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सालिक गणवीर
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सालिक गणवीर posted a blog post

ज़िंदगी रास्ता देखती हो मेरा...( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

212  212  212  212ज़िंदगी रास्ता देखती हो मेरासामना मौत से भी तभी हो मेरा  (1)मैं चलूँ काश बच्चों की उंँगली पकड़ ये सफ़र ही सही आख़िरी हो मेरा  (2)वाक़िया होगा पहला यक़ीं मानिएसामना मौत से जब कभी हो मेरा  (3)अब ये मुमकिन नहीं आज के दौर मेंशह्र में भी रहूँ गांँव भी हो मेरा  (4)खाक कर दें चलो नफ़रतों का जहाँआग होगी तेरी और घी हो मेरा  (5)ज़िंदगी को भी आना पड़ा सामनेमौत जब भी पता पूछती हो मेरा  (6)आज तक शख़्स जो हुक़्म देता रहाएक दिन के लिए अर्दली हो मेरा  (7)*मौलिक/अप्रकाशितSee More
Tuesday
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीया अंजली गुप्ता साहिबासादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी शिर्कत और सराहना के लिए ह्रदय तल से आपका आभारी हूँ."
Saturday
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय भाई अमित कुमार 'अमित' जीसादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी शिर्कत और सराहना के लिए ह्रदय तल से आपका आभारी हूँ."
Saturday
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय सुरेंदर इंसान साहिबसादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी शिर्कत और सराहना के लिए ह्रदय तल से आपका आभारी हूँ.सादर."
Saturday
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर'  साहिब सादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी शिर्कत और सराहना के लिए ह्रदय तल से आपका आभारी हूँ."
Saturday
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"भाई दण्डपाणी नाहक जी सादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी शिर्कत और सराहना के लिए ह्रदय तल से आपका आभारी हूँ."
Saturday
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीया डिंपल शर्मा जी सादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी शिर्कत और सराहना के लिए ह्रदय तल से आपका आभारी हूँ."
Saturday
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"भाई नादिर खान जी सादर अभिवादनएक उम्द: तरही ग़ज़ल के लिए ढेरों बधाइयाँ स्वीकार करें.सादर ."
Saturday
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर 'साहिब   सादर अभिवादनएक उम्द: तरही ग़ज़ल के लिए ढेरों बधाइयाँ स्वीकार करें.सादर "
Saturday
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय दण्डपाणी नाहक  जी सादर अभिवादनएक उम्द: तरही ग़ज़ल के लिए ढेरों बधाइयाँ स्वीकार करें.सादर "
Saturday
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीया रचना जी सादर अभिवादनएक उम्द: तरही ग़ज़ल के लिए ढेरों बधाइयाँ स्वीकार करें"
Saturday
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी सादर अभिवादनएक उम्द: तरही ग़ज़ल के लिए ढेरों बधाइयाँ स्वीकार करें."
Saturday
Rupam kumar -'मीत' commented on सालिक गणवीर's blog post नहीं दो चार लगता है बहुत सारे बनाएगा.( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीय अमीरूद्दीन 'अमीर' साहिबआदाब जी, आपकी बात मैं समझ गया , मिसाल के तौर पर जो आपने शे'र पेश किए बहुत उम्दा है, सादर | "
Saturday
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी सादर अभिवादनएक उम्द: तरही ग़ज़ल के लिए ढेरों बधाइयाँ स्वीकार करें."
Saturday
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीया रचना जी सादर अभिवादनएक उम्द: तरही ग़ज़ल के लिए ढेरों बधाइयाँ स्वीकार करें."
Saturday
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय दयाराम मेठानी साहबसादर अभिवादनएक उम्द: तरही ग़ज़ल के लिए ढेरों बधाइयाँ स्वीकार करें. सादर.आपके मतले के ऊला  मेंं  में की कमी खल रही है, मुहतरम."
Friday

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhilai, Chhattisgarh
Native Place
Bhilai
Profession
Retired from SAIL,as a Senior Electrical engineer
About me
Reading,writing and photography were my hobbies and after retirement I am totally indulged to fulfill my dreams.

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ज़िंदगी रास्ता देखती हो मेरा...( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

212  212  212  212

ज़िंदगी रास्ता देखती हो मेरा

सामना मौत से भी तभी हो मेरा  (1)

मैं चलूँ काश बच्चों की उंँगली पकड़

ये सफ़र ही सही आख़िरी हो मेरा  (2)

वाक़िया होगा पहला यक़ीं मानिए

सामना मौत से जब कभी हो मेरा  (3)

अब ये मुमकिन नहीं आज के दौर में

शह्र में भी रहूँ गांँव भी हो मेरा  (4)

खाक कर दें चलो नफ़रतों का जहाँ

आग होगी तेरी और घी हो मेरा  (5)

ज़िंदगी को भी आना पड़ा सामने

मौत…

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Posted on October 26, 2020 at 4:05pm

नहीं दो चार लगता है बहुत सारे बनाएगा.( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

1222 1222 1222 1222

नहीं दो-चार लगता है बहुत सारे बनाएगा

जहाँ मिलता नहीं पानी वो फ़व्वारे बनाएगा  (1)

ज़रूरत से ज़ियादा है शुगर मेरे बदन में पर

मुझे वो देखते ही फिर शकर-पारे बनाएगा  (2)

फ़लक के इन सितारों की तरह ही देखना इक दिन

ज़मीं पर भी ख़ुुदा अपने लिए तारे बनाएगा  (3)

ज़मीं पर पैर रखने की जगह दिखती नहीं उसको

फ़लक पर वो नये दो-तीन सय्यारे बनाएगा  (4)

जहाँ में ख़ुशनसीबों की नहीं दिखती…

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Posted on October 19, 2020 at 7:30am — 9 Comments

रुठ जाते हैं कभी दिन के उजाले मुझसे..( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

2122. 1122. 1122. 22.

रूठ जाते हैं कभी दिन के उजाले मुझसे

अब नहीं जाते अँधेरे ये सँभाले मुझसे (1)

सूख जाता है गला प्यास के मारे जब भी

दूर हो जाते हैं पानी के पियाले मुझसे    (2)

क़ैद रक्खा है मुझे उसने कई सालों से

चाबियों का भी पता पूछ न ताले मुझसे (3)

सामने मेरे बहुत लोग यहाँ भूखे हैं

आज निगले नहीं जाएँगे निवाले मुझसे (4)

हाथ जब मेरे सलीबें ही उठाना चाहें

ख़ार अब माँग रहे पैरों के छाले…

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Posted on October 11, 2020 at 3:30pm — 11 Comments

उधर जब तपन है..( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

 

122 122

उधर जब तपन है
इधर भी अगन है

अदू साथ तेरे
मुझे क्यों जलन है

ये क्यों मीठी मीठी
सी दिल में चुभन है

वही दुश्मन-ए-जाँ
वही जान-ए-मन है

सुखी वो नहीं पर
दुखी आज मन है

जहाँ फूल थे कल
वहाँ आज गन है

यहाँ झूठ सच है
यही तो चलन है

कहो कुछ भी'सालिक'
तुम्हारा दहन है

*मौलिक एवं अप्रकाशित.

Posted on October 5, 2020 at 9:30pm — 10 Comments

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