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Sushil Sarna
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Mahendra Kumar commented on Sushil Sarna's blog post नेम प्लेट ...
"बहुत ही बढ़िया प्रस्तुति है आ. सुशील सरना जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
10 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

व्यर्थ है ...

व्यर्थ है ...व्यर्थ है अपनी आशाओं को दियों की उदास पीली मटमैली रोशनी में मूर्त रूप देनाव्यर्थ है प्रतीक्षा पलों की चिर वेदना को कपोलों पर खारी स्याही से अंकित शब्दों के स्पंदन को मूर्त रूप देनाव्यर्थ है शून्यता में विलीन पदचापों को अपने स्नेह पलों में समाहित कर मौन पलों को वाचाल कर मन कंदरा के भावों को मूर्त रूप देनाहाँ जानती हूँ व्यर्थ है सब कुछ प्रेम प्रतीक्षा भाव समर्पण खारी लकीरें मुंह चिढ़ाते अंतरंग स्पंदन सब व्यर्थ है पर फिर भी न जाने क्यूँ ये दिल है जो…See More
11 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post व्यर्थ है ...
"आदरणीय नरेंद्र सिंह चौहान जी सृजन को अपनी स्नेहिल प्रशंसा से अलंकृत करने का शुक्रिया।"
15 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post व्यर्थ है ...
"आदरणीय मो.आरिफ साहिब सृजन को अपने स्नेह से पोषित करने का हार्दिक आभार।"
15 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post व्यर्थ है ...
"आदरणीय समर कबीर साहिब , आदाब  ... सृजन को आपका आशीर्वाद न मिले तो अधूरापन लगता है।  आपकी इस आत्मीय प्रशंसा का तहे दिल से शुक्रिया।  सब व्यर्थ है मुझे सही लगता है   .... बाकी इंगित टंकण त्रुटि को मैं अभी दुरुस्त किये देता हूँ…"
15 hours ago
narendrasinh chauhan commented on Sushil Sarna's blog post व्यर्थ है ...
"लाजवाब  रचना के लिए  हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
Mohammed Arif commented on Sushil Sarna's blog post व्यर्थ है ...
"आदरणीय सुशील सरना जी आदाब , बेहतरीन रचना । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post व्यर्थ है ...
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,बहुत सुंदर और शानदार कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । 'हाँ जानती हूँ....के बाद वाली पंक्तियों के अंत में'सब व्यर्थ है' को "सब व्यर्थ हैं'लिखना उचित होगा क्या ? 'तुन्द हवाओं की…"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

व्यर्थ है ...

व्यर्थ है ...व्यर्थ है अपनी आशाओं को दियों की उदास पीली मटमैली रोशनी में मूर्त रूप देनाव्यर्थ है प्रतीक्षा पलों की चिर वेदना को कपोलों पर खारी स्याही से अंकित शब्दों के स्पंदन को मूर्त रूप देनाव्यर्थ है शून्यता में विलीन पदचापों को अपने स्नेह पलों में समाहित कर मौन पलों को वाचाल कर मन कंदरा के भावों को मूर्त रूप देनाहाँ जानती हूँ व्यर्थ है सब कुछ प्रेम प्रतीक्षा भाव समर्पण खारी लकीरें मुंह चिढ़ाते अंतरंग स्पंदन सब व्यर्थ है पर फिर भी न जाने क्यूँ ये दिल है जो…See More
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post पावस रुत में ....
"आदरणीय समर कबीर साहिब सृजन में निहित बौछारों के भावों को मान देने का हार्दिक आभार।  सर धीरे धीरे बौछारों ने बरसात की शक्ल अख़्तियार कर ली , इसलिए ये हुआ। .. सर ये हंसी की बात थी वैसे लिखते लिखते फ्लो में बरसात आ गयी. . बस और कुछ नहीं सर। "
Tuesday
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post पावस रुत में ....
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,सावन के रंगों में रंगी अच्छी कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । आधी से ज़ियादा कविता में 'सावन की बौछारों में' और अंत की पंक्तियों में 'सावन की बरसातों में' ऐसा क्यूँ ?"
Tuesday
Sushil Sarna posted blog posts
Monday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post आसक्ति …….
"आदरणीय तस्दीक़ अहमद खान साहिब , आदाब। ... सृजन के भावों को अपने मधुर शब्दों से उपकृत करने का हार्दिक आभार।"
Monday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post आसक्ति …….
"आदरणीय हरी प्रकाश दूबे जी सृजन के भावों को अपनी स्नेहिल प्रशंसा से शोभित करने का हार्दिक आभार।"
Monday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post आसक्ति …….
"आदरणीया कल्पना भट्ट जी सृजन के भावों को सहमति देती आपकी मधुर प्रशंसा का दिल से आभार ।"
Monday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post आसक्ति …….
"आदरणीय मोहित मिश्रा जी सृजन की मुक्त कंठ से प्रशंसा का दिल से आभार।"
Monday

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur-Rajasthan
Native Place
New Delhi
Profession
Retired from Central Govt.Service as Superintending Officer
About me
I am a simple,sentimental and transparent person.Poetry is my hobby and passion

Sushil Sarna's Blog

व्यर्थ है ...

व्यर्थ है ...

व्यर्थ है

अपनी आशाओं को

दियों की

उदास पीली

मटमैली रोशनी में

मूर्त रूप देना

व्यर्थ है

प्रतीक्षा पलों की

चिर वेदना को

कपोलों पर

खारी स्याही से अंकित

शब्दों के स्पंदन को

मूर्त रूप देना

व्यर्थ है

शून्यता में विलीन

पदचापों को

अपने स्नेह पलों में

समाहित कर

मौन पलों को

वाचाल कर

मन कंदरा के

भावों को

मूर्त रूप…

Continue

Posted on July 18, 2017 at 10:00pm — 6 Comments

पावस रुत में ....

तृण तृण भीगा

प्रीत पलों का

सावन की बौछारों में

तड़पन भीगी

तन-मन भीगा

सावन की बौछारों में

बीती रैना

भीगे बैना

सावन की बौछारों में

पावस रुत में

नैना बरसे

सावन की बौछारों में

निष्ठुर पिया को

पल पल तरसे

सावन की बौछारों में

बादल गरजे

बिजली चमकी

सावन की बौछारों में

भीगी चौली

भीगी अंगिया

सावन की बौछारों में

चूड़ी खनकी

मिलन को तरसी

सावन की बौछारों में …

Continue

Posted on July 16, 2017 at 1:30pm — 6 Comments

नेम प्लेट ...

नेम प्लेट ...

कुछ देर बाद
मिल जाऊंगा मैं
मिट्टी में
पर
देखो
हटाई जा रही है
निर्जीव काल बेल के साथ
लटकी
मेरी ज़िंदा
मगर
उखड़े उखड़े अक्षरों की
एक अजीब सी
चुप्पी साधे
पुरानी सी 
नेम प्लेट

मुझसे पहले 

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on July 14, 2017 at 3:30pm — 17 Comments

आसक्ति …….

आसक्ति …….

परिचय  हुआ  जब   दर्पण से
तो  चंचल  दृग   शरमाने  लगे 
अधरों  पे कम्पन्न  होने   लगा 
पलकों  में  बिंब  मुस्काने  लगे ll


काजल मण्डित रक्तिम लोचन
अनुराग  निशा  से  बढ़ाने लगे 
कच क्रीडा में लिप्त समीर  से
मेघ  अम्बर  में  शरमाने  लगे ll


लज्ज़ायुक्त स्वर्णिम कपोल पे 
फिर  जलद नीर बरसाने लगे
कनक कामिनी  की काया पे
मधुप  आसक्ति  दर्शाने  लगे ll

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on July 12, 2017 at 4:30pm — 16 Comments

Comment Wall (34 comments)

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At 11:15pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:35am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है. 

At 1:29am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर 

At 10:17pm on April 7, 2016, Kewal Prasad said…

आ० सरना भाई जी, सादर  प्रणाम!

आपका हार्दिक स्वागत है.  मित्रता से भाग्योदय होता है ,  मैं धन्य हुआ. सादर

At 9:46am on April 1, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 6:02am on March 20, 2016, Kewal Prasad said…

आ०  सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम!  आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर

At 4:22pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:00pm on February 17, 2016, Tasdiq Ahmed Khan said…

मोहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब ,  यह  आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है  , जिसके लिए   आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

At 8:47pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर हार्दिक शुभकामनाएं!
At 2:33pm on January 5, 2016, अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव said…

तन स्वस्थ रहे मन में उमंग...सुशील भाईजी आपको भी सपरिवार नव वर्ष की ढेरों  शुभकामनायें

 
 
 

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