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Harash Mahajan
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GhazleN padne our kahne ka shouk mujhe is our prerit karta raha hai....

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Harash Mahajan's Blog

खुदाया उसकी तकलीफें मेरी जागीर हो जाएँ

1222-1222-1222-1222

-------------------------------

खुदाया उसकी तकलीफें मेरी जागीर हो जाएँ,

ज़माने भर की खुशियाँ उसकी अब उम्मीद हो जाएँ |



यूँ दर्दों में तडपना उसका, आन्हें मेरे सीने में,

 खुदा से इल्तिजा सब आहें ये ताबीज़ हो जाएँ |



खुदा की हर अदालत में उसे गर चाह मिल जाए,

वो देखे ख्वाब दुनिया के, सभी तस्वीर हो जाएँ |



न मंजिल है न वादा है न उसके बिन मैं जिंदा हूँ,

कहीं ये आदतें उसकी न अब तकलीफ हो जाएँ |



यहाँ अब मौत भी…

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Posted on August 10, 2016 at 2:41pm — 14 Comments

यूँ ज़िन्दगी में अब मेरी वो बात नहीं है

221 1221 1221 122



यूँ ज़िन्दगी में अब मेरी वो बात नहीं है,

कर लूं भरोसा खुद पे ये हालात नहीं है  |



मैं शिकवों भरी शामो सहर देख रहा हूँ,

ये घाव उठा दिल पे है ज़ज्बात नहीं हैं |



चलने लगी है आखों में रुक-रुक के ये नदिया,

ये गम का दिया रंग है बरसात नहीं है |



क्यूँ काल से उम्मीद रखूँ कोई रहम की,

है कर्मों की ये बात कोई घात नहीं है |



कुछ लोग लुटाते हैं शबो…

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Posted on August 1, 2016 at 3:00pm — 12 Comments

बिकने लगा शबाब मुहब्बत के शहर में --- हर्ष महाजन

221 - 2121 -1221 -212



बिकने लगा शबाब मुहब्बत के शहर में,

रोके कोई शराब मुहब्बत के शहर में |

.

देखो गली-गली में हया छू रही ज़मीं,

कोई तो है नवाब मुहब्बत के शहर में |



धोखा है हर तरफ यूँ लगे फैलता ज़हर,

हालात हैं खराब मुहब्बत के शहर में |



रिश्तों के हो रहे यूँ कतल बेरुखी से क्यूँ .

जब से उठे नकाब मुहब्बत के…

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Posted on June 25, 2016 at 12:00pm — 6 Comments

चाहा जिसे था दिल के बंद दरवाजे ही मिले

2212 1222 2222 12

...

चाहा जिसे था दिल के बंद दरवाजे ही मिले ,

वो दोस्ती में मुझको बस अजमाते ही मिले |



ज़ब्रो ज़फ़ा गरीबों पर जिस-जिस ने की अगर,  

हर जुर्म खुद खुदा को वो लिखवाते ही मिले |



बदनाम वो शहर में पर, काबे का था मरीज़,

हर चोट भी ख़ुशी से सब बतियाते ही मिले |



वो यार था अजीजों सा, दुश्मन भी था मगर,

हर राज-ए-दिल उसे पर हम बतलाते ही मिले |



इस दौर में जिधर भी देखो गम ही गम हुए,

ऐ ‘हर्ष’ ज़िन्दगी में वो भी आधे ही…

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Posted on August 26, 2015 at 10:09pm — 8 Comments

Comment Wall (7 comments)

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At 11:23pm on September 3, 2015, kanta roy said…

महीने का सक्रिय सदस्य बनने के लिये ढेरों बधाई आपको आदरणीय हर्ष महाजन जी ।

At 10:56am on August 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

हर्ष महाजन जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:26am on August 6, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

aapko mitrkeroop mepakarmujhesamman mila . saadar

At 5:29pm on July 28, 2015, Rahul Dangi said…
जी अवश्य
At 3:56pm on July 28, 2015, Rahul Dangi said…
बहुत बहुत स्वागत आदरणीय हर्ष महाजन जी
At 11:49am on August 15, 2012, Ranveer Pratap Singh said…

जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनायें...

At 12:17pm on July 20, 2012, Albela Khatri said…

आपका बहुत बहुत स्वागत है हर्ष महाजन जी, आप एक ऐसे परिवार में शामिल हो गये हैं जहाँ घर के सभी सदस्य सही काम करने के लिए कटिबद्ध है .प्रशंसा और लताड़ दोनों ही यहाँ सर्वमान्य हैं . आपको यहाँ आ कर अच्छा लगेगा, ऐसा मेरा विश्वास है सादर

 
 
 

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