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Sushil Sarna
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narendrasinh chauhan commented on Sushil Sarna's blog post दो मुक्तक (मात्रा आधारित )......
"बहोत सुन्दर सर। ........."
yesterday
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post विशाल सागर ......
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छी कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करे ।"
yesterday
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post सागर ....
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छी कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

विशाल सागर ......

विशाल सागर ......सागरतेरी वीचियों पर मैंअपनी यादों को छोड़ आया हूँतेरे रेतीले किनारों परअपनी मोहब्बत छोड़ आया हूँतेरी लहरों परनृत्य करती चांदनी संगअपने सपन छोड़ आया हूँअपनी ज़िद,अपने सारेभरम छोड़ आया हूँबस साथ अपनेअपना आसमान लाया हूँकुछ सुलगते अरमानकुछ स्पर्शों के तूफ़ानकुछ भीगी कागज़ की कश्तियाँकुछ अबोली खामोशियाँसाथ अपने लाया हूँबाकी सबतेरे किनारों पर छोड़ आया हूँवो आये कभीमेरे बाद तोमेरा सामान उसे लौटा देनाऔर हाँतेरी लहरों कोमैं भी एक बूँदअपने खारे सागर कीजो देकर आया थावो भी उसे लौटा देनाएक दर्द को…See More
Thursday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post कुछ क्षणिकाएँ : ....
""आदरणीय   Samar kabeer' जी सृजन पर आपकी ऊर्जावान प्रतिक्रिया का दिल से आभार।""
Tuesday
Sushil Sarna posted a blog post

सागर ....

सागर ....नहीं नहीं सागर मुझे तुम्हारे कह्र से डर नहीं लगता तुम्हारी विध्वंसक लहरों से भी डर नहीं लगता तुम्हारे रौद्र रूप से भी डर नहीं लगता मगर ऐ सागर अगर तुम वहशियों से नोचे गए मासूमों के क्रंदन सुनोगे तो डर जाओगे किसी खामोश आँख में ठहरा समंदर देखोगे तो डर जाओगे खिलने से पहले कुचली कलियों के शव देखोगे तो डर जाओगे सदियों से तुमने अपने गर्भ में न जाने कितने दर्द के समंदर छुपाये होंगे मगर वहशियों की वासना का शिकार बनी मासूम की देह माँ की गोद में देखोगे तो डर जाओगे इसलिए ऐ सागर तुम्हारा अट्हास…See More
Tuesday
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post तितली-पुष्प प्रेम :
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,बात चीत के अंदाज़ में अच्छे दोहे रचे,बधाई स्वीकार करें । 'हाली सी मुस्कान ले, यूँ बोला फिर पुष्प- ..................सच्चे हो दिल में अगर, प्रीत भरे जज्बात' दोहे के दोनों पदों में तुकांतता होती है,जो इसमें नज़र नहीं…"
Monday
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post दो मुक्तक (मात्रा आधारित )......
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,मात्रा भार क्या लिया है ये भी लिखें,ताकि कुछ कहने में आसानी हो ।"
Monday
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post कुछ क्षणिकाएँ : ....
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छी क्षणिकाएँ लिखीं आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post तितली-पुष्प प्रेम :
"आ. भाई सुशील जी, सम्वादात्मक रुप में सुन्दर दोहे हुए हैं । हार्दिक बधाई।"
Dec 9
Sushil Sarna posted blog posts
Dec 8
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post कुछ क्षणिकाएँ : ....
""आदरणीय   लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सृजन पर आपकी ऊर्जावान प्रतिक्रिया का दिल से आभार।""
Dec 7
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post कुछ क्षणिकाएँ : ....
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। बहुत अच्छी क्षणिकाएँ हुई हैं । हार्दिक बधाई ।"
Dec 7
Sushil Sarna replied to Saurabh Pandey's discussion मात्रिक पदों में शब्द-संयोजन in the group भारतीय छंद विधान
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम ... सर छंदों में गेयता के आधारभूत सिद्धांतों को आपने बहुत ही सरल और सुंदर ढंग से समझाया है। इस हेतु आपका तहे दिल से शुक्रिया।"
Dec 6
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post ३ क्षणिकाएँ :
"आदरणीय vijay nikore जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का तहे दिल से शुक्रिया।"
Dec 6
Sushil Sarna posted a blog post

पानी पर चंद दोहे :

पानी पर चंद दोहे :प्यासी धरती पर नहीं , जब तक बरसे नीर। हलधर कैसे खेत की, हरित करे तकदीर।१ ।पानी जीवन जीव का, पानी ही आधार। बिन पानी इस सृष्टि का, कैसे हो शृंगार।२ ।पानी की हर बूँद में, छुपा हुआ है ईश। अंतिम पल इक बूँद से, मिल जाता जगदीश।३ । पानी तो अनमोल है, धरती का परिधान। जीवन ये हर जीव को, प्रभु का है वरदान।४ ।बूँद बूँद अनमोल है, इसे न करना व्यर्थ। अगर न चेते आज तो, होगा बड़ा अनर्थ।५ ।जल संरक्षण के लिए, किया न अगर प्रयास। कैसे मानव फिर भला, बुझ पाएगी प्यास।६ ।श्यामवर्ण सा हो गया,…See More
Dec 6

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur-Rajasthan
Native Place
New Delhi
Profession
Retired from Central Govt.Service as Superintending Officer
About me
I am a simple,sentimental and transparent person.Poetry is my hobby and passion

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विशाल सागर ......

विशाल सागर ......
सागर
तेरी वीचियों पर मैं
अपनी यादों को छोड़ आया हूँ
तेरे रेतीले…
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Posted on December 9, 2019 at 6:36pm — 1 Comment

सागर ....

सागर ....

नहीं नहीं

सागर

मुझे तुम्हारे कह्र से

डर नहीं लगता

तुम्हारी विध्वंसक

लहरों से भी

डर नहीं लगता

तुम्हारे रौद्र रूप से भी

डर नहीं लगता

मगर

ऐ सागर

अगर तुम

वहशियों से नोचे गए

मासूमों के

क्रंदन सुनोगे

तो डर जाओगे

किसी खामोश आँख में

ठहरा समंदर

देखोगे

तो डर जाओगे

खिलने से पहले

कुचली कलियों के

शव देखोगे

तो डर जाओगे

सदियों से तुमने

अपने गर्भ में

न…

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Posted on December 9, 2019 at 1:33pm — 1 Comment

तितली-पुष्प प्रेम :

तितली-पुष्प प्रेम :
तितली पूछे फूल से ,बता मुझे इक बात।
...........कैसे तेरी गंध से, भर जाते आघात।
...............हाली सी मुस्कान ले, यूँ बोला फिर पुष्प-…
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Posted on December 7, 2019 at 6:00pm — 2 Comments

दो मुक्तक (मात्रा आधारित )......

दो मुक्तक (मात्रा आधारित )......

शराबों में शबाबों में ख़्वाबों में किताबों में।

ज़िंदगी उलझी रही सवालों और जवाबों में।

.कैद हूँ मुद्दत से मैं आरज़ूओं के शहर में -

उम्र भर ज़िन्दा रहे वो दर्द के सैलाबों में।

.........................................................



पूछो ज़रा चाँद से .क्यों रात भर हम सोये नहीं।

यूँ बहुत सताया याद ने .फिर भी हम रोये नहीं।

सबा भी ग़मगीन हो गयी तन्हा हमको देख के-

कह न सके दर्द अश्क से ज़ख्म हम ने धोये…

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Posted on December 6, 2019 at 5:32pm — 2 Comments

Comment Wall (34 comments)

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At 11:15pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:35am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है. 

At 1:29am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर 

At 10:17pm on April 7, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ० सरना भाई जी, सादर  प्रणाम!

आपका हार्दिक स्वागत है.  मित्रता से भाग्योदय होता है ,  मैं धन्य हुआ. सादर

At 9:46am on April 1, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 6:02am on March 20, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ०  सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम!  आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर

At 4:22pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:00pm on February 17, 2016, Tasdiq Ahmed Khan said…

मोहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब ,  यह  आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है  , जिसके लिए   आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

At 8:47pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार राणा said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर हार्दिक शुभकामनाएं!
At 2:33pm on January 5, 2016, अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव said…

तन स्वस्थ रहे मन में उमंग...सुशील भाईजी आपको भी सपरिवार नव वर्ष की ढेरों  शुभकामनायें

 
 
 

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"बहुत ही सुंदर दोहे विषय को सार्थक करते ,कोटिशः बधाई स्वीकारें सादर।"
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"हृदयतल से आभार आदरणीय रचना की सराहना के लिए ।"
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"आ. भाई छोटेलाल जी, सादर अभिवादन। दोहों पर उपस्थिति और प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
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डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-110
"आदरणीया सुनन्दा झा जी विषय को चरितार्थ जरती बहुत बढ़िया रचना बधाई हो"
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