For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Harash Mahajan
  • Male
  • Delhi
  • India
Share

Harash Mahajan's Friends

  • क़मर जौनपुरी
  • dandpani nahak
  • jaan' gorakhpuri
  • Samar kabeer
  • Rahul Dangi Panchal
  • डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव
  • गिरिराज भंडारी
  • Priyanka Pandey
  • मिथिलेश वामनकर
  • Pankaj Trivedi
 

Harash Mahajan's Page

Profile Information

Gender
Male
City State
Delhi
Native Place
Delhi
Profession
Service
About me
GhazleN padne our kahne ka shouk mujhe is our prerit karta raha hai....

Harash Mahajan's Photos

  • Add Photos
  • View All

Harash Mahajan's Blog

हर कली को अजब शिकायत है,

2122 1212 22
*************

हर कली को अजब शिकायत है,
इश्क़ करना भ्रमर  की आदत है ।

इश्क़ दरिया है उर समंदर भी,
जब तलक़ मुझमें तू सलामत है ।

गम से उभरा तो मैंने जाना ये,
गर है साया तेरा तो ज़न्नत है ।

किसको किसके लिए है हमदर्दी,
हर तरफ फैली बस अदावत है ।

जब धुआँ अपने घर से उट्ठे तो,
कर यकीं रिश्तों में सियासत है

************

मौलिक एवं अप्रकाशित

हर्ष महाजन

Posted on May 3, 2018 at 2:30pm — 12 Comments

उससे नज़रें मिलीं हादसा हो गया (तरही)

212 212 212 212

****************

उससे नज़रें मिलीं हादसा हो गया,

एक पल में यहाँ क्या से क्या हो गया ।

ख़त दिया था जो कासिद ने उसका मुझे,

"बिन अदालत लगे फ़ैसला हो गया" ।

दरमियाँ ही रहा दूर होकर भी गर,

जाने फिर क्यूँ वो मुझसे ख़फ़ा हो गया ।

गर निभाने की फ़ुर्सत नहीं थी उसे,

खुद ही कह देता वो बेवफ़ा हो गया।

दर्द सीने में ऱख राज़ उगला जो वो,

यूँ लगा मैं तो बे-आसरा हो गया…

Continue

Posted on April 27, 2018 at 7:00pm — 13 Comments

ऐ ज़माने अब चला ऐसी हवा (गैर मुरद्दफ़)

गैर मुरद्दफ़ ग़ज़ल

2122 2122 212

*****†

ऐ ज़माने अब चला ऐसी हवा ,

लौट कर आये महब्बत में वफ़ा ।

दूरियाँ मिटती नहीं अब क्या करें,

कोई मिलने का निकालो रास्ता ।

चिलचिलाती धूप में आना सनम,

गुदगुदाती है तुम्हारी ये अदा ।

ज़ख्म दिल के देखकर रोते हैं हम,

याद आये इश्क़ का वो सिलसिला ।

तज्रिबा इतना है सूरत देख कर,

ये बता देते हैं कितना है नशा ।

वो लकीरों में था मेरे हाथ की,

मैं ज़माने में…

Continue

Posted on April 14, 2018 at 11:00pm — 8 Comments

वो रंजिश में ताने दिए जा रहे हैं

122 122 122 122

******************

वो रंजिश में ताने दिए जा रहे हैं,

हैं अपने मगर मुझको तड़पा रहे हैं ।

.

सिफर हो चला हूँ मैं ख़्वाबों से खुद ही,

तभी गम के बादल बहुत छा रहे हैं ।

.

बसी दिल में उनकी वो तस्वीर ऐसी,

कि बनकर वो साये चले आ रहे हैं ।

.

सुना है कि मिलती दुआओं से मंज़िल,

नमाज़-ए-महब्बत पढ़े जा रहें हैं ।

.

मैं रोया हूँ इतना छुपा कर वो आँहें,

पुराने थे रिश्ते जो इतरा रहे हैं…

Continue

Posted on April 14, 2018 at 11:30am — 13 Comments

Comment Wall (7 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 11:23pm on September 3, 2015, kanta roy said…

महीने का सक्रिय सदस्य बनने के लिये ढेरों बधाई आपको आदरणीय हर्ष महाजन जी ।

At 10:56am on August 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

हर्ष महाजन जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:26am on August 6, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

aapko mitrkeroop mepakarmujhesamman mila . saadar

At 5:29pm on July 28, 2015, Rahul Dangi Panchal said…
जी अवश्य
At 3:56pm on July 28, 2015, Rahul Dangi Panchal said…
बहुत बहुत स्वागत आदरणीय हर्ष महाजन जी
At 11:49am on August 15, 2012, Ranveer Pratap Singh said…

जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनायें...

At 12:17pm on July 20, 2012, Albela Khatri said…

आपका बहुत बहुत स्वागत है हर्ष महाजन जी, आप एक ऐसे परिवार में शामिल हो गये हैं जहाँ घर के सभी सदस्य सही काम करने के लिए कटिबद्ध है .प्रशंसा और लताड़ दोनों ही यहाँ सर्वमान्य हैं . आपको यहाँ आ कर अच्छा लगेगा, ऐसा मेरा विश्वास है सादर

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Md. Anis arman replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"1121, 2122, 1121, 2122 है जो मेरे दिल की धड़कन बसी जिसमें मेरी जाँ है कोई ये बता दे मुझको है वो…"
2 hours ago
Dr. Geeta Chaudhary commented on Dr. Geeta Chaudhary's blog post कविता: "तुम्हारे हित देशहित से बड़े क्यूँ है?"
"आदरणीय समर कबीर जी उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार। "
2 hours ago
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"पर आदरणीय क्या गम को 11 पर नहीं कर सकते हैं"
2 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"आयोजन में दिए गए मिसरे की बह्र है:- 1121 2122 1121 2122 'गम हो या फिर खुशी हो, सर पर ये आसमां…"
3 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"जनाब सुरेन्द्र नाथ सिंह जी आदाब,तरही मिसरे पर अच्छी ग़ज़ल कही आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
3 hours ago
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"आदरणीय समर सर मार्ग दर्शन के लिए धन्यवाद किंतु मैं समझ नहीं पाया कि यह बहर अलग कैसे है मैंने तो इसी…"
3 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"जनाब गंगा धर शर्मा 'हिंदुस्तान' जी आदाब,आपने ग़ज़ल 221 2122 221 2122 पर कह ली है,जबकि इसकी…"
3 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"जनाब अमित कुमार 'अमित' जी आदाब, लगता है आपने ग़ज़ल जल्दबाज़ी में दूसरी बह्र में कह…"
3 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"ग़ज़ल मेरा कोई घर नहीं है मेरे सर पे आसमाँ हैयही मेरा हम सफ़र है यही मेरा राज़ दाँ है।। ये वफ़ा की…"
3 hours ago
Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"इक ओर है दुपट्टा इक ओर कहकशाँ है. किसकी कशिश बड़ी है  यह प्रश्न ही कहाँ है. हर वक्त हादसों ने…"
3 hours ago
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"आदरणीय तस्दीक अहमद खान जी एक बेहतरीन ग़ज़ल कहने के लिए बहुत-बहुत बधाइयां"
3 hours ago
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"आदरणीय लक्ष्मण धामी भाई जी बहुत बेहतरीन ग़ज़ल कहने के लिए बधाइयां बाकी समर सर की बातों पर ध्यान दें"
3 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service