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Rahul Dangi
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"बहुत सुन्दर ग़ज़ल हुई है भाई जी"
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Rahul Dangi commented on Rahul Dangi's blog post ग़ज़ल-खुदकुशी बेहतर है ऐ दिल बेवफ़ा के साथ से
"शुक्रिया आदरणीय लक्ष्मण जी"
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Rahul Dangi commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल -14( खुदा की सारी रहमत इश्क के आँचल में रहती है)
"बहुत सुन्दर "
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Rahul Dangi commented on Rahul Dangi's blog post ग़ज़ल - तैश में आकर चला उनसे बिछडने के लिए ।
"राज़ साहब व जनाब नारायण जी शुक्रिया "
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Rahul Dangi commented on Rahul Dangi's blog post ग़ज़ल - तैश में आकर चला उनसे बिछडने के लिए ।
"जनाब समर साहब शुक्रिया सही कहा ईता पर ध्यान ही नहीं गया बहुत दिनों बाद कलम उठाई है कोशिश करता हूँ ।आप भी कुछ काफिया सुझाइये"
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Samar kabeer commented on Rahul Dangi's blog post ग़ज़ल - तैश में आकर चला उनसे बिछडने के लिए ।
"जनाब राहुल डांगी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,लेकिन पूरी ग़ज़ल में क़ाफ़िया दोष है,देखियेगा ।"
Wednesday
Shyam Narain Verma commented on Rahul Dangi's blog post ग़ज़ल - तैश में आकर चला उनसे बिछडने के लिए ।
"आदरणीय राहुल डांगी जी , बेहद उम्दा ...बहुत बहुत बधाई आप को | सादर"
Wednesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Rahul Dangi's blog post ग़ज़ल-खुदकुशी बेहतर है ऐ दिल बेवफ़ा के साथ से
"आ. भाई राहुल जी, अच्छी गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
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राज़ नवादवी commented on Rahul Dangi's blog post ग़ज़ल - तैश में आकर चला उनसे बिछडने के लिए ।
"आदरणीय राहुल डांगी साहब, आदाब. सुन्दर ग़ज़ल की प्रस्तुति के लिए दाद के साथ मुबारकबाद. सादर "
Wednesday
Rahul Dangi commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ७७
"अच्छी ग़ज़ल के लिए बधाई विशेष तौर पर 2 व 11 वें शे'र के लिए वाह "
Tuesday
Rahul Dangi commented on Rahul Dangi's blog post ग़ज़ल-खुदकुशी बेहतर है ऐ दिल बेवफ़ा के साथ से
"बहुत बहुत शुक्रिया जनाब राज़ नवाजना साहब"
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Rahul Dangi commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल इस्लाह के लिए मनोज अहसास
"ग़ज़ल के प्रयास के लिए बहुत बहुत बधाई जनाब  मनोज  अहसास जी लहजे में अब वो प्यार का जादू नहीं रहामुझको मेरे मिजाज पर काबू नहीं रहा (पर को पे लिख लीजिए बह्र ठीक हो जाएगी)  दिल से मुझे निकाल कर वो पूछने लगे( यहाँ भी कर को के…"
Tuesday
राज़ नवादवी commented on Rahul Dangi's blog post ग़ज़ल-खुदकुशी बेहतर है ऐ दिल बेवफ़ा के साथ से
"आदरणीय राहुल डांगी साहब, आदाब. सुन्दर ग़ज़ल की प्रस्तुति पे हार्दिक बधाई. सादर. "
Dec 3
Rahul Dangi posted a blog post

ग़ज़ल-खुदकुशी बेहतर है ऐ दिल बेवफ़ा के साथ से

2122 2122 2122 212खुदकुशी बेहतर है ऐ दिल बेवफ़ा के साथ से चाहो मत बढकर किसी को चाह की औकात से।जिसकी ख़ातिर छोड़ दी दुनिया की सारी दौलतें रख न पाया मन भी मेरा वो दो मीठी बात से ।दे रहा है तुहमतें उल्टा मुझे ही बेवफ़ा  बेहया से क्या कहूँ मैं, क्या कहूँ इस जात से।मैं समझता था मुहब्बत की सभी को हैं तलब उसको तो मतलब है लेकिन और कोई बात से।हैं मुसलसल शिद्दतें कुछ यूँ जुदाई की सनम छूटने ही वाला है अब हाथ तेरे हाथ से।मौलिक व अप्रकाशित ।See More
Dec 3
Rahul Dangi commented on Rahul Dangi's blog post ग़ज़ल-खुदकुशी बेहतर है ऐ दिल बेवफ़ा के साथ से
"बहुत बहुत शुक्रिया जनाब समर साहब"
Dec 2

Profile Information

Gender
Male
City State
Baraut(UP)
Native Place
Ranchhar
Profession
Delhi police
About me
muje duniya m rahne ke taur tarike nh aate! pta ni kyu?

Comment Wall (9 comments)

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At 12:12pm on January 9, 2017,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
आदरणीय राहुल दांगी जी, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन के अवसर पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें।
At 5:02pm on July 28, 2015, Harash Mahajan said…

आदरणीय Rahul Dangi जी आपका  बहुत बहुत शुक्रिया |उम्मीद है आप सभी का साथ यूँ ही बना रहेगा |

At 11:13pm on November 20, 2014,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

आदरणीय राहुलजी, आपका प्रश्न एक दम समीचीन और सही है. प्रथम दृष्ट्या आत और आथ क़ाफ़िया नहीं बन सकते. लेकिन हो सकता है कि राहत इन्दौरी के जिस मतले पर आपने शेर उद्धृत किया है वह किसी और ग़ज़ल का शेर हो. या, उर्दू के हिसाब से उन अक्षरों की वर्तनी अलग ढंग की हो. और वहाँ मान्य हो. जो हिन्दी में वैसी नहीं है.
सादर

At 12:36pm on November 9, 2014,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

भाई राहुल दांगीजी, आपसे मेरा अनुरोध है, कि आप पहले गीत-नवगीत/ गेय कवितायें पढ़ें.
इस पटल पर भी प्रबुद्ध रचनाकारों के अनेक गीत-नवगीत उपलब्ध हैं. उसके बाद आप कुछ नया लिख कर दिखायें.

शुभेच्छायें...

At 9:47am on November 9, 2014,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

आदरणीय राहुल दांगीजी,  आप गीतों से सम्बन्धित अक्सर प्रश्न करते हैं. आप अपनी शंकाओं के समाधान के लिए उत्सुक हैं यह जानना इस तथ्य से आश्वस्त करता है कि आप अपनी जानकारियों को लेकर आग्रही हैं. यह एक शुभ संकेत है. क्यों कि आपने गीत नहीं लिखे हैं तो आपके अंदर का रचनाकार / गीतकार गीतकर्म को लेकर उपयुक्त वातावरण बना रहा है. आप अवश्य अच्छे मनोनुकूल गीत प्रस्तुतकर पायेंगे.
इस संदर्भ में आपके प्रश्नों पर कुछ कहने के पूर्व मेरा विनम्र सुझाव यही होगा है कि सर्वप्रथम आप गीत और गेय कविताओं को खूब पढ़ें. गीतों के मात्रिक या वैधानिक विन्यास को समझने के पूर्व आप साहित्य में उपलब्ध गीतों और गेय रचनाओं के मर्म को समझने का प्रयास करें. उसके बाद, आप गीतकर्म करें. उन गीतों को पटल पर प्रस्तुत करें. स्वीकृत हो गयी रचनाओं पर टिप्पणियाँ आयेंगी. वे आपके रचनाकर्म के लिए मार्गदर्शन का काम करेंगी.
गीत रचना शिल्प और कोमल भावनाओं के संप्रेषण का अद्भुत तथा अद्वितीय साहित्यिक कर्म है.
विश्वास है, मेरा कहना आपकीउत्सुकता को कुछ आधार दे पायेगा.
शुभेच्छायें

At 8:07pm on November 7, 2014, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…
दांगी जी
आपने गीत के बारे में जानकारी चाही है i पर गीत को चंद शब्दो में बता पाना संभव नहीं है i इसके लिए एक लम्बे लेख की आवश्यकता है i फिर भी संक्षेप में जान ले कि गीत में एक पंक्ति टेक की होती है जो बार बार हर परवर्ती स्टेंजा के बाद दोहराई जाती है i गीत में कोई बंधन नहीं होता आप अपने हिसाब से मुक्त छंद बना सकते है iपर गीत का आवश्यक तत्व यह है कि इसमें गेयता होनी चाहिये i जितना सुन्दर गान होगा उतनी ही सुन्दर रचना होगी i गजल की तरह गीत में किसी बह्र या बंधन की अपेक्षा नहीं है i आप् पूर्ण स्वतंत्र है पर जो भी मुक्त छान्द आप रचते है सभी छंद उसी तरह के हों i सादर i
At 6:57pm on November 7, 2014, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…
Rahul jee
welcome . Sir.
At 1:14pm on November 7, 2014,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…
आदरणीय राहुल डांगी साहब, आपका फ्रेण्ड रिक्वेस्ट मिला. आप अपने प्रोफ़ाइल में अपना हालिया फोटो लगा दें आदरणीय.
सादर
At 7:17pm on October 27, 2014, Rahul Dangi said…
आदरणीय addmin जी विन्रम निवेदन है!

मै पहले की तरह गजल की क्लाश के शुरुआती प्रष्ठ नहीं पढ़ पा रहा हुँ !
आदरणीय मेरी समस्या का समाधान करें!
पुलिस की नौकरी होने की वजह से मैं चर्चा में समय देने से विवश हो जाता हुँ!

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ग़ज़ल-खुदकुशी बेहतर है ऐ दिल बेवफ़ा के साथ से

2122 2122 2122 212

खुदकुशी बेहतर है ऐ दिल बेवफ़ा के साथ से

चाहो मत बढकर किसी को चाह की औकात से।

जिसकी ख़ातिर छोड़ दी दुनिया की सारी दौलतें

रख न पाया मन भी मेरा वो दो मीठी बात से ।

दे रहा है तुहमतें उल्टा मुझे ही बेवफ़ा 

बेहया से क्या कहूँ मैं, क्या कहूँ इस जात से।

मैं समझता था मुहब्बत की सभी को हैं तलब

उसको तो मतलब है लेकिन और कोई बात से।

हैं मुसलसल शिद्दतें कुछ यूँ जुदाई की…

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Posted on December 1, 2018 at 3:30pm — 6 Comments

ग़ज़ल- बूँद भर जल के लिए लिपटा हूँ काँटों की कली से।

2122 2122 2122 2122


इस कदर बेबस हूँ मैं, लाचार हूँ इस ज़िन्दगी से
दोस्तों, मर भी नहीं सकता अभी, अपनी खुशी से।

क्या कहूँ, अपने लिए कुछ, दूसरों के वास्ते कुछ
कायदे तुमने लिखे है सोच बेहद दोगली से।

वक्त उन माँ-बाप को भी दे जरा, तेरे लिए
जो उभर पाये नहीं ताउम्र अपनी मुफ़लिसी से।

इश्क़ के सहरा में 'राहुल' प्यास से बदहाल यूँ हूँ
बूँद भर जल के लिए लिपटा हूँ काँटों की कली से।

मौलिक व अप्रकाशित ।

Posted on November 25, 2018 at 12:00pm — 6 Comments

ग़ज़ल- दर्द की क्या कहूँ ये धडकन है

२१२२ १२१२ २२
दर्द की क्या कहूँ ये धडकन है।
दिल में घर है जिगर में आँगन है।

तुम न समझो तो क्या करे कोई।
मेरे मन में तुम्हारी उलझन है।

तुम जमाने की सुन के मत रूठो।
ये जमाना तो सिर्फ दुश्मन है।

क्या अजब रोग है मुहब्बत भी।
दिल की राहत ही दिल की तडपन है।

इसमें उसकी खता नहीं ' राहुल' ।
मेरी किस्मत की मुझसे अनबन है।

मौलिक व अप्रकाशित ।

Posted on June 12, 2016 at 9:07am — 2 Comments

ग़ज़ल- काम आईँ नही दवाएँ क्यूँ

2122 1212 22



बेअसर हो गईं दवाएँ क्यूँ

काम आईं नहीं दुआएँ क्यूँ



हम ग़लत फ़हमियों में आएँ क्यूँ

दोस्त है वो तो आज़माएँ क्यूँ



आँख तक आँसुओं को लाएँ क्यूँ

ज़ब्त की एहमियत गिराएँ क्यूँ



साँस दर साँस एक ही सरगम

दूसरा गीत गुनगुनाएँ क्यूँ



जिसके सीने में दिल हो पत्थर का

उसकी चौखट पे गिडगिडाएँ क्यूँ



वक्त आने पे जान जाएगा

इश्क़ क्या है उसे बताएँ क्यूँ



हो गईं क्या समाअतें कमज़ोर

कोई सुनता नहीं सदाएँ…

Continue

Posted on May 16, 2016 at 12:00am — 12 Comments

 
 
 

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