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Sushil Sarna
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ख़ामोश दो किनारे ....

ख़ामोश दो किनारे ....बरसों के बाद हम मिले भी तो किसी अजनबी की तरह हमारे बीच का मौन जैसे किसी अपराधबोध से ग्रसित रिश्ते का प्रतिनिधित्व कर रहा होख़ामोशी के एक किनारे पर तुम सिर को झुकाये खड़ी हो और दूसरे किनारे पर मैं मौन का वरण किये खड़ा हूँक्या कभी मिट पाएँगे हम दोनों के मिलन में अवरोधक ख़ामोशी केख़ामोश दो किनारेसुशील सरना मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
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Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post पानी से आग बुझाने की ....
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Oct 16
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Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur-Rajasthan
Native Place
New Delhi
Profession
Retired from Central Govt.Service as Superintending Officer
About me
I am a simple,sentimental and transparent person.Poetry is my hobby and passion

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Sushil Sarna's Blog

ख़ामोश दो किनारे ....

ख़ामोश दो किनारे ....

बरसों के बाद
हम मिले भी तो किसी अजनबी की तरह
हमारे बीच का मौन
जैसे किसी अपराधबोध से ग्रसित
रिश्ते का प्रतिनिधित्व कर रहा हो

ख़ामोशी के एक किनारे पर तुम
सिर को झुकाये खड़ी हो
और
दूसरे किनारे पर मैं
मौन का वरण किये खड़ा हूँ

क्या कभी मिट पाएँगे
हम दोनों के मिलन में अवरोधक
ख़ामोशी के
ख़ामोश दो किनारे

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on October 16, 2020 at 6:54pm — 4 Comments

पागल दिल का पागल सपना ......

पागल दिल का पागल सपना ......

इत् -उत् ढूँढूँ साजन अपना

नैनन द्वार भी आये न सपना

बैरी कजरा बह -बह जाए

का से कहूँ दुःख साजन अपना

तुम यथार्थ से बन गए सपना

प्यार किया करके बिसराया

प्रीतम तोहे तरस न आया

तडपत तडपत रैन बिताई

काहे तो पे ये मन आया

मुश्किल दिल को है समझाना

भूलूँ कैसे तेरी बातें

प्यार भरी वो प्यारी रातें

हर आहट पर ऐसा लगता

लौटी जैसे फिर मुलाकातें

आहत करे तेरा यूँ…

Continue

Posted on October 14, 2020 at 6:21pm — 2 Comments

पानी से आग बुझाने की ....

पानी से आग बुझाने की ....

किस तिनके ने दी इजाज़त

घर में धूप को आने की

दहलीज़ पे रातों की आकर

पलकों में ख़्वाब जलाने की

जिस खिड़की पर लगी थी चिलमन

नज़र से हुस्न बचाने की

उस खिड़की पर रुकी थी नज़रें

इस कम्बख़्त ज़माने की

मंज़िल उसको मान के हम

उसके इश्क में जलते रहे

वो चालें अपनी चलते रहे

हमसे हमें चुराने की

ख़्वाहिश बस ख़्वाहिश ही रही

पलकों में घर बनाने की

नादाँ दिल को मिली सज़ा

नज़रों से नज़र मिलाने की

कसर न छोड़ी…

Continue

Posted on October 12, 2020 at 3:25pm — 4 Comments

मोहब्बत ऐसी होती है .....

मोहब्बत ऐसी होती है .....
इक मुहब्बत क्या करते हैं
सितारों से उलझ जाते हैं…
Continue

Posted on October 7, 2020 at 3:03pm — 2 Comments

Comment Wall (34 comments)

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At 11:15pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:35am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है. 

At 1:29am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर 

At 10:17pm on April 7, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ० सरना भाई जी, सादर  प्रणाम!

आपका हार्दिक स्वागत है.  मित्रता से भाग्योदय होता है ,  मैं धन्य हुआ. सादर

At 9:46am on April 1, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 6:02am on March 20, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ०  सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम!  आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर

At 4:22pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:00pm on February 17, 2016, Tasdiq Ahmed Khan said…

मोहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब ,  यह  आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है  , जिसके लिए   आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

At 8:47pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार राणा said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर हार्दिक शुभकामनाएं!
At 2:33pm on January 5, 2016, अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव said…

तन स्वस्थ रहे मन में उमंग...सुशील भाईजी आपको भी सपरिवार नव वर्ष की ढेरों  शुभकामनायें

 
 
 

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