For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

"मुहब्बत की नहीं मुझसे " , प्रिये ! तुम झूठ मत बोलो |  (५३ )

एक गीत प्रीत का

===========

"मुहब्बत की नहीं मुझसे " , प्रिये ! तुम झूठ मत बोलो |

**

लता के सम लिपट जाना , नखों से पीठ खुजलाना |

अधर से चूम लेना मुख,नयन से कुछ कहा जाना |

कभी पहना दिया हमदम,गले में हार बाहों का

अचानक गोद में लेकर,तुम्हारा केश सहलाना |

हथेली से छुपा लेना, तुम्हारा नैन को मेरे

इशारे प्यार के थे या, शरारत भेद यह खोलो |

"मुहब्बत की नहीं मुझसे " , प्रिये ! तुम झूठ मत बोलो |

**

तुम्हारा डाँटना या फिर ,तुम्हारी झिड़कियाँ मीठी |

ज़रा सी बात पर आँसू , बहाने के बहाने भी |

तुम्हारा हक़ जताना भी ,तुम्हारी ज़िद सभी नखरे

बताओ किस तरह मानूं ,अदाओं की कलाबाज़ी |

बुने जो ख़्वाब थे हमने ,हमारे आशियाने के

प्रिये ! बरखा बिना संभव ,कभी क्या बीज भी बो लो ?

"मुहब्बत की नहीं मुझसे " , प्रिये ! तुम झूठ मत बोलो |

**

कठिन होगा तुम्हारे बिन ,सनम हर हाल में जीना |

जुदाई का हलाहल भी ,बड़ा मुश्किल यहाँ पीना |

तुम्हीं ने डोर बाँधी थी ,तुम्हीं ने तोड़ क्यों डाली ?

अचानक क्यों मुझे जो हक़, दिया था प्रीत का छीना ?

प्रतीक्षारत रहूँगा मैं , अभी तक आस है बाकी

क़सम है लौट आओ तुम ,न जीवन में ज़हर घोलो |

"मुहब्बत की नहीं मुझसे " , प्रिये ! तुम झूठ मत बोलो |

**

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' बीकानेरी |

१९/०७/२०१९

**

(मौलिक एवं अप्रकाशित )

Views: 1072

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on July 25, 2019 at 8:39pm

आपकी स्नेहिल सराहना से उत्साहवर्धन के लिए ह्रदय तल से आभार narendrasinh chauhan साहेब 

Comment by narendrasinh chauhan on July 25, 2019 at 7:21pm

खूब सुंदर रचना सर

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on July 24, 2019 at 8:44pm

आदरणीया समर कबीर   जी, आपकी स्नेहिल सराहना से उत्साहवर्धन के लिए ह्रदय तल से आभार |

Comment by Samar kabeer on July 24, 2019 at 12:09pm

जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब,अच्छा गीत लिखा आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on July 22, 2019 at 10:37pm

बहुत बहुत आभार Amit Kumar "Amit"  जी उत्साहवर्धन के लिए 

Comment by Amit Kumar "Amit" on July 22, 2019 at 8:21pm

आदरणीय गिरधारी सिंह गहलोत तुरंत बीकानेरी जी एक खूबसूरत गीत कहने के लिए बहुत-बहुत बधाईयां।

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on July 21, 2019 at 12:12am

आप सही हैं सर Samar kabeer साहेब ,ये ग़ज़ल रिपीट हो गई थी मैंने डिलीट कर दी है | सादर आभार | 

Comment by Samar kabeer on July 3, 2019 at 3:12pm

जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब,मुझे ऐसा लगता है इस ग़ज़ल को आपने दोबारा पोस्ट किया है? एक बार चेक कर के बताएँ, अपनी टिप्पणी आपके जवाब के बाद दूँगा ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुर्सी जिसे भी सौंप दो बदलेगा कुछ नहीं-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजलपर उपस्थिति और सप्रेमं मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। इसे बेहतर…"
7 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post न पावन हुए जब मनों के लिए -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व उत्ताहवर्धन के लिए हार्दिक आभार।"
7 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। क्रोध पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई। साथ ही भाई अशोक जी की बात…"
7 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देवता चिल्लाने लगे हैं (कविता)
"   आदरणीय धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी सादर, धर्म के नाम पर अपना उल्लू सीधा करती राजनीति में…"
13 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post न पावन हुए जब मनों के लिए -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"   हमारे बिना यह सियासत कहाँजवाबों में हम हैं सवालों में हम।३।... विडम्बना…"
13 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"   सूर्य के दस्तक लगानादेखना सोया हुआ है व्यक्त होने की जगह क्यों शब्द लुंठितजिस समय…"
13 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"      तरू तरु के पात-पात पर उमढ़-उमढ़ रहा उल्लास मेरा मन क्यूँ उन्मन क्यूँ इतना…"
13 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय सुशील सरना साहब सादर, क्रोध विषय चुनकर आपके सुन्दर दोहावली रची है. हार्दिक बधाई स्वीकारें.…"
13 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"  आदरणीय सुशील सरना साहब सादर, प्रस्तुत ग़ज़ल पर उत्साहवर्धन के लिए आपका दिल से शुक्रिया.…"
14 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"   आदरणीय भाई लक्षमण धामी जी सादर, प्रस्तुत ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
14 hours ago
Sushil Sarna commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"वाह बहुत सुंदर प्रस्तुति हुई है आदरणीय लक्ष्मण धामी जी । हार्दिक बधाई "
14 hours ago
Sushil Sarna commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"वाहहहहहह आदरणीय क्या ग़ज़ल हुई है हर शे'र पर वाह निकलती है । दिल से मुबारकबाद कबूल फरमाएं…"
14 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service