारों को |

और बुझा लेता हूँ लिखकर हिय तल के अंगारों को |

कहाँ निभा पाता हूँ अक्सर मैं छंदो का अनुशासन

अलंकार-से भूल गया हूँ शब्दों के श्रृंगारों को |

भाषा शुद्ध न हुई भले ही

लय सुर ताल रहे बाक़ी

बिम्ब-प्रतीक सृजन से जब…

Continue

Posted on April 1, 2020 at 8:00pm — 4 Comments

यक़ीं के साथ तेरा सब्र इम्तिहाँ पर है(७८)

(1212 1122 1212  22 /112 )

यक़ीं के साथ तेरा सब्र इम्तिहाँ पर है

हयात जैसे बशर लग रही सिनाँ पर है

**

हमारा मुल्क परेशान और ख़ौफ़ में है

सुकून-ओ-चैन की अब जुस्तजू यहाँ पर है

**

वजूद अपना बचाने में अब लगा है बशर

न जाने आज ख़ुदा छुप गया कहाँ पर है

**

बचेगा क़ह्र से कोविड के आज कैसे भला 

बशर पे ज़ुल्म-ओ-सितम उसका आसमाँ पर है

**

वहाँ की प्यास भला दूर क्या करे…

Continue

Posted on April 1, 2020 at 1:00pm — 7 Comments

तड़प उनकी भी चाहत की इधर जैसी उधर भी क्या ?(७७ )

(1222 1222 1222 1222 )

तड़प उनकी भी चाहत की इधर जैसी उधर भी क्या ?

लगी आतिश मुहब्बत की इधर जैसी उधर भी क्या ?

**

मिलन के बिन तड़पते हैं वो क्या वैसे कि जैसे हम

जो बेचैनी है सोहबत  की इधर जैसी उधर भी क्या ?

**

हुआ है अनमना सा दिल हुई कुछ शाम भी बोझिल

तम्मना आज ख़िलवत की इधर जैसी उधर भी क्या ? 

**

बग़ैर इक दूसरे के जी सकें और मर न पाएँगे

ज़रूरत ऐसी…

Continue

Posted on March 29, 2020 at 12:00am — 7 Comments

Comment Wall

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

  • No comments yet!
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(शोर हवाओं....)
"आभार आदरणीय।"
8 hours ago
vijay nikore posted blog posts
12 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
12 hours ago
Sushil Sarna replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"ओबीओ परिवार के सभी सदस्यों को ओबीओ की 10 वीं सालगिरह की ढेरों बधाई और शुभकामनाएँ ...."
12 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post कोरोना पर कुछ दोहे :
"आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब , सृजन पर आपकी स्नेहाशीष का दिल से शुक्रिया।"
12 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post कोरोना पर कुछ दोहे :
"आदo   Dayaram Methani जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार।"
12 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post समय :
"आदo  कंवर करतार  जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार।"
12 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post क्षणिकाएँ :
"आदo Rachna Bhatia जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार।"
12 hours ago
Rachna Bhatia commented on Sushil Sarna's blog post क्षणिकाएँ :
"वाह वाह वाह शानदार क्षणिकाएँ। आदरणीय सुशील सरना जी हार्दिक बधाई।"
18 hours ago
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय समर कबीर सर बहुत सुंदर इस्लाह दी।आपकी बहुत आभारी हूँ।साथ ही बार बार तंग करने के लिए मुआफ़ी…"
18 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted a blog post

ग़रीब हूँ मैं मगर शौक इक नवाबी है(८०)

(1212 1122 1212 22 /112 )ग़रीब हूँ मैं मगर शौक इक नवाबी हैख़िज़ाँ की उम्र में भी दिल मेरा गुलाबी…See More
18 hours ago
आशीष यादव posted a blog post

कोरोना

नहीं हमारी नहीं तुम्हारी अखिल विश्व में महा-बिमारी आई पैर पसार भैया मत छोड़ो घर-द्वार भैया मत छोड़ो…See More
19 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service