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क़मर जौनपुरी
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क़मर जौनपुरी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"ऐसा कहकर शर्मिंदा न करें मोहतरम।"
Saturday
क़मर जौनपुरी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"मैं तो गणित के सूत्र की तरह लगा दिया मोहतरम। एक नई बात सीखने को मिली कि इसमें यह भी देखना है कि अजीब न लगे। बहुत बहुत शुक्रिया रहनुमाई के लिए। आगे से इस इस्लाह को ध्यान में रखकर ही अलिफ वस्ल करूँगा।"
Friday
क़मर जौनपुरी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"बहुत बहुत शुक्रिया मोहतरम ज़ैदी साहब।"
Friday
क़मर जौनपुरी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"बहुत बहुत शुक्रिया मोहतरमा राजेश साहिबा।"
Friday
क़मर जौनपुरी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"उनके21 घर की 22 तरफिक बा 1122 र इशारा 1122 कर2 दें2"
Friday
क़मर जौनपुरी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"बहुत शुक्रिया मोहतरम समर कबीर साहब इस्लाह और हौसला आफ़ज़ाई के लिए। मोहतरम तरफ़ इक में वस्ल है। 112 पर। बाकी सुधार की कोशिश करता हूँ।"
Friday
क़मर जौनपुरी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"जनाब आसिफ ज़ैदी साहब। अच्छी ग़ज़ल हुई है। मुबारकबाद कबूल करें ।"
Friday
क़मर जौनपुरी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"ग़ज़ल2122,1122,1122,22/112 दिल में अरमान जो हैं आज नुमायाँ कर देंदेश की आन पे इस जान को क़ुरबां कर दें//1 जिनको मालूम नहीं है कि ख़ुशी क्या शै हैउनकी भी ज़ीस्त पे अब थोड़ा सा अहसां कर दें//2 ख़्वाब सुनसान अंधेरों में डरे बैठे हैंउनके आँगन में भी अब चाँद…"
Friday
क़मर जौनपुरी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"              ग़ज़ल2122,1122,1122,22/112 दिल में अरमान जो हैं आप नुमायाँ कर देंदेश की आन पे इस जान को क़ुरबां कर दें//1 जिनको मालूम नहीं है कि ख़ुशी क्या शै हैउनकी भी ज़ीस्त पे अब थोड़ा सा अहसां कर दें//2 ख़्वाब सुनसान…"
Friday
क़मर जौनपुरी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"मोहतरम जनाब समर कबीर साहब, उम्दा ग़ज़ल के लिए बहुत बहुत मुबारकबाद।"
Friday
क़मर जौनपुरी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"मोहतरम समर कबीर साहब आदाब, उम्दा ग़ज़ल के लिए बहुत बहुत मुबारकबाद"
Friday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on क़मर जौनपुरी's blog post ग़ज़ल : आईना उसे सच का दिखा क्यों नहीं देते
"ज़नाब जौनपुरी जी बढ़िया ग़ज़ल कही..सादर"
Wednesday
Samar kabeer commented on क़मर जौनपुरी's blog post ग़ज़ल : आईना उसे सच का दिखा क्यों नहीं देते
"ठीक है,रहने दें ।"
Mar 16
क़मर जौनपुरी commented on क़मर जौनपुरी's blog post ग़ज़ल : आईना उसे सच का दिखा क्यों नहीं देते
"मोहतरम, ऐ मेरे मुंसिफ़, क़ातिल तो वहीं है उसको सज़ा क्यों नहीं देते । वाक्य तो यही बन रहा है। भ्रम दूर करने की मेहरबानी करें कि मुन्सिफ एक वचन के साथ देते का प्रयोग कैसे ग़लत है ? तुम यहां से भाग क्यों नहीं जाते ? क्या यहां तुम एक वचन के साथ जाते ग़लत…"
Mar 16
क़मर जौनपुरी commented on क़मर जौनपुरी's blog post ग़ज़ल : आईना उसे सच का दिखा क्यों नहीं देते
"बहुत बहुत शुक्रिया मोहतरम रहनुमाई के लिए।"
Mar 16
Samar kabeer commented on क़मर जौनपुरी's blog post ग़ज़ल : आईना उसे सच का दिखा क्यों नहीं देते
"'निगाहों से गिरा क्यों नहीं देते' ये एक कॉमन बात है,जो कोई भी कह सकता है,इसे उर्दू में सामने की बात या ज़बान की बात कहते हैं,फ़र्क़ हसरत,और बातिल में है,ग़ौर करें ।"
Mar 16

Profile Information

Gender
Male
City State
Jhumri Tilaiya
Native Place
Jaunpur
Profession
Hindi Teacher
About me
Myself Hindi teacher since 21 years. Trying to compose kavita and gazal

क़मर जौनपुरी's Blog

ग़ज़ल : आईना उसे सच का दिखा क्यों नहीं देते



221 1221 1221 122

बातिल को नज़र से ही गिरा क्यों नहीं देते

आईना उसे सच का दिखा क्यों नहीं देते//1

अब ऐब तुम्हारा तो नज़र आने लगा है

अफ़वाह नई कोई उड़ा क्यों नहीं देते//2

क्या बेच नहीं पा रहा अपनी अना को वो

अख़बार कोई उसको पढ़ा क्यों नहीं देते//3

महफ़िल में तमाशा न करो ऐ मेरे मुंसिफ़

क़ातिल तो वहीं पर है सज़ा क्यों नहीं देते//4

क्या प्यार सभी क़ौम से है उसको अभी तक

टीवी पे नई बहस दिखा क्यों नहीं…

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Posted on March 12, 2019 at 1:13pm — 8 Comments

गज़ल: बच्चा बच्चा मर मिटेगा अपने हिंदुस्तान पर

2122 2122 2122 212

आंच आई गर कभी इस देश के अभिमान पर

बच्चा बच्चा मर मिटेगा अपने हिंदुस्तान पर//1

ये तिरंगा झुक नहीं सकता किसी के सामने

सर कटा देंगे हम अपना इसकी ऊंची शान पर//2

चाहे जितनी मुश्किलें आएं हमारी राह में

दाग़ हम लगने न देंगे देश के सम्मान पर//3

जीत लेंगे जंग हम दुश्मन लड़े चाहे जहां

ख़ौफ़ बरपा हम करेंगे शत्रु की मुस्कान पर//4

ज़ुल्म हम करते नहीं पर ज़ुल्म सहते भी नहीं

है भरोसा हमको अपने शांति के…

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Posted on March 7, 2019 at 10:30pm — 2 Comments

गज़ल ( इश्क़ उम्मीद है)

2122, 1122, 1122, 22/112

सुर्ख़रू शोख़ बहारों सा चहक जाओगे

इश्क़ के बाग़ में आओ तो गमक जाओगे

गर इरादे हुए हैं बर्फ़ से ख़ामोश तो क्या

गर्मी-ए-इश्क़ में आ जाओ दहक जाओगे

इश्क़ की ताब का अंदाज़ा भला है तुमको

इसकी ज़द में ही फ़क़त आओ लहक जाओगे

रौनक-ए-इश्क़ की ताक़त को न ललकारो तुम

ख़ूब ज़ाहिद हो मगर तुम भी बहक जाओगे

इश्क़ ख़ुश्बू है इसे बांधने की ज़िद न करो

इसमें घुल जाओ तो दुनिया में महक जाओगे

इश्क़ के रंग व…

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Posted on January 23, 2019 at 5:30pm — 7 Comments

गज़ल

122 122 122 122

ग़ज़ल

****

है दुनिया में कितनी रवानी न पूछो

महकती है कितनी कहानी न पूछो

इसे चाँद के पार जाना था मिलने

कहाँ रह गई ज़िंदगानी न पूछो

रहा दर बदर आशिक़ी का मैं मारा

गई बीत कैसे जवानी न पूछो

तेरे इश्क़ में मैंने गोता लगाया

मिली मुझको क्या क्या निशानी न पूछो

मुहब्बत की रस्में निभाते निभाते

रहा चश्म में कितना पानी न पूछो

कभी ग़म के बादल कभी सर्द आहें

पड़ीं कितनी बातें भुलानी न…

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Posted on January 19, 2019 at 4:07pm — 8 Comments

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At 3:25pm on March 6, 2019, Ahmed Maris said…

Good Day,

How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day

Thanks God bless

Stella.

 
 
 

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dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
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dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"आदरणीय मोहन बेगोवाल जी बहुत बहुत बधाई स्वीकार करें अच्छी प्रस्तुति"
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dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"बहुत खूब ग़ज़ल आदरणीय मुनीश तन्हा जी हार्दिक बधाई"
Saturday

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