For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

क़मर जौनपुरी
Share
 

क़मर जौनपुरी's Page

Latest Activity

Samar kabeer commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल -15 (हस्ती ही मिट गई है तेरे इस ग़ुलाम की )
"मतले का ऊला मिसरा दूसरे शैर का ऊला मिसरा तीसरे शैर का सानी मिसरा 5वें का ऊला,छटे का सानी मिसरा ।"
Saturday
Dayaram Methani commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल -15 (हस्ती ही मिट गई है तेरे इस ग़ुलाम की )
"आदरणीय कमर जौनपुरी जी बहुत अच्छी गज़ल हुई है। ये शेर तो लाजवाब है --- अब ज्ञान बाँटने का है ठेका उन्हें मिलाजो खा रहे हैं मुफ़्त में बिल्कुल हराम की   सुंदर सृजन हेतु बधाई स्वीकार करें।"
Friday
क़मर जौनपुरी commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल -15 (हस्ती ही मिट गई है तेरे इस ग़ुलाम की )
"बहुत बहुत शुक्रिया मोहतरम जनाब समर कबीर साहब और जनाब राज़ साहब हौसला आफ़ज़ाई के लिए। उस्तादे मोहतरम थोड़ा इशारा भी कर देते की शिल्प कहाँ कमज़ोर है तो आइंदा ख़्याल रखना आसान होता। "
Friday
Samar kabeer commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल -15 (हस्ती ही मिट गई है तेरे इस ग़ुलाम की )
"जनाब क़मर जौनपुरी साहिब आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । शिल्प पर थोड़ा ध्यान देने की आवश्यकता है ।"
Friday
राज़ नवादवी commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल -15 (हस्ती ही मिट गई है तेरे इस ग़ुलाम की )
"अदार्नीय क़मर जौनपुरी साहब, सुन्दर ग़ज़ल की प्रस्तुति पे दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें. सादर "
Friday
क़मर जौनपुरी commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ७९
"बहुत ही सुंदर ग़ज़ल जनाब राज़ साहब। मुबारकबाद।"
Friday
क़मर जौनपुरी commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल -15 (हस्ती ही मिट गई है तेरे इस ग़ुलाम की )
"बहुत बहुत शुक्रिया मोहतरम तेजवीर सिंह जी हौसला आफ़ज़ाई के लिये।"
Friday
TEJ VEER SINGH commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल -15 (हस्ती ही मिट गई है तेरे इस ग़ुलाम की )
"हार्दिक बधाई आदरणीय क़मर जौनपुरी जी।बेहतरीन गज़ल। अब ज्ञान बाँटने का है ठेका उन्हें मिलाजो खा रहे हैं मुफ़्त में बिल्कुल हराम की/५"
Friday
क़मर जौनपुरी commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल -14( खुदा की सारी रहमत इश्क के आँचल में रहती है)
"मोहतरम जनाब समर कबीर साहब, जनाब तेजबीर साहब, जनाब श्याम नारायण वर्मा साहब और जनाब राहुल डांगी साहब। बहुत बहुत शुक्रिया व आदाब सभी मोहतरम का हौसला आफ़ज़ाई के लिए।"
Thursday
क़मर जौनपुरी commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल इस्लाह के लिए
"अच्छी ग़ज़ल हुई है जनाब मनोज कुमार एहसास जी। मुबारकबाद कबूल करें। बहर आपने अलग लिख रखी है। इसकी बहर है 2122 2122 212"
Thursday
क़मर जौनपुरी posted a blog post

गज़ल -15 (हस्ती ही मिट गई है तेरे इस ग़ुलाम की )

221-2121-1221-212धज्जी उड़ी हुई है सभी इन्तज़ाम कीक़ानून की सिफ़त है बची सिर्फ नाम की//१तुम थे हवा हवाई बचा के नज़र गएमेरी तरफ़ से कब थी मनाही सलाम की।//२दिल में जगा के टीस चले मुस्कुरा के तुमअब दिल में धक लगी है तुम्हारे पयाम की//३बौरा के जब बसन्ती हवा झूमती चलेकोयल सुनाए कूक तुम्हारे कलाम की//४अब ज्ञान बाँटने का है ठेका उन्हें मिलाजो खा रहे हैं मुफ़्त में बिल्कुल हराम की/५इक शाम जो थी गुज़री तुम्हारे दयार मेंहर शाम याद आती है उस प्यारी शाम की//६तेरा करम हुआ जो मुहब्बत की बज़्म मेंहस्ती ही मिट गई है…See More
Thursday
Rahul Dangi commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल -14( खुदा की सारी रहमत इश्क के आँचल में रहती है)
"बहुत सुन्दर "
Wednesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल -12( जब मुल्क़ में नफ़रत का ये बाजार नहीं था)
"आ. भाई कमर जी, अच्छी गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
Wednesday
Samar kabeer commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल -14( खुदा की सारी रहमत इश्क के आँचल में रहती है)
"जनाब क़मर जौनपुरी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।"
Wednesday
TEJ VEER SINGH commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल -12( जब मुल्क़ में नफ़रत का ये बाजार नहीं था)
"हार्दिक बधाई आदरणीय क़मर जौनपुरी जी।बेहतरीन गज़ल। मिट जाएं सभी जंग में हिन्दू व मुसलमाँऐसा तो मेरे हिन्द का त्यौहार नहीं था//४"
Wednesday
TEJ VEER SINGH commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल -13( फिर भी नादान कलेजे में ज़हर रखता है)
"हार्दिक बधाई आदरणीय क़मर जौनपुरी जी।बेहतरीन गज़ल। पहले शैतान से डरने की ख़बर आती थीआज इंसान ही इंसान से डर रखता है//५"
Wednesday

Profile Information

Gender
Male
City State
Jhumri Tilaiya
Native Place
Jaunpur
Profession
Hindi Teacher
About me
Myself Hindi teacher since 21 years. Trying to compose kavita and gazal

क़मर जौनपुरी's Blog

गज़ल -15 (हस्ती ही मिट गई है तेरे इस ग़ुलाम की )

221-2121-1221-212



धज्जी उड़ी हुई है सभी इन्तज़ाम की

क़ानून की सिफ़त है बची सिर्फ नाम की//१

तुम थे हवा हवाई बचा के नज़र गए

मेरी तरफ़ से कब थी मनाही सलाम की।//२

दिल में जगा के टीस चले मुस्कुरा के तुम

अब दिल में धक लगी है तुम्हारे पयाम की//३

बौरा के जब बसन्ती हवा झूमती चले

कोयल सुनाए कूक तुम्हारे कलाम की//४

अब ज्ञान बाँटने का है ठेका उन्हें मिला

जो खा रहे हैं मुफ़्त में बिल्कुल हराम की/५

इक शाम जो…

Continue

Posted on December 6, 2018 at 10:31pm — 7 Comments

गज़ल -14( खुदा की सारी रहमत इश्क के आँचल में रहती है)

1222-1222-1222-1222



अगर दिल को अदब औ शायरी से प्यार हो जाए

तुम्हें भी इश्क की खुशबू का कुछ दीदार हो जाए //१

मचलते दिल की धड़कन में चुभे जब इश्क का कांटा ।

ख़ुदा से रूह का रिश्ता तभी बेदार हो जाये//२

खुदा की सारी रहमत इश्क़ के आँचल में रहती है

छुपा लो सर को आँचल में हसीं संसार हो जाए//३

फ़ना हो जाए दीवाना जुनूने इश्क़ की ख़ातिर

खुशी से चूमे सूली को ख़ुदा का यार हो जाए//४

ये दिल बेजान वीना की तरह खामोश रहता…

Continue

Posted on December 5, 2018 at 12:23am — 7 Comments

गज़ल -13( फिर भी नादान कलेजे में ज़हर रखता है)

2122 1122 1122 22/112

छोड़ जाएगा यहीं सब ये ख़बर रखता है

फिर भी दौलत पे वो मर मर के नज़र रखता है//१

ज़िन्दगी प्यार के अमरित से ही होती है रवां

फिर भी नादान कलेजे में ज़हर रखता है //२

कितना मज़बूर है वो रोड पे भूखा बच्चा

एक रोटी के लिए कदमों में सर रखता है//३

आदमी कितना अकेला है भरी दुनिया में

कहने को भीड़ भरे शह्र में घर रखता है//४

पहले शैतान से डरने की ख़बर आती थी

आज इंसान ही इंसान से डर रखता…

Continue

Posted on December 2, 2018 at 8:17am — 7 Comments

गज़ल -12( जब मुल्क़ में नफ़रत का ये बाजार नहीं था)

221--1221--1221--122

जब मुल्क़ में नफऱत का ये बाज़ार नहीं था

हर शख़्स लहू पीने को तैयार नहीं था //१

अब बाढ़ सी आई है शबे ग़म की नदी में

जब तुम न थे दिल में तो ये बेज़ार नहीं था//२

जो देश की सरहद पे सदा ख़ून बहाए

क्या देेेश की मिट्टी से उन्हें प्यार नहीं था//३

मिट जाएं सभी जंग में हिन्दू व मुसलमाँ

ऐसा तो मेरे हिन्द का त्यौहार नहीं था//४

जब मुल्क़ परेशां था फिरंगी के सितम से

मिल जुुल के लड़े मुल्क ये लाचार नहीं…

Continue

Posted on December 2, 2018 at 7:30am — 5 Comments

Comment Wall

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

  • No comments yet!
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अजय गुप्ता commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल इस्लाह के लिए
"भाई मनोज जी, सबसे पहले तो अच्छी ग़ज़ल और अलग अंदाज़ अशार के लिए बधाई. अब आपकी ग़ज़ल पर आते है. ///वेदना…"
2 hours ago
Muzammil shah is now a member of Open Books Online
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on TEJ VEER SINGH's blog post कुंठा - लघुकथा -
"आ. भाई तेजवीर जी, बेहतरीन कथा हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
2 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post कुंठा - लघुकथा -
"हार्दिक आभार आदरणीय राज नवादवी जी।"
4 hours ago
PHOOL SINGH posted a blog post

जीवन संगिनी

हार हार का टूट चुका जबतुमसे ही आश बाँधी हैमैं नहीं तो तुम सहीसमर्थ जीवन की ठानी है|| मजबूर नहीं…See More
4 hours ago
Samar kabeer commented on Samar kabeer's blog post "बहुत दिनों से है बाक़ी ये काम करता चलूँ"
"जनाब सुरेन्द्र इंसान जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिए बहुत बहुत शुक्रिया ।"
5 hours ago
PHOOL SINGH updated their profile
5 hours ago
surender insan commented on Samar kabeer's blog post "बहुत दिनों से है बाक़ी ये काम करता चलूँ"
"मोहतरम समर साहब आदाब।वाह जी वाह बेहतरीन ग़ज़ल जी। मतले से मकते तक हर शेर लाजवाब।बहुत बहुत दिली…"
7 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

रंगहीन ख़ुतूत ...

रंगहीन ख़ुतूत ...तन्हाई रात की दहलीज़ पर देर तक रुकी रही चाँद दस्तक देता रहा मन उलझा रहा किसका दामन…See More
7 hours ago
राज़ नवादवी commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post अख़बारों की बातें छोड़ो कोई ग़ज़ल कहो (ग़ज़ल)
"आदरणीय धर्मेंद्र कुमार जी, आदाब, सुंदर गजल हुयी है, हार्दिक बधाई. सादर. "
8 hours ago
राज़ नवादवी commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"हार्दिक बधाई आदरणीय नवीन मणि जी. सुन्दर गज़ल. सादर. "
8 hours ago
राज़ नवादवी commented on TEJ VEER SINGH's blog post कुंठा - लघुकथा -
"आदरणीय तेज वीर सिंह साहब, बड़े घटनाक्रम वाली एक लघु कथा. बाल एवं अपराध मनोविज्ञान को सफलता पूर्वक…"
8 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service