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रामबली गुप्ता
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on रामबली गुप्ता's blog post गरीबी न दे ऐ खुदा जिंदगी में-रामबली गुप्ता
"आ. भाई रामबली जी, सादर अभिवादन।सुंदर छंद हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Apr 30
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post गरीबी न दे ऐ खुदा जिंदगी में-रामबली गुप्ता
"आपका बहुत बहुत आभार आदरणीय समर भाई साहब"
Apr 29
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post गरीबी न दे ऐ खुदा जिंदगी में-रामबली गुप्ता
"सादर आभार भाई सुरेन्द्रनाथ जी"
Apr 29
Samar kabeer commented on रामबली गुप्ता's blog post गरीबी न दे ऐ खुदा जिंदगी में-रामबली गुप्ता
"जनाब रामबली गुप्ता जी आदाब,बहुत अच्छा छन्द लिखा आपने,मेरी तरफ़ से बधाई स्वीकार करें ।"
Apr 29
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on रामबली गुप्ता's blog post गरीबी न दे ऐ खुदा जिंदगी में-रामबली गुप्ता
"आद0 रामबली जी सादर अभिवादन। वाह क्या बेहतरीन छंद लिखा है बन्धु, बहुत बढ़िया। विषय भी दिल को छूता हुआ। बधाई स्वीकार कीजिये"
Apr 25
रामबली गुप्ता posted a blog post

गरीबी न दे ऐ खुदा जिंदगी में-रामबली गुप्ता

महाभुजंगप्रयात सवैयाकड़ी धूप या ठंड हो जानलेवा न थोड़ी दया ये किसी पे दिखाती।कि लेती कभी सब्र का इम्तिहां और भूखा कभी रात को ये सुलाती।।जरूरी यहाँ धर्म-कानून से पूर्व दो वक्त की रोटियाँ हैं बताती।गरीबी न दे ऐ खुदा! जिंदगी में कि इंसान से ये न क्या क्या कराती?शिल्प-लघु गुरु गुरु(यगण)×8रचनाकार- रामबली गुप्तामौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Apr 24
सतविन्द्र कुमार राणा commented on रामबली गुप्ता's blog post वागीश्वरी सवैया-रामबली गुप्ता
"बहुत सुंदर छन्द आदरणीय रामबली भाई जी,  विधान यगण ×7 +लगा प्रतीत हो रहाhai. सादर"
Apr 21
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post वागीश्वरी सवैया-रामबली गुप्ता
"आपका बहुत बहुत आभार आदरणीय भाई बृजेश कुमार जी"
Apr 19
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post वागीश्वरी सवैया-रामबली गुप्ता
"सराहना एवं प्रोत्साहन के लिए सादर आभार भाई आद सुशील सरना जी"
Apr 19
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on रामबली गुप्ता's blog post वागीश्वरी सवैया-रामबली गुप्ता
"वाह जी वाह आदरणीय गुप्ता जी खूब छंद निभाया है सुन्दर सरस.."
Apr 19
Sushil Sarna commented on रामबली गुप्ता's blog post वागीश्वरी सवैया-रामबली गुप्ता
"आदरणीय रामबली गुप्ता जी अति सुंदर और मनभावन सृजन के लिए दिल से बधाई ।"
Apr 18
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post वागीश्वरी सवैया-रामबली गुप्ता
"लिखने में टंकण त्रुटि हो गई है आदरणीय गोपाल सर जी।क्षमाप्रार्थी हूँ अभी सुधार लेता हूँ। सादर धन्यवाद"
Apr 18
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on रामबली गुप्ता's blog post वागीश्वरी सवैया-रामबली गुप्ता
"प्रिय राम बली जी . आपके सूत्र की मात्रिक व्यवस्था अधूरी है -  (122X 7+ 1 2 )और वर्णिक  व्यवस्था आपने दी  नही (12 वर्ण , 11 वर्ण ) आपके छंद का शिल्प सधा हुआ है i इसके लिए बधाई  I "
Apr 18
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post वागीश्वरी सवैया-रामबली गुप्ता
"बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय भाई साहब। सब आप सभी सामीप्य और सहयोग से सीखा है।"
Apr 17
Samar kabeer commented on रामबली गुप्ता's blog post वागीश्वरी सवैया-रामबली गुप्ता
"जनाब रामबली गुप्ता जी आदाब,बहुत मुश्किल छन्द है भाई,कहने में पसीने आ जाते हैं,मगर आपने बहुत ख़ूब कहा, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Apr 17

Profile Information

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रामबली गुप्ता's Blog

गरीबी न दे ऐ खुदा जिंदगी में-रामबली गुप्ता

महाभुजंगप्रयात सवैया

कड़ी धूप या ठंड हो जानलेवा न थोड़ी दया ये किसी पे दिखाती।
कि लेती कभी सब्र का इम्तिहां और भूखा कभी रात को ये सुलाती।।
जरूरी यहाँ धर्म-कानून से पूर्व दो वक्त की रोटियाँ हैं बताती।
गरीबी न दे ऐ खुदा! जिंदगी में कि इंसान से ये न क्या क्या कराती?

शिल्प-लघु गुरु गुरु(यगण)×8

रचनाकार- रामबली गुप्ता

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on April 23, 2019 at 5:23pm — 5 Comments

वागीश्वरी सवैया-रामबली गुप्ता

सूत्र-सात यगण +गा; 122×7+2

पड़ी जान है मुश्किलों में करूँ क्या कि नैना मिले और ये हो गया।
गई नींद भी औ' लुटा चैन मेरा न जाने जिया ये कहां खो गया।।
जिया के बिना भी जिया जाय कैसे अरे! कौन काँटें यहां बो गया।
हुआ बावरा या नशा प्यार का है संभालो मुझे हाय! मैं तो गया।।

रचनाकार-रामबली गुप्ता

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on April 17, 2019 at 10:29am — 9 Comments

महाभुजंगप्रयात सवैया-रामबली गुप्ता

सूत्र-आठ यगण प्रति पद; 122x8

चुनो मार्ग सच्चा करो कर्म अच्छे जहां में तुम्हारा सदा नाम होगा।

करो यत्न श्रद्धा व निष्ठा भरे तो न पूरा भला कौन सा काम होगा।।

न निर्बाध है लक्ष्य की साधना जूझना मुश्किलों से सरे-आम होगा।

इन्हें जीतना पीढ़ियों के लिए भी तुम्हारा नया एक पैगाम होगा।।1।।

करे सामना धैर्य से मुश्किलों का न कर्तव्य से पैर पीछे हटाए।

नहीं हार से हार माने जहां में कभी कोशिशों से न जो जी चुराए।।

अँधेरा घना या निशा हो घनेरी…

Continue

Posted on April 13, 2019 at 7:32am — 4 Comments

गीतिका(आधार छंद-दोहा) -रामबली गुप्ता

सोच समझ कर बोलिए, बातें सदा विनीत

छूटा धनु से बाण जो, लौटा कब हे! मीत



तीर-धनुष-तलवार से, बड़े दया औ' प्रेम

इन्हें बना लें शस्त्र यदि, जग को लेंगे जीत।



द्वेष-दंभ सम अरि सखे! यहाँ मनुज के कौन

बिन इनके संहार के, उपजे कब हिय प्रीत



सतत प्रयासों के करें, ऐसे तीव्र प्रहार

पर्वत पथ खुद छोड़ दें, होकर भय से भीत



अधर-सुधा घट भौंह-धनु, मुख…

Continue

Posted on November 19, 2018 at 1:21pm — 3 Comments

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At 11:21am on May 17, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…
आदरणीय रामबली जी आपकी इस सफलता पर आपको तहे दिल बधाई ..
At 11:21am on May 17, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…
आदरणीय रामबली जी आपकी इस सफलता पर आपको तहे दिल बधाई ..
At 3:10pm on May 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय रामबली गुप्ता जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपका गीत-हृदय का भ्रमर गुनगुनाता चला है को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:47am on May 14, 2016, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ०  रामबली जी

आप जैसा सुन्दर कवि -मित्र पाकर आप्यायित हूँ . आपको सदैव शुभ .  

At 10:17pm on February 25, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

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dandpani nahak left a comment for Er. Ganesh Jee "Bagi"
"आदरणीय गणेश जी 'बागी' जी आदाब और बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ाने के लिए आपका शुक्रगुज़ार हूँ…"
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मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-107
"आदरणीय दण्डपाणि नाहक जी, अच्छी ग़ज़ल कही है, दाद कुबूल करें ।"
yesterday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-107
"ग़ज़ल 1212 1122 1212 22 जुनूँ गज़ब का मगर ये अज़ब कहानी है तलाश जारी है क्या चाँद में भी पानी है इधर…"
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babitagupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-107
"बेहतरीन बाल गीत, बधाई स्वीकार कीजिएगा आदरणीय सतविन्द्र सरजी। "
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मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-107
"सराहना हेतु आभार आदरणीया बबिता गुप्ता जी."
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मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-107
"आभार आदरणीय डॉ छोटे लाल जी, सराहना से रचना सार्थक हुई."
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babitagupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-107
"बेहतरीन पंक्तियाँ, आदरणीय गणेश सरज बधाई स्वीकार कीजिएगा।"
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