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Manan Kumar singh
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Samar kabeer commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(ओ प न बु क् स औ न ला इ न)
"जनाब मनन कुमार सिंह जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल है, बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
TEJ VEER SINGH commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(अपना घाव...)
"हार्दिक बधाई आदरणीय मनन कुमार जी।बेहतरीन गज़ल। ऊपर ऊपर जैसा भी होअंदर आग जला के रखना।2"
Monday
TEJ VEER SINGH commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(ओ प न बु क् स औ न ला इ न)
"हार्दिक बधाई आदरणीय मनन कुमार जी।बेहतरीन गज़ल। क्या करोगे जानकर सब सिलसिला?सच मरा है, बातें' टेढ़ी हैं अभी।3"
Monday
Mohammed Arif commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(अपना घाव...)
"आदरणीय मनन कुमार जी आदाब,                                कठिन बह्र में बेहतरी ग़ज़ल । दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें । आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब की इस्लाह का संज्ञान लें ।"
Monday
Mohammed Arif commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(ओ प न बु क् स औ न ला इ न)
"आदरणीय मनन कुमार जी आदाब,                           एक अच्छी ग़ज़ल के लिए शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें । बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।"
Monday
Neelam Upadhyaya commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(अपना घाव...)
"आदरणीय मनन कुमार जी ।  खूबसूरत रचना की प्रस्तुति के लिए  बधाई स्वीकार करें। "
Monday
Manan Kumar singh posted blog posts
Sunday
Samar kabeer commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(अपना घाव...)
"जनाब मनन कुमार सिंह जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें । तीसरे शैर में तक़ाबुल-ए-रदीफ़ देखें । 'कौन सुनता बातें ढब की' ये मिसरा बह्र में नहीं है,यूँ कर सकते हैं:- 'कौन सुनेगा बातें ढब की'"
Sunday
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(अपना घाव...)
"बहुत बहुत शुक्रिया,नमन।"
Sunday
Harash Mahajan commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(अपना घाव...)
"आदरणीय मनन जी आदाब । अति सुंदर पेशकश । बधाई । सादर !"
Sunday
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(हारकर बैठे जुआरी....)
"बहुत बहुत आभार आदरणीय बृज जी।'न' छूट गया है,आपने इंगित किया,इसके लिए अलग से धन्यवाद।"
Apr 18
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(हारकर बैठे जुआरी....)
"आभारी हूँ आदरणीय राम अवध जी।"
Apr 18
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(हारकर बैठे जुआरी....)
"आपका आभार आदरणीय छोटेलाल जी।"
Apr 18
Ram Awadh VIshwakarma commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(हारकर बैठे जुआरी....)
"इदरणीय मनन कुमार जी बहुत खूबसूरत ग़ज़ल कहने के लिये हार्दिक बधाई।"
Apr 17
डॉ छोटेलाल सिंह commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(हारकर बैठे जुआरी....)
"आदरणीय मनन कुमार सिंह जी बहुत बेहतरीन गजल कही आपने इसके लिए बहुत बहुत बधाई"
Apr 17
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(हारकर बैठे जुआरी....)
"जनाब समर जी,आदाब और शुक्रिया।आपकी सलाह काबिले गौर है।जरूर ध्यान में रहेगी।"
Apr 17

Profile Information

Gender
Male
City State
Mumbai
Native Place
E 52 Krishna Apt , Patna
Profession
Service
About me
A poet/ Writer

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गजल(ओ प न बु क् स औ न ला इ न)

2122    2122  212
ओस की बूंदें भी' प्यासी हैं अभी
परकटी चाहें अधूरी हैं अभी।1

नश्तरों का हाल अब मत पूछना
बुत बनी रातें यूँ तारी हैं अभी।2

क्या करोगे जानकर सब सिलसिला?
सच मरा है, बातें' टेढ़ी हैं अभी।3

औरतों के नाम लेके आजकल
नख चले,घातें यूँ' माती हैं अभी।4

लाइलाजों का करो कुछ तो जतन
इल्म वाली बाँहें' बाकी हैं अभी।5

नर्म बिस्तर के सिवा झपकी नहीं?
नाखुदाओ! लपटें' खासी हैं अभी।6
"मौलिक व अप्र का शि त"

Posted on April 22, 2018 at 8:49am — 3 Comments

गजल(अपना घाव...)

22  22  22  22           

अपना घाव छुपा के रखना

मन को भी समझा के रखना।1

ऊपर ऊपर जैसा भी हो

अंदर आग जला के रखना।2

और उजाला करना होगा

थोड़ा तेल बचा के रखना।3             

तीर चलेंगे जाने कितने

देखो ढ़ाल बढ़ा के रखना।4

कौन सुनेगा बातें  ढ़ब की

बाण-धनुष चमका के रखना।5

मंजिल कोई दूर नहीं है

ख्वाहिश को उमगा के रखना।6

रात अँधेरी,चंदा संगी,

रुनझुन बीन बजा के…

Continue

Posted on April 21, 2018 at 7:30pm — 6 Comments

गजल(हारकर बैठे जुआरी....)



     2122   2122   2122 2          

हारकर बैठे जुआरी,हो  नहीं सकता

बंदरों के सर हो टोपी,हो नहीं सकता।1

आसरों का सिलसिला चलता रहा कब से

जो सियासत में,करीबी?हो नहीं सकता।2

रास्ते जितना चले शायद मुनासिब हो

रुक गये तो तय हो बाकी,हो नहीं सकता।3

झूठ पर कुरबान सब हैं किस कदर देखो

सच कहो, हो वाहवाही,हो नहीं सकता।4…

Continue

Posted on April 17, 2018 at 7:26am — 9 Comments

गजल#(आज के दिन पर)

22  22  22  22

मूर्खों का सम्मेलन हो फिर,

बीतीं बातें,चिंतन हो फिर।1

उम्र हुई तो क्या होता है

सुन्नत,चाहे मुंडन हो फिर।2

अपने तर्क उठाते रहिये

औरों का बस खंडन हो फिर।3

जात-धरम अवसाद हुए कब?

मुँहदेखी हो,मंडन हो फिर।4

भाषा,भनिति अबला जैसी

नाच नचा लें,ठन-ठन हो फिर।5

पीठ नहीं पूजी जाये तो

चलते-फिरते अनबन हो फिर।6

पढ़ने से परहेज भला है

मतलब कुछ हो, लेखन हो…

Continue

Posted on April 1, 2018 at 9:08pm — 14 Comments

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At 11:03pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
आदरणीय
श्री मनन कुमार सिंह जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन
At 8:47pm on May 24, 2015, kanta roy said…
स्वागत आपका दोस्त
At 5:20pm on April 12, 2015, Manan Kumar singh said…
आदरणीय गोपालजी, आपकी मित्रता मेरे लिए अमूल्य है।
At 8:29pm on April 7, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ0 मनन जी

आपकी मित्रता मेरा गौरव है . सादर .

 
 
 

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