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Sushil Sarna
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vijay nikore commented on Sushil Sarna's blog post होली के दोहे :
"दोहे अच्छे लगे। बधाई मित्र सुशील जी"
Mar 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post होली के दोहे :
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन एवं होली की हार्दिक शुभकामनाएं ।  होली के संदर्भ में सुन्दर दोहे हुए हैं , हार्दिक बधाई ।"
Mar 10
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post होली के दोहे :
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,होली विषय पर आपने बहुत अच्छे दोहे लिखे हैं,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । भाई जवाहर लाल सिंह जी की बात का संज्ञान लें ।"
Mar 8
JAWAHAR LAL SINGH commented on Sushil Sarna's blog post होली के दोहे :
"आदरणीय सुशील सरना जी, सादर अभिवादन! फागुन के उमंग में सभी दोहे सराबोर हैं.  एक बार हर अपने को दीजिए, अपनेपन का रंग।मिटे न मिलने की कभी, जीवन में उमंग।।११ में चतुर्थ चरण को एक बार पुन: देख लें  ... सादर "
Mar 7
Sushil Sarna posted a blog post

होली के दोहे :

होली के दोहे :नटखट नैनों ने किया, कुछ ऐसा हुड़दंग। नार नशा हावी हुआ, फीकी लगती भंग।।१साजन लेकर हाथ में, आये आज गुलाल। बाहुबंध में शर्म से, लाल हो गए गाल।। २अधरों पर है खेलती, एक मधुर मुस्कान। तन पर रंगों ने रची, रिश्तों की पहचान।। ३होली के त्योहार पर ,इतना रखना ध्यान। नारी का अक्षत रहे ,रंगों में सम्मान।।४गौर वर्ण पर रंग ने, ऐसा किया धमाल। नैनों नें की मसखरी, गाल हो गए लाल।। ५प्रेम प्यार का राग है, होली का त्योहार । देह -देह पर सज रही, रंगों की बौछार ।।६होली का त्योहार है, रिश्तों की मनुहार। मन…See More
Mar 6
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post ज़बान :
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Mar 5
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post ज़बान :
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन । अच्छी कविता हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Mar 5
Sushil Sarna posted a blog post

ज़बान :

ज़बान :बड़ी अजीब है ये दुनिया जाने कितने ताले लगाए फिरती है अपनी ज़बान  पर खूनी मंज़र चुपचाप सह जाती है हकीकत  में किसी के पास वो ज़बान  ही नहीं जो सच को बयाँ कर सके इसीलिये अक्सर लोग रूहानी आवाज़ को अपने अंदर ही दफ़्न कर लेते हैं घोंट देते हैं अहसासों का गला और छटपटाने देते हैं वेदना की व्याकुलता को किसी परकटे पंछी की तरह अंदर ही अंदर रूहानी परतों के नीचे लेकिन कब तक कोई अपने अहसासों को दबाएगा भीतरी तहों की छटपटाहट तोड़ देती है मौन की हर चट्टान को और तरल हो जाती चीख आँखों की दीवारों पर कभी न कभी न…See More
Mar 4
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post कुछ क्षणिकाएँ :
"आ. भाई सुशील जी अच्छी क्षणिकाएँ हुई हैं । हार्दिक बधाई ।"
Feb 3
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post कुछ क्षणिकाएँ :
"आ. भाई सुशील जी अच्छी क्षणिकाएँ हुई हैं । हार्दिक बधाई ।"
Feb 3
Sushil Sarna posted a blog post

कुछ क्षणिकाएँ :

कुछ क्षणिकाएँ :इतना तो न थाखालीपनतुम्हारी मिलने से पहलेजितना हो गयातुम से बिछुड़ने के बादख़्वाबों की ज़मीन परअहसासों की ओसपिघल गयीतुम्हारी यादों से......................प्रयासक्षितिज छूने काविशवासझूठे वादों काप्यासमरीचिका सी.......................माहबदलते -बदलतेआ जाता हैकैलेंडर का अंतिम माहअर्थातवर्ष का चरमऔर होते होतेहो जाता हैधागा टाँगने काछोटा साअर्थात अपने अंत का चरमजीने लगती हैंसाँसेंकैलेंडर की तरहजीते जीतेअपने अंत का चरम....................................पंछीग़म के जाते नहींऔरख़ुशी केलौट…See More
Feb 1
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post कुछ क्षणिकाएँ :
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छी क्षणिकाएँ हुई हैं,बधाई स्वीकार करें । 'इतना तो न था खालीपन तुम्हारी मिलने से पहले जितना हो गया तुम्हारी बिछुड़ने के बाद--'  की ज़मीन पर अहसासों की ओस पिघल गयी तेरी यादों…"
Jan 31
Sushil Sarna posted a blog post

कुछ क्षणिकाएँ :

कुछ क्षणिकाएँ :इतना तो न थाखालीपनतुम्हारी मिलने से पहलेजितना हो गयातुम से बिछुड़ने के बादख़्वाबों की ज़मीन परअहसासों की ओसपिघल गयीतुम्हारी यादों से......................प्रयासक्षितिज छूने काविशवासझूठे वादों काप्यासमरीचिका सी.......................माहबदलते -बदलतेआ जाता हैकैलेंडर का अंतिम माहअर्थातवर्ष का चरमऔर होते होतेहो जाता हैधागा टाँगने काछोटा साअर्थात अपने अंत का चरमजीने लगती हैंसाँसेंकैलेंडर की तरहजीते जीतेअपने अंत का चरम....................................पंछीग़म के जाते नहींऔरख़ुशी केलौट…See More
Jan 31
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post पाप .... (दो क्षणिकाएँ )
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,बहुत उम्द: क्षणिकाएँ लिखीं आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Jan 28
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post चंद क्षणिकाएँ :......
"आदरणीय  Samar kabeer 'जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देती आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार। "
Jan 25
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post चंद क्षणिकाएँ :......
"आदरणीय  vijay nikore'जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देती आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार। "
Jan 25

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur-Rajasthan
Native Place
New Delhi
Profession
Retired from Central Govt.Service as Superintending Officer
About me
I am a simple,sentimental and transparent person.Poetry is my hobby and passion

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होली के दोहे :

होली के दोहे :

नटखट नैनों ने किया, कुछ ऐसा हुड़दंग।

नार नशा हावी हुआ, फीकी लगती भंग।।१

साजन लेकर हाथ में, आये आज गुलाल।

बाहुबंध में शर्म से, लाल हो गए गाल।। २

अधरों पर है खेलती, एक मधुर मुस्कान।

तन पर रंगों ने रची, रिश्तों की पहचान।। ३

होली के त्योहार पर ,इतना रखना ध्यान।

नारी का अक्षत रहे ,रंगों में सम्मान।।४

गौर वर्ण पर रंग ने, ऐसा किया धमाल।

नैनों नें की मसखरी, गाल हो गए लाल।।…

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Posted on March 6, 2020 at 5:08pm — 4 Comments

ज़बान :

ज़बान :

बड़ी अजीब है ये दुनिया 

जाने कितने ताले लगाए फिरती है 

अपनी ज़बान  पर 

खूनी मंज़र चुपचाप सह जाती है 

हकीकत  में किसी के पास 

वो ज़बान  ही नहीं 

जो सच को बयाँ कर सके 

इसीलिये अक्सर लोग 

रूहानी आवाज़ को 

अपने अंदर ही दफ़्न कर लेते हैं 

घोंट देते हैं अहसासों का गला 

और छटपटाने देते हैं 

वेदना की व्याकुलता को 

किसी परकटे पंछी की तरह 

अंदर ही अंदर 

रूहानी परतों के…

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Posted on March 4, 2020 at 7:42pm — 2 Comments

कुछ क्षणिकाएँ :

कुछ क्षणिकाएँ :



इतना तो न था

खालीपन

तुम्हारी मिलने से पहले

जितना हो गया

तुम से बिछुड़ने के बाद

ख़्वाबों की ज़मीन पर

अहसासों की ओस

पिघल गयी

तुम्हारी यादों से



......................

प्रयास

क्षितिज छूने का

विशवास

झूठे वादों का

प्यास

मरीचिका सी



.......................



माह

बदलते -बदलते

आ जाता है

कैलेंडर का अंतिम माह

अर्थात

वर्ष का चरम

और होते होते

हो जाता… Continue

Posted on January 30, 2020 at 4:00pm — 4 Comments

चंद क्षणिकाएँ :......

चंद क्षणिकाएँ :......

होती है

बिना हत्या के भी

हत्या

अदृश्य भावों की

खून की लालिमा से भी गहरे

लाल रिश्तों की

................

तमन्नाओं का झुंड

बेबसी की बेड़ियाँ

मिट गई ज़िंदगी

रगड़ते- रगड़ते

ऐड़ियाँ

फुटपाथ पर

............................

भूख की झंकार

प्रश्नों का अम्बार

पेट का संसार

.............................



रिश्तों के राग

पैसे की आग

झुलसे…

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Posted on January 11, 2020 at 8:42pm — 6 Comments

Comment Wall (34 comments)

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At 11:15pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:35am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है. 

At 1:29am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर 

At 10:17pm on April 7, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ० सरना भाई जी, सादर  प्रणाम!

आपका हार्दिक स्वागत है.  मित्रता से भाग्योदय होता है ,  मैं धन्य हुआ. सादर

At 9:46am on April 1, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 6:02am on March 20, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ०  सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम!  आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर

At 4:22pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:00pm on February 17, 2016, Tasdiq Ahmed Khan said…

मोहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब ,  यह  आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है  , जिसके लिए   आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

At 8:47pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार राणा said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर हार्दिक शुभकामनाएं!
At 2:33pm on January 5, 2016, अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव said…

तन स्वस्थ रहे मन में उमंग...सुशील भाईजी आपको भी सपरिवार नव वर्ष की ढेरों  शुभकामनायें

 
 
 

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