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Manan Kumar singh
  • बिहार
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Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(आज चढ़ता जा रहा पारा बहुत)
"आपका आभार आदरणीय विजय जी।"
Aug 15
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(आज चढ़ता जा रहा पारा बहुत)
"आपका आभार आदरणीय बृज जी।"
Aug 15
vijay nikore commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(आज चढ़ता जा रहा पारा बहुत)
"अच्छी गज़ल के लिए बधाई"
Aug 15
Manan Kumar singh posted a blog post

गजल(आज चढ़ता जा रहा पारा बहुत)

2122 2122 212आज चढ़ता जा रहा पारा बहुतमौसमों ने भी लिया बदला बहुत।1बर्फ पिघली,बह गया पानी कहाँ?हो गया ऊँचा शिखर बौना बहुत।2फिर चिरागों ने दबोची रोशनीवक्त गुजरा याद है आता बहुत।3नाचघर-सी हो गयी संसद भलीभांड ढुलमुल नाचता-गाता बहुत।4आसमानों में चढ़ीं दुश्वारियाँभाव हीरों का लगा पौना बहुत।5बदगुमानी का सबब हैं कुर्सियाँकर्मियों ने भाड़ ही झोका बहुत?6पार उतरे वे समंदर के,उड़े,रह गया है आज पछतावा बहुत।7रेत बनती जा रही प्यासी जमींऔर सबने और भी खोदा बहुत।8क्या करेंगे आप मरकर?बोलिये,आदमी ने लाश को गोदा…See More
Aug 14
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(आज चढ़ता जा रहा पारा बहुत)
"बहुत बहुत आभार आदरणीय गुरमीत सिंह जी।"
Aug 14
Gurpreet Singh commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(आज चढ़ता जा रहा पारा बहुत)
"बर्फ पिघली,बह गया पानी कहाँ?हो गया ऊँचा शिखर बौना बहुत।2वाह आदरणीय मनन कुमार सिंह जी,, बहुत अच्छी ग़ज़ल कही आपने,, "फिर चिरागों ने दबोचा रोशनी को"इस मिसरे में अंत में एक मात्रा बढ़ रही है,, सो बे बह्र हो रहा है,,,"
Aug 14
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(आज चढ़ता जा रहा पारा बहुत)
"आदरणीय नीरज जी ,शुक्रिया।आजकल लाशों पर भी रहम कहाँ की जाती है?"
Aug 13
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(आज चढ़ता जा रहा पारा बहुत)
"आदरणीय बसंत शर्मा जी,आपका आभार।"
Aug 13
Niraj Kumar commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(आज चढ़ता जा रहा पारा बहुत)
"आदरणीय मनन जी, आखिरी शेर अस्पष्ट है. बाकी सारे शेर अच्छे लगे. दाद के साथ मुबारकबाद. सादर "
Aug 12
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-82
"दो शेर और: ---////-- भेद बढ़ते जा रहे हैं आजकल ले रहा अपनी तलाशी,शब्द हूँ। आज दुविधा में पड़े हैं लोग सब लड़ रहा अपनी पलासी,शब्द हूँ। *"
Aug 12
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-82
"आभार भाई"
Aug 12
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-82
"और दो शेर,इस कड़ी में: --///----////---- कह रहा मैं कुछ,समझते आप कुछ हो गया हूँ मैं दुधारी,शब्द हूँ। हाय-तौबा खूब है संसार में लूट रहा मैं वाहवाही,शब्द हूँ। *"
Aug 12
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-82
"आदरणीय सुरेन्द्र भाई,बहुत बहुत आभार आपका।"
Aug 12
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-82
"आदरणीय मिथिलेश जी,आपका शुक्रिया ।"
Aug 12
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-82
"आदरणीय अखिलेश भाई,आपका बहुत बहुत आभार।"
Aug 12
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-82
"बहुत बहुत आभार आपका"
Aug 12

Profile Information

Gender
Male
City State
Mumbai
Native Place
E 52 Krishna Apt , Patna
Profession
Service
About me
A poet/ Writer

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गजल(आज चढ़ता जा रहा पारा बहुत)

2122 2122 212

आज चढ़ता जा रहा पारा बहुत

मौसमों ने भी लिया बदला बहुत।1



बर्फ पिघली,बह गया पानी कहाँ?

हो गया ऊँचा शिखर बौना बहुत।2



फिर चिरागों ने दबोची रोशनी

वक्त गुजरा याद है आता बहुत।3



नाचघर-सी हो गयी संसद भली

भांड ढुलमुल नाचता-गाता बहुत।4



आसमानों में चढ़ीं दुश्वारियाँ

भाव हीरों का लगा पौना बहुत।5



बदगुमानी का सबब हैं कुर्सियाँ

कर्मियों ने भाड़ ही झोका बहुत?6



पार उतरे वे समंदर के,उड़े,

रह गया है… Continue

Posted on August 10, 2017 at 9:30am — 20 Comments

गजल(गदहा बोला......)

22 22 22 22

*---------------*

गदहा बोला--- हाँक लगायें,

आओ लोगों को भड़कायें।1



मोर बना बैठा है राजा

उसकी कुर्सी को खिसकायें।2



हम भी हो सकते हैं मंत्री

आगे बढ़कर हाथ मिलायें।3



भैंस भली,जब अक्ल मरी हो

कुत्तों को माला पहनायें।4



'चीं चीं' कर दे सकती, चलकर,

'सोन चिरैया' को सहलायें।5



'नीति' नहीं अब प्रीत समझती

कितनी बार गले लग जायें?6



'भालू-कालू' !भेद भुलाकर

आओ एक जमात… Continue

Posted on July 6, 2017 at 7:30pm — 17 Comments

आजादी(लघुकथा)

जंगल आजाद हुआ।पशु-पक्षियों को शासन की कमान मिली।आदमी काफी दूर निकल चुके थे। नृत्य-कला की प्रवीणता से मोर को सबसे बड़ी कुर्सी मिली।विभिन्न जानवरों और परिंदों को मंत्री पद मिले।लक्ष्मी जी की सवारी को वित्त का जिम्मा सौंपा गया।खान-पान के सामान और महंगे हो गये।लूट तरक्की का सामान बन गयी।छोटे-छोटे जीवों की बचत बड़े-बड़े दिग्गज जानवर गटकने लगे।माद्दा होता कर्ज लेने का,फिर सारी राशि हड़प जाने का।उधर सरकारी ऐलान होता कि तिजोरी खाली है,जनता सरकार का का सहयोग करे।खर्च कम करे,कर चुकाये।उधर जंगल(देश-जनता) की… Continue

Posted on July 1, 2017 at 9:29pm — 12 Comments

गजल(क्या करेगा...)

2122 2122 212

---------------

क्या करेगा माँद का मारा हुआ

बन गया मुजरिम अभी हारा हुआ।1



लोग कसते फब्तियाँ,बेजार वह

'लाल' कल का आज बेचारा हुआ।2



मौसमों की मार खाकर शीत जल

पर्वतों से भी ढुलक खारा हुआ।3



दी हवा जब,थरथरायीं चोटियाँ,

छटपटाता आज,नक्कारा हुआ।4



बंदगी में थे खड़े सब लोग तब

अब ठिठोलीबाज जग सारा हुआ।5



जो मिली कुर्सी,सलामत भी रहे

हर दिशा में आज यह नारा हुआ।6



सीढियाँ दी तोड़ जब ऊपर… Continue

Posted on June 23, 2017 at 8:53am — 3 Comments

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At 11:03pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
आदरणीय
श्री मनन कुमार सिंह जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन
At 8:47pm on May 24, 2015, kanta roy said…
स्वागत आपका दोस्त
At 5:20pm on April 12, 2015, Manan Kumar singh said…
आदरणीय गोपालजी, आपकी मित्रता मेरे लिए अमूल्य है।
At 8:29pm on April 7, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ0 मनन जी

आपकी मित्रता मेरा गौरव है . सादर .

 
 
 

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