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Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"
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"आदरणीय आसिफ़ भाई जी बहुत बहुत आभार"
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"मौलिक अप्रकाशित जब फँसा हुआ है मन, घर के ही बवालों मेंसो भला लगेगा क्या, मंदिर-ओ-शिवालों में ठीक था अँधेरा तू, चाँद क्यूँ निकल आयाहर नफ़र दिखा नंगा, चाँदनी उजालों में उस ने भूख हरने की, जब दवाई पूछी तोहम जवाब क्या देते, खो गए सवालों में मैं जहाँ…"
10 hours ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post तुम मेरे ख़ाबों के गुलशन में मिलो------ग़ज़ल
"आदरणीय विजय भाई साहब बहुत बहुत आभार"
Aug 10
vijay nikore commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post तुम मेरे ख़ाबों के गुलशन में मिलो------ग़ज़ल
"अच्छी गज़ल के लिए बधाई, मित्र पंकज जी"
Aug 9
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post तुम मेरे ख़ाबों के गुलशन में मिलो------ग़ज़ल
"आदरणीय बाऊजी प्रणाम ग़ज़ल को आशीष प्रदान करने के लिए सादर आभार, वैसे भी यह सब आपकी ही देन है"
Aug 8
Samar kabeer commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post तुम मेरे ख़ाबों के गुलशन में मिलो------ग़ज़ल
"अज़ीज़म पंकज कुमार मिश्रा आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें ।"
Aug 8
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post तुम मेरे ख़ाबों के गुलशन में मिलो------ग़ज़ल
"आदरणीय लक्ष्मण सर सादर आभार"
Aug 7
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post तुम मेरे ख़ाबों के गुलशन में मिलो------ग़ज़ल
"आदरणीय उपाध्याय जी बहुत बहुत आभार"
Aug 7
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post तुम मेरे ख़ाबों के गुलशन में मिलो------ग़ज़ल
"आ. भाई पंकज जी , सुंदर गजल हुयी है। हार्दिक बधाई।"
Aug 7
dandpani nahak left a comment for Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"
"आदरणीय पंकज कुमार मिश्रा जी आदाब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें"
Aug 7
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post तुम मेरे ख़ाबों के गुलशन में मिलो------ग़ज़ल
""शब्द सारे भाव हर लय ताल हैं तुम से मेरे सो सदा पंकज-ग़ज़ल में तुम सजो हक़ है तुम्हें"अति सुन्दर | "
Aug 6
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" posted blog posts
Aug 6
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post हर नफ़र इस शह्र का कुछ इस तरह बस जी रहा--------ग़ज़ल
"आदरणीय लक्ष्मण सर बहुत आभार"
Aug 5
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post हर नफ़र इस शह्र का कुछ इस तरह बस जी रहा--------ग़ज़ल
"आदरणीय बाऊजी प्रणाम 1.नफ़र का अर्थ व्यक्ति लिया गया है 2. शेष दोनों में बह्र गड़बड़ हो रही, सुधारता हूँ"
Aug 5
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post हर नफ़र इस शह्र का कुछ इस तरह बस जी रहा--------ग़ज़ल
"आ. भाई पंकज जी, गजल का प्रयास अच्छा है ।हार्दिक बधाई । आ.भाई समर जी की बातों का संज्ञान लें।"
Aug 4
Samar kabeer commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post हर नफ़र इस शह्र का कुछ इस तरह बस जी रहा--------ग़ज़ल
"अज़ीज़म पंकज कुमार मिश्रा आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'हर नफ़र इस शह्र का कुछ इस तरह बस जी रहा' इस मिसरे में 'नफ़र' शब्द का क्या अर्थ लिया है? 'अनगिनत सपने सजाते, नैन फिर भी नींद चाहें' इस मिसरे की…"
Jul 28

Profile Information

Gender
Male
City State
Azamgarh
Native Place
Azamgarh
Profession
Teaching

Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s Blog

तुम मेरे ख़ाबों के गुलशन में मिलो------ग़ज़ल

2122 2122 2122 212

तुम मेरे ख़ाबों के गुलशन में रहो हक़ है तुम्हें

मुझ से जब चाहो ख़यालों में मिलो हक़ है तुम्हें

तुम को तकने की ख़ता, नींदें गँवाने की सज़ा

बदला आँखों से मेरी ऐसे ही लो हक़ है तुम्हें

बस तुम्हारा नाम हर पल जप रहा है मेरा दिल

मेरे सीने से लगो तुम भी सुनो हक़ है तुम्हें

कल्पना के व्योम में जितना मेरा विस्तार है

वह क्षितिज पूरा तुम्हारा, तुम उड़ो हक़ है तुम्हें

शब्द सारे भाव हर लय ताल…

Continue

Posted on August 6, 2019 at 10:45am — 8 Comments

हर नफ़र इस शह्र का कुछ इस तरह बस जी रहा--------ग़ज़ल

2122 2122 2122 212

लड़खड़ाती साँस डगमग आस व्याकुल मन सदा

हर नफ़र इस शह्र का कुछ इस तरह बस जी रहा

अनगिनत सपने सजा कर, चाहते निंदिया नयन

रात भर बेचैनियों की, है ग़ज़ब देखो प्रथा

पत्थर-ओ-फ़ौलाद की दीवारें मुझ को चुभ रहीं

आप यदि अपने महल में खुश हैं फिर तो वाह वा

सृष्टि की हर एक रचना का अलग इक सत्य है

कैसे लिख दूँ एक है व्यवहार जल औ आग का

फूल की डाली कली से फुसफुसा कर कह गई

ओढ़ ले काँटे सुरक्षा का यही है…

Continue

Posted on July 25, 2019 at 4:00pm — 4 Comments

मुसीबत जुटातीं ग़लत फहमियाँ-----ग़ज़ल

122 122 122 12

मुसीबत जुटातीं ग़लत फहमियाँ
सुकूँ यूँ चुरातीं ग़लत फहमियाँ

किसी रिश्ते के दरमियाँ आएँ तो
महब्बत जलातीं ग़लत फहमियाँ

जहाँ तक भी हो इससे बच के रहो
तबाही मचातीं ग़लत फहमियाँ

अगर गर्व हावी हुआ शक्ति पे
ग़लत पथ धरातीं ग़लत फहमियाँ

उन्हें सच से जिसने न पोषित किया
उन्हीं को चबातीं ग़लत फहमियाँ

मौलिक अप्रकाशित

Posted on July 10, 2019 at 10:11pm — 4 Comments

ये भँव तिरी तो कमान लगे----ग़ज़ल

12112 12112

ये भँव तिरी तो, कमान लगे

तिरे ये नयन, दो बान लगे

कहीं न रुके, रमे न कहीं

इसे तू ही तो, जहान लगे

मैं जब से मिला हूँ तुम से, मिरी

हरेक अदा जवान लगे

अमिय है तिरी अवाज़ सखी

तू गीत लगे है गान लगे

है खोजती महज़ तुझे ही निगा'ह

न और कहीं मिरा धियान लगे

मौलिक अप्रकाशित

Posted on July 8, 2019 at 10:55pm — 5 Comments

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At 1:01am on August 7, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय पंकज कुमार मिश्रा जी आदाब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें
At 4:23pm on February 28, 2016, kanta roy said…

स्वागत आपका तहेदिल आदरणीय पंकज जी।  

At 6:34pm on October 26, 2015, kanta roy said…

महीने के सक्रीय सदस्य चुने जाने के इस गौरव पल के  लिए ढेरों बधाई आपको आदरणीय पंकज जी।  

At 11:27pm on October 15, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

पंकज कुमार मिश्रा 'वात्स्यायन' जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
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सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 5:35pm on August 7, 2015, Ravi Shukla said…

स्‍वागत है पंकज जी आपका

At 11:39am on July 26, 2015, Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" said…
सभी लोगों का सादर अभिवादन
 
 
 

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