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Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"
  • Male
  • Uttar Pradesh
  • India
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Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s Page

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Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post स्वार्थ नें राष्ट्र की है सजाई चिता-----ग़ज़ल
"आदरणीय नवीन सर सादर आभार"
May 15
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"आदरणीय लक्ष्मण सर, सादर आभार"
Apr 28
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"आदरणीय बाऊजी सादर आभार, सुझाव से मेरा काम सरल हो गया है"
Apr 28
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"हर्ष महाजन सर सादर आभार"
Apr 28
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"आदरणीय आरिफ सर, सादर आभार, सुधार कर लिया है मैंने।"
Apr 28
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"आदरणीय नीलेश सर बहुत आभार, कल एकदम जल्दी जल्दी लिखी है ग़ज़ल, सुझाव पर अमल करूँगा। "
Apr 28
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"आदरणीय तस्दीक सर सादर आभार, तकाबुले रदीफैन मेरी आम समस्या हो गई है। दूर कर दूँगा"
Apr 28
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"आदरणीय सुरेन्द्र जी सादर आभार"
Apr 28
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"आदरणीय नीलेश सर ग़ज़ल पर कीमती सुझाव देने के लिए सादर आभार।"
Apr 28
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"मुझे तारीख़ का भ्रम हो गया, एक तो काफी दिनों बाद मुशायरे में शिरकत हो पाई वो भी लास्ट मूमेंट।"
Apr 27
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"तुम्हारे हुस्न पे धड़कन मचल तो सकती हैकसम से ख़ुद ही ग़ज़ल में तू ढ़ल तो सकती है बयार प्रीत की उस दर से चल तो सकती हैतुम्हारे घर से ही सूरत बदल तो सकती है प्रथा विवाह की अपना ही अर्थ रखती हैतमाम रस्मों से रोजी भी चल तो सकती है? भले नहीं हूँ मैं सूरज…"
Apr 27
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post हृदय अपना जिसनें समंदर किया है-----ग़ज़ल
"आदरणीय तेजवीर सर सादर आभार"
Apr 23
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post हृदय अपना जिसनें समंदर किया है-----ग़ज़ल
"आदरणीय नीलम जी बहुत बहुत आभार"
Apr 23
TEJ VEER SINGH commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post हृदय अपना जिसनें समंदर किया है-----ग़ज़ल
"हार्दिक बधाई आदरणीय पंकज कुमार जी।बेहतरीन गज़ल। युगों तक जगत में वही जी सका हैहृदय अपना जिसने समंदर किया है हक़ीक़त से नज़रें हटाने से यारोकभी झूठ भी क्या कहीं सच हुआ है?"
Apr 23
Neelam Upadhyaya commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post हृदय अपना जिसनें समंदर किया है-----ग़ज़ल
"आदरणीय पंकज कुमार मिश्रा जी ।  बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल  की प्रस्तुति ।  हार्दिक बधाई"
Apr 23
Samar kabeer commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post हृदय अपना जिसनें समंदर किया है-----ग़ज़ल
"ख़ुश रहो, अज़ीज़म ।"
Apr 22

Profile Information

Gender
Male
City State
Azamgarh
Native Place
Azamgarh
Profession
Teaching

Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s Blog

हृदय अपना जिसनें समंदर किया है-----ग़ज़ल

122 122 122 122

युगों तक जगत में वही जी सका है

हृदय अपना जिसने समंदर किया है

हक़ीक़त से नज़रें हटाने से यारो

कभी झूठ भी क्या कहीं सच हुआ है?

कहाँ रात के मानकों से हो चिपके

उजाले का वाहक तो सूरज रहा है

गरल एकता के लिए पीना होगा

सिखाती सभी को परम शिव कथा है

'सुनो आइनो तुम भी पढ़ लो सुकूँ से

कि 'पंकज' ने सब सामने रख दिया है'  (आदरणीय बाऊजी समर कबीर द्वारा…

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Posted on April 21, 2018 at 3:00pm — 15 Comments

जानें क्या बात है आज कल, दर्द अपना छिपाने लगा---ग़ज़ल

212 212 212 212 212 212

जानें क्या बात है आज कल, दर्द अपना छिपाने लगा

हाल उसका पता कीजिए, वो बहुत मुस्कुराने लगा

हम उसे बस यूँ ही चारागर, झूठे ही तो नहीं लिख दिए

एक बेजान से बुत में भी, वो जो धड़कन चलाने लगा

उसको पागल नहीं जो कहें, तो भला नाम क्या और दें

एक निर्जन नगर में कोई, स्वप्न के घर बसाने लगा

शुक्रिया आपका शुक्रिया है ये तोहफा बहुत कीमती

देखिए तो विरह का असर शेर मैं गुनगुनाने लगा

उम्र भर की ख़लिश…

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Posted on April 20, 2018 at 12:00am — 14 Comments

स्वार्थ नें राष्ट्र की है सजाई चिता-----ग़ज़ल

212 212 212 212

स्वार्थ नें राष्ट्र की है सजाई चिता

जाति की अग्नि से चिट चिटाई चिता

भारती माँ तड़प कर कराहे सुनो

पूछती जीते जी क्यूँ सजाई चिता?

प्रीत के व्योम पर द्वेष धूम्राक्ष है

लोभियों नें वतन की जलाई चिता

राजगद्दी के लोभी हैं शामिल सभी

पूछिए मत कि किसनें लगाई चिता?

आग है जो लगी आप जल जाएंगे

बढ़ के आगे न यदि जो बुझाई चिता

मौलिक अप्रकाशित

Posted on April 4, 2018 at 11:30pm — 14 Comments

सराबोर कर दे तेरे रंग से अब----होली विशेष

122 122 122 122

मुझे ढ़ाल दे अपने ही ढंग से अब
सराबोर कर खुद के ही रंग से अब

ज़रूरी है  ख़श्बू फ़िज़ाओं में बिखरे
बदन की तुम्हारे मेरे अंग से अब

न मुझसे चला जा रहा होश में है
तू मदहोश कर रूप की भंग से अब

है महफ़िल में भी मन हमारा अकेला
उमंगें इसे दे तेरे संग से अब

न जाने है कैसी जो मिटती नहीं है
मनस सींच तू प्रीत की गंग से अब

मौलिक अप्रकाशित

Posted on March 2, 2018 at 10:30am — 8 Comments

Comment Wall (5 comments)

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At 4:23pm on February 28, 2016, kanta roy said…

स्वागत आपका तहेदिल आदरणीय पंकज जी।  

At 6:34pm on October 26, 2015, kanta roy said…

महीने के सक्रीय सदस्य चुने जाने के इस गौरव पल के  लिए ढेरों बधाई आपको आदरणीय पंकज जी।  

At 11:27pm on October 15, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

पंकज कुमार मिश्रा 'वात्स्यायन' जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 5:35pm on August 7, 2015, Ravi Shukla said…

स्‍वागत है पंकज जी आपका

At 11:39am on July 26, 2015, Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" said…
सभी लोगों का सादर अभिवादन
 
 
 

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Satyanarayan Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 87 in the group चित्र से काव्य तक
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