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Manan Kumar singh
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"आभार आदरणीया।"
Jun 15
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"आभार आदरणीय।"
Jun 15
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"बहुत बहुत आभार आदरणीया प्रतिभा जी।"
Jun 14
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-104
"पेड़ हूँ, मैं आज भी बादल बुलाता हूँप्यास की मारी धरा को मैं हँसाता हूँ।1 हो रहा बोझिल जमाना साँस का माराप्राणवायु मैं निरंतर ही लुटाता हूँ।2 जल रहे सब लोग सूरज की सुनामी मेंछाँव हूँ मैं,नींद आँखों में बसाता हूँ।3 तुम पिलाते हो मुझे पानी कभी,तो मैंइक…"
Jun 14
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post शरणार्थी (लघुकथाएं )
"आभार आदरणीय।"
Jun 11
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post शरणार्थी (लघुकथाएं )
"आभार आदरणीय।"
Jun 11
Samar kabeer commented on Manan Kumar singh's blog post शरणार्थी (लघुकथाएं )
"जनाब मनन कुमार सिंह जी आदाब,अच्छी लघुकथाएं लिखीं,बधाई स्वीकार करें ।"
Jun 11
Manan Kumar singh posted a blog post

शरणार्थी (लघुकथाएं )

शरणार्थी(1) --- दो मित्र आपस में बातें कर रहे थे;एक मानवतावादी था, दूसरा समाजवादी।पहले ने कहा- अरे भई!वो भी आदमी हैं,परिस्थिति के मारे हुए।बेचारों को शरण देना पुण्य-परमार्थ का काम है। दूसरा:हाँ तभी तक,जबतक यहाँ के लोगों को शरणार्थी बनने की नौबत न आ जाये। (2) --- -हाँ,जुझारूपन हमारे खून में है। -हमारी खातिर तुम क्या करोगे? -जान भी दे सकते हैं। -हमें वोट चाहिए।जान तो सस्ती जिंस है। -ऊपरवाले की कसम जो कहेंगे,हम करेंगे। -कितने हो तुमलोग? -अभी दस हजार।हुक्म मिलने पर लाखों की तादाद होगी। -ठीक है।रात…See More
Jun 8
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
"आभार आदरणीय।"
May 31
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
"आभार आदरणीय।"
May 31
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
"आभार भाई उस्मानीजी।"
May 31
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
"आभार आदरणीय।"
May 31
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
"आभार आदरणीय।"
May 31
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
"पुनश्च.....सत्तासीन कबीले ने नई जीत का जश्न मनाया।विजित कबीले हार पर मंथन करने लगे।हार की वजहों में खानदान परस्ती पर ज्यादा उँगलियाँ उठीं।हुआ कि कबीले नये लोगों के सुपुर्द किये जायें।संगठन मजबूत हों।जन-आकांक्षा-आधारित कार्य प्राथमिकता में…"
May 31
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
"आभार आदरणीय महेंद्र जी।"
May 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
"आपका आभार।"
May 30

Profile Information

Gender
Male
City State
Mumbai
Native Place
E 52 Krishna Apt , Patna
Profession
Service
About me
A poet/ Writer

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शरणार्थी (लघुकथाएं )

शरणार्थी

(1)

---

दो मित्र आपस में बातें कर रहे थे;एक मानवतावादी था, दूसरा समाजवादी।पहले ने कहा-

अरे भई!वो भी आदमी हैं,परिस्थिति के मारे हुए।बेचारों को शरण देना पुण्य-परमार्थ का काम है।

दूसरा:हाँ तभी तक,जबतक यहाँ के लोगों को शरणार्थी बनने की नौबत न आ जाये।



(2)

---

-हाँ,जुझारूपन हमारे खून में है।

-हमारी खातिर तुम क्या करोगे?

-जान भी दे सकते हैं।

-हमें वोट चाहिए।जान…

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Posted on June 8, 2019 at 8:53am — 2 Comments

मत समझना मैं...(गजल)

2122 2122 2122 2

मत समझना मैं पढ़ा अख़बार हूँ कल का

हमसफ़र हूँ,काबिले-आसार हूँ कल का।1

राह सिमटी जा रही है आज की पल-पल

देख लो मुझको जरा आधार हूँ कल का।2

कौड़ियों के मोल बिकता आज तुम्हारा

सच लिए चलता रहा मनुहार हूँ कल का।3

रोशनाई की उमंगों का…

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Posted on February 8, 2019 at 11:00pm — 6 Comments

गजल(जैसे तैसे बात बनी है...)

22  22  22 22

जैसे-तैसे बात बनी है

रमई चादर हाथ लगी है।1

मंदिर-मंदिर घूम रहा मैं

चमचा-चमचा आस पली है।2

'बबुआ काम करेगा बढ़कर',

'दादाओं' ने बात कही है।3

'मम्मी' का मैं राजदुलारा

लगता, 'पगड़ी' माथ चढ़ी है।4

अपनी कुर्सी पर बैठा 'वह'

दिल में कितनी बात खली है!5

साँझ-सबेरे ईश-विनय कर

'राम-रमा' में प्रीत जगी है।6

रंगे आज सियार बहुत हैं

मुझपर सबकी आँख लगी है।7

चोट…

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Posted on November 11, 2018 at 11:08am — 6 Comments

गजल(उठे हैं.....)

122 122  122 12

उठे हैं किसी को गिरा के मियाँ

चले पाग सर पे सजा के मियाँ।1

कहा था, डरेगा न कोई यहाँ

रहे खुद को हाफ़िज बना के मियाँ।2

रहेगा न सूखा शज़र एक भी--

कहें नीर सारा सुखा के मियाँ।3

मिटी भूख उनकी हुए सब सुखी

चहकते चले माल खा के मियाँ।4

किये लाख सज़दे, मिले कब सनम?

गये थे कभी सर नवा के…

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Posted on October 29, 2018 at 7:15am — 10 Comments

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At 11:03pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
आदरणीय
श्री मनन कुमार सिंह जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन
At 8:47pm on May 24, 2015, kanta roy said…
स्वागत आपका दोस्त
At 5:20pm on April 12, 2015, Manan Kumar singh said…
आदरणीय गोपालजी, आपकी मित्रता मेरे लिए अमूल्य है।
At 8:29pm on April 7, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ0 मनन जी

आपकी मित्रता मेरा गौरव है . सादर .

 
 
 

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