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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' Online Now
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"आ. भाई पंकज जी, सुंदर दोहावली हुई है । हार्दिक बधाई।"
20 hours ago
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"आ. भाई सत्यनारायण जी, चित्रानुरूप सुंदर गीत हुआ है । हार्दिक बधाई ।"
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"आ. भाई शेखशहजाद जी, बेहतरीन दोहों के लिए हार्दिक बधाई।"
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"आ. भाई मिथिलेश जी, सादर अभिवादन। स्नेह के लिए आभार।"
yesterday
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"आ. भाई सतविंद्र जी, इस स्नेह और प्रोत्साहित करती प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद।"
yesterday
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"आ. भाई सत्यनारायण जी, उत्साहवर्धन व स्नेह के लिए आभार।"
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"आ. भाई अखिलेश जी, दोहों का मान बढ़ने के लिए आभार।"
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"आ. भाई तस्दीक अहमद जी, दोहों की प्रशंसा के लिए हार्दिख धन्यवाद।"
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"आ. भाई शेख शहजाद जी, सादर आभार।"
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"आ. भाई अखिलेश जी, चित्र को परिभाषित करते बेहतरीन दोहे हुए हैं । हार्दिक बधाई।"
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"आ. भाई सतविन्दर जी, सादर अभिवादन। चित्रानुरूप सुंदर दोहे हुए हैं । हार्दिक बधाई।"
yesterday
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"आ. प्रतिभा बहन, आपको दोहे सार्थक लगे, लेखन सफल हुआ। उपस्थिति व उत्साहवर्धन के लिए आभार।"
Saturday
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"इस बारी कुछ खास है, रंगों का त्योहार... आ. प्रतिभा बहन चित्र को परिभाषित करता सुंदर गीत हुआ है ।हार्दिक बधाई।"
Saturday
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"आ. भाई तस्दीक अहमद जी, चित्रानुरूप सुंदर दोहावली हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Saturday
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"आ. भाई मिथिलेश जी, चित्रानुरूप सुंदर दोहागीत से मंच का शुभारम्भ करने के लिए हार्दिक बधाई।"
Saturday
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"लगता मुझको देखकर, लोगों यह तस्वीरअब के वर्षों बाद फिर, फगुनाया कश्मीर।१। बंदूकों से  भी  अधिक, दिखते  मुखरित रंगचली अमन की ओर क्या, घाटी की हर जंग।२। नारी से नारी  मिली, लेकर  रंग अबीर फागुन ने चंचल किया, पर वर्दी ने…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post मन भी कितना आतुर है ..
"आ. भाई आमोद जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई।"
Friday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on munish tanha's blog post फिर उठीं है जाग देखों शहर में शैतानियाँ
"आ. भाई मुनीश जी, गजल का प्रयास अच्छा है । हार्दिक बधाई।"
Friday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई नवीन जी, सादर हार्दिक बधाई ।"
Friday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post सच की झूठी जिल्दकारी क्या करूँ ..
"आ. भाई आमोद जी, गजल का प्रयास अच्छा है । हार्दिक बधाई।"
Friday

Profile Information

Gender
Male
City State
Delhi
Native Place
Dharchaula,uttarakhand
Profession
teaching

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Blog

साँझ होते  माँ  चौबारे  पर  जलाती  थी दीया -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'(गजल )

२१२२/२१२२/२१२२/२१२



मखमली  वो  फूल  नाज़ुक  पत्तियाँ  दिखती  नहीं

आजकल खिड़की पे लोगों तितलियाँ दिखती नहीं।१।



साँझ होते  माँ  चौबारे  पर  जलाती  थी दीया

तीज त्योहारों पे भी  वो बातियाँ दिखती नहीं।२।



कह  तो  देते  हैं  सभी  वो  बेचती  है  देह  पर

क्यों किसी को अनकही मजबूरियाँ दिखती नहीं।३।



अब तो काँटों  पर  जवानी  का  दिखे  है ताब पर

रुख पे कलियों के चमन में शोखियाँ…

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Posted on March 2, 2019 at 7:41pm — 7 Comments

यादें - गजल ( लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' )

२२२२/ २२२२/२२२२/ २२२२



खेतों खलिहानों तक  पसरी  नीम करेला बरगद यादें

खूब सजाकर बैठा करती फुरसत के पल संसद यादें।१।



आवारापन इनकी  फितरत  बंजारों सी चलती फिरती

कब रखती हैं यार बताओ खींच के अपनी सरहद यादें।२।



कतराती हैं भीड़ भाड़ से हम तो कहते शायद यादें

तनहाई में करती  हैं  जो  सबको बेढब गदगद यादें।३।



बचपन रखता यार न इनको और सहेजे खूब बुढ़ापा

होती हैं लेकिन विरहन को सबसे…

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Posted on February 28, 2019 at 8:00pm — 4 Comments

मुहब्बत अपनी लोगों ने सियासत से है कम कर ली - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर

१२२२ १२२२ १२२२ १२२२



जमा पूँजी थी  बरसों  की  जरुरत  ने हजम कर ली

मुहब्बत अपनी लोगों ने सियासत से है कम कर ली।१।



जमाना  अब  तो  हँसने  का  हँसेंगे  सब  तबाही पर

किसी दूजे के गम से कब किसी ने आँख नम कर ली।२।



सदा से नाज था जिसके वचन की सादगी पर ढब

उसी ने आज हमसे भी  बड़ी  झूठी कसम कर ली।३।



मुहब्बत रास आती  क्या  जफाएँ हर तरफ उस में

हमीं ने यूँ हर इक रंजिश खुशी से हमकदम कर ली।४।



बिगड़ जाती थी जो छोटी बड़ी हर बात पर हमसे…

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Posted on February 23, 2019 at 6:36am — 3 Comments

पुरखे हमारे  एक  हैं  मजहब  से तोल मत - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' ( गजल )

२२१/२१२१/२२२/१२१२



क्या कीजिएगा आप यूँ पत्थर उछाल कर

आये हैं भेड़िये तो  सब  गैंडे सी खाल कर।१।



कितने  जहीन  आज-कल  नेता  हमारे  हैं

मिलके चला रहे हैं सब सन्सद बवाल कर।२।



वो चुप थे बम के दौर में ये चुप हैं गाय के

जीता न कोई  देश  का  यारो खयाल कर।३।



पुरखे हमारे  एक  हैं  मजहब  से तोल मत

तहजीब जैसी कर रहे उस पर मलाल कर ।४।



माना की मिल गयी तुझे संगत वजीर की

प्यादा…

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Posted on February 5, 2019 at 5:31am — 10 Comments

Comment Wall (11 comments)

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At 4:04pm on August 8, 2018, babita garg said…

शुक्रिया लक्ष्मण जी

At 11:44am on March 3, 2018, Sanjay Kumar said…
बहुत बहुत धन्यवाद और आभार। कोशिश करूंगा कि कुछ योगदान कर सकूं। बस हौसला अफजाई करते रहिएगा और जहां जरूरी हो तो कुछ सिखा दीजियेगा। सादर
At 5:20pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
शुक्रिया लक्ष्मण जी
At 7:27pm on March 10, 2016, TEJ VEER SINGH said…

हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण धामी जी!आपने मुझे इस क़ाबिल समझा!

At 4:26pm on April 2, 2015, gumnaam pithoragarhi said…
लक्ष्मण धामी जी नमस्कार शुक्रिया आपने मुझे ये सम्मान दिया क्या मैं आपसे बात कर सकता हूँ यदि आप चाहें तो ................ मेरा नंबर ये है ,,,,,,,,,,7579 100213.........क्या आप अपना नंबर देंगे ?
At 10:37pm on February 17, 2015,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

भाई लक्ष्मण धामीजी, यदि संभव हो तो 18 फरवरी को भी भेंट हो सकती है. मैं 18 फरवरी को भी प्रगति मैदान के पुस्तक मेले में उपस्थित रहूँगा.
शुभ-शुभ

At 6:34am on July 9, 2014, gumnaam pithoragarhi said…
माह के सक्रिय सदस्य के रूप में चयनित होने पर हार्दिक बधाई और शुभकामना
sir main pithoragarh se hoon achchha laga ki aap bhi dharchula se hain ............................... ek baar fir badhai ,,,,,,,,,
At 2:53pm on July 8, 2014, Sushil Sarna said…

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी माह के सक्रिय सदस्य के रूप में चयनित होने पर हार्दिक बधाई और शुभकामना 

At 2:27pm on July 8, 2014, Nilesh Shevgaonkar said…

बधाई 

At 2:21pm on July 8, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
आदरणीय लक्ष्मण धामी जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन
 
 
 

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