For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

narendrasinh chauhan
  • Male
  • anjar kutch gujarat
  • India
Share

Narendrasinh chauhan's Friends

  • Manisha Joban Desai
  • Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"
  • डिम्पल गौड़ 'अनन्या'
  • Samar kabeer
  • gumnaam pithoragarhi
  • savitamishra
  • Sushil Sarna
  • Madan Mohan saxena
  • Meena Pathak
  • vijay nikore
  • Dr.Prachi Singh
  • मिथिलेश वामनकर
 

narendrasinh chauhan's Page

Latest Activity

narendrasinh chauhan commented on Dayaram Methani's blog post ग़ज़ल
"सुन्दर रचना सर "
Feb 21
narendrasinh chauhan commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post जल रही दिलों में आग हम बुझाएँ किसलिए (३० )
"आ. गिरधारी लाल जी, सुन्दर रचना के लिए  हार्दिक बधाई ।"
Feb 21
narendrasinh chauhan commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post जब तिरंगे में लिपट गांव वो आया होगा (२८ )
"जय हिन्द "
Feb 16
narendrasinh chauhan commented on Sushil Sarna's blog post अंतिम स्वीकार ....
"खूब सुन्दर रचना "
Feb 14
narendrasinh chauhan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"ख़ास ये तुझ पर इनायत है "समर" अल्लाह कीजो भी सुहबत में तेरी बैठा वो दाना बन गया बहोत सुन्दर "
Dec 29, 2018
narendrasinh chauhan commented on Sushil Sarna's blog post तीन क्षणिकाएं :
"हार्दिक बधाई , आदरणीय सुशील सरना जी"
Dec 29, 2018
narendrasinh chauhan commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ८३
"राज जी, सुंदर गजल । हार्दिक बधाई ।"
Dec 18, 2018
narendrasinh chauhan commented on Sushil Sarna's blog post दोहा संकलन :
"खूब सुन्दर दोहावली "
Dec 15, 2018
narendrasinh chauhan commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल- बलराम धाकड़ (चलो धुंआ तो उठा, इस गरीबख़ाने से)
"खूब सुंदर रचना सर। . दाद के साथ मुबारकबाद "
Dec 14, 2018
narendrasinh chauhan commented on Sushil Sarna's blog post देर तक ....
"खूब सुन्दर भावपूर्ण रचना सर "
Dec 14, 2018
narendrasinh chauhan commented on Sushil Sarna's blog post रंगहीन ख़ुतूत ...
"लाजवाब , खूब सुन्दर रचना सर "
Dec 11, 2018
narendrasinh chauhan commented on rajesh kumari's blog post लंगडा मज़े में है (हास्य व्यंग ग़ज़ल 'राज')
"हार्दिक बधाई आदरणीय राजेश कुमारी जी।खूब सुन्दर रचना ।"
Dec 10, 2018
narendrasinh chauhan commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
" बधाई आदरणीय नवीनजी।खूब सुन्दर  गज़ल।"
Dec 10, 2018
narendrasinh chauhan commented on Sushil Sarna's blog post दो क्षणिकाएं :
"लाजवाब"
Dec 9, 2018
narendrasinh chauhan commented on Sushil Sarna's blog post ३ क्षणिकाएँ ...
"भला घर खंडहर में तब्दील कब होते हैं जब तक बुज़ुर्ग साथ होते हैं खंडहर भी घर होते हैं  आदरणीय सुशील सरना जी खूब सुन्दर रचना "
Dec 4, 2018
narendrasinh chauhan commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ७६
"खूब सुन्दर रचना , आदरणीय"
Dec 3, 2018

Profile Information

Gender
Male
City State
anjar gujarat
Native Place
anjar
Profession
service
About me
READING

Narendrasinh chauhan's Blog

हृदय बाह्य

आग की तरह के  शब्द,
मेरी आत्मा में जलाते है ,
मैं अपने आप को खोया पाता हूँ ,
नियंत्रण, रखना प्रतीत नहीं हो सकता है,
इरादे लटक जाते 
फांसी पे एक ध्रुव की  ,
और प्यार धुंधला हो जाता  है,
आँखों की कालिमा से 

"मौलिक व अप्रकाशित" 

Posted on November 24, 2018 at 3:35pm — 5 Comments

और इस तरह

मेरी आँखें बंद करो

और इस तरह से

दुनिया को बंद करना

मैं तुम्हें फिर मिलूंगा

तुम  शानदार हो 

जीवित और ज्वलंत

मेरे सीने  से गहरी सांस लेना

मैं तुम्हारी मुस्कान  की तस्वीर बना लूँगा 

तुम्हारी  आंखों के पीछे का नरम  प्रकाश

मेरे दिमाग में यादों का  मीलो  चलना

इच्छा है कि मैं एक चील  की तरह झपट के 

और तुम्हें उस जगह  ले जाऊ 

जिस  जगह जहां आँसू गिरते थे 

जबकि हम आमने-सामने बैठे थे

एक दूसरे के गाल पर हाथ

फुसफुसाते हुए "सब ठीक…

Continue

Posted on November 3, 2018 at 2:30pm — 2 Comments

इच्छा

मैं

एक पंख  

बिना उद्देश्य से उड़ता 

भाग्य की हवा की चोटी पर अनियंत्रित

हवा की धाराओं पर 

मुझे 

कृपया प्रेरित करे  

शायद एक दिन

भाग्य एक यादृच्छिक हवा 

 मुझे ले जाये

जहां मैं कभी नहीं उड़ा

उस दिशा में

 जो अंततः

मुझे पहुचाये 

आपके करीब

अमोलिक अप्रकाषित 

Posted on September 4, 2018 at 12:28pm — 3 Comments

कविता

पेंसिल या पेन

किस तरह का स्याही

आप फैल रहे हैं?

आग पर कीबोर्ड

सपने और इच्छाएं

कुछ हास्य

कुछ आँसू

गंभीरता  एक खुराक

जीतने वाले शब्द

शब्दों को विभाजित करना

शब्द जो हमें एक साथ लाते हैं

शब्द जो जीवन बोलते हैं

कोई बात नहीं कविता या टुकड़ा

कविता है

और हमेशा जीवित रहेगी

मौलिक व अप्रकाशित.

Posted on March 22, 2018 at 1:13pm — 4 Comments

Comment Wall (1 comment)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 8:45pm on April 27, 2017, vijay nikore said…

मित्रता का हाथ बढ़ाने के लिए आभारी हूँ।

हरि ॐ.

विजय निकोर

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"ग़ज़ल अपनी ज़ुलफें वो अगर रुख पे परेशां कर दें l अहले महफ़िल के लिए मौत का सामाँ कर दें l कम से कम…"
1 hour ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"आद0 समर कबीर साहब सादर प्रणाम। आज के मुशायरे का आगाज़ बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल के साथ करने पर आपको बहुत…"
6 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"इल्म से अपने दिमाग़ों में चराग़ाँ कर देंमेरे उस्ताद जिसे चाहें ग़ज़ल ख़्वाँ कर दें डूब कर रंग में…"
6 hours ago
Surkhab Bashar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"मोहतरम जनाब समर कबीर साहब  आदब  बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है दाद के साथ मुबारक बाद कुबूल…"
7 hours ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"वाह !"
8 hours ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"इससे पहले कि ये सब चाक गरेबाँ कर दें वोट जो पास है अपने उसे क़ुरबां कर दें बच गया जो हो ज़रा आँख में…"
8 hours ago
Surkhab Bashar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"ग़ज़ल आओ इस देश को मिलजुल के गुलिस्ताँ कर दें इसके उजड़े हुए शहरों में चराग़ाँ कर दें हम वतन के…"
8 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"राह दुश्वार बहुत है इसे आसां कर दें ख़ून से अपने बयाबां को गुलिस्ताँ कर दें आज़माने के लिए अज़्म को…"
8 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'मुझे भी!' (लघुकथा) :
"आदाब। बहुत-बहुत शुक्रिया जनाब समर कबीर साहिब।"
10 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"समस्त परिवारजन को रंगोत्सव पर हार्दिक बधाइयां और शुभकामनाएं।"
10 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"जनाब गणेश जी "बाग़ी" साहिब आदाब, बहुत-बहुत  मुबारकबाद ।"
10 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post नवगीत-वेदना ने नेत्र खोले-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद आदरणीय समर कबीर जी..आपको भी होली की शुभकामनाएं.."
14 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service