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रामबली गुप्ता
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रामबली गुप्ता posted a blog post

पिया का पत्र

आज खुशी से झूमूँ सखि री पत्र पिया का आया है भाव भरे अक्षर-अक्षर ने ये तन-मन हर्षाया हैलिखते, प्रिये! तुम्हीं से सब कुछ, सुख-दुख की सहभागी तुम तुमने इस जीवन में खुशियों का सावन बरसाया है रहता था निर्वासित सा मन जीवन के निर्जन वन में पावन प्यार भरा गृह इसको तुमने ही लौटाया हैकहते- पीर भरा यह जीवन जो तपते मरुथल सा था पाकर तेरा स्नेह सलिल अब हरा भरा हो आया हैनीरव हिय का रंगमहल था साज-बाज सब सूने थे तेरी पायल की छम छम ने सुर से इसे सजाया हैसुन सखिया हैं आगे लिखते-- निर्मल मन मन्दिर मेरा प्रभु की…See More
Feb 11, 2023
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post कृष्ण नहीं दरकार है भइया
"हार्दिक धन्यवाद भाई ब्रजेश कुमार जी"
Jan 30, 2023
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post कृष्ण नहीं दरकार है भइया
"हार्दिक आभार आदरणीय समर भाई साहब। कुछ बेहतर की गुंजाइश हो तो जरूर बताइयेगा"
Jan 30, 2023
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on रामबली गुप्ता's blog post कृष्ण नहीं दरकार है भइया
"आदरणीय गुप्ता जी...अच्छी ग़ज़ल कही है...बधाई"
Jan 30, 2023
Samar kabeer commented on रामबली गुप्ता's blog post कृष्ण नहीं दरकार है भइया
"जनाब रामबली गुप्ता जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है , बधाई स्वीकार करें I "
Jan 29, 2023
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post कृष्ण नहीं दरकार है भइया
"हार्दिक आभार लक्ष्मण भाई जी"
Jan 25, 2023
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on रामबली गुप्ता's blog post कृष्ण नहीं दरकार है भइया
"आ. भाई रामबली जी, सादर अभिवादन। सुन्दर गजल हुई है । हार्दिक बधाई."
Jan 25, 2023
रामबली गुप्ता posted a blog post

कृष्ण नहीं दरकार है भइया

ग़ज़लयह कैसा संसार है भइया दीप तले अँधियार है भइयाजनता के हिस्से की रोटी खा जाती सरकार है भइयाजाति धरम के बाद यहाँ क्या जनमत का आधार है भइयाअधर अरुण कलियाँ धनु भौहें अंजन हाय कटार है भइयाइस जग में कुछ निश्छल भी है हाँ वह माँ का प्यार है भइयाआज जरूरत है दुर्गा की कृष्ण नहीं दरकार है भइयाकरता चल कुछ काम भले भी जीना दिन दो चार है भइया-रामबली गुप्तामौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Jan 25, 2023
रामबली गुप्ता is now friends with vijay nikore and SALIM RAZA REWA
Jan 17, 2023
रामबली गुप्ता commented on Samar kabeer's blog post तरही ग़ज़ल
"वाह वाह भाई साहब क्या कहने एक एक शेर लाज़वाब हुआ है। दिली मुबारकबाद पेश है।"
Jan 17, 2023
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-सफलता के शिखर पर वे खड़े हैं -रामबली गुप्ता
"जनाब रामबली गुप्ता जी आदाब, ख़ूबसूरत ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें। सादर। "
Jul 11, 2020
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-सफलता के शिखर पर वे खड़े हैं -रामबली गुप्ता
"धन्यवाद सुरेन्द्र नाथ जी। कर लिया है गौर।"
Jul 11, 2020
नाथ सोनांचली commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-सफलता के शिखर पर वे खड़े हैं -रामबली गुप्ता
"आद0 रामबली जी सादर अभिवादन। हिंदी उर्दू शब्दो से मिश्रित शब्दों से उम्दा ग़ज़ल कही है आपने। बधाई स्वीकार कीजिये। आद0 भसीन साहब की टिप्पणियों पर भी गौर कीजिए।"
Jul 11, 2020
रवि भसीन 'शाहिद' commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-सफलता के शिखर पर वे खड़े हैं -रामबली गुप्ता
"आदरणीय रामबली गुप्ता साहिब, नमस्कार। जनाब, मुझे आपकी पहली टिप्पणी से लगा आप नाराज़ हो गए हैं। लेकिन दूसरी टिप्पणी से लगा कि आप वाक़ई चर्चा करना चाहते हैं, इसलिए दोबारा उपस्थित हुआ हूँ। जी 'मधु' शब्द मुझे इसलिए खटका था क्यूँकि उस मिसरे को…"
Jul 8, 2020
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-सफलता के शिखर पर वे खड़े हैं -रामबली गुप्ता
"ऐसी कोई बात नहीं है आदरणीय रवि भसीन जी। आपने कोई दखल नहीं दिया है बल्कि ओ बी ओ की परंपरा का ही निर्वहन किया है और न ही मैंने आपकी टिप्पणी का कोई बुरा नहीं माना है। आप बेबाक टिप्पणी लिखें मैं किंचित विचलित न होऊँगा बल्कि आपकी बातों को गुनूँगा। वास्तव…"
Jul 8, 2020
रवि भसीन 'शाहिद' commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-सफलता के शिखर पर वे खड़े हैं -रामबली गुप्ता
"आदरणीय रामबली गुप्ता जी, मैं दरअस्ल मिस्रा ये तजवीज़ करना चाहता था: 1222 1222 122 नहीं हैं लब शहद के वो घड़े हैं ग़लती से मूल शेर से लिया हुआ 'मधु' लिखा गया। ठीक है जनाब, आप अपना शे'र वैसे ही रखिये जैसे आपको अच्छा लगता है। दख़ल देने के…"
Jul 8, 2020

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रामबली गुप्ता's Blog

पिया का पत्र

आज खुशी से झूमूँ सखि री पत्र पिया का आया है

भाव भरे अक्षर-अक्षर ने ये तन-मन हर्षाया है

लिखते, प्रिये! तुम्हीं से सब कुछ, सुख-दुख की सहभागी तुम

तुमने इस जीवन में खुशियों का सावन बरसाया है 

रहता था निर्वासित सा मन जीवन के निर्जन वन में

पावन प्यार भरा गृह इसको तुमने ही लौटाया है

कहते- पीर भरा यह जीवन जो तपते मरुथल सा था

पाकर तेरा स्नेह सलिल अब हरा भरा हो आया है

नीरव हिय का रंगमहल था साज-बाज सब सूने थे

तेरी पायल…

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Posted on February 11, 2023 at 9:30am

कृष्ण नहीं दरकार है भइया

ग़ज़ल

यह कैसा संसार है भइया

दीप तले अँधियार है भइया

जनता के हिस्से की रोटी

खा जाती सरकार है भइया

जाति धरम के बाद यहाँ क्या

जनमत का आधार है भइया

अधर अरुण कलियाँ धनु भौहें

अंजन हाय कटार है भइया

इस जग में कुछ निश्छल भी है

हाँ वह माँ का प्यार है भइया

आज जरूरत है दुर्गा की

कृष्ण नहीं दरकार है भइया

करता चल कुछ काम भले भी

जीना दिन दो चार है…

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Posted on January 25, 2023 at 8:06am — 6 Comments

ग़ज़ल-सफलता के शिखर पर वे खड़े हैं -रामबली गुप्ता

1222 1222 122

सफलता के शिखर पर वे खड़े हैं

सदा कठिनाइयों से जो लड़े हैं

बताओ नाम तो उन पर्वतों के

हमारे हौसलों से जो बड़े हैं

नहीं हैं नैन ये गर सच कहूँ तो

सुघर चंदा में दो हीरे जड़े हैं

जो प्यासी आत्मा को तृप्त कर दें

नहीं हैं होंठ, वे मधु के घड़े हैं

ये सच है कर्मशीलों के लिए तो

सितारे भूमि पर बिखरे पड़े हैं

ये दिल के घाव अब तक हैं हरे क्यों

यकीनन शूल शब्दों के गड़े…

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Posted on July 6, 2020 at 11:37pm — 12 Comments

दिन को चैन और रातों को नींद नहीं है इक पल-रामबली गुप्ता

गीत

देखा जब से उनको हिय में हुई अजब सी हलचल।

दिन को चैन और रातों को नींद नहीं है इक पल।।

उनके अरुण अधर ज्यों फूलों की हों कोमल कलियाँ।

जिनसे फूटें स्वर मधुरिम तो गूँजें मन की गलियाँ।।

केशों के झुरमुट में उनका मुखमंडल यों भाये।

घन के मध्य झरोखे में ज्यों इंदु मंद मुसकाये।।

दृग पराग के प्याले हों ज्यों करते हर पल छल-छल।

दिन को चैन और रातों को नींद नहीं है इक पल।।

खिलता यौवन-पुष्प सुरभि यों चहुँ दिश बिखराता…

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Posted on April 26, 2020 at 11:03pm — 6 Comments

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At 11:21am on May 17, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…
आदरणीय रामबली जी आपकी इस सफलता पर आपको तहे दिल बधाई ..
At 11:21am on May 17, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…
आदरणीय रामबली जी आपकी इस सफलता पर आपको तहे दिल बधाई ..
At 3:10pm on May 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय रामबली गुप्ता जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपका गीत-हृदय का भ्रमर गुनगुनाता चला है को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:47am on May 14, 2016, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ०  रामबली जी

आप जैसा सुन्दर कवि -मित्र पाकर आप्यायित हूँ . आपको सदैव शुभ .  

At 10:17pm on February 25, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

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