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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
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"आ. भाई सतविंद्र जी, परामर्श देती छंदबद्ध प्रतिक्रिया के लिए आभार ।"
5 hours ago
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"आ. भाई सतविंद्र जी, सुन्दर प्रयास हुआ है हार्दिक बधाई ।"
9 hours ago
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"आ. भाई शेख शहजाद जी, आपको छंद रूचिकर लगे । उत्साह वर्धन हुआ । आभार।"
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"आ. भाई सुरेन्द्र जी, स्नेह व मार्गदर्शन के लिए आभार ।"
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"आ. भाई अखिलेश जी, इस छंद का प्रथम प्रयास है । आपकी सकारात्मक टिप्पणी से उत्साहवर्धन हुआ है । आभार।"
12 hours ago
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"आ. प्रतिभा बहन, प्रशंसा के लिए आभार ।"
12 hours ago
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"फिर चूक हो गई ..."
12 hours ago
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"आ. भाई छोटेलाल जी, प्रदत्त विषय पर सुंदर छंद हुए है । हार्दिक बधाई ।"
16 hours ago
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"आ. भाई शरद जी, छंदों पर उत्कृष्ट टिप्पणी से उत्साहवर्धन हेतु आभार ।"
16 hours ago
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"आ. भाई छोटलाल जी, रचना पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए  हार्दिक धन्यवाद ।"
16 hours ago
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"आ. भाई आरिफ जी, उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद । छंदों को संशोधित किया है उस पर भी राय दें ।"
18 hours ago
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"आ. भाई तस्दीक अहमद जी, स्नेह व मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार । संशोधन इस प्रकार किया है प्रतिक्रिया दें - सदा भोर  में माँ मुझे  है  जगाती नहाना  बड़ा  लाभ  देता  बताती अगर शीत  हो नीर तो  है तपाती…"
18 hours ago
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"आ. भाई सुरेंद्र जी , सुंदर छंद हुए हार्दिक बधाई ।"
19 hours ago
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"आ. भाई शेख शहजाद जी, सुंदर प्रस्तुति हुई है । हार्दिक बधाई ।"
19 hours ago
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"आ. मंच पर उपस्थिति और प्रयास के लिए हार्दिक बधाई ।"
20 hours ago
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"आ. भाई तस्दीक अहमद जी, दोनों छंदो में उत्कृष्ट रचनाएँ हुई हैं । हार्दिक बधाई ।"
20 hours ago
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"भुजंग प्रयात छन्द (122 -122-122-122) सदा भोर  में माँ मुझे  है  जगाती नहाना  बड़ा  लाभ  देता  बताती अगर शीत जल हो उसे है तपाती बड़े  लाड़ से तब खुले में बिठाती बड़े प्यार से बोल कर वो दुलारा उढ़ेला करे …"
21 hours ago
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"बहुत खूब..."
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"आ. भाई अखिलेश जी, प्रदत्त विषय पर सुंदर छंद हुए है हार्दिक बधाई ।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post काल कोठरी
"आ. भाई विजय जी, बेहतरीन रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
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Profile Information

Gender
Male
City State
Delhi
Native Place
Dharchaula,uttarakhand
Profession
teaching

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Blog

दाग कितने नित लगाओगे वतन के भाल पर -- (गजल)-- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२१२२ २१२२ २१२२ २१२



खूब नजरें  जो  गढ़ाये  हैं  पराये  माल पर

है भरोसा खूब उनको दोस्तो घड़ियाल पर।१।



भूख बेगारी औ'  नफरत है पसारे पाँव बस

अब भगत आजाद रोते हैं वतन के हाल पर ।२।



आज सम्मोहन  कला  हर नेता को आने लगी

है फिदा जनता यहाँ की हर सियासी चाल पर।३।



खुद  पहन  खादी  चमकते पूछता हूँ आप से

दाग कितने नित लगाओगे वतन के भाल पर।४।



ऐसा होता तो सुधर  जाते  सभी हाकिम यहाँ

वक्त जड़ता पर कहाँ है अब तमाचा गाल…

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Posted on February 11, 2018 at 10:25pm — 8 Comments

फितरत नहीं छिपती है - (गजल)- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२२१ १२२२ २२१ १२२२



नफरत के बबूलों को आँगन में उगाओ मत

पाँवों में स्वयं के अब यूँ शूल चुभाओ मत।१।



ऐसा न हो यारों फिर बन जायें विभीषण वो

यूँ दम्भ में इतना भी अपनों काे सताओ मत।२।



फितरत नहीं छिपती है कैसे भी मुखौटे हों

समझो तो मुखौटे अब चेहरों पे लगाओ मत।३।



माना कि तमस देता तकलीफ बहुत लेकिन

घर को ही जला डाले वो दीप जलाओ मत।४।



ढकने को कमी अपनी आजाद बयानों पर

फतवों के मेरे  हाकिम  पैबंद  लगाओ…

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Posted on February 1, 2018 at 6:00am — 15 Comments

शीत के दोहे - लक्ष्मण धामी ' मुसाफिर'

शीत के दोहे



बालापन सा हो गया, चहुँदिश तपन अतीत

यौवन सा ठिठुरन लिए, लो आ पहुँची शीत।१।



मौसम बैरी  हो  गया, धुंध ढके हर रूप

कैसै देखे अब भला, नित्य धरा को धूप।२।



शीत लहर के तीर नित, जाड़ा छोड़े खूब

नभ  के  उर  में  पीर  है, आँसू  रोती दूब।३।



हाड़  कँपाती  ठंड  से , सबका  ऐसा हाल

तनमन मागे हर समय, कम्बल स्वेटर शॉल।४।



शीत लहर फैला रही, जाने क्या क्या बात

दिन घूँघट  में  फिर रहा, थरथर काँपे रात।५।



लगी…

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Posted on January 8, 2018 at 7:27am — 8 Comments

नए साल के दोहे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

विपदा  से  हारो  नहीं,  झेलो  उसे  सहर्ष

नित्य खुशी औ' प्यार से, बीते यह नववर्ष।१।



नभ मौसम सागर सभी, कृपा  करें  अपार

जनजीवन पर ना पड़े, विपदाओं की मार।२।



इंद्रधनुष के  रंग सब, बिखरे हों हर बाग

नये वर्ष में मिट सके, भेद भाव का दाग।३।



खुशियों का मकरंद हो, हर आँगन हर द्वार

हो  सब  में  सदभावना, जीने  का  आधार।४।



विदा  है  बीते  साल को, अभिनंदन नव वर्ष

ऋद्धि सिद्धि सुख…

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Posted on January 4, 2018 at 8:00am — 12 Comments

Comment Wall (9 comments)

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At 5:20pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
शुक्रिया लक्ष्मण जी
At 7:27pm on March 10, 2016, TEJ VEER SINGH said…

हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण धामी जी!आपने मुझे इस क़ाबिल समझा!

At 4:26pm on April 2, 2015, gumnaam pithoragarhi said…
लक्ष्मण धामी जी नमस्कार शुक्रिया आपने मुझे ये सम्मान दिया क्या मैं आपसे बात कर सकता हूँ यदि आप चाहें तो ................ मेरा नंबर ये है ,,,,,,,,,,7579 100213.........क्या आप अपना नंबर देंगे ?
At 10:37pm on February 17, 2015,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

भाई लक्ष्मण धामीजी, यदि संभव हो तो 18 फरवरी को भी भेंट हो सकती है. मैं 18 फरवरी को भी प्रगति मैदान के पुस्तक मेले में उपस्थित रहूँगा.
शुभ-शुभ

At 6:34am on July 9, 2014, gumnaam pithoragarhi said…
माह के सक्रिय सदस्य के रूप में चयनित होने पर हार्दिक बधाई और शुभकामना
sir main pithoragarh se hoon achchha laga ki aap bhi dharchula se hain ............................... ek baar fir badhai ,,,,,,,,,
At 2:53pm on July 8, 2014, Sushil Sarna said…

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी माह के सक्रिय सदस्य के रूप में चयनित होने पर हार्दिक बधाई और शुभकामना 

At 2:27pm on July 8, 2014, Nilesh Shevgaonkar said…

बधाई 

At 2:21pm on July 8, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
आदरणीय लक्ष्मण धामी जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन
At 6:53am on October 23, 2013, लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' said…

सभी प्रबुद्ध जानो को नमन एवं सुझावों के लिए हार्दिक धन्यवाद . अभी ग़ज़ल शाश्त्र से सम्पूर्ण तौर पर अनभिज्ञ हूँ . पर समझने का प्रयास भी कर रहा हूँ . आप सभी से निवेदन है कि मार्गदर्शन करते रहें .

 
 
 

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"बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' साहिब।"
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