For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"
  • Male
  • Uttar Pradesh
  • India
Share

Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s Friends

  • सुरेश कुमार 'कल्याण'
  • सतविन्द्र कुमार
  • Ravi Shukla
  • amod srivastav (bindouri)
  • Samar kabeer
  • narendrasinh chauhan
  • शिज्जु "शकूर"
  • आशीष यादव
  • Er. Ganesh Jee "Bagi"
 

Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s Page

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post वर्ना खुलता ही कहाँ ये मनस-पट------ग़ज़ल
"क्या कहने ...हार्दिक बधाई , आ. भाई पंकज जी ।"
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post वर्ना खुलता ही कहाँ ये मनस-पट------ग़ज़ल
"अच्छी ग़ज़ल कही आदरणीय पंकज जी...सादर"
Sunday
Rakshita Singh commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post वर्ना खुलता ही कहाँ ये मनस-पट------ग़ज़ल
"आदरणीय पंकज जी, सुन्दर रचना .... हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
Sunday
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" posted a blog post

वर्ना खुलता ही कहाँ ये मनस-पट------ग़ज़ल

2122 2122 122दिल में नफ़रत होठों पे मुस्कुराहटसबके वश में है क्या ऐसी बनावट?कान मेरी ओर मत कीजिएगादिल जो टूटे तो नहीं होती आहटआसमाँ में रंग बिखरेगा फिर से,कह रहा था स्वप्न, मैंने कहा; हटमान जा मन छोड़ उद्दंडता अबदौड़ना अच्छा नहीं, ऐसे सरपट?कोई जादू तेरी आँखों में तो हैवर्ना खुलता ही कहाँ ये मनस-पटमौलिक अप्रकाशितSee More
Saturday
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post एक गीत पिता के नाम
"आदरणीय सुरेन्द्र जी पिता प्रेक् ख़ूबरूगीत के लिए बहुत सारी बधाई"
Feb 8
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल..रात भर-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"बहुत खूब, आदरणीय"
Feb 8
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post स्वप्न का जो नाभिकी ये संलयन प्रारम्भ है----ग़ज़ल
"आदरणीय सोमेश जी सादर अभिवादन और हार्दिक आभार"
Feb 8
somesh kumar commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post स्वप्न का जो नाभिकी ये संलयन प्रारम्भ है----ग़ज़ल
"इस जगत को श्रेष्ठतम रचना समर्पित कर सकूँ प्रति निशा मसि शब्द निद्रा का हवन प्रारम्भ है  यह कवि की नियति है यही उसकी तपस्या है ,वो रात भर जागकर अपनी नींद को हवन करके बेहतर शब्दों से भावनाएं रचता है, बधाई पंकज भाई"
Feb 8
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post स्वप्न का जो नाभिकी ये संलयन प्रारम्भ है----ग़ज़ल
"आदरणीय ब्रजेश जी बहुत बहुत आभार"
Feb 8
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post स्वप्न का जो नाभिकी ये संलयन प्रारम्भ है----ग़ज़ल
"आदरणीय सुरेंद्र जी आपको हार्दिक आभार, मेरे प्रयास को मान देने के लिए बहुत बहुत आभार"
Feb 8
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post स्वप्न का जो नाभिकी ये संलयन प्रारम्भ है----ग़ज़ल
"बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति आदरणीय पंकज वाह बेहतरीन..."
Feb 7
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post स्वप्न का जो नाभिकी ये संलयन प्रारम्भ है----ग़ज़ल
"आद0 पंकज जी सादर अभिवादन। इतनी शुद्ध हिंदी में ग़ज़ल मुझे आपकी ही मिलती है। अच्छे अच्छे खयाल लाये हैं आप। बधाई स्वीकार कीजिये"
Feb 7
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post स्वप्न का जो नाभिकी ये संलयन प्रारम्भ है----ग़ज़ल
"आदरणीय अजय जी सादर आभार"
Feb 7
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post स्वप्न का जो नाभिकी ये संलयन प्रारम्भ है----ग़ज़ल
"आदरणीय बसन्त जी बहुत बहुत आभार"
Feb 7
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post स्वप्न का जो नाभिकी ये संलयन प्रारम्भ है----ग़ज़ल
"आदरणीय नरेंद्र जी सादर आभार"
Feb 7
Ajay Kumar Sharma commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post स्वप्न का जो नाभिकी ये संलयन प्रारम्भ है----ग़ज़ल
"वाह शानदार रचना..."
Feb 6

Profile Information

Gender
Male
City State
Azamgarh
Native Place
Azamgarh
Profession
Teaching

Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s Blog

वर्ना खुलता ही कहाँ ये मनस-पट------ग़ज़ल

2122 2122 122

दिल में नफ़रत होठों पे मुस्कुराहट

सबके वश में है क्या ऐसी बनावट?

कान मेरी ओर मत कीजिएगा

दिल जो टूटे तो नहीं होती आहट

आसमाँ में रंग बिखरेगा फिर से,

कह रहा था स्वप्न, मैंने कहा; हट

मान जा मन छोड़ उद्दंडता अब

दौड़ना अच्छा नहीं, ऐसे सरपट?

कोई जादू तेरी आँखों में तो है

वर्ना खुलता ही कहाँ ये मनस-पट

मौलिक अप्रकाशित

Posted on February 17, 2018 at 1:28pm — 3 Comments

स्वप्न का जो नाभिकी ये संलयन प्रारम्भ है----ग़ज़ल

2122 2122 2122 212

स्वप्न का जो नाभिकी ये संलयन प्रारम्भ है

क्या किसी तारे का फिर से नव सृजन प्रारम्भ है

इस जगत को श्रेष्ठतम रचना समर्पित कर सकूँ

प्रति निशा मसि शब्द निद्रा का हवन प्रारम्भ है

मन-जगत घर्षण से अंतस में अनल जो है प्रकट

भावनाओं का उसी से आचमन प्रारम्भ है

लेखनी नें स्वयं से संकल्प इक धारण किया

एकता के भाव का सो संवहन प्रारम्भ है

चक्षुओं पर जो लगा कर घूमते चश्मा उन्हें

ताप…

Continue

Posted on February 5, 2018 at 5:07pm — 14 Comments

लिप्सा के परित्याग से खिलता आत्म प्रसून

दोहा/ ग़ज़ल

चाहत के तूफान में, उजड़े चैन सुकून

चिंता में जल कर हुआ, भस्म खुदी का खून

गीता में लिक्खा गया, राहत का मजमून

लिप्सा के परित्याग से, खिलता आत्म-प्रसून

संग्रह का जो रोग है, बढ़ता प्रतिपल दून

लोभ अग्नि में हे! मनुज, यूँ खुद को मत भून

सुख का एक उपाय बस, इच्छा करिए न्यून

बाकी मर्ज़ी आपकी, खटिए चारो जून

मनस वेदना के लिए, यह बढ़िया माजून

सो पंकज नें कर लिया, लेखन एक जुनून

मौलिक…

Continue

Posted on January 16, 2018 at 11:23am — 11 Comments

बुलाऊँ नींद, तेरा आना अब ज़रूरी है-ग़ज़ल

1212 1122 1212 22

तुम्हारे दीद की ख़ाहिश अभी अधूरी है

इसीलिए तो निगाहें खुली ही छोड़ी है

तमाम ख़ाब हैं आँखों में तेरी ही ख़ातिर

बुलाऊँ नींद, तेरा आना अब ज़रूरी है

किसी अज़ीज़ नें आख़िर मुझे सिखाया तो

यूँ रोज़ रोज़ ग़ज़ल लिखना बेवकूफ़ी है

जहाँ के लोगों के दुःख दर्द का गरल अपने

उतारा सीने में तब ही कलम ये पकड़ी है

बताऊँ कैसे उन्हें शायरी जुनून हुई

नसों में दौड़ती पंकज के, ये बीमारी है

मौलिक…

Continue

Posted on January 11, 2018 at 5:41pm — 7 Comments

Comment Wall (5 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 4:23pm on February 28, 2016, kanta roy said…

स्वागत आपका तहेदिल आदरणीय पंकज जी।  

At 6:34pm on October 26, 2015, kanta roy said…

महीने के सक्रीय सदस्य चुने जाने के इस गौरव पल के  लिए ढेरों बधाई आपको आदरणीय पंकज जी।  

At 11:27pm on October 15, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

पंकज कुमार मिश्रा 'वात्स्यायन' जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 5:35pm on August 7, 2015, Ravi Shukla said…

स्‍वागत है पंकज जी आपका

At 11:39am on July 26, 2015, Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" said…
सभी लोगों का सादर अभिवादन
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post एक और रत्नाकर(लघुकथा)
"आद0 कल्पना जी सादर अभिवादन। बढिया लघुकथा कही आपने। बधाई स्वीकार कीजिए। सादर"
9 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दबे  पाप  ऊपर  जो  आने  लगे  हैं- गजल
"आद0 लक्ष्मण जी सादर अभिवादन। ग़ज़ल का बढिया प्रयास। शेष आद0 समर साहब कह चुके हैं। इस ग़ज़ल पर बधाई…"
11 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on SHARAD SINGH "VINOD"'s blog post 'मधुर' जी की मधुर स्मृति .......
"आद0 शरद जी सादर अभिवादन। प्रयास उत्तम है, शेष गुणीजनों ने कह दिया है। सादर"
15 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on विनय कुमार's blog post स्टेटस--लघुकथा
"आद0 विनय जी सादर अभिवादन। बढिया व्यंग कसा आपने,स्टेटस के नाम पर दिखावा। बहुत बहुत बधाई आपको।"
24 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...न जाने कैसे गुजरेगी क़यामत रात भारी है-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आद0 बृजेश कुमार ब्रज जी सादर अभिवादन। ग़ज़ल पर बढिया कोशिस।हार्दिक बधाई आपको शेष गुणीजनों की बातों का…"
28 minutes ago
रामबली गुप्ता commented on पीयूष कुमार द्विवेदी's blog post सरसी छंद-२
"मारक सरसी हुए हैं दोनों हार्दिक बधाई स्वीकारें। सादर"
33 minutes ago
रामबली गुप्ता commented on पीयूष कुमार द्विवेदी's blog post सरसी छंद
"दोनों छंद सुंदर और सार्थक हुए हैं। हार्दिक बधाई स्वीकारें।सादर"
40 minutes ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Dr. Vijai Shanker's blog post सब सही पर कुछ भी सही नहीं है - डॉo विजय शंकर
"मुहतरम जनाब विजय साहिब , ज़हन में सवाल उठाती सुन्दर रचना हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं।"
47 minutes ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post मिज़ाज (लघुकथा)
"जनाब शेख़ शहज़ाद साहिब , छोटी मगर असरदार लघुकथा हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं।"
49 minutes ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Samar kabeer's blog post तरही ग़ज़ल
"मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब आदाब, बहुत ही उम्दा ग़ज़ल हुई है , मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं।  टाइप में…"
51 minutes ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Mohammed Arif's blog post कविता--फागुन
"मुहतरम जनाब आरिफ़ साहिब आदाब, होली से पहले होलीकी याद दिलाती सुन्दर कविता हुईहै ,मुबारकबाद क़ुबूल…"
59 minutes ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post एक और रत्नाकर(लघुकथा)
"मुहतर्मा कल्पना साहिबा , बहुत ही सुन्दर लघुकथा हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं।"
1 hour ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service