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धर्मेन्द्र कुमार सिंह
  • Male
  • BIlaspur, HP
  • India
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धर्मेन्द्र कुमार सिंह's Discussions

बहर सारिणी
7 Replies

ग़ज़ल की बहरें समझना बहुत टेढ़ी खीर है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि बहर के बारे में जानकारी तो बहुत ज्यादा मिल जाती है अंतर्जाल पर पर कहीं भी व्यवस्थित ढंग से नहीं मिलती। तो जहाँ सूचना ज्यादा हो वहाँ उसको…Continue

Started this discussion. Last reply by Admin Jan 30, 2011.

 

धर्मेन्द्र कुमार सिंह's Page

Latest Activity

Samar kabeer commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post ग़ज़ल : बरसेगा तेज़ाब एक दिन बादल से
"अच्छी रचना,बधाई आपको ।"
Nov 12
Mohammed Arif commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post ग़ज़ल : बरसेगा तेज़ाब एक दिन बादल से
"आदरणीय धर्मेंद्र कुमार जी आदाब, बहुत ही सामयिक ग़ज़ल । हर शे'र उम्दा । हार्दिक बधाई स्वीकार करें । बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।"
Nov 12
Dr Ashutosh Mishra commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post ग़ज़ल : बरसेगा तेज़ाब एक दिन बादल से
"वर्तामान संदर्भो का चित्रण करती..खतरों की चेतावनी देते और शानदार मशविरो से ओतप्रोत इस शानदार ग़ज़ल के लिए ढेर सारी बधाई भाई धर्मेन्द्र जी  सादर"
Nov 11
धर्मेन्द्र कुमार सिंह posted a blog post

ग़ज़ल : बरसेगा तेज़ाब एक दिन बादल से

बह्र : २२ २२ २२ २२ २२ २आह निकलती है यह कटते पीपल सेबरसेगा तेज़ाब एक दिन बादल से माँगे उनसे रोज़गार कैसे कोईभरा हुआ मुँह सबका सस्ते चावल से क़ै हो जाएगी इसके नाज़ुक तन परकैसे बनता है गर जाना मखमल से गाँव, गली, घर साफ नहीं रक्खोगे गरख़ून चुसाना होगा मच्छर, खटमल से थे चुनाव पहले के वादे जुम्ले यदितब तो सत्ता पाई है तुमने छल से(मौलिक एवं अप्रकाशित)See More
Nov 11
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post बिना तुम्हारे, हे मेरी तुम, सब आधा है (नवगीत)
"आदरणीय सौरभ जी, रचना को मान देने के लिये तह-द-दिल से आपका शुक्रगुज़ार हूँ। आप सच कह रहे हैं रचना की पहली पंक्ति ‘हे मेरी तुम’ केदारनाथ अग्रवाल जी के ‘हे मेरी तुम’ से ही प्रेरित है। इसीलिये ये पंक्ति आदरणीय समर साहब को अधूरी सी…"
Nov 10
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post बिना तुम्हारे, हे मेरी तुम, सब आधा है (नवगीत)
"आदरणीय आशुतोष मिश्र जी, मोहम्मद आरिफ़ साहब, आशीष यादव जी, समर कबीर साहब, जयनित जी, बृजेश जी एवं पंकज जी। रचना को अपना समय देने और उत्साहवर्द्धन करने के लिये हृदयतल से आप सबका  आभारी हूँ।"
Nov 10
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post हम ग्यारह हैं (कविता)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय गिरिराज जी, एवं समर साहब "
Nov 10
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post ये दुनिया है भूलभुलैया (नवगीत)
"आदरणीय समर कबीर जी, सुरेन्द्र नाथ सिंह जी, मिथिलेश जी, सुशील जी एवं गिरिराज जी। रचना पर आपके आगमन और उत्साहवर्धन हेतु हृदयतल से आपका आभारी हूँ। "
Nov 10
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post कथा लिखो (लघुकथा)
"बहुत बहुत शुक्रिया नीता जी"
Nov 10
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on Samar kabeer's blog post 'ग़ालिब'की ज़मीन में एक ग़ज़ल
"बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है आदरणीय समर जी, बधाई स्वीकार करें।"
Nov 10
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on Balram Dhakar's blog post अब भी क़ायम है(ग़ज़ल)- बलराम धाकड़
"बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है आदरणीय बलराम जी, बधाई स्वीकार करें।"
Nov 10
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on Gajendra shrotriya's blog post दिल बड़ा अपना बनाने की ज़रूरत आज है-ग़ज़ल
"बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है आदरणीय गजेन्द्र जी, बधाई स्वीकार करें।"
Nov 10
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल - जानवर कितने समझदार मिले
"बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है आदरणीय राम अवध जी, बधाई स्वीकार करें।"
Nov 10

Profile Information

Gender
Male
City State
बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश
Native Place
प्रतापगढ़
Profession
अभियांत्रिकी

धर्मेन्द्र कुमार सिंह's Blog

ग़ज़ल : बरसेगा तेज़ाब एक दिन बादल से

बह्र : २२ २२ २२ २२ २२ २

आह निकलती है यह कटते पीपल से

बरसेगा तेज़ाब एक दिन बादल से

 

माँगे उनसे रोज़गार कैसे कोई

भरा हुआ मुँह सबका सस्ते चावल से

 

क़ै हो जाएगी इसके नाज़ुक तन पर

कैसे बनता है गर जाना मखमल से

 

गाँव, गली, घर साफ नहीं रक्खोगे गर

ख़ून चुसाना होगा मच्छर, खटमल से

 

थे चुनाव पहले के वादे जुम्ले यदि

तब तो सत्ता पाई है तुमने छल से

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Posted on November 10, 2017 at 2:38pm — 3 Comments

बिना तुम्हारे, हे मेरी तुम, सब आधा है (नवगीत)

बिना तुम्हारे

हे मेरी तुम

सब आधा है

 

सूरज आधा, चाँद अधूरा

आधे हैं ग्रह सारे

दिन हैं आधे, रातें आधी

आधे हैं सब तारे

 

जीवन आधा

दुनिया आधी

रब आधा है

 

आधा नगर, डगर है आधी

आधे हैं घर, आँगन

कलम अधूरी, आधा काग़ज़

आधा मेरा तन-मन

 

भाव अधूरे

कविता का

मतलब आधा है

 

फागुन आधा, मधुऋतु आधी

आया आधा सावन

आधी साँसें, आधा है दिल

आधी है…

Continue

Posted on February 9, 2017 at 9:39am — 10 Comments

कथा लिखो (लघुकथा)

महाबुद्ध से शिष्य ने पूछा, “भगवन! समाज में असत्य का रोग फैलता ही जा रहा है। अब तो इसने बच्चों को भी अपनी गिरफ्त में लेना शुरू कर दिया है। आप सत्य की दवा से इसे ठीक क्यों नहीं कर देते?”

महाबुद्ध ने शिष्य को एक गोली दी और कहा, “शीघ्र एवं सम्पूर्ण असर के लिये इसे चबा-चबाकर खाओ, महाबुद्धि।”

महाबुद्धि ने गोली अपने मुँह में रखी और चबाने लगा। कुछ ही क्षण बाद उसे जोर की उबकाई आई और वो उल्टी करने लगा। गोली के साथ साथ उसका खाया पिया भी बाहर आ गया। वो बोला, “प्रभो ये गोली…

Continue

Posted on February 5, 2017 at 10:30am — 16 Comments

ये दुनिया है भूलभुलैया (नवगीत)

ये दुनिया है भूलभुलैया

रची भेड़ियों ने

भेड़ों की खातिर

 

पढ़े लिखे चालाक भेड़िये

गाइड बने हुए हैं इसके

ओढ़ भेड़ की खाल

जिन भेड़ों की स्मृति अच्छी है

उन सबको बागी घोषित कर

रंग दिया है लाल

 

फिर भी कोई राह न पाये

इस डर के मारे

छोड़ रखे मुखबिर

 

भेड़ समझती अपने तन पर

खून पसीने से खेती कर

उगा रही जो ऊन

जब तक राह नहीं मिल जाती

उसे बेचकर अपना चारा

लायेगी दो…

Continue

Posted on January 10, 2017 at 8:13pm — 6 Comments

Comment Wall (23 comments)

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At 12:19am on September 23, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय बड़े भाई  धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी, 

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 8:41pm on September 22, 2013, जितेन्द्र पस्टारिया said…

" जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें " आदरणीय धर्मेन्द्र जी

At 11:20am on September 22, 2013,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

At 10:23pm on December 13, 2012, seema agrawal said…

स्वागत है धर्मेन्द्र जी 

At 6:18pm on September 22, 2012,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

At 10:06am on September 22, 2012,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

भाई धर्मेन्द्रजी, 

सरल, सफल, सहज, सुगढ़
सुफल, सुमिल, सुधी
सस्वर.. .
संयत, सुहृद, सुभाव, सशब्द
संभव सदा
सबल-प्रखर.. .
शुभभावना-शुभकामना-सुसंस्मरण संप्रेष्य है !

अनेकानेक बधाइयाँ.

At 9:20am on September 22, 2012, Er. Ambarish Srivastava said…

कविता शुचिता शिल्प से, शोभित मित्र कविन्द्र.

जन्मदिवस    शुभकामना,   भाई   जी   धर्मेन्द्र..    सादर   

At 8:15am on September 22, 2012, कुमार गौरव अजीतेन्दु said…

जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ आदरणीय धर्मेन्द्र सर.........

At 12:10pm on September 21, 2012, लक्ष्मण रामानुज लडीवाला said…

जन्म दिन की हार्दिक शुभ कामनाए स्वीकारे आदरणीय धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी, 

प्रभु आपको समाज और देश निर्माण में योगदान देने की शक्ति प्रदान करे | आपका 

हमारा स्नेह बना रहे |

At 1:55pm on April 7, 2011, nemichandpuniyachandan said…
aapki zarra-nawazee ke liye sukariya.
 
 
 

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