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Manan Kumar singh
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डिम्पल गौड़ 'अनन्या' and Manan Kumar singh are now friends
4 hours ago
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(जैसे तैसे बात बनी है...)
"बहुत बहुत आभार आदरणीय तेजवीर सिंह जी।आपकी स्वीकृति से गजल धन्य हुई,मैं निहाल हुआ।"
Tuesday
TEJ VEER SINGH commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(जैसे तैसे बात बनी है...)
"हार्दिक बधाई आदरणीय  Manan Kumar singh जी।बेहतरीन गज़ल। रंगे आज सियार बहुत हैंमुझपर सबकी आँख लगी है।7 चोट लगी तब जाकर समझाजनता की 'खैरात' बड़ी है।8"
Tuesday
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(जैसे तैसे बात बनी है...)
"आदरणीय समर जी,नमन एवं आभार।"
Sunday
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(जैसे तैसे बात बनी है...)
"आभारी हूँ  आदरणीय नवादवी जी।"
Sunday
Samar kabeer commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(जैसे तैसे बात बनी है...)
"जनाब मनन कुमार सिंह जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।"
Sunday
राज़ नवादवी commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(जैसे तैसे बात बनी है...)
"आदरणीय मनन कुमार सिंह साहब, आदाब. सुन्दर ग़ज़ल की प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई. बाकी गुणीजन बताएँगे. सादर. "
Sunday
Manan Kumar singh posted a blog post

गजल(जैसे तैसे बात बनी है...)

22  22  22 22जैसे-तैसे बात बनी हैरमई चादर हाथ लगी है।1मंदिर-मंदिर घूम रहा मैंचमचा-चमचा आस पली है।2'बबुआ काम करेगा बढ़कर','दादाओं' ने बात कही है।3'मम्मी' का मैं राजदुलारालगता, 'पगड़ी' माथ चढ़ी है।4अपनी कुर्सी पर बैठा 'वह' दिल में कितनी बात खली है!5साँझ-सबेरे ईश-विनय कर'राम-रमा' में प्रीत जगी है।6रंगे आज सियार बहुत हैंमुझपर सबकी आँख लगी है।7चोट लगी तब जाकर समझाजनता की 'खैरात' बड़ी है।8'सोने की चिड़िया' के आगे लघु 'इटली', छोटी 'सिडनी' है।9सब बातों पर बात बना दूँकहते सब,'लेता फिरकी है।'10ऊँची प्रतिमाओं…See More
Sunday
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(उठे हैं.....)
"आपका आभार आदरणीय छोटेलाल सिंह जी।"
Nov 3
डॉ छोटेलाल सिंह commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(उठे हैं.....)
"आदरणीय मनन सिंह जी उम्दा गजल लिखने के लिए हार्दिक बधाई"
Nov 3
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"आदरणीय महेंद्र जी,लघुकथा ने आपको प्रभावित किया,पसंद आई, यह बहुत ख़ुशी की बात है।हाँ, क्रमांक 1 एवं 2 में कथित आपके आशय को मैं नहीं समझ पाया। और जहाँ तक इनवर्टेड कमा का सवाल है,मेरा मानना है कि डैश से काम चलाने में कुछ खराबी नहीं है।हाँ,फायदा यह है कि…"
Oct 31
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"आदरणीय महेंद्र जी,लघुकथा ने आपको प्रभावित किया,पसंद आई, यह बहुत ख़ुशी की बात है।हाँ, क्रमांक 1 एवं 2 में कथित आपके आशय को मैं नहीं समझ पाया। और जहाँ तक इनवर्टेड कमा का सवाल है,मेरा मानना है कि डैश से काम चलाने में कुछ खराबी नहीं है।हाँ,फायदा यह है कि…"
Oct 31
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"आदरणीया प्रतिभा जी,आपको हार्दिक धन्यवाद।"
Oct 31
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"आपका आभार आदरणीय नीलम जी।"
Oct 31
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"आपका आभार आदरणीय लक्ष्मण भाई।"
Oct 31
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"आभार आपका।"
Oct 31

Profile Information

Gender
Male
City State
Mumbai
Native Place
E 52 Krishna Apt , Patna
Profession
Service
About me
A poet/ Writer

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Manan Kumar singh's Blog

गजल(जैसे तैसे बात बनी है...)

22  22  22 22

जैसे-तैसे बात बनी है

रमई चादर हाथ लगी है।1

मंदिर-मंदिर घूम रहा मैं

चमचा-चमचा आस पली है।2

'बबुआ काम करेगा बढ़कर',

'दादाओं' ने बात कही है।3

'मम्मी' का मैं राजदुलारा

लगता, 'पगड़ी' माथ चढ़ी है।4

अपनी कुर्सी पर बैठा 'वह'

दिल में कितनी बात खली है!5

साँझ-सबेरे ईश-विनय कर

'राम-रमा' में प्रीत जगी है।6

रंगे आज सियार बहुत हैं

मुझपर सबकी आँख लगी है।7

चोट…

Continue

Posted on November 11, 2018 at 11:08am — 6 Comments

गजल(उठे हैं.....)

122 122  122 12

उठे हैं किसी को गिरा के मियाँ

चले पाग सर पे सजा के मियाँ।1

कहा था, डरेगा न कोई यहाँ

रहे खुद को हाफ़िज बना के मियाँ।2

रहेगा न सूखा शज़र एक भी--

कहें नीर सारा सुखा के मियाँ।3

मिटी भूख उनकी हुए सब सुखी

चहकते चले माल खा के मियाँ।4

किये लाख सज़दे, मिले कब सनम?

गये थे कभी सर नवा के…

Continue

Posted on October 29, 2018 at 7:15am — 10 Comments

गजल(था कभी...)

2122 2122 2122 212
था कभी कितना नरम वह! हर कदर आखर हुआ
जब हवाओं ने छुआ तब पात वह जर्जर हुआ।1

सूख जाती है सियाही आजकल जल्दी यहाँ
ख्वाहिशों के फ़लसफों पे आदमी निर्झर हुआ।2

मिट्टियों की कौन करता है यहाँ पड़ताल भी
हर शज़र गमला सजा आकाश पर निर्भर हुआ।3

जो उड़ाता था वहाँ बेपर घटाओं को कभी
देखते ही देखते वह आजकल बेपर हुआ।4

वक्त की मदहोशियाँ क्या-क्या करा देतीं यहाँ
गर्द के बस ढ़ेर जैसा एक दिन अकबर हुआ।5
"मौलिक व अप्रकाशित"

Posted on October 23, 2018 at 10:00am — 5 Comments

गजल(डरे जो बहुत....)

122 122  122  12
डरे जो बहुत,बुदबुदाने लगे
मसीहे,लगा है, ठिकाने लगे।1

तबाही का' आलम बढ़ा जा रहा
चिड़ी के भी' पर फड़फड़ाने लगे।2

नचाते रहे जो हसीं को बहुत
सलीके से' नजरें चुराने लगे।3

नहीं कुछ किया,कहते' आँखें भरीं
गये वक्त अब याद आने लगे।4

उड़ाते न तो कोई' उड़ता कहाँ?
यही कह सभी अब चिढ़ाने लगे।5
"मौलिक वअप्रकाशित"

Posted on October 15, 2018 at 9:53pm — 6 Comments

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At 11:03pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
आदरणीय
श्री मनन कुमार सिंह जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
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सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन
At 8:47pm on May 24, 2015, kanta roy said…
स्वागत आपका दोस्त
At 5:20pm on April 12, 2015, Manan Kumar singh said…
आदरणीय गोपालजी, आपकी मित्रता मेरे लिए अमूल्य है।
At 8:29pm on April 7, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ0 मनन जी

आपकी मित्रता मेरा गौरव है . सादर .

 
 
 

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