For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"
  • Male
  • Uttar Pradesh
  • India
Share

Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s Friends

  • सुरेश कुमार 'कल्याण'
  • सतविन्द्र कुमार राणा
  • Ravi Shukla
  • amod shrivastav (bindouri)
  • Samar kabeer
  • narendrasinh chauhan
  • शिज्जु "शकूर"
  • आशीष यादव
  • Er. Ganesh Jee "Bagi"
 

Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s Page

Latest Activity

Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" posted blog posts
2 hours ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post शह्र अपना है बंट गया देखो------ग़ज़ल
"आदरणीय मिर्ज़ा जावेद साहब, संशोधन किया था मैंने, फिर से कर देता हूँ.....वैसे यह ग़ल्ती रेख़्ता के कारण हुई है।"
3 hours ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post शह्र अपना है बंट गया देखो------ग़ज़ल
"आदरणीय अजय सर बहुत आभार, आपके कहे अनुसार संशोधन कर दिया गया है।"
3 hours ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post शह्र अपना है बंट गया देखो------ग़ज़ल
"आदरणीय सुररेन्द्र जी बहुत आभार"
3 hours ago
mirza javed baig commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post शह्र अपना है बंट गया देखो------ग़ज़ल
"जनाब पंकज साहिब बहतरीन प्रयास के लिए मुबारकबाद  लफ़्ज़ कफ़न को आपने कफ्ऩ बांध लिया हे देखिएगा ।"
12 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post शह्र अपना है बंट गया देखो------ग़ज़ल
"आ. भाई पंकज जी, उम्दा गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
yesterday
Ajay Tiwari commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post शह्र अपना है बंट गया देखो------ग़ज़ल
"आदरणीय पंकज जी, अच्छे अशआर हुए हैं. हार्दिक बधाई. दर्द या के खुशी के हों आँसू > दर्द के या खुशी के हों आँसू"
yesterday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post शह्र अपना है बंट गया देखो------ग़ज़ल
"आद0 पंकज कुमार मिश्रा जी सादर अभिवादन। बढ़िया ग़ज़ल आपके हवाले से पढ़ने को मिली। शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद कुबूल करें। सादर"
yesterday
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post शह्र अपना है बंट गया देखो------ग़ज़ल
"आदरणीय बाऊजी सादर प्रणाम, कफ़्न रेख्ता पर चेक कर के लिखा है मैंने, लेकिन आपका सुझाव गलत नहीं हो सकता। जल्दी ही सुधारता हूँ"
yesterday
Samar kabeer commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post शह्र अपना है बंट गया देखो------ग़ज़ल
"अज़ीज़म पंकज कुमार मिश्रा आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है,बधाई स्वीकार करें । 'शह्र अपना है बँट गया देखो' इस मिसरे में 'है' की जगह "ये" करना" उचित होगा । जाति का कफ़् चढ़ चुका देखो' इस मिसरे में ' कफ़्न'ग़लत…"
yesterday
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" posted a blog post

शह्र अपना है बंट गया देखो------ग़ज़ल

2122 1212 22शह्र अपना ये बँट गया देखो सिम्बलों से लिपट रहा देखोदेश की फिक्र की सजी अर्थी जाति का है कफ़न चढ़ा देखोअब सभी को ख़याल बस अपना संकुचित दायरा हुआ देखोबस वहीं पर ही बन रहे रिश्ते है जहाँ कोई फ़ायदा देखोजाति बस काहिलों का है मुद्दा जो था इंसाँ सफल हुआ देखोकर्म करने का नाम जीवन है साफ गीता में यह लिखा देखोदर्द के या खुशी के हों आँसू शेर पंकज नें कर दिया देखोमौलिक अप्रकाशितSee More
Thursday
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post है दूर मंज़िल घना तिमिर है------ग़ज़ल, इस्लाह की गुजारिश के साथ
"आदरणीय बाऊजी प्रणाम। आपके सुझाव के अनुरूप सुधार करता हूँ"
Wednesday
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post है दूर मंज़िल घना तिमिर है------ग़ज़ल, इस्लाह की गुजारिश के साथ
"आदरणीय अजय जी बहुत आभार"
Wednesday
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post क्या मन है बीमार पड़ौसी - गजल - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आदरणीय लक्ष्मण धामी सर बहुत-बहुत बधाई इस बेहद खूबसूरत गजल के लिए"
Wednesday
Samar kabeer commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post है दूर मंज़िल घना तिमिर है------ग़ज़ल, इस्लाह की गुजारिश के साथ
"मेरे कहे को मान देने के लिए धन्यवाद ।"
Sep 13
Ajay Kumar Sharma commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post है दूर मंज़िल घना तिमिर है------ग़ज़ल, इस्लाह की गुजारिश के साथ
"परम् आदरणीय कबीर सर क्षमा प्रार्थी हूँ. आइन्दा से इस बात काखयाल रखूँगा. "
Sep 13

Profile Information

Gender
Male
City State
Azamgarh
Native Place
Azamgarh
Profession
Teaching

Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s Blog

शह्र अपना है बंट गया देखो------ग़ज़ल

2122 1212 22

शह्र अपना ये बँट गया देखो

सिम्बलों से लिपट रहा देखो

देश की फिक्र की सजी अर्थी

जाति का है कफ़न चढ़ा देखो

अब सभी को ख़याल बस अपना

संकुचित दायरा हुआ देखो

बस वहीं पर ही बन रहे रिश्ते

है जहाँ कोई फ़ायदा देखो

जाति बस काहिलों का है मुद्दा

जो था इंसाँ सफल हुआ देखो

कर्म करने का नाम जीवन है

साफ गीता में यह लिखा देखो

दर्द के या खुशी के हों आँसू

शेर पंकज…

Continue

Posted on September 19, 2018 at 8:30pm — 9 Comments

है दूर मंज़िल घना तिमिर है------ग़ज़ल, इस्लाह की गुजारिश के साथ

12122 12122 12122 12122

है दूर मन्ज़िल घना तिमिर है कलम का पथ जो अगर कठिन है

नहीं थकेंगे कदम हमारे हमारा व्रत भी मगर कठिन है

चलो उठाओ तमाम बातें जवाब सारा कलम ही देगी

चले भले ही कदम अभी कम पता है हमको सफर कठिन है

मना ले जश्नां उड़ा मज़ाकाँ ज़माने दूँगा सलाम लाखों

सलाम वापस इधर ही होंगे हालाँकि तुमसे समर कठिन है

न पूछ काहें मैं अक्षरों की ये धार सब पर बिखेरुँ पल पल

है इक हिमालय यहाँ भी ग़म का सो आँसुओं की लहर कठिन…

Continue

Posted on September 11, 2018 at 7:52pm — 7 Comments

जिगर औ साँस में उतर आई मई (ग़ज़ल, इस्लाह के लिए)

122 212 122 212

ये शेर-ओ-शायरी? मुझे, इश्क़ है भई
सभी से, आप से; किसी ख़ास से नई

क़लम चिल्ला उठी, जहाँ के दर्द से
कुई तड़पा, निगाह नम हो गई

किसी नें राष्ट्र को तरेरी आँख तो
जिगर औ साँस में उतर आई मई

सुनो ए, नाज़नीं घमण्डी होने का
इसे इल्ज़ाम देने को बस तुम नई

महज़ खटती रहीं वो बच्चों के लिए
सभी माताओं की उम्र यूँ ही गई

मौलिक-अप्रकाशित

Posted on August 29, 2018 at 12:00am — 7 Comments

काँधे पर सभी शरीर गए (इस्लाह के लिए)

16 रुकनी ग़ज़ल

किस किस के नाम गिनाऊँ मैं, जो इस दिल मे भर पीर गए

जिस जिस को हिफाज़त सौंपी थी, वो सारे ही दिल चीर गए

वो तन्हा छोड़ गए लेकिन मैं उनको दोष नहीं दूँगा

जो तोहफे में इन दो प्यासे नयनों को दे कर नीर गए

हर गीत ग़ज़ल अशआर सभी हैं जिन लोगों की सौगातें

आबाद रहें वो, जो मुझ को, दे कर ग़म की जागीर गए

हर ख़ाब कुचल डाले मेरे, तुम रौंद गए अरमानों को

पर मुआफ़ किया मैंने तुमको, तुम चाहे कर तफ़्सीर गए

रातों की…

Continue

Posted on August 28, 2018 at 1:30am — 18 Comments

Comment Wall (5 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 4:23pm on February 28, 2016, kanta roy said…

स्वागत आपका तहेदिल आदरणीय पंकज जी।  

At 6:34pm on October 26, 2015, kanta roy said…

महीने के सक्रीय सदस्य चुने जाने के इस गौरव पल के  लिए ढेरों बधाई आपको आदरणीय पंकज जी।  

At 11:27pm on October 15, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

पंकज कुमार मिश्रा 'वात्स्यायन' जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 5:35pm on August 7, 2015, Ravi Shukla said…

स्‍वागत है पंकज जी आपका

At 11:39am on July 26, 2015, Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" said…
सभी लोगों का सादर अभिवादन
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Harihar Jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 89 in the group चित्र से काव्य तक
"अभी मुझे छंद में लिखने का अभ्यास नहीं है। क्योंकि इसमें मात्रीक छन्द के नवगीत का प्रावधान  भी…"
2 minutes ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on rajesh kumari's blog post मॉरिशस में हिंदी साहित्यिक समारोह (राजेश कुमारी राज )
"आद० तेजवीर सिंह जी आपकी शुभकामनाएँ मेरे लिए सम्बल है जो मुझमे लेखन के लिए नव ऊर्जा संचारित करती हैं…"
3 minutes ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 89 in the group चित्र से काव्य तक
"आद० मनजीत कौर जी अच्छे शक्ति छंद रचे हैं हार्दिक बधाई मग्न को मगन कर लें "
8 minutes ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 89 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह्ह्ह आद० छोटे लाल जी प्रदत्त विषय को सार्थक करते हुए शक्ति छंद में बहुत अच्छी प्रस्तुति बहुत…"
11 minutes ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 89 in the group चित्र से काव्य तक
"सहभागिता के लिए बधाई आपको हरिहर झा जी ,किन्तु शक्ति छंद या हरिगीतिका पर लिखना था इस आयोजन में "
14 minutes ago
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 89 in the group चित्र से काव्य तक
"शक्ति छंद न सोचा जिसे था ,विपत वो पड़ी नदी रूप धरकर भयानक खड़ी न सूझे हमें अब कि जाएं कहाँ नदी बीच…"
19 minutes ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 89 in the group चित्र से काव्य तक
"आद० अनीता जी छंद पर बहुत अच्छा प्रयास है बस कथ्य को और परिष्कृत करने की गुंजाइश है बाकी हार्दिक…"
25 minutes ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 89 in the group चित्र से काव्य तक
"प्रदत्त चित्र को हर कोण से परिभाषित किया है आपने आदर्णीय गंगा धर जी बहुत खूब हार्दिक बधाई आपको "
30 minutes ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 89 in the group चित्र से काव्य तक
"छंद -हरिगीतिका  माँ के लिए संतान ही उसका सकल संसार है उसकी सुरक्षा के लिए करती हदें सब पार…"
38 minutes ago
Harihar Jha posted blog posts
2 hours ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" posted blog posts
2 hours ago
vijay nikore posted a blog post

आशंका के गहरे-गहरे तल में

आशंका के गहरे-गहरे तल मेंआयु के हज़ारों लाखों पलों के दबे ढेर मेंनए कुछ पुराने दर्दों की कानों में…See More
2 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service