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Sushil Sarna
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Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post देर तक ....
"जनबसुशील सरना जी आदाब,अच्छी कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
15 hours ago
PHOOL SINGH commented on Sushil Sarna's blog post देर तक ....
"अच्छी कविता बन पड़ी है बधाई स्वीकारें"
23 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

देर तक ....

देर तक ....तुन्द हवाएँ करती रही खिलवाड़ हर पात से हर शाख से देर तकरोती रही बेबस चिड़िया टूटे अण्डों के पास देर तकहो गई शान्त हवाएँ प्रकृति से अपना खिलवाड़ करके हो गया शान्त रुदन चिड़िया का कुछ न समझ सकी खेल विधाता का सृजन से पूर्व संहार क्या यही है संसार बस देखती रही बिखरे तिनके टूटे अंडे स्वप्न के अवशेष देर तकसुशील सरना मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post रंगहीन ख़ुतूत ...
"आ. भाई सुशील जी, सुंदर कविता हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
yesterday
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post रंगहीन ख़ुतूत ...
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छी कविता हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । '  मैं जीना जीना'--"ज़ीना ज़ीना" ! 'लफ़्ज़ों से लबरेज़' 'लफ़्ज़' शब्द का बहुवचन "अल्फ़ाज़" है,देखियेगा । "
Tuesday
PHOOL SINGH commented on Sushil Sarna's blog post कुछ क्षणिकाएं जीवन पर :
"सूंदर रचना"
Tuesday
narendrasinh chauhan commented on Sushil Sarna's blog post रंगहीन ख़ुतूत ...
"लाजवाब , खूब सुन्दर रचना सर "
Tuesday
PHOOL SINGH commented on Sushil Sarna's blog post पागल मन ..... (400 वीं कृति )
"सूंदर रचना बधाई स्वीकारे"
Tuesday
PHOOL SINGH commented on Sushil Sarna's blog post ख़्याल ...
"क्या बात है सर जी बहुत सूंदर बधाई "
Tuesday
PHOOL SINGH commented on Sushil Sarna's blog post दो क्षणिकाएं :
"क्या बात है सर जी बहुत सूंदर बधाई "
Tuesday
PHOOL SINGH commented on Sushil Sarna's blog post रंगहीन ख़ुतूत ...
"क्या बात है सर जी बहुत सूंदर"
Tuesday
Sushil Sarna posted a blog post

रंगहीन ख़ुतूत ...

रंगहीन ख़ुतूत ...तन्हाई रात की दहलीज़ पर देर तक रुकी रही चाँद दस्तक देता रहा मन उलझा रहा किसका दामन थामूँ अर्श के माहताब का पलकों के ख्वाब का या ज़ह्न के सैलाब का सवाल गर्म लावे से उबलते रहे जवाब तन्हाई में सुबकते रहे मैं जीना जीना ज़ह्न के सन्नाटों में उतरती रही अपनी ही साये में बिखरती रही बस रहे गए हाथ में अर्थहीन होते लफ़्ज़ों से लबरेज़ रंगहीन ख़ुतूतसुशील सरना मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दो क्षणिकाएं :
"आ. भाई सुशील जी, सुंदर क्षणिकाएँ हुयी हैं । हार्दिक बधाई ।"
Monday
narendrasinh chauhan commented on Sushil Sarna's blog post दो क्षणिकाएं :
"लाजवाब"
Sunday
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post दो क्षणिकाएं :
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,उम्दा क्षणिकाएँ हुई हैं,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
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राज़ नवादवी commented on Sushil Sarna's blog post दो क्षणिकाएं :
"सुन्दर क्षणिकाओं की प्रस्तुति पे हार्दिक बधाई आदरणीय सुशील सरना जी. सादर. "
Saturday

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur-Rajasthan
Native Place
New Delhi
Profession
Retired from Central Govt.Service as Superintending Officer
About me
I am a simple,sentimental and transparent person.Poetry is my hobby and passion

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Sushil Sarna's Blog

देर तक ....

देर तक ....

तुन्द हवाएँ

करती रही खिलवाड़

हर पात से

हर शाख से

देर तक

रोती रही

बेबस चिड़िया

टूटे अण्डों के पास

देर तक

हो गई शान्त

हवाएँ

प्रकृति से

अपना खिलवाड़ करके

हो गया शान्त

रुदन

चिड़िया का

कुछ न समझ सकी

खेल विधाता का

सृजन से पूर्व संहार

क्या यही है

संसार

बस देखती रही

बिखरे तिनके

टूटे अंडे

स्वप्न के अवशेष

देर तक

सुशील…

Continue

Posted on December 12, 2018 at 7:30pm — 2 Comments

रंगहीन ख़ुतूत ...

रंगहीन ख़ुतूत ...

तन्हाई

रात की दहलीज़ पर

देर तक रुकी रही

चाँद

दस्तक देता रहा

मन

उलझा रहा

किसका दामन थामूँ

अर्श के माहताब का

पलकों के ख्वाब का

या ज़ह्न के सैलाब का

सवाल

गर्म लावे से

उबलते रहे

जवाब

तन्हाई में

सुबकते रहे

मैं जीना जीना

ज़ह्न के सन्नाटों में

उतरती रही

अपनी ही साये में

बिखरती रही

बस रहे गए हाथ में

अर्थहीन होते

लफ़्ज़ों से लबरेज़

रंगहीन…

Continue

Posted on December 10, 2018 at 2:16pm — 4 Comments

दो क्षणिकाएं :

दो क्षणिकाएं :

पिघल गयी
दे कर आघात
बेदर्दी याद

......................

ढाया कह्र
आफ़ताब ने
ओस की बूँद पर
बिखर गई रेज़ा-रेज़ा
तन्हा-तन्हा
रोया गुलाब

.....................

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on December 7, 2018 at 8:56pm — 5 Comments

ख़्याल ...

ख़्याल ...

मैं सो गयी
इस ख़्याल से
कि तेरा ख्याल भी
साथ मेरे सो जाएगा
मगर
तेरा ख़्याल
तमाम शब्
मेरी नींदों से
खिलवाड़ करता रहा
मैं उनींदी सी सोयी रही
उसके लम्स
मेरे ज़ह्न को
झिंझोड़ते रहे
अंततः
सौंप दिया स्वयं को
ख़्याल बनके
उस ख़्याल के हवाले

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on December 5, 2018 at 6:54pm — 3 Comments

Comment Wall (34 comments)

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At 11:15pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:35am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है. 

At 1:29am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर 

At 10:17pm on April 7, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ० सरना भाई जी, सादर  प्रणाम!

आपका हार्दिक स्वागत है.  मित्रता से भाग्योदय होता है ,  मैं धन्य हुआ. सादर

At 9:46am on April 1, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 6:02am on March 20, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ०  सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम!  आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर

At 4:22pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:00pm on February 17, 2016, Tasdiq Ahmed Khan said…

मोहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब ,  यह  आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है  , जिसके लिए   आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

At 8:47pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार राणा said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर हार्दिक शुभकामनाएं!
At 2:33pm on January 5, 2016, अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव said…

तन स्वस्थ रहे मन में उमंग...सुशील भाईजी आपको भी सपरिवार नव वर्ष की ढेरों  शुभकामनायें

 
 
 

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