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धर्मेन्द्र कुमार सिंह
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  • Raigarh, CG
  • India
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धर्मेन्द्र कुमार सिंह's Discussions

बहर सारिणी
7 Replies

ग़ज़ल की बहरें समझना बहुत टेढ़ी खीर है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि बहर के बारे में जानकारी तो बहुत ज्यादा मिल जाती है अंतर्जाल पर पर कहीं भी व्यवस्थित ढंग से नहीं मिलती। तो जहाँ सूचना ज्यादा हो वहाँ उसको…Continue

Started this discussion. Last reply by Admin Jan 30, 2011.

 

धर्मेन्द्र कुमार सिंह's Page

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PHOOL SINGH commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post अख़बारों की बातें छोड़ो कोई ग़ज़ल कहो (ग़ज़ल)
"बहुत सुंदर रचना,  हार्दिक बधाई "
Dec 13, 2018
राज़ नवादवी commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post अख़बारों की बातें छोड़ो कोई ग़ज़ल कहो (ग़ज़ल)
"आदरणीय धर्मेंद्र कुमार जी, आदाब, सुंदर गजल हुयी है, हार्दिक बधाई. सादर. "
Dec 10, 2018
TEJ VEER SINGH commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post अख़बारों की बातें छोड़ो कोई ग़ज़ल कहो (ग़ज़ल)
"हार्दिक बधाई आदरणीय धर्मेंद्र कुमार जी।बेहतरीन गज़ल। आग उगलने लगी सियासत जलते हैं मासूममिल जुलकर इसका मुँह तोड़ो कोई ग़ज़ल कहो"
Dec 9, 2018
Samar kabeer commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post अख़बारों की बातें छोड़ो कोई ग़ज़ल कहो (ग़ज़ल)
"जनाब धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी आदाब,बहुत दिनों बाद पटल पर आपको देखकर प्रसन्नता हुई,अपनी सक्रियता बनाये रखें । अच्छी ग़ज़ल कही आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Dec 9, 2018
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post अख़बारों की बातें छोड़ो कोई ग़ज़ल कहो (ग़ज़ल)
"आ. भाई धर्मेंद्र जी, सुंदर गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
Dec 8, 2018
धर्मेन्द्र कुमार सिंह posted a blog post

अख़बारों की बातें छोड़ो कोई ग़ज़ल कहो (ग़ज़ल)

बह्र : २२ २२ २२ २२ २२ २२ २अख़बारों की बातें छोड़ो कोई ग़ज़ल कहोख़ुद को थोड़ा और निचोड़ो कोई ग़ज़ल कहोवक़्त चुनावों का है, उमड़ा नफ़रत का दर्याबाँध प्रेम का फौरन जोड़ो कोई ग़ज़ल कहोहम सबके भीतर सोई जो मानवता उसकोकस कर पकड़ो और झिंझोड़ो कोई ग़ज़ल कहोखर पतवार जहाँ है दिल के उन सब कोनों कोअपने तर्कों से तुम गोड़ो कोई ग़ज़ल कहोआग उगलने लगी सियासत जलते हैं मासूममिल जुलकर इसका मुँह तोड़ो कोई ग़ज़ल कहोसच लेकर तुम पूँजी, सत्ता से टकराओगे?‘सज्जन’ जी अपना रुख मोड़ो कोई ग़ज़ल कहो----------(मौलिक एवं अप्रकाशित)See More
Dec 8, 2018
धर्मेन्द्र कुमार सिंह updated their profile
Dec 7, 2018
Balram Dhakar commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post जो करा रहा है पूजा बस उसी का फ़ायदा है (ग़ज़ल)
"आदरणीय धर्मेंद्र जी, बहुत ख़ूबसूरत ग़ज़ल कही है आपने इस बह्र में। दिली मुबारक़बाद क़ुबूल फ़रमाएं। सादर।"
Oct 31, 2018
Balram Dhakar commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post ग़ज़ल : बरसेगा तेज़ाब एक दिन बादल से
"बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है, आदरणीय धर्मेंद्र जी। हार्दिक बधाई आपको। सादर।"
Oct 31, 2018
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post कविता : शून्य बटा शून्य
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय लक्ष्मण धामी जी"
Apr 11, 2018
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post कविता : शून्य बटा शून्य
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय समर कबीर साहब"
Apr 11, 2018
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post कविता : शून्य बटा शून्य
"बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह जी"
Apr 11, 2018
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post लोकतंत्र (लघुकथा)
"बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज' जी"
Apr 11, 2018
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post लोकतंत्र (लघुकथा)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय रवि प्रभाकर जी"
Apr 11, 2018
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post लोकतंत्र (लघुकथा)
"जनाब Sheikh Shahzad Usmani साहब मैं स्वयं ओबीओ मंच पर लघुकथा का विद्यार्थी हूँ। अभी तक केवल आठ-दस लघुकथाएँ ही लिख पाया हूँ जो यहाँ ओबीओ पर ही मौज़ूद हैं। लघुकथा की सराहना के लिये तह-ए-दिल से आपका शुक्रगुजार हूँ।"
Apr 11, 2018
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post लोकतंत्र (लघुकथा)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय लड़ीवाला जी"
Apr 11, 2018

Profile Information

Gender
Male
City State
रायगढ़, छत्तीसगढ़
Native Place
प्रतापगढ़
Profession
अभियांत्रिकी

धर्मेन्द्र कुमार सिंह's Blog

अख़बारों की बातें छोड़ो कोई ग़ज़ल कहो (ग़ज़ल)

बह्र : २२ २२ २२ २२ २२ २२ २

अख़बारों की बातें छोड़ो कोई ग़ज़ल कहो

ख़ुद को थोड़ा और निचोड़ो कोई ग़ज़ल कहो

वक़्त चुनावों का है, उमड़ा नफ़रत का दर्या

बाँध प्रेम का फौरन जोड़ो कोई ग़ज़ल कहो

हम सबके भीतर सोई जो मानवता…

Continue

Posted on December 7, 2018 at 10:48pm — 5 Comments

लोकतंत्र (लघुकथा)

एक गाँव में कुछ लोग ऐसे थे जो देख नहीं पाते थे, कुछ ऐसे थे जो सुन नहीं पाते थे, कुछ ऐसे थे जो बोल नहीं पाते थे और कुछ ऐसे भी थे जो चल नहीं पाते थे। उस गाँव में केवल एक ऐसा आदमी था जो देखने, सुनने, बोलने के अलावा दौड़ भी लेता था। एक दिन ग्रामवासियों ने अपना नेता चुनने का निर्णय लिया। ऐसा नेता जो उनकी समस्याओं को जिलाधिकारी तक सही ढंग से पहुँचा कर उनका समाधान करवा सके।

जब चुनाव हुआ तो अंधों ने अंधे को, बहरों ने बहरे को, गूँगों ने गूँगे को और लँगड़ों ने एक लँगड़े को वोट दिया। जो…

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Posted on April 4, 2018 at 9:11pm — 14 Comments

कविता : शून्य बटा शून्य

उसने कहा 2=3 होता है

 

मैंने कहा आप बिल्कुल गलत कह रहे हैं

 

उसने लिखा 20-20=30-30

फिर लिखा 2(10-10)=3(10-10)

फिर लिखा 2=3(10-10)/(10-10)

फिर लिखा 2=3

 

मैंने कहा शून्य बटा शून्य अपरिभाषित है

आपने शून्य बटा शून्य को एक मान लिया है

 

उसने कहा ईश्वर भी अपरिभाषित है

मगर उसे भी एक माना जाता है

 

मैंने कहा इस तरह तो आप हर वह बात सिद्ध कर देंगे

जो आपके फायदे की है

 

उसने…

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Posted on February 1, 2018 at 8:45pm — 6 Comments

ग़ज़ल : बरसेगा तेज़ाब एक दिन बादल से

बह्र : २२ २२ २२ २२ २२ २

आह निकलती है यह कटते पीपल से

बरसेगा तेज़ाब एक दिन बादल से

 

माँगे उनसे रोज़गार कैसे कोई

भरा हुआ मुँह सबका सस्ते चावल से

 

क़ै हो जाएगी इसके नाज़ुक तन पर

कैसे बनता है गर जाना मखमल से

 

गाँव, गली, घर साफ नहीं रक्खोगे गर

ख़ून चुसाना होगा मच्छर, खटमल से

 

थे चुनाव पहले के वादे जुम्ले यदि

तब तो सत्ता पाई है तुमने छल से

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Posted on November 10, 2017 at 2:38pm — 5 Comments

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At 12:19am on September 23, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय बड़े भाई  धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी, 

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 8:41pm on September 22, 2013, जितेन्द्र पस्टारिया said…

" जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें " आदरणीय धर्मेन्द्र जी

At 11:20am on September 22, 2013,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

At 10:23pm on December 13, 2012, seema agrawal said…

स्वागत है धर्मेन्द्र जी 

At 6:18pm on September 22, 2012,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

At 10:06am on September 22, 2012,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

भाई धर्मेन्द्रजी, 

सरल, सफल, सहज, सुगढ़
सुफल, सुमिल, सुधी
सस्वर.. .
संयत, सुहृद, सुभाव, सशब्द
संभव सदा
सबल-प्रखर.. .
शुभभावना-शुभकामना-सुसंस्मरण संप्रेष्य है !

अनेकानेक बधाइयाँ.

At 9:20am on September 22, 2012, Er. Ambarish Srivastava said…

कविता शुचिता शिल्प से, शोभित मित्र कविन्द्र.

जन्मदिवस    शुभकामना,   भाई   जी   धर्मेन्द्र..    सादर   

At 8:15am on September 22, 2012, कुमार गौरव अजीतेन्दु said…

जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ आदरणीय धर्मेन्द्र सर.........

At 12:10pm on September 21, 2012, लक्ष्मण रामानुज लडीवाला said…

जन्म दिन की हार्दिक शुभ कामनाए स्वीकारे आदरणीय धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी, 

प्रभु आपको समाज और देश निर्माण में योगदान देने की शक्ति प्रदान करे | आपका 

हमारा स्नेह बना रहे |

At 1:55pm on April 7, 2011, nemichandpuniyachandan said…
aapki zarra-nawazee ke liye sukariya.
 
 
 

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