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narendrasinh chauhan posted a blog post

कविता

पेंसिल या पेनकिस तरह का स्याहीआप फैल रहे हैं?आग पर कीबोर्डसपने और इच्छाएंकुछ हास्यकुछ आँसूगंभीरता  एक खुराकजीतने वाले शब्दशब्दों को विभाजित करनाशब्द जो हमें एक साथ लाते हैंशब्द जो जीवन बोलते हैंकोई बात नहीं कविता या टुकड़ाकविता हैऔर हमेशा जीवित रहेगीमौलिक व अप्रकाशित.See More
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Narendrasinh chauhan's Blog

कविता

पेंसिल या पेन

किस तरह का स्याही

आप फैल रहे हैं?

आग पर कीबोर्ड

सपने और इच्छाएं

कुछ हास्य

कुछ आँसू

गंभीरता  एक खुराक

जीतने वाले शब्द

शब्दों को विभाजित करना

शब्द जो हमें एक साथ लाते हैं

शब्द जो जीवन बोलते हैं

कोई बात नहीं कविता या टुकड़ा

कविता है

और हमेशा जीवित रहेगी

मौलिक व अप्रकाशित.

Posted on March 22, 2018 at 1:13pm — 4 Comments

तपस्या

क्या यह मुझे जानने में मदद करेगा
वहां उनकी हंसी है
रिक्त स्थान में भर
हवा में फसी

क्या यह मुझे सीखना शांत करेगा
हर जगह से आनंद के फैल  आँसू
दिल खुश से विस्फोट
जैसा कि यह केवल उचित है.

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Posted on June 1, 2017 at 4:08pm — 1 Comment

मुझे

ईर्ष्या 

कृपया मुझे छोड़ दें

मुझे मुक्त चलने दें 

तेरी  समझ से

ईमानदारी

कृपया मुझे में भर

मेरे शब्दों को मुक्त कर 

उस विश्वास के साथ

मूर्खता

कृपया मुझे छोड़ दें

मुझे दो बार सुन लेकिन बोल

एक आवाज़ के साथ

अखंडता

कृपया मुझे सशक्त कर

मेरे दिमाग और शरीर को ऊपर ले

सही विकल्प बनाने के लिए

मौलिक एवं अप्रकाशित ।

Posted on May 27, 2017 at 10:30am — 1 Comment

तुम

यह तुम्हारी आंखें है

यह तुम्हारा मुंह है

यह तुम्हारी मुस्कुराहट है

तुम्हारा दिल

तुम्हारी  हंसी

लेकिन यह मेरा दिल है

मेरा डर

यह मेरा प्यार है

मेरी उम्मीद

मैं जिसके लिऐ  हूँ

Posted on May 26, 2017 at 9:57am — 2 Comments

Comment Wall (1 comment)

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At 8:45pm on April 27, 2017, vijay nikore said…

मित्रता का हाथ बढ़ाने के लिए आभारी हूँ।

हरि ॐ.

विजय निकोर

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

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