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Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"
  • Male
  • Uttar Pradesh
  • India
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Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s Page

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Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post तुम सम्मोहित कर बैठी हो-------नव वर्ष की मेरी प्रथम ग़ज़ल
"आदरणीय महेंद्र जी बहुत बहुत आभार"
Jan 15
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"आदरणीय प्रतिभा मैम सादर आभार"
Jan 12
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"आदरणीय सुरेंद्र जी बहुत बहुत आभार"
Jan 12
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"आदरणीय नादिर साहब बहुत बहुत आभार"
Jan 12
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"आदरणीय अखिलेश सर सादर अभिवादन सहित हार्दिक आभार"
Jan 12
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"आदरनीय अखिलेश सर, बहुत बहुत आभार"
Jan 11
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"आदरणीय महेंद्र जी बहुत बहुत आभार। सुविधा के लिए यहाँ अर्थ लिख रहा हूँ.....सादर अत्याय-----सीमा उल्लंघन, मर्यादा भंग प्रत्याय-----करपर्याय-------सिलसिला, क्रमगोमाय------शृंगाल यानी सियार"
Jan 11
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"आदरणीय शेख शहज़ाद सर बहुत बहुत आभार"
Jan 11
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"आदरणीय तस्दीक सर बहुत बहुत आभार"
Jan 11
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"आदरणीय बाऊजी सादर प्रणाम, ग़ज़ल को आशीर्वाद प्रदान करने के लिए सादर आभार"
Jan 11
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"आदरणीय छोटेलाल जी बहुत बहुत आभार"
Jan 11
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"आदरणीय बासुदेव सर सादर आभार"
Jan 11
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"आदरणीय सुचि जी सादर आभार"
Jan 11
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"आदरणीय दीदी सादर आभार"
Jan 11
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"हरिगीतिका छंद आधारित ग़ज़ल हर पल हमें अन्याय का प्रतिरोध करना चाहिए ए बेटियों अत्याय का प्रतिरोध करना चाहिए राजस्व से सरकार करती लोकहित के काम, पर अनुचित हरिक प्रत्याय का प्रतिरोध करना चाहिए यह ठीक है कि विधान शोषित जन के कल्याणार्थ है पर भेदमय…"
Jan 11
Mahendra Kumar commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post तुम सम्मोहित कर बैठी हो-------नव वर्ष की मेरी प्रथम ग़ज़ल
"नव वर्ष पर लिखी गयी आपकी प्रथम ग़ज़ल अच्छी लगी आदरणीय पंकज जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Jan 4

Profile Information

Gender
Male
City State
Azamgarh
Native Place
Azamgarh
Profession
Teaching

Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s Blog

तुम सम्मोहित कर बैठी हो-------नव वर्ष की मेरी प्रथम ग़ज़ल

22 22 22 22

तुम सम्मोहित कर बैठी हो
निश्चित ही जादूगरनी हो

होश रहित हूँ, दोष तुम्हारा
अधरों पर मधुरस रखती हो

मुस्का कर के मन हरने की
कला कहाँ से ले आई हो

छू, चन्दन तन ताप बढ़े है
बर्फीली ज्वाला जैसी हो

नैनों में पानी है सो तुम
पंकज को अच्छी लगती हो

मौलिक-अप्रकाशित

Posted on January 1, 2019 at 10:43pm — 8 Comments

ग़ज़ल: यूँ इश्क़ चुभ गया है विष-ख़ार की तरह

221 2122 22 1212

यूँ इश्क़ चुभ गया है विष-ख़ार की तरह

हर पल हुआ है भारी कुहसार की तरह

आए नहीं वो मिलने हर बार की तरह

नदिया उफ़ान पर है हरद्वार की तरह

मतलब निकल गया तो पहचानते नहीं

पेश आ रहे हैं अब वो सरकार की तरह

हम देवता समझ कर पूजा किए जिन्हें

रिश्ता निभा गए वो व्यापार की तरह

दुनिया के वास्ते है मोहब्बत महज़ ख़बर

हम बाँचे जा रहे हैं, अख़बार की तरह

ख़ार==काँटा…

Continue

Posted on December 24, 2018 at 12:00pm — 3 Comments

दोष देखो तो सूरज के सर हो गया----ग़ज़ल

212 212 212 212

घोर कलयुग का ऐसा असर हो गया
वस्त्र धर के भी नंगा नगर हो गया

आवरण धारणा का है यूँ सोच पर
आदमी का मनस भ्रम का घर हो गया

स्वाप-विष का हुआ है असर इस क़दर
सच के प्रति हर मनुज बे-नज़र हो गया

फैसला उल्लुओं की अदालत का है
दोष देखो तो सूरज के सर हो गया

जागती ही नहीं आत्मा क्या करें
"मैं" से ख़ुद का ही मुश्किल समर हो गया

मौलिक- अप्रकाशित

Posted on December 16, 2018 at 3:53pm — 6 Comments

होश की मैं पैमाइश हूँ:........ग़ज़ल, पंकज मिश्र..........इस्लाह की विनती के साथ

22 22 22 2

मयख़ानों की ख़ाहिश हूँ

होश की मैं पैमाइश हूँ

चाँद न कर मुझ पर काविश

ब्लैक होल की नाज़िश हूँ

हल ना कर पाओगे तुम

ज़िद की ऐसी नालिश हूँ

जल जाएगा हुस्न तेरा

मैं सूरज की ताबिश हूँ

आ मत मेरी राहों में

तूफ़ानों की जुंबिश हूँ

मौलिक अप्रकाशित

उर्दू का ज्ञान लगभग शून्य है, इसलिए, मुझे सन्देह है कि शायद मेरे भाव अस्पष्ट हों..….इसलिए हार्दिक विनती है कि इस ग़ज़ल के कथ्य…

Posted on November 13, 2018 at 12:00am — 6 Comments

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At 4:23pm on February 28, 2016, kanta roy said…

स्वागत आपका तहेदिल आदरणीय पंकज जी।  

At 6:34pm on October 26, 2015, kanta roy said…

महीने के सक्रीय सदस्य चुने जाने के इस गौरव पल के  लिए ढेरों बधाई आपको आदरणीय पंकज जी।  

At 11:27pm on October 15, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

पंकज कुमार मिश्रा 'वात्स्यायन' जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
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सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 5:35pm on August 7, 2015, Ravi Shukla said…

स्‍वागत है पंकज जी आपका

At 11:39am on July 26, 2015, Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" said…
सभी लोगों का सादर अभिवादन
 
 
 

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