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Sushil Sarna
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1 hour ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । "
2 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय अशोक रक्ताले जी सृजन पर आपकी समीक्षात्मक प्रतिक्रिया का दिल से आभार । इंगित बिन्दु पर सहमत एवं संशोधित सर ।हार्दिक आभार "
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। क्रोध पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई। साथ ही भाई अशोक जी की बात का संज्ञान लें । सादर..."
11 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय सुशील सरना साहब सादर, क्रोध विषय चुनकर आपके सुन्दर दोहावली रची है. हार्दिक बधाई स्वीकारें. फिर भी तृतीय दोहा देख लें इसके द्वितीय चरण में दस मात्राएँ रह गईं हैं. क्रोध एवं ज्वाल दोनों ही शब्द पुल्लिंग हैं इसकारण तृतीय चरण में 'इसकी'…"
17 hours ago
Sushil Sarna commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"वाह बहुत सुंदर प्रस्तुति हुई है आदरणीय लक्ष्मण धामी जी । हार्दिक बधाई "
18 hours ago
Sushil Sarna commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"वाहहहहहह आदरणीय क्या ग़ज़ल हुई है हर शे'र पर वाह निकलती है । दिल से मुबारकबाद कबूल फरमाएं सर "
18 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . शृंगार
"आदरणीय जी भविष्य के लिए  स्पष्ट हुआ ।हार्दिक आभार आदरणीय जी "
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .दीपावली
"आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी सृजन की समीक्षात्मक प्रतिक्रिया का दिल से आभार । इंगित बिन्दुओं का भविष्य में ध्यान रखा जायेगा । आपका मार्गदर्शन बहुमूल्य है । हार्दिक आभार आदरणीय जी "
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .दीपावली
"आदरणीय सुशील सरना जी,  दीप जले हर द्वार पर, जग में हो उजियार ...           जग दिखता उजियार आपस के सद्भाव से, रोशन हो संसार ।।   एक दीप इस द्वार पर,एक पास के द्वार ।   ...........   …"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . शृंगार
"किसने कहा छंद स्वर आधारित 'ही' हैं। तब तो शब्दों के अशुद्ध उच्चारण करने वाले छांदसिक पंक्तियों की मात्राओं की गणना का सत्यानाश कर बैठेंगे। हिंदी वाचिक परंपरा की भाषा नहीं है, जैसी कि उर्दू है। संयुक्ताक्षरों के साथ जैसा व्यवहार उर्दू भाषा…"
Tuesday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . शृंगार
"आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी सृजन पर आपकी समीक्षात्मक प्रतिक्रिया का दिल से आभार । स्पर्शों में स्वर  इस्पर्शों का आता है अब दोहा स्वर  आधारित है तो इस्पर्शों किया है ।"
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . शृंगार
"बात हुई कुछ इस तरह,  उनसे मेरी यार ।सिरहाने खामोशियाँ, टूटी सौ- सौ बार ।। ............ क्या ही शाब्दिक दृश्य रचा गया है     मौसम की मनुहार फिर, शीत हुई उद्दंड । ........    मौसम की मनुहार पर, मिलन ज्वाल के वेग…"
Monday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . शृंगार

 बात हुई कुछ इस तरह,  उनसे मेरी यार । सिरहाने खामोशियाँ, टूटी सौ- सौ बार ।। मौसम की मनुहार फिर, शीत हुई उद्दंड । मिलन ज्वाल के वेग में, ठिठुरन हुई प्रचंड । मौसम  आया शीत का, मचल उठे जज्बात । कैसे बीती क्या कहें, मदन वेग की रात ।। स्पर्शों की आँधियाँ, उस पर शीत अलाव । काबू में कैसे रहे, मौन मिलन का भाव ।। आँखों -आँखों में हुए, मधुर मिलन संवाद । संवादों के फिर किए , अधरों ने अनुवाद ।। सुशील सरना / 16-11-25मौलिक एवं अप्रकाशित See More
Nov 16, 2025
Sushil Sarna posted blog posts
Nov 6, 2025
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . सागर प्रेम

दोहा सप्तक. . . सागर प्रेमजाने कितनी वेदना, बिखरी सागर तीर । पीते - पीते हो गया, खारा उसका नीर ।।लहरों से गीले सदा, रहते सागर तीर ।बनकर कितने ही मिटे, यहाँ स्वप्न प्राचीर ।।बनकर मिटते नित्य ही, कसमों भरे निशान ।लहरों ने दम तोड़ते, देखे हैं अरमान ।।दो दिल डूबे इस तरह , भूले हर तूफान ।व्याप्त शोर में सिंधु के, प्रखर हुए अरमान ।।खारे सागर में उठे, मीठी स्वप्न हिलोर ।प्रेमी देखें साँझ में, अरमानों की भोर ।।लहर - लहर पर प्रेम के, सपने करते रास ।पल - पल सागर तीर पर, बढ़े मिलन की प्यास ।।कहें कहानी…See More
Oct 31, 2025

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur-Rajasthan
Native Place
New Delhi
Profession
Retired from Central Govt.Service as Superintending Officer
About me
I am a simple,sentimental and transparent person.Poetry is my hobby and passion

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Sushil Sarna's Blog

कुंडलिया. . . . .

कुंडलिया. . . .

किसने समझा आज तक, मुफलिस का संसार ।
आँखें   उसकी    वेदना, नित्य   करें    साकार ।।
नित्य  करें   साकार ,  दर्द  यह  कहा  न  जाता ।
उसे  भूख  का  दंश , सदा  ही   बड़ा   सताता ।।
पत्थर   पर  ही  पीठ , टिकाई   हरदम   इसने  ।
भूखी काली रात , भाग्य  में  लिख  दी  किसने ।।

सुशील सरना / 9-1-26

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Posted on January 9, 2026 at 1:29pm

दोहा पंचक. . . क्रोध

दोहा पंचक. . . . क्रोध

मानव हरदम क्रोध में, लेता है प्रतिशोध ।

सही गलत का फिर उसे, कब रहता है बोध ।।

बड़े भयानक क्रोध के, होते हैं परिणाम ।

बदले के अंगार को, मिलता नहीं विराम ।।

हर लेता इंसान का, क्रोधी  सदा विवेक ।

मिटते  इसके ज्वाल में, रिश्ते मधुर अनेक ।

क्रोध अनल में आदमी, कर जाता वह काम ।

घातक जिसके बाद में, अक्सर हों परिणाम ।।

पर्दे पड़ते अक्ल पर, जब  आता है क्रोध ।

दावानल में क्रोध की, बस लेता प्रतिशोध…

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Posted on January 8, 2026 at 2:00pm — 4 Comments

दोहा पंचक. . . शृंगार

 

बात हुई कुछ इस तरह,  उनसे मेरी यार ।

सिरहाने खामोशियाँ, टूटी सौ- सौ बार ।।

 

मौसम की मनुहार फिर, शीत हुई उद्दंड ।

मिलन ज्वाल के वेग में, ठिठुरन हुई प्रचंड ।

 

मौसम  आया शीत का, मचल उठे जज्बात ।

कैसे बीती क्या कहें, मदन वेग की रात ।।

 

स्पर्शों की आँधियाँ, उस पर शीत अलाव ।

काबू में कैसे रहे, मौन मिलन का भाव ।।

 

आँखों -आँखों में हुए, मधुर मिलन संवाद ।

संवादों के फिर किए , अधरों ने अनुवाद…

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Posted on November 16, 2025 at 7:30pm — 4 Comments

दोहा दशम्. . . निर्वाण

दोहा दशम्. . . . निर्वाण

कौन निभाता है भला, जीवन भर का साथ ।

अन्तिम घट पर छूटता, हर अपने का हाथ ।।

तन में चलती साँस का, मत करना विश्वास ।

साँसें तन की जिंदगी, तन साँसों का दास  ।।

साँसों की यह डुगडुगी, बजती है दिन-रात ।

क्या जाने कब नाद यह, दे जीवन को मात ।।

मौन देह से सूक्ष्म का, जब होता निर्वाण ।

अनुत्तरित है आज तक , कहाँ गए वह प्राण ।।

तोड़ देह प्राचीर को, सूक्ष्म चला उस पार ।

मौन देह के साथ तो, बस काँधे थे चार…

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Posted on November 5, 2025 at 9:00pm

Comment Wall (35 comments)

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At 9:12pm on August 13, 2021, Om Parkash Sharma said…

आदरणीय सुशील सरना जी ,

सादर अभिवादन , आपके नाम और सावन पर लिखे सभी दोहे मन मोह गए । दोनों कविताएं 'मौसम को' व प्रश्न गंभीर भावों को लिए हुए है। साधुवाद । 

At 11:15pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:35am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है. 

At 1:29am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर 

At 10:17pm on April 7, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ० सरना भाई जी, सादर  प्रणाम!

आपका हार्दिक स्वागत है.  मित्रता से भाग्योदय होता है ,  मैं धन्य हुआ. सादर

At 9:46am on April 1, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 6:02am on March 20, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ०  सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम!  आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर

At 4:22pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:00pm on February 17, 2016, Tasdiq Ahmed Khan said…

मोहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब ,  यह  आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है  , जिसके लिए   आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

At 8:47pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार राणा said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर हार्दिक शुभकामनाएं!
 
 
 

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