For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव
  • Male
  • Lucknow Uttar Pradesh
  • India
Share

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's Friends

  • आशीष सिंह ठाकुर 'अकेला'
  • Kalipad Prasad Mandal
  • सुरेश कुमार 'कल्याण'
  • रामबली गुप्ता
  • बृजेश कुमार 'ब्रज'
  • सतविन्द्र कुमार राणा
  • gaurav bhargava
  • Prashant Priyadarshi
  • amod shrivastav (bindouri)
  • Sahil verma
  • jaan' gorakhpuri
  • Samar kabeer
  • pratibha tripathi
  • maharshi tripathi
  • Hari Prakash Dubey

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's Groups

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's Discussions

सीता-चरित्र के नए प्रतिमान गढ़ता हुआ उपन्यास ‘सीता सोंचती थीं’-   डॉ० गोपाल नारायण श्रीवास्तव

       राम भगवान थे या सामान्य मानव, अवतार थे या इतिहासपुरुष, काल्पनिक चरित्र थे या सचमुच कोई विश्रुत लोकनायक. इन सब बातों पर मतभेद हो सकता है, पर वे भारतीय लोक मानस की जीवंत आस्था है इस बात में कोई…Continue

Started Feb 19

कवयित्री संध्या सिंह कृत “मौन की झनकार” (गीत संकलन ) का लोकार्पण - एक विहंगम दृष्टि-डॉ0 गोपाल नारायण श्रीवास्तव

ओपन बुक्स ऑनलाइन (ओ बी ओ) लखनऊ चैप्टर एवं अमर भारती साहित्य संस्कृति संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 19-11-2017 को प्रख्यात गीतकार एवं साहित्यकार डॉ धनंजय सिंह की अध्यक्षता में हुए एक…Continue

Started Nov 24, 2017

ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की साहित्य-संध्या माह नवंबर,2017– एक प्रतिवेदन--डॉ . गोपाल नारायण श्रीवास्तव

दिनांक 18 नवम्बर 2017,  ओपन बुक्स ऑन लाइन (ओ बी ओ) के प्रधान सम्पादक श्री योगराज प्रभाकर का जन्म दिवस. इसी घोषणा के साथ SHEROES HANG-OUT लखनऊ में ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की साहित्य-संध्या माह नवंबर 2017…Continue

Started Nov 24, 2017

 

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's Page

Latest Activity

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव left a comment for योगराज प्रभाकर
"आ० अनुज . आशा है ई स्वस्थ और सानान्न्द होंगे . अवगत कराना है कि मोबाईल पर चार बार असफल कोशिश के बाद  यहाँ सन्देश निवेदित कर रहा हूँ . सूची है कि ओ बी ओ लखनऊ-चैप्टर , प्रतिवर्ष की  भांति इस वर्ष माह नवम्बर 2018 में वार्षिक कार्यक्रम करने…"
Sep 15
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on Ajay Kumar Sharma's blog post मन में ही हार, जीत मन में..
"कोई भी नहीं अपवंचित हो,------- एक मात्रा अधिक तब कोई क्यों अपवंचित हो , आ० --------------कविता बहुत ही अच्छी है भावपूर्ण, अर्थपूर्ण और शिक्षाप्रद , बधाई ."
Aug 10
vijay nikore commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post विश्व मित्रता दिवस पर
"//मित्रता शोभती है उसको जो प्रिय हित में कुछ त्याग सकेनिज स्वार्थ छोड़कर, हो तटस्थ संबंधो को अनुराग सके// यह बहुत बड़ा सच कहा आपने... काश, यह "सच" हम सब की चाह ही न रहे ... यथार्थ बन कर हम सब में उतर सके। इस अच्छी रचना के लिए हार्दिक बधाई,…"
Aug 8
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post विश्व मित्रता दिवस पर
"आ० समर कबीर जी आपका सादर आभार ."
Aug 7
Samar kabeer commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post विश्व मित्रता दिवस पर
"जनाब डॉ.गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी आदाब,बहुत उम्दा छन्द हुए हैं,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Aug 6
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a blog post

विश्व मित्रता दिवस पर

(पद-पादाकुलक छंद)मित्रता कहाँ जब परिभाषा अपने हित में आंकी जायेकालिमा सदा अन्यत्र किसी की ग्रीवा पर झांकी जायेथोड़ी सी ठेस न निभ पाए विश्वास घना यह दावा होतो दंभ मित्रता का कैसा फिर तुम भी एक छलावा होमित्रता शोभती है उसको जो प्रिय हित में कुछ त्याग सकेनिज स्वार्थ छोड़कर, हो तटस्थ संबंधो को अनुराग सकेविश्वास-नीव भी अविचल हो कुछ धैर्य-शक्ति हो सहने कीहो निर्विकार मानस जिसका हिम्मत भी हो सच कहने कीमित्रों पर मान किया मैंने , अवलम्ब सदा उनको मानावे रहे सदा ही नेह-पात्र उनको प्रिय से प्रियतर जानाअब…See More
Aug 5
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post कुछ मुक्तक
"आभार सुशील सरना जी ."
Aug 5
Sushil Sarna commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post कुछ मुक्तक
"वाह वाह और वाह आदरणीय डॉ गोपाल नारायन जी ... गहन भावों की इन अप्रतिम मुक्तकों की प्रस्तुति के लिए दिल से बधाई स्वीकार करें सर और उपन्यास के लिए हार्दिक शुभकामनाएं सर।"
Aug 5
Samar kabeer commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post कुछ मुक्तक
"आपका उपन्यास जल्द पूरा हो ऐसी कामना करता हूँ ।"
Aug 5
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post कुछ मुक्तक
"आ० समर कबीर जी ' ओ बी ओ  मेरा पहला  क्रश है . मैं भले इस समय सक्रिय नही हूँ पर एक उपन्यास  रचना में  व्यस्त होने के कारंण  . ओ बी ओ लखनऊचैप्टर  का मैं सबसे सक्रिय और अनुशासित सदस्य हूँ . ओ बी ओ  के लगभग सभी…"
Aug 5
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post कुछ मुक्तक
"आ० समर कबीर जी ' ओ बी ओ  मेरा पहला  क्रश है . मैं भले इस समय सक्रिय नही हूँ पर एक उपन्यास  रचना में  व्यस्त होने के कान . ओ बी ओ लखनऊ चाप्यत्र का मैं सबसे सक्रिय और अनुशासित सदस्य हूँ . लगभग सभी पदाधिकारियों का स्नेह भी मुझे…"
Aug 5
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post कुछ मुक्तक
"आ० नरेन्द्र चौहान  जी  आपका सादर आभार "
Aug 5
Samar kabeer commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post कुछ मुक्तक
"जनाब डॉ.गोपाल नारायण श्रीवास्तव जो आदाब,चारों ही मुक्तक उम्दा हुए हैं,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । अव्वल तो आप ओबीओ पर आते ही नहीं,और कभी भूले भटके अपनी रचना लेकर आते हैं तो उन पर आई टिप्पणियों के जवाब भी नहीं देते,आपको तो मंच पर सक्रिय रहना…"
Aug 4
narendrasinh chauhan commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post कुछ मुक्तक
"खुब सुन्दर"
Aug 3
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a blog post

कुछ मुक्तक

प्यार का सारांश कोई  छान कर लाये वहाँ सेपारदर्शी प्यार के सन्दर्भ   दिखते हों जहां से कृष्ण केवल राधिका का है दिवाना मान लूं तोमोर का फिर पंख तेरी सेज पर आया कहाँ से   ( 2122 2122 2122  2122 )जो सहारों के सहारे हैं,  सरसते वे नहीफाड़ देते जो धरा को हैं तरसते वे नही चापलूसों की हकीकत है मुझे बेशक पता जानता हूँ जो गरजते हैं,  बरसते वे नही  (2122 2122 2122  212)वक्त था जब मैं तुम्हारे प्यार को परिमापती थीनित्य नव उल्लास में   सारी दिशाएं नापती थी  तुम गए हो भूल पर,   भूली नही हूँ मैं दिवानी   वह…See More
Aug 3
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव replied to sharadindu mukerji's discussion ओबीओ लखनऊ चैप्टर साहित्यिक गोष्ठी, माह जुलाई 2018 – एक प्रतिवेदन
"आदरणीय दादा श्री प्रतिवेदन पढ़कर गोष्ठी की गरिमा का पता चला . दुर्भाग्य से इस बार मैं उपस्थित नही हो पाया पर अहल्या -एक सफ़र की चर्चा रोमांचित कर देने वाली है . यह चर्चा अगली गोष्ठी में भी होगी यह मेरे लिए उत्साहवर्धक है क्योकि मैं स्वयम इस पुस्तक पर…"
Aug 3

Profile Information

Gender
Male
City State
LUCKNOW (UTTAR PRADESH)
Native Place
LUCKNOW
Profession
RETD. GOVT. SERVANT
About me
Ph.D. in Hindi Lit. AND ACTIVE IN CREATIVE HINDI LITERATURE

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's Photos

  • Add Photos
  • View All

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's Blog

विश्व मित्रता दिवस पर

(पद-पादाकुलक छंद)

मित्रता कहाँ जब परिभाषा अपने हित में आंकी जाये

कालिमा सदा अन्यत्र किसी की ग्रीवा पर झांकी जाये

थोड़ी सी ठेस न निभ पाए विश्वास घना यह दावा हो

तो दंभ मित्रता का कैसा फिर तुम भी एक छलावा हो



मित्रता शोभती है उसको जो प्रिय हित में कुछ त्याग सके

निज स्वार्थ छोड़कर, हो तटस्थ संबंधो को अनुराग सके

विश्वास-नीव भी अविचल हो कुछ धैर्य-शक्ति हो सहने की

हो निर्विकार मानस जिसका हिम्मत भी हो सच कहने की



मित्रों पर मान किया मैंने , अवलम्ब… Continue

Posted on August 5, 2018 at 7:11pm — 3 Comments

कुछ मुक्तक

प्यार का सारांश कोई  छान कर लाये वहाँ से

पारदर्शी प्यार के सन्दर्भ   दिखते हों जहां से 

कृष्ण केवल राधिका का है दिवाना मान लूं तो

मोर का फिर पंख तेरी सेज पर आया कहाँ से 

  ( 2122 2122 2122  2122 )

जो सहारों के सहारे हैं,  सरसते वे नही

फाड़ देते जो धरा को हैं तरसते वे नही 

चापलूसों की हकीकत है मुझे बेशक पता 

जानता हूँ जो गरजते हैं,  बरसते वे नही

 …

Continue

Posted on August 3, 2018 at 3:30pm — 7 Comments

ला-इलाज कैंसर की तरह

वक्त आता है

चला जाता है

हमे नही लगता कि

वक्त के आने और जाने से

कुछ फर्क पड़ता है

क्योंकि हम

अपने निकम्मेपन की धुन में

ही मग्न रहते है और

बीतती जाती है उम्र

फिर एक दिन जब दर्पण

हमे चेतावनी देता है

हम रह जाते हैं

अवाक् 

और भय से देखते है

अपने उजले हो चुके बाल

धंसी हई आँखें  

पोपला मुख

और सारे चेहरे पर

अनगिनत वक्त के निशान   

तब हम जान पाते हैं…

Continue

Posted on July 3, 2018 at 11:26am — 9 Comments

समझ गया हूँ

मैं
आज से नहीं कहूँगा
तुम्हे साथी, मीत या हमनवां
क्योंकि अब
मैं जान गया हूँ कि
ये शब्द
बौना कर देते है
उन संबंधो
और अहसासों को
जो हमें देते रहे
जाने कब से ?
वे अज्ञात एवं रहस्यमय
अनगिन स्पंदन
जिनमें मैंने पाया
जीवन
और जीवन का अर्थ.

(मौलिक / अप्रकाशित )

Posted on May 12, 2018 at 6:00am — 3 Comments

Comment Wall (55 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 7:06pm on October 30, 2017, Alok Rawat said…

आदरणीय डॉक्टर साहेब
आपके द्वारा रचित खंडकाव्य मेघदूत का कथानक पढ़ा .बड़ा साहसिक कदम उठाया है आपने .आपने मेरी जिज्ञासा बहुत बढ़ा दी है .पूरा मेघदूत पढ़ने के लिए मन लालायित हो उठा है . आशा करता हूँ की बहुत जल्दी आपका खंडकाव्य पढ़ने को मिलेगा .महाकवि कालिदास की रचना का हिंदी काव्यानुवाद कितना बड़ा कार्य है और इसके लिए कितनी हिम्मत चाहिए मैं समझ सकता हूँ .किन्तु आपने इस कार्य को पूर्ण करके सामान्य जनमानस को भी मेघदूत की जो सौगात भेंट की है उसके लिए हिंदी साहित्य सदैव आपका ऋणी रहेगा . आप ऐसे ही पुनीत कार्य करते रहें .हमारी शुभकामनाएं सदैव आपके साथ हैं .

At 9:17pm on June 27, 2016, Sulabh Agnihotri said…

स्वागत है आदरणीय !

At 7:02pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 12:44pm on September 23, 2015, gaurav bhargava said…

वह अगले साल आएगा - इस वाक्य में कौन सा कारक है?
1)  कर्म कारक
2) अपादान कारक
3) अधिकरण कारक
4) सम्बन्ध कारक

At 6:35pm on August 6, 2015, Harash Mahajan said…

आदरणीय डा. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी कृतज्ञ हूँ सर !!

At 8:06pm on August 1, 2015, Prashant Priyadarshi said…

आ. गोपाल नारायन सर, ये घटना मेरे सामने की है(मेरे परम मित्र के साथ घटी हुई) इसीलिए मैंने इस पर लिखने का प्रयास किया है. एक प्रयास थी इस संवेदनशील मुद्दे पर लिखने की, काफ़ी कमियाँ रह गई हैं. सुधरा हुआ रूप निकट भविष्य में पुनः आप सभी श्रेष्ठ एवं गुणीजनों के समक्ष प्रस्तुत करूँगा. कहानी पर समय देकर मार्गदर्शन के लिए आपको कोटिशः धन्यवाद. आपके द्वारा इंगित किए गए बिन्दुओं  पर काम करके यह कहानी पुनः पोस्ट करूँगा.

At 12:16am on July 19, 2015, kanta roy said…
नतमस्तक हुई मै पाकर यह सम्मान , आदर में श्री माननीय डा. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी आपके साथ ही ओबीओ की भी करती हूँ गुणगान ।
At 9:23am on June 5, 2015, Manan Kumar singh said…

'

यही है कविता का मर्म

नियम नहीं, धर्म नहीं

बस केवल कर्म'.....आदरणीय गोपाल भाईजी, बहुत बढ़िया, कविता कर्म प्रधान हो यह लक्ष्य होना चाहिए, सादर। 

At 2:07pm on April 16, 2015, jaan' gorakhpuri said…

बहुत बहुत आभार! आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव सर! स्नेह बनाये रक्खे!

At 5:37pm on February 28, 2015, maharshi tripathi said…

आ. डॉ गोपाल नारायण जी ,,,कविता के इस मंच पर ,,अपना मित्र बनाकर  आपने  मुझे पुरस्कार  दिया ,,आपका हार्दिक आभार और आशा है ,यूँ ही हम छोटों को आशीष देते रहेंगे |

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani posted a blog post

'नज़रिये के ज़रिये' (लघुकथा)

पंडित जी और मुल्ला जी दोनों शाम के वक़्त शहर के सर्वसुविधायुक्त पार्क में चहलक़दमी और कुछ योगाभ्यास…See More
17 minutes ago
विनय कुमार posted a blog post

परवाह- लघुकथा

पूरा ऑफिस इकट्ठा हो गया था, बॉस जूते निकालकर मंदिर में घुसा और गणपति आरती शुरू हो गयी. उसे यह सब…See More
18 minutes ago
Samar kabeer commented on vijay nikore's blog post सो न सका मैं कल सारी रात
"प्रिय भाई विजय निकोर जी आदाब,बहुत ही सुंदर,भवपूर्ण,प्रभावशली रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर दिल से…"
1 hour ago
Samar kabeer commented on vijay nikore's blog post सो न सका मैं कल सारी रात
"जनाब नरेंद्र सिंह चौहान जी, //खुब सुन्दर रचना// आपने ज़िद पकड़ ली है कि मंच की परिपाटी के हिसाब से…"
2 hours ago
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 श्याम नारायण वर्मा जी सप्रेम नमन के साथ हार्दिक आभार ।"
3 hours ago
Samar kabeer commented on Harihar Jha's blog post अच्छे दिन थे
"इसका जवाब तो प्रबन्धन समिति ही देगी,आदरणीय ।"
4 hours ago
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post उम्मीद दिल में पल रही है- ग़ज़ल
"बहुत बहुत आभार आ मुहतरम समर कबीर साहब"
5 hours ago
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post उम्मीद दिल में पल रही है- ग़ज़ल
"बहुत बहुत आभार आ तेज वीर सिंह जी"
5 hours ago
Harihar Jha commented on Harihar Jha's blog post अच्छे दिन थे
"आदरणीय समीर जी, नमस्कार। मुझे केवल एक बार ही दिख रही है। दो बार दिखने पर संपादन मंडल को एक हटा देने…"
6 hours ago
Shyam Narain Verma commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी प्रणाम , बेहद उम्दा ...बहुत बहुत बधाई आप को | सादर"
6 hours ago
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल

2122 1212 22 सोचिये  मत   यहाँ  ख़ता  क्या  है । है  इशारा   तो   पूछना   क्या  है ।।अब…See More
9 hours ago
Samar kabeer commented on rajesh kumari's blog post नाभी में लेकर कस्तूरी  तय करता मृग कितनी दूरी (गीत राज )
"कोई बात नहीं बहना हो जाता है कभी कभी,ऐडिट कर दीजिये ।"
18 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service