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Sushil Sarna
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Sushil Sarna commented on narendrasinh chauhan's blog post मैं
"वाह अंतर्मन के भावों का सुंदर प्रस्तुतीकरण आदरणीय। ... हार्दिक बधाई स्वीकारें। "
Wednesday
Sushil Sarna posted a blog post

विश्वास ...

विश्वास ....क्या है विश्वास क्या वो आभास जिसे हम केवल महसूस कर सकते हैं और गुजार देते हैं ज़िंदगी सिर्फ़ इस यकीन पर कि एक दिन तो उसे हम स्पर्श कर लेंगे छू लेंगे एक छलांग में आसमान कोया वो है विश्वास जिसे हम जानते हुई भी कि वो चाहे कितना भी हमारी साँसों के करीब क्यूँ न हो छोड़ देगा हमारा साथ निकल जाएगा चुपके से हमारे क़दमों के नीचे से जैसे ज़मीन होने का विश्वासविश्वास और अविश्वास के मध्य ये बात निश्चित है कि जिस दिन ये मैं आभास में लुप्त हो आसमान बन जाएगा उस दिन वो शाश्वत सत्य के अंतर् में खो जाएगा…See More
Wednesday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post विश्वास ...
"Aadrneey sir aapkeé sujhaavatmak prashansa avm pratikriya ka shukriya Sir aapka kathan bilkul sahee hai Kal ye prastuti apne sanshodhit roop men preshit karoonga Is amulay sujhaav ka shukriya"
Tuesday

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on Sushil Sarna's blog post विश्वास ...
"आदरनीय सुशील भाई , बात अच्छी कही है , बधाइयाँ । इस बार थोड़ी जल्द बाजी हो गयी लगता है , भाषायी कमियाँ अधिक हैं , विश्वास पुल्लिंग शब्द है ..  जहाँ आभासी होना चाहिये वहाँ आभास है ... एक बार ध्यान से और पढ़ लीजिये अपनी कविता .. ता कि आवश्यक सुधार…"
Tuesday
Sushil Sarna commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post तरही गजल (मुहब्बत में अगर कोई कभी बीमार हो जाये)
"दवा भी बेअसर हो वैद्य भी लाचार हो जायेमुहब्बत में अगर कोई कभी बीमार हो जाये बहुत सुंदर अशआर है आपकी इस ग़ज़ल के .... हार्दिक बधाई कबूल फरमाएं।"
Tuesday
Sushil Sarna commented on Gurpreet Singh's blog post ग़ज़ल --इस्लाह के लिए (गुरप्रीत सिंह )
"सामने है इक चराग़ और आप के हाथों में शमअ आप किस उलझन में हैं जी?क्या हुआ? रोशन करें!.... वाह बहुत सुंदर अशआर कहे हैं आदरणीय गुरप्रीत सिंह जी. . दिल से मुबारक कबूल फरमाएं।"
Tuesday
Sushil Sarna commented on vijay nikore's blog post झंझावात
"काल-सर्प-से अंतिम समय मेंकिस-किस असंग प्रसंग मेंक्या-क्या संवारेंगे हमकि जिस वेदना में पलती हो तुमछुपने के लिए उसीसेकुछ और गहरेगहरे उतर जाती हो मुझमेंमुझको .. जाते इन पलों मेंउसकी भी वेदना है..... वाह क्या बात है सर अंतर्मन के भावों का बहुत ही…"
Tuesday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post अँधेरे ...
"आदरणीय विजय निकोर साहिब रचना के भावों को अपनी मधुर प्रशंसा से अलंकृत करने का हार्दिक आभार।"
Tuesday
vijay nikore commented on Sushil Sarna's blog post अँधेरे ...
"इस अच्छी रचना के लिए हार्दिक बधाई, आदरणीय सुशील जी"
Monday
Sushil Sarna posted a blog post

विश्वास ...

विश्वास ....क्या है विश्वास क्या वो आभास जिसे हम केवल महसूस कर सकते हैं और गुजार देते हैं ज़िंदगी सिर्फ़ इस यकीन पर कि एक दिन तो उसे हम स्पर्श कर लेंगे छू लेंगे एक छलांग में आसमान कोया वो है विश्वास जिसे हम जानते हुई भी कि वो चाहे कितना भी हमारी साँसों के करीब क्यूँ न हो छोड़ देगा हमारा साथ निकल जाएगा चुपके से हमारे क़दमों के नीचे से जैसे ज़मीन होने का विश्वासविश्वास और अविश्वास के मध्य ये बात निश्चित है कि जिस दिन ये मैं आभास में लुप्त हो आसमान बन जाएगा उस दिन वो शाश्वत सत्य के अंतर् में खो जाएगा…See More
Monday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post स्वप्न साधना ....
"आदरणीय  Mahendra Kumar  जी रचना के भावों को आपने आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से शुक्रिया।"
Monday
Mahendra Kumar commented on Sushil Sarna's blog post स्वप्न साधना ....
"बहुत अच्छी भावपूर्ण कविता है आदरणीय सुशील सरना जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Monday
Sushil Sarna commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल--शम अ रोशन करो मुहब्बत की
"आदरणीय तस्दीक साहिब इस दिलकश ग़ज़ल के लिए दिल से मुबारकबाद कबूल फरमाएं सर। "
May 20
Sushil Sarna commented on Samar kabeer's blog post तरही ग़ज़ल, जनाब निलेश 'नूर' साहिब की नज़्र
"बताऊँ,कैसे शब-ए-इन्तिज़ार गुज़री हैमेरे हवास पे होकर सवार गुज़री है यही तो होता है हर शब हमारे सीने परग़मों की फ़ौज बनाकर क़तार गुज़री है किसी मक़तल से बच जाऊं तो वो खुशी नसीब न होगी जो आपके अल्फ़ाज़ों पे मरके मिलती है। गज़ब के अशआर हैं सर .... इस बेहतरीन ग़ज़ल…"
May 20
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post अँधेरे ...
"आदरणीय    narendrasinh chauhan जी  सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का हार्दिक आभार। "
May 19
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post अँधेरे ...
"आदरणीय समर कबीर साहिब सृजन के भावों को अपनी स्वीकृति देती प्रशंसा से अलंकृत करने का हार्दिक आभार। "
May 19

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur-Rajasthan
Native Place
New Delhi
Profession
Retired from Central Govt.Service as Superintending Officer
About me
I am a simple,sentimental and transparent person.Poetry is my hobby and passion

Sushil Sarna's Blog

विश्वास ...

विश्वास ....

क्या है विश्वास

क्या वो आभास

जिसे हम

केवल महसूस कर सकते हैं

और गुजार देते हैं ज़िंदगी

सिर्फ़ इस यकीन पर कि

एक दिन तो

उसे हम स्पर्श कर लेंगे

छू लेंगे एक छलांग में

आसमान को

या

वो है विश्वास

जिसे हम जानते हुई भी

कि वो

चाहे कितना भी

हमारी साँसों के करीब क्यूँ न हो

छोड़ देगा

हमारा साथ

निकल जाएगा चुपके से

हमारे क़दमों के नीचे से

जैसे

ज़मीन होने का…

Continue

Posted on May 22, 2017 at 8:30pm — 2 Comments

अँधेरे ...

अँधेरे ...

किसने

स्वर दे दिए

रजनी तुम्हें

तुम तो

वाणीहीन थी

मूक तम को

किसने स्वरदान दे दिया

शून्यता को बींधते हुए

कुछ स्वर तो हैं

मगर

अस्पष्ट से

क्षण

तम के परिधान में

सुप्त से प्रतीत होते हैं

भाव

एकांत के दास हैं

शायद

तुम

इस तम की

वाणीहीनता का कारण हो

पर हाँ

ये भी सच है कि

तुम ही इस का

निवारण भी हो

दे दो प्राण

इन एकांत

अँधेरे को

छू लो इन्हें…

Continue

Posted on May 17, 2017 at 5:18pm — 6 Comments

स्वप्न साधना ....

स्वप्न साधना ....



निस्सीम प्रीत के

मधुपलों में

हो समर्पित

चिर सुख की

मिलन वेला में

खो गयी मैं

और हार के

स्वयं को स्वयं से

अमर जीत

हो गयी मैं



करती रही

क्षण क्षण संचित

एकांत वास में

अपने प्रिय के

प्रीतपाश का



विस्मृत कर

विभावरी के

अंतकाल को

श्वास स्पंदन

की मिलन गंध को

विभावरी के

शेष पलों में

जीती रही मैं



शून्य हुआ

तुम बिन हर पल

श्वास मेरी… Continue

Posted on May 15, 2017 at 7:23pm — 10 Comments

स्मृति पृष्ठ ...

स्मृति पृष्ठ ...

रजनी के

श्यामल कपोलों पर

मेघों की बूंदों ने

व्यथित यादों के

पृष्ठों पर जैसे

सान्तवना का

आभासीय श्रृंगार कर डाला

दृग कलशों से

सजल वेदना

प्रीत की

पराकाष्ठा को

चेहरे की लकीरों में

शोभित करती रही

प्राण और देह में

जीवन संघर्ष चलता रहा

किसी को विस्मरण करने के

सभी उपचार

रेत की भित्ति से

ढह गए

थके नयन

आशा क्षणों की

गहन कंदराओं में…

Continue

Posted on May 9, 2017 at 3:59pm — 13 Comments

Comment Wall (34 comments)

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At 11:15pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:35am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है. 

At 1:29am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर 

At 10:17pm on April 7, 2016, Kewal Prasad said…

आ० सरना भाई जी, सादर  प्रणाम!

आपका हार्दिक स्वागत है.  मित्रता से भाग्योदय होता है ,  मैं धन्य हुआ. सादर

At 9:46am on April 1, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 6:02am on March 20, 2016, Kewal Prasad said…

आ०  सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम!  आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर

At 4:22pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:00pm on February 17, 2016, Tasdiq Ahmed Khan said…

मोहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब ,  यह  आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है  , जिसके लिए   आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

At 8:47pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर हार्दिक शुभकामनाएं!
At 2:33pm on January 5, 2016, अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव said…

तन स्वस्थ रहे मन में उमंग...सुशील भाईजी आपको भी सपरिवार नव वर्ष की ढेरों  शुभकामनायें

 
 
 

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