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धर्मेन्द्र कुमार सिंह
  • Male
  • BIlaspur, HP
  • India
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धर्मेन्द्र कुमार सिंह's Discussions

बहर सारिणी
7 Replies

ग़ज़ल की बहरें समझना बहुत टेढ़ी खीर है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि बहर के बारे में जानकारी तो बहुत ज्यादा मिल जाती है अंतर्जाल पर पर कहीं भी व्यवस्थित ढंग से नहीं मिलती। तो जहाँ सूचना ज्यादा हो वहाँ उसको…Continue

Started this discussion. Last reply by Admin Jan 30, 2011.

 

धर्मेन्द्र कुमार सिंह's Page

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धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post कविता : शून्य बटा शून्य
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय लक्ष्मण धामी जी"
Apr 11
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post कविता : शून्य बटा शून्य
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय समर कबीर साहब"
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धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post कविता : शून्य बटा शून्य
"बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह जी"
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धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post लोकतंत्र (लघुकथा)
"बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज' जी"
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धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post लोकतंत्र (लघुकथा)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय रवि प्रभाकर जी"
Apr 11
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post लोकतंत्र (लघुकथा)
"जनाब Sheikh Shahzad Usmani साहब मैं स्वयं ओबीओ मंच पर लघुकथा का विद्यार्थी हूँ। अभी तक केवल आठ-दस लघुकथाएँ ही लिख पाया हूँ जो यहाँ ओबीओ पर ही मौज़ूद हैं। लघुकथा की सराहना के लिये तह-ए-दिल से आपका शुक्रगुजार हूँ।"
Apr 11
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post लोकतंत्र (लघुकथा)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय लड़ीवाला जी"
Apr 11
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post लोकतंत्र (लघुकथा)
"बहुत बहुत शुक्रिया जनाब समर कबीर साहब"
Apr 11
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post लोकतंत्र (लघुकथा)
"बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय गोपाल नारायण जी"
Apr 11
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post लोकतंत्र (लघुकथा)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय तेजवीर सिंह जी"
Apr 11
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post लोकतंत्र (लघुकथा)
"वाह आदरणीय क्या शानदार कटाक्ष किया है..वाकई में लोकतंत्र आजकल बड़ा दुखदाई प्रतीत हो रहा है..."
Apr 8
Ravi Prabhakar commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post लोकतंत्र (लघुकथा)
"वाह! बहुत ही सधी और शानदार लघुकथा है भाई धर्मेन्‍द्र जी । आपकी कल्‍पना शक्‍ित की दाद देता हूं भाई जी । लघुकथा का शीर्षक ही सब कुछ बयां कर रहा है । बधाई स्‍वीकार करें ।"
Apr 7
Sheikh Shahzad Usmani commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post लोकतंत्र (लघुकथा)
"गांव/लोकतंत्र और जनता अंधे/गूंगे/बहरे /पूरी तरह से स्वस्थ दौड़ सकने वाले के प्रतीकों/बिम्बों में दिग्भ्रमित देशवासियों और दिग्भ्रमित प्रशासकों पर गहरे कटाक्ष करती मार्गदर्शक सृजन के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद और आभार आदरणीय धर्मेंद्र कुमार…"
Apr 6
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post लोकतंत्र (लघुकथा)
" बहुत के आधार पर लोकतंत्र पर तंज करते सुंदर लघु कथा "
Apr 5
Samar kabeer commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post लोकतंत्र (लघुकथा)
"जनाब धर्मेन्द्र जी आदाब,अच्छी लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Apr 5
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post लोकतंत्र (लघुकथा)
"बेहतरीन आ० धर्मेन्द्र जी . लोकतंत्र की बिडम्बना पर आपका यह तंज सराहनीय है . "
Apr 5

Profile Information

Gender
Male
City State
बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश
Native Place
प्रतापगढ़
Profession
अभियांत्रिकी

धर्मेन्द्र कुमार सिंह's Blog

लोकतंत्र (लघुकथा)

एक गाँव में कुछ लोग ऐसे थे जो देख नहीं पाते थे, कुछ ऐसे थे जो सुन नहीं पाते थे, कुछ ऐसे थे जो बोल नहीं पाते थे और कुछ ऐसे भी थे जो चल नहीं पाते थे। उस गाँव में केवल एक ऐसा आदमी था जो देखने, सुनने, बोलने के अलावा दौड़ भी लेता था। एक दिन ग्रामवासियों ने अपना नेता चुनने का निर्णय लिया। ऐसा नेता जो उनकी समस्याओं को जिलाधिकारी तक सही ढंग से पहुँचा कर उनका समाधान करवा सके।

जब चुनाव हुआ तो अंधों ने अंधे को, बहरों ने बहरे को, गूँगों ने गूँगे को और लँगड़ों ने एक लँगड़े को वोट दिया। जो…

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Posted on April 4, 2018 at 9:11pm — 14 Comments

कविता : शून्य बटा शून्य

उसने कहा 2=3 होता है

 

मैंने कहा आप बिल्कुल गलत कह रहे हैं

 

उसने लिखा 20-20=30-30

फिर लिखा 2(10-10)=3(10-10)

फिर लिखा 2=3(10-10)/(10-10)

फिर लिखा 2=3

 

मैंने कहा शून्य बटा शून्य अपरिभाषित है

आपने शून्य बटा शून्य को एक मान लिया है

 

उसने कहा ईश्वर भी अपरिभाषित है

मगर उसे भी एक माना जाता है

 

मैंने कहा इस तरह तो आप हर वह बात सिद्ध कर देंगे

जो आपके फायदे की है

 

उसने…

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Posted on February 1, 2018 at 8:45pm — 6 Comments

ग़ज़ल : बरसेगा तेज़ाब एक दिन बादल से

बह्र : २२ २२ २२ २२ २२ २

आह निकलती है यह कटते पीपल से

बरसेगा तेज़ाब एक दिन बादल से

 

माँगे उनसे रोज़गार कैसे कोई

भरा हुआ मुँह सबका सस्ते चावल से

 

क़ै हो जाएगी इसके नाज़ुक तन पर

कैसे बनता है गर जाना मखमल से

 

गाँव, गली, घर साफ नहीं रक्खोगे गर

ख़ून चुसाना होगा मच्छर, खटमल से

 

थे चुनाव पहले के वादे जुम्ले यदि

तब तो सत्ता पाई है तुमने छल से

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Posted on November 10, 2017 at 2:38pm — 4 Comments

बिना तुम्हारे, हे मेरी तुम, सब आधा है (नवगीत)

बिना तुम्हारे

हे मेरी तुम

सब आधा है

 

सूरज आधा, चाँद अधूरा

आधे हैं ग्रह सारे

दिन हैं आधे, रातें आधी

आधे हैं सब तारे

 

जीवन आधा

दुनिया आधी

रब आधा है

 

आधा नगर, डगर है आधी

आधे हैं घर, आँगन

कलम अधूरी, आधा काग़ज़

आधा मेरा तन-मन

 

भाव अधूरे

कविता का

मतलब आधा है

 

फागुन आधा, मधुऋतु आधी

आया आधा सावन

आधी साँसें, आधा है दिल

आधी है…

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Posted on February 9, 2017 at 9:39am — 10 Comments

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At 12:19am on September 23, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय बड़े भाई  धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी, 

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 8:41pm on September 22, 2013, जितेन्द्र पस्टारिया said…

" जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें " आदरणीय धर्मेन्द्र जी

At 11:20am on September 22, 2013,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

At 10:23pm on December 13, 2012, seema agrawal said…

स्वागत है धर्मेन्द्र जी 

At 6:18pm on September 22, 2012,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

At 10:06am on September 22, 2012,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

भाई धर्मेन्द्रजी, 

सरल, सफल, सहज, सुगढ़
सुफल, सुमिल, सुधी
सस्वर.. .
संयत, सुहृद, सुभाव, सशब्द
संभव सदा
सबल-प्रखर.. .
शुभभावना-शुभकामना-सुसंस्मरण संप्रेष्य है !

अनेकानेक बधाइयाँ.

At 9:20am on September 22, 2012, Er. Ambarish Srivastava said…

कविता शुचिता शिल्प से, शोभित मित्र कविन्द्र.

जन्मदिवस    शुभकामना,   भाई   जी   धर्मेन्द्र..    सादर   

At 8:15am on September 22, 2012, कुमार गौरव अजीतेन्दु said…

जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ आदरणीय धर्मेन्द्र सर.........

At 12:10pm on September 21, 2012, लक्ष्मण रामानुज लडीवाला said…

जन्म दिन की हार्दिक शुभ कामनाए स्वीकारे आदरणीय धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी, 

प्रभु आपको समाज और देश निर्माण में योगदान देने की शक्ति प्रदान करे | आपका 

हमारा स्नेह बना रहे |

At 1:55pm on April 7, 2011, nemichandpuniyachandan said…
aapki zarra-nawazee ke liye sukariya.
 
 
 

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