For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव
  • Male
  • Lucknow Uttar Pradesh
  • India
Share

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's Friends

  • आशीष सिंह ठाकुर 'अकेला'
  • Kalipad Prasad Mandal
  • सुरेश कुमार 'कल्याण'
  • रामबली गुप्ता
  • बृजेश कुमार 'ब्रज'
  • सतविन्द्र कुमार राणा
  • gaurav bhargava
  • Prashant Priyadarshi
  • amod shrivastav (bindouri)
  • Sahil verma
  • jaan' gorakhpuri
  • Samar kabeer
  • pratibha tripathi
  • maharshi tripathi
  • Hari Prakash Dubey

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's Groups

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's Discussions

बदलते रहे है हिंदी कविता में संयोग शृंगार के प्रतिमान  ///    डॉ.गोपाल नारायण श्रीवास्तव

काव्य-शास्त्र के अनुसार वियोग शृंगार के चार प्रकार हैं –पूर्वराग, मान, प्रवास और करुण I इसकी दस दशायें होती हैं और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भरतमुनि ने जो 33 संचारी या व्यभिचारी भाव बताये हैं वे…Continue

Started Feb 6

ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या माह जनवरी 2019 – एक प्रतिवेदन

 13 जनवरी, दिन रविवार को ओ.बी.ओ लखनऊ-चैप्टर की ‘साहित्य संध्या‘ वर्ष 2019 का पहला सत्र सुप्रसिद्ध कवयित्री संध्या सिंह के आवास, 1225-डी, इंदिरा नगर, लखनऊ पर उन्हीं के सौजन्य से संपन्न हुआ i कार्यक्रम…Continue

Started Feb 5

मामूर हुयी उमर खैय्याम के प्रभाव से हिन्दी काव्यानुवाद की परंपरा     ////  डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव
2 Replies

प्रायः ऐसा होता है कि एक निश्चित कालखंड में एक विशेष प्रकार का साहित्यिक आन्दोलन समाज को पूरे वेग से आलोड़ित कर सहसा धीरे-धीरे शांत होकर इतिहास बनता है और फिर एक नया कालखंड सर्वथा नवीन प्रवृत्ति या…Continue

Started this discussion. Last reply by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव Feb 3.

लेखन में आत्ममुग्धता की बढ़ती प्रवृत्ति और उसके खतरे-एक परिचर्चा /// प्रस्तुति – डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव
6 Replies

 भारतीय संस्कृति में विनम्रता का महत्वपूर्ण स्थान रहा है I अपनी  तारीफ सुनकर आज भी विनम्र लोग शील सँकोच से सिकुड़ जाते हैं I  पर पाश्चात्य सभ्यता के प्रभाव से अब इसे अच्छा  नही माना जाता I आज आप तभी…Continue

Started this discussion. Last reply by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव Feb 9.

 

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's Page

Latest Activity

Samar kabeer commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post बच्चा है तू (लघुकथा )
"जनाब डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी आदाब,अच्छी लघुकथा लिखी आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
Wednesday
Sushil Sarna commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post बच्चा है तू (लघुकथा )
"वाह आदरणीय गोपाल जी बहुत ही मार्के की लघु कथा का सृजन किया है आपने सर। एक यथार्थ को उजागर करती इस प्रस्तुति के लिए दिल से बधाई। यही सब तो हो रहा है आजकल। घास दिखाते जाओ काम कराते जाओ। अति सुंदर।"
Tuesday
Surkhab Bashar commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post बच्चा है तू (लघुकथा )
"आ. डॉ.  गोपाल  नारायन श्रीवास्तव जी  बहुत सुंदर ढंग से लघू कथा लिखी है ऐसा हर   दफ्तर मे अमूमन होता ही है वाह वाह वाह वाह वाह "
Tuesday
JAWAHAR LAL SINGH commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post बच्चा है तू (लघुकथा )
"जी, ऐसा ही होता है। बिल्कुल सत्य कथा"
Tuesday
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a blog post

बच्चा है तू (लघुकथा )

 न्याय के मंदिर की मेरी पहली परिक्रमा थी i कोर्ट के आदेश के अनुसार मुझे एक कर्मचारी की सैलरी कोर्ट में जमा करनी थी I मैं ठीक दस बजे चेक लेकर कोर्ट पहुंच गया I कैशियर साहब ग्यारह बजे आये और बोले –‘इसे स्टैंडिंग काउंसल से वेरीफाई करा के लाओ I’स्टैंडिंग काउंसल ने डांट लगाई –‘हाउ यू डेयर कम डायरेक्टली टू मी I कम थ्रू माय आफिस I’  मैं आफिस गया I संबंधित बाबू सीट पर नहीं थे I वह एक घंटे बाद आये और आकर मोबाईल पर बतियाने लगे I दस मिनट बाद खाली हुए तो झुंझलाकर बोले- ‘क्या है ?‘सर! यह चेक साहब से वेरीफाई…See More
Tuesday
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव replied to डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's discussion लेखन में आत्ममुग्धता की बढ़ती प्रवृत्ति और उसके खतरे-एक परिचर्चा /// प्रस्तुति – डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव
"आ० शकुंतला  जी , आपका बहुत बहुत आभार  I "
Feb 9
Shakuntala Tarar replied to डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's discussion लेखन में आत्ममुग्धता की बढ़ती प्रवृत्ति और उसके खतरे-एक परिचर्चा /// प्रस्तुति – डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव
"आदरणीय गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी--लेखन में आत्ममुग्धता की बढ़ती प्रवृत्ति और उसके खतरे विषय पर आपने जो  परिचर्चा की है वह बहुत ही सुन्दर, ज्ञानवर्धक एवं उपयोगी आलेख है | यदि आप अनुमति दें तो मैं इस आलेख का उपयोग करना चाहूंगी  अपनी…"
Feb 8
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

बदलते रहे है हिंदी कविता में संयोग शृंगार के प्रतिमान  ///    डॉ.गोपाल नारायण श्रीवास्तव

काव्य-शास्त्र के अनुसार वियोग शृंगार के चार प्रकार हैं –पूर्वराग, मान, प्रवास और करुण I इसकी दस दशायें होती हैं और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भरतमुनि ने जो 33 संचारी या व्यभिचारी भाव बताये हैं वे सब वियोग की दशा में आ जाते हैं I हिंदी  काव्य तो  वियोग के विदग्ध वर्णन से ही समृद्ध हुआ है I विरहाकुल राम को कौन भूल सकता है I शकुन्तला और सीता के वियोगजनित कष्ट किसे याद नहीं हैं I ‘सुजान’ के लिए अहर्निशि रोते ‘घनानंद’ को सबने पढ़ा है I जायसी का ‘नागमती विरह वर्णन‘ हिंदी  साहित्य की अमूल्य निधि माना…See More
Feb 7
JAWAHAR LAL SINGH commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post कुम्भ स्नान (लघुकथा )
"प्रणाम करता हूँ महोदय, आपने बड़ी हिम्मत की है ... इस तरह के विचार को प्रकट करने का... वरना आजकल तो....धर्म की आड़ में क्या कुछ नहीं होता?"
Feb 6
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या माह जनवरी 2019 – एक प्रतिवेदन

 13 जनवरी, दिन रविवार को ओ.बी.ओ लखनऊ-चैप्टर की ‘साहित्य संध्या‘ वर्ष 2019 का पहला सत्र सुप्रसिद्ध कवयित्री संध्या सिंह के आवास, 1225-डी, इंदिरा नगर, लखनऊ पर उन्हीं के सौजन्य से संपन्न हुआ i कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रबुदध कवि रघोत्तम शुक्ल ने की I संचालन मनोज कुमार शुक्ल ‘ मनुज’ द्वारा किया गया Iकार्यक्रम दो चरणों में बंटा हुआ था I प्रथम चरण में प्रत्येक साहित्य-प्रेमी को “लेखन में आत्ममुग्धता की प्रवृत्ति एवं उसके खतरे ?’ विषय पर विचार व्यक्त करने थे I इस परिचर्चा में भाग लेने वाले साहित्य…See More
Feb 5
Samar kabeer commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post कुम्भ स्नान (लघुकथा )
"जनाब डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी आदाब,अच्छी लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई सवीकार करें ।"
Feb 4
Sheikh Shahzad Usmani commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post कुम्भ स्नान (लघुकथा )
"आदाब। बहुत ही विचारोत्तेजक मार्मिक सृजन। नाव, नदी, मैया और सैंया की आप बीती और देश की सच्ची तस्वीर वाली परिणति शाब्दिक करती अत्यावश्यक बेहतरीन रचना। हार्दिक बधाई आदरणीय डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव साहिब। सीसीटीवी और जांच-पड़ताल का भी बढ़िया उपयोग।…"
Feb 4
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a blog post

कुम्भ स्नान (लघुकथा )

‘अरे राम-राम, संगम से इतनी दूर भी गंगा का किनारा साफ़ नहीं I सब ससुर किनारे में ही निपटान करत है i ऐसे में गंगा नहाय से का फायदा ? मगर हमरे घरैतिन के सिर पर तो कुम्भ सवार रहै I’- पंडित जी ने नाव वाले से कहा I नाव में कुछ और सवारियाँ भी थीं, परन्तु किसी का भी चेहरा धुंधलके और घने कुहरे के कारण साफ़ नजर नही आता था Iमल्लाह ने स्वीकार की मुद्रा में धीरे से ‘हूँ------‘ कहा और नाव खेने में मशगूल हो गया I    ‘इनका होश ही नाहीं i’– पंडिताइन ने ठंढी बयार से बचाने के लिए गोद में पड़े अपने साल भर के बच्चे को…See More
Feb 3
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव replied to डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's discussion लेखन में आत्ममुग्धता की बढ़ती प्रवृत्ति और उसके खतरे-एक परिचर्चा /// प्रस्तुति – डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव
"प्रिय आलोक , आप सदा से मेरे प्रेरणा स्रोत रहे हैं  I मैं महज आभार प्रकट कर अपनी अनुभूति को बौना नही कर सकता i  सस्नेह I "
Feb 3
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव replied to डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's discussion लेखन में आत्ममुग्धता की बढ़ती प्रवृत्ति और उसके खतरे-एक परिचर्चा /// प्रस्तुति – डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव
"आ० दयाराम जी, आपका आभार  I "
Feb 3
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव replied to डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's discussion मामूर हुयी उमर खैय्याम के प्रभाव से हिन्दी काव्यानुवाद की परंपरा     ////  डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव
"प्रिय आलोक , आपसे उत्शावर्धन हुआ I आपका आभारी हूँ i "
Feb 3

Profile Information

Gender
Male
City State
LUCKNOW (UTTAR PRADESH)
Native Place
LUCKNOW
Profession
RETD. GOVT. SERVANT
About me
Ph.D. in Hindi Lit. AND ACTIVE IN CREATIVE HINDI LITERATURE

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's Photos

  • Add Photos
  • View All

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's Blog

बच्चा है तू (लघुकथा )

 न्याय के मंदिर की मेरी पहली परिक्रमा थी i कोर्ट के आदेश के अनुसार मुझे एक कर्मचारी की सैलरी कोर्ट में जमा करनी थी I मैं ठीक दस बजे चेक लेकर कोर्ट पहुंच गया I कैशियर साहब ग्यारह बजे आये और बोले –‘इसे स्टैंडिंग काउंसल से वेरीफाई करा के लाओ I’

स्टैंडिंग काउंसल ने डांट लगाई –‘हाउ यू डेयर कम डायरेक्टली टू मी I कम थ्रू माय आफिस I’  मैं आफिस गया I संबंधित बाबू सीट पर नहीं थे I वह एक घंटे बाद आये और आकर मोबाईल पर बतियाने लगे I दस मिनट बाद खाली हुए तो झुंझलाकर बोले- ‘क्या है…

Continue

Posted on February 9, 2019 at 11:00pm — 4 Comments

कुम्भ स्नान (लघुकथा )

‘अरे राम-राम, संगम से इतनी दूर भी गंगा का किनारा साफ़ नहीं I सब ससुर किनारे में ही निपटान करत है i ऐसे में गंगा नहाय से का फायदा ? मगर हमरे घरैतिन के सिर पर तो कुम्भ सवार रहै I’- पंडित जी ने नाव वाले से कहा I नाव में कुछ और सवारियाँ भी थीं, परन्तु किसी का भी चेहरा धुंधलके और घने कुहरे के कारण साफ़ नजर नही आता था I

मल्लाह ने स्वीकार की मुद्रा में धीरे से ‘हूँ------‘ कहा और नाव खेने में मशगूल हो गया I    

‘इनका होश ही नाहीं i’– पंडिताइन ने ठंढी बयार से बचाने के लिए गोद में पड़े अपने…

Continue

Posted on February 3, 2019 at 5:41pm — 3 Comments

फर्स्ट-साईट-लव (लघुकथा )

दोनों सर्विस में थे I दोनों एक ही मंजिल के दैनिक रेल यात्री थे I दोनों के बीच आँखों-आँखों में प्यार का व्यापार कुछ माह चला I प्लेटफार्म में, ट्रेन के कम्पार्टमेंट में दोनों एक दूसरे को ढूंढते I लडकी सोचती कि पहले लडका पहल करे, पर लडका नैन- सुधारस पान कर ही संतुष्ट था I एक दिन लडकी की सहेलियों ने कहा –‘ मि० शील-संकोच से तुझे ही बात करनी पड़ेगी i’

            लडकी ने साहस किया I एक दिन ट्रेन से उतरकर उसने लडके से कहा -‘आप को ऐतराज न हो तो हम साथ-साथ काफी पी सकते हैं…

Continue

Posted on January 13, 2019 at 8:30pm — 5 Comments

नव् वर्ष

समय की होती अद्भुत चाल I गया कुछ लेकर-देकर साल II

बिछाकर पलक पांवड़े द्वार I किया हमने जिसका सत्कार II

वर्ष नव यह आया अभिराम I लिए सुन्दर सपने अविराम II

पूर्ण होंगे संभावित कार्य I कृपा बरसाएंगे सब आर्य II

सभी को शुभ हो नूतन वर्ष I सभी का मंगल, हो उत्कर्ष II

सभी के सपने हों साकार I सभी का हुलसित हो संसार II

सभी का मुखरित हो उल्लास I सभी के अधरों पर हो हास II

वर्ष भर हो जय-जय का शोर I वर्ष भर हो आँगन में रोर II

वर्ष भर उत्सव रहे वदान्य I वर्ष भर पूरित हो…

Continue

Posted on January 1, 2019 at 4:56pm — 3 Comments

Comment Wall (55 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 7:06pm on October 30, 2017, Alok Rawat said…

आदरणीय डॉक्टर साहेब
आपके द्वारा रचित खंडकाव्य मेघदूत का कथानक पढ़ा .बड़ा साहसिक कदम उठाया है आपने .आपने मेरी जिज्ञासा बहुत बढ़ा दी है .पूरा मेघदूत पढ़ने के लिए मन लालायित हो उठा है . आशा करता हूँ की बहुत जल्दी आपका खंडकाव्य पढ़ने को मिलेगा .महाकवि कालिदास की रचना का हिंदी काव्यानुवाद कितना बड़ा कार्य है और इसके लिए कितनी हिम्मत चाहिए मैं समझ सकता हूँ .किन्तु आपने इस कार्य को पूर्ण करके सामान्य जनमानस को भी मेघदूत की जो सौगात भेंट की है उसके लिए हिंदी साहित्य सदैव आपका ऋणी रहेगा . आप ऐसे ही पुनीत कार्य करते रहें .हमारी शुभकामनाएं सदैव आपके साथ हैं .

At 9:17pm on June 27, 2016, Sulabh Agnihotri said…

स्वागत है आदरणीय !

At 7:02pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 12:44pm on September 23, 2015, gaurav bhargava said…

वह अगले साल आएगा - इस वाक्य में कौन सा कारक है?
1)  कर्म कारक
2) अपादान कारक
3) अधिकरण कारक
4) सम्बन्ध कारक

At 6:35pm on August 6, 2015, Harash Mahajan said…

आदरणीय डा. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी कृतज्ञ हूँ सर !!

At 8:06pm on August 1, 2015, Prashant Priyadarshi said…

आ. गोपाल नारायन सर, ये घटना मेरे सामने की है(मेरे परम मित्र के साथ घटी हुई) इसीलिए मैंने इस पर लिखने का प्रयास किया है. एक प्रयास थी इस संवेदनशील मुद्दे पर लिखने की, काफ़ी कमियाँ रह गई हैं. सुधरा हुआ रूप निकट भविष्य में पुनः आप सभी श्रेष्ठ एवं गुणीजनों के समक्ष प्रस्तुत करूँगा. कहानी पर समय देकर मार्गदर्शन के लिए आपको कोटिशः धन्यवाद. आपके द्वारा इंगित किए गए बिन्दुओं  पर काम करके यह कहानी पुनः पोस्ट करूँगा.

At 12:16am on July 19, 2015, kanta roy said…
नतमस्तक हुई मै पाकर यह सम्मान , आदर में श्री माननीय डा. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी आपके साथ ही ओबीओ की भी करती हूँ गुणगान ।
At 9:23am on June 5, 2015, Manan Kumar singh said…

'

यही है कविता का मर्म

नियम नहीं, धर्म नहीं

बस केवल कर्म'.....आदरणीय गोपाल भाईजी, बहुत बढ़िया, कविता कर्म प्रधान हो यह लक्ष्य होना चाहिए, सादर। 

At 2:07pm on April 16, 2015, jaan' gorakhpuri said…

बहुत बहुत आभार! आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव सर! स्नेह बनाये रक्खे!

At 5:37pm on February 28, 2015, maharshi tripathi said…

आ. डॉ गोपाल नारायण जी ,,,कविता के इस मंच पर ,,अपना मित्र बनाकर  आपने  मुझे पुरस्कार  दिया ,,आपका हार्दिक आभार और आशा है ,यूँ ही हम छोटों को आशीष देते रहेंगे |

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Samar kabeer commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post अनकहा रिश्ता (लघुकथा)
"बहना कल्पना भट्ट "रौनक़' जी आदाब,लघुकथा का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । लेकिन रचना…"
7 minutes ago

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 94 in the group चित्र से काव्य तक
"दोहा छंद आधारित गीत आंगन में बिखरी खुशी, अँजुरी भरो बुहार।नटखट मासूमी अधर, करते रस विस्तार।। पाँव…"
18 minutes ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 94 in the group चित्र से काव्य तक
"प्रदत्त चित्र के आलोक मे बहुत सुन्दर दोहावली। हार्दिक बधाई आदरणीय डाॅ छोटेलाल सिंह जी"
1 hour ago
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 आमोद श्रीवास्तव जी हार्दिक आभार"
1 hour ago
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 कबीर सर सादर नमन  ख़बर है मुझको तेरे इश्क़ की बुलन्दी से  मिसरे को ऐसा कर रहा हूँ "
1 hour ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 94 in the group चित्र से काव्य तक
"मिली बधाई आपकी, रहा न कुछ भी शेष। धन्यवाद प्रतिभा तुम्हें, कहता है अखिलेश॥"
2 hours ago
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post जब आपकी नज़र में वफ़ा सुर्ख़रू नहीं (२७ )
"'ग़लत'12 होता है,'ग़ल्त'कोई शब्द ही नहीं,ये शायद पंजाबी उच्चारण है…"
2 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 94 in the group चित्र से काव्य तक
"मिली बधाई आपकी, भाई श्री मिथिलेश। धन्यवाद आभार भी, कहता है अखिलेश॥"
3 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 94 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभाजी रहते कितने प्रेम से, गाँवों में  परिवार। छंद रचे जिस भाव से, चित्र हुआ…"
3 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 94 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया राजेशजी छंद रचे जिस भाव से, चित्र हुआ साकार। घोल दिया है दूध में, माँ दादी का प्यार॥"
3 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 94 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय भाई छोटेलालजी सुंदर शब्दों से रचे, कितने सुंदर छंद। चित्र को साकार किया, दोहे का हर बंद॥"
3 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 94 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी, सभी छंद में गाँव  की, खुशबू है औ’ प्यार। इसीलिए लगते भले, भारत के…"
4 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service