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Chetan Prakash
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  • Rupam kumar -'मीत'
  • sunanda jha
 

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Monday
Chetan Prakash commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (वो नज़र जो क़यामत की उठने लगी )
" 'अमीर' साहब ग़जल सम्पादन की मुन्तज़िर हैः रोज़ उठने लगी लगी देखो काली घटा । बाकी तो मोहतरम कबीर समीर साहब, बतला ही चुके है। फिर भी कहन दिल को छू गया, भाव के स्तर पर आप बधाई के पात्र हैं।"
Sep 8
Chetan Prakash commented on सालिक गणवीर's blog post न जाने किस जनम का सिला दे गया मुझे..( ग़ज़ल)
"   बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई है, जनाब, सालिक गणवीर साहब! मतले की शुरुआत न केबजाय ना से बेहतर होती !"
Sep 8
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-121
"दिन तो होता है मगर रात नही होती है...... 2 1 2 2 1 1 2 2 1 1 2 2 2 2 उम्र होती मगर खैरात नहीं होती है । सुन मेरे भाई कभी मात नहीं होती है।। आशिक़ी तो है जुनूँ बात नहीं होती है। मरते मर जाओ मुलाक़ात नहीं होती है।। आँखो - आँखों भी मुहब्बत हुआ करती थी,…"
Jul 25
Chetan Prakash commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल- हाँ में हाँ लोग जो होते हैं मिलने वाले
"सुरेन्द्र नाथ सिंह, कुशक्षत्रप !"
Jul 18
Chetan Prakash commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल- हाँ में हाँ लोग जो होते हैं मिलने वाले
"कमाल-धमाल, जनाब, क्या खूबसूरत और असरदार ग़ज़ल कही है आपनेसुरेन्द्र नाथ सिंह क्षत्रप, बधाई !"
Jul 18
Chetan Prakash commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल- हाँ में हाँ लोग जो होते हैं मिलने वाले
"ग़ज़ब कर डाला, जनाब, क्या असरदार और खूबसूरत ग़़ज़ल हुई,सुरेन्द्र नाथ सिंह क्षत्रप, बधाई !"
Jul 18
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-117
"  श्री सतविन्दर कुमार राणा, आपने ज़हमत की और अलग- अलग विधाओं मे लिखी हुई प्रस्तुतियों की पड़ताल की और उन्हें अनुशंसा योगय पाया, इसके लिए हृदय से आपका आभार व्यक्त करता हूँ ! वन्दे !"
Jul 12
Chetan Prakash commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल -पुराने गाँव की अब भी कहानी याद है हमको
"प्रिय सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप, बह्रे हजज मुुसम्मन सालिम में अच्छी साफ- सुथरी ग़जल प्रस्तुत की, बधाई स्वीकार करें, इति"
Jul 11
Chetan Prakash commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल -पुराने गाँव की अब भी कहानी याद है हमको
"प्रिय सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप, बह्रे हजज मुुसम्मन सालिम में अच्छी साफ- सुथरी ग़जल प्रस्तुत की, बधाई स्वीकार करें, इति !"
Jul 11
Chetan Prakash commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल -पुराने गाँव की अब भी कहानी याद है हमको
"बह्रे हजज मुुसम्मन सालिम में अच्छी साफ- सुथरी अच्छी, ग़जल प्रस्तुत की, बधाई स्वीकार करें, इति !"
Jul 11
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-117
"  आपका अशेष धन्यवाद, मित्र, सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप !"
Jul 11
Chetan Prakash posted a blog post

रोटी.....( अतुकांत कविता)

रोटी का जुगाड़ कोरोना काल में आषाढ़ मास में कदचित बहुत कठिन रहा आसान जेठ में भी नहीं था. पर, प्रयास में नए- नए मुल्ला अजान उत्साह से पढ रहे थे... दारु मृत संजीवनी सुरा बन गयी थी सरकार के लिए भी, कोरोना पैशैन्ट्स के लिए भी और, पीने वालों का जोश तो देखने लायक था, सबकी चाँदी थी...! आषाढ़ तो बर्बादी रही.. इधर मानसून की बारिश उधर मज़दूरो की भुखमरी और, बेरोज़गारी..... सच, मानो कलेजा मुुँह को आ गय़ा...! जिन्दगी फुफकारने लगी रोटी भूख को ठेंगा दिखाने लगीं सरकारों का सा साँस फूल ही चुका था, कोरोना का…See More
Jul 11
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-117
"रोटी.. ( हाइकू ) रँग भूख का गुड़ चना टिक्कड़ केक पराँठा...... ( मौलिक एवं अप्रकाशित ) तांका.. रोटी,,,,, कंद मूल तो मिश्री मक्खन सूखी भी हो सकती कचौरी ब्रेड चीला आम लेट, भसीड़ा .... ( मौलिक एवं अप्रकाशित ) दोहाः क्या रँग बदलती रोटी, घर गरीब तू झाँक ।…"
Jul 11
Chetan Prakash left a comment for Rupam kumar -'मीत'
"मित्र, आपका स्वागत है !"
Jul 3
Chetan Prakash and Rupam kumar -'मीत' are now friends
Jul 3

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Gender
Male
City State
Baraut
Native Place
Hapur
Profession
Teaching
About me
I'm a poet rather born than made or trained since my childhood

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रोटी.....( अतुकांत कविता)

रोटी का जुगाड़

कोरोना काल में

आषाढ़ मास में

कदचित बहुत कठिन रहा

आसान जेठ में भी नहीं था.

पर, प्रयास में नए- नए मुल्ला

अजान उत्साह से पढ रहे थे...

दारु मृत संजीवनी सुरा बन गयी थी

सरकार के लिए भी,

कोरोना पैशैन्ट्स के लिए भी

और, पीने वालों का जोश तो देखने लायक था,

सबकी चाँदी थी...!

आषाढ़ तो बर्बादी रही..

इधर मानसून की बारिश

उधर मज़दूरो की भुखमरी

और, बेरोज़गारी.....

सच, मानो कलेजा मुुँह

को आ गय़ा...!…

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Posted on July 11, 2020 at 1:00pm

हादसा

बाबू राम नाथ पचहत्तर पार कर चुके हैं। शरीर अब जवाब देने लगा है। अभी कई दिन पहले जरा डाॅक्टर से चैक-अप कराने गये थे कि देर तक धूप में खड़ा रहना पड़ा । घर लौटते तेज़ बुखार हो गया। बेटा संयोग से इस वीक एन्ड पर सपत्नीक चला आया। दोनों बहनें जो अपने बच्चों के गर्मियो की छुट्टियों में आयी हुईं थी।सो डाॅक्टर को घर बुला लाया।

"हीट स्ट्रोक हुआ है', ङाॅक्टर बोला था। दवा दे गया था। अब आराम था। लेकिन कमजोरी बहुत थी। लू मानो सारा खून चूस गई थी। बाथरूम भी मुश्किल से जा पाते थे।



अभी कल…

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Posted on June 30, 2018 at 6:00pm — 14 Comments

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At 11:59am on June 27, 2020, Samar kabeer said…

जनाब चेतन प्रकाश जी,ये टिप्पणी आप मुशाइर: में दें,तो मुझे जवाब देने में आसानी होगी ।

 
 
 

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"aadardiya समीर सर जी ,बधाई के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया, टंकण त्रुटियों को सुधारने की पूरी कोशिश…"
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Samar kabeer commented on विनय कुमार's blog post पिता--लघुकथा
"जनाब विनय कुमार जी आदाब, अच्छी लघुकथा लिखी आपने, बधाई स्वीकार करें ।"
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