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Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"
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Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s Page

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रामबली गुप्ता commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post खुद से मुझ को अलग करो----- ग़ज़ल पंकज मिश्र द्वारा
"हो करते भी तुम याद मुझे, ये हिचकी से कहलाया तो। इस प्रकार करिये। तंकड़ त्रुटि हुई है।"
15 minutes ago
रामबली गुप्ता commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post खुद से मुझ को अलग करो----- ग़ज़ल पंकज मिश्र द्वारा
"आदरणीय पंकज मिश्र जी मात्रिक बहर पर प्रयास अच्छा है। सादर बधाई स्वीकारें। बताना चाहूँगा कि इस बहर में लय और प्रवाह ही महत्वपूर्ण होता है। कभी कभी ऐसा भी होता है कि पंक्तियाँ पूरी तरह बहर में होने के बाद भी लय नही बन पाती। अतः इस बात को ख़ास ध्यान…"
19 minutes ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" posted a blog post

निहारता तो हूँ तुम्हें, चोरी से चुपके से- गजल, पंकज मिश्र

1212 1212 222 222निहारता तो हूँ तुम्हें, चोरी से चुपके सेविचारता तो हूँ तुम्हें, झपकी ले चुपके सेकभी तुम्हारे नाम से ज्यादा कुछ लिक्खा कब?सँवारता तो हूँ तुम्हें, कॉपी पे चुपके सेमिलन को जब भी तुम मेरे सपनों में आई होनिखारता तो हूँ तुम्हें, लाली दे चुपके सेबजे है जल तरंग सी छन छन तेरी पायल जबउतारता तो हूँ तुम्हें, वंशी पे चुपके सेउदासियों से जब भी घिर जाता है मेरा मनपुकारता तो हूँ तुम्हें, आ भी रे चुपके सेSee More
Sep 14
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" posted a blog post

यह चक्र धारी तिरंगे में ही नज़ाफ़त है-----पंकज मिश्र

1212 1122 1212 22मेरे वतन की फ़िज़ाओं में जो मुहब्बत हैइसे बचाऊँ मैं हर हाल, मेरी चाहत हैहिमालया से लगायत महान सागर तकपरम पिता ने लिखी हिन्द की ये आयत हैतमाम लोगों ने कोशिश करी बदलने कीमगर वो हारे, विविधता में इसकी ताकत हैसफ़ेद पगड़ी हरा कुर्ता केसरी धोतीये चक्र धारी तिरंगे में ही नज़ाफ़त हैअज़ान भी है भजन भी है चर्च की घण्टीइसी वजह से वतन अपना खूबसूरत हैमौलिक अप्रकाशितSee More
Aug 10
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post यह चक्र धारी तिरंगे में ही नज़ाफ़त है-----पंकज मिश्र
"आदरणीय ब्रजेश जी सादर आभार"
Aug 9
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post यह चक्र धारी तिरंगे में ही नज़ाफ़त है-----पंकज मिश्र
"आदरणीय विजय सर सादर आभार"
Aug 9
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post यह चक्र धारी तिरंगे में ही नज़ाफ़त है-----पंकज मिश्र
"बड़ी ही खूबसूरती को समेटे हुए शानदार ग़ज़ल..सादर"
Aug 8
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Gurpreet Singh's blog post ग़ज़ल इस्लाह के लिए (गुरप्रीत सिंह)
"आदरणीय विजय सर सादर आभार"
Aug 7
vijay nikore commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post यह चक्र धारी तिरंगे में ही नज़ाफ़त है-----पंकज मिश्र
"अच्छी गज़ल के लिए बधाई"
Aug 7
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post यह चक्र धारी तिरंगे में ही नज़ाफ़त है-----पंकज मिश्र
"आदरणीय मोहम्मद आरिफ़ सर बहुत बहुत आभार, आदरणीय बाऊजी का सुझाव सर्वथा उचित है....।"
Aug 7
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post यह चक्र धारी तिरंगे में ही नज़ाफ़त है-----पंकज मिश्र
"आदरणीय सुरेन्द्रनाथ सर सादर आभार।"
Aug 7
Mohammed Arif commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post यह चक्र धारी तिरंगे में ही नज़ाफ़त है-----पंकज मिश्र
"आदरणीय पंकज जी आदाब, देशभक्ति के ज़्बे से भरपूर बेहतरीन ग़ज़ल । हर शे'र लाजवाब है । भारत समानता और भाईचारे पर ही टिका है । हार्दिक बधाई स्वीकार करें । आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब की सलाह पर ग़ौर करें ।"
Aug 7
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post यह चक्र धारी तिरंगे में ही नज़ाफ़त है-----पंकज मिश्र
"आद0 पंकज जी बेहतरीन सृजन, राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत, बधाई इस सृजन पर"
Aug 7
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post यह चक्र धारी तिरंगे में ही नज़ाफ़त है-----पंकज मिश्र
"आदरणीय गिरिराज सर सादर अभिवादन और हार्दिक आभार"
Aug 6
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post यह चक्र धारी तिरंगे में ही नज़ाफ़त है-----पंकज मिश्र
"आदरणीय तस्दीक अहमद सर सादर अभिवादन और हार्दिक आभार"
Aug 6
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post यह चक्र धारी तिरंगे में ही नज़ाफ़त है-----पंकज मिश्र
"आदरणीय बाऊजी सादर प्रणाम, सुझाव सर्वथा उचित है।"
Aug 6

Profile Information

Gender
Male
City State
Azamgarh
Native Place
Azamgarh
Profession
Teaching

Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s Blog

खुद से मुझ को अलग करो----- ग़ज़ल पंकज मिश्र द्वारा

22 22 22 22

खुद से मुझ को अलग करो तो
फिर कहना तुम ज़िंदा भी हो

याद मुझे करते हो तुम भी
हिचकी से ये कहलाया तो

कोल कर दिया अरमाँ जिससे
कोहेनूर बन कर चमकें वो

दुर्लभ एक सुकून प्यास में
साक़ी को ही लौटाया तो

बदली छाई मानो तुमने
ज़ुल्फ़ घनी फिर बिखराया हो


मौलिक अप्रकाशित

मौलिक अप्रकाशित

Posted on September 15, 2017 at 5:30pm — 15 Comments

निहारता तो हूँ तुम्हें, चोरी से चुपके से- गजल, पंकज मिश्र

1212 1212 222 222

निहारता तो हूँ तुम्हें, चोरी से चुपके से
विचारता तो हूँ तुम्हें, झपकी ले चुपके से

कभी तुम्हारे नाम से ज्यादा कुछ लिक्खा कब?
सँवारता तो हूँ तुम्हें, कॉपी पे चुपके से

मिलन को जब भी तुम मेरे सपनों में आई हो
निखारता तो हूँ तुम्हें, लाली दे चुपके से

बजे है जल तरंग सी छन छन तेरी पायल जब
उतारता तो हूँ तुम्हें, वंशी पे चुपके से

उदासियों से जब भी घिर जाता है मेरा मन
पुकारता तो हूँ तुम्हें, आ भी रे चुपके से

Posted on September 14, 2017 at 12:05am — 12 Comments

यह चक्र धारी तिरंगे में ही नज़ाफ़त है-----पंकज मिश्र

1212 1122 1212 22

मेरे वतन की फ़िज़ाओं में जो मुहब्बत है
इसे बचाऊँ मैं हर हाल, मेरी चाहत है

हिमालया से लगायत महान सागर तक
परम पिता ने लिखी हिन्द की ये आयत है

तमाम लोगों ने कोशिश करी बदलने की
मगर वो हारे, विविधता में इसकी ताकत है

सफ़ेद पगड़ी हरा कुर्ता केसरी धोती
ये चक्र धारी तिरंगे में ही नज़ाफ़त है

अज़ान भी है भजन भी है चर्च की घण्टी
इसी वजह से वतन अपना खूबसूरत है

मौलिक अप्रकाशित

Posted on August 6, 2017 at 12:00am — 14 Comments

रिश्ते में नुकसान जोड़ते पाई पाई------इस्लाह के लिए ग़ज़ल

22 22 22 22 22 22
रिश्ते में नुकसान जोड़ते पाई पाई।
आँगन में दीवार खींचते भाई भाई।।

वाह रुपये खूब तुम्हारी भी है माया।
पुत्र बसा परदेश गाँव में बाबू- माई।।

कलयुग कैसी है ये तेरी काली छाया
साथ नहीं देती है खुद की ही परछाई।।

नातेदारी मृग मरीचिका में उलझी है
जानें कितनी लाश गिरेगी रे'त में भाई।।

पंकज बैठा लिये तराजू आओ लोगों
नाप-जोख कर भाव लगाकर करो मिताई।।

मौलिक अप्रकाशित

Posted on July 11, 2017 at 11:00am — 24 Comments

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At 4:23pm on February 28, 2016, kanta roy said…

स्वागत आपका तहेदिल आदरणीय पंकज जी।  

At 6:34pm on October 26, 2015, kanta roy said…

महीने के सक्रीय सदस्य चुने जाने के इस गौरव पल के  लिए ढेरों बधाई आपको आदरणीय पंकज जी।  

At 11:27pm on October 15, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

पंकज कुमार मिश्रा 'वात्स्यायन' जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
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सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 5:35pm on August 7, 2015, Ravi Shukla said…

स्‍वागत है पंकज जी आपका

At 11:39am on July 26, 2015, Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" said…
सभी लोगों का सादर अभिवादन
 
 
 

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