For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Rahul Dangi Panchal
  • Male
  • delhi
  • India
Share

Rahul Dangi Panchal's Friends

  • Manoj kumar Ahsaas
  • Samar kabeer
  • Hari Prakash Dubey
  • somesh kumar
  • डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव
  • लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
  • शिज्जु "शकूर"
  • Dr Ashutosh Mishra
  • Harash Mahajan
  • rajesh kumari
  • Ram Awadh VIshwakarma
  • मिथिलेश वामनकर
  • Tilak Raj Kapoor
  • वीनस केसरी
  • धर्मेन्द्र कुमार सिंह
 

Rahul Dangi Panchal's Page

Latest Activity

Profile Information

Gender
Male
City State
Delhi
Native Place
Ranchhar (Baghpat) U.P.
Profession
Delhi police

Comment Wall (9 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 12:12pm on January 9, 2017,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
आदरणीय राहुल दांगी जी, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन के अवसर पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें।
At 5:02pm on July 28, 2015, Harash Mahajan said…

आदरणीय Rahul Dangi जी आपका  बहुत बहुत शुक्रिया |उम्मीद है आप सभी का साथ यूँ ही बना रहेगा |

At 11:13pm on November 20, 2014,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

आदरणीय राहुलजी, आपका प्रश्न एक दम समीचीन और सही है. प्रथम दृष्ट्या आत और आथ क़ाफ़िया नहीं बन सकते. लेकिन हो सकता है कि राहत इन्दौरी के जिस मतले पर आपने शेर उद्धृत किया है वह किसी और ग़ज़ल का शेर हो. या, उर्दू के हिसाब से उन अक्षरों की वर्तनी अलग ढंग की हो. और वहाँ मान्य हो. जो हिन्दी में वैसी नहीं है.
सादर

At 12:36pm on November 9, 2014,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

भाई राहुल दांगीजी, आपसे मेरा अनुरोध है, कि आप पहले गीत-नवगीत/ गेय कवितायें पढ़ें.
इस पटल पर भी प्रबुद्ध रचनाकारों के अनेक गीत-नवगीत उपलब्ध हैं. उसके बाद आप कुछ नया लिख कर दिखायें.

शुभेच्छायें...

At 9:47am on November 9, 2014,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

आदरणीय राहुल दांगीजी,  आप गीतों से सम्बन्धित अक्सर प्रश्न करते हैं. आप अपनी शंकाओं के समाधान के लिए उत्सुक हैं यह जानना इस तथ्य से आश्वस्त करता है कि आप अपनी जानकारियों को लेकर आग्रही हैं. यह एक शुभ संकेत है. क्यों कि आपने गीत नहीं लिखे हैं तो आपके अंदर का रचनाकार / गीतकार गीतकर्म को लेकर उपयुक्त वातावरण बना रहा है. आप अवश्य अच्छे मनोनुकूल गीत प्रस्तुतकर पायेंगे.
इस संदर्भ में आपके प्रश्नों पर कुछ कहने के पूर्व मेरा विनम्र सुझाव यही होगा है कि सर्वप्रथम आप गीत और गेय कविताओं को खूब पढ़ें. गीतों के मात्रिक या वैधानिक विन्यास को समझने के पूर्व आप साहित्य में उपलब्ध गीतों और गेय रचनाओं के मर्म को समझने का प्रयास करें. उसके बाद, आप गीतकर्म करें. उन गीतों को पटल पर प्रस्तुत करें. स्वीकृत हो गयी रचनाओं पर टिप्पणियाँ आयेंगी. वे आपके रचनाकर्म के लिए मार्गदर्शन का काम करेंगी.
गीत रचना शिल्प और कोमल भावनाओं के संप्रेषण का अद्भुत तथा अद्वितीय साहित्यिक कर्म है.
विश्वास है, मेरा कहना आपकीउत्सुकता को कुछ आधार दे पायेगा.
शुभेच्छायें

At 8:07pm on November 7, 2014, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…
दांगी जी
आपने गीत के बारे में जानकारी चाही है i पर गीत को चंद शब्दो में बता पाना संभव नहीं है i इसके लिए एक लम्बे लेख की आवश्यकता है i फिर भी संक्षेप में जान ले कि गीत में एक पंक्ति टेक की होती है जो बार बार हर परवर्ती स्टेंजा के बाद दोहराई जाती है i गीत में कोई बंधन नहीं होता आप अपने हिसाब से मुक्त छंद बना सकते है iपर गीत का आवश्यक तत्व यह है कि इसमें गेयता होनी चाहिये i जितना सुन्दर गान होगा उतनी ही सुन्दर रचना होगी i गजल की तरह गीत में किसी बह्र या बंधन की अपेक्षा नहीं है i आप् पूर्ण स्वतंत्र है पर जो भी मुक्त छान्द आप रचते है सभी छंद उसी तरह के हों i सादर i
At 6:57pm on November 7, 2014, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…
Rahul jee
welcome . Sir.
At 1:14pm on November 7, 2014,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…
आदरणीय राहुल डांगी साहब, आपका फ्रेण्ड रिक्वेस्ट मिला. आप अपने प्रोफ़ाइल में अपना हालिया फोटो लगा दें आदरणीय.
सादर
At 7:17pm on October 27, 2014, Rahul Dangi Panchal said…
आदरणीय addmin जी विन्रम निवेदन है!

मै पहले की तरह गजल की क्लाश के शुरुआती प्रष्ठ नहीं पढ़ पा रहा हुँ !
आदरणीय मेरी समस्या का समाधान करें!
पुलिस की नौकरी होने की वजह से मैं चर्चा में समय देने से विवश हो जाता हुँ!

Rahul Dangi Panchal's Blog

ग़ज़ल-बेहयाई दफ़्न कर देगी किसी की शायरी।

2122 2122 2122 212



काँच के टुकडों में दे दे ज्यों कोई बच्चा मणी

आधुनिकता में कहीं खोया तो है कुछ कीमती।

हुस्न की हर सू नुमाइश़ चल रही है जिस तरह

बेहयाई दफ़्न कर देगी किसी की शायरी।

ताश, कन्चें, गुड्डा, गुड़िया छीन के घर मिट्टी के

लाद दी हैं मासुमों पर रद्दियों की टोकरी।

अब कहाँ हैं गाँव में वें पेड़ मीठे आम के

वे बया के घोसलें, वे जुगनुओं की रौशनी।

ले गयी सारी हया पश्चिम से आती ये हवा…

Continue

Posted on December 17, 2018 at 9:00pm — 6 Comments

ग़ज़ल -प्यार के बिन प्यार अपने आप घटता सा गया।

2122 2122 2122 212



रोज के झगड़े, कलह से दिल अब उकता सा गया।

प्यार के बिन प्यार अपने आप घटता सा गया।



दफ़्न कर दी हर तमन्ना, हर दफ़ा,जब भी उठी

बारहा इस हादसे में रब्त पिसता सा गया।



रोज ही झगड़े किये, रोज ही तौब़ा किया

रफ़्ता रफ़्ता हमसे वो ऐसे बिछड़ता सा गया।

चाहकर भी कुछ न कर पाये अना के सामने

हाथ से दोनों ही के रिश्ता फिसलता सा गया।



छोडकर टेशन सनम को लब तो मुस्काते रहें

प्यार का मारा हमारा दिल तड़पता…

Continue

Posted on December 16, 2018 at 8:30pm — 4 Comments

ग़ज़ल-खुदकुशी बेहतर है ऐ दिल बेवफ़ा के साथ से

2122 2122 2122 212

खुदकुशी बेहतर है ऐ दिल बेवफ़ा के साथ से

चाहो मत बढकर किसी को चाह की औकात से।

जिसकी ख़ातिर छोड़ दी दुनिया की सारी दौलतें

रख न पाया मन भी मेरा वो दो मीठी बात से ।

दे रहा है तुहमतें उल्टा मुझे ही बेवफ़ा 

बेहया से क्या कहूँ मैं, क्या कहूँ इस जात से।

मैं समझता था मुहब्बत की सभी को हैं तलब

उसको तो मतलब है लेकिन और कोई बात से।

हैं मुसलसल शिद्दतें कुछ यूँ जुदाई की…

Continue

Posted on December 1, 2018 at 3:30pm — 6 Comments

ग़ज़ल- बूँद भर जल के लिए लिपटा हूँ काँटों की कली से।

2122 2122 2122 2122


इस कदर बेबस हूँ मैं, लाचार हूँ इस ज़िन्दगी से
दोस्तों, मर भी नहीं सकता अभी, अपनी खुशी से।

क्या कहूँ, अपने लिए कुछ, दूसरों के वास्ते कुछ
कायदे तुमने लिखे है सोच बेहद दोगली से।

वक्त उन माँ-बाप को भी दे जरा, तेरे लिए
जो उभर पाये नहीं ताउम्र अपनी मुफ़लिसी से।

इश्क़ के सहरा में 'राहुल' प्यास से बदहाल यूँ हूँ
बूँद भर जल के लिए लिपटा हूँ काँटों की कली से।

मौलिक व अप्रकाशित ।

Posted on November 25, 2018 at 12:00pm — 6 Comments

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

dandpani nahak commented on dandpani nahak's blog post ग़ज़ल 2122 1212 22
"आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर ' साहब आदाब आपका बहुत बहुत शुक्रिया आपने 'मुआहिदा ' से…"
2 hours ago
Chetan Prakash commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (निगलते भी नहीं बनता उगलते भी नहीं बनता)
"अच्छी ग़ज़ल हुई, 'अमीर' साहब, बधाई ! हाँ, मतला, आपका अतिरिक्त ध्यान माँगता लगता है, शायद,…"
3 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (निगलते भी नहीं बनता उगलते भी नहीं बनता)
"मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद, सुख़न नवाज़ी, हौसला अफ़ज़ाई और तनक़ीद के लिए बेहद…"
4 hours ago
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post दरवाजा (लघुकथा)
"आदरणीय तेजवीर सिंह जी हौसला बढ़ाने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।जी सही कहा आपने। आगे से ध्यान…"
6 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on Rachna Bhatia's blog post दरवाजा (लघुकथा)
"हार्दिक बधाई आदरणीय रचना भाटिया जी।बहुत सुंदर संदेश प्रद लघुकथा।आपकी लघुकथा का प्रथम वाक्य दो…"
7 hours ago
Saarthi Baidyanath updated their profile
9 hours ago
Rachna Bhatia commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (निगलते भी नहीं बनता उगलते भी नहीं बनता)
"आदरणीय अमीरुद्दीन'अमीर'जी आदाब। बेहतरीन ग़ज़ल हुई।बधाई। आदरणीय दूसरे शे'र में…"
10 hours ago
Rachna Bhatia posted a blog post

दरवाजा (लघुकथा)

" माँ,रोटी पर मक्खन तो रखा नहीं।हाँ,देती हूँ।" बेटे की रोटी पर मक्खन रखते हुए अचानक बर्तन माँजती…See More
15 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

गुज़रे हुए मौसम, ,,,

गुज़रे हुए मौसम, ,,,अन्तहीन सफ़र तुम और मैं जैसे ख़ामोश पथिक अनजाने मोड़ अनजानी मंजिल कसमसाती…See More
15 hours ago
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की साहित्य-संध्या माह सितंबर 2020 : एक प्रतिवेदन - नमिता सुंदर

 ओबीओ लखनऊ चैप्टर की ऑनलाइन मासिक साहित्य-संध्या, 20 सितंबर 2020 को अपराह्न 3 बजे प्रारंभ हुई । इस…See More
15 hours ago
मोहन बेगोवाल posted a blog post

बुआ का घर (लघुकथा )

वाहन मुख्य सड़क से उस गांव की सड़क पर आ गया, जिसे सर्वेक्षण के लिए चुना गया था।सारे राज में सरकार…See More
15 hours ago
Dr. Vijai Shanker posted a blog post

क्षणिकाएं — डॉ0 विजय शंकर

वाह जनतंत्र , कुर्सी स्वतंत्र , आदमी परतंत्र। कल कुर्सी पर था तो स्वतंत्र था , आज हट गया , परतंत्र…See More
15 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service