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Sushil Sarna
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रामबली गुप्ता commented on Sushil Sarna's blog post तेरे मेरे दोहे :
"बहुत खूब हार्दिक बधाई स्वीकारें। अच्छे भावपूर्ण दोहे हुए हैं आदरणीय सुशील सरना जी। कुछ शिल्पगत गुंजाइश है अभी। 'काहे करे शृंगार' में मात्राभार अधिक है। इसे 'काहे करे सिँगार' कर लीजिए। 'कह गई राज रात के' गेयता भंग है।…"
3 hours ago
Mohammed Arif commented on Sushil Sarna's blog post तेरे मेरे दोहे :
"आदरणीय सुशील सरना जी आदाब, प्रीत में , रंग में , श्रृंगार में , बेचैनी में डूबे बेहतरीन दोहों की प्यारी सौग़ात । दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें ।"
6 hours ago
Rakshita Singh commented on Sushil Sarna's blog post अजल की हो जाती है....
"आदरणीय सुशील जी, ह्रदयस्पर्शी पंक्तियों से बुनी इस खूबसूरत रचना पर मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
16 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
16 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post अजल की हो जाती है....
"आदरणीय समर कबीर साहिब, आपका सन्देश मिल गया है।  संदेह का निवारण हुआ। आपका तहे दिल से शुक्रिया। असुविधा के लिए क्षमा। "
19 hours ago
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post अजल की हो जाती है....
"आपके सन्देश का जवाब मैं दे चुका हूँ भाई ।"
yesterday
Sushil Sarna commented on Mohammed Arif's blog post ग़ज़ल--बह्र फेलुन×5+फा
"कुछ भूला कुछ पहचाना सा लगता हैकोई मुझको दीवाना सा लगता है । थोड़ी उलझन थोड़े आँसू जैसा वोजीवन का ताना बाना सा लगता है । वाह खूबसूरत अहसासों की इस दिलकश ग़ज़ल के लिए दिल से बधाई आदरणीय मो.आरिफ साहिब।"
yesterday
Sushil Sarna commented on vijay nikore's blog post बिखराव
"यादेंठहरी यादों सेकल फिर मिलने का वायदा करती भीगे सिरहाने पर अप्रतिम अप्रतिम अप्रतिम ... यादों के शानों पर जाने क्या क्या रख दिया आपनेनाउम्मीदी के सायों को अपनी आफ़ताबी कलम से ढक दिया आपने इस बेमिसाल प्रस्तुति पर आपको दिल से हार्दिक बधाई आदरणीय विजय…"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post अजल की हो जाती है....
"आदरणीय तस्दीक अहमद साहिब, आदाब ... सृजन को आत्मीय स्नेह देने का दिल से आभार।"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post अजल की हो जाती है....
"आदरणीय समर कबीर साहिब, शुक्रिया आपकी दुआओं का। सर मैंने आपको एक सन्देश भेजा है। प्लीज़ देख लें।"
yesterday
Tasdiq Ahmed Khan commented on Sushil Sarna's blog post अजल की हो जाती है....
"जनाब सुशील सरना साहिब ,बहुत ही जज़्बाती कविता हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमायें"
yesterday
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post अजल की हो जाती है....
"कोशिश करते रहें,सब ठीक होगा ।"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post बंद किताब ...
"आदरणीय विजय निकोर साहिब , सादर प्रणाम  ... सृजन के भावों को आत्मीय भावों से अलंकृत का हार्दिक आभार। "
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

अजल की हो जाती है....

अजल की हो जाती है....ज़िंदगी साँसों के महीन रेशों से गुंथी हुई बिना सिरों वाली एक रस्सी ही तो है जिसकी उत्पत्ति भी अंधेरों से और विलय भी अंधेरों में होता हैज़िंदगी लम्हों के पायदानों पर आबगीनों सी ख़्वाहिशों को छूने के लिए सांस दर सांस चढ़ती जाती है मौसम अपने ज़िस्म के इक इक लिबास को उतारते ज़िंदगी को हकीकत के आफ़ताब की तपिश से रूबरू करवाने की हर मुमकिन कोशिश करते हैं मगर अफ़सोस ग़ुरूर में गुम ज़िंदगी कायनात की हर ख़्वाहिश को अपनी मुट्ठी में क़ैद करना चाहती है नहीं जानती कि ख़्वाहिश तो अजल की डिब्बी में क़ैद…See More
Thursday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post अजल की हो जाती है....
"आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब , सृजन को अपनी आत्मीय प्रशंसा से मान देने का हार्दिक आभार। इंगित त्रुटियों को दर्शाने का मैं हार्दिक आभारी भी हूँ शरमसार भी हूँ। कोशिश करता हूँ फिर भी .... . इस हेतु आपका तहे दिल से शुक्रिया। आप जैसे गुणीजनों से ही हम…"
Thursday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post अजल की हो जाती है....
"आदरणीय मो.आरिफ साहिब , आदाब , सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार।"
Thursday

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur-Rajasthan
Native Place
New Delhi
Profession
Retired from Central Govt.Service as Superintending Officer
About me
I am a simple,sentimental and transparent person.Poetry is my hobby and passion

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तेरे मेरे दोहे :

तेरे मेरे दोहे :

पथ को दोष न दीजिये , पथ के रंग हज़ार

प्रीत कभी पनपे यहां ,कभी विरह शृंगार!!१!!

दर्पण झूठ न बोलता ,वो बोले हर बार

पिया नहीं हैं पास तो, काहे करे शृंगार!!२!!

शरम न आए चूड़ियाँ ,शोर करें घनघोर

कह गई राज़ रात के, पुष्प गंध हर ओर!!३!!

जर्ज़र तन ने देखिये, ये पायी सौग़ात

निर्झर नैनों से गिरे,दर्द भरी बरसात!! ४!!

कैसे कह दूँ मैं भला, घर को मेरा जहाँ

इस घर में दिखती नहीं, मुझको मेरी…

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Posted on November 24, 2017 at 5:00pm — 2 Comments

अजल की हो जाती है....

अजल की हो जाती है....



ज़िंदगी

साँसों के महीन रेशों से

गुंथी हुई

बिना सिरों वाली

एक रस्सी ही तो है

जिसकी उत्पत्ति भी अंधेरों से

और विलय भी अंधेरों में होता है



ज़िंदगी

लम्हों के पायदानों पर

आबगीनों सी ख़्वाहिशों को

छूने के लिए

सांस दर सांस

चढ़ती जाती है

मौसम

अपने ज़िस्म के

इक इक लिबास को उतारते

ज़िंदगी को

हकीकत के आफ़ताब की

तपिश से रूबरू करवाने की

हर मुमकिन कोशिश करते हैं

मगर अफ़सोस…

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Posted on November 22, 2017 at 12:00pm — 11 Comments

बंद किताब ...

बंद किताब ...

ठहरो न !

थोड़ी देर तो रुक जाओ

अभी तो रात की स्याही बाकी है

सहर की दस्तक से घबराते हो

प्यार करते हो

और शरमाते हो

कभी नारी मन के

सागर में उतर के देखो

न जाने कितने गोहर

सीपों में

किसी के लम्स के मुंतज़िर हैं

देहाकर्षण के परे भी

एक आकर्षण होता है

जहां भौतिक सुख के बाद का

एक दर्पण होता है

नशवरता से परे

अनंत में समाहित

अमर समर्पण होता है

पर रहने दो

तुम ये…

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Posted on November 20, 2017 at 1:30pm — 14 Comments

मधुर दोहे :

मधुर दोहे :

मन के मधुबन में मिले, मन भ्र्मर कई बार।
मूक नयन रचते रहे, स्पंदन का संसार।।

थोड़ा सा इंकार था थोड़ा सा इकरार।
सघन तिमिर में हो गयी , प्रणय सुधा साकार।।

बाहुपाश से देह के, टूटे सब अनुबंध।
स्वप्न सेज महका गयी ,मधुर बंध की गंध।।


सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on November 15, 2017 at 9:22pm — 12 Comments

Comment Wall (34 comments)

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At 11:15pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:35am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है. 

At 1:29am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर 

At 10:17pm on April 7, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ० सरना भाई जी, सादर  प्रणाम!

आपका हार्दिक स्वागत है.  मित्रता से भाग्योदय होता है ,  मैं धन्य हुआ. सादर

At 9:46am on April 1, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 6:02am on March 20, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ०  सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम!  आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर

At 4:22pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:00pm on February 17, 2016, Tasdiq Ahmed Khan said…

मोहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब ,  यह  आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है  , जिसके लिए   आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

At 8:47pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर हार्दिक शुभकामनाएं!
At 2:33pm on January 5, 2016, अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव said…

तन स्वस्थ रहे मन में उमंग...सुशील भाईजी आपको भी सपरिवार नव वर्ष की ढेरों  शुभकामनायें

 
 
 

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