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Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"
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Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s Page

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vijay nikore commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post लिप्सा के परित्याग से खिलता आत्म प्रसून
"दोहे अच्छे लगे। हार्दिक बधाई।"
Thursday
Mahendra Kumar commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post लिप्सा के परित्याग से खिलता आत्म प्रसून
"अच्छा प्रयोग है आ. पंकज जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Wednesday
Samar kabeer commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post लिप्सा के परित्याग से खिलता आत्म प्रसून
"जी,ठीक है ।"
Wednesday
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post लिप्सा के परित्याग से खिलता आत्म प्रसून
"आदरणीय बाऊजी सादर प्रणाम, यह एक नया प्रयास है, ग़ज़ल नाम देना सही नहीं होगा, इसलिए इसे दोहा-ग़ज़ल नाम दिया है, मैं चाह रहा था इसे- दोजल या द्विजल कहना लेकिन शब्द का वास्तविक अर्थ क्या निकलेगा, इस बात का पूरा अंदाज़ा नहीं होने के कारण नहीं लिखा।"
Wednesday
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post लिप्सा के परित्याग से खिलता आत्म प्रसून
"आदरणीय अजय सर आपके सुझाव सर्वथा उपयोगी होते हैं, स्नेह यथावत बनाएं रखें, सादर प्रणाम"
Wednesday
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post लिप्सा के परित्याग से खिलता आत्म प्रसून
"आदरणीय आरिफ सर सादर अभिवादन और हार्दिक आभार"
Wednesday
Samar kabeer commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post लिप्सा के परित्याग से खिलता आत्म प्रसून
"अज़ीज़म पंकज कुमार मिश्रा आदाब,अच्छे दोहे लिखे आपने ,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । आपने इस प्रस्तुति को 'दोहा/ग़ज़ल' का शीर्षक क्यों दिया,जबकि ये ख़ालिस दोहे हैं,और ग़ज़ल में सिर्फ़ मतले नहीं होते,शैर भी होते हैं जो इसमें नहीं हैं ।"
Wednesday
Ajay Tiwari commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post लिप्सा के परित्याग से खिलता आत्म प्रसून
"आदरणीय पंकज जी, अच्छा प्रयोग है. हार्दिक बधाई. मतले के मिसरों में रब्त कुछ कम है. आम तौर पर खुदी(अहं) के ख़त्म होने को चैन और सुकून का कारण माना जाता है चैन और सुकून के उजड़ने का कारण नहीं. सादर "
Tuesday
Mohammed Arif commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post लिप्सा के परित्याग से खिलता आत्म प्रसून
"आदरणीय पंकज जी आदाब,                         बहुत ही उम्दा दोहा ग़ज़ल । हर शे'र माकूल । दोहा ग़ज़ल लिखते रहिए । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Tuesday
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" posted a blog post

लिप्सा के परित्याग से खिलता आत्म प्रसून

दोहा/ ग़ज़लचाहत के तूफान में, उजड़े चैन सुकूनचिंता में जल कर हुआ, भस्म खुदी का खूनगीता में लिक्खा गया, राहत का मजमूनलिप्सा के परित्याग से, खिलता आत्म-प्रसूनसंग्रह का जो रोग है, बढ़ता प्रतिपल दूनलोभ अग्नि में हे! मनुज, यूँ खुद को मत भूनसुख का एक उपाय बस, इच्छा करिए न्यूनबाकी मर्ज़ी आपकी, खटिए चारो जूनमनस वेदना के लिए, यह बढ़िया माजूनसो पंकज नें कर लिया, लेखन एक जुनूनमौलिक अप्रकाशितSee More
Tuesday
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post बुलाऊँ नींद, तेरा आना अब ज़रूरी है-ग़ज़ल
"आदरणीय लक्ष्मण सर बहुत बहुत आभार"
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post बुलाऊँ नींद, तेरा आना अब ज़रूरी है-ग़ज़ल
"हार्दिक बधाई ।"
Tuesday
Ajay Tiwari commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post जाने सूरज कब निकले है वक्त अभी रुसवाई का------गज़ल
"आदरणीय पंकज जी, अच्छे अशआर हुए हैं, हार्दिक बधाई. यूं तो इस बह्र में १२१२ या २१२१ की संरचना का प्रयोग अक्सर किया गया है, लेकिन वस्तुतः यह एक अरूजी असावधानी है जो मीर द्वारा हुई और दूसरे शायरों द्वारा उसी का अनुकरण किया गया. इस लिए इससे बचना ही बेहतर…"
Jan 13
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post जाने सूरज कब निकले है वक्त अभी रुसवाई का------गज़ल
"आदरणीय ब्रज जी बहुत शुक्रिया"
Jan 13
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post जाने सूरज कब निकले है वक्त अभी रुसवाई का------गज़ल
"आदरणीय सुरेंद्र जी सादर धन्यवाद"
Jan 13
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post जाने सूरज कब निकले है वक्त अभी रुसवाई का------गज़ल
"आदरणीय काली प्रसाद जी सादर आभार"
Jan 13

Profile Information

Gender
Male
City State
Azamgarh
Native Place
Azamgarh
Profession
Teaching

Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s Blog

लिप्सा के परित्याग से खिलता आत्म प्रसून

दोहा/ ग़ज़ल

चाहत के तूफान में, उजड़े चैन सुकून

चिंता में जल कर हुआ, भस्म खुदी का खून

गीता में लिक्खा गया, राहत का मजमून

लिप्सा के परित्याग से, खिलता आत्म-प्रसून

संग्रह का जो रोग है, बढ़ता प्रतिपल दून

लोभ अग्नि में हे! मनुज, यूँ खुद को मत भून

सुख का एक उपाय बस, इच्छा करिए न्यून

बाकी मर्ज़ी आपकी, खटिए चारो जून

मनस वेदना के लिए, यह बढ़िया माजून

सो पंकज नें कर लिया, लेखन एक जुनून

मौलिक…

Continue

Posted on January 16, 2018 at 11:23am — 9 Comments

बुलाऊँ नींद, तेरा आना अब ज़रूरी है-ग़ज़ल

1212 1122 1212 22

तुम्हारे दीद की ख़ाहिश अभी अधूरी है

इसीलिए तो निगाहें खुली ही छोड़ी है

तमाम ख़ाब हैं आँखों में तेरी ही ख़ातिर

बुलाऊँ नींद, तेरा आना अब ज़रूरी है

किसी अज़ीज़ नें आख़िर मुझे सिखाया तो

यूँ रोज़ रोज़ ग़ज़ल लिखना बेवकूफ़ी है

जहाँ के लोगों के दुःख दर्द का गरल अपने

उतारा सीने में तब ही कलम ये पकड़ी है

बताऊँ कैसे उन्हें शायरी जुनून हुई

नसों में दौड़ती पंकज के, ये बीमारी है

मौलिक…

Continue

Posted on January 11, 2018 at 5:41pm — 7 Comments

जाने सूरज कब निकले है वक्त अभी रुसवाई का------गज़ल

22 22 22 22 22 22 22 2

नैन में रैन गँवाए जाऊँ, वक्त पहाड़ जुदाई का

जाने सूरज कब निकले, है वक्त अभी रुसवाई का

उनको कोई ग़रज़ नहीं जो पूछें हाल हमारा भी

कोई दूजी वज्ह नहीं, परिणाम है कान भराई का…

Continue

Posted on January 9, 2018 at 4:30pm — 14 Comments

प्रतिबंधित मुलाकात हुई है-ग़ज़ल

22 22 22 22

उनसे मेरी बात हुई है
प्रतिबंधित मुलाक़ात हुई है

सारे स्वप्न तरल हैं मेरे
देखो तो बरसात हुई है

स्याही बन कर भस्म्है बिखरी
यूँ न अधेरी रात हुई है

मन खुद में ही खोज खुदी से
शांति कहाँ, आयात हुई है

दिल वो जीते दर्द मग़र हम
मत समझो बस मात हुई है

मौलिक अप्रकाशित

Posted on January 8, 2018 at 9:00pm — 19 Comments

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At 4:23pm on February 28, 2016, kanta roy said…

स्वागत आपका तहेदिल आदरणीय पंकज जी।  

At 6:34pm on October 26, 2015, kanta roy said…

महीने के सक्रीय सदस्य चुने जाने के इस गौरव पल के  लिए ढेरों बधाई आपको आदरणीय पंकज जी।  

At 11:27pm on October 15, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

पंकज कुमार मिश्रा 'वात्स्यायन' जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 5:35pm on August 7, 2015, Ravi Shukla said…

स्‍वागत है पंकज जी आपका

At 11:39am on July 26, 2015, Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" said…
सभी लोगों का सादर अभिवादन
 
 
 

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