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Manan Kumar singh
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Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(दीप जला...)
"आदरणीय अजय जी,आभार एवं दीप पर्व की हार्दिक बधाइयाँ।"
19 hours ago
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(दीप जला...)
"आदरणीय समर साहिब,शुक्रिया व दीप-पर्व की शुभकामनाएँ।"
19 hours ago
Ajay Tiwari commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(दीप जला...)
"आदरणीय मनन कुमार जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई है. बधाईयाँ. दीपोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं. सादर"
19 hours ago
Samar kabeer commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(दीप जला...)
"जनाब मनन कुमार सिंह जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें । आपको दीपावली की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं ।"
20 hours ago
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(दीप जला...)
"दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ आदरणीय उस्मानीजी,शुक्रिया।"
20 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(दीप जला...)
"बहुत बढ़िया हिन्दी ग़ज़ल के लिए सादर हार्दिक बधाई आदरणीय मनन कुमार सिंह जी। दीपोत्सव पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं।"
22 hours ago
Afroz 'sahr' commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(आग जलने...)
"आदरणीय मनन कुमार जी इस रचना पर बहुत बहुत बधाई आपको,,,,,"
23 hours ago
Manan Kumar singh posted a blog post

गजल(दीप जला...)

22 22 22 2दीप जले, आभा निखरेहर्षित हो जन- मन मचले।नेह-निरूपित सुप्त मृदाज्योतित करती नेह पिए।बिखरें किरणें,भेद कहाँ?जलते हैं अनिमेष दिये।कौन नियामित कर सकता?ज्योति-कलश के कौन ठिये।आज उझकती रश्मि रथीकिसने उसको पंख दिये?"मौलिक व अप्रकाशित"See More
yesterday
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(आग जलने...)
"आभार आदरणीय"
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Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(आग जलने...)
"आभार आदरणीय अजय जी।"
yesterday
Ajay Tiwari commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(आग जलने...)
"आदरणीय मनन कुमार जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है. शुभकामनाएं. सादर "
Wednesday
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(आग जलने...)
"आदरणीय समर साहिब,आदाब एवं आपका शुक्रिया।"
Monday
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(आग जलने...)
"आदरणीय सलीम भाई,आपका शुक्रिया।"
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Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(आग जलने...)
"आदरणीय आरिफ भाई,आपका शुक्रिया।"
Monday
Samar kabeer commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(आग जलने...)
"जनाब मनन कुमार सिंह जी आदाब,अपने ख़ास अंदाज़ में अच्छी ग़ज़ल कही आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
Monday
SALIM RAZA REWA commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(आग जलने...)
"आ. मनन कुमार जी, ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए मुबारक़बाद."
Monday

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Male
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Mumbai
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E 52 Krishna Apt , Patna
Profession
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गजल(दीप जला...)

22 22 22 2
दीप जले, आभा निखरे
हर्षित हो जन- मन मचले।

नेह-निरूपित सुप्त मृदा
ज्योतित करती नेह पिए।

बिखरें किरणें,भेद कहाँ?
जलते हैं अनिमेष दिये।

कौन नियामित कर सकता?
ज्योति-कलश के कौन ठिये।

आज उझकती रश्मि रथी
किसने उसको पंख दिये?
"मौलिक व अप्रकाशित"

Posted on October 19, 2017 at 12:11pm — 6 Comments

गजल(आग जलने...)

2122 2122 2122
आग जलने पर धुआँ होगा बखूबी
रोशनी की हो नहीं लेकिन मनाही।1

क्यूँ अँधेरा साथ चलता है दियों के
पीटते हैं ढ़ोल की जाती मुनादी।2

गुल खिलाते हैं अँधेरे रोशनी में
और मिलती खूब उनको वाहवाही।3

आ गए कुछ दूर इतना मान भी लें
लग रहा है,हो रही अब भी दिहाड़ी।4

बँट गये हम 'वाद' के 'अवसाद' में बस
और जूठन छानती भूखी 'बुलाकी'।5
"मौलिक व अप्रकाशित"

Posted on October 16, 2017 at 9:07am — 10 Comments

गजल(इक गजल की शाम हो तुम...)

2122 2122
--------------------
इक गजल की शाम हो तुम
धड़कनें गुमनाम हो तुम।1

ख्वाहिशों की संगिनी हो
नींद हो ,आराम हो तुम।2

ढूँढ़ता तब से रहा मैं
ख्वाहिशे-आवाम हो तुम।3

घोल दे जो कान में रस
वह सहज-सा नाम हो तुम।4

राधिका हो तुम किशन की
बीन मेरी,'साम' हो तुम।5

टूटता है जब मनोरथ
उस घड़ी में काम हो तुम।6

भागता फिरता बटोही
बस सुफल इक धाम हो तुम।7
"मौलिक व अप्रकाशित"

Posted on October 10, 2017 at 7:30pm — 6 Comments

गजल(रेत कण से...)

2122 2122 2122 2

रेत- कण से इक घरौंदा मैं बनाता हूँ

अनछुए सब ख्वाब फिर उसमें सजाता हूँ।1



कोशिशें कितनी हुई हैं चाँद पाने की

हर दफा बिखरा पसीने में नहाता हूँ।2



हर लहर आभार कहकर लौट जाती है

प्यास का मारा हुआ मैं तिलमिलाता हूँ।3



बादलों की बदगुमानी का रहा कायल

बूँद पड़ जाये जरा नजरें गड़ाता हूँ।4



कह गयी बदली हवा अब रुत बदलनी है

मैं लुटा गठरी,हमेशा ही लजाता हूँ।5



सच कहा जाता नहीं, सब लोग कहते हैं,

आँच अंतर की… Continue

Posted on October 3, 2017 at 8:56am — 10 Comments

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At 11:03pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
आदरणीय
श्री मनन कुमार सिंह जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन
At 8:47pm on May 24, 2015, kanta roy said…
स्वागत आपका दोस्त
At 5:20pm on April 12, 2015, Manan Kumar singh said…
आदरणीय गोपालजी, आपकी मित्रता मेरे लिए अमूल्य है।
At 8:29pm on April 7, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ0 मनन जी

आपकी मित्रता मेरा गौरव है . सादर .

 
 
 

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